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‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ के रचयिता कौन हैं?
- तुलसीदास
- कबीरदास
- सूरदास
- मीराबाई
Explanation:
- ‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ सूरदास की प्रसिद्ध रचना है।
- यह पद भ्रमरगीत प्रसंग से संबंधित है, जिसमें गोपियाँ उद्धव के ज्ञान और योग-मार्ग पर व्यंग्य करती हैं।
- सूरदास कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख कवि तथा अष्टछाप के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ में ‘उधो’ किसका संबोधन है?
- बलराम
- उद्धव
- नंद
- अक्रूर
Explanation:
- ‘उधो’ का अर्थ उद्धव है।
- उद्धव श्रीकृष्ण के मित्र और मथुरा के प्रमुख ज्ञानी व्यक्ति थे।
- कृष्ण ने उद्धव को गोपियों को योग और ज्ञान का संदेश देने के लिए ब्रज भेजा था।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ पद का मुख्य भाव क्या है?
- वीरता
- प्रकृति-वर्णन
- गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम और उद्धव के ज्ञान-योग पर व्यंग्य
- राजनीतिक चेतना
Explanation:
- गोपियाँ उद्धव को ‘बड़भागी’ कहकर उनके निर्लिप्त रहने पर व्यंग्य करती हैं।
- उनके अनुसार उद्धव कृष्ण के निकट रहते हुए भी प्रेम के विरह-दुख से मुक्त हैं।
- इस पद में प्रेम-भक्ति को ज्ञान और योग से श्रेष्ठ बताया गया है।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ किस काव्य-प्रसंग से संबंधित है?
- राम-वनगमन
- कृष्ण-जन्म
- भ्रमरगीत
- कुरुक्षेत्र युद्ध
Explanation:
- यह पद भ्रमरगीत प्रसंग का हिस्सा है।
- इस प्रसंग में उद्धव ब्रज की गोपियों को कृष्ण का संदेश देते हैं।
- गोपियाँ उद्धव के ज्ञान-योग के उपदेश के उत्तर में अपने प्रेम और विरह की भावना व्यक्त करती हैं।
सूरदास की भक्ति किस भक्ति-धारा से संबंधित है?
- रामभक्ति धारा
- निर्गुण भक्ति धारा
- कृष्णभक्ति धारा
- सूफी भक्ति धारा
Explanation:
- सूरदास सगुण भक्ति की कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं।
- उनकी कविता में कृष्ण की बाल-लीलाओं, प्रेम, वात्सल्य और गोपी-विरह का सुंदर चित्रण मिलता है।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ में गोपियाँ उद्धव को ‘बड़भागी’ क्यों कहती हैं?
- क्योंकि उन्होंने बहुत धन प्राप्त किया था
- क्योंकि वे राजा के मंत्री थे
- क्योंकि वे कृष्ण के पास रहते हुए भी प्रेम-विरह से अछूते हैं
- क्योंकि वे ब्रज के निवासी थे
Explanation:
- गोपियाँ व्यंग्यपूर्वक कहती हैं कि उद्धव बहुत भाग्यशाली हैं।
- उनके अनुसार उद्धव कृष्ण के सान्निध्य में रहकर भी प्रेम की पीड़ा से मुक्त हैं।
- यहाँ ‘बड़भागी’ शब्द में व्यंग्य और विरह-वेदना दोनों निहित हैं।
सूरदास की काव्यभाषा मुख्यतः कौन-सी है?
- अवधी
- खड़ी बोली
- ब्रजभाषा
- मैथिली
Explanation:
- सूरदास ने मुख्यतः ब्रजभाषा में काव्य रचना की।
- ब्रजभाषा उनकी कृष्णभक्ति संबंधी पदावली के भावों को व्यक्त करने में अत्यंत प्रभावशाली रही।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ में गोपियों की प्रमुख मनोदशा कौन-सी है?
- क्रोध और घृणा
- विरह और प्रेम
- भय और आशंका
- हर्ष और उत्सव
Explanation:
- कृष्ण के मथुरा चले जाने के कारण गोपियाँ विरह की पीड़ा से व्याकुल हैं।
- उनका कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम ही उनके विरह को अत्यंत तीव्र बनाता है।
- इसी कारण पद में प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति प्रमुख है।
भ्रमरगीत प्रसंग में उद्धव किस मार्ग का उपदेश गोपियों को देते हैं?
- कर्मयोग
- भक्तियोग
- ज्ञानयोग
- राजयोग
Explanation:
- उद्धव गोपियों को ज्ञान और योग का संदेश देते हैं।
- गोपियाँ इस उपदेश को स्वीकार करने के बजाय कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को सर्वोच्च मानती हैं।
- इस प्रकार सूरदास ने प्रेम-भक्ति और ज्ञान-योग के अंतर को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
सूरदास किस संप्रदाय से विशेष रूप से जुड़े हुए माने जाते हैं?
- नाथ संप्रदाय
- रामानंदी संप्रदाय
- पुष्टिमार्ग
- नाथपंथ
Explanation:
- सूरदास का संबंध वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग से माना जाता है।
- वे अष्टछाप के प्रमुख कवियों में शामिल थे।
- पुष्टिमार्ग में कृष्ण की प्रेमपूर्ण भक्ति और सेवा को विशेष महत्व दिया जाता है।
सूरदास की प्रमुख काव्य-कृति कौन-सी है?
- रामचरितमानस
- विनयपत्रिका
- सूरसागर
- पद्मावत
Explanation:
- सूरसागर सूरदास की प्रसिद्ध कृति है।
- इसमें श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, गोपी-प्रेम और विरह आदि का विस्तृत वर्णन मिलता है।
- सूरसागर को कृष्णभक्ति काव्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ में गोपियाँ किसके प्रति अपना प्रेम व्यक्त करती हैं?
- राम
- शिव
- श्रीकृष्ण
- उद्धव
Explanation:
- गोपियों का प्रेम श्रीकृष्ण के प्रति है।
- कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद उनका विरह और अधिक तीव्र हो जाता है।
- सूरदास ने गोपियों के माध्यम से अनन्य प्रेम-भक्ति को अभिव्यक्त किया है।
भ्रमरगीत में गोपियों और उद्धव के बीच मुख्य वैचारिक अंतर क्या है?
- राज्य और राजनीति
- धन और गरीबी
- ज्ञान-योग और प्रेम-भक्ति
- शिक्षा और अशिक्षा
Explanation:
- उद्धव ज्ञान और योग का संदेश लेकर आते हैं।
- गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपने निष्काम और अनन्य प्रेम को सर्वोच्च मानती हैं।
- इसी विरोध के कारण भ्रमरगीत में प्रेम-भक्ति की प्रभावशाली अभिव्यक्ति होती है।
सूरदास की कविता में किस भाव की अभिव्यक्ति विशेष रूप से प्रसिद्ध है?
- वीर रस
- भयानक रस
- वात्सल्य और प्रेम
- रौद्र रस
Explanation:
- सूरदास के काव्य में वात्सल्य, प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
- कृष्ण की बाल-लीलाओं में वात्सल्य भाव और गोपी-कृष्ण प्रसंगों में प्रेम-विरह का सुंदर चित्रण मिलता है।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ में ‘उधो’ के प्रति गोपियों का कथन किस शैली का उदाहरण है?
- प्रशस्ति
- वर्णनात्मक शैली
- व्यंग्यात्मक शैली
- ऐतिहासिक शैली
Explanation:
- गोपियाँ ऊपर से उद्धव की प्रशंसा करती हुई दिखाई देती हैं, लेकिन वास्तव में उनके कथन में व्यंग्य छिपा है।
- वे उद्धव के निर्लिप्त ज्ञान-योग की तुलना अपने प्रेम और विरह से करती हैं।
सूरदास हिंदी साहित्य के किस काल के प्रमुख कवि हैं?
- आदिकाल
- भक्तिकाल
- रीतिकाल
- आधुनिक काल
Explanation:
- सूरदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कृष्णभक्त कवि हैं।
- भक्तिकाल में निर्गुण और सगुण दोनों भक्ति धाराओं का विकास हुआ।
- सूरदास सगुण कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख प्रतिनिधि हैं।
सूरदास को कृष्णभक्ति की किस शाखा का प्रमुख कवि माना जाता है?
- निर्गुण शाखा
- सगुण शाखा
- सूफी शाखा
- ज्ञानमार्गी शाखा
Explanation:
- सूरदास सगुण भक्ति के कृष्णभक्त कवि हैं।
- उनके काव्य में कृष्ण को साकार और मानवीय रूपों—बालक, प्रियतम और आराध्य—में प्रस्तुत किया गया है।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ में गोपियों के अनुसार प्रेम की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
- प्रेम में लाभ की प्राप्ति
- प्रेम में सामाजिक प्रतिष्ठा
- प्रेम में पूर्ण समर्पण
- प्रेम में सांसारिक सुख
Explanation:
- गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम निष्काम और पूर्ण समर्पण पर आधारित है।
- वे कृष्ण से किसी सांसारिक लाभ की अपेक्षा नहीं करतीं।
- उनका प्रेम ही उनकी साधना और भक्ति का माध्यम है।
सूरदास की रचनाओं में कृष्ण के किस रूप का विशेष चित्रण मिलता है?
- केवल राजा के रूप में
- केवल योद्धा के रूप में
- बालक और प्रेमी के रूप में
- केवल दार्शनिक के रूप में
Explanation:
- सूरदास ने कृष्ण के बाल रूप का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया है।
- इसके साथ ही गोपी-कृष्ण प्रेम और विरह का भी विस्तृत वर्णन मिलता है।
- इसी कारण सूरदास के काव्य में वात्सल्य और श्रृंगार दोनों भाव प्रमुख हैं।
‘उधो तुम हौ अति बड़भागी’ पद में गोपियों का उद्धव के प्रति व्यवहार क्या दर्शाता है?
- उद्धव के प्रति पूर्ण भय
- उद्धव से शत्रुता
- प्रेम-विरह से उत्पन्न व्यंग्यपूर्ण प्रतिक्रिया
- उद्धव के प्रति उदासीनता
Explanation:
- गोपियाँ कृष्ण-विरह से अत्यंत दुखी हैं।
- उद्धव का ज्ञान-योग संबंधी संदेश उनकी विरह-वेदना को शांत नहीं कर पाता।
- इसलिए वे व्यंग्य और भावुकता के माध्यम से अपने मन की पीड़ा व्यक्त करती हैं।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के रचयिता कौन हैं?
- सूरदास
- कबीरदास
- तुलसीदास
- जायसी
Explanation:
- ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के बालकांड का महत्वपूर्ण प्रसंग है।
- इस प्रसंग में राम, लक्ष्मण और परशुराम के बीच संवाद के माध्यम से वीरता, विनम्रता, क्रोध और व्यंग्य का सुंदर चित्रण मिलता है।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ किस ग्रंथ का अंश है?
- विनयपत्रिका
- कवितावली
- गीतावली
- रामचरितमानस
Explanation:
- यह प्रसंग तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के बालकांड में आता है।
- यह प्रसंग शिवधनुष टूटने के बाद उत्पन्न परिस्थिति से संबंधित है।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ रामचरितमानस के किस कांड में है?
- अयोध्याकांड
- बालकांड
- अरण्यकांड
- सुंदरकांड
Explanation:
- श्रीराम और सीता के विवाह से जुड़े प्रसंग बालकांड में वर्णित हैं।
- शिवधनुष भंग के बाद परशुराम के आगमन और राम-लक्ष्मण से संवाद का प्रसंग भी इसी कांड में है।
परशुराम किस घटना से क्रोधित होकर जनक की सभा में आए?
- राम के अयोध्या छोड़ने से
- सीता के स्वयंवर में विलंब होने से
- शिवधनुष के टूटने से
- जनक द्वारा उनका अपमान करने से
Explanation:
- परशुराम शिव के धनुष को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली मानते थे।
- धनुष टूटने का समाचार सुनकर वे क्रोधित होकर जनक की सभा में पहुँचे।
शिवधनुष किसने तोड़ा था?
- लक्ष्मण
- परशुराम
- जनक
- श्रीराम
Explanation:
- सीता स्वयंवर में श्रीराम ने शिवधनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया।
- प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया, जिससे परशुराम अत्यंत क्रोधित हुए।
परशुराम के सामने श्रीराम का व्यवहार कैसा था?
- अत्यंत अहंकारी
- क्रोधपूर्ण
- उपेक्षापूर्ण
- विनम्र और शांत
Explanation:
- श्रीराम परशुराम के क्रोध के बावजूद अत्यंत विनम्र बने रहते हैं।
- उनके व्यवहार में मर्यादा, धैर्य और बड़ों के प्रति सम्मान दिखाई देता है।
लक्ष्मण का स्वभाव इस संवाद में किस रूप में दिखाई देता है?
- डरपोक और शांत
- दीन और विनम्र
- वीर, निर्भीक और व्यंग्यपूर्ण
- उदासीन
Explanation:
- लक्ष्मण परशुराम के क्रोध से भयभीत नहीं होते।
- वे तीखे और व्यंग्यपूर्ण उत्तर देकर परशुराम के क्रोध को और बढ़ा देते हैं।
- इससे लक्ष्मण के निर्भीक और तेजस्वी व्यक्तित्व का परिचय मिलता है।
परशुराम किसके परम भक्त माने जाते हैं?
- ब्रह्मा
- विष्णु
- शिव
- इंद्र
Explanation:
- परशुराम भगवान शिव के भक्त और उनके धनुष से विशेष रूप से जुड़े हुए हैं।
- इसी कारण शिवधनुष के टूटने की घटना से उनका क्रोध और भी तीव्र हो जाता है।
परशुराम ने लक्ष्मण के किस गुण को देखकर अधिक क्रोध किया?
- मौन रहने पर
- क्षमा माँगने पर
- उनके निर्भीक और व्यंग्यपूर्ण उत्तरों पर
- सभा से चले जाने पर
Explanation:
- लक्ष्मण बार-बार परशुराम को तर्कपूर्ण तथा व्यंग्यात्मक उत्तर देते हैं।
- उनकी निर्भीकता परशुराम के क्रोध को और बढ़ा देती है।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद में श्रीराम किस आदर्श का प्रतिनिधित्व करते हैं?
- अहंकार
- प्रतिशोध
- मर्यादा और विनम्रता
- स्वार्थ
Explanation:
- श्रीराम विपरीत परिस्थिति में भी धैर्य और विनम्रता नहीं छोड़ते।
- उनका चरित्र मर्यादा, शिष्टाचार और संयम का आदर्श प्रस्तुत करता है।
लक्ष्मण के संवादों में मुख्य रूप से किस रस की अभिव्यक्ति दिखाई देती है?
- करुण रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
- वीर रस
Explanation:
- लक्ष्मण के निर्भीक और उत्साहपूर्ण कथनों में वीरता की भावना प्रमुख है।
- उनके व्यंग्यपूर्ण कथनों से हास्य का स्पर्श भी मिलता है।
परशुराम के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता क्या दिखाई देती है?
- अत्यधिक संकोच
- निष्क्रियता
- क्रोध और वीरता
- भय
Explanation:
- परशुराम अत्यंत तेजस्वी, पराक्रमी और क्रोधी योद्धा के रूप में प्रस्तुत होते हैं।
- शिवधनुष टूटने की घटना पर उनकी तीव्र प्रतिक्रिया उनके स्वभाव को स्पष्ट करती है।
रामचरितमानस में राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद किस घटना के बाद घटित होता है?
- राम के वनवास के बाद
- ताड़का वध के बाद
- सीता स्वयंवर में शिवधनुष भंग के बाद
- लंका विजय के बाद
Explanation:
- सीता स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिवधनुष भंग किए जाने के बाद परशुराम वहाँ पहुँचते हैं।
- इसके बाद राम, लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद होता है।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में लक्ष्मण की वाणी कैसी है?
- अत्यंत दीन
- मौन
- कटु, व्यंग्यपूर्ण और निर्भीक
- भयभीत
Explanation:
- लक्ष्मण परशुराम के क्रोध से प्रभावित होकर पीछे नहीं हटते।
- वे अपने तर्क और व्यंग्य से परशुराम को चुनौती देते हुए दिखाई देते हैं।
परशुराम के क्रोध को शांत करने में किसका प्रमुख योगदान रहा?
- राजा दशरथ
- राजा जनक
- लक्ष्मण
- श्रीराम
Explanation:
- श्रीराम अत्यंत विनम्रता से परशुराम को संबोधित करते हैं।
- उनकी शांत और मर्यादित वाणी अंततः परशुराम के क्रोध को शांत करने में सहायक होती है।
तुलसीदास की भाषा में रामचरितमानस मुख्यतः किस भाषा में रचा गया है?
- ब्रजभाषा
- खड़ी बोली
- अवधी
- मैथिली
Explanation:
- रामचरितमानस की मुख्य भाषा अवधी है।
- तुलसीदास ने लोकभाषा के माध्यम से रामकथा को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाया।
तुलसीदास किस काल के प्रमुख कवि माने जाते हैं?
- आदिकाल
- भक्तिकाल
- रीतिकाल
- आधुनिक काल
Explanation:
- गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल की रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं।
- उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस है।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में तुलसीदास ने किसके माध्यम से वीरता और विनम्रता का सुंदर समन्वय किया है?
- केवल परशुराम के माध्यम से
- केवल लक्ष्मण के माध्यम से
- राम और लक्ष्मण के माध्यम से
- जनक और दशरथ के माध्यम से
Explanation:
- लक्ष्मण निर्भीकता और वीरता के प्रतीक हैं।
- श्रीराम विनम्रता, धैर्य और मर्यादा का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
- दोनों भाइयों के स्वभाव के अंतर से प्रसंग अधिक प्रभावशाली बनता है।
परशुराम को यह जानकर क्या अनुभव होता है कि उनके सामने कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि श्रीराम हैं?
- वे और अधिक क्रोधित होते हैं
- वे वहाँ से भाग जाते हैं
- उनका भ्रम दूर होता है और वे श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचानते हैं
- वे लक्ष्मण से युद्ध करते हैं
Explanation:
- संवाद के क्रम में परशुराम श्रीराम की वास्तविक शक्ति और स्वरूप को पहचानते हैं।
- उनका क्रोध शांत होता है और वे श्रीराम की महत्ता को स्वीकार करते हैं।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद का सबसे प्रमुख साहित्यिक आकर्षण क्या है?
- प्रकृति वर्णन
- श्रृंगार वर्णन
- संवाद, वीरता, व्यंग्य और चरित्र-चित्रण
- केवल करुणा
Explanation:
- इस प्रसंग में तीन प्रमुख पात्रों के स्वभाव संवादों के माध्यम से उभरते हैं।
- राम की विनम्रता, लक्ष्मण की निर्भीकता और परशुराम का क्रोध प्रसंग को प्रभावशाली बनाते हैं।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ से तुलसीदास के किस काव्य-कौशल का परिचय मिलता है?
- केवल प्रकृति चित्रण
- केवल अलंकार प्रदर्शन
- केवल धार्मिक उपदेश
- जीवंत संवाद और प्रभावशाली चरित्र-चित्रण
Explanation:
- तुलसीदास ने संवादों के माध्यम से पात्रों के स्वभाव को स्वाभाविक रूप से प्रस्तुत किया है।
- राम, लक्ष्मण और परशुराम के अलग-अलग व्यक्तित्व इस प्रसंग में स्पष्ट रूप से सामने आते हैं।
‘डार द्रुम पलना’, ‘पायनि नूपुर’ के रचनाकार कौन हैं?
- बिहारी
- घनानंद
- देव
- पद्माकर
Explanation:
- ‘डार द्रुम पलना’ और ‘पायनि नूपुर’ के रचनाकार कवि देव हैं।
- देव रीतिकाल के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं।
- उनकी काव्य-रचनाओं में शृंगार, सौंदर्य और प्रेम का प्रभाव प्रमुख है।
देव का संबंध हिंदी साहित्य के किस काल से है?
- आदिकाल
- रीतिकाल
- भक्तिकाल
- आधुनिक काल
Explanation:
- देव हिंदी साहित्य के रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं।
- रीतिकालीन काव्य में शृंगार, नायिका-भेद, अलंकार और काव्यशास्त्रीय विशेषताओं का विशेष महत्व है।
देव का जन्म किस स्थान पर हुआ था?
- आगरा
- लखनऊ
- इटावा
- कानपुर
Explanation:
- देव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में सन् 1673 में हुआ था।
- वे रीतिकाल के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं।
देव का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1665
- 1673
- 1680
- 1690
Explanation:
- देव का जन्म सन् 1673 में हुआ था।
- उनका जन्मस्थान इटावा, उत्तर प्रदेश था।
देव का पूरा नाम क्या था?
- देवदास द्विवेदी
- देवेंद्र द्विवेदी
- देवदत्त द्विवेदी
- देवप्रसाद द्विवेदी
Explanation:
- देव का पूरा नाम देवदत्त द्विवेदी था।
- साहित्य में वे मुख्यतः ‘देव’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
देव किस काल के प्रमुख कवि माने जाते हैं?
- आदिकाल
- भक्तिकाल
- आधुनिक काल
- रीतिकाल
Explanation:
- देव रीतिकाल के प्रमुख कवियों में शामिल हैं।
- उनके काव्य में श्रृंगार, सौंदर्य और अलंकारिकता का विशेष प्रभाव दिखाई देता है।
देव के अनेक आश्रयदाताओं में कौन शामिल था?
- अकबर
- शाहजहाँ
- आजमशाह
- बहादुरशाह जफर
Explanation:
- देव के अनेक आश्रयदाताओं में औरंगजेब के पुत्र आजमशाह भी थे।
- रीतिकालीन कवियों के लिए राजाओं और सामंतों का आश्रय महत्वपूर्ण था।
आजमशाह किसके पुत्र थे?
- जहाँगीर
- शाहजहाँ
- औरंगजेब
- अकबर
Explanation:
- आजमशाह औरंगजेब के पुत्र थे।
- देव को उनके आश्रयदाताओं में आजमशाह का भी संरक्षण प्राप्त था।
देव को सबसे अधिक संतोष और सम्मान किस आश्रयदाता से प्राप्त हुआ?
- आजमशाह
- औरंगजेब
- राजा जयसिंह
- भोगीलाल
Explanation:
- देव को अपनी कविता के गुणग्राही आश्रयदाता भोगीलाल से सबसे अधिक संतोष और सम्मान प्राप्त हुआ।
- भोगीलाल ने देव की कविता पर प्रसन्न होकर उन्हें लाखों की संपत्ति दान की थी।
भोगीलाल ने देव की कविता पर प्रसन्न होकर क्या दान किया था?
- एक राजमहल
- एक गाँव
- लाखों की संपत्ति
- एक विशाल पुस्तकालय
Explanation:
- भोगीलाल देव की कविता के गुणग्राही आश्रयदाता थे।
- उन्होंने देव की कविता पर रीझकर लाखों की संपत्ति दान की थी।
देव के काव्य ग्रंथों की संख्या कितनी मानी जाती है?
- 10 से 20
- 20 से 30
- 30 से 40
- 52 से 72
Explanation:
- देव के काव्य ग्रंथों की संख्या 52 से 72 तक मानी जाती है।
- यह संख्या विभिन्न विद्वानों द्वारा अलग-अलग मानी गई है।
निम्नलिखित में से कौन-सा देव का प्रमुख काव्य ग्रंथ है?
- रामचरितमानस
- रसविलास
- साकेत
- कामायनी
Explanation:
- रसविलास देव का प्रमुख काव्य ग्रंथ माना जाता है।
- यह देव की रीतिकालीन काव्य-परंपरा और श्रृंगारिक प्रवृत्ति से संबंधित है।
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रंथ देव की रचना है?
- प्रियप्रवास
- यामा
- भावविलास
- उर्वशी
Explanation:
- भावविलास देव के प्रमुख ग्रंथों में शामिल है।
- देव की रचनाओं में श्रृंगार और सौंदर्य का विशेष महत्व है।
‘काव्यरसायन’ किस कवि का प्रमुख ग्रंथ है?
- बिहारी
- केशवदास
- देव
- घनानंद
Explanation:
- काव्यरसायन देव का प्रमुख ग्रंथ माना जाता है।
- देव रीतिकालीन काव्य के प्रमुख प्रतिनिधि कवि हैं।
‘भवानीविलास’ किसकी रचना है?
- पद्माकर
- भूषण
- बिहारी
- देव
Explanation:
- भवानीविलास देव के प्रमुख काव्य ग्रंथों में से एक है।
- देव की रचनाओं में काव्य-सौंदर्य और श्रृंगारिकता प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
देव की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?
- 1750
- 1760
- 1767
- 1775
Explanation:
- देव की मृत्यु सन् 1767 में हुई थी।
- इस प्रकार उनका जीवनकाल 1673 से 1767 तक माना जाता है।
देव के काव्य में किस रस की प्रमुखता मानी जाती है?
- वीर रस
- करुण रस
- भयानक रस
- श्रृंगार रस
Explanation:
- देव के काव्य की प्रमुख विशेषताओं में श्रृंगारिकता शामिल है।
- उन्होंने प्रेम और सौंदर्य के सहज चित्र भी प्रस्तुत किए हैं।
देव के काव्य की प्रमुख विशेषता क्या है?
- केवल वीरता का चित्रण
- केवल धार्मिक उपदेश
- आलंकारिकता और श्रृंगारिकता
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- आलंकारिकता और श्रृंगारिकता देव के काव्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
- उनकी कविता में प्रेम, सौंदर्य और कलात्मक अभिव्यक्ति का विशेष स्थान है।
देव ने शब्दों की आवृत्ति के माध्यम से किस प्रकार का सौंदर्य उत्पन्न किया?
- चित्रकला का सौंदर्य
- ऐतिहासिक सौंदर्य
- ध्वनि-सौंदर्य
- नाटकीय सौंदर्य
Explanation:
- देव ने शब्दों की आवृत्ति के जरिए नया सौंदर्य पैदा किया।
- इससे उनकी कविता में सुंदर ध्वनि-चित्र प्रस्तुत होते हैं।
रीतिकालीन कविता का संबंध मुख्यतः किससे था?
- केवल जनजीवन से
- केवल प्रकृति से
- दरबारों और आश्रयदाताओं से
- केवल धार्मिक संस्थाओं से
Explanation:
- रीतिकालीन कविता का संबंध दरबारों और आश्रयदाताओं से अधिक था।
- इसी कारण इस काल की कविता में दरबारी संस्कृति का पर्याप्त चित्रण मिलता है।
रीतिकालीन कविता में दरबारी संस्कृति के चित्रण का प्रमुख कारण क्या था?
- कवियों का ग्रामीण जीवन से संबंध
- धार्मिक आंदोलन
- आश्रयदाताओं और दरबारों से जुड़ाव
- वैज्ञानिक विकास
Explanation:
- रीतिकाल में कवियों को राजाओं, सामंतों और अन्य आश्रयदाताओं का संरक्षण प्राप्त होता था।
- इस कारण उनकी कविता पर दरबारी संस्कृति का प्रभाव पड़ा।
देव जब दरबारी प्रभाव से मुक्त हुए, तब उन्होंने मुख्यतः किनका सहज चित्रण किया?
- युद्ध और राजनीति
- धर्म और दर्शन
- प्रेम और सौंदर्य
- कृषि और व्यापार
Explanation:
- देव रीतिकालीन दरबारी वातावरण से जुड़े थे, लेकिन जब वे इसके प्रभाव से मुक्त हुए तो उन्होंने प्रेम और सौंदर्य के सहज चित्र खींचे।
- यह उनकी काव्यगत संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण पक्ष है।
‘डार द्रुम पलना’ और ‘पायनि नूपुर’ किस कवि से संबंधित हैं?
- बिहारी
- केशवदास
- देव
- घनानंद
Explanation:
- ‘डार द्रुम पलना’ और ‘पायनि नूपुर’ देव से संबंधित काव्यांश/रचनात्मक संदर्भ हैं।
- इनके माध्यम से देव की काव्य-भाषा, ध्वनि-सौंदर्य और श्रृंगारिक अभिव्यक्ति को समझा जा सकता है।
जयशंकर प्रसाद का जन्म किस सन् में हुआ था?
- 1885
- 1889
- 1892
- 1895
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में हुआ था।
- उनका जन्म वाराणसी में हुआ था।
- वे छायावादी काव्यधारा के प्रमुख कवियों में शामिल हैं।
जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?
- प्रयागराज
- लखनऊ
- वाराणसी
- कानपुर
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद का जन्म वाराणसी (काशी) में हुआ था।
- काशी का उनके जीवन और साहित्यिक विकास में महत्वपूर्ण स्थान रहा।
जयशंकर प्रसाद काशी के किस कॉलेज में पढ़ने गए थे?
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- हिंदू कॉलेज
- क्वींस कॉलेज
- सेंट जॉन्स कॉलेज
Explanation:
- प्रसाद जी काशी के प्रसिद्ध क्वींस कॉलेज में पढ़ने गए थे।
- परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के कारण वे आठवीं कक्षा से आगे औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके।
जयशंकर प्रसाद औपचारिक शिक्षा में किस कक्षा से आगे नहीं पढ़ पाए?
- पाँचवीं
- सातवीं
- आठवीं
- दसवीं
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद की औपचारिक शिक्षा आठवीं कक्षा के बाद आगे नहीं बढ़ सकी।
- इसके बाद उन्होंने घर पर ही विभिन्न भाषाओं और विषयों का अध्ययन किया।
जयशंकर प्रसाद ने घर पर किन भाषाओं का अध्ययन किया?
- अंग्रेजी, उर्दू और बंगला
- संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी
- संस्कृत, अंग्रेजी और मराठी
- हिंदी, पंजाबी और गुजराती
Explanation:
- औपचारिक शिक्षा के बाद प्रसाद जी ने घर पर संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी का अध्ययन किया।
- उनका बहुभाषिक अध्ययन उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण रहा।
जयशंकर प्रसाद किस काव्य प्रवृत्ति के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं?
- प्रगतिवाद
- रीतिवाद
- प्रयोगवाद
- छायावाद
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावादी काव्य के प्रमुख कवियों में से एक हैं।
- छायावाद में प्रकृति, आत्मानुभूति, कल्पना और भावात्मकता को विशेष महत्व मिला।
जयशंकर प्रसाद का निधन किस सन् में हुआ?
- 1932
- 1935
- 1937
- 1940
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद का निधन 1937 में हुआ।
- वे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, नाटककार, कथाकार और उपन्यासकार थे।
निम्नलिखित में से कौन-सी जयशंकर प्रसाद की काव्य-कृति है?
- गोदान
- कामायनी
- मैला आँचल
- राग दरबारी
Explanation:
- कामायनी जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध काव्य-कृति है।
- उनकी अन्य प्रमुख काव्य-कृतियों में चित्राधार, कानन-कुसुम, झरना, आँसू और लहर शामिल हैं।
जयशंकर प्रसाद की किस कृति को आधुनिक हिंदी की श्रेष्ठतम काव्य-कृतियों में माना जाता है?
- आँसू
- लहर
- झरना
- कामायनी
Explanation:
- कामायनी को आधुनिक हिंदी की श्रेष्ठतम काव्य-कृतियों में माना जाता है।
- इस कृति के लिए जयशंकर प्रसाद को मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया था।
‘कामायनी’ के लिए जयशंकर प्रसाद को कौन-सा पुरस्कार दिया गया था?
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- मंगलाप्रसाद पारितोषिक
- भारत-भारती पुरस्कार
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद की कामायनी पर उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक दिया गया था।
- कामायनी उनकी सर्वाधिक चर्चित काव्य-कृतियों में से एक है।
निम्नलिखित में से कौन-सा जयशंकर प्रसाद का नाटक है?
- कंकाल
- तितली
- ध्रुवस्वामिनी
- आकाशदीप
Explanation:
- ध्रुवस्वामिनी जयशंकर प्रसाद का प्रसिद्ध नाटक है।
- उनके प्रमुख नाटकों में अजातशत्रु, चंद्रगुप्त और स्कंदगुप्त भी शामिल हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा जयशंकर प्रसाद का उपन्यास है?
- स्कंदगुप्त
- आँधी
- कंकाल
- आकाशदीप
Explanation:
- कंकाल जयशंकर प्रसाद का उपन्यास है।
- उनके अन्य उपन्यासों में तितली और इरावती शामिल हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा जयशंकर प्रसाद का कहानी-संग्रह है?
- ध्रुवस्वामिनी
- कंकाल
- आकाशदीप
- कामायनी
Explanation:
- आकाशदीप जयशंकर प्रसाद का कहानी-संग्रह है।
- उनके अन्य कहानी-संग्रहों में आँधी और इंद्रजाल शामिल हैं।
‘आत्मकथ्य’ कविता की रचना का मुख्य कारण क्या था?
- प्रसाद जी की आत्मकथा प्रकाशित होना
- किसी ऐतिहासिक घटना का वर्णन करना
- आत्मकथा लिखने के आग्रह से प्रसाद जी की असहमति
- प्रेमचंद द्वारा कविता लिखने का आग्रह
Explanation:
- प्रेमचंद के संपादन में हंस का आत्मकथा विशेषांक निकालने की योजना थी।
- प्रसाद जी के मित्रों ने उनसे आत्मकथा लिखने का आग्रह किया।
- प्रसाद जी इस आग्रह से सहमत नहीं थे और इसी असहमति के तर्क से ‘आत्मकथ्य’ कविता का जन्म हुआ।
‘हंस’ पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक का संबंध किस साहित्यकार के संपादन से था?
- जयशंकर प्रसाद
- महादेवी वर्मा
- सुमित्रानंदन पंत
- प्रेमचंद
Explanation:
- हंस के आत्मकथा विशेषांक का संपादन प्रेमचंद के संपादन में होना तय हुआ था।
- इसी विशेषांक के लिए प्रसाद जी से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया गया था।
‘आत्मकथ्य’ कविता पहली बार कब प्रकाशित हुई थी?
- 1928
- 1932
- 1937
- 1940
Explanation:
- ‘आत्मकथ्य’ कविता पहली बार 1932 में प्रकाशित हुई थी।
- इसका प्रकाशन हंस के आत्मकथा विशेषांक में हुआ था।
‘आत्मकथ्य’ कविता पहली बार किस पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई?
- सरस्वती
- माधुरी
- विशाल भारत
- हंस
Explanation:
- ‘आत्मकथ्य’ का प्रथम प्रकाशन हंस पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक में हुआ था।
- इस विशेषांक के संदर्भ में प्रसाद जी के मित्रों ने उनसे आत्मकथा लिखने का आग्रह किया था।
‘आत्मकथ्य’ कविता की प्रमुख काव्य-शैली कौन-सी है?
- रीतिकालीन शैली
- प्रगतिवादी शैली
- छायावादी शैली
- वीरगाथात्मक शैली
Explanation:
- ‘आत्मकथ्य’ कविता छायावादी शैली में लिखी गई है।
- कविता में आत्मानुभूति, संवेदना और जीवन के यथार्थ पक्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
‘आत्मकथ्य’ कविता में जयशंकर प्रसाद ने मुख्य रूप से किस पक्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति की है?
- राजनीतिक संघर्ष
- प्रकृति-सौंदर्य
- ऐतिहासिक गौरव
- जीवन के यथार्थ एवं अभाव पक्ष
Explanation:
- ‘आत्मकथ्य’ में प्रसाद जी ने अपने जीवन के यथार्थ और अभाव पक्ष को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है।
- कवि आत्मकथा के माध्यम से निजी जीवन का प्रदर्शन करने के बजाय उसके गहरे अनुभवों और पीड़ा की ओर संकेत करता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कृति जयशंकर प्रसाद की नहीं है?
- आँसू
- लहर
- कामायनी
- गोदान
Explanation:
- गोदान जयशंकर प्रसाद की कृति नहीं है।
- गोदान के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।
- आँसू, लहर और कामायनी जयशंकर प्रसाद की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं।
जयशंकर प्रसाद को किस रूप में देखा जाता है?
- केवल उपन्यासकार
- केवल नाटककार
- केवल कवि
- कवि, गद्यकार और नाटककार सहित बहुआयामी साहित्यकार
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद केवल कवि ही नहीं, बल्कि सफल गद्यकार, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार भी थे।
- उनकी रचनात्मकता हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में दिखाई देती है।
‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ कविताओं के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- सुमित्रानंदन पंत
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
- महादेवी वर्मा
Explanation:
- ‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ दोनों कविताएँ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की रचनाएँ हैं।
- निराला छायावाद के प्रमुख कवियों में से एक थे।
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म कहाँ हुआ था?
- गढ़ाकोला, उत्तर प्रदेश
- महिषादल, बंगाल
- इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- निराला का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ था।
- उनका मूल निवास गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश था।
निराला मूलतः किस स्थान के निवासी थे?
- महिषादल, बंगाल
- वाराणसी, उत्तर प्रदेश
- गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- निराला मूलतः गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश के निवासी थे।
- उनका जन्म महिषादल, बंगाल में हुआ था।
निराला की औपचारिक शिक्षा कहाँ और किस स्तर तक हुई थी?
- इलाहाबाद में स्नातक तक
- उन्नाव में दसवीं तक
- महिषादल में नौवीं तक
- कलकत्ता में स्नातक तक
Explanation:
- निराला की औपचारिक शिक्षा महिषादल में नौवीं कक्षा तक हुई।
- इसके बाद उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से अनेक विषयों का ज्ञान प्राप्त किया।
निराला ने स्वाध्याय से किन भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया?
- हिंदी, उर्दू और फारसी
- संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी
- संस्कृत, तमिल और तेलुगु
- बांग्ला, मराठी और गुजराती
Explanation:
- निराला ने औपचारिक शिक्षा सीमित होने के बावजूद स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी का ज्ञान अर्जित किया।
- वे संगीत और दर्शनशास्त्र के भी गहरे अध्येता थे।
निराला पर किन विचारकों की विचारधारा का विशेष प्रभाव पड़ा?
- महात्मा गांधी और दयानंद सरस्वती
- रवींद्रनाथ ठाकुर और अरविंद घोष
- रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद
- राजा राममोहन राय और विद्यासागर
Explanation:
- रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने निराला को विशेष रूप से प्रभावित किया।
- उनकी रचनाओं में मानवीयता, संघर्ष और व्यापक जीवन-दृष्टि दिखाई देती है।
निराला का निधन किस वर्ष हुआ?
- 1956
- 1959
- 1961
- 1965
Explanation:
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का देहांत सन् 1961 में हुआ।
- उनका जीवन साहित्यिक संघर्षों और व्यक्तिगत दुखों से भरा रहा।
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना निराला की प्रमुख काव्य रचना है?
- कामायनी
- पल्लव
- अनामिका
- यामा
Explanation:
- ‘अनामिका’ निराला की प्रमुख काव्य रचनाओं में शामिल है।
- उनकी अन्य प्रमुख काव्य कृतियों में ‘परिमल’, ‘गीतिका’, ‘कुकुरमुत्ता’ और ‘नए पत्ते’ शामिल हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी कृति निराला की है?
- पल्लव
- यामा
- कुकुरमुत्ता
- गुंजन
Explanation:
- ‘कुकुरमुत्ता’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध काव्य रचना है।
- यह उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में गिनी जाती है।
निराला की संपूर्ण रचनाएँ कितने खंडों की ‘निराला रचनावली’ में प्रकाशित हैं?
- छह खंड
- सात खंड
- आठ खंड
- दस खंड
Explanation:
- निराला का संपूर्ण साहित्य ‘निराला रचनावली’ के आठ खंडों में प्रकाशित हुआ है।
- उन्होंने कविता के साथ-साथ उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध भी लिखे।
छायावादी रचनाकारों में निराला की प्रमुख काव्यगत विशेषता क्या थी?
- उन्होंने केवल दोहा छंद का प्रयोग किया
- उन्होंने केवल गद्य लिखा
- उन्होंने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया
- उन्होंने केवल संस्कृत छंदों का प्रयोग किया
Explanation:
- छायावादी रचनाकारों में निराला ने सबसे पहले मुक्त छंद के प्रयोग को प्रमुखता दी।
- उनकी काव्य-भाषा में स्वतंत्रता और नवीन प्रयोग की स्पष्ट प्रवृत्ति दिखाई देती है।
‘उत्साह’ कविता में कवि किसे संबोधित करता है?
- सूर्य को
- वायु को
- बादल को
- फागुन को
Explanation:
- ‘उत्साह’ एक आह्वान गीत है।
- इसमें कवि बादल को संबोधित करता है और उससे नवजीवन तथा नई चेतना की अपेक्षा करता है।
‘उत्साह’ कविता में बादल किसका प्रतीक बनकर सामने आता है?
- केवल विनाश का
- केवल मनोरंजन का
- नवजीवन, परिवर्तन और क्रांति-चेतना का
- केवल वर्षा ऋतु का
Explanation:
- ‘उत्साह’ में बादल प्यासे और पीड़ित जन की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है।
- साथ ही वह नई कल्पना, नए अंकुर, विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना का भी प्रतीक है।
‘उत्साह’ कविता का प्रमुख भाव क्या है?
- विरह और करुणा
- प्रकृति-वर्णन मात्र
- आह्वान, नवजीवन और क्रांति-चेतना
- हास्य और व्यंग्य
Explanation:
- ‘उत्साह’ में कवि बादल के माध्यम से नवजीवन और नवीन परिवर्तन का आह्वान करता है।
- कविता में ललित कल्पना के साथ सामाजिक परिवर्तन और क्रांति की चेतना भी मौजूद है।
निराला के लिए बादल किस कारण विशेष महत्त्व रखता है?
- क्योंकि बादल केवल सुंदर दिखाई देता है
- क्योंकि बादल केवल वर्षा का प्रतीक है
- क्योंकि वह पीड़ित जन की आकांक्षा तथा नवजीवन और क्रांति का वाहक है
- क्योंकि वह केवल फागुन का प्रतीक है
Explanation:
- बादल निराला का प्रिय विषय था।
- ‘उत्साह’ में बादल जीवनदायी वर्षा के साथ-साथ परिवर्तन और क्रांति की चेतना को भी व्यक्त करता है।
‘उत्साह’ कविता में साहित्य की भूमिका किस संदर्भ में सामने आती है?
- मनोरंजन के साधन के रूप में
- केवल प्रकृति-वर्णन के रूप में
- सामाजिक क्रांति और बदलाव के माध्यम के रूप में
- केवल धार्मिक प्रचार के रूप में
Explanation:
- निराला सामाजिक बदलाव में साहित्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका देखते हैं।
- वे इसे ‘नवजीवन’ और ‘नूतन कविता’ के संदर्भ से जोड़ते हैं।
‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु की मादकता व्यक्त हुई है?
- वर्षा
- शरद
- फागुन
- ग्रीष्म
Explanation:
- ‘अट नहीं रही है’ कविता फागुन की मादकता और सर्वव्यापक सुंदरता को व्यक्त करती है।
- कवि को चारों ओर फागुन का सौंदर्य और उल्लास दिखाई देता है।
‘अट नहीं रही है’ कविता का प्रमुख विषय क्या है?
- सामाजिक संघर्ष
- राजनीतिक व्यंग्य
- फागुन की सर्वव्यापक सुंदरता और उल्लास
- गरीबी और शोषण
Explanation:
- इस कविता में फागुन की मादकता और प्रकृति की सुंदरता का मनोहारी चित्रण है।
- कवि फागुन के सौंदर्य को अनेक संदर्भों में अनुभव करता है।
‘अट नहीं रही है’ कविता की भाषा और लय का क्या प्रभाव है?
- भाषा कठिन और गंभीर हो गई है
- कविता में हास्य उत्पन्न होता है
- कविता फागुन की तरह सुंदर और ललित बन गई है
- कविता पूरी तरह गद्यात्मक हो गई है
Explanation:
- सुंदर शब्दों के चयन और लय ने कविता को अत्यंत आकर्षक बनाया है।
- भाषा और लय स्वयं फागुन के सौंदर्य और उल्लास का अनुभव कराती हैं।
‘अट नहीं रही है’ कविता में कवि के मन की प्रसन्नता का क्या प्रभाव दिखाई देता है?
- उसे केवल अपने घर का सौंदर्य दिखाई देता है
- उसे प्रकृति नीरस दिखाई देती है
- उसे चारों ओर फागुन का सौंदर्य और उल्लास दिखाई देता है
- उसे केवल वर्षा दिखाई देती है
Explanation:
- कविता में कवि के प्रसन्न मन की स्थिति प्रकृति के अनुभव को प्रभावित करती है।
- जब मन प्रसन्न होता है तो हर ओर फागुन का सौंदर्य और उल्लास दिखाई पड़ता है।
निराला की ‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ कविताओं में कौन-सी समानता प्रमुख रूप से दिखाई देती है?
- दोनों में केवल राजनीतिक विषय है
- दोनों में केवल शोक की भावना है
- दोनों में प्रकृति के माध्यम से व्यापक जीवन-दृष्टि और भावनाओं की अभिव्यक्ति है
- दोनों केवल ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित हैं
Explanation:
- ‘उत्साह’ में बादल के माध्यम से नवजीवन और क्रांति-चेतना व्यक्त होती है।
- ‘अट नहीं रही है’ में फागुन के माध्यम से सौंदर्य, उल्लास और प्रसन्नता की अभिव्यक्ति होती है।
- इस प्रकार दोनों कविताओं में प्रकृति केवल दृश्य-वर्णन नहीं, बल्कि व्यापक भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम है।
‘यह दंतुरित मुस्कान’ और ‘फसल’ के रचयिता कौन हैं?
- हरिवंश राय बच्चन
- नागार्जुन
- केदारनाथ सिंह
- सुमित्रानंदन पंत
Explanation:
- नागार्जुन ‘यह दंतुरित मुस्कान’ और ‘फसल’ के रचयिता हैं।
- इन कविताओं में क्रमशः बाल-सौंदर्य और कृषि-संस्कृति के माध्यम से जीवन के व्यापक अर्थों को व्यक्त किया गया है।
नागार्जुन का मूल नाम क्या था?
- रामवृक्ष मिश्र
- वैद्यनाथ मिश्र
- विद्यानिवास मिश्र
- रामधारी सिंह
Explanation:
- नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
- मैथिली में वे ‘यात्री’ नाम से भी प्रसिद्ध थे।
नागार्जुन का जन्म सन् किस वर्ष हुआ था?
- 1905
- 1911
- 1915
- 1920
Explanation:
- नागार्जुन का जन्म 1911 में हुआ था।
- उनका जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ था।
नागार्जुन का जन्म बिहार के किस गाँव में हुआ था?
- सतलखा
- मेरिगंज
- जीरादेई
- सिमरिया
Explanation:
- नागार्जुन का जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ था।
नागार्जुन की आरंभिक शिक्षा मुख्यतः कहाँ हुई थी?
- अंग्रेजी विद्यालय में
- मदरसे में
- संस्कृत पाठशाला में
- विश्वविद्यालय में
Explanation:
- नागार्जुन की आरंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई थी।
- बाद में वे अध्ययन के लिए बनारस और कलकत्ता गए।
नागार्जुन सन् 1936 में किस देश गए थे?
- नेपाल
- श्रीलंका
- भूटान
- म्यांमार
Explanation:
- नागार्जुन 1936 में श्रीलंका गए थे।
- वहीं उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।
नागार्जुन ने श्रीलंका में किस धर्म की दीक्षा ली थी?
- जैन धर्म
- हिंदू धर्म
- बौद्ध धर्म
- सिख धर्म
Explanation:
- श्रीलंका प्रवास के दौरान नागार्जुन ने बौद्ध धर्म में दीक्षा ली थी।
- दो वर्ष के प्रवास के बाद वे 1938 में स्वदेश लौटे।
मातृभाषा मैथिली में नागार्जुन किस नाम से प्रसिद्ध हैं?
- यात्री
- अज्ञेय
- निराला
- दिनकर
Explanation:
- मैथिली में नागार्जुन ‘यात्री’ नाम से प्रतिष्ठित हैं।
- उन्होंने हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं में महत्त्वपूर्ण साहित्य-सृजन किया।
नागार्जुन की प्रमुख काव्य-कृतियों में कौन-सी कृति शामिल है?
- युगधारा
- कामायनी
- उर्वशी
- कुरुक्षेत्र
Explanation:
- युगधारा नागार्जुन की प्रमुख काव्य-कृतियों में से एक है।
- उनकी अन्य प्रमुख कृतियों में सतरंगे पंखों वाली, तुमने कहा था और पुरानी जूतियों का कोरस आदि शामिल हैं।
नागार्जुन की संपूर्ण रचनावली कितने खंडों में प्रकाशित हुई है?
- पाँच खंडों में
- छह खंडों में
- सात खंडों में
- आठ खंडों में
Explanation:
- नागार्जुन की संपूर्ण रचनावली सात खंडों में प्रकाशित हुई है।
- उन्होंने कविता के साथ-साथ उपन्यास और अन्य गद्य विधाओं में भी लेखन किया।
नागार्जुन को आधुनिक किस कवि के रूप में भी संबोधित किया जाता है?
- आधुनिक तुलसी
- आधुनिक सूर
- आधुनिक कबीर
- आधुनिक कालिदास
Explanation:
- व्यंग्य और जनजीवन से गहरे जुड़ाव के कारण नागार्जुन को आधुनिक कबीर कहा जाता है।
- उनकी रचनाओं में सामाजिक विसंगतियों और राजनीतिक स्वार्थ पर तीखा व्यंग्य मिलता है।
नागार्जुन की कविता का प्रमुख सरोकार किससे रहा है?
- केवल राजदरबार से
- लोकजीवन और जनसामान्य से
- केवल प्रकृति-सौंदर्य से
- केवल पौराणिक कथाओं से
Explanation:
- नागार्जुन का साहित्य लोकजीवन और जनसामान्य से गहरे रूप में जुड़ा है।
- उन्होंने भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वार्थ और सामाजिक पतन जैसी समस्याओं को भी अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया।
‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता में कवि किसके सौंदर्य से प्रभावित होता है?
- प्रकृति के सौंदर्य से
- एक छोटे बच्चे की मुस्कान से
- गाँव के मेले से
- खेतों की फसल से
Explanation:
- ‘यह दंतुरित मुस्कान’ में कवि छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान देखकर भाव-विभोर हो जाता है।
- कवि इस मुस्कान में जीवन और सुंदरता का संदेश देखता है।
‘यह दंतुरित मुस्कान’ में बच्चे की मुस्कान का प्रभाव कैसा बताया गया है?
- केवल मनोरंजनकारी
- क्षणिक और साधारण
- कठोर मन को भी पिघला देने वाला
- भय उत्पन्न करने वाला
Explanation:
- बच्चे की मुस्कान की मोहकता इतनी प्रभावशाली है कि वह कठोर से कठोर मन को भी पिघला सकती है।
- कवि ने इसके प्रभाव को अनेक बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है।
‘यह दंतुरित मुस्कान’ में मुस्कान की मोहकता कब और बढ़ जाती है?
- जब बच्चा सो जाता है
- जब उसके साथ नज़रों का बाँकपन जुड़ जाता है
- जब बच्चा खेलता है
- जब वातावरण शांत होता है
Explanation:
- कवि के अनुसार मुस्कान की मोहकता तब और बढ़ जाती है जब उसके साथ नज़रों का बाँकपन जुड़ जाता है।
‘फसल’ कविता का प्रमुख विषय क्या है?
- युद्ध और वीरता
- फसल के निर्माण में प्रकृति और मनुष्य का सहयोग
- शहरी जीवन की समस्या
- राजनीतिक संघर्ष
Explanation:
- ‘फसल’ कविता बताती है कि फसल केवल खेत में उगने वाली वस्तु नहीं है।
- इसके निर्माण में प्रकृति और मनुष्य दोनों का सहयोग होता है।
‘फसल’ कविता में फसल के निर्माण के लिए किनके सहयोग को रेखांकित किया गया है?
- केवल किसान का
- केवल प्रकृति का
- प्रकृति और मनुष्य का
- केवल मशीनों का
Explanation:
- नागार्जुन ने ‘फसल’ में प्रकृति और मनुष्य के सहयोग को सृजन का आधार बताया है।
- किसान का श्रम और प्राकृतिक तत्व मिलकर फसल को जन्म देते हैं।
‘फसल’ कविता की भाषा की प्रमुख विशेषता क्या है?
- अत्यंत कठिन संस्कृतनिष्ठ भाषा
- बोलचाल की भाषा की गति और लय
- केवल उर्दू भाषा
- अंग्रेजी भाषा का प्रयोग
Explanation:
- ‘फसल’ की भाषा में बोलचाल की सहजता, गति और लय है।
- यही विशेषता कविता को प्रभावशाली और जनसामान्य के निकट बनाती है।
‘फसल’ कविता पाठक को किस संस्कृति के निकट ले जाती है?
- औद्योगिक संस्कृति
- उपभोक्ता संस्कृति
- कृषि-संस्कृति
- दरबारी संस्कृति
Explanation:
- ‘फसल’ कविता उपभोक्ता-संस्कृति के दौर में कृषि-संस्कृति के निकट ले जाती है।
- कविता कृषि और प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध को रेखांकित करती है।
नागार्जुन किस प्रकार की कविता-रचना के लिए भी प्रसिद्ध हैं?
- केवल छंदबद्ध कविता
- केवल मुक्त छंद
- छंदबद्ध और मुक्त छंद दोनों
- केवल गद्य कविता
Explanation:
- नागार्जुन ने छंदों में भी और मुक्त छंद में भी काव्य-रचना की।
- उनकी कविता में विषय और भाषा की विविधता दिखाई देती है।
नागार्जुन को किस साहित्यिक विशेषता के कारण ‘जनकवि’ कहा जाता है?
- केवल शास्त्रीय विषयों के कारण
- जनजीवन और सामयिक समस्याओं से गहरे जुड़ाव के कारण
- केवल राजाओं का वर्णन करने के कारण
- केवल प्रेम-कविताओं के कारण
Explanation:
- नागार्जुन की कविता जनजीवन, लोक-संस्कृति और सामयिक समस्याओं से गहराई से जुड़ी है।
- उनकी आंदोलनधर्मी और सामाजिक सरोकार वाली कविताएँ व्यापक रूप से लोकप्रिय हुईं, इसलिए वे वास्तविक अर्थों में जनकवि माने जाते हैं।
गिरिजाकुमार माथुर का जन्म सन् किस वर्ष हुआ था?
- 1915
- 1918
- 1920
- 1922
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर का जन्म सन् 1918 में हुआ था।
- उनका जन्म गुना, मध्य प्रदेश में हुआ था।
गिरिजाकुमार माथुर का जन्मस्थान कहाँ था?
- झाँसी, उत्तर प्रदेश
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
- गुना, मध्य प्रदेश
- भोपाल, मध्य प्रदेश
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर का जन्म गुना, मध्य प्रदेश में हुआ था।
गिरिजाकुमार माथुर ने प्रारंभिक शिक्षा कहाँ प्राप्त की थी?
- गुना
- लखनऊ
- भोपाल
- झाँसी
Explanation:
- उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा झाँसी, उत्तर प्रदेश में प्राप्त की थी।
गिरिजाकुमार माथुर ने एम. ए. किस विषय में किया था?
- हिंदी
- इतिहास
- अंग्रेज़ी
- दर्शनशास्त्र
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर ने एम. ए. अंग्रेज़ी की उपाधि प्राप्त की थी।
- उन्होंने एल. एल. बी. की शिक्षा भी लखनऊ से प्राप्त की थी।
गिरिजाकुमार माथुर ने एम. ए. और एल. एल. बी. की उपाधियाँ कहाँ से अर्जित की थीं?
- इलाहाबाद
- झाँसी
- आगरा
- लखनऊ
Explanation:
- उन्होंने एम. ए. अंग्रेज़ी और एल. एल. बी. की उपाधियाँ लखनऊ से अर्जित की थीं।
गिरिजाकुमार माथुर ने अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में कौन-सा कार्य किया था?
- अध्यापन
- वकालत
- पत्रकारिता
- व्यापार
Explanation:
- शुरुआत में गिरिजाकुमार माथुर ने कुछ समय तक वकालत की थी।
- बाद में वे आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े।
गिरिजाकुमार माथुर बाद में किन संस्थानों में कार्यरत रहे?
- दूरदर्शन और भारतीय ज्ञानपीठ
- विश्वविद्यालय और आकाशवाणी
- आकाशवाणी और दूरदर्शन
- साहित्य अकादमी और आकाशवाणी
Explanation:
- वकालत के बाद उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन में कार्य किया।
गिरिजाकुमार माथुर का निधन किस वर्ष हुआ था?
- 1990
- 1992
- 1994
- 1996
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर का निधन सन् 1994 में हुआ था।
निम्नलिखित में से कौन-सी गिरिजाकुमार माथुर की काव्य-कृति है?
- जन्म कैद
- नयी कविता : सीमाएँ और संभावनाएँ
- धूप के धान
- भारत-दुर्दशा
Explanation:
- धूप के धान गिरिजाकुमार माथुर का काव्य-संग्रह है।
- उनके अन्य काव्य-संग्रहों में नाश और निर्माण, शिलापंख चमकीले और भीतरी नदी की यात्रा शामिल हैं।
‘जन्म कैद’ गिरिजाकुमार माथुर की किस विधा की रचना है?
- काव्य-संग्रह
- उपन्यास
- आलोचना
- नाटक
Explanation:
- जन्म कैद गिरिजाकुमार माथुर का नाटक है।
‘नयी कविता : सीमाएँ और संभावनाएँ’ किस विधा की रचना है?
- नाटक
- उपन्यास
- आलोचना
- कहानी
Explanation:
- नयी कविता : सीमाएँ और संभावनाएँ आलोचना की रचना है।
- इससे गिरिजाकुमार माथुर के आलोचनात्मक चिंतन का परिचय मिलता है।
गिरिजाकुमार माथुर को हिंदी साहित्य में किस प्रकार के कवि के रूप में माना जाता है?
- प्रगतिवादी कवि
- भक्तिकालीन कवि
- नयी कविता के कवि
- रीतिकालीन कवि
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर नयी कविता के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं।
- उनकी कविता में आधुनिक संवेदना के साथ रोमानी भावबोध भी दिखाई देता है।
गिरिजाकुमार माथुर किस प्रकार के मिज़ाज के कवि माने जाते हैं?
- आध्यात्मिक मिज़ाज
- व्यंग्यात्मक मिज़ाज
- रोमानी मिज़ाज
- वीर मिज़ाज
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर को रोमानी मिज़ाज का कवि माना जाता है।
- उनकी कविताओं में भावात्मकता और सौंदर्य-बोध का विशेष स्थान है।
गिरिजाकुमार माथुर कविता में किसके पक्षधर थे?
- केवल परंपरागत विषयों के
- केवल कठिन भाषा के
- विषय की मौलिकता के
- केवल तुकबंदी के
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर विषय की मौलिकता के पक्षधर थे।
- हालाँकि वे शिल्प की विलक्षणता को भी नज़रअंदाज़ नहीं करते थे।
गिरिजाकुमार माथुर शिल्प के संबंध में किस विचार को महत्त्व देते थे?
- शिल्प का कोई महत्त्व नहीं है
- केवल पारंपरिक शिल्प आवश्यक है
- विषय की मौलिकता के साथ शिल्प की विलक्षणता भी महत्त्वपूर्ण है
- केवल तुकबंदी ही शिल्प है
Explanation:
- वे विषय की मौलिकता के साथ शिल्प की विलक्षणता को भी महत्त्व देते थे।
- इससे उनकी काव्य-दृष्टि में विषय और अभिव्यक्ति दोनों का संतुलन दिखाई देता है।
चित्र को अधिक स्पष्ट करने के लिए गिरिजाकुमार माथुर अपनी कविताओं में क्या भरते हैं?
- अलंकारों की अधिकता
- पौराणिक संदर्भ
- वातावरण के रंग
- केवल तुक
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर चित्र को अधिक स्पष्ट और प्रभावपूर्ण बनाने के लिए वातावरण के रंग भरते हैं।
गिरिजाकुमार माथुर ने मुक्त छंद में किसके प्रयोग से संगीतात्मकता संभव की?
- केवल तुकांत शब्दों से
- अलंकारों की अधिकता से
- ध्वनि-साम्य के प्रयोग से
- छंद के कठोर नियमों से
Explanation:
- गिरिजाकुमार माथुर ने मुक्त छंद में ध्वनि-साम्य का प्रयोग किया।
- इससे बिना तुक के भी उनकी कविता में संगीतात्मकता उत्पन्न होती है।
गिरिजाकुमार माथुर की कविताओं में भाषा के कितने प्रमुख रंग दिखाई देते हैं?
- एक
- दो
- तीन
- चार
Explanation:
- उनकी कविताओं में भाषा के दो रंग दिखाई देते हैं।
- रोमानी कविताओं में बोलचाल के छोटे-छोटे ध्वनि वाले शब्द तथा क्लासिक मिज़ाज की कविताओं में लंबे और गंभीर ध्वनि वाले शब्द मिलते हैं।
गिरिजाकुमार माथुर की रोमानी कविताओं में किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग अधिक मिलता है?
- अत्यंत कठिन पारिभाषिक शब्द
- लंबे और गंभीर ध्वनि वाले शब्द
- छोटी-छोटी ध्वनि वाले बोलचाल के शब्द
- केवल संस्कृतनिष्ठ शब्द
Explanation:
- रोमानी कविताओं में वे छोटी-छोटी ध्वनि वाले बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करते हैं।
- इससे भाषा सहज, स्वाभाविक और भावपूर्ण बनती है।
गिरिजाकुमार माथुर की क्लासिक मिज़ाज की कविताओं में किस प्रकार के शब्दों को प्राथमिकता दी जाती है?
- केवल बोलचाल के छोटे शब्द
- अत्यधिक विदेशी शब्द
- लंबी और गंभीर ध्वनि वाले शब्द
- केवल मुहावरे
Explanation:
- क्लासिक मिज़ाज की कविताओं में वे लंबी और गंभीर ध्वनि वाले शब्दों को प्राथमिकता देते हैं।
- यह उनकी भाषा के दूसरे प्रमुख रंग को दर्शाता है।
‘छाया मत छूना’ के कवि कौन हैं?
- शमशेर बहादुर सिंह
- अज्ञेय
- गिरिजाकुमार माथुर
- मुक्तिबोध
Explanation:
- ‘छाया मत छूना’ गिरिजाकुमार माथुर की प्रसिद्ध कविता है।
- यह कविता उनके काव्य-संसार में जीवन की वास्तविकता, मोह और उससे बचने की चेतना से जुड़ी मानी जाती है।
‘कन्यादान’ कविता के रचनाकार कौन हैं?
- केदारनाथ सिंह
- ऋतुराज
- कुँवर नारायण
- रघुवीर सहाय
Explanation:
- ‘कन्यादान’ कविता के रचनाकार ऋतुराज हैं।
- इस कविता में माँ अपनी बेटी को स्त्री जीवन की वास्तविकताओं और सामाजिक बंधनों के प्रति सचेत करती है।
ऋतुराज का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1935
- 1938
- 1940
- 1945
Explanation:
- ऋतुराज का जन्म 1940 ई. में हुआ था।
- उनका जन्मस्थान भरतपुर, राजस्थान है।
ऋतुराज का जन्मस्थान कौन-सा है?
- जयपुर
- भरतपुर
- जोधपुर
- उदयपुर
Explanation:
- ऋतुराज का जन्म भरतपुर, राजस्थान में हुआ था।
ऋतुराज ने अंग्रेज़ी में एम.ए. कहाँ से किया?
- दिल्ली विश्वविद्यालय
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
Explanation:
- उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से अंग्रेज़ी में एम.ए. किया।
ऋतुराज ने लगभग कितने वर्षों तक अंग्रेज़ी साहित्य का अध्यापन किया?
- बीस वर्ष
- तीस वर्ष
- चालीस वर्ष
- पचास वर्ष
Explanation:
- ऋतुराज ने लगभग चालीस वर्षों तक अंग्रेज़ी साहित्य का अध्यापन किया।
- सेवानिवृत्ति के बाद वे जयपुर में रहते हैं।
ऋतुराज की प्रमुख कविता-संग्रहों में कौन-सा शामिल है?
- एक मरणधर्मा और अन्य
- आँगन के पार द्वार
- संसद से सड़क तक
- बात बोलेगी
Explanation:
- ‘एक मरणधर्मा और अन्य’ ऋतुराज का प्रमुख कविता-संग्रह है।
निम्नलिखित में से कौन-सा ऋतुराज का कविता-संग्रह है?
- पुल पर पानी
- कविता के बहाने
- चाँद का मुँह टेढ़ा है
- आत्मजयी
Explanation:
- ‘पुल पर पानी’ ऋतुराज का प्रमुख कविता-संग्रह है।
‘सुरत निरत’ किसकी कृति है?
- ऋतुराज
- धूमिल
- मुक्तिबोध
- शमशेर बहादुर सिंह
Explanation:
- ‘सुरत निरत’ ऋतुराज के प्रमुख कविता-संग्रहों में शामिल है।
निम्नलिखित में से कौन-सा ऋतुराज का कविता-संग्रह है?
- लीला मुखारविंद
- बादल राग
- उर्वशी
- रश्मिरथी
Explanation:
- ‘लीला मुखारविंद’ ऋतुराज के प्रमुख कविता-संग्रहों में से एक है।
ऋतुराज की कविताओं का प्रमुख विषय क्या है?
- केवल प्रकृति-सौंदर्य
- राजदरबार का जीवन
- हाशिए के लोगों की चिंताएँ और सामाजिक विडंबनाएँ
- केवल पौराणिक कथाएँ
Explanation:
- ऋतुराज ने मुख्यधारा से अलग समाज के हाशिए के लोगों की चिंताओं को अपने लेखन का विषय बनाया।
- उनकी कविताओं में सामाजिक शोषण और विडंबनाओं का यथार्थ दिखाई देता है।
ऋतुराज की कविताओं में किस प्रकार का यथार्थ मिलता है?
- काल्पनिक यथार्थ
- दैनिक जीवन के अनुभव का यथार्थ
- केवल ऐतिहासिक यथार्थ
- केवल धार्मिक यथार्थ
Explanation:
- उनकी कविताओं में दैनिक जीवन के अनुभव का यथार्थ मिलता है।
- वे आसपास घटने वाली सामाजिक घटनाओं और विसंगतियों को अपनी कविता का विषय बनाते हैं।
‘कन्यादान’ कविता में मुख्य रूप से किस संबंध को प्रस्तुत किया गया है?
- पिता और पुत्र का संबंध
- भाई और बहन का संबंध
- माँ और बेटी का संबंध
- गुरु और शिष्य का संबंध
Explanation:
- ‘कन्यादान’ में माँ और बेटी के संबंध को केंद्र में रखा गया है।
- माँ अपने संचित जीवन-अनुभवों के आधार पर बेटी को स्त्री जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराती है।
‘कन्यादान’ कविता में माँ बेटी को किस प्रकार की सीख देती है?
- परंपरागत आदर्शों को आँख मूँदकर स्वीकार करने की
- स्त्री के लिए बनाए गए रूढ़ सामाजिक आदर्शों के प्रति सचेत रहने की
- केवल घरेलू कार्य सीखने की
- समाज से पूरी तरह अलग रहने की
Explanation:
- माँ बेटी को स्त्री के लिए बनाए गए परंपरागत आचरण-प्रतिमानों के प्रति सचेत करती है।
- कविता इन प्रतिमानों को आदर्श के नाम पर लगाए गए बंधनों के रूप में देखती है।
‘कन्यादान’ कविता में स्त्री के लिए बनाए गए सामाजिक प्रतिमानों को किस रूप में देखा गया है?
- पूर्ण स्वतंत्रता के रूप में
- आदर्श के मुलम्मे में बंधन के रूप में
- सामाजिक विकास के साधन के रूप में
- समानता के प्रतीक के रूप में
Explanation:
- कविता में समाज द्वारा स्त्रियों के लिए बनाए गए आचरण-संबंधी प्रतिमानों को आदर्श के मुलम्मे में बंधन बताया गया है।
‘कन्यादान’ कविता में ‘कोमलता’ के गौरव में क्या छिपा हुआ बताया गया है?
- साहस
- स्वतंत्रता
- कमज़ोरी का उपहास
- सामाजिक सम्मान
Explanation:
- कविता के अनुसार ‘कोमलता’ को स्त्री का गौरव बताने के पीछे कमज़ोरी का उपहास छिपा रहता है।
- इस प्रकार कविता स्त्री के पारंपरिक आदर्शीकरण पर प्रश्न उठाती है।
‘कन्यादान’ कविता में ‘लड़की जैसा न दिखाई देना’ किसका प्रतिकार है?
- प्रकृति के नियमों का
- स्त्री के आदर्शीकरण का
- शिक्षा व्यवस्था का
- आर्थिक विषमता का
Explanation:
- ‘लड़की जैसा न दिखाई देना’ स्त्री के आदर्शीकरण के प्रतिकार का संकेत है।
- कविता रूढ़ स्त्री-छवि से बाहर निकलने की चेतना व्यक्त करती है।
कविता में बेटी को माँ की ‘अंतिम पूँजी’ क्यों कहा गया है?
- क्योंकि बेटी परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति है
- क्योंकि बेटी माँ के सबसे निकट और उसके सुख-दुख की साथी होती है
- क्योंकि बेटी आर्थिक रूप से सक्षम होती है
- क्योंकि बेटी परिवार की मुखिया होती है
Explanation:
- बेटी माँ के सबसे निकट होती है और उसके सुख-दुख की साथी होती है।
- इसी आत्मीय संबंध के कारण कविता में बेटी को माँ की ‘अंतिम पूँजी’ कहा गया है।
‘कन्यादान’ कविता में माँ की बातों में किसकी अभिव्यक्ति हुई है?
- कोरी भावुकता
- माँ के संचित अनुभवों की पीड़ा
- राजनीतिक विचारधारा
- धार्मिक उपदेश
Explanation:
- कविता में केवल कोरी भावुकता नहीं है।
- माँ के जीवन के संचित अनुभवों और उनसे उपजी पीड़ा की प्रामाणिक अभिव्यक्ति इसमें दिखाई देती है।
‘कन्यादान’ कविता में ऋतुराज की संवेदनशीलता मुख्यतः किसके प्रति दिखाई देती है?
- प्रकृति के प्रति
- स्त्री जीवन के प्रति
- राजनीतिक सत्ता के प्रति
- ऐतिहासिक घटनाओं के प्रति
Explanation:
- इस छोटी-सी कविता में ऋतुराज की स्त्री जीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता व्यक्त हुई है।
- कवि स्त्री के सामाजिक अनुभवों और बंधनों को गंभीरता से प्रस्तुत करता है।
‘कन्यादान’ कविता की भाषा किससे जुड़ी हुई है?
- केवल शास्त्रीय भाषा से
- अपने परिवेश और लोक जीवन से
- केवल वैज्ञानिक शब्दावली से
- दरबारी भाषा से
Explanation:
- ऋतुराज की भाषा उनके परिवेश और लोक जीवन से जुड़ी हुई है।
- उनकी रचनाओं में रोजमर्रा के जीवन और सामाजिक अनुभवों की सहज उपस्थिति मिलती है।
ऋतुराज को निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मान प्राप्त हुआ है?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- बिहारी पुरस्कार
- भारत भारती पुरस्कार
Explanation:
- ऋतुराज को बिहारी पुरस्कार सहित सोमदत्त, परिमल सम्मान, मीरा पुरस्कार और पहल सम्मान प्राप्त हुए हैं।
‘कन्यादान’ कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
- स्त्री को पारंपरिक बंधनों और रूढ़ आदर्शों के प्रति सचेत करना
- प्रकृति की सुंदरता का वर्णन करना
- युद्ध की वीरता का वर्णन करना
- धार्मिक आस्था का प्रचार करना
Explanation:
- ‘कन्यादान’ का केंद्रीय भाव स्त्री को परंपरागत रूढ़ियों और सामाजिक बंधनों के प्रति सचेत करना है।
- माँ अपने अनुभवों के आधार पर बेटी को जीवन की वास्तविकताओं को समझने की सीख देती है।
‘संगतकार’ कविता के रचनाकार कौन हैं?
- केदारनाथ सिंह
- मंगलेश डबराल
- रघुवीर सहाय
- कुँवर नारायण
Explanation:
- मंगलेश डबराल ‘संगतकार’ कविता के रचनाकार हैं।
- वे समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं।
मंगलेश डबराल का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1945
- 1946
- 1948
- 1950
Explanation:
- मंगलेश डबराल का जन्म 1948 में हुआ था।
- उनका जन्म उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हुआ।
मंगलेश डबराल का जन्म किस गाँव में हुआ था?
- नौगाँव
- धनोल्टी
- चंबा
- काफलपानी
Explanation:
- उनका जन्म काफलपानी गाँव में हुआ था।
- यह गाँव टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में स्थित है।
मंगलेश डबराल का जन्म किस क्षेत्र में हुआ था?
- कुमाऊँ
- टिहरी गढ़वाल
- हरिद्वार
- नैनीताल
Explanation:
- मंगलेश डबराल का जन्म टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हुआ था।
- उनकी रचनाओं में पहाड़ और सामान्य जीवन के अनुभवों की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।
मंगलेश डबराल की शिक्षा-दीक्षा कहाँ हुई?
- दिल्ली
- भोपाल
- देहरादून
- इलाहाबाद
Explanation:
- मंगलेश डबराल की शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई।
- बाद में वे रोजगार और साहित्यिक गतिविधियों के लिए दिल्ली आए।
दिल्ली आने के बाद मंगलेश डबराल ने किन संस्थानों/प्रकाशनों में काम किया?
- सिर्फ जनसत्ता में
- सिर्फ नेशनल बुक ट्रस्ट में
- हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास
- सिर्फ भारत भवन में
Explanation:
- दिल्ली आकर उन्होंने हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास में काम किया।
- इसके बाद उनके पत्रकारिता और संपादन से जुड़े कार्यों का विस्तार हुआ।
मंगलेश डबराल भारत भवन से प्रकाशित होने वाली किस पत्रिका में सहायक संपादक रहे?
- पहल
- आलोचना
- पूर्वग्रह
- हंस
Explanation:
- भोपाल में वे भारत भवन से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘पूर्वग्रह’ में सहायक संपादक रहे।
- यह उनके संपादकीय जीवन का महत्वपूर्ण चरण था।
मंगलेश डबराल ने सन् 1983 में किस समाचार-पत्र में साहित्य संपादक का पद सँभाला?
- नवभारत टाइम्स
- हिंदुस्तान
- आज
- जनसत्ता
Explanation:
- सन् 1983 में मंगलेश डबराल ने जनसत्ता में साहित्य संपादक का पद सँभाला।
- पत्रकारिता और संपादन के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
मंगलेश डबराल ने कुछ समय किस संस्था से जुड़कर कार्य किया?
- साहित्य अकादेमी
- भारतीय ज्ञानपीठ
- नेशनल बुक ट्रस्ट
- प्रसार भारती
Explanation:
- सहारा समय में संपादन कार्य करने के बाद वे नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े रहे।
- उनका साहित्यिक जीवन पत्रकारिता, संपादन और लेखन से व्यापक रूप से जुड़ा था।
मंगलेश डबराल के कितने प्रमुख कविता-संग्रह प्रकाशित हुए?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
Explanation:
- मंगलेश डबराल के चार कविता-संग्रह प्रकाशित हुए।
- इनमें ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’ और ‘आवाज़ भी एक जगह है’ शामिल हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा मंगलेश डबराल का कविता-संग्रह है?
- अकाल में सारस
- पहाड़ पर लालटेन
- आत्महत्या के विरुद्ध
- संसद से सड़क तक
Explanation:
- ‘पहाड़ पर लालटेन’ मंगलेश डबराल का प्रमुख कविता-संग्रह है।
- उनके चार प्रमुख कविता-संग्रहों में इसका नाम शामिल है।
निम्नलिखित में से कौन-सा मंगलेश डबराल का कविता-संग्रह नहीं है?
- घर का रास्ता
- हम जो देखते हैं
- आवाज़ भी एक जगह है
- संसद से सड़क तक
Explanation:
- ‘संसद से सड़क तक’ मंगलेश डबराल का कविता-संग्रह नहीं है।
- यह धूमिल का प्रसिद्ध कविता-संग्रह है।
- मंगलेश डबराल के प्रमुख संग्रह हैं—‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’ और ‘आवाज़ भी एक जगह है’।
मंगलेश डबराल को साहित्य अकादेमी पुरस्कार के अतिरिक्त किस सम्मान से सम्मानित किया गया?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- भारत भारती सम्मान
- पहल सम्मान
- व्यास सम्मान
Explanation:
- मंगलेश डबराल को साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पहल सम्मान से सम्मानित किया गया।
- वे अनुवादक के रूप में भी प्रसिद्ध थे।
मंगलेश डबराल की ख्याति किस क्षेत्र में भी थी?
- चित्रकला
- अभिनय
- संगीत निर्देशन
- अनुवाद
Explanation:
- मंगलेश डबराल की ख्याति कवि के साथ-साथ अनुवादक के रूप में भी थी।
- उनकी कविताओं के अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हुए।
मंगलेश डबराल की कविताओं का अनुवाद निम्नलिखित में से किस भाषा में हुआ है?
- अंग्रेज़ी
- रूसी
- जर्मन
- उपर्युक्त सभी
Explanation:
- उनकी कविताओं के अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, स्पानी, पोल्स्की और बल्गारी भाषाओं में भी अनुवाद प्रकाशित हुए।
- इसके अतिरिक्त उनकी कविताएँ विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी अनूदित हुईं।
‘संगतकार’ कविता का मुख्य विषय क्या है?
- प्रकृति का सौंदर्य
- युद्ध का वर्णन
- मुख्य कलाकार की सफलता में सहायक व्यक्ति की महत्ता
- शहरी जीवन की समस्या
Explanation:
- ‘संगतकार’ कविता मुख्य गायक के साथ रहने वाले संगतकार के महत्त्व को रेखांकित करती है।
- कविता बताती है कि किसी सफलता के पीछे कई ऐसे लोगों का योगदान होता है जो स्वयं सामने नहीं आते।
‘संगतकार’ कविता में संगतकार किसका साथ देता है?
- नर्तक का
- अभिनेता का
- वादक का
- मुख्य गायक का
Explanation:
- संगतकार गायन में मुख्य गायक का साथ देता है।
- वह मुख्य गायक की प्रस्तुति को सहारा और पूर्णता प्रदान करता है।
‘संगतकार’ कविता हमें किस मानवीय संवेदना के प्रति जागरूक करती है?
- प्रतिस्पर्धा की भावना
- व्यक्तिगत प्रसिद्धि
- सहयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के महत्त्व की पहचान
- धन-संपत्ति का महत्त्व
Explanation:
- कविता हमें यह समझाती है कि सफलता में योगदान देने वाले हर व्यक्ति का अपना महत्त्व होता है।
- सामने न आना किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं, बल्कि मानवीयता और सहयोग की भावना भी हो सकती है।
मंगलेश डबराल की कविताओं में किन प्रवृत्तियों का प्रतिकार दिखाई देता है?
- केवल प्राकृतिक सौंदर्य का
- केवल ग्रामीण जीवन का
- सामंती बोध और पूँजीवादी छल-छद्म का
- केवल आधुनिक विज्ञान का
Explanation:
- मंगलेश डबराल की कविताओं में सामंती बोध एवं पूँजीवादी छल-छद्म दोनों का प्रतिकार दिखाई देता है।
- उनका प्रतिकार शोर-शराबे के बजाय संवेदनशील और मानवीय दृष्टि से सामने आता है।
मंगलेश डबराल के काव्य-सौंदर्य की प्रमुख विशेषता क्या मानी गई है?
- अत्यधिक अलंकारिक भाषा
- कठिन एवं दुरूह भाषा
- सूक्ष्म सौंदर्यबोध और पारदर्शी भाषा
- केवल हास्य-व्यंग्य
Explanation:
- मंगलेश डबराल का सौंदर्यबोध सूक्ष्म और भाषा पारदर्शी मानी गई है।
- उनकी कविता में सहजता के साथ गहरी सामाजिक संवेदना दिखाई देती है।
‘संगतकार’ कविता की संगीतात्मकता और दृश्यात्मकता किस प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करती है?
- कविता को दुरूह बनाती है
- कविता को केवल हास्यपूर्ण बनाती है
- ऐसा अनुभव कराती है मानो घटना हमारे सामने घट रही हो
- कविता को केवल ऐतिहासिक बनाती है
Explanation:
- कविता की संगीत की सूक्ष्म समझ और दृश्यात्मकता उसे गतिशील बनाती है।
- पाठक को ऐसा अनुभव होता है जैसे पूरी प्रस्तुति उसके सामने घटित हो रही हो।
- कविता कला के माध्यम से सहयोगी व्यक्ति के महत्त्व को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।
