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पोटो हो
- सरदार पोटो हो कोल्हान के राजाबासा के निवासी थे
- वे हो जनजाति से संबंधित थे
- अंग्रेजों द्वारा लेफ्टिनेंट टिकल के नियमों को कोल्हान वासियों पर थोपने का विरोध किया
- 19 नवंबर 1837 को सिरिंगसिया घाटी (पश्चिमी सिंहभूम) में संघर्ष हुआ
- आदिवासियों का नेतृत्व सरदार पोटो हो ने किया
- अंग्रेजी सेना का नेतृत्व थॉमस विलकिंसन एवं टिकल ने किया
- 8 दिसंबर 1837 को पोटो हो, डोबरो हो सहित कई योद्धा गिरफ्तार
- 1–2 जनवरी 1838 को जगन्नाथपुर डाकबंगला में बरगद के पेड़ पर पोटो हो, नारा हो, बेराय हो सहित 7 हो (मुंडा) आदिवासियों को फाँसी
- जमादार माधव सिंह, सूबेदार नादिर अली खाँ तथा सूबेदार जयमंगल पाण्डेय
- 1857 के विद्रोह में जमादार माधव सिंह, सूबेदार नादिर अली खाँ एवं सूबेदार जयमंगल पाण्डेय अंग्रेजी सेना में थे
- लेफ्टिनेंट ग्राहम के साथ हजारीबाग जाते समय रामगढ़ में विद्रोह
- 3 अक्टूबर 1857 को नादिर अली खाँ व जयमंगल पाण्डेय गिरफ्तार
- 4 अक्टूबर 1857 को दोनों को फाँसी
- माधव सिंह अंग्रेजों से बचकर फरार
- गणपत राय
- 1857 के विद्रोह में हजारीबाग के विद्रोहियों के प्रमुख सहयोगी
- नागवंशी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव से संपर्क स्थापित कराया
- 21 अप्रैल 1858 को राँची कमिश्नर कंपाउंड में फाँसी
- ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव
- 1857 के विद्रोह में हजारीबाग के विद्रोहियों के नेता
- विश्वनाथ दुबे व महेश नारायण शाही के विश्वासघात से गिरफ्तारी
- 16 अप्रैल 1858 को राँची कमिश्नर कंपाउंड में फाँसी
- टिकैत उमराव सिंह
- ओरमांझी के 12 गाँवों के जमींदार थे।
- कैप्टेन मैक्डोनाल्ड की मद्रासी सेना की सहायता से उनके दीवान शेख भिखारी एवं भाई घासी सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।
- फाँसी- 8 जनवरी, 1858 को राँची के टैगोर हिल के पास
Jharkhand GK
सरदार पोटो का संबंध किस जनजाति और क्षेत्र से था?
- हो जनजाति, कोल्हान
- मुंडा जनजाति, छोटानागपुर
- संथाल जनजाति, दुमका
- हो जनजाति , पलामू
सरदार पोटो हो के नेतृत्व में हुए संघर्ष का प्रमुख कारण क्या था?
- अंग्रेजों द्वारा लेफ्टिनेंट टिकल के नियमों को थोपना
- जमीन का अधिग्रहण
- लगान (कर) में वृद्धि
- धार्मिक हस्तक्षेप
सिरिंगसिया घाटी का संघर्ष, जिसमें पोटो हो ने नेतृत्व किया, कब हुआ था?
- 19 नवंबर 1837
- 19 नवंबर 1837
- 8 दिसंबर 1837
- 1 जनवरी 1838
1-2 जनवरी 1838 को जगन्नाथपुर डाकबंगला में कितने आदिवासी नेताओं को फाँसी दी गई?
1857 के विद्रोह के दौरान रामगढ़ में किस अंग्रेज अधिकारी के साथ जाते समय सैनिकों ने विद्रोह किया?
- कैप्टेन मैक्डोनाल्ड
- लॉर्ड डलहौजी
- लेफ्टिनेंट ग्राहम
- कर्नल टिकल
3 अक्टूबर 1857 को किन दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था?
- माधव सिंह और जयमंगल पाण्डेय
- नादिर अली खाँ और माधव सिंह
- नादिर अली खाँ और जयमंगल पाण्डेय
- गणपत राय और विश्वनाथ शाहदेव
1857 के विद्रोह में हजारीबाग के विद्रोहियों के प्रमुख सहयोगी गणपत राय को फाँसी कब और कहाँ दी गई?
- 16 अप्रैल 1858, हजारीबाग जेल
- 21 अप्रैल 1858, राँची कमिश्नर कम्पाउंड
- 8 जनवरी 1858, टैगोर हिल, राँची
- 4 अक्टूबर 1857, रामगढ़
ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की गिरफ्तारी का कारण क्या है?
- अंग्रेजी सेना से सीधे टकराव
- विश्वनाथ दुबे व महेश नारायण शाही के विश्वासघात
- उनके दीवान शेख भिखारी का विश्वासघात
- आर्थिक संकट
टिकैत उमराव सिंह कहाँ के जमींदार थे?
- पलामू के 12 गाँवों के
- खूंटी के 12 गाँवों के
- ओरमांझी के 12 गाँवों के
- लोहरदगा के 12 गाँवों के
टिकैत उमराव सिंह की गिरफ्तारी में किस अंग्रेज अधिकारी की सेना ने सहायता की?
- लेफ्टिनेंट टिकल
- कैप्टेन मैक्डोनाल्ड
- थॉमस विलकिंसन
- लॉर्ड कैनिंग
टिकैत उमराव सिंह को कहाँ फाँसी दी गई?
- हजारीबाग जेल
- ओरमांझी चौक
- राँची के टैगोर हिल के पास
- जगन्नाथपुर डाकबंगला
सरदार पोटो हो के विद्रोह का दमन करने वाली अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किसने किया?
- केवल थॉमस विलकिंसन
- थॉमस विलकिंसन एवं टिकल
- केवल लेफ्टिनेंट टिकल
- लेफ्टिनेंट ग्राहम
किस तिथि को पोटो हो और डोबरो हो सहित कई योद्धा गिरफ्तार किए गए?
- 19 नवंबर 1837
- 8 दिसंबर 1837
- 1 जनवरी 1838
- 3 अक्टूबर 1857
ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव और गणपत राय दोनों को फाँसी कहाँ दी गई?
- हजारीबाग कमिश्नर कम्पाउंड
- राँची कमिश्नर कम्पाउंड
- टैगोर हिल, राँची
- रामगढ़ कैंटोनमेंट
टिकैत उमराव सिंह के साथ गिरफ्तार किए गए उनके सहयोगी कौन थे?
- विश्वनाथ दुबे और महेश नारायण शाही
- दीवान शेख भिखारी एवं भाई घासी सिंह
- नादिर अली खाँ और जयमंगल पाण्डेय
- गणपत राय और माधव सिंह
निम्नलिखित में से किस घटना का कालक्रम सही है?
- पोटो हो की फाँसी → सिरिंगसिया घाटी संघर्ष → 1857 का विद्रोह
- 1857 का विद्रोह → विश्वनाथ शाहदेव की फाँसी → पोटो हो की फाँसी
- सिरिंगसिया घाटी संघर्ष → पोटो हो की फाँसी → 1857 का विद्रोह
- टिकैत उमराव सिंह की फाँसी → पोटो हो की गिरफ्तारी → विश्वनाथ शाहदेव की फाँसी
4 अक्टूबर 1857 को फाँसी दिए गए व्यक्ति कौन थे?
- माधव सिंह और जयमंगल पाण्डेय
- नादिर अली खाँ और जयमंगल पाण्डेय
- गणपत राय और विश्वनाथ शाहदेव
- टिकैत उमराव सिंह और शेख भिखारी
पोटो हो, नारा हो, बेराय हो सहित 7 हो (मुंडा) आदिवासियों को को फाँसी देने के लिए किस स्थान पर बरगद के पेड़ का उपयोग किया गया?
- सिरिंगसिया घाटी
- ओरमांझी
- राँची टैगोर हिल
- जगन्नाथपुर डाकबंगला
टिकैत उमराव सिंह को फाँसी कब दी गई?
- 16 अप्रैल 1858
- 21 अप्रैल 1858
- 8 जनवरी 1858
- 4 अक्टूबर 1857
ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव किसके नेतृत्व में हजारीबाग के विद्रोही थे?
- पोटो हो के
- गणपत राय के
- वे स्वयं नेता थे
- माधव सिंह के
सिरिंगसिया घाटी किस जिले में स्थित है?
- हजारीबाग
- राँची
- पश्चिमी सिंहभूम
- पलामू
लेफ्टिनेंट टिकल के नियमों के विरुद्ध संघर्ष किस क्षेत्र से संबंधित था?
- पलामू
- हजारीबाग
- कोल्हान
- मनभूम
निम्नलिखित में से किसकी फाँसी की तिथि सबसे पहले आती है?
- ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव
- गणपत राय
- टिकैत उमराव सिंह
- नादिर अली खाँ