Chapter 30: आदि धर्म – झारखण्ड के जनजातियों का सारण सम्प्रदाय
(The Sarna Religion: The Primordial Faith of Jharkhand’s Tribes)
1. परिचय (Introduction)
सारण धर्म झारखण्ड की आदिवासी समुदायों, मुख्यतः संथाल, मुंडा, हो, उराँव और खड़िया जनजातियों द्वारा पालन किया जाने वाला एक पारम्परिक एवं प्रकृति-केंद्रित आस्था का मार्ग है। यह एक आदिवासी धर्म (Adivasi Dharma) है जो मूल रूप से “आदि” यानी प्रारंभिक और मौलिक है। इसे “सारना” कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “साल वन” (Grove of Sal Trees), क्योंकि साल के पेड़ इनके धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा के केंद्र में हैं।
यह धर्म पूर्णतः मौखिक परंपरा पर आधारित है और इसका कोई एक संहिताबद्ध धर्मग्रंथ नहीं है। इसकी मान्यताएं, रीति-रिवाज और प्रथाएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित होती हैं।
2. मुख्य विशेषताएँ और सिद्धांत (Key Features and Tenets)
- प्रकृति पूजा (Nature Worship): सारण धर्म का मूल सिद्धांत प्रकृति की पूजा है। इसके अनुयायी एक ईश्वर (सिंगबोंगा) में विश्वास रखते हैं, जो सर्वोच्च है, लेकिन वे प्रकृति की विभिन्न शक्तियों और तत्वों की भी पूजा करते हैं। वे मानते हैं कि पहाड़, नदियाँ, जंगल और वृक्ष दैवीय शक्तियों के निवास स्थान हैं।
- सर्वोच्च देवता (Singbonga): संथाल और मुंडा समुदायों में सर्वोच्च ईश्वर को सिंगबोंगा (Singbonga) या मारांग बुरु (Marang Buru) कहा जाता है, जिसका अर्थ है “सूर्य देवता” या “महान पर्वत”।
- पवित्र उपवन (Sacred Groves – Jaher Than/ Sarna Sthal): सारण धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पूजा स्थल जाहेर थान (Jaher Than) या सारण स्थल है। यह एक साल के पेड़ों से घिरा एक पवित्र उपवन होता है, जहाँ गाँव के देवता निवास करते हैं। यहाँ कोई मूर्ति या चित्र नहीं होता, बल्कि प्रतीकों के रूप में पत्थर रखे जाते हैं।
- ग्राम देवता (Village Deities): जाहेर थान में मुख्य रूप से पाँच प्रमुख देवताओं की पूजा की जाती है:
- मारांग बुरु (Marang Buru): महान पर्वत, संरक्षक देवता।
- जाहेर एरा (Jaher Era): गाँव की देवी (पवित्र उपवन की देवी)।
- मोरेको टुरुयको (Moreko Turuyko): पांचवीं देवी।
- गोसाई एरा (Gosai Era): समृद्धि की देवी।
- पर्वतों और नदियों के देवता।
- पूजा का तरीका (Mode of Worship): मुख्य पूजा प्रार्थना, नृत्य, गीत और पशु बलि (मुर्गा, बकरा) के माध्यम से की जाती है। नागरा बजाकर देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। अर्पण किए गए प्रसाद (जैसे- हंडिया – चावल की बियर) को सामूहिक रूप से ग्रहण किया जाता है।
- धार्मिक प्रमुख (Religious Head): पूजा का नेतृत्व गाँव का मुख्य पुजारी नायके (Naike) या लाया (Laya) करता है, जिसकी सहायता पाहन (Pahan) या देसहरी (Deohari) करते हैं।
3. प्रमुख त्यौहार (Major Festivals)
सारण अनुयायी प्रकृति के चक्र के अनुसार त्यौहार मनाते हैं।
- सरहुल (Sarhul): यह सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसे “वसंत का त्यौहार” या “वृक्षों का त्यौहार” कहा जाता है। यह चैत्र महीने (मार्च-अप्रैल) में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जब साल के पेड़ों पर नए फूल आते हैं। यह नए साल, वैवाहिक समारोहों की शुरुआत और फसल बोने के season का प्रतीक है।
- कर्मा (Karma): यह भादो महीने (अगस्त-सितंबर) में मनाया जाता है और कर्मा नामक वृक्ष की पूजा पर केंद्रित है। यह त्यौहार समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के लिए मनाया जाता है।
- मage परब (Mage Parab): यह फसल कटाई का त्यौहार है, जो पौष महीने (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है। नई फसल की पहली उपज देवताओं को अर्पित की जाती है।
- जानी-शिकार (Jani-Shikar): शिकार का त्यौहार।
4. सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व (Socio-Cultural Significance)
- सामुदायिक जीवन (Community Life): सारण धर्म सामुदायिक एकजुटता और सामूहिक पहचान का आधार है। सभी अनुष्ठान और त्यौहार पूरे गाँव की सामूहिक भागीदारी से मनाए जाते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation): प्रकृति के प्रति श्रद्धा का भाव जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की एक मजबूत नैतिक व्यवस्था को जन्म देता है। जाहेर थान (पवित्र उपवन) में पेड़ों की कटाई वर्जित है।
- जनजातीय अस्मिता (Tribal Identity): यह धर्म झारखण्ड की जनजातियों की अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान और उनके “आदिवासीत्व” का मूल स्तंभ है।
5. वर्तमान संदर्भ और चुनौतियाँ (Contemporary Context and Challenges)
- धर्म कोड मान्यता की मांग (Demand for Religious Code Recognition): सारण अनुयायियों की एक लंबे समय से मांग रही है कि भारतीय जनगणना में इन्हें एक अलग धर्म कोड (Separate Religious Code) दिया जाए। वर्तमान में, इन्हें “अन्य (Other)” या “जनजाति (Tribal)” श्रेणी में रखा जाता है, जिसे वे अपनी独特 पहचान के लिए एक खतरा मानते हैं।
- रूपांतरण का दबाव (Conversion Pressures): इस faith system पर मुख्यधारा के organized religions के रूपांतरण अभियानों का दबाव और प्रभाव एक बड़ी चुनौती है।
- शहरीकरण और पलायन (Urbanization and Migration): पारंपरिक गाँवों से पलायन और शहरीकरण के कारण नई पीढ़ी का अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़ाव कमजोर हो रहा है।
- राजनीतिक पहल (Political Initiatives): झारखण्ड सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को एक अलग “सारण धर्म कोड” देने का प्रस्ताव भेजा है। यह एक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
सारण सम्प्रदाय झारखण्ड की जनजातीय संस्कृति का हृदय स्थल है। यह केवल एक धार्मिक प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है जो प्रकृति, समुदाय और पूर्वजों के साथ सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व सिखाती है। आधुनिक दौर में इसकी सबसे बड़ी चुनौती अपनी प्रासंगिकता बनाए रखते हुए, बाहरी दबावों का सामना करना और अपनी अद्वितीय पहचान को औपचारिक मान्यता दिलाना है। भारत की सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने में इस तरह के स्वदेशी faith systems का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
