जनसंख्या: वृद्धि, वितरण एवं घनत्व
जनसंख्या भूगोल का एक प्रमुख अध्ययन-क्षेत्र है। किसी देश या प्रदेश के आर्थिक विकास, संसाधन-नियोजन एवं नीति-निर्माण में वहाँ की जनसंख्या का आकार, उसकी वृद्धि, उसका स्थानिक वितरण और घनत्व अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
1. जनसंख्या वृद्धि (Population Growth)
जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य किसी निश्चित geographical क्षेत्र में एक निश्चित समयावधि में होने वाले जनसंख्या परिवर्तन से है। इसकी गणना मुख्यतः दो आधारों पर की जाती है:
- निरपेक्ष वृद्धि (Absolute Growth): किसी अवधि के अंत और आरंभ की जनसंख्या का अंतर। उदाहरण के लिए, भारत की जनसंख्या 2001 में 102.7 करोड़ थी जो 2011 में बढ़कर 121.02 करोड़ हो गई। अतः निरपेक्ष वृद्धि 18.32 करोड़ थी।
- वार्षिक वृद्धि दर (Annual Growth Rate): प्रतिशत में व्यक्त वह दर जिससे प्रति वर्ष जनसंख्या बढ़ती है।
जनसंख्या वृद्धि के घटक
- जन्म दर (Birth Rate): प्रति हज़ार व्यक्तियों पर जीवित जन्मे बच्चों की संख्या।
- मृत्यु दर (Death Rate): प्रति हज़ार व्यक्तियों पर मरने वाले व्यक्तियों की संख्या।
- प्रवास (Migration): लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
- आप्रवासन (Immigration): किसी क्षेत्र में प्रवेश करना (जनसंख्या में वृद्धि)।
- उप्रवासन (Emigration): किसी क्षेत्र से बाहर जाना (जनसंख्या में कमी)।
सूत्र: जनसंख्या वृद्धि दर = (जन्म दर – मृत्यु दर) + शुद्ध प्रवास
भारत के संदर्भ में
- भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर 20वीं सदी में बहुत अधिक रही (“जनसंख्या विस्फोट”)।
- हाल के दशकों में यह दर धीरे-धीरे घट रही है (2011 की जनगणना में decadal growth rate 17.7% थी, जो 2001 के 21.5% से कम है)।
- इसके मुख्य कारण हैं: साक्षरता में वृद्धि, संयुक्त परिवारों का विघटन, महिला शिक्षा, परिवार नियोजन कार्यक्रम, आदि।
2. जनसंख्या वितरण (Population Distribution)
जनसंख्या वितरण से तात्पर्य है कि लोग देश या विश्व के विभिन्न भागों में किस प्रकार ‘फैले’ हुए हैं। यह वितरण अत्यंत असमान है।
जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
- भौतिक कारक:
- स्थलाकृति: लोग मैदानी इलाकों में अधिक बसते हैं, पर्वतीय और पहाड़ी क्षेत्रों में कम।
- जलवायु: अत्यधिक गर्म (रेगिस्तान) या अत्यधिक ठंडे (टुंड्रा) क्षेत्रों में जनसंख्या विरल होती है।
- जल की उपलब्धता: नदियों के किनारे सदैव से सघन आबाद क्षेत्र रहे हैं।
- मृदा: उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल हैं, hence सघन जनसंख्या।
- आर्थिक कारक:
- खनिज संपदा: कोयला, लौह-अयस्क आदि के क्षेत्र उद्योगों को आकर्षित करते हैं, जिससे जनसंख्या एकत्रित होती है (e.g., झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र)।
- औद्योगीकरण: बड़े शहर और औद्योगिक केंद्र रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
- यातायात के साधन: परिवहन की सुविधा वाले क्षेत्र अधिक आबाद होते हैं।
- सामाजिक-सांस्कृतिक कारक: धार्मिक या सांस्कृतिक महत्व के स्थान (जैसे वाराणसी, अमृतसर) भी जनसंख्या को आकर्षित करते हैं।
3. जनसंख्या घनत्व (Population Density)
जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र की जनसंख्या की सघनता का सूचक है। यह बताता है कि प्रति इकाई क्षेत्रफल (आमतौर पर वर्ग किलोमीटर) में औसतन कितने लोग निवास करते हैं।
सूत्र: जनसंख्या घनत्व = (क्षेत्र की कुल जनसंख्या) / (क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल वर्ग किमी. में)
भारत में जनसंख्या घनत्व
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी था।
- यह घनत्व विभिन्न राज्यों में बहुत भिन्न है:
- उच्चतम घनत्व: बिहार (1106), पश्चिम बंगाल (1028), केरल (860)।
- निम्नतम घनत्व: अरुणाचल प्रदेश (17), मिजोरम (52), सिक्किम (86)।
- घनत्व के आधार पर भारत के राज्यों को तीन वर्गों में बांटा जा सकता है:
- उच्च जनसंख्या घनत्व: > 500 व्यक्ति/वर्ग किमी (e.g., उत्तर प्रदेश, बिहार, प. बंगाल)
- मध्यम जनसंख्या घनत्व: 250-500 व्यक्ति/वर्ग किमी (e.g., तमिलनाडु, महाराष्ट्र)
- निम्न जनसंख्या घनत्व: < 250 व्यक्ति/वर्ग किमी (e.g., राजस्थान, मध्य प्रदेश, पहाड़ी राज्य)
निष्कर्ष
जनसंख्या वृद्धि, वितरण और घनत्व आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। तीव्र वृद्धि से संसाधनों पर दबाव बढ़ता है, जबकि असमान वितरण और घनत्व क्षेत्रीय असंतुलन पैदा करते हैं। भारत जैसे विकासशील देश के लिए sustainable development के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जनसंख्या के इन पहलुओं का गहन अध्ययन और उसके आधार पर प्रभावी नीति निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
