प्राधिकरण प्रबंधन के सिद्धांत: प्रत्यायोजन, केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण

संगठनात्मक प्रबंधन में, ‘प्राधिकरण’ (Authority) का अर्थ किसी पद पर आसीन व्यक्ति को निर्णय लेने और अपने अधीनस्थों को आदेश देने का अधिकार है। प्राधिकरण के प्रबंधन की तीन प्रमुख अवधारणाएँ हैं: प्रत्यायोजन (Delegation), केंद्रीकरण (Centralization) और विकेंद्रीकरण (Decentralization)। ये सिद्धांत संगठन की संरचना, कार्यकुशलता और निर्णय लेने की प्रक्रिया को परिभाषित करते हैं।

1. प्रत्यायोजन (Delegation)

अवधारणा (Concept): प्रत्यायोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक उच्चाधिकारी (Superior) अपने कार्यों एवं अधिकारों का एक भाग अपने अधीनस्थ (Subordinate) को हस्तांतरित कर देता है, साथ ही उस कार्य के निष्पादन की जिम्मेदारी भी। हालाँकि, अंतिम जवाबदेही (Ultimate Accountability) प्रत्यायोजक (Delegator) के पास ही बनी रहती है।

प्रत्यायोजन की मुख्य विशेषताएँ:

  • यह एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है जो प्रबंधक और उसके अधीनस्थ के बीच होती है।
  • इसके अंतर्गत अधिकारों का हस्तांतरण ऊपर से नीचे की ओर होता है।
  • प्रत्यायोजन की सफलता अधीनस्थ की क्षमता और प्रबंधक के नियंत्रण पर निर्भर करती है।
  • इसमें जवाबदेही (Accountability) का हस्तांतरण नहीं होता।
  • यह प्रबंधन का एक उपकरण (Tool) है, संगठन का एक दर्शन (Philosophy) नहीं।

प्रत्यायोजन के तत्व (Elements of Delegation):

  • कर्तव्यों का निर्धारण (Assignment of Duties): सबसे पहले अधीनस्थ को कर्तव्य और कार्य सौंपे जाते हैं।
  • अधिकारों का प्रत्यायोजन (Granting of Authority): सौंपे गए कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक अधिकार दिए जाते हैं।
  • उत्तरदायित्व का सृजन (Creation of Responsibility): अधिकार मिलने के बाद अधीनस्थ उस कार्य के प्रति उत्तरदायी (Responsible) हो जाता है।
  • जवाबदेही (Accountability): अधीनस्थ कार्य के परिणामों के लिए अपने उच्चाधिकारी के प्रति जवाबदेह होता है।

2. केंद्रीकरण (Centralization)

अवधारणा (Concept): केंद्रीकरण से तात्पर्य उस संगठनात्मक ढाँचे से है जहाँ निर्णय लेने का सारा अधिकार संगठन के शीर्ष स्तर (Top Management) के पास केंद्रित होता है। निचले स्तरों के पास निर्णय लेने की शक्ति नहीं होती, उनका कार्य केवल शीर्ष प्रबंधन के आदेशों का पालन करना होता है।

केंद्रीकरण की मुख्य विशेषताएँ:

  • निर्णय लेने का अधिकार शीर्ष प्रबंधन तक सीमित होता है।
  • निचले स्तरों पर कार्यरत व्यक्तियों की भूमिका सीमित और निष्क्रिय होती है।
  • संगठन में अनुशासन बना रहता है और नियंत्रण में सुविधा होती है।
  • यह छोटे और सरल संगठनों के लिए अधिक उपयुक्त है।
  • इसमें अधीनस्थों के विकास के अवसर सीमित होते हैं।

3. विकेंद्रीकरण (Decentralization)

अवधारणा (Concept): विकेंद्रीकरण एक ऐसी संगठनात्मक व्यवस्था है जिसमें निर्णय लेने का अधिकार संगठन के शीर्ष स्तर से निचले स्तरों (Middle and Lower Management) को व्यवस्थित रूप से वितरित कर दिया जाता है। यह प्रत्यायोजन से व्यापक अवधारणा है और इसे ‘प्रत्यायोजन का विस्तारित रूप’ माना जाता है।

विकेंद्रीकरण की मुख्य विशेषताएँ:

  • निर्णय लेने का अधिकार शीर्ष स्तर से निचले स्तरों को व्यापक रूप से हस्तांतरित किया जाता है।
  • यह संगठनात्मक दर्शन (Organizational Philosophy) और प्रबंधन की नीति का प्रतीक है।
  • इससे अधीनस्थों के मनोबल और कौशल में वृद्धि होती है।
  • यह बड़े और जटिल संगठनों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
  • इसमें निचले स्तर के प्रबंधकों को स्वायत्तता (Autonomy) प्राप्त होती है।

तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis)

आधार केंद्रीकरण विकेंद्रीकरण
अर्थ निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित होना निर्णय लेने की शक्ति का विभिन्न स्तरों पर विस्तार
निर्णय प्रक्रिया धीमी तीव्र
अधीनस्थों की भूमिका सीमित और निष्क्रिय व्यापक और सक्रिय
उपयुक्तता छोटे संगठन बड़े एवं बहु-उद्देशीय संगठन
नियंत्रण अधिक केंद्रित और सख्त विकेंद्रित और लचीला
जवाबदेही शीर्ष प्रबंधन पर विभिन्न इकाइयों के प्रमुखों पर

निर्णय

आधुनिक समय में, विकेंद्रीकरण एक प्रगतिशील प्रबंधन दर्शन के रूप में उभरा है। यह संगठनों को गतिशील, अनुकूलनशील और अधिक कुशल बनाता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत शक्तियों के विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज व्यवस्था और नगर निगम) पर बल दिया जाता है, जो इसकी उपयोगिता को प्रमाणित करता है। एक सफल प्रबंधक वही है जो प्रत्यायोजन की कला में निपुण हो और संगठन की आवश्यकतानुसार केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण के बीच उचित संतुलन बना सके।

JPSC MAINS PAPER 4/PublicAdministration Chapter – 1 #7