लोक प्रशासन: प्रस्तावना, अर्थ, विस्तार और महत्त्व
लोक प्रशासन (Public Administration) राज्य द्वारा जनता के हित में किए जाने वाले सभी कार्यों का समुच्चय है। यह शासन की वह मशीनरी है जो सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने का काम करती है। आधुनिक कल्याणकारी राज्य में लोक प्रशासन का दायरा और महत्व दोनों ही बहुत बढ़ गए हैं।
लोक प्रशासन का अर्थ एवं परिभाषाएँ
लोक प्रशासन दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘लोक’ (Public) यानी जनता और ‘प्रशासन’ (Administration) यानी प्रबंधन। इस प्रकार, सरल शब्दों में, ‘लोक प्रशासन’ का अर्थ है ‘जनता का प्रबंधन’।
विभिन्न विद्वानों द्वारा परिभाषाएँ:
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- एल. डी. वाइट: “लोक प्रशासन में वे सभी कार्य सम्मिलित हैं जिनका उद्देश्य सरकारी नीतियों को पूरा करना या कार्यान्वित करना है।”
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- वुडरो विल्सन (लोक प्रशासन के जनक): “लोक प्रशासन कानूनों की व्यवस्थित और विस्तृत क्रियान्विति है। प्रत्येक लोक कानून एक कार्य है, जिसे प्रशासन द्वारा अमल में लाया जाता है।”
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- डिमॉक: “लोक प्रशासन लोक प्रयोजनों की पूर्ति के लिए होने वाला सहकारी समूह कार्य है।”
लोक प्रशासन की अवधारणा
लोक प्रशासन की अवधारणा को दो दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है:
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- व्यापक दृष्टिकोण (Broad View): इसके अनुसार लोक प्रशासन में सरकार के सभी तीनों अंगों – कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की सभी गतिविधियाँ शामिल हैं। यह दृष्टिकोण अमेरिकी विद्वान वुडरो विल्सन से जुड़ा है।
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- संकुचित दृष्टिकोण (Narrow View): इसके अनुसार लोक प्रशासन केवल कार्यपालिका की गतिविधियों तक सीमित है, अर्थात केवल सरकारी नीतियों को लागू करने वाले विभागों और एजेंसियों का कार्य। यह दृष्टिकोण एल. डी. वाइट और लूथर गुलिक से जुड़ा है।
लोक प्रशासन की मुख्य विशेषताएँ
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- सरकारी क्रिया-कलाप: यह राज्य की एक विशेष गतिविधि है जो सरकारी मशीनरी द्वारा संचालित होती है।
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- लोकहित में कार्य: इसका मुख्य उद्देश्य निजी लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनकल्याण और सार्वजनिक हित की सेवा करना है।
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- निरंतरता एवं स्थायित्व: यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। सरकारें बदल सकती हैं लेकिन प्रशासन का कार्य चलता रहता है।
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- विशिष्ट स्वरूप: इसका एक सुनिश्चित संगठनात्मक ढाँचा, नियम, विनियम और पदसोपान (Hierarchy) होता है।
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- लोक उत्तरदायित्व: लोक प्रशासन अंततः जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। यह उत्तरदायित्व संसद, न्यायपालिका और मीडिया आदि के माध्यम से सुनिश्चित होता है।
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- अंतर्विषयक प्रकृति: इसमें राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और प्रबंधन (Management) जैसे विषयों का समन्वय होता है।
लोक प्रशासन का विस्तार / कार्यक्षेत्र
आधुनिक युग में लोक प्रशासन का दायरा अत्यंत विस्तृत हो गया है। इसके प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं:
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- नीति निर्माण में सहयोग: लोक प्रशासन नीति निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी जानकारी, आँकड़े और विशेषज्ञता उपलब्ध कराकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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- लोक नीति का क्रियान्वयन: यह लोक प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। संसद द्वारा पारित कानूनों और सरकारी नीतियों को जमीन पर उतारना इसी का काम है।
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- लोक सेवाओं का वितरण: शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, बिजली, पानी, सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ नागरिकों तक पहुँचाना।
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- राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति: सेना, पुलिस, intelligence एजेंसियों का प्रबंधन और विदेश नीति के क्रियान्वयन में भूमिका।
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- सामाजिक-आर्थिक विकास: देश के आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन के लिए योजनाएँ बनाना और उन्हें लागू करना।
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- नियामक भूमिका: व्यवसायों, पर्यावरण, स्वास्थ्य मानकों आदि का विनियमन (Regulation) करना तथा नागरिक अधिकारों की रक्षा करना।
लोक प्रशासन का महत्त्व
किसी भी आधुनिक राज्य के लिए एक कुशल, निष्पक्ष और जवाबदेह लोक प्रशासन अनिवार्य है। इसके महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
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- सरकार और जनता के बीच कड़ी: लोक प्रशासन सरकार और आम नागरिक के बीच एक पुल का काम करता है। यही वह माध्यम है जिसके द्वारा नागरिक सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं।
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- राष्ट्र निर्माण में भूमिका: देश के बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में इसकी中心ीय भूमिका होती है।
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- लोक कल्याण का साधन: आधुनिक राज्य एक कल्याणकारी राज्य है और लोक प्रशासन उस कल्याण को वास्तविक रूप देने का साधन है।
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- राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा: एक कुशल प्रशासन देश की आंतरिक सुरक्षा और अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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- सामाजिक परिवर्तन का एजेंट: प्रशासन सामाजिक कुरीतियों को दूर करने (जैसे- छुआछूत, लिंग भेद) और प्रगतिशील सामाजिक नीतियों को लागू करने में मदद करता है।
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- आपदा प्रबंधन: बाढ़, सूखा, महामारी, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों का समन्वय लोक प्रशासन द्वारा ही किया जाता है।
निष्कर्ष: लोक प्रशासन आधुनिक शासन की ‘रीढ़’ (Backbone) है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उसका लोक प्रशासन कितना कुशल, पारदर्शी और जन-केंद्रित है। इसलिए, नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढाँचा अत्यावश्यक है।
