भारतीय मानसून प्रणाली

भारतीय मानसून एक जटिल मौसमी व्यवस्था है जो दक्षिण एशिया के जलवायु चक्र को निर्धारित करती है। यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर): यह भारत में वार्षिक वर्षा का लगभग 80% लाता है।
  • उत्तर-पूर्व मानसून (अक्टूबर-दिसंबर): इससे मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में वर्षा होती है।

मानसून की अनियमितताएँ और परिवर्तनशीलता भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

भारत के जलवायु प्रकार

भारत में मुख्य रूप से निम्नलिखित जलवायु प्रकार पाए जाते हैं:

  • उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु: पश्चिमी घाट, अंडमान निकोबार द्वीप समूह
  • उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु: राजस्थान, गुजरात का कुछ भाग
  • उपोष्णकटिबंधीय जलवायु: उत्तरी plans
  • पर्वतीय जलवायु: हिमालयी क्षेत्र
  • मरुस्थलीय जलवायु: थार मरुस्थल

हरित क्रांति और कृषि पर प्रभाव

1960 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति ने भारतीय कृषि को गहराई से प्रभावित किया। इसके मुख्य घटक थे:

  • उच्च उपज वाली किस्मों (HYV) का परिचय
  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
  • रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग
  • आधुनिक कृषि यंत्रों की शुरुआत

सकारात्मक प्रभाव:

  • खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
  • खाद्य सुरक्षा में सुधार
  • कृषि निर्यात में वृद्धि

नकारात्मक प्रभाव:

  • मृदा स्वास्थ्य का ह्रास
  • जल संसाधनों पर दबाव
  • आर्थिक असमानता में वृद्धि
  • जैव विविधता का नुकसान

खाद्य अल्पता (Food Insecurity)

भारत में खाद्य अल्पता एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, भले ही देश ने खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।

मुख्य कारण:

  • आय असमानता और गरीबी
  • खाद्य वितरण प्रणाली में कमियाँ
  • जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव
  • खाद्यान्न का अपर्याप्त भंडारण और बर्बादी
  • जनसंख्या दबाव

समाधान के उपाय:

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का सुदृढ़ीकरण
  • कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहन
  • जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा
  • खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन
  • जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों को अपनाना

भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है जो टिकाऊ कृषि, न्यायसंगत वितरण और पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करे।

JPSC MAINS PAPER 3/Geography Chapter – 12