जनसंख्या की संरचना: आयु, लिंगानुपात एवं ग्रामीण-शहरी संरचना
जनसंख्या संरचना से तात्पर्य किसी देश या क्षेत्र की जनसंख्या के विभिन्न लक्षणों, जैसे- आयु, लिंग, निवास स्थान (ग्रामीण-शहरी), शैक्षिक स्तर, व्यवसायिक संरचना आदि के आधार पर विभाजन से है। यह संरचना किसी देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास को गहराई से प्रभावित करती है। यह नोट्स आयु संरचना, लिंगानुपात और ग्रामीण-शहरी संरचना पर केंद्रित हैं।
1. आयु संरचना (Age Structure)
किसी देश की जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्गों के लोगों का अनुपात उसकी आयु संरचना कहलाता है। यह किसी देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आयु वर्गीकरण:
-
- बाल आयु वर्ग (0-14 वर्ष): यह वर्ग आश्रित जनसंख्या का हिस्सा होता है। इसके उच्च अनुपात का अर्थ है उच्च जन्म दर और भविष्य में बढ़ती जनसंख्या।
-
- कार्यशील आयु वर्ग (15-59 वर्ष): यह वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। यह उत्पादक जनसंख्या है जो कर अदा करती है और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देती है।
-
- वृद्ध आयु वर्ग (60 वर्ष及以上): यह भी आश्रित जनसंख्या का हिस्सा है। इसके बढ़ते अनुपात का अर्थ है बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, लेकिन साथ ही पेंशन और स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ता दबाव।
भारत के संदर्भ में:
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की आयु संरचना इस प्रकार थी:
-
- 0-14 वर्ष: 29.5%
-
- 15-59 वर्ष: 62.5%
-
- 60 वर्ष及以上: 8.0%
भारत currently एक ‘जनसांख्यिकीय लाभांश‘ (Demographic Dividend) के दौर से गुजर रहा है, जहाँ कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक है। यह आर्थिक विकास के लिए एक सुनहरा अवसर है, बशर्ते इस जनसंख्या को रोजगार और कौशल प्रदान किया जा सके।
2. लिंगानुपात (Sex Ratio)
लिंगानुपात किसी क्षेत्र में प्रति हज़ार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह किसी समाज में लैंगिक समानता का एक प्रमुख सूचक है।
भारत में रुझान:
भारत में लिंगानुपात लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। हालाँकि, हालिया जनगणनाओं में मामूली सुधार देखा गया है।
-
- 2011 की जनगणना: राष्ट्रीय लिंगानुपात 943 था।
-
- 2021 की जनगणना (कोविड-19 के कारण स्थगित): अनुमानित सुधार के संकेत हैं।
निम्न लिंगानुपात के कारण:
-
- सामाजिक-सांस्कृतिक पूर्वाग्रह: पुत्र की चाहत, दहेज प्रथा आदि।
-
- लिंग-चयनात्मक गर्भपात: PCPNDT अधिनियम के बावजूद यह एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
-
- महिलाओं के प्रति उपेक्षा: स्वास्थ्य और पोषण संबंधी देखभाल में लैंगिक भेदभाव।
-
- शिशु एवं मातृ मृत्यु दर: कुछ क्षेत्रों में अभी भी उच्च है।
राज्यवार विविधता:
केरल (1084) और तमिलनाडु जैसे राज्यों में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है, जबकि हरियाणा (879), पंजाब (895) और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य पिछड़े हुए हैं। यह विविधता सामाजिक-आर्थिक विकास और साक्षरता के स्तर में अंतर को दर्शाती है।
3. ग्रामीण-शहरी संरचना (Rural-Urban Structure)
यह जनसंख्या का वह विभाजन है जो लोगों के निवास स्थान (गाँव या शहर) के आधार पर किया जाता है। भारत अब भी मुख्यतः एक ग्रामप्रधान देश है, लेकिन शहरीकरण की गति तेजी से बढ़ रही है।
मुख्य तथ्य (2011 जनगणना):
-
- ग्रामीण जनसंख्या: 68.84%
-
- शहरी जनसंख्या: 31.16%
-
- शहरीकरण दर: 2001-2011 के दशक में शहरीकरण की दर पिछले दशकों की तुलना में अधिक रही (91 मिलियन की वृद्धि)।
शहरीकरण के कारण:
-
- आर्थिक अवसर: रोजगार की तलाश में ग्रामीण-शहरी प्रवासन।
-
- बेहतर सुविधाएँ: शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे और जीवन स्तर का आकर्षण।
-
- ग्रामीण क्षेत्रों में संकट: कृषि की अनिश्चितता, अल्प रोजगार और गरीबी।
चुनौतियाँ:
-
- ग्रामीण क्षेत्रों में: कृषि की उत्पादकता बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविधता लाना और बुनियादी ढाँचे का विकास करना।
-
- शहरी क्षेत्रों में: झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तार, अपर्याप्त जल आपूर्ति, सीवेज और waste management, यातायात जाम और housing की कमी।
निष्कर्ष
भारत की जनसंख्या संरचना गतिशील और जटिल है। आयु संरचना द्वारा प्रदत्त जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए, लिंगानुपात में सुधार लाना और ग्रामीण-शहरी विभाजन को संतुलित करना अत्यावश्यक है। इसके लिए समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और टिकाऊ शहरी नियोजन पर जोर देना होगा। ये कारक भारत के भविष्य की आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता को निर्धारित करेंगे।
