कृषि वनीकरण (Agroforestry): अवधारणा, महत्व एवं बंजर भूमि पुनरुद्धार के साधन

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में भूमि संसाधनों का टिकाऊ उपयोग एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना एक गंभीर चुनौती है। इस संदर्भ में कृषि वनीकरण एवं बंजर भूमि का पुनरुद्धार अत्यंत प्रासंगिक विषय हैं।

कृषि वनीकरण (Agroforestry) की अवधारणा

कृषि वनीकरण भूमि उपयोग की वह सुनियोजित एवं विज्ञान-आधारित पद्धति है जिसमें एक ही भूखंड पर कृषि फसलों, वृक्षों एवं/अथवा पशुधन को एक साथ समन्वित रूप से उगाया या पाला जाता है। यह एक ऐसी परिस्थितिकीय अनुकूल प्रणाली है जो कृषि एवं वानिकी के मध्य एक सेतु का कार्य करती है।

कृषि वनीकरण के मुख्य उद्देश्य:

    • भूमि की उत्पादकता में स्थायित्व लाना।

    • किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाकर आर्थिक स्थिरता प्रदान करना।

    • पर्यावरणीय संरक्षण (मृदा अपरदन रोकना, जल संरक्षण, जैव-विविधता बढ़ाना)।

    • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायता करना (कार्बन पृथक्करण)।

    • ऊर्जा (ईंधन लकड़ी) एवं चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

कृषि वनीकरण के प्रमुख मॉडल:

    • कृषि-वानिकी (Agri-silviculture): फसलों + वृक्षों का समन्वय।

    • सिल्वो-पास्चर (Silvo-pasture): वृक्षों + पशुचारण का समन्वय।

    • एग्री-सिल्वो-पास्चर (Agri-silvo-pasture): फसलें + वृक्ष + पशुचारण का समन्वय।

    • एग्रो-एक्वा फार्मिंग (Agro-aqua farming): वृक्ष + मत्स्य पालन।

    • वृक्ष बागान (Taungya): वन विभाग द्वारा वन भूमि पर प्रारंभिक वर्षों में फसलें उगाना।

बंजर भूमि: परिभाषा एवं प्रकार

बंजर भूमि से तात्पर्य ऐसी भूमि से है जो प्राकृतिक या मानवजनित कारणों से अपनी उत्पादकता खो चुकी है और जिस पर सामान्य कृषि कार्य संभव नहीं है।

बंजर भूमि के प्रमुख प्रकार:

    • खारी भूमि (Saline Land): भूमि में लवणों की अधिकता।

    • क्षारीय भूमि (Alkaline/Usar Land): सोडियम कार्बोनेट की अधिकता के कारण उच्च pH।

    • अम्लीय भूमि (Acidic Land): अम्लीय गुणों वाली भूमि।

    • जल-जमाव वाली भूमि (Waterlogged Land): भूजल स्तर के ऊपर उठने के कारण।

    • मरुस्थलीय भूमि (Desertified Land): मरुस्थल के फैलाव के कारण अनुत्पादक भूमि।

    • खनन प्रभावित भूमि (Mining Affected Land): खनन कार्यों से नष्ट हुई भूमि।

बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने हेतु साधन एवं तकनीकें

बंजर भूमि सुधार एक बहु-आयामी प्रक्रिया है जिसमें अभियांत्रिकी, जैविक एवं रासायनिक विधियों का समन्वय आवश्यक है।

1. भौतिक/अभियांत्रिकी साधन:

    • समोच्च रेखा बंधान (Contour Bunding): ढलान वाली भूमि पर मृदा एवं जल संरक्षण हेतु।

    • ट्रेंचिंग (Trenching): वर्षा जल को रोकने एवं भूजल पुनर्भरण हेतु खाइयाँ बनाना।

    • जिप्सम खनन (Gypsum Application): क्षारीय भूमि सुधार हेतु जिप्सम का प्रयोग।

    • जल निकासी व्यवस्था (Drainage System): जल-जमाव वाली भूमि के लिए उचित नालियाँ बनाना।

2. जैविक साधन:

    • हरी खाद (Green Manure): ढैंचा, सनई जैसी फसलों को जोतकर मृदा की उर्वरता बढ़ाना।

    • कम्पोस्ट एवं जैविक खाद (Compost & Organic Manure): मृदा के जैविक पदार्थ में वृद्धि करना।

    • वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost): केंचुओं द्वारा तैयार उच्च गुणवत्ता वाली खाद।

    • बायो-चार (Bio-char): जैविक अवशेषों को जलाकर तैयार चारकोल, जो मृदा स्वास्थ्य में सुधार करता है।

3. वानिकी-आधारित साधन (कृषि वनीकरण की भूमिका):

    • सहनशील वृक्षारोपण (Tolerant Species Plantation): बंजर भूमि के लिए उपयुक्त वृक्ष प्रजातियाँ जैसे- खेजड़ी, बबूल, नीम, शिशम, यूकेलिप्टस आदि लगाना।

    • वायु-अवरोधक पट्टी (Shelterbelts): मरुस्थलीकरण रोकने हेतु वृक्षों की पंक्ति।

    • घास पट्टी (Grass Strips): मृदा अपरदन रोकने हेतु घास लगाना।

    • मृदा सुधारक वृक्ष (Soil Ameliorating Trees): ऐसे वृक्ष जो मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं (जैसे- ल्यूसिना, ग्लिरिसिडिया)।

4. सरकारी पहलें:

    • राष्ट्रीय कृषि वनीकरण नीति (National Agroforestry Policy), 2014: कृषि वनीकरण को बढ़ावा देने वाली विश्व की पहली व्यापक नीति।

    • वन धन योजना (Van Dhan Yojana): वनोपज पर आधारित आजीविका।

    • मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card): मृदा की सेहत का निदान एवं सुधार के उपाय सुझाना।

    • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): ‘प्रति बूंद, अधिक फसल’ के तहत जल उपयोग दक्षता बढ़ाना।

निष्कर्ष

कृषि वनीकरण एवं बंजर भूमि पुनरुद्धार, दोनों ही भारत की कृषि एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के दो पहलू हैं। कृषि वनीकरण बंजर भूमि सुधार का एक प्रभावी, टिकाऊ एवं लागत-कारगर जैविक उपाय है। इसके सफल क्रियान्वयन से न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का शमन एवं पर्यावरणीय संरक्षण के लक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सकता है। एक समन्वित दृष्टिकोण ही भूमि क्षरण को रोकने और हरित भारत के सपने को साकार करने की कुंजी है।

JPSC MAINS PAPER 6/Chapter – 1 #13