जैव अणु (Biomolecules)

जैव अणु वे कार्बनिक यौगिक हैं जो जीवित जीवों की संरचना का निर्माण करते हैं और उनके जैविक कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं। ये मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड (वसा), न्यूक्लिक अम्ल, विटामिन और एंजाइम हैं।

1. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

संरचना (Structure):

ये कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O) के बने होते हैं, जिनमें H और O का अनुपात जल के समान 2:1 होता है। इन्हें सामान्य सूत्र Cx(H2O)y से दर्शाया जाता है। संरचनात्मक आधार पर इन्हें तीन वर्गों में बांटा गया है:

  • मोनोसैकेराइड (Monosaccharide): ये सबसे सरल शर्करा हैं, जिनका जल-अपघटन नहीं किया जा सकता। उदाहरण: ग्लूकोज, फ्रक्टोज, गैलेक्टोज।
  • डाइसैकेराइड (Disaccharide): दो मोनोसैकेराइड के जुड़ने से बनते हैं। उदाहरण: सुक्रोज (ग्लूकोज+फ्रक्टोज), लैक्टोज (ग्लूकोज+गैलेक्टोज), माल्टोज (ग्लूकोज+ग्लूकोज)।
  • पॉलीसैकेराइड (Polysaccharide): बहुत सारे मोनोसैकेराइड के जुड़ने से बनने वाले जटिल अणु। उदाहरण: स्टार्च, सेलुलोज, ग्लाइकोजन।

कार्य (Functions):

  • ऊर्जा का प्रमुख स्रोत: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीकरण से लगभग 4.1 किलोकैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • भंडारण पदार्थ: पौधों में स्टार्च और जंतुओं में ग्लाइकोजन के रूप में ऊर्जा संचित रहती है।
  • संरचनात्मक भूमिका: पादप कोशिका भित्ति का मुख्य घटक सेलुलोज है।
  • जैव-अणुओं का अग्रदूत: ये न्यूक्लिक अम्ल, लिपिड, अमीनो अम्ल आदि के संश्लेषण में सहायक होते हैं।

2. प्रोटीन (Proteins)

संरचना (Structure):

प्रोटीन कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के बने जटिल मैक्रोमोलेक्यूल्स हैं। कुछ में गंधक (S) भी पाई जाती है। इनकी इकाई अमीनो अम्ल (Amino Acid) है। 20 प्रकार के अमीनो अम्ल विभिन्न संख्या, अनुक्रम और संरचना में जुड़कर असंख्य प्रोटीन का निर्माण करते हैं। प्रोटीन की संरचना चार स्तरों पर परिभाषित की जाती है:

  • प्राथमिक संरचना (Primary): अमीनो अम्लों का रैखिक अनुक्रम।
  • द्वितीयक संरचना (Secondary): पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला का सर्पिल (α-हेलिक्स) या सिलवटों (β-प्लीटेड शीट) के रूप में व्यवस्थित होना।
  • तृतीयक संरचना (Tertiary): द्वितीयक संरचना का त्रिआयामी मोड़ना, जिससे प्रोटीन का गोलाकार रूप बनता है।
  • चतुर्थक संरचना (Quaternary): दो या दो से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं का एक साथ मिलकर कार्य करना (जैसे, हीमोग्लोबिन)।

कार्य (Functions):

  • संरचनात्मक: कोशिका झिल्ली, मांसपेशियों के ऊतक (एक्टिन, मायोसिन), बाल, नाखून (केराटिन) आदि का निर्माण।
  • उत्प्रेरक: सभी एंजाइम प्रोटीन होते हैं जो जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं।
  • परिवहन: हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
  • रक्षात्मक: शरीर में प्रतिरक्षी (Antibodies) प्रोटीन से बने होते हैं जो रोगाणुओं से सुरक्षा करते हैं।
  • हॉर्मोन के रूप में: इंसुलिन, ग्लूकागन आदि हॉर्मोन प्रोटीन हैं।

3. वसा (लिपिड – Lipids)

संरचना (Structure):

लिपिड जल में अविलेय परंतु कार्बनिक विलायकों (जैसे ईथर, क्लोरोफॉर्म) में विलेय यौगिक हैं। ये वसीय अम्ल (Fatty Acids) और ग्लिसरॉल से मिलकर बने होते हैं। वसीय अम्ल संतृप्त (Saturated, जैसे- पामिटिक अम्ल) और असंतृप्त (Unsaturated, जैसे- ओलिक अम्ल) हो सकते हैं।

कार्य (Functions):

  • ऊर्जा का सघन भंडार: 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलोकैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • ऊष्मारोधी: चमड़े के नीचे जमा वसा शरीर की ऊष्मा की हानि रोकती है।
  • संरक्षण: आंतरिक अंगों के चारों ओर जमी वसा उन्हें आघात से बचाती है।
  • हॉर्मोन एवं विटामिन का संश्लेषण: कोलेस्ट्रॉल से कई स्टेरॉयड हॉर्मोन और विटामिन-D बनता है।
  • कोशिका झिल्ली का मुख्य घटक: फॉस्फोलिपिड कोशिका झिल्ली की ड्यूबिल परत बनाते हैं।

4. विटामिन और इसकी कमी से होने वाले रोग

विटामिन जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो शरीर की उपापचयी क्रियाओं के नियमन के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं। इनकी कमी से विशिष्ट रोग होते हैं।

विटामिन रासायनिक नाम कमी से होने वाले रोग स्रोत
विटामिन A रेटिनॉल रतौंधी, जीरोफ्थैलमिया गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध
विटामिन B1 थायमिन बेरी-बेरी अनाज के बाहरी आवरण, यीस्ट
विटामिन B2 राइबोफ्लेविन त्वचा में दरारें, जीभ का लाल होना दूध, अंडा, यकृत
विटामिन B3 नियासिन पेलाग्रा (4 D’s – Dermatitis, Diarrhea, Dementia, Death) मूंगफली, मांस, यीस्ट
विटामिन B12 सायनोकोबलामिन अरक्तता (Anaemia) मांस, अंडा, दूध (पौधों में नहीं)
विटामिन C एस्कॉर्बिक अम्ल स्कर्वी (मसूड़ों से खून आना) खट्टे फल, आंवला, टमाटर
विटामिन D कैल्सिफेरॉल रिकेट्स (बच्चों में), ऑस्टियोमैलेशिया (वयस्कों में) सूर्य का प्रकाश, मछली का तेल
विटामिन E टोकोफेरॉल प्रजनन क्षमता में कमी वनस्पति तेल, हरी पत्तेदार सब्जियां
विटामिन K फिलोक्विनोन रक्त का थक्का न बनना (हीमोरेज) हरी पत्तेदार सब्जियां

5. एंजाइम (Enzymes)

एंजाइम जैव-उत्प्रेरक (Biocatalysts) हैं जो प्रोटीन से बने होते हैं और जीवित कोशिकाओं में होने वाली जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं, स्वयं अभिक्रिया में खर्च नहीं होते।

विशेषताएं (Characteristics):

  • उच्च उत्प्रेरक क्षमता: अल्प मात्रा में तीव्र गति से अभिक्रिया कराते हैं।
  • विशिष्टता (Specificity): प्रत्येक एंजाइम एक विशिष्ट अभिक्रिया को ही उत्प्रेरित करता है। (ताला-चाबी सिद्धांत)।
  • तापमान एवं pH संवेदनशीलता: प्रत्येक एंजाइम एक निश्चित तापमान (सामान्यतः 35-40°C) और pH पर सर्वोत्तम कार्य करता है।
  • प्रतिवर्ती क्रिया: अधिकांश एंजाइम अभिक्रिया को दोनों दिशाओं में उत्प्रेरित कर सकते हैं।

6. हॉर्मोन (Hormones)

हॉर्मोन विशिष्ट अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक दूत (Chemical Messengers) हैं जो रक्त द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचकर विशिष्ट शारीरिक क्रियाओं का नियमन करते हैं।

(क) पौधों के हॉर्मोन और वृद्धि नियामक

  • ऑक्सिन (Auxin): कोशिका विस्तरण, जड़ विभेदन, प्रकाशानुवर्तन में भूमिका।
  • जिबरेलिन (Gibberellin): तने की लंबाई में वृद्धि, बीजों के अंकुरण को प्रेरित करना।
  • साइटोकाइनिन (Cytokinin): कोशिका विभाजन को प्रेरित करना, कोशिका विभेदन, पर्ण-वृद्धावस्था को रोकना।
  • एब्सिसिक अम्ल (ABA – Abscisic Acid): वृद्धि अवरोधक, पर्णपात एवं सुषुप्ता को प्रेरित करना, स्टोमेटा के बंद होने में भूमिका।
  • इथाइलीन (Ethylene): फलों के पकने में सहायक, पर्णपात को प्रेरित करना, पौधे की वृद्धि को अवरुद्ध करना।

(ख) जीवों (मनुष्य) के हॉर्मोन और उनके कार्य

  • इंसुलिन (अग्न्याशय): रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करना।
  • थायरॉक्सिन (थायरॉयड): शरीर के उपापचय की दर का नियंत्रण।
  • वृद्धि हॉर्मोन (पीयूष ग्रंथि): हड्डियों और शरीर की वृद्धि को नियंत्रित करना।
  • एड्रिनलिन (अधिवृक्क ग्रंथि): ‘Fight or Flight’ response के लिए शरीर को तैयार करना, हृदय गति बढ़ाना।
  • टेस्टोस्टेरोन (वृषण): नर लैंगिक लक्षणों का विकास।
  • एस्ट्रोजन (अंडाशय): मादा लैंगिक लक्षणों का विकास, मासिक धर्म चक्र का नियमन।
JPSC MAINS PAPER 6/Chapter – 1 #6