खनिज व ऊर्जा संसाधन: एक परिचय
भारत खनिज संपदा की दृष्टि से एक समृद्ध देश है। खनिज व ऊर्जा संसाधन किसी भी देश के औद्योगिक व आर्थिक विकास की रीढ़ होते हैं। इन्हें मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है: खनिज संसाधन (धात्विक एवं अधात्विक) और ऊर्जा संसाधन (परंपरागत एवं अपारंपरिक)।
1. धात्विक खनिज (Metallic Minerals)
ये वे खनिज हैं जिनमें धातु का अंश होता है। ये सामान्यतः कठोर, चमकदार और ताप व विद्युत की सुचालक होते हैं। इन्हें पुनः दो उप-श्रेणियों में बाँटा गया है:
क. लौह धातु खनिज (Ferrous Minerals)
इन खनिजों में लोहे का अंश प्रमुख होता है। इनका उपयोग मुख्यतः लोहा-इस्पात उद्योग में होता है।
- लौह अयस्क (Iron Ore): भारत लौह अयस्क के विशाल भंडार वाला देश है। मुख्य प्रकार हैं: हेमेटाइट (सर्वोत्तम किस्म, 60-70% लोहा) और मैग्नेटाइट (50-60% लोहा)। प्रमुख खनन क्षेत्र: ओडिशा-झारखंड का गुंटर-बादामपुर-पश्चिम सिंहभूम बेल्ट, दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर बेल्ट (छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र), बेल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमगलूर बेल्ट (कर्नाटक)।
- मैंगनीज (Manganese): इस्पात निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक। मुख्य उत्पादक: ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक।
ख. अलौह धातु खनिज (Non-Ferrous Minerals)
इनमें लोहा नहीं होता। ये तांबा, बॉक्साइट, सोना, चाँदी आदि होते हैं और भारत में इनका भंडार सीमित है।
- बॉक्साइट (Bauxite): एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क। प्रमुख उत्पादक: ओडिशा (नालको, कोरापुट), छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड।
- तांबा (Copper): विद्युत उद्योग के लिए महत्वपूर्ण। प्रमुख उत्पादक: मध्य प्रदेश (मालंजखंड), राजस्थान (खेतड़ी), झारखंड।
- सोना (Gold): मुख्य खान: कर्नाटक (कोलार गोल्ड फील्ड्स – अब लगभग समाप्त), आंध्र प्रदेश, झारखंड।
2. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)
इन खनिजों में धातु का अंश नहीं होता। ये न तो चमकदार होते हैं और न ही ताप与 विद्युत के सुचालक।
- चूना पत्थर (Limestone): सीमेंट उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग एवं रासायनिक उद्योग का मूल आधार। प्रमुख उत्पादक: मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात।
- माइका (Mica): विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में अवरोधक के रूप में प्रयुक्त। भारत विश्व का अग्रणी उत्पादक। प्रमुख पट्टी: झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान का भाग।
- अभ्रक (Asbestos), जिप्सम, डोलोमाइट आदि अन्य महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज हैं।
3. परंपरागत ऊर्जा स्रोत (Conventional Energy Sources)
ये वे स्रोत हैं जिनका उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है और ये प्रदूषणकारी तथा समाप्य (exhaustible) हैं।
क. कोयला (Coal)
भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़। मुख्य प्रकार: एन्थ्रासाइट (उत्तम किस्म), बिटुमिनस (व्यापक रूप से प्रयुक्त), लिग्नाइट (निम्न श्रेणी)। प्रमुख कोयला क्षेत्र: दामोदर घाटी (झारखंड-पश्चिम बंगाल), सोन घाटी, गोदावरी-वर्धा घाटी।
ख. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (Petroleum & Natural Gas)
देश की ऊर्जा जरूरतों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत।
- कच्चा तेल (Crude Oil): मुख्य उत्पादक क्षेत्र: मुंबई हाई (अरब सागर), असम (डिगबोई, नहरकटिया), गुजरात।
- प्राकृतिक गैस (Natural Gas): स्वच्छ ईंधन। प्रमुख क्षेत्र: कृष्णा-गोदावरी बेसिन, मुंबई हाई, त्रिपुरा, असम।
ग. जल विद्युत (Hydroelectric Power)
पुन:पूर्ति योग्य, स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल स्रोत। भारत में विशाल जल विद्युत क्षमता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा अभी भी अद्योहित (untapped) है। प्रमुख परियोजनाएँ: भाखड़ा नांगल, टिहरी बांध, सरदार सरोवर परियोजना।
4. अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत (Non-Conventional Energy Sources)
ये नवीन, स्वच्छ, असमाप्य (renewable) और पर्यावरण के अनुकूल स्रोत हैं। भविष्य की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति इन्हीं पर निर्भर है।
क. सौर ऊर्जा (Solar Energy)
सूर्य के प्रकाश को फोटोवोल्टाइक सेल की सहायता से विद्युत में परिवर्तित किया जाता है। भारत की राष्ट्रीय सौर मिशन इसके विकास की प्रमुख पहल है। राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक प्रमुख राज्य।
ख. पवन ऊर्जा (Wind Energy)
वायु की गतिज ऊर्जा का उपयोग। भारत विश्व के प्रमुख पवन ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है। तमिलनाडु (मुप्पंडल, जोगिमट्टी) देश का अग्रणी राज्य है। गुजराव, महाराष्ट्र, कर्नाटक अन्य प्रमुख राज्य।
ग. बायोमास ऊर्जा (Biomass Energy)
कृषि अवशेष, जैविक कचरा, गोबर आदि से उत्पन्न ऊर्जा। गोबर गैस (बायोगैस) और एथेनॉल इसके उदाहरण हैं।
घ. अन्य स्रोत
- ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy): समुद्री ज्वार-भाटा से प्राप्त ऊर्जा। खंभात की खाड़ी (गुजरात) और सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) में संभावना।
- भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy): पृथ्वी के आंतरिक भाग की ऊष्मा का उपयोग। हिमाचल प्रदेश (मणिकरण) और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में संभावना।
- नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy): यूरेनियम और थोरियम जैसे रेडियोएक्टिव खनिजों से प्राप्त। प्रमुख संयंत्र: तारापुर (महाराष्ट्र), कुडनकुलम (तमिलनाडु), रावतभाटा (राजस्थान)।
निष्कर्ष
भारत के पास खनिज और ऊर्जा संसाधनों का विशाल भंडार है, लेकिन इनका असमान वितरण, तीव्र गति से हो रहा दोहन और पर्यावरणीय प्रभाव चिंता का विषय हैं। देश के सतत विकास के लिए यह आवश्यक है कि खनिजों के संरक्षण, कुशल दोहन, पुनर्चक्रण और अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जाए। ‘सूर्य, जल, वन और नभ, बचे रहेंगे तो हम बचेंगे’ – यह भविष्य की रणनीति का मूलमंत्र होना चाहिए।
