भूमि संसाधन: प्रयोग एवं मुख्य फसलें
भूमि एक सीमित एवं अमूल्य प्राकृतिक संसाधन है जो मानवीय क्रियाओं का आधार है। भारत में भूमि संसाधनों का उपयोग मुख्य रूप से कृषि, वन, चरागाह, बंजर भूमि तथा गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किया जाता है। देश की आर्थिक संरचना में कृषि का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें विविध फसलों का उत्पादन होता है।
भारत की मुख्य फसलें
जलवायु, मृदा और भू-आकृति में विविधता के कारण भारत में अनेक प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। इन्हें मोटे तौर पर दो वर्गों में बांटा जा सकता है:
- खाद्यान्न फसलें (जैसे: चावल, गेहूँ, मक्का, दालें)
- वाणिज्यिक / नकदी फसलें (जैसे: कपास, जूट, गन्ना, रबर, चाय, कॉफी)
1. चावल (Rice)
- उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु, 25°C से अधिक तापमान, 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता।
- मुख्य उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम।
- मृदा: दोमट मिट्टी, चिकनी बलुई दोमट जिसमें जल धारण क्षमता अधिक हो।
- भूमि उपयोग: अधिकांशतः निचले मैदानों, नदी घाटियों, डेल्टाई क्षेत्रों और सिंचित क्षेत्रों में उगाया जाता है।
2. गेहूँ (Wheat)
- उपयुक्त जलवायु: शीतोष्ण जलवायु, बुआई के समय मध्यम तापमान (10-15°C) और पकते समय शुष्क, गर्म मौसम (20-25°C) आवश्यक।
- मुख्य उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, बिहार।
- मृदा: जलोढ़ दोमट मिट्टी या काली मिट्टी (रेगुर)।
- भूमि उपयोग: उत्तरी मैदानों और मालवा के पठार के विशाल समतल क्षेत्रों में, अच्छी सिंचाई सुविधा वाले प्रदेशों में उगाया जाता है।
3. कपास (Cotton)
- उपयुक्त जलवायु: शुष्क उपोष्णकटिबंधीय जलवायु, पाला रहित 210 दिनों का लंबा गर्म मौसम।
- मुख्य उत्पादक राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा।
- मृदा: काली कपास मिट्टी (रेगुर) जिसमें जलधारण क्षमता अच्छी होती है।
- भूमि उपयोग: डेक्कन के लावा पठार के विस्तृत क्षेत्रों में, जहाँ जल निकासी अच्छी होती है, उगाई जाती है।
4. जूट (Jute)
- उपयुक्त जलवायु: उच्च तापमान (24°C से 35°C) और उच्च आर्द्रता वाली जलवायु, लगभग 150-200 सेमी वर्षा।
- मुख्य उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, मेघालय।
- मृदा: नदियों के बाढ़ वाले मैदानों की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी।
- भूमि उपयोग: गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टा क्षेत्र की निचली, समतल एवं बाढ़ वाली भूमि में उगाई जाती है।
5. गन्ना (Sugarcane)
- उपयुक्त जलवायु: उष्ण और आर्द्र जलवायु, 21°C से 27°C का तापमान, 75-150 सेमी वर्षा।
- मुख्य उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात।
- मृदा: भारी दोमट, गहरी और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी।
- भूमि उपयोग: समतल मैदानी क्षेत्रों में, जहाँ सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो, उगाया जाता है।
6. रबर (Rubber)
- उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु, 25°C-35°C तापमान, 200 सेमी से अधिक वर्षा, उच्च आर्द्रता।
- मुख्य उत्पादक राज्य: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, त्रिपुरा, असम के गारो पहाड़ियाँ।
- मृदा: गहरी, अच्छी जल निकासी वाली लेटराइट मिट्टी।
- भूमि उपयोग: पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर राज्यों की पहाड़ियों की ढलानों पर बागानों के रूप में उगाया जाता है।
7. चाय (Tea)
- उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु, ठंडा से गर्म तापमान, 150-250 सेमी वर्षा, कोहरा और बादल छाए रहना लाभदायक।
- मुख्य उत्पादक राज्य: असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), तमिलनाडु (नीलगिरि), केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड।
- मृदा: गहरी, उपजाऊ, ह्यूमस युक्त, अच्छी जल निकासी वाली लेटराइट मिट्टी।
- भूमि उपयोग: पहाड़ियों की ढलानों पर बागानों के रूप में उगाई जाती है ताकि जल-जमाव न हो।
8. कॉफी (Coffee)
- उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय उच्चभूमि की जलवायु, 15°C-28°C तापमान, 150-250 सेमी वर्षा।
- मुख्य उत्पादक राज्य: कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु (मुख्य रूप से दक्षिणी राज्यों की पहाड़ियाँ)।
- मृदा: अम्लीय, गहरी, जैविक पदार्थों से भरपूर, अच्छी जल निकासी वाली लेटराइट मिट्टी।
- भूमि उपयोग: पश्चिमी घाट की ढलानों पर छायादार वृक्षों के नीचे बागानों के रूप में उगाई जाती है।
निष्कर्ष
भारत में भूमि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विविध भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहाँ विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन संभव हो पाता है। हालाँकि, बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगीकरण के दबाव के कारण कृषि योग्य भूमि लगातार सिमट रही है। अतः टिकाऊ कृषि पद्धतियों, फसल चक्र, जल प्रबंधन और मृदा संरक्षण को अपनाकर ही भूमि संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण किया जा सकता है।
