आपदा के कारण

  • प्राकृतिक कारण: भौतिक, भूवैज्ञानिक और जैविक प्रक्रियाएँ जैसे – टेक्टोनिक प्लेटों का हलचल, चक्रवातीय हवाएँ, ज्वालामुखी, बाढ़, सूखा, महामारी आदि।
  • मानवजनित कारण (Anthropogenic): मानव गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न खतरे जैसे – औद्योगिक दुर्घटनाएँ (रासायनिक रिसाव, परमाणु दुर्घटना), वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, युद्ध, बाँधों का टूटना आदि।
  • कारणों का अन्तर्सम्बन्ध: अक्सर प्राकृतिक और मानवजनित कारण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, वनों की कटाई (मानवजनित) से बाढ़ (प्राकृतिक) की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ जाती है।

आपदा का अर्थ एवं परिभाषा

आपदा (Disaster) एक ऐसी गम्भीर घटना है जो किसी समुदाय या समाज के कार्यों में गम्भीर व्यवधान उत्पन्न करती है और जिसके परिणामस्वरूप जान-माल, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को व्यापक क्षति होती है, जिसे सामान्य रूप से स्वयं की संसाधनों से निपटना मुश्किल होता है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, “आपदा एक गम्भीर व्यवधान है, जो किसी समुदाय या समाज की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप मानव, भौतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान होता है, जो प्रभावित समुदाय या समाज की अपनी संसाधनों का उपयोग करने की क्षमता से अधिक होता है।”

आपदा का वर्गीकरण

आधार वर्गीकरण उदाहरण
उत्पत्ति के आधार पर 1. प्राकृतिक आपदा (Natural Disasters) भूकम्प, सुनामी, चक्रवात, बाढ़, सूखा, हिमस्खलन
2. मानवजनित आपदा (Man-made Disasters) औद्योगिक दुर्घटनाएँ, आग, परमाणु दुर्घटनाएँ, आतंकवाद, युद्ध
गति के आधार पर 1. अचानक आने वाली आपदाएँ (Sudden Onset) भूकम्प, सुनामी, चक्रवात, बाढ़, औद्योगिक विस्फोट
2. धीमी गति से आने वाली आपदाएँ (Slow Onset) सूखा, मरुस्थलीकरण, जलवायु परिवर्तन, अकाल

आपदा न्यूनीकरण (Disaster Mitigation)

आपदा न्यूनीकरण आपदा प्रबंधन चक्र का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसका उद्देश्य आपदा के जोखिम और प्रभाव को कम करना है। यह दीर्घकालिक उपायों पर केन्द्रित होता है जो आपदाओं के होने की सम्भावना या उनके नकारात्मक प्रभावों को कम करते हैं।

आपदा न्यूनीकरण की मुख्य विशेषताएँ:

  • यह एक सतत (ongoing) और दीर्घकालिक प्रक्रिया है।
  • इसमें जोखिम विश्लेषण और जोखिम में कमी शामिल है।
  • यह निवारक (Preventive) और सुरक्षात्मक (Protective) उपायों पर जोर देता है।
  • इसका लक्ष्य सामुदायिक लचीलापन (Community Resilience) बढ़ाना है।
  • यह विकास योजनाओं के साथ एकीकरण को बढ़ावा देता है।

अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक उपाय की अवधारणा

उपाय अवधारणा एवं उद्देश्य मुख्य उपाय/गतिविधियाँ
अल्पकालिक उपाय (Short-term Measures) आपदा के तत्काल बाद (Response Phase) किये जाने वाले उपाय। इनका उद्देश्य जीवन की रक्षा करना और पीड़ितों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है।
  • खोज और बचाव कार्य (Search & Rescue)
  • तत्काल राहत शिविरों की स्थापना
  • भोजन, पानी, दवा, कंबल का वितरण
  • अस्थायी आवास की व्यवस्था
  • चिकित्सा सहायता और स्वच्छता प्रबंधन
  • क्षतिग्रस्त अवसंरचना की मूलभूत मरम्मत
दीर्घकालिक उपाय (Long-term Measures) आपदा के जोखिम को कम करने (Mitigation Phase) और पुनर्निर्माण (Recovery/Reconstruction Phase) से सम्बंधित उपाय। इनका उद्देश्य भविष्य में होने वाली आपदाओं के प्रभाव को कम करना और समुदाय को फिर से स्थापित करना है।
  • आपदा-सहिष्णु अवसंरचना का निर्माण (भूकम्परोधी भवन, बाढ़ बाँध)
  • चेतावनी प्रणालियों की स्थापना (सुनामी अलर्ट, चक्रवात पूर्वानुमान)
  • वनीकरण और तटीय संरक्षण
  • जनजागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम
  • आपदा प्रबंधन नीतियों और कानूनों का निर्माण
  • आजीविका के साधनों का पुनर्निर्माण
  • मनो-सामाजिक देखभाल और पुनर्वास

निष्कर्ष

आपदा प्रबंधन एक सतत और सर्वांगीण प्रक्रिया है जिसमें न्यूनीकरण, तैयारी, अनुक्रिया और पुनर्निर्माण जैसे चरण शामिल हैं। आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए, एक समग्र, समावेशी और प्रौद्योगिकी-संचालित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जहाँ अल्पकालिक राहत और दीर्घकालिक न्यूनीकरण उपायों के बीच संतुलन बनाया जाए। सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण एक महत्वपूर्ण आधार है।

JPSC MAINS PAPER 4/PublicAdministration Chapter – 1 #10