सार्वजनिक और निजी प्रशासन: अवधारणा, विशेषताएँ एवं तुलना
यह टॉपिक UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पेपर-II (शासन, प्रशासन एवं लोकतंत्र) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशासन के इन दोनों रूपों की समझ एक सिविल सेवक के लिए नीति निर्माण एवं कार्यान्वयन में आवश्यक है।
सार्वजनिक प्रशासन (Public Administration)
अवधारणा (Concept)
सार्वजनिक प्रशासन से तात्पर्य सरकारी मशीनरी द्वारा जनता के हित में किए जाने वाले सभी कार्यों से है। यह राज्य की कार्यपालिका शाखा का वह हिस्सा है जो सार्वजनिक नीतियों को लागू करने, कानून का पालन सुनिश्चित करने और जनता को विभिन्न सेवाएं प्रदान करने का कार्य करता है। इसे “लोगों का व्यवसाय” भी कहा जाता है।
मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
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- सार्वजनिक उत्तरदायित्व: यह अंततः जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। जवाबदेही संसद, विधानसभा, न्यायपालिका और मीडिया के माध्यम से तय होती है।
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- राजनीतिक नियंत्रण: इस पर राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्रिमंडल) का नियंत्रण होता है। प्रशासनिक अधिकारी नीतिगत निर्देशों के लिए अपने मंत्री के प्रति जिम्मेदार होते हैं।
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- सेवा-उन्मुख: इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है (जैसे – शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा)।
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- विधिकता: इसका प्रत्येक कार्य संविधान, कानूनों और नियमों के दायरे में होता है। इसे ‘कानून का शासन’ (Rule of Law) मानना पड़ता है।
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- वित्तीय स्रोत: इसका वित्त पोषण जनता के करों (Taxpayers’ Money) से होता है। बजट सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत पारित होता है।
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- एकाधिकार: अक्सर इसके पास कई सेवाओं पर एकाधिकार होता है (जैसे – रक्षा, पुलिस, डाकघर)।
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- लालफीताशाही: इसमें नौकरशाही की जटिल प्रक्रियाएं, नियमों का पालन और लालफीताशाही की प्रवृत्ति देखने को मिलती है।
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- पारदर्शिता एवं सूचना का अधिकार: इसे अपने कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखनी होती है और नागरिकों को सूचना का अधिकार (RTI) प्रदान करना होता है।
निजी प्रशासन (Private Administration)
अवधारणा (Concept)
निजी प्रशासन से तात्पर्य गैर-सरकारी संगठनों जैसे कि कंपनियों, फर्मों, Cooperatives आदि के प्रबंधन से है। इसका मुख्य उद्देश्य निजी लाभ अर्जित करना या अपने स्वामियों/हिस्सेदारों के हितों की पूर्ति करना होता है।
मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
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- लाभ-उन्मुख: इसका प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लाभ (Profit) कमाना है। सभी निर्णय लाभ को अधिकतम करने के लिए लिए जाते हैं।
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- बाजार दबाव: यह ग्राहकों और बाजार की ताकतों (मांग और आपूर्ति) के प्रति उत्तरदायी होता है। प्रतिस्पर्धा इसे कुशल बनने के लिए मजबूर करती है।
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- प्रबंधकीय स्वायत्तता: इसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और लचीली होती है। इसे सार्वजनिक जवाबदेही के उतने बंधनों से नहीं गुजरना पड़ता।
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- गोपनीयता: इसके कार्यविधि और डेटा गोपनीय होते हैं। सार्वजनिक प्रशासन की तरह इसे पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत नहीं होती।
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- वित्तीय स्रोत: इसका वित्त पोषण निजी निवेश, शेयर बाजार, या ऋण के माध्यम से होता है।
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- ग्राहक-उन्मुख: यह केवल उन्हीं ग्राहकों को सेवा देता है जो इसकी सेवाओं के लिए भुगतान करते हैं।
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- प्रतिस्पर्धा: इसे बाजार में अन्य फर्मों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
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- कम लालफीताशाही: निर्णय लेने की प्रक्रिया में आमतौर पर कम विलंब और कम औपचारिकताएं होती हैं।
सार्वजनिक एवं निजी प्रशासन में तुलना (Comparison)
| आधार | सार्वजनिक प्रशासन | निजी प्रशासन |
|---|---|---|
| उद्देश्य | सार्वजनिक हित, सेवा | लाभ कमाना |
| जवाबदेही | जनता, संसद, न्यायपालिका | शेयरधारक/मालिक |
| वित्त पोषण | सार्वजनिक कर (Tax) | निजी पूंजी/निवेश |
| कानूनी ढांचा | संविधान, सार्वजनिक कानून | कंपनी अधिनियम, अनुबंध कानून |
| पारदर्शिता | उच्च (RTI लागू) | सीमित/गोपनीय |
| एकाधिकार | अक्सर होता है | दुर्लभ, प्रतिस्पर्धा होती है |
| निर्णय प्रक्रिया | धीमी, नौकरशाही, राजनीतिक | तेज, लचीली, आर्थिक |
| दृष्टिकोण | कानूनी-राजनीतिक | आर्थिक-तकनीकी |
निष्कर्ष (Conclusion)
हालांकि सार्वजनिक और निजी प्रशासन के उद्देश्य, जवाबदेही और कार्यप्रणाली में मूलभूत अंतर हैं, लेकिन आधुनिक समय में दोनों के बीच की रेखाएं धुंधली हो रही हैं। सार्वजनिक प्रशासन निजी क्षेत्र की दक्षता, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और प्रबंधन तकनीकों को अपना रहा है (न्यू पब्लिक मैनेजमेंट/गवर्नेंस के माध्यम से)। वहीं, निजी कंपनियों पर सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और नैतिकता के मामले में सार्वजनिक दबाव बढ़ रहा है। एक आदर्श स्थिति वह है जहाँ सार्वजनिक प्रशासन में निजी क्षेत्र की दक्षता आए और निजी प्रशासन में सार्वजनिक हित की भावना विकसित हो।
