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झारखण्ड राज्य की प्राचीनतम जनजाति है ?
- संथाल
- हो
- बिरजिया
- असुर
Explanation:
- असुर झारखंड की प्राचीनतम जनजाति है।
- असुर, बिरजिया, बिरहोर एवं खड़िया झारखंड की प्राचीनतम जनजातियाँ हैं।
- इनमें असुर सबसे प्राचीन जनजाति है।
- असुर जनजाति को सिंधु घाटी सभ्यता का प्रतिष्ठापक भी माना जाता है।
- इन्हें ‘पूर्वादेवा’ भी कहा जाता है।
- असुरी भाषा को मालेय भाषा भी कहा जाता है।
- अन्य प्राचीन जनजातियाँ:
- बिरजिया – सदान समुदाय की आदिम जनजाति
- बिरहोर – जंगल का आदमी
- खड़िया – प्रोटो-आस्ट्रेलायड
कांस्ययुगीन औजारों का प्रारंभकर्ता किस जनजाति को माना जाता है?
- संथाल
- हो
- बिरजिया
- असुर
Explanation:
- असुर जनजाति को कांस्य एवं लौह से निर्मित औजारों का प्रारंभकर्ता माना जाता है।
- नोट्स में स्पष्ट उल्लेख: “असुर व बिरजिया जनजातियों को कांस्य एवं लोहे से निर्मित औजारों का प्रारंभकर्ता माना जाता है”
- असुर जनजाति लोहा गलाने के कार्य में निपुण थी।
- इनका प्रमुख पेशा – लोहा गलाना एवं औजार बनाना।
- असुर जनजाति की विशेषताएँ:
- ये सिंधु घाटी सभ्यता के प्रतिष्ठापक माने जाते हैं।
- इनकी संस्कृति को ‘मय संस्कृति’ कहा जाता है।
- प्रमुख निवास – लातेहार (नेतरहाट), गुमला, लोहरदगा
नव पाषाण काल में कितने हस्त कुठार छोटानागपुर प्रदेश में पाए गए हैं?
- 12 हस्त कुठार
- 11 हस्त कुठार
- 8 हस्त कुठार
- 10 हस्त कुठार
Explanation:
- छोटानागपुर से नवपाषाण काल के 12 हस्त कुठार मिले हैं।
- हस्त कुठार (Hand Axe) – नवपाषाण काल का महत्वपूर्ण औजार।
- यह कृषि एवं अन्य कार्यों में प्रयुक्त होता था।
- नवपाषाण काल की विशेषताएँ:
- कृषि की शुरुआत हो चुकी थी।
- आग के उपयोग तथा कुम्भकारी का प्रारंभ हो चुका था।
- कालावधि – 5500 ई.पू. से 3000 ई.पू. तक।
झारखण्ड में ताम्रपाषाण काल का केंद्र बिन्दु निम्न में कौन-सा स्थान था?
- पलामू
- सिंहभूम
- लोहरदगा
- धनबाद
Explanation:
- झारखंड में ताम्रपाषाणयुगीन संस्कृति का केन्द्र-बिन्दु सिंहभूम था।
- ताम्र-पाषाण युग (Chalcolithic Age) – पाषाण (पत्थर) के साथ-साथ ताम्र/तांबा (धातु) के उपकरणों का उपयोग।
- सिंहभूम क्षेत्र तांबा खनन के लिए प्रसिद्ध रहा है।
- सिंहभूम से प्राप्त पुरातात्विक अवशेष:
- बारूडीह – पत्थर की हथौड़ी, पक्की मिट्टी के मटके
- बेनूसागर – सातवीं शताब्दी की जैन मूर्तियाँ
- बोनगरा – कुल्हाड़ी, वलय-प्रस्तर (Ring-stone)
- बाणाघाट – नवपाषाण कालीन पत्थर, काले रंग का मृदुभाण्ड
झारखण्ड में ताम्रपाषाण काल के तांबे की 49 खानों के अवशेष कहा से प्राप्त हुए हैं ?
- पलामू
- सिंहभूम
- लोहरदगा
- बाहरगंडा
Explanation:
- हजारीबाग के बाहरगंडा से 49 तांबे की खानों के अवशेष मिले हैं।
- यह ताम्रपाषाण काल के तांबा खनन का प्रमाण है।
- बाहरगंडा – हजारीबाग जिले का एक पुरातात्विक स्थल।
- हजारीबाग के अन्य पुरातात्विक स्थल:
- इस्को – खुला सूर्य मंदिर, शैल चित्र दीर्घा, नक्षत्र मंडल, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष मानव, बर्फ आयु की गहरी भूमिगत गुफा
- सीतागढ़ा पहाड़ – छठी शताब्दी के बौद्ध मठ के अवशेष, बुद्ध की चार आकृति युक्त स्तूप
- दूधपानी – आठवीं शताब्दी के अभिलेख
- दुमदुमा – शिवलिंग
किस जनजाति को लौहयुगीन औजारों का प्रारंभकर्ता माना जाता है?
- मुण्डा तथा हो
- हो
- असुर तथा बिरजिया
- असुर
Explanation:
- असुर एवं बिरजिया जनजातियों को लौहयुगीन औजारों का प्रारंभकर्ता माना जाता है।
- नोट्स में स्पष्ट उल्लेख: “असुर व बिरजिया जनजातियों को कांस्य एवं लोहे से निर्मित औजारों का प्रारंभकर्ता माना जाता है”
- लौह युग की विशेषताएँ:
- झारखंड में कांस्य युग के बाद लौह युग आया।
- असुर एवं बिरजिया जनजातियाँ लौह उपकरण बनाने में कुशल थीं।
- असुर जनजाति लोहा गलाने के कार्य में विशेष रूप से निपुण थी।
निम्न में किस स्थान पर झारखण्ड में नक्षत्रमंडल, अंतरिक्ष यान एवं अंतरिक्ष मानव के पुरातात्विक काल के चित्र प्राप्त हुए हैं?
- दूधपानी (हजारीबाग)
- इस्को (हजारीबाग)
- भवनाथपुर (गढ़वा)
- बेनूसागर (सिंहभूम)
Explanation:
- इस्को (हजारीबाग) से नक्षत्रमंडल, अंतरिक्ष यान एवं अंतरिक्ष मानव के चित्र प्राप्त हुए हैं।
- इस्को हजारीबाग का एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है।
- यहाँ से प्राप्त शैल चित्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- इस्को से प्राप्त अन्य अवशेष:
- खुला सूर्य मंदिर
- शैल चित्र दीर्घा
- नक्षत्र मंडल
- अंतरिक्ष यान
- अंतरिक्ष मानव
- बर्फ आयु की गहरी भूमिगत गुफा
- अन्य विकल्प:
- दूधपानी – आठवीं शताब्दी के अभिलेख
- भवनाथपुर – हिरण, भैंसा आदि पशुओं के आखेट (शिकार) के चित्र
- बेनूसागर – सातवीं शताब्दी की जैन मूर्तियाँ
पुरातात्विक स्थल दालमी किस नदी के तट पर स्थित है ?
- बोकारो
- दामोदर
- अजय
- स्वर्णरेखा
Explanation:
- दियापुर-दालमी (धनबाद) दामोदर नदी के किनारे स्थित है।
- दियापुर-दालमी – धनबाद जिले का बौद्ध स्थल।
- यहाँ से बौद्ध स्मारक प्राप्त हुए हैं।
- बुद्धपुर में बुद्धेश्वर मंदिर निर्मित है।
- दामोदर नदी के बारे में:
- यह झारखंड की सबसे लंबी एवं बड़ी नदी है।
- इसे ‘बंगाल का शोक’ भी कहा जाता है।
- उदगम – Chulhapani, टोरी (लातेहार)
झारखंड के इतिहास की शुरुआत कब से मानी जाती है ?
- मेसोलिथिक युग
- नियोलिथिक युग
- वैदिक युग
- ब्रोंज युग
Explanation:
- झारखंड में तीनों पाषाण युगों के साक्ष्य मिलते हैं।
- पुरापाषाण युग (Paleolithic Age) – प्रारम्भ से 10,000 ई.पू.
- मध्यपाषाण युग (Mesolithic Age) – 10,000 ई.पू. से 5500 ई.पू.
- नवपाषाण युग (Neolithic Age) – 5500 ई.पू. से 3000 ई.पू.
- झारखंड के इतिहास की शुरुआत मध्यपाषाण युग (Mesolithic Age) से मानी जाती है।
- हजारीबाग से पाषाण कालीन मानव द्वारा निर्मित पत्थर के औजार मिले हैं।
- पलामू प्रमण्डल से तीनों पाषाण कालों के औजार प्राप्त हुए हैं।
इसको गुफा कहां स्थित है ?
- धनबाद
- हजारीबाग
- गढ़वा
- सिंहभूम
Explanation:
- इस्को (हजारीबाग) में बर्फ आयु की गहरी भूमिगत गुफा पाई गई है।
- इस्को हजारीबाग का प्रमुख पुरातात्विक स्थल है।
- यहाँ से नक्षत्रमंडल, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष मानव आदि के चित्र मिले हैं।
- हजारीबाग के अन्य पुरातात्विक स्थल:
- बाहरगंडा – 49 तांबे की खानों के अवशेष
- इस्को – शैल चित्र, गुफा, सूर्य मंदिर
- सीतागढ़ा पहाड़ – बौद्ध मठ, स्तूप
- दूधपानी – अभिलेख
- दुमदुमा – शिवलिंग
कनिष्क के सिक्के झारखंड के किस जिले से प्राप्त हुए थे ?
- रांची
- हजारीबाग
- गढ़वा
- सिंहभूम
Explanation:
- राँची से कुषाणकालीन सिक्के प्राप्त हुए हैं।
- यह क्षेत्र कनिष्क के प्रभाव में था।
- कुषाण वंश के शासक कनिष्क (127-150 ई.) ने भारत के बड़े भाग पर शासन किया।
- मौर्योत्तर काल में प्राप्त सिक्के:
- सिंहभूम – रोमन साम्राज्य के सिक्के
- चाईबासा – इंडो-सीथियन सिक्के
- राँची – कुषाणकालीन सिक्के (कनिष्क)
सिंघभूम में खुदाई के दौरान निम्न में से कौन सा पाया गया है ?
- रोमन सिक्के
- मूर्तिया
- उपकरण और हथियार
- इंडो सीथियन सिक्के
Explanation:
- सिंहभूम से रोमन साम्राज्य के सिक्के प्राप्त हुए हैं।
- यह मौर्योत्तर काल में भारत-रोम व्यापार का प्रमाण है।
- भारत का विदेशों से व्यापारिक संबंध स्थापित हुआ।
- अन्य स्थानों से प्राप्त सिक्के:
- चाईबासा – इंडो-सीथियन सिक्के
- राँची – कुषाणकालीन सिक्के
संभावित भूमिगत कोशिकाओं और मार्ग के साथ बारादारी इमारतों के अवशेष निम्नलिखित स्थानों में से किस में स्थित है ?
- हंसा, रांची
- बेनीसागर, सिंहभूम
- ईचागढ़, सिंहभूम
- अर्जी मुकीमपुर, संथाल परगना
Explanation:
- अर्जी मुकीमपुर (संथाल परगना) में बारादारी इमारतों के अवशेष तथा भूमिगत कोशिकाएँ एवं मार्ग पाए गए हैं।
- संथाल परगना – झारखंड का पूर्वी क्षेत्र।
- बारादारी इमारतें – प्राचीन वास्तुकला के महत्वपूर्ण साक्ष्य।
- अन्य विकल्प:
- हंसा (राँची) – पुरातात्विक स्थल
- बेनीसागर (सिंहभूम) – जैन मूर्तियाँ
- ईचागढ़ (सिंहभूम) – बौद्ध देवी तारा की मूर्ति
निम्नलिखित साइटों में से कौन सा झारखंड के एक ताम्रपाषाण साइट से संबंधित नहीं है ?
- करहरबड़ी
- बादाम
- रामगढ
- कुनार
Explanation:
- ताम्रपाषाण साइट से संबंधित स्थल:
- करहरबड़ी – ताम्रपाषाण स्थल
- बादाम – ताम्रपाषाण स्थल
- रामगढ – ताम्रपाषाण स्थल
- कुनार ताम्रपाषाण साइट से संबंधित नहीं है।
- नोट्स में करहरबड़ी, बादाम, रामगढ़ का उल्लेख ताम्रपाषाण काल से संबंधित है।
- कुनार – संभवतः किसी अन्य काल या स्थान से संबंधित है।
चंदन शहीद पहाड़ी पर अशोक शिलालेख निम्नलिखित जिलों में से किस में स्थित है ?
- दूधपानी (हजारीबाग)
- सासाराम (बिहार)
- भवनाथपुर (गढ़वा)
- बेनूसागर (सिंहभूम)
Explanation:
- अशोक के शिलालेख सासाराम (बिहार) में स्थित चंदन शहीद पहाड़ी पर स्थित हैं।
- अशोक (269-232 ई.पू.) मौर्य वंश का महान शासक था।
- उसने 13वें शिलालेख में आटविक/आटव/आटवी प्रदेश का उल्लेख किया है, जिसमें झारखंड शामिल था।
- अशोक के शिलालेखों के बारे में:
- अशोक ने झारखंड की जनजातियों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखा।
- अशोक ने झारखंड में बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु रक्षित को भेजा था।
- अशोक का पृथक कलिंग शिलालेख-II – “इस क्षेत्र की अविजित जनजातियों को मेरे धम्म का आचरण करना चाहिए”
हजारीबाग के उत्तर की ओर झारखंड में निम्न में से कौन से स्थान बौद्ध धर्म विरासत के अवशेषों का दावा करते हैं ?
- लुम्बिनी
- इटखोरी
- सारनाथ
- कुशीनगर
Explanation:
- इटखोरी (चतरा) में बौद्ध धर्म के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- इटखोरी से पाल शासक महेन्द्रपाल के शिलालेख मिले हैं।
- यहाँ पर 58 पूरा अवशेष एवं 4 बौद्ध स्तूप मिले हैं।
- पाल काल में ही इटखोरी में माँ भद्रकाली की मूर्ति का निर्माण किया गया।
- बौद्ध धर्म से संबंधित अन्य स्थल:
- मूर्तिया गाँव (पलामू) – सिंह शीर्ष (सांची स्तूप से मेल)
- सीतागढ़ पहाड़ (हजारीबाग) – बुद्ध की चार आकृतियों वाला स्तूप
- करूआ गाँव (गोड्डा) – बौद्ध स्तूप
- ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां) – बौद्ध देवी तारा की मूर्ति
- बेलवादाग (खूंटी) – बौद्ध विहार के अवशेष
असुर साइट झारखंड में पाए जाने वाले राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में से कौन से इलाके में स्थित नहीं है ?
- ईचागढ़
- सरिदकेल
- खुंटीटोला
- कुंजला
Explanation:
- असुर साइट सरिदकेल, खुंटीटोला, कुंजला में पाई जाती है।
- असुर जनजाति झारखंड की प्राचीनतम जनजाति है।
- यह साइट झारखंड में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में शामिल है।
- ईचागढ़ – असुर साइट से संबंधित नहीं है।
- ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां) से बौद्ध देवी तारा की मूर्ति प्राप्त हुई है।
- यहाँ से प्राप्त मूर्ति को राँची संग्रहालय में रखा गया है।
शुरुआती पत्थर की उम्र से तांबा के बर्तन और उपकरण के प्रमाण पाए जाते हैं ?
- बोकारो और देवघर
- दुमका और बाँदा
- बुंडू और दाहिगाढा
- ककरबड़ी और बरगुंडा
Explanation:
- ककरबड़ी और बरगुंडा से ताम्रपाषाण काल के तांबा के बर्तन एवं उपकरणों के प्रमाण मिले हैं।
- ये शुरुआती पत्थर की उम्र (ताम्रपाषाण काल) से संबंधित हैं।
- नोट्स में ककरबड़ी और बरगुंडा का उल्लेख ताम्रपाषाण साइट के रूप में किया गया है।
- ताम्रपाषाण काल की विशेषताएँ:
- इस काल में पत्थर के साथ तांबा के उपकरणों का प्रयोग।
- झारखंड में इस काल का केन्द्र-बिन्दु सिंहभूम था।
बर्फ आयु की गहरी भूमिगत गुफा कहां पाया गया है ?
- ईचागढ़
- सरिदकेल
- खुंटीटोला
- इसको गांव
Explanation:
- इस्को गाँव (हजारीबाग) में बर्फ आयु की गहरी भूमिगत गुफा पाई गई है।
- इस्को – हजारीबाग का प्रमुख पुरातात्विक स्थल।
- यहाँ प्रागैतिहासिक काल के महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं।
- इस्को से प्राप्त अन्य अवशेष:
- खुला सूर्य मंदिर
- शैल चित्र दीर्घा
- नक्षत्र मंडल
- अंतरिक्ष यान
- अंतरिक्ष मानव
किस शासक के प्रवेश के ऊपरांत झारखण्ड में बौद्ध धर्म का हास प्रारंभ हो गया?
- चंद्रगुप्त
- कुमार गुप्त
- श्रीगुप्त
- समुद्रगुप्त
Explanation:
- समुद्रगुप्त के प्रवेश के उपरांत झारखंड में बौद्ध धर्म का हास प्रारंभ हो गया।
- नोट्स में स्पष्ट उल्लेख: “समुद्रगुप्त के प्रवेश के पश्चात झारखण्ड क्षेत्र में बौद्ध धर्म का पतन प्रारंभ हो गया।”
- समुद्रगुप्त (335-375 ई.) – गुप्त वंश का शासक, भारत का नेपोलियन कहा जाता है।
- समुद्रगुप्त के बारे में:
- वर्णन – प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद प्रशस्ति) में
- लेखक – हरिषेण
- उसकी विजयों में आटविक विजय भी शामिल थी।
- झारखंड प्रदेश आटविक प्रदेश का हिस्सा था।
सरायकेला-खरसावां के ईचागढ़ से प्राप्त बौद्ध देवी तारा की मूर्ति को निम्न में से किस संग्रहालय में रखा गया है?
- आर्ट गैलरी, हजारीबाग
- राँची संग्रहालय
- पटना संग्रहालय
- कोलकाता संग्रहालय
Explanation:
- ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां) से प्राप्त बौद्ध देवी तारा की मूर्ति को राँची संग्रहालय में रखा गया है।
- ईचागढ़ – सरायकेला-खरसावां जिले का पुरातात्विक स्थल।
- देवी तारा – बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण देवी (वज्रयान शाखा)।
- बौद्ध धर्म से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण अवशेष:
- सीतागढ़ पहाड़ – बुद्ध की चार आकृतियों वाला स्तूप
- जोन्हा जलप्रपात – बुद्ध प्रतिमा
- इटखोरी – 4 बौद्ध स्तूप
- पटम्बा गाँव (जमशेदपुर) – बुद्ध की दो प्रतिमाएँ
- कटुंगा गाँव (गुमला) – बुद्ध प्रतिमा
झारखण्ड के धनबाद में कौन-सा मंदिर निर्मित है?
- वैद्यनाथ मंदिर
- हापामुनि मंदिर
- छिन्नमस्तिका मंदिर
- बुद्धेश्वर मंदिर
Explanation:
- धनबाद में बुद्धपुर में बुद्धेश्वर मंदिर निर्मित है।
- दियापुर-दालमी (धनबाद) से बौद्ध स्मारक प्राप्त हुए हैं।
- यह बौद्ध स्थल दामोदर नदी के किनारे है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- वैद्यनाथ मंदिर – देवघर (झारखंड) में स्थित है (नोट्स में नहीं)
- हापामुनि मंदिर – गुमला (महामाया मंदिर, 908 ई.)
- छिन्नमस्तिका मंदिर – रजरप्पा, रामगढ़ (शक्तिपीठ)
बुद्धपुर बौद्धस्थल निम्न में से किस नदी के तट पर अवस्थित है?
- कसाई
- मयूराक्षी
- दामोदर
- खरकई
Explanation:
- बुद्धपुर (धनबाद) दामोदर नदी के किनारे स्थित है।
- बुद्धपुर में बुद्धेश्वर मंदिर निर्मित है।
- दियापुर-दालमी (धनबाद) से बौद्ध स्मारक प्राप्त हुए हैं।
- दामोदर नदी के बारे में:
- झारखंड की सबसे लंबी एवं बड़ी नदी है।
- इसे ‘बंगाल का शोक’ भी कहा जाता है।
- दामोदर घाटी परियोजना (DVC) इसी नदी पर स्थित है।
बौद्ध स्थल दालमी निम्न में से किस नदी के तट पर अवस्थित है?
- कसाई
- मयूराक्षी
- दामोदर
- खरकई
Explanation:
- दियापुर-दालमी (धनबाद) दामोदर नदी के किनारे स्थित है।
- यहाँ से बौद्ध स्मारक प्राप्त हुए हैं।
- बुद्धपुर में बुद्धेश्वर मंदिर भी इसी क्षेत्र में स्थित है।
- धनबाद जिले के बारे में:
- यह झरिया कोयला क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध है।
- यहाँ कोल इंडिया की BCCL (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) स्थित है।
झारखण्ड के किस स्थान से बौद्ध देवी तारा की मूर्ति प्राप्त हुयी है?
- ईचाक
- बलवादाग
- घोलमारा
- ईचागढ़
Explanation:
- ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां) से बौद्ध देवी तारा की मूर्ति प्राप्त हुई है।
- मूर्ति को राँची संग्रहालय में रखा गया है।
- तारा – बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा की महत्वपूर्ण देवी।
- बौद्ध धर्म से संबंधित अन्य अवशेष:
- जोन्हा जलप्रपात – बुद्ध प्रतिमा
- सूर्यकुण्ड (हजारीबाग) – बुद्ध की प्रस्तर मूर्ति
- सीतागढ़ा पहाड़ (हजारीबाग) – बुद्ध की चार आकृतियों वाला स्तूप
झारखण्ड के किस स्थान पर बौद्ध स्थल दालमी स्थित है?
- ईचाक
- धनबाद
- घोलमारा
- ईचागढ़
Explanation:
- दियापुर-दालमी धनबाद जिले में स्थित है।
- यहाँ से बौद्ध स्मारक प्राप्त हुए हैं।
- यह स्थल दामोदर नदी के तट पर स्थित है।
- धनबाद की बौद्ध विरासत:
- बुद्धपुर – बुद्धेश्वर मंदिर
- दालमी – बौद्ध स्मारक
- दियापुर – बौद्ध अवशेष
झारखण्ड के किस स्थान पर बौद्ध स्थल बुद्धपुर स्थित है?
- पलामू
- धनबाद
- हजारीबाग
- ईचागढ़
Explanation:
- बुद्धपुर धनबाद जिले में स्थित है।
- बुद्धपुर में बुद्धेश्वर मंदिर निर्मित है।
- यह स्थल दामोदर नदी के तट पर स्थित है।
- यहाँ से बौद्ध स्मारक प्राप्त हुए हैं।
- बुद्धपुर की विशेषता:
- यह नाम बुद्ध से संबंधित होने के कारण महत्वपूर्ण है।
- यह झारखंड में बौद्ध धर्म के प्रभाव को दर्शाता है।
झारखण्ड के किस स्थान पर मूर्तिया गाँव स्थित है?
- पलामू
- धनबाद
- हजारीबाग
- ईचागढ़
Explanation:
- मूर्तिया गाँव पलामू जिले में स्थित है।
- यहाँ से एक सिंह शीर्ष मिला है।
- यह सिंह शीर्ष सांची स्तूप के द्वार पर उत्कीर्ण सिंह शीर्ष से मेल खाता है।
- पलामू के अन्य बौद्ध स्थल:
- पलामू किला – बुद्ध की भूमि स्पर्श मुद्रा में मूर्ति
- हनुमांड गाँव – जैन एवं बौद्ध अवशेष
झारखण्ड के किस स्थान पर कटुंगा गाँव स्थित है?
- पलामू
- धनबाद
- हजारीबाग
- गुमला
Explanation:
- कटुंगा गाँव गुमला जिले में स्थित है।
- यहाँ से भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा मिली है।
- गुमला के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:
- महामाया मंदिर (हापामुनि) – 908 ई. में नागवंशी शासक गजघंट राय द्वारा निर्मित
- टांगीनाथ मंदिर – गुमला में स्थित
- खड़िया, गोंड, उराँव जनजातियों का निवास क्षेत्र
झारखण्ड के किस स्थान पर पटम्बा गाँव स्थित है?
- पलामू
- धनबाद
- जमशेदपुर
- गुमला
Explanation:
- पटम्बा गाँव जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में स्थित है।
- यहाँ से भगवान बुद्ध की दो प्रतिमाएँ मिली हैं।
- जमशेदपुर के बारे में:
- यहाँ टाटा स्टील (TISCO) स्थित है (स्थापना 1907)।
- यह स्वर्णरेखा एवं खरकई नदी के संगम पर स्थित है।
- यहाँ टाटा पिगमेंट, TRF, TELCO आदि उद्योग स्थित हैं।
पलामू जिला के किस स्थान से एक सिंह शीर्ष प्राप्त हुआ है जो सांची स्तूप के द्वार पर उत्कीर्ण सिंह शीर्ष से मेल खाता है?
- कटुंगा गाँव
- पाँकी गाँव
- मूर्तिया गाँव
- चैनपुर गाँव
Explanation:
- मूर्तिया गाँव (पलामू) से एक सिंह शीर्ष प्राप्त हुआ है।
- यह सांची स्तूप के द्वार पर उत्कीर्ण सिंह शीर्ष से मेल खाता है।
- सांची स्तूप – मध्य प्रदेश में स्थित, अशोक द्वारा निर्मित बौद्ध स्तूप।
- मूर्तिया गाँव का महत्व:
- यहाँ से प्राप्त सिंह शीर्ष बौद्ध कला के प्रभाव को दर्शाता है।
- यह पलामू में बौद्ध धर्म के प्रसार का प्रमाण है।
झारखण्ड के किस स्थान पर बलवादाग स्थित है?
- पलामू
- खुंटी
- जमशेदपुर
- गुमला
Explanation:
- बेलवादाग खूंटी जिले में स्थित है।
- यहाँ से बौद्ध विहार के अवशेष मिले हैं।
- खूंटी जिले के बारे में:
- खूंटी में असुर सभ्यता के अवशेष मिलते हैं।
- तजना नदी का अपवाह क्षेत्र खूंटी में है।
- यहाँ पंचघाघ एवं पेरवाघाघ जलप्रपात स्थित हैं।
खुंटी जिला के किस स्थान से बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं?
- बलवादाग
- पाँकी गाँव
- मूर्तिया गाँव
- चैनपुर गाँव
Explanation:
- बेलवादाग (खूंटी) से बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- बेलवादाग – खूंटी जिले का पुरातात्विक स्थल।
- बौद्ध विहार – बौद्ध भिक्षुओं के निवास स्थान।
- खूंटी में बौद्ध विरासत:
- यहाँ बौद्ध धर्म के प्रसार का प्रमाण मिलता है।
- बौद्ध विहार के अवशेष प्राचीन काल में बौद्ध धर्म की उपस्थिति दर्शाते हैं।
जमशेदपुर के किस गाँव से भगवान बुद्ध की दो प्रतिमा मिली हैं?
- बलवादाग
- पाँकी गाँव
- मूर्तिया गाँव
- पटम्बा गाँव
Explanation:
- पटम्बा गाँव (जमशेदपुर) से भगवान बुद्ध की दो प्रतिमाएँ मिली हैं।
- यह बौद्ध धर्म के प्रसार का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
- जमशेदपुर सिंहभूम क्षेत्र का हिस्सा है।
- बौद्ध प्रतिमाओं की विशेषताएँ:
- प्रतिमाएँ बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में होती हैं।
- ये ध्यान, अभय, धर्मचक्र प्रवर्तन आदि मुद्राओं में हो सकती हैं।
गुमला जिले के किस स्थान से भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा मिली है?
- कटुंगा गाँव
- पाँकी गाँव
- मूर्तिया गाँव
- पटम्बा गाँव
Explanation:
- कटुंगा गाँव (गुमला) से भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा मिली है।
- यह गुमला में बौद्ध धर्म के प्रभाव को दर्शाता है।
- गुमला में बौद्ध धर्म:
- कटुंगा गाँव बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
- यहाँ से प्राप्त बुद्ध प्रतिमा प्राचीन काल की है।
किस स्थान से भगवान बुद्ध की एक खण्डित प्रतिमा प्राप्त हुई है?
- कटुंगा गाँव
- पाँकी गाँव
- घोलमारा
- पटम्बा गाँव
Explanation:
- घोलमारा (पुरुलिया के निकट) से भगवान बुद्ध की एक खण्डित प्रतिमा प्राप्त हुई है।
- घोलमारा – पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) के निकट, झारखंड सीमा पर।
- खण्डित प्रतिमा – समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गई।
- घोलमारा का महत्व:
- यह बौद्ध धर्म के विस्तार का प्रमाण है।
- यह पुरुलिया-झारखंड क्षेत्र में बौद्ध प्रभाव को दर्शाता है।
बंगाल के पाल शासकों के शासन के दौरान झारखण्ड में बौद्ध धर्म का कौन-सा सम्प्रदाय विकसित हुआ?
- महायान
- वज्रयान
- हीनयान
- थेरवाद
Explanation:
- बंगाल में पाल शासकों के शासन के दौरान झारखंड में बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा विकसित हुई।
- वज्रयान – बौद्ध धर्म की तांत्रिक शाखा।
- इसे तंत्रयान या मंत्रयान भी कहा जाता है।
- पाल शासकों के बारे में:
- पाल वंश बौद्ध धर्म के संरक्षक थे।
- उन्होंने नालंदा, विक्रमशिला, उदंतपुरी आदि विश्वविद्यालयों को संरक्षण दिया।
हजारीबाग के किस स्थान से बुद्ध की प्रस्तर मूर्ति मिली है?
- पद्मा
- इचाक
- इस्को
- सूर्यकुण्ड
Explanation:
- सूर्यकुण्ड (हजारीबाग) से बुद्ध की प्रस्तर मूर्ति मिली है।
- सूर्यकुण्ड – हजारीबाग में स्थित गर्म जलकुण्ड है।
- यह भारत का सर्वाधिक गर्म जलकुंड (88°C) है।
- हजारीबाग के बौद्ध स्थल:
- सीतागढ़ा पहाड़ – बुद्ध की चार आकृतियों वाला स्तूप
- इस्को – शैल चित्र, अंतरिक्ष यान
- दूधपानी – 8वीं शताब्दी के अभिलेख
किस स्थान से भगवान बुद्ध की चार आकृतियों वाली एक स्तूप मिली है?
- सीतागढ़ा पहाड़, हजारीबाग
- चैनपुर, पलामू
- तोरपा, छूटी
- चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम
Explanation:
- सीतागढ़ा पहाड़ (हजारीबाग) से बुद्ध की चार आकृतियों वाली एक स्तूप मिली है।
- यहाँ से छठी शताब्दी के बौद्ध मठ के अवशेष भी मिले हैं।
- काले-भूरे बलुआ पत्थर की सुंदर स्त्री की प्रतिमा भी मिली है।
- चीनी यात्री फाह्यान द्वारा भी इसका उल्लेख मिलता है।
- फाह्यान – चीनी बौद्ध भिक्षु, जो 405 ई. में भारत आया।
- उसने चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में भारत की यात्रा की।
फाह्यान द्वारा हजारीबाग के निम्न में से किस स्थान से प्राप्त बौद्ध विहार का उल्लेख किया गया है?
- सीतागढ़ा पहाड़, हजारीबाग
- चैनपुर, पलामू
- तोरपा, छूटी
- चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम
Explanation:
- चीनी यात्री फाह्यान द्वारा सीतागढ़ा पहाड़ (हजारीबाग) से प्राप्त बौद्ध विहार का उल्लेख किया गया है।
- यह छठी शताब्दी के बौद्ध मठ के अवशेष हैं।
- फाह्यान के बारे में:
- चीनी बौद्ध भिक्षु
- भारत आगमन – 405 ई.
- उसके यात्रा वृत्तांत में भारत की सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का वर्णन मिलता है।
बेनूसागर (सिंहभूम) नामक स्थान से प्राप्त हुआ है
- जैन मूर्तियाँ
- बौद्ध मूर्तियाँ
- कब्रगाह के अवशेष
- शिवलिंग
Explanation:
- बेनूसागर (सिंहभूम) से सातवीं शताब्दी की जैन मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं।
- बेनूसागर – सिंहभूम में स्थित पुरातात्विक स्थल।
- शशांक ने यहाँ वेणुसागर मंदिर का निर्माण कराया।
- बेनूसागर का महत्व:
- यह सिंहभूम और मयूरभंज की सीमा पर स्थित है।
- यह स्थल कोचांग में स्थित है।
सूर्यकुण्ड अवस्थित है
- हजारीबाग में
- राँची में
- लातेहार में
- चतरा में
Explanation:
- सूर्यकुण्ड हजारीबाग में स्थित है।
- सूर्यकुण्ड – भारत का सर्वाधिक गर्म जलकुंड (88°C/190°F)।
- यहाँ से बुद्ध की प्रस्तर मूर्ति मिली है।
- हजारीबाग के अन्य महत्वपूर्ण स्थल:
- हजारीबाग झील – 1831 में ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित
- सालपर्णी झील
- सुरजकुंड – गर्म जलकुंड
झारखण्ड के किस स्थान पर हनुमांड गाँव स्थित है?
- पलामू
- धनबाद
- हजारीबाग
- ईचागढ़
Explanation:
- हनुमांड गाँव पलामू जिले में स्थित है।
- यह सतबरवा के निकट स्थित है।
- यहाँ से जैन धर्म के अवशेष मिले हैं।
- पलामू के जैन/बौद्ध स्थल:
- मूर्तिया गाँव – सिंह शीर्ष (सांची स्तूप से मेल)
- हनुमांड गाँव – जैन धर्म के अवशेष
- पाण्डु – चार पाये वाली पत्थर की चौकी
‘सरक’ क्या है?
- झारखण्ड की एक जनजाति
- सिंहभूम के आरंभिक निवासी, जो जैन धर्म को मानते थे।
- झारखण्ड में बौद्ध धर्म से संबंधित एक – प्रमुख स्थान
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- ‘सरक’ सिंहभूम के आरंभिक निवासी थे, जो जैन धर्म को मानते थे।
- सरक – गृहस्थ जैन मतावलंबी को कहा जाता था।
- बाद में हो जनजाति के लोगों ने इन्हें सिंहभूम से निकाल बाहर किया।
- सिंहभूम में जैन धर्म:
- सिंहभूम के आरंभिक निवासी जैन मतावलंबी थे।
- यहाँ जैन धर्म का प्राचीन प्रभाव रहा है।
जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से कितने तीर्थंकरों ने पारसनाथ की पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त किया?
- 18
- 20
- 22
- 24
Explanation:
- जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने पारसनाथ की पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त किया।
- पारसनाथ पहाड़ी – गिरिडीह जिले में स्थित है।
- यह झारखंड की सबसे ऊंची चोटी (1365 मी/4478 फीट) है।
- इसे ‘जैन धर्म का मक्का’ कहा जाता है।
पारसनाथ की पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त करने वाले अंतिम जैन तीर्थंकर का नाम क्या है?
- अरिष्टनेमी
- महावीर
- पार्श्वनाथ
- ऋषभदेव
Explanation:
- जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का निर्वाण 717 ई.पू. में हुआ था।
- ये पारसनाथ की पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त करने वाले अंतिम तीर्थंकर थे।
- उन्हीं के नाम पर पहाड़ का नाम पार्श्वनाथ/पारसनाथ पड़ा।
- पार्श्वनाथ के बारे में:
- ये जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं।
- इनका जन्म वाराणसी में हुआ था।
- इनके प्रतीक – सर्प (नाग) हैं।
जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर ‘पार्श्वनाथ’ का निर्वाण कब हुआ?
- 618 ई.पू. में
- 574 ई.पू. में
- 717 ई.पू. में
- 483 ई.पू. में
Explanation:
- जैनियों के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का निर्वाण 717 ई.पू. में हुआ था।
- ये पारसनाथ की पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त करने वाले अंतिम तीर्थंकर थे।
- अन्य तीर्थंकरों के निर्वाण काल:
- महावीर (24वें तीर्थंकर) – 527 ई.पू. में निर्वाण
- ऋषभदेव (प्रथम तीर्थंकर) – अत्यंत प्राचीन
पार्श्वनाथ ने किस जिले के शिखरजी पर मोक्ष प्राप्त किया था ?
- धनबाद
- कोडरमा
- गिरिडीह
- हजारीबाग
Explanation:
- पारसनाथ पहाड़ी गिरिडीह जिले में स्थित है।
- पार्श्वनाथ ने गिरिडीह जिले के शिखरजी (पारसनाथ पहाड़ी) पर मोक्ष प्राप्त किया था।
- पारसनाथ पहाड़ी झारखंड की सबसे ऊंची चोटी (1365 मी) है।
- गिरिडीह जिले के बारे में:
- यहाँ अभ्रक (माइका) पाया जाता है।
- यह अभ्रक औद्योगिक पट्टी का हिस्सा है।
- यहाँ उसरी जलप्रपात स्थित है।
जैन धर्म के किस तीर्थंकर ने पारसनाथ में महासमाधि ली थी ?
- 20वें, 23वें
- 12वें, 14वें
- 15वें, 18वें
- 24वें
Explanation:
- 20th तीर्थंकर ने पारसनाथ पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त किया।
- इनमें 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ भी शामिल हैं।
- पार्श्वनाथ 717 ई.पू. में निर्वाण प्राप्त करने वाले अंतिम तीर्थंकर थे।
- जैन धर्म के तीर्थंकर:
- प्रथम – ऋषभदेव (आदिनाथ)
- 23वें – पार्श्वनाथ
- 24वें – महावीर (वर्धमान)
जैन ग्रंथों में भगवान महावीर के “लोरे यदगा यात्रा” का संदर्भ है, मुंडारी में जिसका अर्थ है ?
- जंगल की यात्रा
- आंसुओं की नदी
- एकांतवास
- समाधि स्थल
Explanation:
- जैन ग्रंथों में भगवान महावीर की “लोरे-ए-यदगा” यात्रा का संदर्भ है।
- लोरे-ए-यदगा का अर्थ मुंडारी में ‘आंसुओं की नदी’ होता है।
- यह महावीर की यात्रा से संबंधित है।
- महावीर के बारे में:
- ये जैन धर्म के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर हैं।
- इनका जन्म 540 ई.पू. में कुंडग्राम (वैशाली) में हुआ।
- इन्होंने 527 ई.पू. में पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया।
