विस्मयादिबोधक (Interjection) की परिभाषा
- वैसे शब्द जिनसे शोक, घृणा, विस्मय, प्रशंसा आदि के भाव प्रकट हो तथा उनका संबंध वाक्य से न हो, उसे विस्मयादि बोधक कहते हैं।
- पहचान: इन शब्दों के बाद हमेशा विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है।
- विशेषता: इनका वाक्य के अन्य शब्दों से कोई व्याकरणिक संबंध नहीं होता, ये केवल मन के वेग को दर्शाते हैं।
- जैसे-
- शाबाश! परीक्षा में प्रथम आते रहो।
- विस्मयादिबोधक के भेद – इसके सात भेद होते हैं
- (1) हर्षबोधक – वाह-वहा! शाबाश आदि ।
- (2) शोकबोधक – आह! हाय! आदि।
- (3) आश्चर्यबोधक – क्या! वाह! आदि।
- (4) अनुमोदनबोधक – वाह! अच्छा आदि।
- (5) तिरस्कारबोधक – अरे! दुर! आदि।
- (6) स्वीकारबोधक – जी हाँ! ठीक! आदि।
- (7) सम्बोधनबोधक – अरे! रे! आदि।
| भेद | प्रकट होने वाला भाव | प्रमुख शब्द | उदाहरण |
| 1. हर्षबोधक | खुशी/उल्लास | अहा!, वाह!, धन्य!, शाबाश! | वाह! क्या स्वाद है। |
| 2. शोकबोधक | दुख/पीड़ा | हाय!, आह!, ऊफ!, त्राहि-त्राहि! | हाय! अब मेरा क्या होगा। |
| 3. आश्चर्यबोधक | अचम्भा | क्या!, ओहो!, सच!, हैं! | क्या! वह पास हो गया? |
| 4. तिरस्कारबोधक | घृणा/नफरत | छि!, धिक्!, हट!, धत! | छि! यहाँ कितनी गंदगी है। |
| 5. स्वीकारबोधक | सहमति | हाँ!, जी!, ठीक!, अच्छा! | जी हाँ! मैं कल आऊँगा। |
| 6. संबोधनबोधक | पुकारना | हे!, अजी!, ओ!, रे!, अरे! | अजी! सुनते हो? |
| 7. भयबोधक | डर | बाप रे!, माँ!, बचाओ! | बाप रे! इतना बड़ा साँप। |
- याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
- स्वतंत्र अस्तित्व: ये शब्द वाक्य के शुरू में आते हैं और यदि इन्हें हटा भी दिया जाए, तो वाक्य के अर्थ पर कोई संरचनात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
- विस्मयादिबोधक चिह्न (!): इस चिह्न का प्रयोग अनिवार्य है। इसके बिना शब्द की पहचान अधूरी रहती है।
- संज्ञा/विशेषण का प्रयोग: कभी-कभी संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण भी विस्मयादिबोधक की तरह व्यवहार करते हैं।
- उदाहरण: राम-राम! यह क्या हो गया? (यहाँ ‘राम’ संज्ञा है, पर भाव शोक का है)।
- उदाहरण: सुंदर! बहुत ही बढ़िया काम किया। (यहाँ ‘सुंदर’ विशेषण है)।
