Updated on 07/04/26 by Mananjay MahatoShare on WhatsApp

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निम्नलिखित में से कौन सा एक संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण है?

  • जल का विद्युत अपघटन
  • लोहे पर जंग लगना
  • हाइड्रोजन गैस का क्लोरीन गैस के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन क्लोराइड बनाना
  • जिंक का तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया

Explanation:

  • संयोजन अभिक्रिया वह है जहाँ दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक एकल नया उत्पाद बनाते हैं। H₂ + Cl₂ → 2HCl इसका एक उदाहरण है।
  • जल का विद्युत अपघटन अपघटन अभिक्रिया है।
  • लोहे पर जंग लगना एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया (विस्थापन का हिस्सा) है।
  • जिंक का अम्ल के साथ अभिक्रिया करना विस्थापन अभिक्रिया है।

निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है?

  • अमोनियम क्लोराइड को जल में घोलना
  • श्वसन की प्रक्रिया
  • प्राकृतिक गैस (मीथेन) का दहन
  • विहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) की प्रक्रिया

Explanation:

  • ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया वे हैं जिनमें ऊष्मा उत्पन्न होती है। CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(g) + ऊष्मा एक मानक उदाहरण है।
  • अमोनियम क्लोराइड को जल में घोलना ऊष्माशोषी है (ठंडा होता है)।
  • श्वसन एक जैविक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है, लेकिन रासायनिक दृष्टि से दहन एक स्पष्ट उदाहरण है।
  • विहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) आमतौर पर ऊष्माशोषी होता है।

विस्थापन अभिक्रिया को सबसे अच्छा किसके द्वारा दर्शाया जाता है?

  • CaO + H₂O → Ca(OH)₂
  • 2H₂O → 2H₂ + O₂
  • Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
  • Pb(NO₃)₂ + 2KI → PbI₂ + 2KNO₃

Explanation:

  • विस्थापन अभिक्रिया में, एक अधिक अभिक्रियाशील तत्व कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है। Fe, Cu से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह Cu को CuSO₄ से विस्थापित कर देता है।
  • पहला विकल्प एक संयोजन अभिक्रिया है।
  • दूसरा विकल्प एक अपघटन अभिक्रिया है।
  • चौथा विकल्प एक द्वि-विस्थापन अभिक्रिया है।

द्वि-विस्थापन अभिक्रिया की पहचान कीजिए।

  • 2KClO₃ → 2KCl + 3O₂
  • CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O
  • Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂
  • Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄ + 2NaCl

Explanation:

  • द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में, दो यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, जिसके परिणामस्वरूप दो नए यौगिक बनते हैं। यहाँ, Ba²⁺ और Na⁺ आपस में बदल जाते हैं।
  • पहला विकल्प एक अपघटन अभिक्रिया है।
  • दूसरा विकल्प एक दहन अभिक्रिया है।
  • तीसरा विकल्प एक विस्थापन अभिक्रिया है।

अपचयन (Reduction) क्या है?

  • ऑक्सीजन का योग
  • इलेक्ट्रॉनों का त्याग
  • ऑक्सीजन का ह्रास या इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण
  • हाइड्रोजन का ह्रास

Explanation:

  • अपचयन (Reduction) को ऑक्सीजन के ह्रास या इलेक्ट्रॉनों के ग्रहण के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह ऑक्सीकरण के साथ हमेशा जुड़ी रहती है (रेडॉक्स अभिक्रिया)।
  • ऑक्सीजन का योग ऑक्सीकरण है।
  • इलेक्ट्रॉनों का त्याग ऑक्सीकरण है।
  • हाइड्रोजन का ह्रास भी ऑक्सीकरण है।

जिंक ब्लास्ट फर्नेस में निष्कर्षण के दौरान, जिंक सल्फाइड अयस्क का सांद्रण किसके द्वारा किया जाता है?

  • भर्जन (Roasting)
  • प्रगलन (Smelting)
  • फेन प्लवन (Froth Floatation)
  • निस्तापन (Calcination)

Explanation:

  • जिंक का मुख्य अयस्क जिंक ब्लेंड (ZnS) सल्फाइड अयस्क है। सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण की सबसे सामान्य विधि फेन प्लवन (Froth Floatation) है।
  • भर्जन और निस्तापन सांद्रित अयस्क को उसके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रियाएं हैं।
  • प्रगलन धातु निष्कर्षण की एक और चरण की प्रक्रिया है।

 कॉपर की विद्युत-अपघटनी परिष्करण प्रक्रिया में एनोड पर क्या होता है?

  • शुद्ध तांबा जमा होता है
  • अशुद्ध तांबा विघटित होता है
  • कॉपर सल्फेट का विलयन अपरिवर्तित रहता है
  • कैथोड विघटित होता है

Explanation:

  • विद्युत-अपघटनी परिष्करण में, अशुद्ध धातु की पट्टी को एनोड बनाया जाता है। जब विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो एनोड से धातु विघटित होकर विलयन में चली जाती है।
  • शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है।
  • विलयन (CuSO₄) विद्युत-अपघटन का माध्यम बनाता है।
  • कैथोड विघटित नहीं होता है।

पॉवर ऑल्कोहॉल मिश्रण (Power Alcohol) क्या है?

  • एथनॉल और मेथनॉल का मिश्रण
  • एथनॉल और पेट्रोल का मिश्रण
  • मेथनॉल और पेट्रोल का मिश्रण
  • एथनॉल और डीजल का मिश्रण

Explanation:

  • पॉवर ऑल्कोहॉल, एथनॉल (अल्कोहॉल) और पेट्रोल का एक मिश्रण है जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। यह पेट्रोल की दक्षता बढ़ाता है और प्रदूषण कम करता है।
  • एथनॉल और मेथनॉल का मिश्रण पॉवर ऑल्कोहॉल नहीं है।
  • मेथनॉल और पेट्रोल का मिश्रण आम नहीं है।
  • एथनॉल को डीजल के साथ मिलाने की प्रक्रिया अलग है।

साबुन के अणु की संरचना कैसी होती है?

  • यह एक लंबा अकार्बनिक श्रृंखला अणु है
  • इसमें एक ध्रुवीय हाइड्रोफिलिक सिरा और एक अध्रुवीय हाइड्रोफोबिक पूंछ होती है
  • यह पूरी तरह से ध्रुवीय अणु है
  • यह पूरी तरह से अध्रुवीय अणु है

Explanation:

  • साबुन के अणु में दो भाग होते हैं: एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (हाइड्रोफोबिक, तेल/ग्रीस के साथ जुड़ती है) और एक कार्बोक्सिलेट समूह (हाइड्रोफिलिक, पानी के साथ जुड़ता है)। यह संरचना इसे सफाई करने में सक्षम बनाती है।
  • साबुन एक कार्बनिक अणु है।
  • यह पूरी तरह से ध्रुवीय या अध्रुवीय नहीं है, बल्कि द्विध्रुवीय (amphiphilic) है।

कठोर जल साबुन के साथ झाग क्यों नहीं देता?

  • क्योंकि साबुन जल में अघुलनशील है
  • क्योंकि कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण साबुन से क्रिया करके अघुलनशील अवक्षेप बनाते हैं
  • क्योंकि साबुन का pH बहुत अधिक है
  • क्योंकि जल की सतह तनाव बहुत अधिक है

Explanation:

  • कठोर जल में Ca²⁺ और Mg²⁺ आयन होते हैं। ये आयन साबुन (सोडियम स्टियरेट) के साथ क्रिया करके कैल्शियम स्टियरेट और मैग्नीशियम स्टियरेट नामक अघुलनशील पदार्थ (स्कम) का अवक्षेप बनाते हैं। इससे सफाई की प्रक्रिया में बाधा आती है और झाग नहीं बनता।
  • साबुन जल में घुलनशील है।
  • साबुन का pH और जल का सतह तनाव मुख्य कारण नहीं हैं।

पीतल (Brass) किसका मिश्रधातु है?

  • तांबा और टिन
  • तांबा और जस्ता
  • तांबा और निकल
  • एल्युमिनियम और तांबा

Explanation:

  • पीतल (Brass) तांबे (Copper) और जस्ते (Zinc) की एक मिश्रधातु है। इसमें जस्ते की मात्रा आमतौर पर 20-35% होती है।
  • तांबा और टिन की मिश्रधातु कांसा (Bronze) कहलाती है।
  • तांबा और निकल की मिश्रधातु जर्मन सिल्वर (German Silver) या निकल सिल्वर कहलाती है।

क्लोरीन गैस की अभिक्रिया शुष्क बुझे हुए चूने (CaO) के साथ कराने पर क्या बनता है?

  • जिप्सम
  • सोडियम कार्बोनेट
  • ब्लीचिंग पाउडर (CaOCl₂)
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस

Explanation:

  • शुष्क बुझा हुआ चूना [Ca(OH)₂] जब क्लोरीन गै के साथ अभिक्रिया करता है तो ब्लीचिंग पाउडर (Ca(OCl)Cl या CaOCl₂) बनता है। अभिक्रिया है: Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
  • जिप्सम (CaSO₄.2H₂O) एक अलग यौगिक है।
  • सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) साल्वे प्रक्रिया से बनता है।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄.½H₂O) जिप्सम को गर्म करके बनाया जाता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक सूत्र क्या है?

  • CaSO₄
  • CaSO₄ . 2H₂O
  • CaSO₄ . ½H₂O
  • CaO

Explanation:

  • प्लास्टर ऑफ पेरिस, कैल्शियम सल्फेट हेमिहाइड्रेट (CaSO₄.½H₂O) है। यह जिप्सम (CaSO₄.2H₂O) को लगभग 373 K पर गर्म करके बनाया जाता है।
  • CaSO₄ एनहाइड्रस कैल्शियम सल्फेट है।
  • CaSO₄ . 2H₂O जिप्सम है।
  • CaO बिना बुझा चूना (Quicklime) है।

अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से वायुमंडल में किन गैसों की उपस्थिति के कारण होती है?

  • कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन
  • सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  • कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन
  • मीथेन और हाइड्रोजन

Explanation:

  • अम्लीय वर्षा का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन के जलने से वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOₓ) का उत्सर्जन है। ये गैसें वायुमंडल में जल के साथ क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) और नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनाती हैं।
  • CO₂ भी वर्षा को थोड़ा अम्लीय (pH ~5.6) बनाती है, लेकिन गंभीर अम्लीय वर्षा SO₂ और NOₓ के कारण होती है।

ओजोन परत का क्षरण मुख्य रूप से किसके द्वारा होता है?

  • कार्बन डाइऑक्साइड
  • सल्फर डाइऑक्साइड
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड

Explanation:

  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे यौगिक, जो प्रशीतक (refrigerants) और एरोसोल प्रणोदकों में उपयोग किए जाते थे, ऊपरी वायुमंडल में पहुँचकर ओजोन (O₃) अणुओं के साथ क्रिया करते हैं और उन्हें तोड़ देते हैं। इससे ओजोन परत पतली हो जाती है।
  • CO₂ और SO₂ ग्रीनहाउस गैसें हैं लेकिन ओजोन क्षरण के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार नहीं हैं।
  • NOₓ ओजोन क्षरण में योगदान दे सकते हैं लेकिन CFCs मुख्य अपराधी हैं।

प्रकाश-रासायनिक धूम्र (Photochemical Smog) बनने के लिए कौन सी गैसें जिम्मेदार हैं?

  • CO₂ और CO
  • SO₂ और CO
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन
  • CFCs और CO₂

Explanation:

  • प्रकाश-रासायनिक धूम्र सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में नाइट्रोजन के ऑक्साइड (वाहनों से) और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के बीच होने वाली जटिल photochemical अभिक्रियाओं का परिणाम है। यह भूरे रंग का धूम्र होता है।
  • CO₂ और CO इस प्रकार के धूम्र के निर्माण में प्रमुख भूमिका नहीं निभाते।
  • SO₂ शास्त्रीय धूम्र (London smog) का कारण बनता है, जो प्रकाश-रासायनिक धूम्र से अलग है।

किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया में शर्करा का रूपांतरण किसमें होता है?

  • साइट्रिक अम्ल में
  • लैक्टिक अम्ल में
  • एथनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में
  • एसीटिक अम्ल में

Explanation:

  • किण्वन एक anaerobic प्रक्रिया है जिसमें यीस्ट (जीव) एंजाइमों की मदद से ग्लूकोज जैसी शर्करा को एथनॉल (अल्कोहॉल) और कार्बन डाइऑक्साइड गैस में परिवर्तित करते हैं। C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂
  • साइट्रिक अम्ल एक अलग जैविक प्रक्रिया द्वारा बनता है।
  • लैक्टिक अम्ल दूध के किण्वन या मांसपेशियों में थकान के दौरान बनता है।
  • एसीटिक अम्ल (सिरका) एथनॉल के और अधिक ऑक्सीकरण से बनता है।

भोजन के पदार्थों के संरक्षण में सोडियम बेंजोएट का उपयोग क्यों किया जाता है?

  • यह भोजन का रंग बढ़ाता है
  • यह भोजन का स्वाद बढ़ाता है
  • यह बैक्टीरिया और कवक के विकास को रोकता है (यह एक संरक्षक है)
  • यह भोजन को नमी देता है

Explanation:

  • सोडियम बेंजोएट एक रासायनिक संरक्षक (preservative) है। यह सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, कवक) के विकास और गतिविधि को दबा देता है, जिससे भोजन लंबे समय तक खराब हुए बिना रह सकता है।
  • यह मुख्यतः स्वाद या रंग बढ़ाने के लिए नहीं है, हालांकि यह भोजन के गुणों को बनाए रखने में मदद करता है।

विटामिन C का रासायनिक नाम क्या है?

  • थायमिन
  • राइबोफ्लेविन
  • एस्कॉर्बिक अम्ल
  • निकोटिनिक अम्ल

Explanation:

  • विटामिन C का रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक अम्ल (Ascorbic Acid) है। यह एक जल-घुलनशील विटामिन है जो खट्टे फलों में पाया जाता है।
  • थायमिन विटामिन B1 है।
  • राइबोफ्लेविन विटामिन B2 है।
  • निकोटिनिक अम्ल विटामिन B3 (Niacin) है।

मानव शरीर में ऊर्जा के तत्काल स्रोत के रूप में किसका उपयोग किया जाता है?

  • वसा
  • प्रोटीन
  • ग्लूकोज
  • स्टार्च

Explanation:

  • ग्लूकोज एक सरल शर्करा (कार्बोहाइड्रेट) है जो कोशिकीय श्वसन की प्रक्रिया के माध्यम से तेजी से टूटकर ATP (ऊर्जा की मुद्रा) उत्पन्न करती है। यह शरीर की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का प्राथमिक और त्वरित स्रोत है।
  • वसा ऊर्जा के भंडारण का लंबे समय तक चलने वाला स्रोत है।
  • प्रोटीन का मुख्य कार्य ऊर्जा उत्पादन नहीं है, बल्कि शरीर के निर्माण और मरम्मत में है।
  • स्टार्च एक जटिल कार्बोहाइड्रेट है जिसे पहले ग्लूकोज में तोड़ा जाता है।

मानव शरीर में pH का सामान्य स्तर किस सीमा में बनाए रखा जाता है?

  • 5.0 – 6.0
  • 9.0 – 10.0
  • 7.35 – 7.45
  • 6.5 – 7.0

Explanation:

  • मानव रक्त थोड़ा क्षारीय होता है और इसका pH एक संकीर्ण सीमा 7.35 से 7.45 के बीच बना रहता है। इस साम्यावस्था (homeostasis) को बनाए रखना एंजाइमों के सही कार्य और जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • 5.0-6.0 अम्लीय सीमा है जो रक्त के लिए असामान्य और हानिकारक है।
  • 9.0-10.0 अत्यधिक क्षारीय सीमा है।
  • 6.5-7.0 उदासीन के निकट है लेकिन रक्त के लिए अभी भी अम्लीय है।

पाचन तंत्र में, पेप्सिन एंजाइम किसमें सक्रिय होता है?

  • क्षारीय माध्यम
  • उदासीन माध्यम
  • अम्लीय माध्यम
  • किसी भी pH पर

Explanation:

  • पेप्सिन पेट में प्रोटीन के पाचन के लिए जिम्मेदार एक एंजाइम है। यह अम्लीय माध्यम (गैस्ट्रिक जूस में HCl के कारण pH ~1.5-2.0) में सबसे अच्छा कार्य करता है। HCl इस एंजाइम को सक्रिय भी करता है।
  • क्षारीय या उदासीन माध्यम में इसकी activity कम हो जाती है।
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