प्राकृतिक वनस्पतियाँ, वन्य जीवन संरक्षण एवं बायोस्फीयर रिजर्व

भारत अपनी विशाल भौगोलिक, जलवायविक और सांस्कृतिक विविधता के कारण प्राकृतिक वनस्पतियों और वन्य जीवन की दृष्टि से एक समृद्ध देश है। यहाँ की जैव विविधता का संरक्षण एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य है।

भारत में प्राकृतिक वनस्पतियाँ (Natural Vegetation in India)

भारत में वनस्पति मुख्यतः वर्षा, तापमान, मृदा और भू-आकृति पर निर्भर करती है। मोटे तौर पर इसे निम्नलिखित प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

  1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests)
    • विशेषताएँ: ये वन भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यहाँ के वृक्ष सदैव हरे-भरे रहते हैं और इनकी ऊँचाई अधिक होती है।
    • वनस्पति: रबर, महोगनी, एबोनी, आयरनवुड आदि।
    • क्षेत्र: पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, असम के कुछ भाग।
  2. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests)
    • विशेषताएँ: ये भारत के सर्वाधिक क्षेत्र में फैले वन हैं। इनके पत्ते ग्रीष्म ऋतु में झड़ जाते हैं।
    • प्रकार: आर्द्र पर्णपाती (तेजपात, साल, बाँस) और शुष्क पर्णपाती (बबूल, बेर, नीम)।
    • क्षेत्र: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा।
  3. मरुस्थलीय वनस्पति (Desert Vegetation)
    • विशेषताएँ: कंटीली झाड़ियाँ और छोटे पौधे जो न्यून वर्षा और उच्च वाष्पीकरण को सहन कर सकते हैं।
    • वनस्पति: बबूल, खेजड़ी, केक्टस, विभिन्न घासें।
    • क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात का कच्छ क्षेत्र।
  4. पर्वतीय वन (Mountain Forests)
    • विशेषताएँ: ऊँचाई के साथ वनस्पति के प्रकार बदलते हैं।
    • वनस्पति: ऊँचाई बढ़ने पर चौड़ी पत्ती के वन, शंकुधारी वन (चीड़, देवदार, फर) और अंत में अल्पाइन घास के मैदान आते हैं।
    • क्षेत्र: हिमालय, नीलगिरि, पश्चिमी घाट के ऊँचे भाग।
  5. ज्वारीय या मैंग्रोव वन (Mangrove Forests)
    • विशेषताएँ: समुद्र तटीय लवणीय जल में उगने वाले वन। इनकी जड़ें जल से ऊपर निकली रहती हैं।
    • वनस्पति: सुंदरी वृक्ष (इन्हीं के नाम पर सुंदरवन), गोरन, केओरा।
    • क्षेत्र: सुंदरवन (प. बंगाल), गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा, अंडमान-निकोबार।

वन्य जीवन संरक्षण (Wildlife Conservation)

मानवीय गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं और कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं। इनके संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा अनेक उपाय किए गए हैं:

  1. संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क
    • राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): इनमें मानवीय हस्तक्षेप पूर्णतः वर्जित है। उद्देश्य प्राकृतिक पारिस्थितिकी की रक्षा करना है। (जैसे – कॉर्बेट, काजीरंगा, कान्हा)।
    • वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries): इनमें संरक्षण का उद्देश्य विशिष्ट वन्यजीवों की सुरक्षा करना है। इनमें कुछ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति हो सकती है।
  2. प्रोजेक्ट टाइगर (1973)
    • बाघों के आवास का संरक्षण और शिकार पर रोक लगाने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल। इसके अंतर्गत देश में 50+ टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए हैं।
  3. प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992)
    • हाथियों के आवासों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष को कम करना और हाथियों के शिकार पर रोक लगाना इसका मुख्य उद्देश्य है।
  4. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
    • यह अधिनियम शिकार पर प्रतिबंध लगाता है और संरक्षित क्षेत्रों की घोषणा के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  5. जैव विविधता अधिनियम, 2002
    • यह अधिनियम जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves)

बायोस्फीयर रिजर्व UNESCO के ‘मैन एंड बायोस्फीयर (MAB)’ कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित ऐसे विशेष क्षेत्र हैं जो संरक्षण और विकास के बीच सामंजस्य स्थापित करते हैं। ये केवल जीवों का ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली का भी संरक्षण करते हैं।

उद्देश्य:

  • जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण।
  • पारिस्थितिकी तंत्र और उसके तत्वों का अध्ययन एवं शोध।
  • स्थानीय समुदायों का सतत विकास।

संरचना (जोनिंग):

  • कोर जोन (Core Zone): यह सबसे आंतरिक और सख्ती से संरक्षित क्षेत्र होता है। इसमें किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि की अनुमति नहीं होती।
  • बफर जोन (Buffer Zone): कोर जोन के चारों ओर का क्षेत्र। इसमें सीमित शोध, शिक्षा और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों की अनुमति होती है।
  • संक्रमण जोन (Transition Zone): यह सबसे बाहरी क्षेत्र है जहाँ स्थायी human settlements, कृषि और सतत विकास की गतिविधियाँ होती हैं।

भारत के प्रमुख बायोस्फीयर रिजर्व:

  • निलगिरि (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) – पहला भारतीय बायोस्फीयर रिजर्व
  • सुंदरवन (पश्चिम बंगाल)
  • मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु)
  • नंदा देवी (उत्तराखंड)
  • पंचमढ़ी (मध्य प्रदेश)
  • ग्रेट निकोबार (निकोबार द्वीप समूह)

निष्कर्षतः, प्राकृतिक वनस्पतियाँ और वन्यजीव हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व जैसी संकल्पनाएँ मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। एक सतत भविष्य के लिए इनका संरक्षण अति आवश्यक है।

JPSC MAINS PAPER 3/Geography Chapter – 13