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‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?
- फणीश्वर नाथ ‘रेणु’
- यशपाल
- मुंशी प्रेमचंद
- जयशंकर प्रसाद
Explanation:
- ‘ठाकुर का कुआँ’ के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।
- प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ और शोषित वर्ग के जीवन का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी पहली बार किस कहानी-संग्रह में प्रकाशित हुई थी?
- मानसरवर
- गोदान
- मानसी
- कफन
Explanation:
- ‘ठाकुर का कुआँ’ पहली बार ‘मानसी’ कहानी-संग्रह में प्रकाशित हुई थी।
- बाद में इसे ‘मानसरवर’ भाग-1 में भी संकलित किया गया।
‘मानसी’ में ‘ठाकुर का कुआँ’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1920 ई.
- 1928 ई.
- 1932 ई.
- 1936 ई.
Explanation:
- ‘ठाकुर का कुआँ’ का प्रथम प्रकाशन 1932 ई. में ‘मानसी’ में हुआ था।
- यह प्रेमचंद की सामाजिक यथार्थवादी कहानियों में महत्वपूर्ण है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी का प्रमुख विषय क्या है?
- प्रेम और त्याग
- प्राकृतिक सौंदर्य
- जातिवाद, छुआछूत और दलित-पीड़न
- ऐतिहासिक युद्ध
Explanation:
- कहानी में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता की अमानवीयता को उजागर किया गया है।
- स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता से वंचित किए जाने के माध्यम से सामाजिक विषमता को दिखाया गया है।
‘ठाकुर का कुआँ’ की केंद्रीय पात्र कौन है?
- जोखू
- ठाकुर
- साहूकार
- गंगी
Explanation:
- गंगी कहानी की नायिका और केंद्रीय पात्र है।
- वह अपने बीमार पति जोखू के लिए पानी लाने का साहस करती है।
गंगी का जोखू से क्या संबंध है?
- बहन
- माँ
- पत्नी
- बेटी
Explanation:
- गंगी जोखू की पत्नी है।
- अपने बीमार पति की प्यास बुझाने के लिए वह सामाजिक जोखिम उठाती है।
कहानी में जोखू किस स्थिति से गुजर रहा है?
- वह यात्रा पर है
- वह गांव छोड़ रहा है
- वह बीमार है और प्यास से तड़प रहा है
- वह खेत में काम कर रहा है
Explanation:
- जोखू लंबे समय से बीमार है।
- उसे प्यास लगी है, लेकिन जातिगत व्यवस्था के कारण वह ऊँची जाति के कुएँ से पानी लेने में असमर्थ है।
गंगी ठाकुर के कुएँ पर क्यों जाती है?
- कपड़े धोने के लिए
- ठाकुर से मिलने के लिए
- अपने बीमार पति के लिए पानी लाने के लिए
- कुएँ की सफाई करने के लिए
Explanation:
- जोखू बीमार है और पीने के पानी के लिए परेशान है।
- गंगी अपने पति की प्यास बुझाने के लिए ठाकुर के कुएँ से पानी लेने का जोखिम उठाती है।
ठाकुर का कुआँ कहानी में किस सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है?
- श्रमिक वर्ग
- दलित वर्ग
- सामंती और उच्च जातीय प्रभुत्व वाले वर्ग
- मजदूर वर्ग
Explanation:
- ठाकुर गांव के सामंती और प्रभुत्वशाली वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
- उसके कुएँ पर सामाजिक और जातिगत अधिकार का नियंत्रण कहानी की विषमता को दर्शाता है।
गंगी का चरित्र किस गुण को सबसे अधिक दर्शाता है?
- कायरता
- निष्क्रियता
- निडरता और स्वाभिमान
- स्वार्थ
Explanation:
- गंगी सामाजिक भय के बावजूद ठाकुर के कुएँ से पानी लेने का साहस करती है।
- वह संवेदनशील होने के साथ-साथ अपने अधिकार और पति के जीवन के प्रति जागरूक है।
‘ठाकुर का कुआँ’ में पानी किस बुनियादी अधिकार का प्रतीक बन जाता है?
- राजनीतिक अधिकार
- शिक्षा का अधिकार
- जीवन और मानव गरिमा के मूल अधिकार
- संपत्ति का अधिकार
Explanation:
- कहानी में स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता भी जाति के आधार पर नियंत्रित दिखाई जाती है।
- इससे सामाजिक समानता और मानव गरिमा का प्रश्न सामने आता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी किस साहित्यिक शैली की प्रमुख विशेषता प्रस्तुत करती है?
- रोमांटिक शैली
- काल्पनिक शैली
- यथार्थवादी शैली
- पौराणिक शैली
Explanation:
- कहानी में भारतीय ग्रामीण समाज की वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण है।
- जाति, छुआछूत और गरीबी जैसी समस्याओं को बिना कृत्रिम आदर्शीकरण के प्रस्तुत किया गया है।
‘ठाकुर का कुआँ’ में गंगी का संघर्ष किसके विरुद्ध है?
- केवल गरीबी के विरुद्ध
- केवल बीमारी के विरुद्ध
- जातिगत भेदभाव और सामाजिक विषमता के विरुद्ध
- प्राकृतिक आपदा के विरुद्ध
Explanation:
- गंगी की समस्या केवल पानी की समस्या नहीं है।
- उसके पीछे जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता की पूरी व्यवस्था मौजूद है।
1 जोखू उच्च जाति के कुएँ से पानी लेने का साहस क्यों नहीं करता?
- उसे पानी की आवश्यकता नहीं थी
- वह कुआँ बहुत दूर था
- जातिगत डर और सामाजिक प्रतिबंध के कारण
- वह कुएँ को पसंद नहीं करता था
Explanation:
- जोखू शोषित दलित वर्ग से संबंधित है।
- जातिगत व्यवस्था के कारण वह ठाकुर या साहूकार के कुएँ से पानी लेने से डरता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ में कुआँ किसका प्रतीक बनकर उभरता है?
- केवल प्राकृतिक संसाधन का
- समृद्धि और विकास का
- सामाजिक अधिकारों और जातिगत नियंत्रण का
- धार्मिक आस्था का
Explanation:
- कुआँ कहानी में केवल पानी का स्रोत नहीं है।
- यह समाज में संसाधनों पर प्रभुत्व और जातिगत अधिकारों के असमान वितरण का प्रतीक बन जाता है।
‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी का मूल संदेश क्या है?
- सामंती व्यवस्था की प्रशंसा
- जातिगत भेदभाव को उचित ठहराना
- समानता, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की आवश्यकता
- ग्रामीण जीवन से पलायन
Explanation:
- कहानी सामाजिक विषमता और अस्पृश्यता की अमानवीयता को सामने लाती है।
- स्वच्छ पानी जैसे मूलभूत अधिकार से वंचित करना मानव गरिमा के विरुद्ध है।
- कहानी समानता और सामाजिक न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
‘ठाकुर का कुआँ’ को मार्मिक कहानी बनाने वाला प्रमुख तत्व क्या है?
- राजदरबार का वर्णन
- प्रकृति का सौंदर्य
- एक बीमार पति के लिए पानी जुटाने वाली स्त्री के संघर्ष के माध्यम से सामाजिक विषमता का चित्रण
- हास्य और मनोरंजन
Explanation:
- गंगी का अपने बीमार पति जोखू के लिए पानी जुटाने का संघर्ष कहानी का भावनात्मक केंद्र है।
- इस छोटे-से प्रसंग के माध्यम से प्रेमचंद ने जातिवाद, छुआछूत, सामंती मानसिकता और दलित-पीड़न जैसी व्यापक सामाजिक समस्याओं को उजागर किया है।
