भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति कौन करता है?
- प्रधानमंत्री
- लोकसभा अध्यक्ष
- राष्ट्रपति
- उपराष्ट्रपति
व्याख्या:
- राष्ट्रपति भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत CAG की नियुक्ति करते हैं।
- प्रधानमंत्री सिफारिश दे सकते हैं लेकिन नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति का CAG की नियुक्ति में कोई भूमिका नहीं है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का कार्यकाल कितना होता है?
- 3 वर्ष
- 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- 5 वर्ष
- राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
व्याख्या:
- CAG का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है।
- 3 वर्ष और 5 वर्ष गलत हैं क्योंकि CAG का कार्यकाल निश्चित है।
- CAG को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है और उन्हें राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर नहीं रखा जाता।
निम्नलिखित में से किसके खातों का ऑडिट CAG द्वारा नहीं किया जाता है?
- भारत सरकार के विभाग
- राज्य सरकारों के विभाग
- निजी कंपनियाँ
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
व्याख्या:
- CAG केवल सरकारी और सार्वजनिक निधियों का ऑडिट करता है, निजी कंपनियों का नहीं।
- भारत सरकार, राज्य सरकारों के विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम CAG के दायरे में आते हैं।
- निजी कंपनियों का ऑडिट निजी ऑडिट फर्मों द्वारा किया जाता है।
CAG की रिपोर्ट किसे प्रस्तुत की जाती है?
- प्रधानमंत्री
- वित्त मंत्री
- राष्ट्रपति/राज्यपाल
- लोकसभा अध्यक्ष
व्याख्या:
- CAG की रिपोर्ट राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) और राज्यपाल (राज्यों के लिए) को प्रस्तुत की जाती है।
- राष्ट्रपति/राज्यपाल इन रिपोर्टों को संसद/विधानसभा में रखवाते हैं।
- प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट सीधे प्रस्तुत नहीं की जाती।
CAG के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- CAG संसद का सदस्य होता है
- CAG को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है
- CAG की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है
- CAG केवल केंद्र सरकार के खातों का ऑडिट करता है
व्याख्या:
- CAG को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 148(1) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- CAG संसद का सदस्य नहीं हो सकता।
- CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, प्रधानमंत्री द्वारा नहीं।
- CAG केंद्र, राज्यों और अन्य सार्वजनिक निकायों के खातों का ऑडिट करता है।
भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कौन करता है?
- प्रधानमंत्री
- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- राष्ट्रपति
- लोकसभा
व्याख्या:
- राष्ट्रपति भारत के संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत महान्यायवादी की नियुक्ति करते हैं।
- प्रधानमंत्री सिफारिश कर सकते हैं लेकिन नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा का नियुक्ति में कोई भूमिका नहीं है।
भारत के महान्यायवादी के लिए कौन सा योग्यता मानदंड सही है?
- उच्च न्यायालय का 10 वर्ष का न्यायाधीश होना
- सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता
- उच्च न्यायालय का 5 वर्ष का वकील होना
- संसद का सदस्य होना
व्याख्या:
- महान्यायवादी बनने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए।
- इसमें उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक वकालत या किसी उच्च न्यायालय में 10 वर्ष तक न्यायाधीश रहने का अनुभव शामिल है।
- संसद का सदस्य होना आवश्यक नहीं है।
महान्यायवादी के पद की अवधि क्या है?
- 3 वर्ष
- 5 वर्ष
- राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
- 6 वर्ष
व्याख्या:
- महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है।
- इसकी कोई निश्चित अवधि नहीं है।
- वह सरकार बदलने पर भी पद पर बना रह सकता है।
महान्यायवादी के संबंध में कौन सा कथन सही नहीं है?
- वह संसद की कार्यवाही में भाग ले सकता है
- उसे बोलने का अधिकार है लेकिन मतदान का नहीं
- वह केंद्र सरकार के против मुकदमे लड़ सकता है
- उसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान वेतन मिलता है
व्याख्या:
- महान्यायवादी केंद्र सरकार के против मुकदमे नहीं लड़ सकता क्योंकि वह सरकार का मुख्य विधि अधिकारी है।
- वह संसद की कार्यवाही में भाग ले सकता है लेकिन मतदान नहीं कर सकता।
- उसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान वेतन और भत्ते मिलते हैं।
महान्यायवादी के वेतन-भत्ते किससे निर्धारित होते हैं?
- संसद
- वित्त मंत्रालय
- प्रधानमंत्री कार्यालय
- राष्ट्रपति
व्याख्या:
- महान्यायवादी के वेतन-भत्ते राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
- संविधान के अनुच्छेद 76(3) के अनुसार, यह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होता है।
- संसद और वित्त मंत्रालय का इसमें प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती।
राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति कौन करता है?
- मुख्यमंत्री
- राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर
- राज्यपाल
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
व्याख्या:
- राज्यपाल भारत के संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति करता है।
- मुख्यमंत्री सिफारिश कर सकते हैं लेकिन नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का नियुक्ति में कोई भूमिका नहीं है।
राज्य के महाधिवक्ता के लिए क्या योग्यता आवश्यक है?
- उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होना
- विधानसभा का सदस्य होना
- उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता
- 10 वर्ष की विधिक अनुभव
व्याख्या:
- राज्य के महाधिवक्ता बनने के लिए उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए।
- इसमें उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक वकालत का अनुभव शामिल है।
- विधानसभा का सदस्य होना आवश्यक नहीं है।
राज्य के महाधिवक्ता का पद कब तक रहता है?
- 3 वर्ष
- 5 वर्ष
- राज्यपाल के प्रसादपर्यंत
- 6 वर्ष
व्याख्या:
- राज्य के महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है।
- इसकी कोई निश्चित अवधि नहीं है।
- वह सरकार बदलने पर भी पद पर बना रह सकता है।
राज्य के महाधिवक्ता के संबंध में कौन सा कथन सही है?
- वह विधानसभा में मतदान कर सकता है
- वह विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है
- वह राज्य सरकार के против मुकदमे लड़ सकता है
- वह उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बन सकता है
व्याख्या:
- राज्य के महाधिवक्ता को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है लेकिन मतदान का नहीं।
- वह राज्य सरकार के против मुकदमे नहीं लड़ सकता क्योंकि वह सरकार का मुख्य विधि अधिकारी है।
- वह उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नहीं बन सकता जब तक कि उसकी नियुक्ति न की जाए।
राज्य के महाधिवक्ता का वेतन किससे निर्धारित होता है?
- विधानसभा
- वित्त मंत्रालय
- मुख्यमंत्री
- राज्यपाल
व्याख्या:
- राज्य के महाधिवक्ता का वेतन राज्यपाल द्वारा निर्धारित किया जाता है।
- संविधान के अनुच्छेद 165(3) के अनुसार, यह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होता है।
- विधानसभा और वित्त मंत्रालय का इसमें प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती।
निम्नलिखित में से किस संवैधानिक पदाधिकारी को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है?
- महान्यायवादी
- राज्य का महाधिवक्ता
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
व्याख्या:
- CAG को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 148(1) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता राष्ट्रपति/राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अलग है।
किस संवैधानिक पदाधिकारी के पास संसद/विधानसभा में बोलने का अधिकार है लेकिन मतदान का नहीं?
- CAG
- महान्यायवादी और महाधिवक्ता
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
- राज्यपाल
व्याख्या:
- महान्यायवादी (केंद्र) और महाधिवक्ता (राज्य) के पास संसद/विधानसभा में बोलने का अधिकार है लेकिन मतदान का नहीं।
- CAG, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यपाल के पास यह अधिकार नहीं है।
- यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 88 और 177 में निहित है।
निम्नलिखित में से कौन सा पद “राष्ट्रपति/राज्यपाल के प्रसादपर्यंत” चलता है?
- CAG
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
- महान्यायवादी और महाधिवक्ता
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
व्याख्या:
- महान्यायवादी (केंद्र) और महाधिवक्ता (राज्य) राष्ट्रपति/राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
- CAG और मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल निश्चित होता है।
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद धारण करते हैं।
किस संवैधानिक पद के लिए “उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता” आवश्यक है?
- CAG
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
- महान्यायवादी और महाधिवक्ता
- राज्यपाल
व्याख्या:
- महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) और महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) के लिए उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता आवश्यक है।
- CAG और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के लिए यह योग्यता आवश्यक नहीं है।
- राज्यपाल के लिए कोई विशिष्ट योग्यता निर्धारित नहीं है।
निम्नलिखित में से कौन सा पदधारी सरकार का मुख्य विधि सलाहकार होता है?
- CAG
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
- महान्यायवादी और महाधिवक्ता
- सॉलिसिटर जनरल
व्याख्या:
- महान्यायवादी (केंद्र) और महाधिवक्ता (राज्य) सरकार के मुख्य विधि सलाहकार होते हैं।
- CAG और मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्य विधिक सलाह देना नहीं है।
- सॉलिसिटर जनरल महान्यायवादी के अधीन कार्य करता है।
भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद महान्यायवादी से संबंधित है?
- अनुच्छेद 74
- अनुच्छेद 148
- अनुच्छेद 76
- अनुच्छेद 165
व्याख्या:
- अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी से संबंधित है।
- अनुच्छेद 74 मंत्रिपरिषद से संबंधित है।
- अनुच्छेद 148 CAG से संबंधित है।
- अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता से संबंधित है।
भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य के महाधिवक्ता से संबंधित है?
- अनुच्छेद 76
- अनुच्छेद 148
- अनुच्छेद 163
- अनुच्छेद 165
व्याख्या:
- अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता से संबंधित है।
- अनुच्छेद 76 महान्यायवादी से संबंधित है।
- अनुच्छेद 148 CAG से संबंधित है।
- अनुच्छेद 163 राज्य की मंत्रिपरिषद से संबंधित है।
निम्नलिखित में से किसका उल्लेख भारत के संविधान में नहीं है?
- महान्यायवादी
- राज्य का महाधिवक्ता
- CAG
- सॉलिसिटर जनरल
व्याख्या:
- सॉलिसिटर जनरल का उल्लेख भारत के संविधान में नहीं है, यह एक statutory पद है।
- महान्यायवादी (अनुच्छेद 76), राज्य का महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) और CAG (अनुच्छेद 148) का उल्लेख संविधान में है।
किस संवैधानिक पदाधिकारी की रिपोर्ट Public Accounts Committee (PAC) द्वारा examined की जाती है?
- महान्यायवादी
- राज्य का महाधिवक्ता
- CAG
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
व्याख्या:
- CAG की रिपोर्ट Public Accounts Committee (PAC) द्वारा examined की जाती है।
- महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता की कोई रिपोर्ट PAC के पास नहीं जाती।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त की रिपोर्ट का examination अलग तरीके से होता है।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन CAG के बारे में सही है?
- वह सरकार का विधि सलाहकार है
- वह सरकारी खर्च को approve करता है
- वह सरकारी खर्च का ऑडिट करता है
- वह सरकारी नीतियाँ बनाता है
व्याख्या:
- CAG का मुख्य कार्य सरकारी खर्च का ऑडिट करना और उसकी रिपोर्ट देना है।
- वह सरकार का विधि सलाहकार नहीं है (यह महान्यायवादी का कार्य है)।
- वह सरकारी खर्च को approve नहीं करता और न ही नीतियाँ बनाता है।
महान्यायवादी के पद को किस देश के संविधान से लिया गया है?
- अमेरिका
- कनाडा
- ब्रिटेन
- आयरलैंड
व्याख्या:
- महान्यायवादी का पद ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है।
- अमेरिका में Attorney General का पद है लेकिन भारत का मॉडल ब्रिटिश है।
- कनाडा और आयरलैंड के मॉडल भी ब्रिटिश से प्रभावित हैं।
राज्य के महाधिवक्ता का वेतन किस कोष से दिया जाता है?
- भारत की संचित निधि
- राज्य की संचित निधि
- आकस्मिकता निधि
- विनियोग विधेयक
व्याख्या:
- राज्य के महाधिवक्ता का वेतन राज्य की संचित निधि से दिया जाता है।
- भारत की संचित निधि से केंद्रीय पदाधिकारियों का वेतन दिया जाता है।
- आकस्मिकता निधि आपात खर्चों के लिए होती है।
- विनियोग विधेयक through संसद में धन का विनियोग किया जाता है।
निम्नलिखित में से किसके पद पर रहते हुए व्यक्ति भारत के किसी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता?
- महान्यायवादी
- राज्य का महाधिवक्ता
- CAG
- सॉलिसिटर जनरल
व्याख्या:
- CAG पद पर रहते हुए भारत के किसी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता।
- महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं लेकिन सरकार के против नहीं।
- सॉलिसिटर जनरल भी निजी प्रैक्टिस कर सकता है with certain restrictions।
किस संवैधानिक पदाधिकारी को “भारत का Watchdog of the Public Purse” कहा जाता है?
- महान्यायवादी
- राज्य का महाधिवक्ता
- CAG
- वित्त मंत्री
व्याख्या:
- CAG को “भारत का Watchdog of the Public Purse” कहा जाता है क्योंकि वह सार्वजनिक धन के उपयोग पर नजर रखता है।
- महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता का कार्य विधिक सलाह देना है, धन की निगरानी करना नहीं।
- वित्त मंत्री सरकार का हिस्सा है, निगरानी करने वाला नहीं।
