- अविकारी शब्द : यह व्याकरणिक गुण/प्रकृति के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण है।
- विकारी (बदलने वाले)
- विकारी शब्द कौन-से हैं? संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया (ये लिंग/वचन से बदलते हैं)।
- अविकारी (न बदलने वाले)
- अविकारी शब्द कौन-से हैं? क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक और निपात (ये कभी नहीं बदलते)।
- विकारी (बदलने वाले)
- अव्यय : यह अविकारी शब्दों को दी गई तकनीकी संज्ञा है।
- व्युत्पत्ति: ‘अ + व्यय’ (जिसका कुछ व्यय/खर्च या परिवर्तन न हो)।
- निष्कर्ष: व्यावहारिक रूप से सभी अव्यय अविकारी शब्द होते हैं और सभी अविकारी शब्द अव्यय होते हैं।
- दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
आधार अविकारी शब्द अव्यय शाब्दिक अर्थ जिसमें विकार (परिवर्तन) न हो। जिसका रूप कभी व्यय (नष्ट/परिवर्तित) न हो। परिवर्तन के कारक लिंग, वचन, कारक, काल, पुरुष से प्रभावित नहीं होते। लिंग, वचन, कारक, काल, पुरुष से प्रभावित नहीं होते। उदाहरण आज, यहाँ, धीरे-धीरे, और, वाह आज, यहाँ, धीरे-धीरे, और, वाह
- अविकारी शब्दों के भेद (4 प्रमुख भेद + 1 गौण भेद)
- क्रियाविशेषण अव्यय (Adverb)
- संबंधबोधक अव्यय (Preposition)
- समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction)
- विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection)
- निपात (Emphatic particles) – गौण/अतिरिक्त भेद
- (I) क्रियाविशेषण अव्यय
- परिभाषा: जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं।
- मुख्य 4 भेद:
- कालवाचक (समय): अब, तब, जब, आज, कल, परसों, निरंतर, बार-बार, प्रतिदिन।
- स्थानवाचक (स्थान/दिशा): यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, पास, दूर, ऊपर, नीचे, भीतर, बाहर।
- परिमाणवाचक (मात्रा/माप): बहुत, थोड़ा, काफी, पर्याप्त, केवल, अत्यंत, जितना, उतना।
- रीतिवाचक (तरीका/शैली): धीरे-धीरे, तेज़, अचानक, सहसा, ध्यानपूर्वक, सचमुच, अवश्य।
- (II) संबंधबोधक अव्यय
- परिभाषा: जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़ते हैं।
- पहचान: इनके आगे प्रायः के, की, से जैसे कारक चिह्न (परसर्ग) लगे होते हैं।
- उदाहरण:
- घर के सामने बगीचा है।
- ज्ञान के बिना जीवन व्यर्थ है।
- राम के साथ लक्ष्मण भी गए।
- प्रमुख शब्द: के बिना, के साथ, के कारण, के आगे, की ओर, के अनुसार, के बदले।
- (III) समुच्चयबोधक अव्यय (योजक)
- परिभाषा: दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने या अलग करने वाले शब्द।
- 2 मुख्य उपभेद:
- समानाधिकरण: दो समान स्तर के वाक्यों/शब्दों को जोड़ते हैं। (और, तथा, एवं, या, अथवा, किंतु, परंतु, लेकिन, मगर)।
- व्यधिकरण: एक मुख्य वाक्य में एक या अधिक आश्रित वाक्यों को जोड़ते हैं। (क्योंकि, चूंकि, ताकि, यदि…तो, यद्यपि…तथापि, अर्थात)।
- (IV) विस्मयादिबोधक अव्यय
- परिभाषा: हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य, भय आदि मनोभावों को प्रकट करने वाले शब्द।
- विशेषता: इनके बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है।
- उदाहरण:
- हर्षसूचक: वाह!, अहा!, धन्य!
- शोक/दुःखसूचक: हाय!, उफ़!, हे राम!
- घृणासूचक: छि-छि!, धिक्कार!
- आश्चर्यसूचक: अरे!, क्या!, ओहो!
- स्वीकृतिसूचक: हाँ!, ठीक!, जी हाँ!
- (V) निपात (विशेष ध्यान दें – परीक्षा उपयोगी)
- परिभाषा: जो शब्द किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ पर विशेष बल (Emphasis) प्रदान करते हैं।
- प्रमुख निपात शब्द: ही, भी, तक, तो, मात्र, केवल, भर, सा।
- उदाहरण:
- राम ही यह काम करेगा। (बल राम पर है)
- उसने मुझे देखा तक नहीं।
- अंतर पहचानना (क्रियाविशेषण vs संबंधबोधक):
- वह ऊपर बैठा है। ➔ क्रियाविशेषण (बैठने की जगह बता रहा है)।
- वह छत के ऊपर बैठा है। ➔ संबंधबोधक (‘के’ परसर्ग के साथ प्रयोग)।
- पद परिचय (Parsing): वाक्य में रेखांकित अव्यय का भेद और प्रकार पहचानना।
- निपात की पहचान: वाक्य में बल देने वाले शब्द को चुनना।
