Updated on 02/04/26 by Mananjay MahatoShare on WhatsApp

विस्मयादिबोधक (Interjection) की परिभाषा

  • वैसे शब्द जिनसे शोक, घृणा, विस्मय, प्रशंसा आदि के भाव प्रकट हो तथा उनका संबंध वाक्य से न हो, उसे विस्मयादि बोधक कहते हैं। 
  • पहचान: इन शब्दों के बाद हमेशा विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है।
  • विशेषता: इनका वाक्य के अन्य शब्दों से कोई व्याकरणिक संबंध नहीं होता, ये केवल मन के वेग को दर्शाते हैं।
  • जैसे-
    • शाबाश! परीक्षा में प्रथम आते रहो।
  • विस्मयादिबोधक के भेद – इसके सात भेद होते हैं
    • (1) हर्षबोधक – वाह-वहा! शाबाश आदि । 
    • (2) शोकबोधक – आह! हाय! आदि। 
    • (3) आश्चर्यबोधक – क्या! वाह! आदि। 
    • (4) अनुमोदनबोधक – वाह! अच्छा आदि। 
    • (5) तिरस्कारबोधक – अरे! दुर! आदि। 
    • (6) स्वीकारबोधक – जी हाँ! ठीक! आदि। 
    • (7) सम्बोधनबोधक – अरे! रे! आदि।
भेद प्रकट होने वाला भाव प्रमुख शब्द उदाहरण
1. हर्षबोधक खुशी/उल्लास अहा!, वाह!, धन्य!, शाबाश! वाह! क्या स्वाद है।
2. शोकबोधक दुख/पीड़ा हाय!, आह!, ऊफ!, त्राहि-त्राहि! हाय! अब मेरा क्या होगा।
3. आश्चर्यबोधक अचम्भा क्या!, ओहो!, सच!, हैं! क्या! वह पास हो गया?
4. तिरस्कारबोधक घृणा/नफरत छि!, धिक्!, हट!, धत! छि! यहाँ कितनी गंदगी है।
5. स्वीकारबोधक सहमति हाँ!, जी!, ठीक!, अच्छा! जी हाँ! मैं कल आऊँगा।
6. संबोधनबोधक पुकारना हे!, अजी!, ओ!, रे!, अरे! अजी! सुनते हो?
7. भयबोधक डर बाप रे!, माँ!, बचाओ! बाप रे! इतना बड़ा साँप।

 

  • याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
    • स्वतंत्र अस्तित्व: ये शब्द वाक्य के शुरू में आते हैं और यदि इन्हें हटा भी दिया जाए, तो वाक्य के अर्थ पर कोई संरचनात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
    • विस्मयादिबोधक चिह्न (!): इस चिह्न का प्रयोग अनिवार्य है। इसके बिना शब्द की पहचान अधूरी रहती है।
    • संज्ञा/विशेषण का प्रयोग: कभी-कभी संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण भी विस्मयादिबोधक की तरह व्यवहार करते हैं।
      • उदाहरण: राम-राम! यह क्या हो गया? (यहाँ ‘राम’ संज्ञा है, पर भाव शोक का है)।
      • उदाहरण: सुंदर! बहुत ही बढ़िया काम किया। (यहाँ ‘सुंदर’ विशेषण है)।
विस्मयादिबोधक की परिभाषा ,विस्मयादिबोधक के भेद