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नाना साहब
- मूल नाम: धोंधू पंत (Dhondu Pant)।
- उपनाम: नाना साहब।
- पिता (दत्तक): अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय (पेशवा बाजीराव II के दत्तक पुत्र)।
- जन्म स्थान: बिठूर (कानपुर के पास), उत्तर प्रदेश।
- 1857 का विद्रोह नेतृत्व केंद्र: कानपुर (Kanpur)।
- विद्रोह का कारण: लॉर्ड डलहौजी की ‘व्यपगत का सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) के तहत उनकी पेंशन बंद करना।
- घोषणा: उन्होंने खुद को ‘पेशवा‘ और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर का ‘राज्यपाल’ (Governor) घोषित किया।
- सैन्य कमांडर: तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग) नाना साहब के मुख्य सेनापति थे।
- सलाहकार: अजीमुल्ला खान (Azimullah Khan) उनके प्रमुख राजनीतिक सलाहकार थे।
- प्रमुख घटनाएँ और अंत
- सती चौरा घाट घटना: कानपुर में ब्रिटिश सैनिकों और नागरिकों के साथ हुई हिंसक झड़प।
- दमनकर्ता: सर कॉलिन कैंपबेल (Sir Colin Campbell) ने कानपुर पर पुनः कब्जा किया।
- पलायन: कानपुर के पतन के बाद वे नेपाल चले गए।
- ऐतिहासिक अंत: माना जाता है कि 1859 के आसपास नेपाल की पहाड़ियों में उनका निधन हो गया (वे कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए)।