Jharkhand GK
झारखण्ड क्षेत्रीय स्वायत्त परिषद् का गठन कब हुआ था?
- 9 अगस्त , 1995
- 15 जून, 1995
- 19 जून, 1996
- 9 जून, 1996
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
किस वर्ष में झारखण्ड राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था?
- 2001
- 2000
- 1999
- 2004
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
जयपाल सिंह द्वारा गठित झारखण्ड पार्टी का प्रारंभिक नाम क्या था?
- बिरसा सेवा दल
- अपना लोक दल
- झारखण्ड महासभा
- झारखण्ड पीपुल्स पार्टी
Explanation:
- राज्य पुनर्गठन आयोग का आगमन 5 फरवरी, 1955 को राँची ।
- 16 जिलों को मिलाकर झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव (बिहार-7, उड़ीसा-4, बंगाल-3 मध्य प्रदेश-2)
- 1957 के चुनाव में बॉम्बे के पारसी मीनू मसानी ने राँची से चुनाव जीता था
- बिहार विधानसभा में सीताराम जगतराम द्वारा पहली बार पृथक झारखण्ड राज्य के गठन हेतु एक प्रस्ताव 10 फरवरी, 1961 को प्रस्तुत किया गया। परन्तु यह प्रस्ताव निरस्त हो गया।
- 20 जून, 1963 ई
- झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस में विलय
- बिहार के मुख्यमंत्री विनोदानंद झा की पहल पर
- सामुदायिक विकास मंत्री – जयपाल सिंह (मंत्री के पद से एक माह बाद इस्तीफा)
- 30 मई, 1969 – कांग्रेस से इस्तीफा
- जयपाल सिंह की पत्नी जहाँआरा इंदिरा गाँधी की मंत्रिपरिषद् में परिवहन एवं विमानन विभाग की उपमंत्री थीं।
झारखण्ड राज्य का गठन कब हुआ?
- 15 नवंबर, 2000
- 10 नवंबर, 2000
- 7 नवंबर, 2000
- 15 नवंबर, 2001
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
सरकार द्वारा झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद कब बनाई गई?
- 1995
- 1994
- 1996
- 2000
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
झारखण्ड गठन के समय बिहार के मुख्यमंत्री कौन थे?
- नीतीश कुमार
- लालू यादव
- राबड़ी देवी
- जीतन राम मांझी
Explanation:
झारखण्ड गठन के समय देश के प्रधानमंत्री कौन थे?
- इंद्र कुमार गुजराल
- मनमोहन सिंह
- अटल बिहारी बाजपायी
- एच. डी. देवगौड़ा
Explanation:
झारखण्ड राज्य क गठन हेतु बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर किया गया
- 25 अगस्त, 2000
- 21 अगस्त, 2000
- 22 अगस्त, 2000
- 24 अगस्त, 2000
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
झारखण्ड राज्य क गठन हेतु बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000, राज्यसभा से कब पारित किया गया
- 25 अगस्त, 2000
- 11 अगस्त, 2000
- 22 अगस्त, 2000
- 24 अगस्त, 2000
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
झारखण्ड राज्य क गठन हेतु बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000, बिहार सरकार द्वारा कब पारित किया गया
- 25 अगस्त, 2000
- 11 अगस्त, 2000
- 2 अगस्त, 2000
- 25 अप्रैल, 2000
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
बिहार विधानसभा में किस वर्ष पृथक झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था?
- 2000
- 1996
- 1998
- 1997
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ कब पारित किया गया
- 25 अगस्त, 2000
- 20 दिसंबर, 1994
- 20 दिसंबर, 1995
- 24 अगस्त, 1994
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ कब अधिसूचित किया गया
- 7 अगस्त, 1995 को
- 9 अगस्त, 1995 को
- 20 दिसंबर, 1995
- 24 अगस्त, 1994
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् ’ कब गठन किया गया
- 7 अगस्त, 1995 को
- 9 अगस्त, 1995 को
- 20 दिसंबर, 1995
- 24 अगस्त, 1994
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
1995 में गठित झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (जैक) का उपाध्यक्ष किसे बनाया गया था?
- शिबु सोरेन
- सूरज मंडल
- सुदेश महतो
- सूर्यसिंह बेसरा
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
1995 में गठित झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (जैक) का अध्यक्ष किसे बनाया गया था?
- शिबु सोरेन
- सूरज मंडल
- सुदेश महतो
- सूर्यसिंह बेसरा
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
1995 में गठित झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (जैक) का गठन कितने जिलों को मिलाकर किया गया था। ?
- 18
- 15
- 12
- 24
Explanation:
- झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् (1995 ) Jharkhand Area Autonomous Council,JAAC
- बिहार विधानमंडल में ‘झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद् विधेयक’ 20 दिसंबर, 1994 को पारित किया गया था।
- अधिसूचना– 7 अगस्त, 1995 को
- गठन – 9 अगस्त, 1995 को
- अध्यक्ष– शिबू सोरेन
- उपाध्यक्ष – सूरज मंडल
- गठन – 18 जिलों को मिलाकर किया गया था।
बिहार से अलग , वनांचल राज्य के गठन की मांग की गयी थी?
- 1988
- 1985
- 1982
- 1 984
Explanation:
बिहार से अलग वनांचल नाम से एक राज्य के गठन की मांग किस पार्टी द्वारा की गयी थी?
- कांग्रेस
- भाजपा
- कम्यूनिस्ट पार्टी
- झामुमो
Explanation:
- झारखण्ड गठन – अंतिम चरण
- 25 अप्रैल, 2000 – बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक, 2000 को स्वीकृति
- 2 अगस्त, 2000 – लोकसभा से पारित
- 11 अगस्त, 2000 – राज्यसभा से पारित
- 25 अगस्त, 2000 – राष्ट्रपति के. आर. नारायणन स्वीकृति
- 15 नवंबर, 2000 – झारखण्ड का गठन (28वें राज्य)
- बिरसा मुण्डा के जन्मदिन के अवसर पर
- बिहार के 18 जिलों (46 % भू-भाग) शामिल
- भारत के राष्ट्रपति- श्री के. आर. नारायणन
- भारत के प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेयी
- बिहार की मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी
- साइमन कमीशन द्वारा पृथक झारखण्ड राज्य के गठन हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत – 1929 में
- वनांचल (वर्तमान झारखण्ड) प्रदेश की मांग – BJP द्वारा 1988 ई. में
किस समिति द्वारा ‘झारखण्ड क्षेत्र विकास परिषद’ के गठन की सिफारिश की थी।
- झारखण्ड विषयक समिति
- झारखण्ड समन्वय समिति
- ऑल झारखण्ड समन्वय समिति
- इनमे से कोई नहीं
Explanation:
किसे झारखण्ड आंदोलन का जनक माना जाता है?
- जे. बार्थोलमन
- जयपाल सिंह
- शिबु सोरेन
- विनोद बिहारी महतो
Explanation:
- चाईबासा के निवासी व एंग्लिकन मिशन से जुड़े जे. बार्थोलमन ने 1912 में ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ की स्थापना राँची में की थी।
- इस संगठन का प्रारंभिक उद्देश्य गरीब ईसाई विद्यार्थियों को मदद था।
- जे. बार्थोलमन संत कोलंबा महाविद्यालय, हजारीबाग के छात्र थे।
- बाद में वे संत पॉल स्कूल राँची के प्राध्यापक भी रहे।
- जे. बार्थोलमन को झारखण्ड आंदोलन का जनक/पितामह माना जाता है।
- बाद में इस संगठन का नाम परिवर्तित करके ‘छोटानागपुर उन्नति समाज‘ कर दिया।
क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जे. बार्थोलमन
- जयपाल सिंह
- शिबु सोरेन
- विनोद बिहारी महतो
Explanation:
- चाईबासा के निवासी व एंग्लिकन मिशन से जुड़े जे. बार्थोलमन ने 1912 में ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ की स्थापना राँची में की थी।
- इस संगठन का प्रारंभिक उद्देश्य गरीब ईसाई विद्यार्थियों को मदद था।
- जे. बार्थोलमन संत कोलंबा महाविद्यालय, हजारीबाग के छात्र थे।
- बाद में वे संत पॉल स्कूल राँची के प्राध्यापक भी रहे।
- जे. बार्थोलमन को झारखण्ड आंदोलन का जनक/पितामह माना जाता है।
- बाद में इस संगठन का नाम परिवर्तित करके ‘छोटानागपुर उन्नति समाज‘ कर दिया।
छोटानागपुर उन्नति समाज की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जे. बार्थोलमन
- जयपाल सिंह
- शिबु सोरेन
- जुएल लकड़ा
Explanation:
- एंग्लिकन मिशन के बिशप कैनेडी की सलाह पर ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ का नाम बदल कर 1915 ई.में ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ कर दिया गया।
- ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ की स्थापना जुएल लकड़ा, पॉल दयाल, बंदीराम उरांव व ठेबले उराँव के नेतृत्व में की गयी थी।
- 1915 ई.में संस्था द्वारा मुण्डारी भाषा में “आदिवासी” पत्रिका का प्रकाशन किया गया था।
- यह झारखण्ड का प्रथम अंतरजातीय आदिवासी संगठन था
- इसके सदस्य केवल आदिवासी ही हो सकते थे।
- 1928 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज द्वारा बिशप बंगयुन ल्यूक एवं जुएल लकड़ा के नेतृत्व में साइमन कमीशन को एक मांग पत्र सौंपा गया था।
- इस मांग-पत्र में आदिवासियों के लिए एक पृथक प्रशासनिक इकाई के गठन की मांग की गयी थी।
- जिसकी सिफारिश कमीशन ने 1930 के अपने रिपोर्ट में की थी
किसान सभा की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जे. बार्थोलमन
- जयपाल सिंह
- ठेबले उरांव
- जुएल लकड़ा
Explanation:
- किसान सभा का गठन 1930 ई.(अन्य – 1931 ) में छोटानागपुर उन्नति समाज से ही अलग होकर किया था।
- इसकी शुरुआत छोटा नागपुर में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने की थी
- इसके प्रथम अध्यक्ष ठेबले उराँव तथा प्रथम सचिव पॉल दयाल थे।
- इस संगठन प्रमुख उद्देश्य किसानों को जमींदारों के विरूद्ध संगठित करना था।
- 1935 में छोटानागपुर उन्नति समाज तथा किसान सभा का विलय किया गया।
छोटानागपुर कैथोलिक सभा की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जे. बार्थोलमन
- बोनिफेस लकड़ा
- ठेबले उरांव
- जुएल लकड़ा
Explanation:
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा (1933 ई.)
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा का गठन 1933 ई. में आर्च बिशप सेबरिन की प्रेरणा से किया गया था।
- प्रथम अध्यक्ष – बोनिफेस लकड़ा
- प्रथम महासचिव – इग्नेस बैक
- इस संगठन का उद्देश्य कैथोलिकों के हितों की रक्षा करना था।
- भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत होने वाले प्रांतीय चुनाव में इस संगठन ने भाग लिया और श्री इग्निस बैक संसद में इसके प्रतिनिधि बने
- इग्नेश बैक 1937 में गठित बिहार प्रांतीय सरकार में इस क्षेत्र के किसी भी नेता को मंत्री न बनाने के कारण छोटानागपुर को बिहारी उपनिवेशवाद की संज्ञा दी
- इग्नेश बैग छोटानागपुर उन्नति समाज, किसान सभा और कैथोलिक सभा का आपस में विलय चाहते थे परिणाम स्वरूप 1938 में छोटानागपुर आदिवासी महासभा गठित हुआ
- इन तीनों दलों के समर्थन से इग्नेश बैंक रांची नगर पालिका का चुनाव भी जीते।
छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जे. बार्थोलमन
- बोनिफेस लकड़ा
- थियोडोर सुरीन
- जुएल लकड़ा
Explanation:
- मई 1938 में 5 आदिवासी संगठनों को मिलाकर छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी महासभा’ की स्थापना की गयी (source)
- छोटानागपुर उन्नति समाज
- किसान सभा
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा
- मुण्डा सभा
- हो मालटो सभा
- इस नवगठित संगठन का प्रथम अध्यक्ष थियोडोर सुरीन, उपाध्यक्ष बंदराम उराँव तथा सचिव पॉल दयाल को चुना गया।
यूनाइटेड झारखंड पार्टी की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जस्टिन रिचर्ड
- बोनिफेस लकड़ा
- थियोडोर सुरीन
- जुएल लकड़ा
Explanation:
- जस्टिन रिचर्ड तथा जयपाल सिंह मुंडा द्वारा 1948 ई. में यूनाइटेड झारखण्ड पार्टी का गठन किया गया था।
- बाद में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा झारखण्ड पार्टी का गठन किया गया।
झारखंड पार्टी की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जस्टिन रिचर्ड
- बोनिफेस लकड़ा
- जयपाल सिंह
- जुएल लकड़ा
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- 2 जुलाई, 1951 को छोटानागपुर-संथाल परगना प्रांत के गठन की मांग को झारखण्ड के दौरे पर आए जयप्रकाश नारायण ने समर्थन किया।
- 2 जनवरी, 1952 को पृथक झारखण्ड राज्य के गठन को राँची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित सभा में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने विरोध किया था।
छोटानागपुर संयुक्त संघ की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जस्टिन रिचर्ड
- बोनिफेस लकड़ा
- जयपाल सिंह
- सुखदेव महतो
Explanation:
- छोटानागपुर संयुक्त संघ का गठन 7 फरवरी, 1954 को किया गया था।
- इसके प्रथम अध्यक्ष सुखदेव सिंह थे।
- बाद में राम नारायण सिंह इस संगठन के अध्यक्ष बने।
- राम नारायण सिंह को ‘शेर-ए-छोटानागपुर’ भी कहा जाता है।
- महात्मा गांधी ने इन्हें ‘छोटानागपुर केसरी’ की उपाधि कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन-1940 के दौरान दी थी।
- छोटानागपुर संयुक्त संघ द्वारा 7 अप्रैल, 1954 को ‘छोटानागपुर सेपरेशन : दि ओनली सॉल्यूशन’ नामक पुस्तिका का प्रकाशन किया गया था।
- 11 नवंबर, 1953 को लोहरदगा में ‘छोटानागपुर संयुक्त मोर्चा’ की एक सभा का आयोजन किया गया। इसके प्रमुख नेता राम नारायण खलखो, सत्यदेव साहू व मधुसूदन अग्रवाल सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
बिरसा सेवा दल की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जस्टिन रिचर्ड
- ललित कुजूर
- जयपाल सिंह
- सुखदेव महतो
Explanation:
- ललित कुजुर द्वारा 1965 ई. में बिरसा सेवा दल का गठन किया गया।
- यह झारखण्ड का पहला छात्र संगठन था।
- इसका गठन झारखण्ड पार्टी से विभाजित होकर किया गया था।
ऑल इंडिया झारखंड पार्टी की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- जस्टिन रिचर्ड
- ललित कुजूर
- बागुन सुम्ब्रई
- सुखदेव महतो
Explanation:
- अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी का गठन 1967 ई. में बागुन सुम्ब्रई द्वारा किया गया।
- 1969 ई. में अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी से विभाजित होकर ‘झारखण्ड पार्टी’ नामक एक अलग पार्टी का गठन किया गया।
झारखंड पार्टी की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- एन इ होरो
- ललित कुजूर
- बागुन सुम्ब्रई
- सुखदेव महतो
Explanation:
- इस पार्टी का गठन 1969 में अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी से टूटकर हुआ था।
- इस पार्टी के प्रथम अध्यक्ष एन. ई. होरो थे।
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद्की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- एन इ होरो
- कार्तिक उरांव
- बागुन सुम्ब्रई
- सुखदेव महतो
Explanation:
- इस संगठन के संस्थापक इस संगठन का स्थापना 1968 में कार्तिक उरांव के द्वारा किया गया था
हुल झारखंड पार्टी की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- एन इ होरो
- कार्तिक उरांव
- बागुन सुम्ब्रई
- जस्टिन रिचर्ड
Explanation:
- हुल झारखण्ड पार्टी का गठन 1969 में जस्टिन रिचर्ड द्वारा किया गया।
- इसे ‘क्रांतिकारी झारखण्ड पार्टी’ भी कहा जाता है।
- यह पार्टी संथाल परगना क्षेत्र में सक्रिय थी।
- 1970 ई. में इस पार्टी का विभाजन हो गया।
शिवाजी समाज की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- एन इ होरो
- कार्तिक उरांव
- विनोद बिहारी महतो
- जस्टिन रिचर्ड
Explanation:
- शिवाजी समाज की स्थापना – 1969 में , विनोद बिहारी महतो द्वारा ।
- सोनोत संथाल समाज की स्थापना – 1970 में , शिबू सोरेन द्वारा ।
- मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना – 1971 ,ए.के.राय द्वारा ।
- धनबाद क्षेत्र में ए. के. राय (अरुण कुमार राय) ने श्रमिक संघ आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- 1971 ई. में MCC के द्वारा अलग राज्य की मांग रखी गयी थी।
सोनोत (शुद्ध) संथाल समाज की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- एन इ होरो
- शिबू सोरेन
- विनोद बिहारी महतो
- जस्टिन रिचर्ड
Explanation:
- शिवाजी समाज की स्थापना – 1969 में , विनोद बिहारी महतो द्वारा ।
- सोनोत संथाल समाज की स्थापना – 1970 में , शिबू सोरेन द्वारा ।
- मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना – 1971 ,ए.के.राय द्वारा ।
- धनबाद क्षेत्र में ए. के. राय (अरुण कुमार राय) ने श्रमिक संघ आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- 1971 ई. में MCC के द्वारा अलग राज्य की मांग रखी गयी थी।
मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- ए. के. राय
- शिबू सोरेन
- विनोद बिहारी महतो
- जस्टिन रिचर्ड
Explanation:
- शिवाजी समाज की स्थापना – 1969 में , विनोद बिहारी महतो द्वारा ।
- सोनोत संथाल समाज की स्थापना – 1970 में , शिबू सोरेन द्वारा ।
- मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना – 1971 ,ए.के.राय द्वारा ।
- धनबाद क्षेत्र में ए. के. राय (अरुण कुमार राय) ने श्रमिक संघ आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- 1971 ई. में MCC के द्वारा अलग राज्य की मांग रखी गयी थी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- ए. के. राय
- शिबू सोरेन
- विनोद बिहारी महतो
- तीनो
Explanation:
- गठन – 4 फरवरी, 1973 को,धनबाद के गोल्फ मैदान में
- विनोद बिहारी महतो तथा शिबू सोरेन के नेतृत्व में, ए. के. राय का महत्वपूर्ण भूमिका ।
- अध्यक्ष – विनोद बिहारी महतो
- महासचिव – शिबू सोरेन ।
- 1978 ई. में शिबू सोरेन एवं ए. के. राय ने पटना में आदिवासियों एक जुलूस निकाला।
- 6-7 मई, 1978 को राँची में झारखण्ड क्षेत्रीय बुद्धिजीवी सम्मेलन की गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो, डॉ. निर्मल मिंज, डॉ. रामदयाल मुण्डा समेत कई लोगों ने भाग लिया।
- झामुमो द्वारा जंगल काटो अभियान का संचालन 1978 में किया गया।
- 1980 बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो को 13 सीटों पर जीत मिली।
ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) की स्थापना किसके द्वारा की गयी थी?
- सूर्य सिंह बेसरा
- शिबू सोरेन
- विनोद बिहारी महतो
- तीनो
Explanation:
- स्थापना – सूर्य सिंह बेसरा द्वारा, जमशेदपुर में, 22 जून, 1986 को ।
- असम के AASU की तर्ज पर ।
- झारखण्ड का द्वितीय छात्र संगठन ।
- प्रथम अध्यक्ष – प्रभाकर तिर्की
- प्रथम महासचिव – सूर्य सिंह बेसरा
- सूर्यसिंह बेसरा ने ‘खून के बदले खून’ की रणनीति की घोषणा की थी।
- आजसू पार्टी ने खुद को JMM से पूरी तरह अलग 1987 में कर लिया।
- 30 Dec 1991 में रांची सम्मलेन में Dr. Ram Dayal Munda के नेतृत्व में आजसू के सहयोगी पार्टी के रूप में ‘झारखण्ड पीपुल्स पार्टी (JPP)’ का गठन किया गया था।
क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन की स्थापना कब की गयी थी?
- 1912
- 1911
- 1915
- 1930
Explanation:
- चाईबासा के निवासी व एंग्लिकन मिशन से जुड़े जे. बार्थोलमन ने 1912 में ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ की स्थापना राँची में की थी।
- इस संगठन का प्रारंभिक उद्देश्य गरीब ईसाई विद्यार्थियों को मदद था।
- जे. बार्थोलमन संत कोलंबा महाविद्यालय, हजारीबाग के छात्र थे।
- बाद में वे संत पॉल स्कूल राँची के प्राध्यापक भी रहे।
- जे. बार्थोलमन को झारखण्ड आंदोलन का जनक/पितामह माना जाता है।
- बाद में इस संगठन का नाम परिवर्तित करके ‘छोटानागपुर उन्नति समाज‘ कर दिया।
छोटानागपुर उन्नति समाज की स्थापना कब की गयी थी?
- 1912
- 1911
- 1915
- 1930
Explanation:
- एंग्लिकन मिशन के बिशप कैनेडी की सलाह पर ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ का नाम बदल कर 1915 ई.में ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ कर दिया गया।
- ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ की स्थापना जुएल लकड़ा, पॉल दयाल, बंदीराम उरांव व ठेबले उराँव के नेतृत्व में की गयी थी।
- 1915 ई.में संस्था द्वारा मुण्डारी भाषा में “आदिवासी” पत्रिका का प्रकाशन किया गया था।
- यह झारखण्ड का प्रथम अंतरजातीय आदिवासी संगठन था
- इसके सदस्य केवल आदिवासी ही हो सकते थे।
- 1928 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज द्वारा बिशप बंगयुन ल्यूक एवं जुएल लकड़ा के नेतृत्व में साइमन कमीशन को एक मांग पत्र सौंपा गया था।
- इस मांग-पत्र में आदिवासियों के लिए एक पृथक प्रशासनिक इकाई के गठन की मांग की गयी थी।
- जिसकी सिफारिश कमीशन ने 1930 के अपने रिपोर्ट में की थी
किसान सभा की स्थापना कब की गयी थी?
- 1912
- 1911
- 1915
- 1930
Explanation:
- किसान सभा का गठन 1930 ई.(अन्य – 1931 ) में छोटानागपुर उन्नति समाज से ही अलग होकर किया था।
- इसकी शुरुआत छोटा नागपुर में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने की थी
- इसके प्रथम अध्यक्ष ठेबले उराँव तथा प्रथम सचिव पॉल दयाल थे।
- इस संगठन प्रमुख उद्देश्य किसानों को जमींदारों के विरूद्ध संगठित करना था।
- 1935 में छोटानागपुर उन्नति समाज तथा किसान सभा का विलय किया गया।
छोटानागपुर कैथोलिक सभा की स्थापना कब की गयी थी?
- 1912
- 1933
- 1915
- 1930
Explanation:
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा का गठन 1933 ई. में आर्च बिशप सेबरिन की प्रेरणा से किया गया था।
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा के प्रथम अध्यक्ष बोनिफेस लकड़ा थे तथा प्रथम महासचिव इग्नेस बैक थे।
- इस संगठन का उद्देश्य कैथोलिकों के हितों की रक्षा करना था।
- भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत होने वाले प्रांतीय चुनाव में इस संगठन ने भाग लिया और श्री इग्निस बैक संसद में इसके प्रतिनिधि बने
- इग्नेश बैक 1937 में गठित बिहार प्रांतीय सरकार में इस क्षेत्र के किसी भी नेता को मंत्री न बनाने के कारण छोटानागपुर को बिहारी उपनिवेशवाद की संज्ञा दी
- इग्नेश बैग छोटानागपुर उन्नति समाज, किसान सभा और कैथोलिक सभा का आपस में विलय चाहते थे परिणाम स्वरूप 1938 में छोटानागपुर आदिवासी महासभा गठित हुआ
- इन तीनों दलों के समर्थन से इग्नेश बैंक रांची नगर पालिका का चुनाव भी जीते।
छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा की स्थापना कब की गयी थी?
- 1938
- 1933
- 1915
- 1930
Explanation:
- मई 1938 में 5 आदिवासी संगठनों को मिलाकर छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी महासभा’ की स्थापना की गयी (source)
- छोटानागपुर उन्नति समाज
- किसान सभा
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा
- मुण्डा सभा
- हो मालटो सभा
- इस नवगठित संगठन का प्रथम अध्यक्ष थियोडोर सुरीन, उपाध्यक्ष बंदराम उराँव तथा सचिव पॉल दयाल को चुना गया।
- आदिवासी महासभा
- 1939 में इसका नाम बदल कर ‘आदिवासी महासभा‘ कर दिया गया।
- 1939 ई. में आदिवासी महासभा के अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को चुना गया।
आदिवासी महासभा की स्थापना कब की गयी थी?
- 1938
- 1939
- 1915
- 1930
Explanation:
- मई 1938 में 5 आदिवासी संगठनों को मिलाकर छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी महासभा’ की स्थापना की गयी (source)
- छोटानागपुर उन्नति समाज
- किसान सभा
- छोटानागपुर कैथोलिक सभा
- मुण्डा सभा
- हो मालटो सभा
- इस नवगठित संगठन का प्रथम अध्यक्ष थियोडोर सुरीन, उपाध्यक्ष बंदराम उराँव तथा सचिव पॉल दयाल को चुना गया।
- आदिवासी महासभा
- 1939 में इसका नाम बदल कर ‘आदिवासी महासभा‘ कर दिया गया।
- 1939 ई. में आदिवासी महासभा के अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को चुना गया।
यूनाइटेड झारखंड पार्टी की स्थापना कब की गयी थी?
- 1938
- 1939
- 1948
- 1930
Explanation:
- जस्टिन रिचर्ड तथा जयपाल सिंह मुंडा द्वारा 1948 ई. में यूनाइटेड झारखण्ड पार्टी का गठन किया गया था।
- बाद में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा झारखण्ड पार्टी का गठन किया गया।
झारखंड पार्टी की स्थापना कब की गयी थी?
- 1938
- 1939
- 1950
- 1930
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- 2 जुलाई, 1951 को छोटानागपुर-संथाल परगना प्रांत के गठन की मांग को झारखण्ड के दौरे पर आए जयप्रकाश नारायण ने समर्थन किया।
- 2 जनवरी, 1952 को पृथक झारखण्ड राज्य के गठन को राँची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित सभा में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने विरोध किया था।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
- राज्य पुनर्गठन आयोग का आगमन 5 फरवरी, 1955 को राँची ।
- 16 जिलों को मिलाकर झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव (बिहार-7, उड़ीसा-4, बंगाल-3 मध्य प्रदेश-2)
- 1957 के चुनाव में बॉम्बे के पारसी मीनू मसानी ने राँची से चुनाव जीता था
- बिहार विधानसभा में सीताराम जगतराम द्वारा पहली बार पृथक झारखण्ड राज्य के गठन हेतु एक प्रस्ताव 10 फरवरी, 1961 को प्रस्तुत किया गया। परन्तु यह प्रस्ताव निरस्त हो गया।
- 20 जून, 1963 ई
- झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस में विलय
- बिहार के मुख्यमंत्री विनोदानंद झा की पहल पर
- सामुदायिक विकास मंत्री – जयपाल सिंह (मंत्री के पद से एक माह बाद इस्तीफा)
- 30 मई, 1969 – कांग्रेस से इस्तीफा
- जयपाल सिंह की पत्नी जहाँआरा इंदिरा गाँधी की मंत्रिपरिषद् में परिवहन एवं विमानन विभाग की उपमंत्री थीं।
छोटानागपुर संयुक्त संघ की स्थापना कब की गयी थी?
- 1938
- 1939
- 1954
- 1930
Explanation:
- छोटानागपुर संयुक्त संघ का गठन 7 फरवरी, 1954 को किया गया था।
- इसके प्रथम अध्यक्ष सुखदेव सिंह थे।
- बाद में राम नारायण सिंह इस संगठन के अध्यक्ष बने।
- राम नारायण सिंह को ‘शेर-ए-छोटानागपुर’ भी कहा जाता है।
- महात्मा गांधी ने इन्हें ‘छोटानागपुर केसरी’ की उपाधि कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन-1940 के दौरान दी थी।
- छोटानागपुर संयुक्त संघ द्वारा 7 अप्रैल, 1954 को ‘छोटानागपुर सेपरेशन : दि ओनली सॉल्यूशन’ नामक पुस्तिका का प्रकाशन किया गया था।
- 11 नवंबर, 1953 को लोहरदगा में ‘छोटानागपुर संयुक्त मोर्चा’ की एक सभा का आयोजन किया गया। इसके प्रमुख नेता राम नारायण खलखो, सत्यदेव साहू व मधुसूदन अग्रवाल सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
बिरसा सेवा दल की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1939
- 1954
- 1930
Explanation:
- ललित कुजुर द्वारा 1965 ई. में बिरसा सेवा दल का गठन किया गया।
- यह झारखण्ड का पहला छात्र संगठन था।
- इसका गठन झारखण्ड पार्टी से विभाजित होकर किया गया था।
ऑल इंडिया झारखंड पार्टी की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1954
- 1930
Explanation:
- अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी का गठन 1967 ई. में बागुन सुम्ब्रई द्वारा किया गया।
- 1969 ई. में अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी से विभाजित होकर ‘झारखण्ड पार्टी’ नामक एक अलग पार्टी का गठन किया गया।
ऑल इंडिया झारखंड पार्टी से अलग होकर झारखंड पार्टी की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1969
- 1968
Explanation:
- इस पार्टी का गठन 1969 में अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी से टूटकर हुआ था।
- इस पार्टी के प्रथम अध्यक्ष एन. ई. होरो थे।
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1969
- 1968
Explanation:
- अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के संस्थापक इस संगठन का स्थापना 1968 में कार्तिक उरांव के द्वारा किया गया था
- हुल झारखण्ड पार्टी का गठन 1969 में जस्टिन रिचर्ड द्वारा किया गया।
-
- इसे ‘क्रांतिकारी झारखण्ड पार्टी’ भी कहा जाता है।
- यह पार्टी संथाल परगना क्षेत्र में सक्रिय थी।
- 1970 ई. में इस पार्टी का विभाजन हो गया।
हुल झारखंड पार्टी की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1969
- 1968
Explanation:
- हुल झारखण्ड पार्टी का गठन 1969 में जस्टिन रिचर्ड द्वारा किया गया।
- इसे ‘क्रांतिकारी झारखण्ड पार्टी’ भी कहा जाता है।
- यह पार्टी संथाल परगना क्षेत्र में सक्रिय थी।
- 1970 ई. में इस पार्टी का विभाजन हो गया।
क्रांतिकारी झारखंड पार्टी की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1969
- 1968
Explanation:
शिवाजी समाज की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1969
- 1968
Explanation:
- शिवाजी समाज की स्थापना – 1969 में , विनोद बिहारी महतो द्वारा ।
- सोनोत संथाल समाज की स्थापना – 1970 में , शिबू सोरेन द्वारा ।
- मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना – 1971 ,ए.के.राय द्वारा ।
- धनबाद क्षेत्र में ए. के. राय (अरुण कुमार राय) ने श्रमिक संघ आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- 1971 ई. में MCC के द्वारा अलग राज्य की मांग रखी गयी थी।
सोनोत (शुद्ध) संथाल समाज की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1967
- 1969
- 1970
Explanation:
- शिवाजी समाज की स्थापना – 1969 में , विनोद बिहारी महतो द्वारा ।
- सोनोत संथाल समाज की स्थापना – 1970 में , शिबू सोरेन द्वारा ।
- मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना – 1971 ,ए.के.राय द्वारा ।
- धनबाद क्षेत्र में ए. के. राय (अरुण कुमार राय) ने श्रमिक संघ आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- 1971 ई. में MCC के द्वारा अलग राज्य की मांग रखी गयी थी।
मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना कब की गयी थी?
- 1965
- 1971
- 1969
- 1970
Explanation:
- शिवाजी समाज की स्थापना – 1969 में , विनोद बिहारी महतो द्वारा ।
- सोनोत संथाल समाज की स्थापना – 1970 में , शिबू सोरेन द्वारा ।
- मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना – 1971 ,ए.के.राय द्वारा ।
- धनबाद क्षेत्र में ए. के. राय (अरुण कुमार राय) ने श्रमिक संघ आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- 1971 ई. में MCC के द्वारा अलग राज्य की मांग रखी गयी थी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना कब की गयी थी?
- 1973
- 1971
- 1969
- 1970
Explanation:
- गठन – 4 फरवरी, 1973 को,धनबाद के गोल्फ मैदान में
- विनोद बिहारी महतो तथा शिबू सोरेन के नेतृत्व में, ए. के. राय का महत्वपूर्ण भूमिका ।
- अध्यक्ष – विनोद बिहारी महतो
- महासचिव – शिबू सोरेन ।
- 1978 ई. में शिबू सोरेन एवं ए. के. राय ने पटना में आदिवासियों एक जुलूस निकाला।
- 6-7 मई, 1978 को राँची में झारखण्ड क्षेत्रीय बुद्धिजीवी सम्मेलन की गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो, डॉ. निर्मल मिंज, डॉ. रामदयाल मुण्डा समेत कई लोगों ने भाग लिया।
- झामुमो द्वारा जंगल काटो अभियान का संचालन 1978 में किया गया।
- 1980 बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो को 13 सीटों पर जीत मिली।
ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) की स्थापना कब की गयी थी?
- 1973
- 1971
- 1969
- 1986
Explanation:
- स्थापना – सूर्य सिंह बेसरा द्वारा, जमशेदपुर में, 22 जून, 1986 को ।
- असम के AASU की तर्ज पर ।
- झारखण्ड का द्वितीय छात्र संगठन ।
- प्रथम अध्यक्ष – प्रभाकर तिर्की
- प्रथम महासचिव – सूर्य सिंह बेसरा
- सूर्यसिंह बेसरा ने ‘खून के बदले खून’ की रणनीति की घोषणा की थी।
- आजसू पार्टी ने खुद को JMM से पूरी तरह अलग 1987 में कर लिया।
- 30 Dec 1991 में रांची सम्मलेन में Dr. Ram Dayal Munda के नेतृत्व में आजसू के सहयोगी पार्टी के रूप में ‘झारखण्ड पीपुल्स पार्टी (JPP)’ का गठन किया गया था।
झारखण्ड पीपुल्स पार्टी (JPP) की स्थापना कब की गयी थी?
- 1973
- 1971
- 1991
- 1986
Explanation:
- ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (1986) स्थापना – सूर्य सिंह बेसरा द्वारा, जमशेदपुर में, 22 जून, 1986 को ।
-
- असम के AASU की तर्ज पर ।
- झारखण्ड का द्वितीय छात्र संगठन ।
- प्रथम अध्यक्ष – प्रभाकर तिर्की
- प्रथम महासचिव – सूर्य सिंह बेसरा
- सूर्यसिंह बेसरा ने ‘खून के बदले खून’ की रणनीति की घोषणा की थी।
- आजसू पार्टी ने खुद को JMM से पूरी तरह अलग 1987 में कर लिया।
- 30 Dec 1991 में रांची सम्मलेन में Dr. Ram Dayal Munda के नेतृत्व में आजसू के सहयोगी पार्टी के रूप में ‘झारखण्ड पीपुल्स पार्टी (JPP)’ का गठन किया गया था।
झारखण्ड समन्वय समिति की स्थापना कब की गयी थी?
- 1973
- 1987
- 1991
- 1986
Explanation:
झारखंड विषयक समिति की स्थापना कब की गयी थी?
- 1989
- 1987
- 1991
- 1986
Explanation:
क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन के गठन का मूल उद्देश्य क्या था?
- आदिवासियों का सामाजिक उत्थान करना
- गरीब इसाई विद्यार्थियों को मदद देना
- झारखण्ड में इसाई मिशनरियों को सुविधाएँ प्रदान करना
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
जे. बार्थोलमन निम्न में से किस महाविद्यालय के छात्र थे?
- संत जेवियर महाविद्यालय, राँची
- संत कोलम्बा महाविद्यालय, हजारीबाग
- संत पॉल महाविद्यालय, राँची
- संत फ्रांसिस महाविद्यालय
Explanation:
झारखण्ड का प्रथम अंतर्जातीय आदिवासी संगठन है
- छोटानागपुर उन्नति समाज
- आदिवासी महासभा
- झारखण्ड पार्टी
- बिरसा सेवा दल
Explanation:
- एंग्लिकन मिशन के बिशप कैनेडी की सलाह पर ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ का नाम बदल कर 1915 ई.में ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ कर दिया गया।
- ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ की स्थापना जुएल लकड़ा, पॉल दयाल, बंदीराम उरांव व ठेबले उराँव के नेतृत्व में की गयी थी।
- 1915 ई.में संस्था द्वारा मुण्डारी भाषा में “आदिवासी” पत्रिका का प्रकाशन किया गया था।
- यह झारखण्ड का प्रथम अंतरजातीय आदिवासी संगठन था
- इसके सदस्य केवल आदिवासी ही हो सकते थे।
- 1928 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज द्वारा बिशप बंगयुन ल्यूक एवं जुएल लकड़ा के नेतृत्व में साइमन कमीशन को एक मांग पत्र सौंपा गया था।
- इस मांग-पत्र में आदिवासियों के लिए एक पृथक प्रशासनिक इकाई के गठन की मांग की गयी थी।
- जिसकी सिफारिश कमीशन ने 1930 के अपने रिपोर्ट में की थी
किस संगठन द्वारा साइमन कमीशन को 1928 ई. में एक मांग पत्र सौंपा गया था?
- छोटानागपुर उन्नति समाज
- आदिवासी महासभा
- झारखण्ड पार्टी
- बिरसा सेवा दल
Explanation:
- एंग्लिकन मिशन के बिशप कैनेडी की सलाह पर ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ का नाम बदल कर 1915 ई.में ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ कर दिया गया।
- ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ की स्थापना जुएल लकड़ा, पॉल दयाल, बंदीराम उरांव व ठेबले उराँव के नेतृत्व में की गयी थी।
- 1915 ई.में संस्था द्वारा मुण्डारी भाषा में “आदिवासी” पत्रिका का प्रकाशन किया गया था।
- यह झारखण्ड का प्रथम अंतरजातीय आदिवासी संगठन था
- इसके सदस्य केवल आदिवासी ही हो सकते थे।
- 1928 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज द्वारा बिशप बंगयुन ल्यूक एवं जुएल लकड़ा के नेतृत्व में साइमन कमीशन को एक मांग पत्र सौंपा गया था।
- इस मांग-पत्र में आदिवासियों के लिए एक पृथक प्रशासनिक इकाई के गठन की मांग की गयी थी।
- जिसकी सिफारिश कमीशन ने 1930 के अपने रिपोर्ट में की थी
किस भाषा में छोटानागपुर उन्नति समाज द्वारा आदिवासी पत्रिका प्रकाशन किया गया था?
- हिन्दी
- कुडुख
- मुण्डारी
- बांग्ला
Explanation:
- एंग्लिकन मिशन के बिशप कैनेडी की सलाह पर ‘क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन’ का नाम बदल कर 1915 ई.में ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ कर दिया गया।
- ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ की स्थापना जुएल लकड़ा, पॉल दयाल, बंदीराम उरांव व ठेबले उराँव के नेतृत्व में की गयी थी।
- 1915 ई.में संस्था द्वारा मुण्डारी भाषा में “आदिवासी” पत्रिका का प्रकाशन किया गया था।
- यह झारखण्ड का प्रथम अंतरजातीय आदिवासी संगठन था
- इसके सदस्य केवल आदिवासी ही हो सकते थे।
- 1928 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज द्वारा बिशप बंगयुन ल्यूक एवं जुएल लकड़ा के नेतृत्व में साइमन कमीशन को एक मांग पत्र सौंपा गया था।
- इस मांग-पत्र में आदिवासियों के लिए एक पृथक प्रशासनिक इकाई के गठन की मांग की गयी थी।
- जिसकी सिफारिश कमीशन ने 1930 के अपने रिपोर्ट में की थी
किसान सभा के प्रथम सचिव कौन थे?
- पॉल दयाल
- ठेबले उराँव
- जयपाल सिंह
- जुएल लकड़ा
Explanation:
किसान सभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
- पॉल दयाल
- ठेबले उराँव
- जयपाल सिंह
- जुएल लकड़ा
Explanation:
छोटानागपुर कैथोलिक सभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
- पॉल दयाल
- ठेबले उराँव
- बोनिफेस लकड़ा
- जुएल लकड़ा
Explanation:
छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
- पॉल दयाल
- ठेबले उराँव
- बोनिफेस लकड़ा
- थियोडोर सुरीन
Explanation:
छोटानागपुर कैथोलिक सभा के प्रथम महासचिव कौन थे?
- इग्नेस बैक
- ठेबले उराँव
- बोनिफेस लकड़ा
- जुएल लकड़ा
Explanation:
छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा के प्रथम सचिव कौन थे?
- इग्नेस बैक
- ठेबले उराँव
- बोनिफेस लकड़ा
- पॉल दयाल
Explanation:
छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा के प्रथम उपाध्यक्ष कौन थे?
- इग्नेस बैक
- ठेबले उराँव
- बंदराम उराँव
- पॉल दयाल
Explanation:
किस वर्ष किसान सभा का विलय छोटानागपुर उन्नति समाज में कर दिया गया?
- 1931
- 1933
- 1935
- 1937
Explanation:
- किसान सभा का गठन 1930 ई.(अन्य – 1931 ) में छोटानागपुर उन्नति समाज से ही अलग होकर किया था।
- इसकी शुरुआत छोटा नागपुर में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने की थी
- इसके प्रथम अध्यक्ष ठेबले उराँव तथा प्रथम सचिव पॉल दयाल थे।
- इस संगठन प्रमुख उद्देश्य किसानों को जमींदारों के विरूद्ध संगठित करना था।
- 1935 में छोटानागपुर उन्नति समाज तथा किसान सभा का विलय किया गया।
आदिवासी महासभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे
- पॉल दयाल
- ठेबले उराँव
- बोनिफेस लकड़ा
- थियोडोर सुरीन
Explanation:
खरसावां गोली काण्ड की घटना कब हुयी थी?
- 1 जनवरी, 1948
- 1 फरवरी, 1948
- 1 मार्च, 1948
- 1 अप्रैल, 1948
Explanation:
झारखण्ड पार्टी का गठन किस स्थान पर किया गया था?
- राँची
- हजारीबाग
- जमशेदपुर
- चाईबासा
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
झारखण्ड पार्टी का पुराना नाम क्या था?
- झारखण्ड यूनाइटेड पार्टी
- किसान सभा
- आदिवासी सभा
- छोटानागपुर उन्नति समाज
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
झारखण्ड पार्टी ने किस वर्ष पहली बार विधानसभा चुनाव में भाग लिया था?
- 1951
- 1952
- 1954
- 1955
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
1952 के बिहार विधान सभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी का चुनाव चिह्न निम्न में से था
- रोटी
- तीर
- धनुष
- मुर्गा
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
1952 ई. एकीकृत बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी को कुल कितनी सीटें प्राप्त हुयी?
- 05
- 20
- 33
- 52
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
1957 के एकीकृत बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी को कुल कितनी सीटें प्राप्त हुयी?
- 05
- 20
- 33
- 32
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
1962 के एकीकृत बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी को कुल कितनी सीटें प्राप्त हुयी?
- 05
- 20
- 33
- 32
Explanation:
- 31 दिसंबर से 1 जनवरी, 1950 को जमशेदपुर में जयपाल सिंह मुण्डा द्वारा आदिवासी महासभा का नाम बदल कर झारखण्ड पार्टी कर दिया गया।
- इस पार्टी के पहले अध्यक्ष जयपाल सिंह मुण्डा को बनाया गया।
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
झारखण्ड पार्टी के द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष कितने जिलों को मिलकार झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव रखा गया था?
- 05
- 20
- 18
- 16
Explanation:
- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखण्ड पार्टी
- 1952
- चुनाव चिह्न ‘मुर्गा’
- 33 सीटें प्राप्त
- मुख्य विपक्षी दल
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1957
- 32 सीटें प्राप्त
- विपक्षी दल का दर्जा
- बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता – सुशील कुमार बागे
- 1962
- 20 सीट प्राप्त
- 1952
- राज्य पुनर्गठन आयोग का आगमन 5 फरवरी, 1955 को राँची ।
- 16 जिलों को मिलाकर झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव (बिहार-7, उड़ीसा-4, बंगाल-3 मध्य प्रदेश-2)
- 1957 के चुनाव में बॉम्बे के पारसी मीनू मसानी ने राँची से चुनाव जीता था
- बिहार विधानसभा में सीताराम जगतराम द्वारा पहली बार पृथक झारखण्ड राज्य के गठन हेतु एक प्रस्ताव 10 फरवरी, 1961 को प्रस्तुत किया गया। परन्तु यह प्रस्ताव निरस्त हो गया।
किस तिथि को सीताराम जगतराम द्वारा बिहार विधानसभा में पहली बार पृथक झारखण्ड निर्माण का प्रस्ताव रखा गया?
- 5 फरवरी, 1961
- 10 फरवरी, 1961
- 10 मार्च, 1961
- 25 मार्च, 1961
Explanation:
वर्ष 1963 में निम्न में से किसकी सिफारिश पर झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस पार्टी में विलय किया गया?
- जयपाल सिंह
- पॉल दयाल
- श्री कृष्ण सिंह
- विनोदानंद झा
Explanation:
- राज्य पुनर्गठन आयोग का आगमन 5 फरवरी, 1955 को राँची ।
- 16 जिलों को मिलाकर झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव (बिहार-7, उड़ीसा-4, बंगाल-3 मध्य प्रदेश-2)
- 1957 के चुनाव में बॉम्बे के पारसी मीनू मसानी ने राँची से चुनाव जीता था
- बिहार विधानसभा में सीताराम जगतराम द्वारा पहली बार पृथक झारखण्ड राज्य के गठन हेतु एक प्रस्ताव 10 फरवरी, 1961 को प्रस्तुत किया गया। परन्तु यह प्रस्ताव निरस्त हो गया।
- 20 जून, 1963 ई
- झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस में विलय
- बिहार के मुख्यमंत्री विनोदानंद झा की पहल पर
- सामुदायिक विकास मंत्री – जयपाल सिंह (मंत्री के पद से एक माह बाद इस्तीफा)
- 30 मई, 1969 – कांग्रेस से इस्तीफा
- जयपाल सिंह की पत्नी जहाँआरा इंदिरा गाँधी की मंत्रिपरिषद् में परिवहन एवं विमानन विभाग की उपमंत्री थीं।
विनोदानंद झा के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार सरकार में जयपाल सिंह किस विभाग के मंत्री थे?
- आदिवासी कल्याण
- शिक्षा
- पंचायती राज
- स्वास्थ्य
Explanation:
- राज्य पुनर्गठन आयोग का आगमन 5 फरवरी, 1955 को राँची ।
- 16 जिलों को मिलाकर झारखण्ड राज्य के गठन का प्रस्ताव (बिहार-7, उड़ीसा-4, बंगाल-3 मध्य प्रदेश-2)
- 1957 के चुनाव में बॉम्बे के पारसी मीनू मसानी ने राँची से चुनाव जीता था
- बिहार विधानसभा में सीताराम जगतराम द्वारा पहली बार पृथक झारखण्ड राज्य के गठन हेतु एक प्रस्ताव 10 फरवरी, 1961 को प्रस्तुत किया गया। परन्तु यह प्रस्ताव निरस्त हो गया।
- 20 जून, 1963 ई
- झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस में विलय
- बिहार के मुख्यमंत्री विनोदानंद झा की पहल पर
- सामुदायिक विकास मंत्री – जयपाल सिंह (मंत्री के पद से एक माह बाद इस्तीफा)
- 30 मई, 1969 – कांग्रेस से इस्तीफा
- जयपाल सिंह की पत्नी जहाँआरा इंदिरा गाँधी की मंत्रिपरिषद् में परिवहन एवं विमानन विभाग की उपमंत्री थीं।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा द्वारा किस वर्ष जंगल काटो अभियान चलाया गया?
- 1978 ई.
- 1980 ई.
- 1982 ई.
- 1984 ई.
Explanation:
- गठन – 4 फरवरी, 1973 को,धनबाद के गोल्फ मैदान में
- विनोद बिहारी महतो तथा शिबू सोरेन के नेतृत्व में, ए. के. राय का महत्वपूर्ण भूमिका ।
- अध्यक्ष – विनोद बिहारी महतो
- महासचिव – शिबू सोरेन ।
- 1978 ई. में शिबू सोरेन एवं ए. के. राय ने पटना में आदिवासियों एक जुलूस निकाला।
- 6-7 मई, 1978 को राँची में झारखण्ड क्षेत्रीय बुद्धिजीवी सम्मेलन की गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो, डॉ. निर्मल मिंज, डॉ. रामदयाल मुण्डा समेत कई लोगों ने भाग लिया।
- झामुमो द्वारा जंगल काटो अभियान का संचालन 1978 में किया गया।
- 1980 बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो को 13 सीटों पर जीत मिली।
