जीवित विश्व, कोशिकीय संरचना एवं कार्य, तथा जीवों में विविधता
1. जीवित विश्व (The Living World)
जीवित जगत को पृथक करने वाली मूलभूत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
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- वृद्धि (Growth): सजीवों में कोशिका विभाजन या कोशिका आकार में वृद्धि के कारण वृद्धि होती है। पौधों में जीवनपर्यंत वृद्धि होती है, जबकि जंतुओं में यह एक निश्चित आयु तक ही सीमित रहती है। निर्जीव वस्तुएँ (जैसे- बर्फ का टुकड़ा, क्रिस्टल) बाह्य पदार्थों के जुड़ने से ‘ससंजन’ (Accretion) द्वारा आकार में वृद्धि करते हैं।
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- प्रजनन (Reproduction): यह अपने ही समान नये जीवों को उत्पन्न करने की क्षमता है। यह लैंगिक एवं अलैंगिक दोनों प्रकार का हो सकता है। यह जीवन की एक सार्वभौमिक विशेषता है, हालाँकि कुछ जीव (जैसे- खच्चर, मधुमक्खी की मजदूर किस्म) प्रजनन नहीं कर सकते, फिर भी वे जीवित माने जाते हैं।
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- चयापचय (Metabolism): यह जीवद्रव्य में होने वाली सभी रासायनिक अभिक्रियाओं का योग है, जो जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इसमें उपापचय (Catabolism – विखंडन, ऊर्जा मुक्ति) और अपचय (Anabolism – संश्लेषण, ऊर्जा ग्रहण) शामिल हैं। यह जीवन की निर्णायक विशेषता है।
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- कोशिकीय संरचना (Cellular Organisation): कोशिका जीवन की मूलभूत संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। सभी जीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।
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- उत्तेजनशीलता (Responsiveness to Stimuli): सजीव पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों (प्रकाश, ताप, रासायनिक पदार्थ आदि) के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। उदाहरण: पौधों का प्रकाश की ओर मुड़ना (फोटोट्रॉपिज्म)।
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- समस्थापन (Homeostasis): शरीर के आंतरिक वातावरण (तापमान, pH, जल की मात्रा आदि) को स्थिर बनाए रखने की क्षमता।
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- उत्सर्जन (Excretion): चयापचय की प्रक्रिया में उत्पन्न हानिकारक पदार्थों (यूरिया, CO₂) को शरीर से बाहर निकालना।
2. कोशिकीय संरचना और इसके कार्य (Cellular Structure and Functions)
कोशिका दो प्रकार की होती है: प्रोकैरियोटिक (आदिकेन्द्रकी) और यूकैरियोटिक (सुकेन्द्रकी)।
| विशेषता | प्रोकैरियोटिक कोशिका | यूकैरियोटिक कोशिका |
| केंद्रक | अनुपस्थित; केन्द्रकीय पदार्थ नग्न DNA के रूप में (न्यूक्लियॉइड) | उपस्थित; झिल्ली-बद्ध केंद्रक |
| कोशिकांग | झिल्ली-बद्ध कोशिकांग अनुपस्थित | झिल्ली-बद्ध कोशिकांग उपस्थित (माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी उपकरण, अंतर्द्रव्यी जालिका आदि) |
| राइबोसोम | 70S प्रकार के | 80S प्रकार के (माइटोकॉन्ड्रिया एवं क्लोरोप्लास्ट में 70S) |
| कोशिका विभाजन | द्विखंडन | सूत्री विभाजन / अर्धसूत्री विभाजन |
| उदाहरण | जीवाणु, आर्किया, नील-हरित शैवाल | प्रोटिस्टा, कवक, पौधे, जंतु |
प्रमुख कोशिकांग एवं उनके कार्य:
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- कोशिका झिल्ली (Cell Membrane): लिपिड एवं प्रोटीन की बनी Selectively Permeable झिल्ली है। यह पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है तथा कोशिका को संरचनात्मक सहायता प्रदान करती है।
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- कोशिका भित्ति (Cell Wall): (केवल पादप कोशिका में) सेल्युलोज की बनी, यह कोशिका को कठोरता, सुरक्षा एवं आकार प्रदान करती है।
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- केंद्रक (Nucleus): कोशिका का नियंत्रण केंद्र। इसमें गुणसूत्र (DNA + प्रोटीन) पाए जाते हैं जो आनुवंशिक सूचना का भंडार हैं।
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- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria): “कोशिका का शक्ति गृह”। यहाँ श्वसन की क्रिया द्वारा ATP (ऊर्जा) का संश्लेषण होता है।
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- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast): (केवल पादप कोशिका में) प्रकाश संश्लेषण का स्थल। इसमें हरित लवक (क्लोरोफिल) पाया जाता है।
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- अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum – ER): कोशिका में परिवहन तथा प्रोटीन संश्लेषण (RER) एवं लिपिड संश्लेषण (SER) में सहायक।
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- गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus): कोशिकीय स्राव, प्रोटीन के संशोधन, पैकेजिंग एवं परिवहन का कार्य करता है।
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- लाइसोसोम (Lysosomes): “आत्मघाती थैली”। इसमें पाचक एंजाइम होते हैं जो जीर्ण कोशिकांगों, जीवाणुओं आदि का विखंडन करते हैं।
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- राइबोसोम (Ribosomes): प्रोटीन संश्लेषण का स्थल। यह RER पर तथा कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र रूप से पाए जाते हैं।
3. जीवों में विविधता (Diversity in Living Organisms)
पृथ्वी पर जीवन की विशाल विविधता को व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत करने के लिए वर्गीकरण की एक सार्वभौमिक प्रणाली अपनाई गई है।
वर्गीकरण का आधार:
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- कोशिका संरचना: प्रोकैरियोटिक / यूकैरियोटिक
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- कोशिका भित्ति: उपस्थित / अनुपस्थित
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- पोषण का प्रकार:
- स्वपोषी (Autotrophic): स्वयं अपना भोजन बनाना (प्रकाश संश्लेषण/रसायन संश्लेषण)।
- परपोषी (Heterotrophic): दूसरे जीवों से भोजन प्राप्त करना।
- पोषण का प्रकार:
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- शारीरिक संगठन: एककोशिक / बहुकोशिक; ऊतक, अंग, तंत्र का स्तर।
जगत (Kingdom) स्तर का वर्गीकरण (पाँच जगत वर्गीकरण – आर.एच. व्हिटेकर):
| जगत | मुख्य विशेषताएँ | उदाहरण |
| मोनेरा (Monera) | प्रोकैरियोटिक, एककोशिक, स्वपोषी/परपोषी | जीवाणु, आर्किया, सायनोबैक्टीरिया |
| प्रोटिस्टा (Protista) | यूकैरियोटिक, एककोशिक, स्वपोषी/परपोषी | अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, डायटम्स |
| कवक (Fungi) | यूकैरियोटिक, बहुकोशिक (अधिकतर), परपोषी (मृतजीवी/परजीवी) | यीस्ट, मशरूम, राइजोपस, पेनिसिलियम |
| प्लांटी (Plantae) | यूकैरियोटिक, बहुकोशिक, स्वपोषी, कोशिका भित्ति (सेल्युलोज) | शैवाल, ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म |
| एनिमेलिया (Animalia) | यूकैरियोटिक, बहुकोशिक, परपोषी, कोशिका भित्ति अनुपस्थित | स्पंज, कीट, मछली, उभयचर, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी |
पादप जगत के प्रमुख संघ:
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- थैलोफाइटा: संवहन ऊतक अनुपस्थित; शैवाल, कवक, लाइकेन।
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- ब्रायोफाइटा: “उभयचर पादप”; संवहन ऊतक अनुपस्थित; मॉस।
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- टेरिडोफाइटा: प्रथम संवहन पादप; बीज अनुपस्थित; फर्न।
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- जिम्नोस्पर्म: नग्न बीजधारी; चीड़, देवदार।
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- एंजियोस्पर्म: बीज फल के अंदर बंद; फूल वाले पौधे। इनके दो वर्ग हैं:
- एकबीजपत्री (Monocot): एक बीजपत्र (गेहूँ, मक्का)।
- द्विबीजपत्री (Dicot): दो बीजपत्र (सरसों, मटर)।
- एंजियोस्पर्म: बीज फल के अंदर बंद; फूल वाले पौधे। इनके दो वर्ग हैं:
जंतु जगत के प्रमुख संघ:
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- पोरीफेरा (Porifera): छिद्रयुक्त शरीर; स्पंज।
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- सीलेंटरेटा (Coelenterata): द्विस्तरीय शरीर, विषाणु कोशिकाएँ; हाइड्रा, जेलीफिश।
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- प्लेटीहेल्मिन्थीज (Platyhelminthes): चपटे कृमि; लिवर फ्लूक, टेपवर्म।
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- नेमेटोडा (Nematoda): बेलनाकार कृमि; राउंडवर्म।
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- एनेलिडा (Annelida): खंडयुक्त शरीर; केंचुआ, जोंक।
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- आर्थ्रोपोडा (Arthropoda): संधियुक्त टाँगें, बाह्य कंकाल; तितली, केकड़ा, मच्छर।
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- मोलस्का (Mollusca): नरम शरीर, कई बाहरी कवचयुक्त; घोंघा, ऑक्टोपस।
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- एकाइनोडर्मेटा (Echinodermata): काँटेदार त्वचा; तारामछली।
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- प्रोटोकॉर्डेटा (Protochordata): नोटोकॉर्ड उपस्थित; हर्डमैनिया (लैंसलेट)।
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- वर्टीब्रेटा (Vertebrata): रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column) उपस्थित। इनके पाँच वर्ग हैं:
- पिसीज (Pisces): मत्स्य वर्ग; शल्क, गलफड़े (गिल्स)।
- एम्फीबिया (Amphibia): उभयचर; त्वचा नम, फेफड़े व त्वचा से श्वसन। (मेंढक)
- रिप्टीलिया (Reptilia): सरीसृप; शुष्क शल्कयुक्त त्वचा, अंडे देते हैं। (छिपकली, साँप)
- एव्स (Aves): पक्षी वर्ग; पंख, अग्रपाद पंखों में रूपांतरित। (मोर, चिड़िया)
- मैमेलिया (Mammalia): स्तनधारी; दूध ग्रंथियाँ, बाल, चार-कक्षीय हृदय। (मनुष्य, व्हेल)
- वर्टीब्रेटा (Vertebrata): रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column) उपस्थित। इनके पाँच वर्ग हैं:
निष्कर्ष: जीवों का अध्ययन उनकी संरचना, कार्य और वर्गीकरण को समझने के लिए आवश्यक है। जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की एक मौलिक विशेषता है और पारिस्थितिकी तंत्र के स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण है। यह ज्ञान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की नीतियों को बनाने में मदद करता है।
