नौकरशाही: अवधारणा एवं उद्भव

नौकरशाही (Bureaucracy) एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था है जिसमें निर्णय लेने की शक्ति बड़े संगठनों के भीतर स्थापित अधिकारियों के पास होती है। यह शब्द फ्रेंच शब्द ‘ब्यूरो’ (ब्यूरो) और ग्रीक शब्द ‘क्रैटोस’ (शासन) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “डेस्क का शासन”।

ऐतिहासिक रूप से, नौकरशाही की अवधारणा प्राचीन सभ्यताओं जैसे मिस्र, रोम और चीन में भी देखने को मिलती है, जहाँ शासन चलाने के लिए एक संगठित प्रशासनिक तंत्र का विकास किया गया था। हालाँकि, आधुनिक संदर्भ में इसके सिद्धांतकार मैक्स वेबर (Max Weber) को माना जाता है। वेबर ने इसे एक आदर्श प्रकार (Ideal Type) की संरचना के रूप में प्रस्तुत किया, जो तर्कसंगतता, विशेषज्ञता और कानून के शासन पर आधारित है।

नौकरशाही की मुख्य विशेषताएँ

मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित नौकरशाही की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. पदसोपान (Hierarchy): प्रशासनिक संरचना स्पष्ट रूप से परिभाषित पदसोपान पर आधारित होती है, जहाँ प्रत्येक पद ऊपर के पद के प्रति उत्तरदायी और निचले पद का नियंत्रक होता है।

  2. विशेषज्ञता (Specialization): कार्यों का विभाजन इस आधार पर किया जाता है कि अधिकारियों के पास उनके क्षेत्र की विशेषज्ञता और प्रशिक्षण हो।

  3. लिखित नियम (Written Rules): समस्त कार्य, निर्णय और प्रक्रियाएँ लिखित नियमों, विनियमों और दस्तावेजों द्वारा संचालित होती हैं। इससे मनमानी कम होती है।

  4. निरपेक्षता (Impersonality): निर्णय व्यक्तिगत भावनाओं या संबंधों के आधार पर नहीं, बल्कि नियमों और तथ्यों के आधार पर लिए जाते हैं। सभी नागरिकों के साथ एक समान व्यवहार किया जाता है।

  5. योग्यता पर आधारित भर्ती (Merit-based Recruitment): भर्ती और पदोन्नति तकनीकी योग्यता और प्रदर्शन (जैसे- प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से) के आधार पर की जाती है, न कि जन्म, संपर्क या राजनीतिक संबंधों के आधार पर।

  6. करियरोन्मुखी सेवा (Career Service): नौकरशाही एक स्थायी करियर के रूप में होती है। अधिकारियों को उनके पद के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और उन्हें निश्चित वेतन और सेवा शर्तों का लाभ मिलता है।

नौकरशाही के लाभ और हानियाँ

लाभ (Advantages)

  • दक्षता और विशेषज्ञता: विशेषज्ञता के कारण जटिल मामलों का प्रबंधन कुशलतापूर्वक हो पाता है।

  • निरंतरता: राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद, यह प्रशासनिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता बनाए रखती है।

  • तटस्थता: निरपेक्षता और तटस्थता के सिद्धांत के कारण, यह सुनिश्चित होता है कि शासन निष्पक्ष और न्यायसंगत ढंग से चले।

  • जवाबदेही: पदसोपान और लिखित नियमों की व्यवस्था जवाबदेही तय करने में सहायक होती है।

  • राजनीतिक कार्यपालिका को सहयोग: यह तकनीकी सलाह और नीति कार्यान्वयन के माध्यम से राजनीतिक नेतृत्व का समर्थन करती है।

हानियाँ (Disadvantages)

  • लालफीताशाही (Red-tapism): लिखित नियमों और प्रक्रियाओं में अत्यधिक उलझाकर कार्यों में देरी करना।

  • कठोरता: बदलती परिस्थितियों में नियमों में लचीलेपन की कमी, जिससे अनुकूलन मुश्किल हो जाता है।

  • व्ययवृद्धि: नौकरशाही का विस्तार अक्सर सरकारी खर्चे बढ़ा देता है।

  • अत्यधिक विशेषज्ञता: विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी हो सकती है, जिससे ‘सिलो मानसिकता’ (Silo Mentality) उत्पन्न होती है।

  • शक्तिशाली वर्ग का उदय: यह एक शक्तिशाली, कभी-कभी जनता से कटा हुआ और नियंत्रण से बाहर का वर्ग बन सकती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

नीति निर्माण और कार्यान्वयन में नौकरशाही की भूमिका

नौकरशाही शासन व्यवस्था का एक अभिन्न अंग है और नीति प्रक्रिया में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है:

  1. नीति निर्माण (Policy Formulation):

    • तकनीकी सलाह: राजनीतिक कार्यपालिका को जटिल मुद्दों पर तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञ सलाह प्रदान करना।

    • विकल्प तैयार करना: नीतिगत समस्याओं के लिए संभावित विकल्प और समाधान तैयार करना।

    • मसौदा तैयार करना: कैबिनेट नोट और विधेयकों का प्रारूप तैयार करना, जिस पर राजनीतिक नेतृत्व निर्णय लेता है।

  2. नीति कार्यान्वयन (Policy Implementation):

    • नियम बनाना: संसद द्वारा पारित कानूनों के तहत विस्तृत नियम और विनियम बनाना।

    • संसाधनों का वितरण: नीतियों को लागू करने के लिए वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन और प्रबंधन करना।

    • जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन: नागरिकों तक नीतियों के लाभ पहुँचाने की अंतिम जिम्मेदारी नौकरशाही की ही होती है।

नौकरशाही और राजनीतिक कार्यपालिका के मध्य संबंध

लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) और नौकरशाही (अधिकारी) के बीच का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण और कभी-कभी जटिल होता है।

  • सिद्धांत: सिद्धांततः, राजनीतिक कार्यपालिका निर्णय लेती है और नौकरशाही उन निर्णयों को लागू करती है। मंत्री नीतिगत दिशा तय करते हैं और अधिकारी उन्हें तटस्थता और विशेषज्ञता के साथ कार्यान्वित करते हैं।

  • वास्तविकता: व्यवहार में, यह संबंध सहयोग, तनाव और निर्भरता का मिश्रण होता है।

    • अधिकारिय पर निर्भरता: मंत्री, नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए तकनीकी जानकारी और अनुभव के लिए अधिकारिय पर निर्भर होते हैं।

    • नीतिगत नियंत्रण बनाम प्रशासनिक विशेषज्ञता: कई बार मंत्रियों की नीतिगत इच्छाशक्ति और अधिकारियों की तकनीकी/प्रशासनिक राय के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

    • राजनीतिक हस्तक्षेप: कभी-कभार राजनीतिक कार्यपालिका द्वारा नौकरशाही के कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप (जैसे- भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण) की शिकायतें होती हैं।

    • सहयोग की आवश्यकता: एक प्रभावी और कुशल शासन के लिए दोनों के बीच सहयोग और समन्वय आवश्यक है। एक अच्छा अधिकारी वह है जो अपने मंत्री को सही सलाह दे, चाहे वह उसे पसंद हो या न हो।

सामान्य बनाम विशेषज्ञ नौकरशाही

यह नौकरशाही के भीतर एक प्रमुख वर्गीकरण है।

विशेषता सामान्य नौकरशाही (Generalist Bureaucracy) विशेषज्ञ नौकरशाही (Specialist Bureaucracy)
भर्ती सामान्य योग्यता और प्रशासनिक कौशल के आधार पर (जैसे- IAS, IPS)। तकनीकी ज्ञान और विशिष्ट विषय की विशेषज्ञता के आधार पर (जैसे- ICAS, IRTS, इंजीनियर)।
कार्य प्रशासनिक प्रबंधन, समन्वय और सामान्य प्रशासन का कार्य। अपने विशेषज्ञता के क्षेत्र में तकनीकी सलाह और विशिष्ट कार्य।
दृष्टिकोण व्यापक और सामान्यतावादी दृष्टिकोण (Generalist Approach)। गहन और संकीर्ण तकनीकी दृष्टिकोण (Specialist Approach)।
उदाहरण भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी। भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS), डॉक्टर, इंजीनियर।

भारत में बहस: भारत में, IAS अधिकारी जो सामान्यवादी होते हैं, प्रमुख प्रशासनिक पदों पर आसीन होते हैं, जबकि तकनीकी विशेषज्ञों (जैसे- डॉक्टर, शिक्षाविद) को उनके संबंधित विभागों में ही रखा जाता है। इस पर अक्सर बहस होती है कि आधुनिक और जटिल शासन के लिए विशेषज्ञों की भूमिका को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

नौकरशाही आधुनिक राज्य की एक अनिवार्य संस्था है। यह लोकतांत्रिक शासन में स्थिरता, विशेषज्ञता और निरंतरता लाने का कार्य करती है। हालाँकि, इसकी कमियाँ जैसे लालफीताशाही, कठोरता और जवाबदेही की कमी, इसकी प्रभावशीलता को कम कर सकती हैं। इसलिए, एक आदर्श नौकरशाही वह है जो तटस्थ और निष्पक्ष होने के साथ-साथ लोक-हितैषी, जवाबदेय और पारदर्शी भी हो। इसके लिए निरंतर सुधार, प्रशिक्षण और राजनीतिक नेतृत्व के साथ सहयोगात्मक संबंध आवश्यक हैं।

JPSC MAINS PAPER 4/PublicAdministration Chapter – 1 #8