Updated on 02/04/26 by Mananjay MahatoShare on WhatsApp

 समुच्चयबोधक (Conjunction) या योजक (Connector) की परिभाषा

  • ऐसे शब्द जो दो शब्दों, वाक्यों या पदों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं।
  • जैसे-
    • दिव्यता, तेजस्विनी और आराध्या ने पुरस्कार जीते। इस वाक्य में ‘और’ समुच्यबोधक शब्द है, क्योंकि यह दिव्यता, तेजस्विनी को जोड़ता है।
    • राम और श्याम पढ़ रहे हैं। (यहाँ ‘और’ दो शब्दों को जोड़ रहा है।)
    • वह बीमार था, इसलिए स्कूल नहीं आया। (यहाँ ‘इसलिए’ दो वाक्यों को जोड़ रहा है।)
  • समुच्चयबोधक के भेद – समुच्चयबोधक के दो भेद होते हैं 
    • (1) समानाधिकरण (Co-ordinate) समुच्चयबोधक – चार उपभेद
      • क. संयोजक – जो जोड़ते हैं। (और, तथा, एवं)
      • ख. विभाजक – जो विकल्प देते हैं या अलग करते हैं। (या, अथवा, न-न)
      • ग. विरोध – जो पहले वाक्य का विरोध करें। (परन्तु, लेकिन, मगर)
      • घ. परिणामदर्शक – जो फल या परिणाम बताएं। (इसलिए, अतः, फलतः)
    • (2) व्यधिकरण (Sub-ordinate) समुच्चयबोधकचार उपभेद 
      • क. कारणवाचक – क्योंकि, चूंकि, इसलिए कि।
      • ख. स्वरूपवाचक – कि, जो, यानी, मानो।
      • ग. उद्देश्यवाचक – ताकि, जिससे कि।
      • घ. संकेतवाचक – यदि-तो, यद्यपि-तथापि।
  • विशेष अंतर: संबंधबोधक vs समुच्चयबोधक
    • संबंधबोधक: यह संज्ञा/सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़ता है। (जैसे: घर के पीछे पेड़ है।)
    • समुच्चयबोधक: यह दो स्वतंत्र इकाइयों (शब्दों या वाक्यों) को आपस में जोड़ता है। (जैसे: राम आया और मोहन चला गया।)
भेद परिभाषा प्रमुख शब्द उदाहरण
1. समानाधिकरण (Co-ordinate) जो समान स्तर के शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं। और, एवं, तथा, या, अथवा, किन्तु, परन्तु, लेकिन, इसलिए। चाय या कॉफी पियोगे?
2. व्यधिकरण (Sub-ordinate) जिसमें एक मुख्य वाक्य होता है और दूसरा उस पर आश्रित (Dependent) होता है। कि, क्योंकि, ताकि, यद्यपि-तथापि, यदि-तो, मानो। वह मेहनत करता है ताकि सफल हो सके।

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक 

  • ऐसे शब्द जो मुख्य वाक्य को जोड़ते हैं, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते है। 
  • इसके चार उपभेद होते हैं। 
  • क. संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक 
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो समान शब्दों, वाक्यांशों और वाक्यों को जोड़ते हैं। जैसे- और, एवं, व, तथा।
  • ख. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों में विभाजन तथा विकल्प करते हैं। जैसे- या, वा, अथवा, कि, चाहे-चाहे, न कि, नहीं तो, किंवा, न-न। 
  • ग. विरोध समानाधिकरण समुच्चयबोधक 
    • वैसे समुच्चय बोधक शब्द जो दो विरोधी वाक्यों को जोड़ते हैं। जैसे -परन्तु, पर, किन्तु, लेकिन। 
  • घ. परिणामदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक :  
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो वाक्यों को मिलाकर पहले वाक्य को दूसरे वाक्य का परिणाम बताता है। जैसे- अतएव, इसलिए, अतः सो। 
  • 2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक 
    • ऐसे शब्द जो मुख्यवाक्य में एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। 

    • इसके चार उपभेद हैं।

  • क. कारणवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो वाक्य को कारण सूचक वाक्य से जोड़ते हैं। जैसे- जोकि, क्योंकि, इसलिए, कि । 

  • ख. स्वरूपवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक 
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दूसरे वाक्य के पहले लगकर पहले वाक्य का स्वरूप प्रकट करता है। जैसे- अर्थात्, मानो, यानि, जो। 

  • ग. उद्देश्यवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो पहले वाक्य के उद्देश्य को प्रकट करता है। जैसे- जो, कि। 

  • घ. संकेतवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक
    • वैसे समुच्चयबोधक शब्द जो दो उपवाक्यों को आपस में जोड़ते हैं। जैसे- जो-तो, यद्यपि-तथापि, चाहे, परन्तु, कि।

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