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निम्न में से कौन से कथन इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) के संदर्भ में असत्य हैं ?
- इलेक्ट्रोलाइट वे पदार्थ होते हैं जो जल में घुलकर आयनों (ions) में विघटित हो जाते हैं और विद्युत का संचालन करते हैं।
- सभी इलेक्ट्रोलाइट केवल जलीय विलयन (aqueous solution) में ही विद्युत का संचालन करते हैं, पिघली अवस्था (molten state) में नहीं।
- मजबूत इलेक्ट्रोलाइट (Strong Electrolyte) पूर्णतः आयनों में विघटित हो जाते हैं।
- कमजोर इलेक्ट्रोलाइट (Weak Electrolyte) आंशिक रूप से आयनों में विघटित होते हैं।
Explanation :
- इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) वे पदार्थ हैं जो जल में घुलकर या पिघली अवस्था में आयनों में टूट जाते हैं और विद्युत का संचालन करते हैं।
- दूसरा कथन असत्य है क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट जलीय विलयन (aqueous solution) के साथ-साथ पिघली अवस्था (molten state) में भी विद्युत का संचालन करते हैं।
- मजबूत इलेक्ट्रोलाइट (Strong Electrolyte) जैसे HCl, NaOH आदि पूर्णतः आयनों में विघटित होते हैं, इसलिए ये अच्छे चालक होते हैं।
- कमजोर इलेक्ट्रोलाइट (Weak Electrolyte) जैसे CH₃COOH आंशिक रूप से आयनों में विघटित होते हैं, इसलिए इनकी चालकता कम होती है।
विद्युत सेल (Electric Cell) क्या है?
- एक उपकरण जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है
- केवल यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न करता है (Only mechanical energy)
- केवल प्रकाश ऊर्जा देता है (Only light energy)
- ऊष्मा ऊर्जा को संग्रहित करता है (Stores heat energy)
Explanation::
- विद्युत सेल (Electric Cell) एक ऐसा यंत्र है जो रासायनिक अभिक्रिया (Chemical reaction) द्वारा विद्युत धारा (Electric current) उत्पन्न करता है।
- इसमें दो इलेक्ट्रोड (Electrodes) होते हैं: एनोड (Anode) और कैथोड (Cathode)।
- इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) के माध्यम से आयन (Ions) का प्रवाह होता है।
प्राथमिक सेल (Primary Cell) का उदाहरण कौन सा है?
- ड्राई सेल (Dry Cell)
- लीड-एसिड बैटरी (Lead Acid Battery)
- लिथियम आयन बैटरी (Lithium Ion Battery)
- निकल-कैडमियम बैटरी (Nickel Cadmium Battery)
Explanation::
- प्राथमिक सेल (Primary Cell) वे सेल होते हैं जिन्हें एक बार उपयोग के बाद पुनः चार्ज (Recharge) नहीं किया जा सकता।
- ड्राई सेल (Dry Cell) सबसे सामान्य प्राथमिक सेल है, जो टॉर्च, रिमोट आदि में उपयोग होता है।
- इसमें जिंक (Zinc) एनोड और कार्बन रॉड कैथोड होता है।
द्वितीयक सेल (Secondary Cell) की विशेषता क्या है?
- इसे पुनः चार्ज किया जा सकता है (Rechargeable)
- इसे केवल एक बार उपयोग किया जा सकता है
- यह केवल प्रकाश उत्पन्न करता है
- यह केवल ऊष्मा उत्पन्न करता है
Explanation::
- द्वितीयक सेल (Secondary Cell) ऐसे सेल होते हैं जिन्हें बार-बार चार्ज और डिस्चार्ज (Charge/Discharge) किया जा सकता है।
- उदाहरण: लेड-एसिड बैटरी (Lead Acid Battery), लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-ion Battery)।
- ये मोबाइल फोन, इन्वर्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग होते हैं।
बैटरी (Battery) क्या होती है?
- एक या अधिक विद्युत सेल का संयोजन
- केवल एक सेल वाला उपकरण
- केवल AC धारा उत्पन्न करने वाला उपकरण
- केवल प्रकाश देने वाला उपकरण
Explanation::
- बैटरी (Battery) कई विद्युत सेल (Electric Cells) का संयोजन होती है।
- यह DC (Direct Current) विद्युत धारा प्रदान करती है।
- इसे पोर्टेबल ऊर्जा स्रोत (Portable energy source) के रूप में उपयोग किया जाता है।
एनोड (Anode) और कैथोड (Cathode) में कौन सा कथन सही है?
- एनोड पर ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है और कैथोड पर अपचयन (Reduction)
- कैथोड पर ऑक्सीकरण होता है
- दोनों पर ऑक्सीकरण होता है
- दोनों पर अपचयन होता है
Explanation::
- एनोड (Anode): वह इलेक्ट्रोड जहाँ ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है।
- कैथोड (Cathode): वह इलेक्ट्रोड जहाँ अपचयन (Reduction) होता है।
- इलेक्ट्रॉनों (Electrons) का प्रवाह एनोड से कैथोड की ओर होता है।
विद्युत वाहक बल (EMF) क्या है?
- यह किसी स्रोत द्वारा प्रति इकाई आवेश को दी गई अधिकतम ऊर्जा है
- यह परिपथ में बहने वाली धारा है
- यह केवल प्रतिरोध के कारण उत्पन्न होता है
- यह विभवांतर (Potential Difference) के बराबर होता है
Explanation::
- EMF (Electromotive Force / विद्युत वाहक बल) को स्रोत का ओपन सर्किट वोल्टेज भी कहा जाता है।
- यह बैटरी या सेल द्वारा प्रति कूलॉम आवेश को दी जाने वाली ऊर्जा होती है।
- EMF को E द्वारा दर्शाया जाता है और इसकी इकाई वोल्ट (Volt) होती है।
- यह तब भी मौजूद रहता है जब परिपथ में धारा नहीं बह रही हो।
विभवांतर (Potential Difference) क्या है?
- किसी परिपथ के दो बिंदुओं के बीच प्रति इकाई आवेश ऊर्जा का अंतर
- स्रोत द्वारा उत्पन्न कुल ऊर्जा
- केवल धारा का प्रवाह
- चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
Explanation::
- विभवांतर (Potential Difference / वोल्टेज) को V द्वारा दर्शाया जाता है।
- यह किसी दो बिंदुओं के बीच आवेश को स्थानांतरित करने में खर्च ऊर्जा को दर्शाता है।
- इसे सूत्र V = W / Q से व्यक्त किया जाता है।
- जब परिपथ में धारा बहती है, तब ही विभवांतर उत्पन्न होता है।
EMF और विभवांतर में मुख्य अंतर क्या है?
- EMF स्रोत द्वारा दिया गया अधिकतम वोल्टेज है जबकि विभवांतर परिपथ में उपयोग होने वाला वोल्टेज है
- दोनों हमेशा समान होते हैं
- EMF केवल प्रतिरोध पर निर्भर करता है
- विभवांतर धारा के बिना भी रहता है
Explanation::
- EMF तब मापा जाता है जब धारा शून्य होती है (open circuit condition)।
- विभवांतर तब मापा जाता है जब धारा प्रवाहित हो रही हो।
- बैटरी के अंदर आंतरिक प्रतिरोध (internal resistance) के कारण EMF > विभवांतर होता है।
- सूत्र: V = E − Ir, जहाँ I = धारा (current), r = आंतरिक प्रतिरोध।
आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance) का प्रभाव क्या है?
- धारा प्रवाहित होने पर विभवांतर EMF से कम हो जाता है
- धारा बढ़ने पर EMF बढ़ जाता है
- प्रतिरोध कम होने पर EMF शून्य हो जाता है
- विभवांतर हमेशा EMF से अधिक होता है
Explanation::
- जब बैटरी में आंतरिक प्रतिरोध r होता है, तो ऊर्जा का कुछ भाग अंदर ही नष्ट हो जाता है।
- इस कारण टर्मिनल वोल्टेज (Terminal Voltage) कम हो जाता है।
- सूत्र: V = E − Ir
- यदि I = 0 हो तो V = E (कोई धारा नहीं होने पर दोनों बराबर)।
वोल्ट (Volt) की सही परिभाषा क्या है?
- 1 वोल्ट = 1 जूल प्रति कूलॉम (1 J/C)
- 1 वोल्ट = 1 कूलॉम प्रति जूल
- 1 वोल्ट = 1 एम्पियर प्रति सेकंड
- 1 वोल्ट = 1 ओम प्रति कूलॉम
Explanation::
- वोल्ट (Volt) विद्युत विभवांतर और EMF की SI इकाई है।
- यह दर्शाता है कि 1 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में कितनी ऊर्जा (जूल) लगती है।
- सूत्र: V = W / Q
- जहाँ W = कार्य (Work), Q = आवेश (Charge)
किर्चॉफ का धारा नियम (Kirchhoff’s Current Law – KCL) के अनुसार निम्न में से कौन सा कथन सही है?
- किसी बंद परिपथ में वोल्टेज का योग शून्य होता है
- किसी जंक्शन (Node) पर आने वाली कुल धारा = जाने वाली कुल धारा
- धारा हमेशा वोल्टेज के समान होती है
- प्रतिरोध हमेशा स्थिर रहता है
Explanation::
- KCL (Kirchhoff’s Current Law / किर्चॉफ का धारा नियम) के अनुसार किसी भी इलेक्ट्रिकल जंक्शन पर चार्ज संरक्षण (Conservation of Charge) लागू होता है।
- गणितीय रूप: ΣI incoming = ΣI outgoing
- यह नियम DC और AC दोनों सर्किट में लागू होता है।
- सही विकल्प: किसी जंक्शन पर आने वाली कुल धारा = जाने वाली कुल धारा
किर्चॉफ का वोल्टेज नियम (Kirchhoff’s Voltage Law – KVL) क्या बताता है?
- धारा का योग हमेशा स्थिर होता है
- शक्ति हमेशा संरक्षित रहती है
- किसी बंद लूप (Closed Loop) में सभी वोल्टेज का बीजगणितीय योग शून्य होता है
- प्रतिरोध बदलता नहीं है
Explanation::
- KVL (Kirchhoff’s Voltage Law / किर्चॉफ का वोल्टेज नियम) ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy) पर आधारित है।
- गणितीय रूप: ΣV = 0
- लूप में सभी voltage rise और drop का योग शून्य होता है।
- सही विकल्प: बंद लूप में सभी वोल्टेज का योग शून्य होता है
KCL का उपयोग किस सिद्धांत पर आधारित है?
- ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy)
- आवेश संरक्षण (Conservation of Charge)
- द्रव्यमान संरक्षण
- गति संरक्षण
Explanation::
- KCL का आधारभूत सिद्धांत Conservation of Charge है।
- जंक्शन पर आवेश न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है।
- इसलिए आने वाली धारा = जाने वाली धारा होती है।
- सही विकल्प: आवेश संरक्षण
KVL किस भौतिक नियम पर आधारित है?
- आवेश संरक्षण
- न्यूटन का नियम
- ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy)
- ऊष्मा संरक्षण
Explanation::
- KVL ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है।
- एक बंद लूप में ऊर्जा का कुल परिवर्तन शून्य होता है।
- गणितीय रूप: ΣV = 0
- सही विकल्प: ऊर्जा संरक्षण
यदि किसी नोड पर 3A, 2A धारा प्रवेश कर रही है और 4A बाहर जा रही है, तो अज्ञात धारा कितनी होगी?
- 1A बाहर
- 1A अंदर
- 1A बाहर (संतुलन के अनुसार)
- 0A
Explanation::
- KCL के अनुसार: ΣI incoming = ΣI outgoing
- incoming = 3A + 2A = 5A
- outgoing = 4A + x
- 5 = 4 + x ⇒ x = 1A
- सही विकल्प: 1A बाहर
किर्चॉफ के नियम किस प्रकार के सर्किट में लागू होते हैं?
- केवल DC सर्किट
- केवल AC सर्किट
- DC और AC दोनों सर्किट
- केवल ओपन सर्किट
Explanation::
- KCL और KVL दोनों नियम DC (Direct Current) और AC (Alternating Current) सर्किट में लागू होते हैं।
- ये नियम किसी भी जटिल नेटवर्क एनालिसिस में उपयोग किए जाते हैं।
- सही विकल्प: DC और AC दोनों सर्किट
व्हीटस्टोन ब्रिज (Wheatstone Bridge) का मुख्य उपयोग क्या है?
- विद्युत धारा (Electric Current) मापने में
- अज्ञात प्रतिरोध (Unknown Resistance) मापने में
- शक्ति (Power) मापने में
- आवृत्ति (Frequency) मापने में
Explanation::
- व्हीटस्टोन ब्रिज एक विद्युत परिपथ (Electrical Circuit) है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
- जब ब्रिज संतुलित (Balanced Condition) होता है तब गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) में धारा शून्य हो जाती है।
- संतुलन की शर्त: R₁/R₂ = R₃/R₄
- इस सिद्धांत का उपयोग प्रयोगशाला (Laboratory) में सटीक मापन के लिए किया जाता है।
व्हीटस्टोन ब्रिज की संतुलन स्थिति (Balanced Condition) क्या होती है?
- गैल्वेनोमीटर में अधिकतम धारा प्रवाहित होती है
- सर्किट टूट जाता है
- गैल्वेनोमीटर में कोई धारा नहीं होती
- बैटरी समाप्त हो जाती है
Explanation::
- संतुलित अवस्था में Wheatstone Bridge में गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती।
- इस स्थिति में बिंदु समान विभव (Equal Potential) पर होते हैं।
- इसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध की गणना के लिए किया जाता है।
- यह स्थिति समीकरण R₁/R₂ = R₃/R₄ को संतुष्ट करती है।
व्हीटस्टोन ब्रिज में उपयोग होने वाला उपकरण कौन सा है?
- वोल्टमीटर (Voltmeter)
- एमीटर (Ammeter)
- गैल्वेनोमीटर (Galvanometer)
- टैकोमीटर (Tachometer)
Explanation::
- गैल्वेनोमीटर एक अत्यंत संवेदनशील उपकरण है जो बहुत कम धारा को भी पहचान सकता है।
- यह ब्रिज की संतुलन स्थिति का पता लगाने में मदद करता है।
- जब धारा शून्य होती है तो ब्रिज संतुलित माना जाता है।
व्हीटस्टोन ब्रिज का मूल सिद्धांत (Principle) क्या है?
- ओम का नियम (Ohm’s Law)
- किरचॉफ का नियम (Kirchhoff’s Law) और संतुलन सिद्धांत
- फैराडे का नियम
- पास्कल का नियम
Explanation::
- व्हीटस्टोन ब्रिज Kirchhoff’s Circuit Laws पर आधारित होता है।
- संतुलन स्थिति में धारा वितरण ऐसा होता है कि गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य हो जाती है।
- इसका उपयोग सटीक प्रतिरोध (Precise Resistance Measurement) में किया जाता है।
व्हीटस्टोन ब्रिज का संतुलन सूत्र (Balance Formula) क्या है?
- R₁ + R₂ = R₃ + R₄
- R₁ × R₂ = R₃ × R₄
- R₁/R₂ = R₃/R₄
- R₁ – R₂ = R₃ – R₄
Explanation::
- व्हीटस्टोन ब्रिज में संतुलन की स्थिति में प्रतिरोधों का अनुपात समान होता है।
- यह सूत्र अज्ञात प्रतिरोध (Unknown Resistance) निकालने के लिए उपयोग किया जाता है।
- यदि तीन प्रतिरोध ज्ञात हों, तो चौथा आसानी से निकाला जा सकता है।
व्हीटस्टोन ब्रिज में शून्य विक्षेपण (Null Deflection) का क्या अर्थ है?
- बैटरी खत्म हो जाना
- धारा का अधिकतम होना
- गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य होना
- प्रतिरोध का अनंत होना
Explanation::
- Null Deflection का अर्थ है गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होना।
- यह स्थिति तब आती है जब ब्रिज संतुलित होता है।
- इस स्थिति में दोनों शाखाओं के विभव (Potential) समान होते हैं।
- यह स्थिति मापन की उच्च सटीकता (High Accuracy) सुनिश्चित करती है।
मीटर ब्रिज (Meter Bridge) का सिद्धांत किस पर आधारित है?
- व्हीटस्टोन ब्रिज (Wheatstone Bridge) के सिद्धांत पर
- ओम के नियम पर
- किरचॉफ के नियम पर
- जूल के नियम पर
Explanation::
- मीटर ब्रिज, व्हीटस्टोन ब्रिज का ही व्यावहारिक रूप (Practical form) है।
- इसमें 1 मीटर लंबा समान प्रतिरोध तार (Uniform Resistance Wire) उपयोग किया जाता है।
- संतुलन बिंदु (Balancing Point) पर गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) शून्य विचलन दिखाता है।
- सिद्धांत: R₁/R₂ = L₁/L₂ (लंबाई अनुपात = प्रतिरोध अनुपात)।
पोटेंशियोमीटर (Potentiometer) का मुख्य उपयोग क्या है?
- विद्युत वाहक बल (EMF) और विभवांतर (Potential Difference) मापना
- धारा मापना
- प्रतिरोध बढ़ाना
- शक्ति मापना
Explanation::
- पोटेंशियोमीटर एक Null Deflection Instrument है, अर्थात इसमें शून्य विचलन विधि का उपयोग होता है।
- यह किसी सेल का EMF बिना धारा खींचे माप सकता है, इसलिए यह अधिक सटीक (Accurate) होता है।
- EMF ∝ संतुलन लंबाई (Balancing Length) होता है।
- यह तुलना विधि (Comparison Method) पर आधारित उपकरण है।
मीटर ब्रिज में संतुलन की स्थिति कब प्राप्त होती है?
- जब गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य हो जाती है
- जब धारा अधिकतम होती है
- जब वोल्टेज अधिकतम होता है
- जब प्रतिरोध शून्य होता है
Explanation::
- संतुलन बिंदु (Balance Point) पर गैल्वेनोमीटर (G) में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती।
- इस स्थिति में Wheatstone Bridge संतुलित होता है।
- सूत्र: R₁/R₂ = L₁/L₂ (जहाँ L₁ और L₂ तार की लंबाई हैं)।
- इस विधि से अज्ञात प्रतिरोध (Unknown Resistance) ज्ञात किया जाता है।
पोटेंशियोमीटर में विभव प्रवणता (Potential Gradient) क्या होती है?
- प्रति इकाई लंबाई पर विभव का गिरावट (Fall of potential per unit length)
- धारा का प्रवाह
- प्रतिरोध का योग
- ऊर्जा का उत्पादन
Explanation::
- विभव प्रवणता (k) = V/L
- यह दर्शाती है कि प्रति इकाई लंबाई पर विभव कितना कम हो रहा है।
- कम प्रवणता होने पर अधिक सटीक मापन संभव होता है।
- यह पोटेंशियोमीटर की संवेदनशीलता (Sensitivity) को प्रभावित करती है।
मीटर ब्रिज में प्रयुक्त तार की प्रकृति कैसी होती है?
- समान प्रतिरोध और समान अनुप्रस्थ क्षेत्र वाला तार
- असमान प्रतिरोध वाला तार
- अतिचालक तार
- अत्यधिक मोटा तार
Explanation::
- मीटर ब्रिज में उपयोग होने वाला तार मैंगनिन (Manganin) या कॉन्स्टेंटन (Constantan) का होता है।
- इनका ताप गुणांक (Temperature Coefficient) बहुत कम होता है।
- इससे प्रतिरोध स्थिर रहता है और त्रुटि कम होती है।
- तार की लंबाई 100 cm (1 मीटर) होती है।
पोटेंशियोमीटर और वोल्टमीटर में मुख्य अंतर क्या है?
- पोटेंशियोमीटर शून्य धारा विधि से मापता है, वोल्टमीटर धारा खींचकर मापता है
- दोनों समान हैं
- वोल्टमीटर अधिक सटीक होता है
- पोटेंशियोमीटर केवल धारा मापता है
Explanation::
- पोटेंशियोमीटर Null Method पर कार्य करता है, इसलिए यह EMF का वास्तविक मान देता है।
- वोल्टमीटर हमेशा कुछ धारा खींचता है, जिससे त्रुटि उत्पन्न होती है।
- पोटेंशियोमीटर अधिक संवेदनशील (Sensitive) और सटीक (Accurate) होता है।
- यह मानक सेल (Standard Cell) के साथ तुलना करके कार्य करता है।
विद्युत शक्ति (Electric Power) का सही सूत्र कौन सा है?
- P = VI (वोल्टेज × करंट)
- P = VI (विद्युत शक्ति = विभवांतर × धारा)
- P = I²R²
- P = V/I²
Explanation::
- विद्युत शक्ति (Electric Power) को ऊर्जा के उपभोग की दर कहा जाता है।
- सही सूत्र P = VI है जहाँ P = Power (शक्ति), V = Voltage (वोल्टेज), I = Current (धारा)
- अन्य सही रूप: P = I²R और P = V²/R भी होते हैं।
- यह सूत्र ओम के नियम (Ohm’s Law) पर आधारित है।
जूल का तापन नियम (Joule’s Heating Law) का सही सूत्र क्या है?
- H = VIt
- H = IRt
- H = I²Rt
- H = V²It
Explanation::
- जूल तापन प्रभाव (Joule Heating Effect) में विद्युत धारा के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- सही सूत्र H = I²Rt है जहाँ H = Heat (ऊष्मा), I = Current (धारा), R = Resistance (प्रतिरोध), t = Time (समय)
- ऊष्मा धारा के वर्ग के समानुपाती होती है।
- यह प्रभाव इलेक्ट्रिक हीटर और बल्ब में देखा जाता है।
यदि किसी चालक में 2 A धारा 5 Ω प्रतिरोध में 10 सेकंड तक प्रवाहित होती है, तो उत्पन्न ऊष्मा कितनी होगी?
- 50 J
- 100 J
- 200 J
- 250 J
Explanation::
- सूत्र: H = I²Rt
- I = 2 A, R = 5 Ω, t = 10 s
- H = 2² × 5 × 10
- H = 4 × 5 × 10 = 200 J
- अतः सही उत्तर 200 जूल है।
विद्युत शक्ति की SI इकाई क्या है?
- जूल (Joule)
- वाट (Watt)
- वाट (Watt)
- ओम (Ohm)
Explanation::
- विद्युत शक्ति (Electric Power) की SI इकाई वाट (Watt) होती है।
- 1 वाट = 1 जूल प्रति सेकंड (1 W = 1 J/s)
- यह ऊर्जा के स्थानांतरण की दर को दर्शाता है।
- इसे James Watt के नाम पर रखा गया है।
यदि किसी बल्ब पर 220 V वोल्टेज और 0.5 A धारा प्रवाहित हो रही है, तो शक्ति कितनी होगी?
- 110 W
- 440 W
- 110 W
- 220 W
Explanation::
- सूत्र: P = VI
- V = 220 V, I = 0.5 A
- P = 220 × 0.5
- P = 110 W
- अतः बल्ब की शक्ति 110 वाट होगी।
जूल तापन प्रभाव (Joule Heating Effect) किस पर निर्भर करता है?
- केवल वोल्टेज पर
- केवल प्रतिरोध पर
- धारा, प्रतिरोध और समय पर
- केवल तापमान पर
Explanation::
- सूत्र H = I²Rt से स्पष्ट है कि ऊष्मा तीन कारकों पर निर्भर करती है:
- धारा (Current I)
- प्रतिरोध (Resistance R)
- समय (Time t)
- इसलिए जितनी अधिक धारा या प्रतिरोध, उतनी अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
यदि किसी तार का प्रतिरोध 10 Ω है और उसमें 3 A धारा 20 सेकंड तक प्रवाहित होती है, तो उत्पन्न ऊष्मा कितनी होगी?
- 1800 J
- 1200 J
- 1800 J
- 900 J
Explanation::
- सूत्र: H = I²Rt
- I = 3 A, R = 10 Ω, t = 20 s
- H = 3² × 10 × 20
- H = 9 × 10 × 20 = 1800 J
- अतः सही उत्तर 1800 जूल है।
