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Updated on 07/04/26 by Maananjay Mahato
प्लास्टर ऑफ पेरिस | plaster of Paris | जिप्सम
- रासायनिक नाम: Calcium Sulphate Hemihydrate
- रासायनिक सूत्र: CaSO4.1/2H2O
- निर्माण: जिप्सम (CaSO4.2H2O) को 373 K (100°C) पर गर्म करने पर।
- गुण: सफेद चूर्ण, पानी मिलाने पर कठोर जिप्सम में बदल जाता है।
- उपयोग: टूटी हड्डियों को जोड़ने (Plastering), मूर्तियाँ और खिलौने बनाने में।
- अन्य उपयोग: दंत चिकित्सा (Moulds), अग्निरोधक सामग्री (Fireproofing), और छतों की सजावट।
- सावधानी: इसे नमी-रोधी (Moisture-proof) कंटेनर में रखना चाहिए वरना यह जम जाएगा।
- महत्वपूर्ण तापमान: यदि 473 K से ऊपर गर्म किया जाए, तो यह जलहीन कैल्शियम सल्फेट ($CaSO_{4}$) बन जाता है, जिसे ‘डेड बर्न प्लास्टर’ कहते हैं।
स्पाइरोगाइरा | Spirogyra |
- Spirogyra एक बहुकोशकीय (Multicellular) हरित शैवाल (Green Algae) है।
- इसे ‘Silk of pond’ (ताल का रेशम) या ‘Water silk’ भी कहा जाता है।
- यह मुख्य रूप से मीठे पानी (Fresh water) जैसे तालाबों और झीलों में पाया जाता है।
- इसकी संरचना तंतुमय (Filamentous) होती है।
- इसमें सर्पिलाकार (Spiral) क्लोरोप्लास्ट पाया जाता है, जिसके कारण इसका नाम स्पाइरोगाइरा पड़ा।
- इसकी कोशिका भित्ति (Cell Wall) पेक्टिन और सेलुलोज से बनी होती है।
- यह पादप जगत के थैलोफाइटा (Thallophyta) समूह के अंतर्गत आता है।
- इसमें प्रजनन (Reproduction) कायिक (Vegetative), अलैंगिक और लैंगिक तीनों विधियों से होता है।
- खंडन (Fragmentation) इसकी कायिक प्रजनन की सबसे सामान्य विधि है।
- इसमें संचयी भोजन स्टार्च (Starch) के रूप में रहता है।
किण्वन | Fermentation
- किण्वन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है।
- इसमें सूक्ष्मजीव (microorganisms) जैसे बैक्टीरिया और यीस्ट (खमीर) शामिल होते हैं।
- यह प्रक्रिया सामान्यतः ऑक्सीजन की अनुपस्थिति (Anaerobic) में होती है।
- किण्वन की खोज लुई पाश्चर ने की।
- इन्हें “Father of Microbiology” भी कहा जाता है।
- प्रमुख उदाहरण
- ग्लूकोज → एथेनॉल + CO₂
- यीस्ट द्वारा (शराब बनाने में)
- दूध → दही
- बैक्टीरिया (Lactobacillus)
- ग्लूकोज → लैक्टिक एसिड
- मांसपेशियों में (जब ऑक्सीजन कम हो)
- किण्वन के प्रकार
- अल्कोहलिक किण्वन → एथेनॉल बनता है
- लैक्टिक अम्ल किण्वन → लैक्टिक एसिड बनता है
- महत्वपूर्ण उपयोग
- 🍞 ब्रेड बनाना (यीस्ट CO₂ बनाता है जिससे ब्रेड फूलती है)
- 🍺 शराब/बीयर उत्पादन
- 🥛 दही, पनीर, अचार बनाना
- 🧪 जैव-ईंधन (Biofuel) उत्पादन
- किण्वन = ऊर्जा उत्पादन की अवायवीय प्रक्रिया
- इसमें ATP की कम मात्रा बनती है
- यीस्ट = Saccharomyces cerevisiae
- CO₂ गैस = ब्रेड को फुलाती है
- मांसपेशियों में दर्द = लैक्टिक एसिड जमाव
- “किण्वन = बिना ऑक्सीजन + सूक्ष्मजीव + ऊर्जा”
IUPAC
- IUPAC: International Union of Pure and Applied Chemistry (स्थापना: 1919).
- मुख्यालय: ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड।
- प्राथमिकता क्रम (Priority order): −COOH>−SO3 H>−COOR>−COCl>−CONH 2 >−CN>−CHO>>C=O>−OH>−NH 2 >>C=C<>−C≡C−.
- एथिन (Ethene) का सामान्य नाम: एथिलीन (Ethylene).
- एथाइन (Ethyne) का सामान्य नाम: एसीटिलीन (Acetylene).
- मेथेनल (Methanal) का सामान्य नाम: फॉर्मेल्डिहाइड (Formaldehyde).
- एथेनल (Ethanal) का सामान्य नाम: एसीटैल्डिहाइड (Acetaldehyde).
- मेथेनोइक एसिड (Methanoic acid): फॉर्मिक एसिड (चींटी के डंक में)।
- एथेनोइक एसिड (Ethanoic acid): एसिटिक एसिड (सिरका)।
- प्रोपेनोन (Propanone): एसीटोन (नेल पॉलिश रिमूवर)।
संतृप्त हाइड्रोकार्बन | Saturated Hydrocarbons | Alkane | ऐल्केन
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons): कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल बंध (Single Bond) होता है।
- अन्य नाम: इन्हें ‘ऐल्केन‘ (Alkanes) या ‘पैराफिन‘ (Paraffins) भी कहा जाता है।
- सामान्य सूत्र: CnH2n+2
- संकरण (Hybridization): इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु sp3 संकरित अवस्था में होता है।
- बंध कोण (Bond Angle): 109.5° (चतुष्फलकीय/Tetrahedral)
- सबसे सरल सदस्य: मीथेन (CH4), जिसे ‘मार्श गैस‘ भी कहते हैं।
- प्राकृतिक स्रोत: सीवेज गैस, धान के खेत, और कोयला खदानें (विस्फोट का कारण)।
- क्रियाशीलता: ये बहुत कम क्रियाशील होते हैं क्योंकि एकल बंध काफी मजबूत और स्थिर होते हैं।
- प्रमुख अभिक्रिया: ये मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) दर्शाते हैं।
- श्रृंखला: इसमें मेथेन, एथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8) और ब्यूटेन (C4H10) शामिल हैं।
- प्राकृतिक स्रोत: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस इनके मुख्य स्रोत हैं।
- ब्यूटेन व प्रोपेन: LPG (रसोई गैस) के मुख्य घटक हैं।
- LPG का मुख्य घटक ब्यूटेन (C4 H10 )
- CNG का मुख्य घटक मीथेन (CH 4 )।
- दहन: पूरी हवा में जलने पर ये नीली लौ के साथ जलते हैं और CO2 व जलवाष्प मुक्त करते हैं।
- भौतिक अवस्था:
- C1से C4 तक गैस
- C5से C17 तक द्रव
- C 18 + ठोस (मोम समान)
- विलेयता:
- जल में अघुलनशील (अध्रुवीय)
- कार्बनिक सॉल्वैंट्स (ईथर, बेंजीन) में घुलनशील
- क्वथनांक (Boiling Point): अणु भार बढ़ने पर बढ़ता है, लेकिन शाखाएं (Branching) बढ़ने पर घटता है।
- वुर्ट्ज़ अभिक्रिया (Wurtz Reaction): एल्काइल हैलाइड से उच्च एल्केन बनाने के लिए (सोडियम और शुष्क ईथर की उपस्थिति में)।
- अपूर्ण दहन: एल्केन के अपूर्ण दहन से कार्बन ब्लैक (काजल) और CO प्राप्त होती है।