लाल चेर के नाम से प्रसिद्ध वह चेर शासक कौन था, जिसने कण्णगी (पत्तिनी) के मंदिर का निर्माण कराया था ? [SSC 2002]
- एलारा
- कारिकाल
- शेनगुट्टवन
- नेदुन जेरल आदन
तमिल भाषा के ‘शिलप्पादिकारम्’ और ‘मणिमेकलई’ नामक गौरवग्रंथ किससे संबंधित है ? [SSC 2002]
- जैन धर्म
- बौद्ध धर्म
- हिन्दू धर्म
- ईसाई धर्म
तमिल का गौरवग्रंथ ‘जीवक चिन्तामणि’ किससे संबंधित है ?
- जैन धर्म
- बौद्ध धर्म
- हिन्दू धर्म
- ईसाई धर्म
निम्न में कौन संगमयुगीन व्याकरण रचना सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचना मानी गयी है ? [RRB ASM/GG 2005]
- एतुतगोई
- पादकिल्कणेक्कू
- तोलकाप्पियम्
- इनमें से कोई नहीं
निम्नलिखित राजवंशों में किसका उल्लेख संगम साहित्य में नहीं हुआ है ? [BPSC 1996]
- कदम्ब
- चेर
- चोल
- पाण्ड्य
किस संगमकालीन राज्य के संरक्षण में तीन संगमों का आयोजन किया गया?
- पल्लव
- चेर
- चोल
- पाण्ड्य
मुजरिस किस राज्य का प्रमुख बंदरगाह था ?
- पल्लव
- चेर
- चोल
- पाण्ड्य
संगम युग में उरैयूर किसलिए विख्यात था ? [BPSC 1994]
- मसालों के व्यापार का महत्वपूर्ण केन्द्र
- कपास के व्यापार का महत्वपूर्ण केन्द्र
- विदेशी व्यापार का महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र
- आतरिक व्यापार का महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र
‘तोलक्कप्पियम्’ ग्रंथ संबंधित है [UPPCS 1997]
- प्रशासन से
- विधि से
- व्याकरण और काव्य से
- उपर्युक्त सभी से
धार्मिक कविताओं का संकलन ‘कुरल’ किस भाषा में है ? [MPPSC 1997]
- ग्रीक
- तमिल
- तेलुगु
- पालि
किसने उल्लेख किया है कि ‘नंदों ने अपना कोष गंगा की धारा में छिपा रखा था’ ?
- ममूलनार
- तोल्लकप्पियर
- तिरुवल्लुवर
- नक्कीरर
चोल शासकों का राजकीय चिह्न ———–था।
- ‘बाघ’
- धनुष
- मछली
- None
चेर शासकों का राजकीय चिह्न ———–था।
- ‘बाघ’
- धनुष
- मछली
- None
पाण्ड्य शासकों का राजकीय चिह्न ———–था।
- ‘बाघ’
- धनुष
- मछली
- None
तोल्लकप्पियम पुस्तक के लेखक कौन है ?
- तोलकप्पियर
- इलांगो आडिगल
- सीतलै शतनार
- तिरुत्तक्कदेवर
तिरुक्कुरल पुस्तक के लेखक कौन है ?
- तोलकप्पियर
- तिरुवल्लुवर
- सीतलै शतनार
- तिरुत्तक्कदेवर
अहनानूरू पुस्तक के लेखक कौन है ?
- तोलकप्पियर
- तिरुवल्लुवर
- रुद्रसर्मन
- तिरुत्तक्कदेवर
मरुगढ़प्पादय पुस्तक के लेखक कौन है ?
- नक्कीरर
- तिरुवल्लुवर
- रुद्रसर्मन
- तिरुत्तक्कदेवर
शिलप्पादिकारम् पुस्तक के लेखक कौन है ?
- नक्कीरर
- तिरुवल्लुवर
- रुद्रसर्मन
- इलंगोआदिगल
मणिमेखले पुस्तक के लेखक कौन है ?
- नक्कीरर
- सीतलैसत्रनार
- रुद्रसर्मन
- इलंगोआदिगल
जीवकचिंतामणि पुस्तक के लेखक कौन है ?
- नक्कीरर
- सीतलैसत्रनार
- तिरुत्तक्कदेवर
- इलंगोआदिगल
संगम कालीन क्षेत्र कुरिंजी का अर्थ क्या है ?
- पहाड़ी
- मरुभूमि / निर्जन स्थल
- जंगल
- कृषि भूमि
संगम कालीन क्षेत्र पालई का अर्थ क्या है ?
- पहाड़ी
- मरुभूमि / निर्जन स्थल
- जंगल
- कृषि भूमि
संगम कालीन क्षेत्र मुल्लाई का अर्थ क्या है ?
- पहाड़ी
- मरुभूमि / निर्जन स्थल
- जंगल
- कृषि भूमि
संगम कालीन क्षेत्र मरुदम का अर्थ क्या है ?
- पहाड़ी
- मरुभूमि / निर्जन स्थल
- जंगल
- कृषि भूमि
संगम कालीन क्षेत्र नेउल का अर्थ क्या है ?
- तटीय प्रदेश
- मरुभूमि / निर्जन स्थल
- जंगल
- कृषि भूमि
प्रथम संगम की अध्यक्षता किसने की थी ?
- अगस्तस्य
- अगस्त एवं तोल्लकाप्पियर
- नक्कीर
- तोल्लकाप्पियर
द्वितीय संगम की अध्यक्षता किसने की थी ?
- अगस्तस्य
- अगस्त एवं तोल्लकाप्पियर
- नक्कीर
- तोल्लकाप्पियर
तृतीय संगम की अध्यक्षता किसने की थी ?
- अगस्तस्य
- अगस्त एवं तोल्लकाप्पियर
- नक्कीर
- तोल्लकाप्पियर
प्रथम संगम सम्मेलन का आयोजन कहां हुआ था ?
- मदुरै
- कपाटपुरम्
- उरैयूर
- वेल्लारू
द्वितीय संगम सम्मेलन का आयोजन कहां हुआ था ?
- मदुरै
- कपाटपुरम्
- उरैयूर
- वेल्लारू
तृतीय संगम सम्मेलन का आयोजन कहां हुआ था ?
- मदुरै
- कपाटपुरम्
- उरैयूर
- वेल्लारू
कपाटपुरम या अलवै में संपन्न द्वितीय संगम का एकमात्र शेष ग्रंथ कौन-सा है ?
- तोल्लकाप्पियम्
- इतुतगोई
- पतुपाट्ट
- पदिनेकिल्कणक्कू
किस ऋषि के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने दक्षिण भारत का आर्यकरण किया, उन्हें आर्य बनाया ? [JPSC, 2013]
- विश्वामित्र
- अगस्तस्य
- वशिष्ठ
- सांभर
संगमकालीन साहित्य में ‘कोन’, ‘को’ एवं ‘मन्नन’ किसके लिए प्रयुक्त होते थे? [RAS/RTS 2010]
- प्रधानमंत्री
- राजस्व मंत्री
- सेनाधिकारी
- राजा
निम्नलिखित में से कौन से संगमकालीन पत्तन पश्चिमी तट पर स्थित थे ? नीचे दिये कूट से सही उत्तर चुनिए : [UPPCS (Pre) 2012] ——— 1 कोरकै 2. पुहर 3. तोण्डी 4. मशि
- केवल 1 एवं 2
- केवल 2 एवं 3
- केवल 3 एवं 4
- केवल 4 एवं 1
महाकाव्य ‘शिलप्पदिकारम’ किससे संबंधित है? [CDS 2016]
- राम की कहानी
- कथानक में जैन तत्व
- श्रीलंका के बोद्धो की सस्कृति
- शांति उपासना की पूजा पद्धति
संगम काल किस कालखंड को कहा जाता है?
- 600 ई.पू. से 300 ई.पू.
- 300 ई.पू. से 300 ई.
- 300 ई. से 600 ई.
- 600 ई.पू. से 600 ई.
व्याख्या:
- 300 ई.पू. से 300 ई. संगम साहित्य की रचना का अनुमानित काल है।
- 600 ई.पू. से 300 ई.पू. मौर्य काल से पहले का समय था।
- 300 ई. से 600 ई. गुप्त काल और उसके बाद का समय है।
- 600 ई.पू. से 600 ई. एक बहुत विस्तृत कालखंड है।
संगम साहित्य की रचना किस भाषा में हुई थी?
- संस्कृत
- पालि
- तमिल
- प्राकृत
व्याख्या:
- तमिल संगम साहित्य की भाषा थी, यह दक्षिण भारत की प्राचीन भाषा है।
- संस्कृत उत्तर भारत की प्रमुख भाषा थी।
- पालि और प्राकृत बौद्ध और जैन ग्रंथों की भाषाएँ थीं।
तीन संगमों का आयोजन कहाँ हुआ माना जाता है?
- चोल नगर
- चेर नगर
- पांड्य नगर (मदुरै)
- पल्लव नगर
व्याख्या:
- पांड्य नगर (मदुरै) को तीन संगमों (सभाओं) के आयोजन का स्थान माना जाता है।
- चोल और चेर संगम काल के अन्य दो प्रमुख राजवंश थे।
- पल्लव राजवंश संगम काल के बाद का था।
संगम साहित्य को मुख्यतः कितने भागों में बाँटा गया है?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
व्याख्या:
- तीन भाग – इन्हें तिनकडयम (तीन संग्रह) कहा जाता है: एत्तुत्तोगाई, पत्तुप्पट्टु और पदिनेंकिलकनक्कु।
- दो, चार या पाँच भागों में विभाजन गलत है।
संगम युग के प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्र ‘मुज़िरिस’ का संबंध किस आधुनिक राज्य से है?
- तमिलनाडु
- केरल
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
व्याख्या:
- केरल में कोडुंगल्लूर को प्राचीन मुज़िरिस माना जाता है, जो रोमनों के साथ व्यापार का प्रमुख केंद्र था।
- तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अन्य व्यापारिक केंद्र थे।
किस संगम ग्रंथ को ‘तमिल वेद’ की उपाधि दी गई है?
- पतिनेंकिलकनक्कु
- तिरukkural
- सिलप्पादिकारम
- मणिमेखलाई
व्याख्या:
- तिरukkural जिसे कुरल भी कहते हैं, को तमिल साहित्य में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और इसे ‘तमिल वेद’ कहा जाता है।
- सिलप्पादिकारम और मणिमेखलाई महाकाव्य हैं। पतिनेंकिलकनक्कु 18 छोटे works का संग्रह है।
संगम काल में ‘वेल्लाल’ शब्द किसे दर्शाता था?
- योद्धाओं को
- व्यापारियों को
- जमींदारों/किसानों को
- शिल्पकारों को
व्याख्या:
- वेल्लाल संगम कालीन समाज में उच्च श्रेणी के जमींदार और धनी किसान होते थे।
- योद्धा, व्यापारी और शिल्पकार अलग-अलग वर्ग के थे।
संगम साहित्य में वर्णित ‘तिनई’ ( landscape ) की संख्या कितनी है?
- तीन
- चार
- पाँच
- छह
व्याख्या:
- पाँच तिनई हैं: कुरिंजी (पहाड़ी), मुल्लई (वन), मरुथम (कृषि), नेय्थल (तटीय) और पालई (बंजर)।
- प्रत्येक तिनई का अपना एक देवता, फूल और जीवन शैली होती थी।
किस रोमन सम्राट के सिक्के संगम काल में दक्षिण भारत में पाए गए हैं?
- जूलियस सीज़र
- अगस्तस
- टाइबेरियस
- नेरो
व्याख्या:
- टाइबेरियस (14-37 ई.) के सिक्के दक्षिण भारत में सबसे अधिक संख्या में पाए गए हैं, जो रोमन व्यापार की गहनता को दर्शाते हैं।
- अन्य सम्राओं के सिक्के भी मिले हैं लेकिन टाइबेरियस के प्रमुख हैं।
संगम काल में ‘कडैसी’ क्या थी?
- एक प्रकार की नाव
- मुद्रा की सबसे छोटी इकाई
- एक युद्ध अस्त्र
- एक प्रकार का वस्त्र
व्याख्या:
- कडैसी तांबे का सिक्का होता था और यह मुद्रा की सबसे छोटी इकाई थी।
- कलन्जु (सोना), पणं (चाँदी) और कडैसी (ताँबा) मुख्य मुद्रा इकाइयाँ थीं।
संगम युग के तीन प्रमुख राजवंशों (मुवेन्दर) का सही संयोजन कौन सा है?
- चोल, पल्लव, पांड्य
- चेर, चोल, सातवाहन
- चेर, चोल, पांड्य
- पांड्य, पल्लव, सातवाहन
व्याख्या:
- चेर, चोल, पांड्य संगम युग के तीन प्रमुख और प्रतिद्वंद्वी तमिल राजवंश थे, जिन्हें ‘मुवेन्दर’ कहा जाता था।
- पल्लव और सातवाहन बाद के काल के थे या समकालीन थे लेकिन ‘मुवेन्दर’ में शामिल नहीं थे।
किस संगम ग्रंथ को तमिल भाषा का सबसे प्राचीन व्याकरण ग्रंथ माना जाता है?
- तोलकाप्पियम
- तोलकाप्पियम
- अहनानूरु
- पुरानानूरु
व्याख्या:
- तोलकाप्पियम तमिल भाषा का सबसे प्राचीन व्याकरण ग्रंथ है, जिसकी रचना तोलकाप्पियर ने की थी।
- अहनानूरु और पुरानानूरु काव्य संग्रह हैं।
संगम काल में ‘अमनम’ क्या था?
- एक प्रकार का नृत्य
- समुद्री व्यापार से प्राप्त राजस्व
- एक धार्मिक अनुष्ठान
- राज्य की executive council
व्याख्या:
- अमनम समुद्री व्यापार पर लगने वाला कर या राजस्व था जो राज्य की आय का एक प्रमुख स्रोत था।
- यह शब्द व्यापारिक गतिविधियों के विकसित होने का संकेत देता है।
संगम साहित्य में वर्णित ‘मदुरैक्कंजी’ किसके बारे में है?
- चोल राजा करिकाल के बारे में
- एक अनाम पांड्य राजा की उदारता के बारे में
- मदुरै शहर की स्थापना के बारे में
- चेर राजा सेनगुट्टुवन के बारे में
व्याख्या:
- मदुरैक्कंजी पदिनेंकिलकनक्कु संग्रह का एक महत्वपूर्ण poem है जो एक अनाम पांड्य राजा की उदारता और दानशीलता का वर्णन करता है।
- यह एक प्रशस्ति काव्य (eulogy) है।
संगम काल में यप्पा (Yavana) शब्द किसके लिए प्रयोग किया जाता था?
- अरब व्यापारियों के लिए
- चीनी व्यापारियों के लिए
- यूनानियों/रोमनों के लिए
- पर्शियन व्यापारियों के लिए
व्याख्या:
- यप्पा (Yavana) शब्द मूल रूप से यूनानियों (Greeks) के लिए प्रयुक्त होता था, बाद में इसका विस्तार रोमनों और अन्य पश्चिमी व्यापारियों के लिए भी हो गया।
- वे मुख्यतः व्यापारी और भाड़े के सैनिक (mercenaries) थे।
किस चोल शासक का उल्लेख संगम साहित्य में मिलता है?
- राजराज चोल
- राजेंद्र चोल
- करिकाल चोल
- विजयालय चोल
व्याख्या:
- करिकाल चोल संगम युग का एक प्रसिद्ध और शक्तिशाली चोल शासक था, जिसका उल्लेख पट्टुप्पट्टु जैसे ग्रंथों में मिलता है।
- राजराज और राजेंद्र चोल मध्यकालीन चोल शासक थे।
संगम काल के दौरान दक्षिण भारत का प्रमुख निर्यात क्या था?
- रेशम
- हाथी दाँत
- मसाले (काली मिर्च आदि)
- चावल
व्याख्या:
- मसाले विशेष रूप से काली मिर्च, संगम काल में दक्षिण भारत से रोमन साम्राज्य को होने वाले प्रमुख निर्यात थे।
- मोती, हाथी दाँत, रत्न और मलमल भी निर्यात किए जाते थे।
संगम साहित्य में वर्णित ‘वड़ुवर’ कौन थे?
- ब्राह्मण पुजारी
- ज्योतिषी
- वैद्य
- शिक्षक
व्याख्या:
- वड़ुवर ज्योतिषी होते थे जो नक्षत्रों का अध्ययन कर भविष्यवाणियाँ करते थे।
- संगम समाज में उनका एक विशिष्ट स्थान था।
किस चेर राजा ने ‘पतितुप्पट्टु’ ग्रंथ में अपना उल्लेख करवाया है?
- उदियन चेरल
- सेनगुट्टुवन चेरल
- इमयवरम्बन
- नेडुम चेरल
व्याख्या:
- सेनगुट्टुवन चेरल (या सेनगुट्टुवन) एक प्रसिद्ध चेर शासक था, जिसके बारे में पतितुप्पट्टु के दूसरे गीत में वर्णन है।
- उसने उत्तर भारत की यात्रा की और कन्नौज से एक पत्थर लाकर कन्नगी (कोवलन की पत्नी) की मूर्ति बनवाई।
संगम कालीन समाज में ‘पणार’ या ‘पण’ वर्ग क्या था?
- व्यापारी वर्ग
- किसान वर्ग
- बार्ड और गायक वर्ग
- शिल्पकार वर्ग
व्याख्या:
- पणार या पण समाज का वह वर्ग था जो गाँव-गाँव घूमकर गीत गाकर और वाद्य बजाकर राजाओं और सामान्य जन की प्रशस्ति करता था।
- वे मनोरंजन और सूचना के वाहक भी थे।
संगम साहित्य के अनुसार, प्राचीन तमिलकम (तमिल भूमि) को कितने भागों में बाँटा गया था?
- तीन
- चार
- पाँच
- सात
व्याख्या:
- पाँच भागों में बाँटा गया था, जिन्हें ‘तिनई’ कहा जाता था। ये थे: कुरिंजी, मुल्लई, मरुथम, नेय्थल और पालई।
- प्रत्येक का अपना अलग भूगोल, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक लक्षण थे।
कुरल’ के रचयिता तिरुवल्लुवर किस संगम के दरबारी कवि माने जाते हैं?
- प्रथम संगम
- द्वितीय या तृतीय संगम
- किसी भी संगम के नहीं
- चौथे संगम के
व्याख्या:
- तिरुवल्लुवर को परंपरागत रूप से मदुरै के द्वितीय या तृतीय संगम का सदस्य माना जाता है।
- उनकी कालावधि को लेकर मतभेद हैं, लेकिन उनकी रचना ‘कुरल’ संगम साहित्य की अमूल्य निधि है।
संगम काल में ‘वेत्तुवर’ कौन थे?
- मछुआरे
- शिकारी
- कुम्हार
- बुनकर
व्याख्या:
- वेत्तुवर वनों (मुल्लई) में रहने वाले शिकारी और जंगल के उत्पाद एकत्र करने वाले लोग थे।
- वे अपने युद्ध कौशल और शिकार के लिए जाने जाते थे।
संगम साहित्य में वर्णित ‘कडैसी’ के मूल्य के संदर्भ में ‘कलंजु’ क्या था?
- चाँदी का सिक्का
- सोने का सिक्का
- ताँबे का सिक्का
- लोहे का सिक्का
व्याख्या:
- कलंजु सोने का सिक्का या भार की एक इकाई थी। मुद्रा का मानकीकरण इस प्रकार था: 1 कलंजु (सोना) = 8 पणं (चाँदी) = 160 कडैसी (ताँबा)।
- यह व्यापार के विकसित होने का सूचक है।
