Updated on 13/07/23 by Mananjay MahatoShare on WhatsApp

 

योजना आयोग ( Planning Commission )

JPSC MAINS NOTES,PAPER 4,

योजना आयोग ( Planning Commission )

दर्जा ( Status ) 

  • योजना आयोग की स्थापना वर्ष 1946 में के.सी. नियोगी की अध्यक्षता में गठित एडवाइज़री प्लानिंग बोर्ड की अनुशंसा पर भारत सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा मार्च , 1950 में की गई थी । 
  • इस प्रकार , योजना आयोग न ही संवैधानिक निकाय है और न ही विधायी । दूसरे शब्दों में , इस आयोग की स्थापना न तो संविधान के अधीन हुई है और न ही किसी अधिनियम के माध्यम से । 
  • भारत में योजना आयोग सामाजिक और आर्थिक विकास के नियोजन का सर्वोच्च निकाय है । 

योजना आयोग केकार्य और भूमिका ( Functions and Role )

  • दिनांक 15 मार्च , 1950 के प्रस्ताव द्वारा योजना आयोग को निम्नलिखित कार्य सौंपे गए थे
    • 1. देश की भौतिक पूँजी और मानव संसाधनों का आकलन कर उनमें वृद्धि की संभावनाएँ तलाशना । 
    • 2 . देश के संसाधनों को सर्वाधिक प्रभावी और संतुलित ढंग से उपयोग में लाने संबंधी योजना बनाना । 
    • 3 . योजनाओं के कार्यान्वयन की प्राथमिकताओं और उनके चरणों का निर्धारण करना । 
    • 4 . आर्थिक विकास में बाधक तत्वों का उल्लेख करना । 
    • 5. प्रत्येक चरण में योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित तंत्र की प्रकृति का निर्धारण करना । 
    • 6 . योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की समय – समय पर समीक्षा तथा आवश्यक समायोजनों की अनुशंसा करना । 
    • 7. आयोग के कर्तव्यों के निर्वहन को सुगम बनाने या केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा किसी विषय पर मांगी गई सलाह से संबंधित समुचित अनुशंसा करना । 

कार्य विभाजन नियमावली के माध्यम से योजना आयोग के ( उपर्युक्त के अतिरिक्त ) निम्नलिखित विषय भी सौंपे गए हैं 

1. परिप्रेक्ष्य नियोजन ( Perspective Planning ) – ( भविष्य को ध्यान में रखकर योजना तैयार करना ) । 

2. पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम । 

3. राष्ट्रीय विकास में जन सहयोग । 

4. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र 

5. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड मैनपावर रिसर्च |

  • यह ध्यान देने योग्य है कि योजना आयोग एक स्टॉफ़ एजेंसी मात्र है । एक सलाहदाता निकाय जिसकी कोई कार्यकारी जिम्मेदारियाँ नहीं हैं । 
  • यह आयोग निर्णय लेने और उन्हें कार्यान्वित करने के लिए जिम्मेदार नहीं है । यह जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की है । 

योजना आयोग की संरचना ( Composition ) 

योजना आयोग की संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित तथ्यों पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है 

1. आयोग का अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है । 

  • आयोग की बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है । 

2 . आयोग में उपाध्यक्ष का पद भी है । 

  • उपाध्यक्ष ही आयोग का पूर्णकालिक प्रधान होता है । 
  • उपाध्यक्ष ही पंचवर्षीय योजनाओं के प्रारूप को तैयार करने तथा उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखने के लिए जिम्मेदार है । 
  • उपाध्यक्ष की नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निर्धारित समय के लिए होती है । 
  • उसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है । 
  • यद्यपि वह कैबिनेट का सदस्य नहीं है , फिर भी कैबिनेट की सभी बैठकों में उसे बुलाया जाता है ( किंतु उसे मत का अधिकार प्राप्त नहीं होता ) । 

3. कुछ केंद्रीय मंत्रियों को आयोग के अंशकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है ।वित्त मंत्री और योजना मंत्री इस आयोग के पदेन सदस्य होते हैं । 

4. आयोग में 4-7 की संख्या में पूर्णकालिक विशेषज्ञ सदस्य होते हैं । आयोग के पूर्णकालिक सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ है । 

5. आयोग में एक सदस्य सचिव भी होता है , जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठ सदस्य होता है । 

  • आयोग में राज्य सरकारों का प्रतिनिधत्व नहीं है । 

आंतरिक संगठन ( Internal Organisation ) 

योजना आयोग पूर्णतः केंद्रीय स्तर पर गठित निकाय है ।

योजना आयोग के निम्नलिखित तीन अंग हैं 

  1. तकनीकी प्रभाग 
  2. हाउसकीपिंग शाखाएँ 
  3. कार्यक्रम परामर्शदाता ( प्रोग्राम एडवाइजर )

 

नीति आयोग: 

  • योजना आयोग को 1 जनवरी, 2015 को एक नए संस्थान नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया , जिसमें ‘सहकारी संघवाद’ की भावना को प्रतिध्वनित करते हुए अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार की परिकल्पना की परिकल्पना के लिये ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया गया था।

इसके दो हब हैं।

  • टीम इंडिया हब– राज्यों और केंद्र के बीच इंटरफेस का काम करता है।
  • ज्ञान और नवोन्मेष हब– नीति आयोग के थिंक-टैंक की भाँति कार्य करता है।

नीति आयोग की संरचना : 

  • नीति आयोग का अध्यक्ष: प्रधानमंत्री
  • नीति आयोग का उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
  • नीति आयोग का संचालन परिषद: सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल।
  • क्षेत्रीय परिषद: विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों को संबोधित करने के लिये प्रधानमंत्री या उसके द्वारा नामित व्यक्ति मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों की बैठक की अध्यक्षता करता है।
  • तदर्थ सदस्यता: अग्रणी अनुसंधान संस्थानों से बारी-बारी से 2 पदेन सदस्य।
  • पदेन सदस्यता: प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिपरिषद के अधिकतम चार सदस्य।
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): भारत सरकार का सचिव जिसे प्रधानमंत्री द्वारा एक निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है।
  • विशेष आमंत्रित: प्रधानमंत्री द्वारा नामित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ।

नीति आयोग का उद्देश्य:

  • राज्यों के साथ सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना ।
  • ग्राम स्तर पर योजनाएँ बनाने के लिये तंत्र विकसित करना और सरकार के उच्च स्तरों पर इन्हें उत्तरोत्तर एकत्रित करना।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को आर्थिक रणनीति और नीति में शामिल ।
  • समाज के उन वर्गों पर विशेष ध्यान देना जिन्हें आर्थिक प्रगति से पर्याप्त रूप से लाभ न मिलने का जोखिम हो सकता है।
  • प्रमुख हितधारकों और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समान विचारधारा वाले थिंक टैंकों के साथ-साथ शैक्षिक और नीति अनुसंधान संस्थानों के बीच सलाह प्रदान करना एवं भागीदारी को प्रोत्साहित करना
  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, चिकित्सकों और अन्य भागीदारों के एक सहयोगी समुदाय के माध्यम से ज्ञान, नवाचार और उद्यमशीलता सहायता प्रणाली की स्थापना करना।
  • विकास एजेंडा के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के लिये अंतर-क्षेत्रीय और अंतर-विभागीय मुद्दों के समाधान हेतु मंच प्रदान करना।
  • अत्याधुनिक संसाधन केंद्र बनाए रखने, सतत् और न्यायसंगत विकास में सुशासन और सर्वोत्तम प्रथाओं पर अनुसंधान का संग्रह होने के साथ-साथ हितधारकों के प्रसार में मदद करना।

 

नीति आयोग 

योजना आयोग 

यह एक सलाहकार थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है। 

यह गैर-संवैधानिक निकाय के रूप में कार्य करता था। 

इसमें व्यापक विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते है। 

इसमें सीमित विशेषज्ञता थी। 

यह सहकारी संघवाद की भावना से कार्य करता है क्योंकि राज्य समान भागीदार हैं। 

राज्यों ने वार्षिक योजना बैठकों में दर्शकों के रूप में भाग लिया। 

प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त सचिवों को CEO के रूप में जाना जाता है। 

सचिवों को सामान्य प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त किया गया था। 

यह योजना के ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण पर केंद्रित है। 

इसने ‘टॉप-डाउन’ दृष्टिकोण का अनुसरण किया। 

इसके पास नीतियांँ लागू करने का अधिकार नहीं है। 

राज्यों पर नीतियों को लागू किया और अनुमोदित परियोजनाओं के साथ धन का आवंटन किया। 

इसके पास निधि आवंटित करने का अधिकार नहीं है, जो वित्त मंत्री में निहित है। 

इसे मंत्रालयों और राज्य सरकारों को निधि आवंटित करने का अधिकार था। 

 

 

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