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‘माता का आँचल’ के लेखक कौन हैं?
- प्रेमचंद
- फणीश्वर नाथ रेणु
- शिवपूजन सहाय
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation:
- ‘माता का आँचल’ के लेखक शिवपूजन सहाय हैं।
- शिवपूजन सहाय मुख्यतः गद्य के लेखक थे।
शिवपूजन सहाय का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1890
- 1893
- 1895
- 1900
Explanation:
- शिवपूजन सहाय का जन्म सन् 1893 में हुआ था।
- उनका जन्म बिहार के भोजपुर जिले के उनवाँस गाँव में हुआ था।
शिवपूजन सहाय का जन्म कहाँ हुआ था?
- आरा, बिहार
- पटना, बिहार
- उनवाँस गाँव, भोजपुर, बिहार
- बनारस, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- उनका जन्म गाँव उनवाँस, जिला भोजपुर, बिहार में हुआ था।
शिवपूजन सहाय का बचपन का नाम क्या था?
- रामदीन
- शिवनाथ
- भोलानाथ
- हरिनाथ
Explanation:
- शिवपूजन सहाय का बचपन का नाम भोलानाथ था।
दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद शिवपूजन सहाय ने कहाँ नौकरी की?
- पटना सचिवालय में
- विद्यालय में
- बनारस की अदालत में
- भोजपुर के कचहरी कार्यालय में
Explanation:
- दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने बनारस की अदालत में नकलनवीस की नौकरी की।
शिवपूजन सहाय ने प्रारंभ में किस पद पर कार्य किया था?
- अध्यापक
- पत्रकार
- नकलनवीस
- संपादक
Explanation:
- उन्होंने बनारस की अदालत में नकलनवीस के रूप में नौकरी शुरू की थी।
बाद में शिवपूजन सहाय किस पद पर कार्य करने लगे?
- वकील
- हिंदी अध्यापक
- न्यायाधीश
- सरकारी अधिकारी
Explanation:
- बनारस की अदालत में नकलनवीस की नौकरी के बाद वे हिंदी के अध्यापक बन गए।
शिवपूजन सहाय ने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र किस आंदोलन के प्रभाव में दिया?
- भारत छोड़ो आंदोलन
- सविनय अवज्ञा आंदोलन
- असहयोग आंदोलन
- स्वदेशी आंदोलन
Explanation:
- असहयोग आंदोलन के प्रभाव से शिवपूजन सहाय ने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
- यह उनके राष्ट्रीय चेतना से प्रभावित जीवन का महत्वपूर्ण प्रसंग था।
शिवपूजन सहाय मुख्यतः किस विधा के लेखक थे?
- कविता
- नाटक
- गद्य
- महाकाव्य
Explanation:
- शिवपूजन सहाय मुख्यतः गद्य के लेखक थे।
- उनकी रचनाओं में लोकजीवन और लोकसंस्कृति का सहज चित्रण मिलता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना शिवपूजन सहाय की है?
- मैला आँचल
- राग दरबारी
- देहाती दुनिया
- गोदान
Explanation:
- ‘देहाती दुनिया’ शिवपूजन सहाय की प्रमुख रचना है।
- इसमें ग्रामीण जीवन और लोक-संस्कृति के प्रसंग मिलते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना शिवपूजन सहाय की है?
- कामायनी
- ग्राम सुधार
- आषाढ़ का एक दिन
- तमस
Explanation:
- ‘ग्राम सुधार’ शिवपूजन सहाय की रचनाओं में शामिल है।
‘वे दिन वे लोग’ किसकी रचना है?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- जयशंकर प्रसाद
- शिवपूजन सहाय
- महादेवी वर्मा
Explanation:
- ‘वे दिन वे लोग’ शिवपूजन सहाय की प्रमुख रचनाओं में शामिल है।
‘स्मृतिशेष’ के लेखक कौन हैं?
- प्रेमचंद
- बालकृष्ण भट्ट
- शिवपूजन सहाय
- रामचंद्र शुक्ल
Explanation:
- ‘स्मृतिशेष’ शिवपूजन सहाय की रचना है।
शिवपूजन सहाय की संपूर्ण रचनाएँ कितने खंडों में प्रकाशित हुई हैं?
- दो खंडों में
- तीन खंडों में
- चार खंडों में
- पाँच खंडों में
Explanation:
- शिवपूजन सहाय की संपूर्ण रचनाएँ ‘शिवपूजन रचनावली’ के चार खंडों में प्रकाशित हैं।
‘शिवपूजन रचनावली’ में क्या प्रकाशित है?
- केवल उनकी कविताएँ
- केवल उनके नाटक
- शिवपूजन सहाय की संपूर्ण रचनाएँ
- केवल उनकी कहानियाँ
Explanation:
- उनकी संपूर्ण रचनाएँ ‘शिवपूजन रचनावली’ के चार खंडों में प्रकाशित हुई हैं।
शिवपूजन सहाय ने निम्नलिखित में से किस पत्रिका का संपादन किया था?
- सरस्वती
- जागरण
- हंस
- ज्ञानोदय
Explanation:
- उन्होंने ‘जागरण’ सहित कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं का संपादन किया।
निम्नलिखित में से किस पत्रिका के संपादन से शिवपूजन सहाय जुड़े थे?
- चाँद
- हिमालय
- प्रतीक
- तारसप्तक
Explanation:
- शिवपूजन सहाय ने ‘हिमालय’ पत्रिका का भी संपादन किया था।
निम्नलिखित में से किस पत्रिका के संपादन से शिवपूजन सहाय का संबंध था?
- विशाल भारत
- कल्पना
- माधुरी
- कादंबिनी
Explanation:
- ‘माधुरी’ उन प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में थी जिनके संपादन से शिवपूजन सहाय जुड़े रहे।
शिवपूजन सहाय किस पत्रिका के संपादक-मंडल में शामिल थे?
- सरिता
- धर्मयुग
- मतवाला
- दिनमान
Explanation:
- शिवपूजन सहाय हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘मतवाला’ के संपादक-मंडल में थे।
शिवपूजन सहाय का निधन किस वर्ष हुआ?
- 1956
- 1960
- 1963
- 1968
Explanation:
- शिवपूजन सहाय का देहांत सन् 1963 में हुआ था।
शिवपूजन सहाय की रचनाओं की प्रमुख विशेषता क्या है?
- केवल पौराणिक विषयों का वर्णन
- केवल शहरी जीवन का चित्रण
- लोकजीवन और लोकसंस्कृति का सहज चित्रण
- केवल राजनीतिक घटनाओं का वर्णन
Explanation:
- शिवपूजन सहाय की रचनाओं में लोकजीवन और लोकसंस्कृति के प्रसंग सहज रूप से मिलते हैं।
- उनकी रचनाएँ ग्रामीण परिवेश और जनजीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
‘माता का आँचल’ के लेखक कौन हैं?
- प्रेमचंद
- शिवपूजन सहाय
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- फणीश्वरनाथ रेणु
Explanation:
- ‘माता का आँचल’ के लेखक शिवपूजन सहाय हैं।
- यह रचना बाल्य जीवन, पारिवारिक स्नेह और मातृ-वात्सल्य का सजीव चित्रण करती है।
‘माता का आँचल’ में ‘माता का आँचल’ का बाल-नायक कौन है?
- बैजू
- गणेश
- मूसन तिवारी
- तारकेश्वरनाथ (भोलानाथ)
Explanation:
- कहानी का बाल-नायक तारकेश्वरनाथ है, जिसे उसके पिता प्यार से भोलानाथ कहते हैं।
- कहानी उसके बचपन की स्मृतियों के इर्द-गिर्द घूमती है।
‘माता का आँचल’ में बालक को उसके पिता किस नाम से पुकारते थे?
- कन्हैया
- तारक
- भोलानाथ
- लल्लू
Explanation:
- बालक के पिता उसे प्यार से भोलानाथ कहकर पुकारते थे।
- ‘भोलानाथ’ उसका प्रिय उपनाम था।
‘माता का आँचल’ में बालक का अपने पिता से कैसा संबंध था?
- औपचारिक और दूर का
- डर और अनुशासन पर आधारित
- केवल पढ़ाई तक सीमित
- अत्यंत गहरा और स्नेहपूर्ण
Explanation:
- बालक अपने पिता से अत्यंत घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ था।
- वह उनके साथ सोता, उठता, पूजा करता, गंगा जाता और भोजन करता था।
‘माता का आँचल’ में बाबू जी की दिनचर्या में निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य शामिल था?
- शिकार करना
- गंगा में मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाना
- बाजार में व्यापार करना
- गाँव में पंचायत करना
Explanation:
- बाबू जी धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे।
- वे पूजा-पाठ और राम-नाम लिखने के साथ गंगा में मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाते थे।
‘माता का आँचल’ में मइयाँ बालक को अपने हाथ से किस प्रकार खिलाती थीं?
- छोटे-छोटे निवाले देकर
- फल खिलाकर
- भर-मुँह कौर खिलाकर
- दूध पिलाकर
Explanation:
- माता अपने बच्चे को अत्यंत वात्सल्य के साथ भर-मुँह कौर खिलाती थीं।
- यह प्रसंग माँ के ममत्व और घरेलू स्नेह को दर्शाता है।
‘माता का आँचल’ में मइयाँ बालक के सिर में क्या लगाती थीं?
- चंदन
- इत्र
- सरसों का लेप
- कड़वा तेल
Explanation:
- माता बालक के सिर में कड़वा तेल लगाती थीं।
- वे काजल की बिंदी लगाकर उसकी चोटी गूँथती और उसे कन्हैया जैसा बना देती थीं।
‘माता का आँचल’ में बालक को डर या दुःख होने पर वह अंततः कहाँ शरण लेता था?
- पिता की पूजा-स्थली पर
- दोस्तों के पास
- पाठशाला में
- माता के आँचल में
Explanation:
- माता का आँचल बालक के लिए सुरक्षा, प्रेम और शांति का प्रतीक था।
- डर या संकट की स्थिति में बालक अंततः माँ के आँचल में ही छिपता था।
‘माता का आँचल’ में बालक और उसके साथी किस प्रकार के खेल खेलते थे?
- केवल कबड्डी
- केवल कुश्ती
- मिठाई की दुकान, घरौंदा, बरात और खेती आदि के खेल
- केवल पतंगबाजी
Explanation:
- बच्चों के खेलों में ग्रामीण जीवन की झलक मिलती है।
- वे मिठाई की दुकान लगाते, घरौंदा बनाते, बरात निकालते और खेती के सभी कामों की नकल करते थे।
‘माता का आँचल’ में बालक के साथियों में कौन शरारती और ढीठ स्वभाव का था?
- गणेश
- मूसन तिवारी
- बैजू
- गुरु जी
Explanation:
- बैजू बालक का साथी था और अपने शरारती तथा ढीठ स्वभाव के लिए जाना जाता था।
- उसी की शरारत के कारण बच्चे मूसन तिवारी को चिढ़ाते हैं।
‘माता का आँचल’ में मूसन तिवारी को बच्चे किस नाम से चिढ़ाते थे?
- बुढ़वा राजा
- बूढ़ा साधु
- तिवारी बाबा
- बुढ़वा बेईमान
Explanation:
- बैजू और अन्य बच्चे मूसन तिवारी को चिढ़ाने के लिए ‘बुढ़वा बेईमान’ कहते थे।
- इससे नाराज होकर तिवारी बच्चों को खदेड़ते हैं और गुरु जी से शिकायत करते हैं।
‘माता का आँचल’ में मूसन तिवारी ने बच्चों की शिकायत किससे की?
- बाबू जी से
- गाँव के मुखिया से
- गुरु जी से
- मइयाँ से
Explanation:
- मूसन तिवारी बच्चों की शरारत से नाराज होकर गुरु जी के पास शिकायत करते हैं।
- इसके बाद बालक को गुरु जी से दंड मिलता है।
‘माता का आँचल’ में गुरु जी द्वारा दंड मिलने के बाद बालक को घर कौन लेकर आया?
- बैजू
- गणेश
- मइयाँ
- बाबू जी
Explanation:
- बालक को दंड मिलने की जानकारी के बाद उसके पिता बाबू जी दौड़कर आते हैं।
- वे उसे गोद में लेकर घर की ओर लौटते हैं।
‘माता का आँचल’ में बच्चे बाग में किस जीव को देखकर डर गए थे?
- नेवला
- बिच्छू
- साँप
- छिपकली
Explanation:
- बरखा के बाद बाग में बच्चों ने बिच्छू देखा, जिससे वे डर गए।
- यह प्रसंग कहानी के बाल-सुलभ भय और ग्रामीण परिवेश को दर्शाता है।
‘माता का आँचल’ में बच्चों का खेल किस जीवन-परिवेश की झलक देता है?
- शहरी जीवन
- औद्योगिक जीवन
- राजदरबारी जीवन
- ग्रामीण जीवन
Explanation:
- कहानी में बच्चों के खेलों के माध्यम से ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण मिलता है।
- खेती, बरात, घरौंदा, मिठाई की दुकान और लोक-व्यवहार इन खेलों में दिखाई देते हैं।
‘माता का आँचल’ में चूहों के बिल से पानी उलीचते समय बच्चों के सामने क्या आ गया?
- बिच्छू
- नेवला
- साँप
- खरगोश
Explanation:
- चूहों के बिल से पानी निकालते समय अचानक साँप निकल आया।
- साँप को देखकर बच्चे भयभीत होकर भागने लगे और बालक भी गिर-पड़ गया।
‘माता का आँचल’ में साँप निकलने के बाद बालक की क्या स्थिति हुई?
- वह हँसने लगा
- वह साँप पकड़ने लगा
- वह घर चला गया
- वह डरकर गिर-पड़ा और उसके शरीर पर चोटें आईं
Explanation:
- साँप के भय से बालक भागते समय गिर-पड़ा।
- उसके शरीर पर चोटें आईं और पैरों में काँटे चुभ गए।
- भयभीत बालक अंततः अपनी माँ के आँचल में जाकर छिप गया।
‘माता का आँचल’ में बालक के घायल होने पर मइयाँ ने उसके घावों पर क्या लगाया?
- चंदन
- तेल
- नमक
- हल्दी
Explanation:
- मइयाँ ने बालक के घावों पर हल्दी लगाई।
- उन्होंने उसे गले लगाकर सांत्वना दी और अपने वात्सल्य से उसका भय दूर किया।
‘जॉर्ज पंचम की नाक’ के लेखक कौन हैं?
- हरिशंकर परसाई
- कमलेश्वर
- श्रीलाल शुक्ल
- रांगेय राघव
Explanation:
- ‘जॉर्ज पंचम की नाक’ कमलेश्वर की प्रसिद्ध व्यंग्य-कहानी है।
- इस कहानी के माध्यम से लेखक ने औपनिवेशिक मानसिकता और स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया है।
‘जॉर्ज पंचम की नाक’ कहानी की पृष्ठभूमि किस घटना से जुड़ी है?
- भारत-पाकिस्तान युद्ध
- स्वतंत्रता दिवस समारोह
- रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के भारत दौरे
- गणतंत्र दिवस समारोह
Explanation:
- रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के भारत आगमन की तैयारियों के दौरान जॉर्ज पंचम की प्रतिमा की गायब नाक का संकट सामने आता है।
- इसी घटना को आधार बनाकर कहानी में व्यंग्य प्रस्तुत किया गया है।
कहानी में सबसे बड़ी समस्या क्या थी?
- रानी के स्वागत की व्यवस्था नहीं होना
- सड़कें खराब होना
- हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था
- जॉर्ज पंचम की प्रतिमा की नाक का गायब होना
Explanation:
- रानी के आगमन से पहले दिल्ली को सजाया-सँवारा जा रहा था।
- इसी बीच अधिकारियों को पता चलता है कि जॉर्ज पंचम की प्रतिमा की नाक गायब है।
- इसे प्रतिष्ठा और ‘नाक’ का प्रश्न बनाकर प्रस्तुत किया जाता है।
जॉर्ज पंचम की प्रतिमा को कहानी में किस शब्द से संबोधित किया गया है?
- स्मारक
- प्रतिमान
- लाट
- स्तंभ
Explanation:
- कहानी में जॉर्ज पंचम की प्रतिमा के लिए ‘लाट’ शब्द का प्रयोग किया गया है।
- लाट का अर्थ यहाँ विशाल प्रतिमा या स्तंभनुमा स्मारक से है।
जॉर्ज पंचम की नाक लगाने की जिम्मेदारी किसे दी गई?
- पुरातत्व विभाग के क्लर्क को
- सेना के अधिकारी को
- अखबार के संपादक को
- मूर्तिकार को
Explanation:
- कमेटी ने नाक की समस्या का समाधान खोजने के लिए एक मूर्तिकार को बुलाया।
- मूर्तिकार ने पहले मूल पत्थर की किस्म जानने की आवश्यकता बताई।
मूर्तिकार ने जॉर्ज पंचम की नाक बनाने के लिए सबसे पहले किस बात की जानकारी माँगी?
- नाक की लंबाई
- प्रतिमा की ऊँचाई
- मूल पत्थर की किस्म
- प्रतिमा बनाने वाले कलाकार का नाम
Explanation:
- मूर्तिकार का कहना था कि नाक लगाने के लिए उसी प्रकार के पत्थर की आवश्यकता होगी।
- इससे कहानी में सरकारी फाइलों और प्रशासनिक तंत्र की विडंबना भी सामने आती है।
पुरातत्व विभाग की फाइलों के बारे में क्लर्क ने क्या कहा?
- फाइलें चोरी हो गई हैं
- फाइलें अभी तैयार नहीं हुई हैं
- फाइलें दिल्ली में नहीं हैं
- फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं
Explanation:
- पुरातत्व विभाग की फाइलों से भी प्रतिमा के मूल पत्थर की जानकारी नहीं मिलती।
- “फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं” सरकारी दफ्तरों की निष्क्रियता और कागजी व्यवस्था पर व्यंग्य है।
मूर्तिकार ने नाक के लिए किन स्थानों की मूर्तियों का निरीक्षण किया?
- केवल दिल्ली की मूर्तियों का
- केवल बिहार और उत्तर प्रदेश की मूर्तियों का
- देश के विभिन्न क्षेत्रों की अनेक मूर्तियों का
- केवल ब्रिटिश अधिकारियों की मूर्तियों का
Explanation:
- मूर्तिकार ने बंबई, गुजरात, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, मद्रास और पंजाब आदि क्षेत्रों की मूर्तियों की नाकें नापीं।
- वह जॉर्ज पंचम की नाक से मेल खाती नाक खोज रहा था।
मूर्तिकार ने किन महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों की मूर्तियों की नाकें नापीं?
- केवल अंग्रेज अधिकारियों की
- केवल साहित्यकारों की
- गांधी, तिलक, भगतसिंह, सुभाषचंद्र बोस आदि की
- केवल राजाओं और नवाबों की
Explanation:
- मूर्तिकार ने अनेक राष्ट्रीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों की नाकों का माप लिया।
- इनमें गांधी, तिलक, सुभाषचंद्र बोस, भगतसिंह, मोतीलाल नेहरू, मालवीय और लाला लाजपतराय आदि शामिल थे।
मूर्तिकार को स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों की नाकों के बारे में क्या पता चला?
- वे सभी जॉर्ज पंचम की नाक से छोटी थीं
- वे सभी टूटी हुई थीं
- वे सभी एक जैसी थीं
- वे सभी जॉर्ज पंचम की नाक से बड़ी थीं
Explanation:
- मूर्तिकार ने कई राष्ट्रीय नेताओं की मूर्तियों की नाकें नापीं।
- उसे जॉर्ज पंचम की नाक के आकार की उपयुक्त नाक नहीं मिली।
- व्यंग्यात्मक रूप से भारतीय महापुरुषों की नाकें बड़ी निकलती हैं।
बिहार में मूर्तिकार ने किनकी मूर्तियों की नाकें नापीं?
- अंग्रेज अधिकारियों की
- राजाओं की
- 1942 में शहीद हुए बच्चों की
- केवल साहित्यकारों की
Explanation:
- मूर्तिकार बिहार सेक्रेटरिएट के सामने स्थापित 1942 के शहीद बच्चों की मूर्तियों की नाकें भी नापता है।
- उनकी नाकें भी जॉर्ज पंचम की नाक से बड़ी निकलती हैं।
मूर्तिकार ने अंततः जॉर्ज पंचम की नाक लगाने के लिए क्या सुझाव दिया?
- नई नाक पत्थर से तराशी जाए
- विदेश से नाक मँगाई जाए
- पुरानी प्रतिमा की नाक खोजी जाए
- किसी जीवित व्यक्ति की नाक काटकर लगा दी जाए
Explanation:
- मूर्तिकार ने व्यंग्यपूर्ण ढंग से सुझाव दिया कि चालीस करोड़ जनता में से किसी एक की जीवित नाक काटकर प्रतिमा पर लगा दी जाए।
- यह सुझाव कहानी के व्यंग्य को चरम पर पहुँचा देता है।
जॉर्ज पंचम की नाक के अनुसार मूर्तिकार के नाक काटने के लिए किसकी नाक चुनी जानी थी?
- किसी विदेशी अधिकारी की
- किसी सैनिक की
- किसी जीवित भारतीय की
- किसी मूर्तिकार की
Explanation:
- मूर्तिकार ने कहा कि नाक चुनने का काम उसका होगा और उसे केवल अनुमति चाहिए।
- कमेटी ने इस प्रस्ताव को अनुमति दे दी।
जॉर्ज पंचम की नाक कहानी में ‘नाक’ किस व्यापक अर्थ की ओर संकेत करती है?
- केवल शारीरिक अंग की ओर
- धन-संपत्ति की ओर
- प्रतिष्ठा, सम्मान और स्वाभिमान की ओर
- शारीरिक शक्ति की ओर
Explanation:
- ‘नाक’ हिंदी में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है।
- कहानी में जॉर्ज पंचम की नाक को बचाने की चिंता औपनिवेशिक मानसिकता और सत्ता-भक्ति पर व्यंग्य करती है।
जॉर्ज पंचम की नाक रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के भारत आने से पहले दिल्ली में क्या हो रहा था?
- केवल चुनाव हो रहे थे
- केवल सेना की भर्ती हो रही थी
- सड़कों की सफाई और इमारतों की सजावट की जा रही थी
- सभी सरकारी कार्यालय बंद किए जा रहे थे
Explanation:
- रानी के स्वागत के लिए दिल्ली में विशेष तैयारियाँ की जा रही थीं।
- सड़कें साफ की जा रही थीं और इमारतों को सजाया जा रहा था।
- लेखक इसी अतिशय उत्साह के माध्यम से मानसिक गुलामी पर व्यंग्य करता है।
जॉर्ज पंचम की नाक कहानी में अखबारों द्वारा किस प्रकार की खबरें प्रमुखता से छापी जा रही थीं?
- किसानों की समस्याओं की
- स्वतंत्रता सेनानियों की
- रानी के सूट, नौकरों और कुत्तों तक से जुड़ी खबरों की
- केवल साहित्यिक गतिविधियों की
Explanation:
- अखबारों में रानी के दौरे से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी प्रमुखता से प्रकाशित हो रही थीं।
- यह पत्रकारिता और सत्ता के प्रति मानसिक दासता पर व्यंग्य का माध्यम है।
जॉर्ज पंचम की नाक के संकट को सुलझाने के लिए किस प्रकार की कमेटी बनाई गई?
- ग्राम पंचायत
- साहित्यिक समिति
- उच्च-स्तरीय कमेटी
- खेल समिति
Explanation:
- नाक जैसी छोटी-सी समस्या के लिए भी उच्च-स्तरीय कमेटी बनाई जाती है।
- लेखक इसी माध्यम से सरकारी तंत्र की हास्यास्पद कार्यशैली पर व्यंग्य करता है।
जॉर्ज पंचम की नाक लगाने के बाद उसकी विशेषता क्या बताई गई?
- वह सोने की बनी थी
- वह विदेशी पत्थर की बनी थी
- वह पुरानी नाक थी
- वह ‘ज़िंदा नाक’ थी
Explanation:
- कहानी के अंत में बताया जाता है कि प्रतिमा पर पत्थर की नाक नहीं बल्कि ‘ज़िंदा नाक’ लगाई गई।
- यही कहानी के व्यंग्य और भयावह विडंबना का चरम है।
‘जॉर्ज पंचम की नाक’ कहानी का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
- ब्रिटिश इतिहास का वर्णन करना
- रानी एलिज़ाबेथ की जीवनी लिखना
- मूर्तिकला की तकनीक समझाना
- औपनिवेशिक मानसिकता और सत्ता-तंत्र की विडंबना पर व्यंग्य करना
Explanation:
- कहानी में स्वतंत्र भारत में भी अंग्रेजी सत्ता के प्रतीकों के प्रति दिखाई जाने वाली मानसिक गुलामी पर व्यंग्य किया गया है।
- जॉर्ज पंचम की नाक को बचाने के लिए भारतीयों की प्रतिष्ठा और संवेदना की उपेक्षा करना इसी विडंबना को उजागर करता है।
जॉर्ज पंचम की नाक कहानी के अंत में अखबारों में किस बात की अनुपस्थिति विशेष रूप से व्यंग्य का विषय बनती है?
- रानी के आगमन की
- सड़क निर्माण की
- मूर्तिकार के नाम की
- उद्घाटन, फीता-कटाई, सार्वजनिक सभा और स्वागत-समारोह की खबरों की
Explanation:
- नाक लग जाने के बाद भी अखबारों में सामान्य सरकारी समारोहों जैसी खबरें नहीं थीं।
- यह संकेत कहानी के अंत को और अधिक व्यंग्यात्मक बनाता है।
- लेखक इस खामोशी के माध्यम से उस व्यवस्था की संवेदनहीनता पर प्रहार करता है, जिसने एक विदेशी शासक की प्रतिमा की नाक को भारतीय सम्मान से ऊपर रखा।
‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ की लेखिका कौन हैं?
- महादेवी वर्मा
- मधु कांकरिया
- मन्नू भंडारी
- कृष्णा सोबती
Explanation:
- सही उत्तर: मधु कांकरिया
- ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ मधु कांकरिया का यात्रा-संस्मरण है।
- इसमें सिक्किम की यात्रा के माध्यम से प्रकृति, मानव-जीवन, श्रम, सैनिकों और जीवन-दर्शन का चित्रण किया गया है।
‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ किस विधा की रचना है?
- कहानी
- नाटक
- यात्रा-संस्मरण
- उपन्यास
Explanation:
- सही उत्तर: यात्रा-संस्मरण
- लेखिका ने सिक्किम की यात्रा के अनुभवों को संवेदनशील और चिंतनपरक ढंग से प्रस्तुत किया है।
- यह केवल पर्यटन-वर्णन नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवन-सत्यों की खोज का वृत्तांत भी है।
‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ में लेखिका मुख्य रूप से किस क्षेत्र की यात्रा का वर्णन करती हैं?
- कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- अरुणाचल प्रदेश
- सिक्किम
Explanation:
- सही उत्तर: सिक्किम
- यात्रा का आरंभ गंतोक से होता है और लेखिका यूमथांग तथा कटाओ सहित अनेक स्थानों का वर्णन करती हैं।
लेखिका की सिक्किम यात्रा का आरंभ किस स्थान से होता है?
- लायुंग
- गंतोक (गैंगटॉक)
- कटाओ
- यूमथांग
Explanation:
- सही उत्तर: गंतोक (गैंगटॉक)
- गंतोक सिक्किम की राजधानी है और लेखिका की यात्रा का आरंभिक बिंदु है।
- गंतोक की रात का तारों और रोशनियों से भरा दृश्य लेखिका को अत्यंत आकर्षित करता है।
लेखिका गंतोक में किस पर्वत-चोटी को देखने की प्रतीक्षा करती हैं?
- नंदा देवी
- माउंट एवरेस्ट
- कंचनजंघा
- धौलागिरि
Explanation:
- सही उत्तर: कंचनजंघा
- लेखिका सुबह बालकनी में कंचनजंघा देखने की उम्मीद करती हैं, लेकिन बादलों के कारण वह दिखाई नहीं देती।
गंतोक से यूमथांग की यात्रा लगभग कितनी दूरी की बताई गई है?
- 75 किलोमीटर
- 100 किलोमीटर
- 149 किलोमीटर
- 200 किलोमीटर
Explanation:
- सही उत्तर: 149 किलोमीटर
- लेखिका ने गंतोक से यूमथांग तक के लगभग 149 किलोमीटर लंबे पहाड़ी सफर का वर्णन किया है।
प्रेयर व्हील (धर्म-चक्र) को घुमाने के संबंध में क्या मान्यता है?
- इससे वर्षा होती है
- इससे यात्रा सुरक्षित होती है
- इससे बीमारी दूर होती है
- इससे पाप धुलने की मान्यता है
Explanation:
- सही उत्तर: इससे पाप धुलने की मान्यता है
- यात्रा के दौरान लेखिका बौद्ध धर्म के प्रेयर व्हील को देखती हैं।
- उसे घुमाने से पाप धुलने की धार्मिक मान्यता का उल्लेख किया गया है।
कवी-लोंग स्टॉक किस कारण से विशेष रूप से उल्लेखित है?
- यहाँ कंचनजंघा दिखाई देती है
- यह सिक्किम की राजधानी है
- यहाँ ‘गाइड’ फिल्म की शूटिंग हुई थी और लेपचा-भुटिया संधि हुई थी
- यहाँ भारतीय सेना का मुख्यालय है
Explanation:
- सही उत्तर: यहाँ ‘गाइड’ फिल्म की शूटिंग हुई थी और लेपचा-भुटिया संधि हुई थी
- कवी-लोंग स्टॉक यात्रा के दौरान ऐतिहासिक और फिल्मी संदर्भ वाला महत्वपूर्ण स्थान है।
‘सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल’ पर लेखिका को किस अनुभव की अनुभूति होती है?
- भय की अनुभूति
- युद्ध की स्मृति
- घर की याद
- आत्मा का संगीत और जीवन की अनंतता
Explanation:
- सही उत्तर: आत्मा का संगीत और जीवन की अनंतता
- झरने की ध्वनि और प्राकृतिक सौंदर्य लेखिका को गहरे आध्यात्मिक अनुभव से भर देते हैं।
- वह प्रकृति में ईश्वर की निकटता का अनुभव करती हैं।
यात्रा के दौरान तिस्ता नदी का वर्णन किस रूप में सामने आता है?
- एक बाधा के रूप में
- एक सूखी नदी के रूप में
- पूरी यात्रा में साथ रहने वाली सुंदर प्राकृतिक धारा के रूप में
- एक धार्मिक स्थल के रूप में
Explanation:
- सही उत्तर: पूरी यात्रा में साथ रहने वाली सुंदर प्राकृतिक धारा के रूप में
- तिस्ता नदी यात्रा के प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक प्रभावशाली बनाती है।
- उसके किनारे बसे स्थानों और पहाड़ी दृश्यों का लेखिका ने सुंदर चित्रण किया है।
पत्थर तोड़ने वाली पहाड़ी औरतों का दृश्य लेखिका को किस कारण से झकझोर देता है?
- वे बहुत दूर रहती थीं
- वे पर्यटकों से बात नहीं करती थीं
- वे कठिन श्रम करते हुए पीठ पर बच्चों को बाँधे हुए थीं
- वे पहाड़ों पर घूम रही थीं
Explanation:
- सही उत्तर: वे कठिन श्रम करते हुए पीठ पर बच्चों को बाँधे हुए थीं
- वे हथौड़े और कुदाल से पत्थर तोड़कर सड़क निर्माण में योगदान दे रही थीं।
- यह दृश्य प्राकृतिक सौंदर्य के बीच मौजूद गरीबी, श्रम और वंचना की कठोर वास्तविकता को सामने लाता है।
पत्थर तोड़ने वाली पहाड़ी महिलाओं के कार्य के खतरे के बारे में जानकारी किसने दी?
- जितेन नार्गे
- कैप्टन शेखर दत्ता
- सिक्किमी युवती
- बी.आर.ओ. कर्मचारी
Explanation:
- सही उत्तर: बी.आर.ओ. कर्मचारी
- बी.आर.ओ. कर्मचारी बताता है कि पत्थर तोड़ने का काम बहुत खतरनाक है।
- उसने यह भी बताया कि पिछले महीने एक महिला की जान चली गई थी।
लेखिका को पत्थर तोड़ने वाली पहाड़ी औरतों को देखकर किन क्षेत्रों की आदिवासी युवतियों की याद आती है?
- राजस्थान और गुजरात
- पंजाब और हरियाणा
- पलामू और गुमला
- दिल्ली और आगरा
Explanation:
- सही उत्तर: पलामू और गुमला
- लेखिका ने पलामू-गुमला के जंगलों में भी ऐसी आदिवासी युवतियों को देखा था।
- उनके जीवन में अभाव, कठिन श्रम और संघर्ष की समानता लेखिका को दिखाई देती है।
लायुंग किस रूप में यात्रा में महत्वपूर्ण है?
- यात्रा का अंतिम गंतव्य
- सैनिक मुख्यालय
- रात्रि-पड़ाव की बस्ती
- बौद्ध मठ
Explanation:
- सही उत्तर: रात्रि-पड़ाव की बस्ती
- लायुंग तिस्ता नदी के किनारे स्थित रात्रि-पड़ाव का स्थान है।
- यहाँ लेखिका नृत्य-संगीत का आनंद लेती हैं और अगली सुबह वहाँ के शांत प्राकृतिक वातावरण को देखती हैं।
लायुंग में लगभग 50 वर्ष की मणि किस गतिविधि में भाग लेती हैं?
- चित्रकारी
- पर्वतारोहण
- प्रार्थना
- नृत्य
Explanation:
- सही उत्तर: नृत्य
- मणि लगभग 50 वर्ष की सहयात्री हैं, जो यात्रा के दौरान नृत्य करती हैं।
- उनकी सक्रियता और आनंदपूर्ण स्वभाव यात्रा के वातावरण को जीवंत बनाता है।
सिक्किम में स्नो-फॉल कम होने का प्रमुख कारण क्या बताया गया है?
- अधिक वर्षा
- भूकंप
- वनों की वृद्धि
- प्रदूषण
Explanation:
- सही उत्तर: प्रदूषण
- लेखिका को बताया जाता है कि प्रदूषण के कारण बर्फबारी कम हो रही है।
- यह प्रसंग प्राकृतिक पर्यावरण पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव की ओर संकेत करता है।
कटाओ को किस नाम से जाना गया है?
- भारत का कश्मीर
- भारत का स्विट्जरलैंड
- भारत का तिब्बत
- भारत का स्कॉटलैंड
Explanation:
- सही उत्तर: भारत का स्विट्जरलैंड
- कटाओ बर्फ से ढका अत्यंत सुंदर पहाड़ी क्षेत्र है।
- लेखिका यहाँ घुटनों तक नरम बर्फ और चाँदी की तरह चमकते पहाड़ों का अनुभव करती हैं।
कटाओ की ऊँचाई लगभग कितनी बताई गई है?
- 8,000 फीट
- 10,000 फीट
- 12,000 फीट
- 14,000 फीट
Explanation:
- सही उत्तर: 14,000 फीट
- कटाओ को लगभग 14,000 फीट ऊँचा, बर्फ से ढका और दुर्गम स्थान बताया गया है।
- यहाँ तक पहुँचने का रास्ता संकरा, कठिन और जोखिमपूर्ण है।
सीमा पर तैनात एक फौजी ने लेखिका से क्या कहा?
- “यात्रा जल्दी समाप्त कीजिए।”
- “यहाँ बहुत ठंड है।”
- “आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।”
- “आप यहाँ दोबारा मत आइए।”
Explanation:
- सही उत्तर: “आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।”
- सीमा पर अत्यधिक ठंड में तैनात सैनिकों के त्याग और कर्तव्यबोध को लेखिका ने अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
- एक अन्य छावनी पर लिखा था—“वी गिव अवर टुडे फॉर योर टुमारो।”
सिक्किमी युवती ने अपनी पहचान के बारे में क्या कहा?
- “मैं नेपाली हूँ।”
- “मैं पहाड़ी हूँ।”
- “मैं सिक्किम की नागरिक हूँ।”
- “मैं सिक्किमी नहीं, भारतीय हूँ।”
Explanation:
- सही उत्तर: “मैं सिक्किमी नहीं, भारतीय हूँ।”
- यह कथन उसकी भारतीय राष्ट्रीय पहचान और राष्ट्र के प्रति जुड़ाव को व्यक्त करता है।
- लेखिका को इस कथन से विशेष प्रसन्नता होती है।
यूमथांग को पर्यटन-स्थल बनाने की पहल किसने की थी?
- जितेन नार्गे
- मधु कांकरिया
- बी.आर.ओ. के कर्मचारी ने
- कैप्टन शेखर दत्ता
Explanation:
- सही उत्तर: कैप्टन शेखर दत्ता
- जितेन लेखिका को बताता है कि कैप्टन शेखर दत्ता ने यूमथांग को पर्यटन-स्थल बनाने की पहल की थी।
- पहले यह क्षेत्र मुख्यतः सैनिकों के लिए ही जाना जाता था।
‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ में लेखिका के अनुसार मंज़िल से अधिक रोमांचक क्या है?
- मंज़िल पर पहुँचना
- बर्फबारी देखना
- मंज़िल तक का सफ़र
- होटल में रुकना
Explanation:
- सही उत्तर: मंज़िल तक का सफ़र
- लेखिका के लिए यात्रा केवल किसी स्थान तक पहुँचने का साधन नहीं है।
- रास्ते में मिलने वाले प्रकृति, मनुष्य, श्रम, संस्कृति और जीवन के अनुभव यात्रा को अधिक अर्थपूर्ण बनाते हैं।
- अंत में वह मनुष्य की इसी निरंतर खोज को सौंदर्य से जोड़ती हैं।
‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा’ कहानी के लेखक कौन हैं?
- फणीश्वर नाथ रेणु
- शिवप्रसाद मिश्र ‘रूद्र’
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- प्रेमचंद
Explanation:
- ‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा’ के रचनाकार शिवप्रसाद मिश्र ‘रूद्र’ हैं।
- कहानी में प्रेम, विरह, स्वतंत्रता-संग्राम, पुलिस-अत्याचार और अभिव्यक्ति पर नियंत्रण को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
कहानी की मुख्य नायिका कौन है?
- बिट्टो
- झींगुर की माँ
- दुलारी
- कौशल्या
Explanation:
- दुलारी कहानी की केंद्रीय स्त्री-पात्र और प्रसिद्ध कजली-गायिका है।
- वह बाहरी रूप से कर्कश और कठोर दिखाई देती है, लेकिन भीतर से अत्यंत संवेदनशील है।
टुन्नू किस रूप में कहानी में प्रस्तुत हुआ है?
- पुलिसकर्मी
- पहलवान
- व्यापारी
- युवा कवि और गायक
Explanation:
- टुन्नू कम उम्र का कवि और गायक है।
- वह दुलारी से गहरा, अव्यक्त प्रेम करता है और स्वतंत्रता-संग्राम से भी जुड़ता है।
दुलारी किस प्रकार की गायिका थी?
- ठुमरी गायिका
- कजली गायिका
- शास्त्रीय ध्रुपद गायिका
- भजन गायिका
Explanation:
- दुलारी एक प्रसिद्ध कजली-गायिका थी।
- कहानी में कजली-दंगल उसके गायन-कौशल और टुन्नू से पहली मुलाकात का महत्वपूर्ण प्रसंग है।
दुलारी और टुन्नू की पहली मुलाकात किस अवसर पर हुई थी?
- होली के अवसर पर
- दीपावली के अवसर पर
- तीज के अवसर पर आयोजित कजली-दंगल में
- गंगा-स्नान के अवसर पर
Explanation:
- तीज के अवसर पर खोजवाँ बाजार में कजली-दंगल आयोजित हुआ था।
- इसी गायन-प्रतियोगिता में दुलारी और टुन्नू की पहली महत्वपूर्ण मुलाकात हुई।
टुन्नू ने होली के अवसर पर दुलारी को क्या भेंट किया?
- मखमली साड़ी
- चाँदी की पायल
- फूलों की माला
- खद्दर की साड़ी
Explanation:
- टुन्नू दुलारी को खद्दर की साड़ी भेंट करता है।
- खद्दर यहाँ केवल प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वदेशी और राष्ट्रीय चेतना से भी जुड़ा हुआ है।
दुलारी ने टुन्नू की भेंट पर प्रारंभ में कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त की?
- उसने प्रसन्न होकर स्वीकार कर लिया।
- उसने उसे धन्यवाद दिया।
- उसने तीखी बातें कहकर भेंट ठुकरा दी।
- उसने भेंट वापस उसके घर भेज दी।
Explanation:
- दुलारी ने बाहरी रूप से कठोर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टुन्नू की भेंट ठुकरा दी।
- बाद में टुन्नू के आँसुओं को देखकर उसके भीतर छिपी संवेदना जाग उठती है।
टुन्नू के आँसू दुलारी को दी गई धोती पर किस रूप में दिखाई दिए?
- सफेद धब्बों के रूप में
- लाल निशानों के रूप में
- पीले दागों के रूप में
- काले-काले धब्बों के रूप में
Explanation:
- दुलारी द्वारा भेंट ठुकराने के बाद टुन्नू के आँसू धोती पर काले-काले धब्बे बना देते हैं।
- इन आँसुओं को देखकर दुलारी का कठोर हृदय पिघल जाता है।
दुलारी और टुन्नू के संबंध की सबसे प्रमुख विशेषता क्या थी?
- सामाजिक रूप से स्वीकृत विवाह
- व्यावसायिक साझेदारी
- गुरु-शिष्य संबंध
- अव्यक्त और विषम प्रेम
Explanation:
- दुलारी और टुन्नू के बीच उम्र और सामाजिक स्थिति में अंतर था।
- उनका प्रेम स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं होता, बल्कि गीत, आँसू और व्यवहार के माध्यम से प्रकट होता है।
दुलारी को टुन्नू के प्रेम में किस बात का अनुभव हुआ?
- वह केवल उसके धन से प्रभावित था।
- वह उसकी प्रसिद्धि चाहता था।
- टुन्नू उसके शरीर का नहीं, उसकी आत्मा का प्रेमी था।
- वह उससे बदला लेना चाहता था।
Explanation:
- दुलारी समझती है कि टुन्नू का प्रेम शारीरिक आकर्षण से अधिक आत्मिक है।
- यही कारण है कि टुन्नू की मृत्यु का समाचार उसे भीतर तक झकझोर देता है।
फेंकू सरदार की कहानी में क्या भूमिका है?
- टुन्नू का गुरु
- दुलारी का भाई
- अखबार का संपादक
- पुलिस का मुखबिर
Explanation:
- फेंकू सरदार पुलिस के लिए मुखबिरी करता है।
- दुलारी उसके व्यवहार और बेईमानी से नाराज रहती है तथा उसके प्रति कठोर व्यवहार करती है।
विदेशी वस्त्रों को जलाने वाले जुलूस को देखकर दुलारी ने क्या किया?
- वह घर के अंदर चली गई।
- उसने पुलिस को सूचना दी।
- उसने जुलूस का विरोध किया।
- उसने अपनी नई मखमली धोतियाँ चादर पर फेंक दीं।
Explanation:
- दुलारी विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी भावना का समर्थन करती है।
- उसकी यह कार्रवाई स्वतंत्रता-संग्राम के प्रति उसके अप्रत्यक्ष समर्थन को दर्शाती है।
टुन्नू की मृत्यु किस प्रकार हुई?
- बीमारी से
- नदी में डूबने से
- दुर्घटना में
- पुलिस-अत्याचार के कारण
Explanation:
- टुन्नू स्वतंत्रता-संग्राम के जुलूस में शामिल था।
- टाउन हॉल में पुलिस ने उसके साथ अत्याचार किया और बाद में उसका शव वरुणा नदी में बहा दिया गया।
टुन्नू का शव किस नदी में बहाया गया?
- गंगा
- गोमती
- वरुणा
- यमुना
Explanation:
- टुन्नू की मृत्यु के बाद उसके शव को वरुणा नदी में बहा दिया गया।
- वरुणा नदी कहानी के दुखांत और मार्मिक प्रसंग से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है।
दुलारी को किस सभा के समारोह में जबरन गाने के लिए लाया गया?
- कांग्रेस सभा
- स्वदेशी सभा
- अमन सभा
- कजली सभा
Explanation:
- टुन्नू की मृत्यु के बाद दुलारी को पुलिस-प्रायोजित अमन सभा के समारोह में गाने के लिए विवश किया गया।
- यह प्रसंग औपनिवेशिक सत्ता और सांस्कृतिक नियंत्रण पर व्यंग्य करता है।
दुलारी को समारोह में गाने के लिए किसने विवश किया?
- फेंकू सरदार
- झींगुर
- शर्मा जी
- अली सगीर
Explanation:
- अली सगीर कुख्यात जमादार और पुलिस-रिपोर्टर के रूप में कहानी में आता है।
- वह दुलारी को समारोह में गाने के लिए मजबूर करता है।
दुलारी ने अमन सभा में कौन-सा गीत गाया?
- “कोढ़ियल मुँहवैं लेब…”
- “रघुपति राघव राजा राम…”
- “वंदे मातरम्…”
- “एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा, कासों मैं पूछूँ?”
Explanation:
- यही गीत कहानी का शीर्षक भी है।
- इस गीत के माध्यम से दुलारी अपने विरह, टुन्नू की मृत्यु और पुलिस-अत्याचार के विरुद्ध अप्रत्यक्ष प्रतिरोध व्यक्त करती है।
‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा’ गीत में मुख्य भाव कौन-सा है?
- हास्य
- वीरता
- श्रृंगारिक उल्लास
- विरह, करुणा और व्यंग्य
Explanation:
- गीत में प्रिय के खो जाने का विरह और गहरा दुःख व्यक्त होता है।
- इसके साथ पुलिस-अत्याचार और सत्ता की क्रूरता पर व्यंग्य तथा प्रतिरोध भी दिखाई देता है।
कहानी में ‘खोजवाँ बाजार’ किस प्रसंग से संबंधित है?
- टुन्नू की मृत्यु
- अखबार की रिपोर्ट
- तीज के कजली-दंगल
- अमन सभा
Explanation:
- खोजवाँ बाजार में तीज के अवसर पर कजली-दंगल हुआ था।
- यहीं दुलारी और टुन्नू की पहली महत्वपूर्ण मुलाकात हुई थी।
टुन्नू की मृत्यु का समाचार दुलारी को कौन देता है?
- अली सगीर
- शर्मा जी
- फेंकू सरदार
- झींगुर
Explanation:
- झींगुर नौ वर्षीय बालक है जो दुलारी को टुन्नू की मृत्यु का समाचार सुनाता है।
- यह समाचार कहानी के भावनात्मक मोड़ को अत्यंत मार्मिक बना देता है।
एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! कहानी के अंत में संपादक ने दुलारी के गीत की रिपोर्ट के बारे में क्या कहा?
- “यह रिपोर्ट गलत है।”
- “इसे तुरंत प्रकाशित करो।”
- “इसमें कोई समाचार नहीं है।”
- “सत्य है, परंतु छप नहीं सकता।”
Explanation:
- संपादक रिपोर्ट को सत्य मानता है, लेकिन उसे प्रकाशित करने से मना करता है।
- यह कथन औपनिवेशिक शासन में प्रेस की विवशता, सेंसरशिप और सत्य को दबाने की व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य है।
‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ निबंध के लेखक कौन हैं?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- जैनेन्द्र कुमार
- अज्ञेय
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation:
- ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ अज्ञेय का आत्मचिंतनपरक निबंध है।
- इसमें लेखक ने लेखन के उद्देश्य, प्रेरणा और रचना-प्रक्रिया पर विचार किया है।
अज्ञेय के अनुसार लिखने का सच्चा कारण क्या है?
- धन कमाना
- प्रसिद्धि प्राप्त करना
- दूसरों की प्रशंसा पाना
- आंतरिक विवशता से मुक्ति पाना
Explanation:
- अज्ञेय के अनुसार लेखक भीतर की अनुभूति और विवशता को अभिव्यक्त करने के लिए लिखता है।
- लेखन आत्म-पहचान और आंतरिक मुक्ति का माध्यम बनता है।
सच्चा कृतिकार मुख्यतः किस प्रेरणा से लिखता है?
- आर्थिक आवश्यकता से
- प्रकाशक के दबाव से
- भीतरी प्रेरणा से
- संपादक के आग्रह से
Explanation:
- सच्चा कृतिकार अपने भीतर उत्पन्न प्रेरणा के कारण रचना करता है।
- बाहरी परिस्थितियाँ कभी-कभी केवल निमित्त बन सकती हैं।
अज्ञेय के अनुसार बाहरी दबाव के अंतर्गत कौन-सी बात लेखन का कारण बन सकती है?
- केवल पुरस्कार
- संपादक का आग्रह
- केवल पाठकों की प्रशंसा
- केवल साहित्यिक आलोचना
Explanation:
- संपादक का आग्रह, प्रकाशक का तकाजा और आर्थिक आवश्यकता बाहरी दबाव के उदाहरण हैं।
- हालाँकि सच्ची रचना के पीछे आंतरिक प्रेरणा अधिक महत्त्वपूर्ण होती है।
‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ निबंध का प्रमुख विषय क्या है?
- भारतीय राजनीति
- सामाजिक सुधार
- विज्ञान का विकास
- लेखन के उद्देश्य और रचना-प्रक्रिया का आत्मविश्लेषण
Explanation:
- यह निबंध लेखक के आत्मचिंतन पर आधारित है।
- इसमें लिखा गया है कि रचना किस प्रकार आंतरिक अनुभूति से जन्म लेती है।
अज्ञेय ने अपनी किस कविता के उदाहरण से अनुभव और अनुभूति का अंतर स्पष्ट किया है?
- नदी के द्वीप
- असाध्य वीणा
- हिरोशिमा
- कलगी बाजरे की
Explanation:
- अज्ञेय ने हिरोशिमा की घटना से संबंधित अपनी कविता के माध्यम से अनुभव और अनुभूति का अंतर समझाया है।
- हिरोशिमा की घटना उनके भीतर अनुभूति-प्रत्यक्ष के रूप में बाद में उभरी।
अज्ञेय विज्ञान के किस विषय से संबंधित विद्यार्थी रहे थे?
- जीवविज्ञान
- भूगोल
- रसायन विज्ञान
- विज्ञान के विद्यार्थी
Explanation:
- अज्ञेय विज्ञान के विद्यार्थी रहे थे।
- इसी कारण उन्हें अणु-बम और रेडियम-धर्मिता जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं का सैद्धांतिक ज्ञान था।
अज्ञेय को हिरोशिमा की घटना के बारे में प्रारंभ में किस प्रकार का ज्ञान था?
- केवल साहित्यिक ज्ञान
- सैद्धांतिक और ऐतिहासिक ज्ञान
- केवल प्रत्यक्ष अनुभव
- केवल राजनीतिक ज्ञान
Explanation:
- अज्ञेय को अणु-बम और हिरोशिमा की घटना के बारे में पहले से सैद्धांतिक तथा ऐतिहासिक जानकारी थी।
- लेकिन केवल जानकारी होने से वह घटना उनके भीतर कविता के रूप में अनुभूति नहीं बन सकी थी।
युद्धकाल में अज्ञेय ने ब्रह्मपुत्र में सैनिकों को क्या करते देखा था?
- नौका चलाते हुए
- मछलियों को पकड़कर पालते हुए
- बम से मछलियाँ मारते हुए
- नदी की सफाई करते हुए
Explanation:
- युद्धकाल में अज्ञेय ने सैनिकों द्वारा ब्रह्मपुत्र में बम से मछलियों को मारते देखा था।
- इस अनुभव ने जीव-नाश की भावना से उन्हें जोड़ा।
अज्ञेय ने हिरोशिमा में किस स्थान को देखा था?
- राजमहल
- युद्ध संग्रहालय
- अस्पताल
- विश्वविद्यालय
Explanation:
- अज्ञेय जापान गए और उन्होंने हिरोशिमा का अस्पताल भी देखा।
- फिर भी उस समय तक हिरोशिमा की घटना उनके भीतर पूर्ण अनुभूति के रूप में नहीं आई थी।
अनुभव और अनुभूति में अज्ञेय ने क्या अंतर बताया है?
- दोनों में कोई अंतर नहीं है
- अनुभव केवल कल्पना है
- अनुभूति संवेदना और कल्पना के माध्यम से सत्य को आत्मसात करती है
- अनुभूति केवल वैज्ञानिक ज्ञान है
Explanation:
- अनुभव किसी घटित घटना से प्राप्त जानकारी या प्रत्यक्षता हो सकता है।
- अनुभूति उस सत्य को संवेदना और कल्पना के माध्यम से भीतर आत्मसात करने की प्रक्रिया है।
हिरोशिमा की सड़क पर अज्ञेय ने ऐसी कौन-सी चीज देखी जिसने उन्हें भीतर से झकझोर दिया?
- टूटी हुई इमारत
- जली हुई पुस्तक
- जले हुए पत्थर पर उजली छाया
- एक पुराना अस्पताल
Explanation:
- अज्ञेय ने हिरोशिमा की सड़क पर जले हुए पत्थर पर एक उजली छाया देखी।
- वह छाया अणु-विस्फोट के समय वहाँ मौजूद व्यक्ति की थी।
- इस दृश्य ने हिरोशिमा की त्रासदी को उनके भीतर अनुभूति-प्रत्यक्ष बना दिया।
जले हुए पत्थर पर अंकित छाया किस घटना की भयावहता का प्रतीक थी?
- युद्ध में हुई आर्थिक क्षति
- प्राकृतिक आपदा
- अणु-बम विस्फोट
- राजनीतिक संघर्ष
Explanation:
- अणु-बम विस्फोट की तीव्र किरणों से वहाँ उपस्थित व्यक्ति भाप बनकर उड़ गया और उसकी छाया पत्थर पर अंकित रह गई।
- यह दृश्य अज्ञेय के लिए पूरी हिरोशिमा त्रासदी का प्रतीक बन गया।
हिरोशिमा की छाया देखने के बाद अज्ञेय के भीतर क्या जागृत हुआ?
- वैज्ञानिक जिज्ञासा
- यात्रा की इच्छा
- आंतरिक विवशता और अनुभूति
- राजनीतिक क्रोध
Explanation:
- जले हुए पत्थर पर छाया देखने के बाद हिरोशिमा का अनुभव उनके भीतर अनुभूति-प्रत्यक्ष बन गया।
- इसी आंतरिक विवशता ने उन्हें कविता लिखने के लिए प्रेरित किया।
अज्ञेय ने हिरोशिमा पर कविता कब लिखी?
- हिरोशिमा पहुँचते ही
- अस्पताल देखने के तुरंत बाद
- युद्ध समाप्त होते ही
- बाद में रेलगाड़ी में बैठे-बैठे
Explanation:
- हिरोशिमा का अनुभव तुरंत कविता में परिवर्तित नहीं हुआ।
- अनुभूति के भीतर पकने के बाद एक दिन रेलगाड़ी में बैठे-बैठे उन्होंने हिरोशिमा पर कविता लिखी।
अज्ञेय के अनुसार बाहरी दबाव किस रूप में कार्य कर सकता है?
- अंतिम उद्देश्य के रूप में
- निमित्त के रूप में
- साहित्य का नियम बनकर
- रचना की गुणवत्ता बनकर
Explanation:
- बाहरी दबाव कभी-कभी रचना के लिए केवल निमित्त बन सकता है।
- उसके पीछे लेखक की भीतरी प्रेरणा और उन्मेष सक्रिय हो सकता है।
निबंध में ‘घड़ी का अलार्म’ किसका उदाहरण है?
- आंतरिक अनुभूति का
- वैज्ञानिक प्रयोग का
- बाहरी दबाव या निमित्त का
- साहित्यिक पुरस्कार का
Explanation:
- घड़ी का अलार्म बाहरी संकेत या दबाव का उदाहरण है।
- यह बाहरी कारण किसी कार्य को आरंभ करने का निमित्त बन सकता है।
अज्ञेय के अनुसार सच्ची रचना किससे उत्पन्न होती है?
- केवल आर्थिक आवश्यकता से
- केवल पाठकों की माँग से
- केवल संपादकीय आदेश से
- भीतरी उन्मेष और अनुभूति से
Explanation:
- सच्ची रचना लेखक के भीतर उत्पन्न उन्मेष और अनुभूति से जन्म लेती है।
- बाहरी परिस्थितियाँ उसके लिए केवल माध्यम या निमित्त बन सकती हैं।
अज्ञेय के लिए उनकी ‘हिरोशिमा’ कविता की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता क्या थी?
- उसकी लोकप्रियता
- उसकी लंबाई
- उसका पुरस्कार प्राप्त करना
- उसका अनुभूति-प्रसूत और सत्य होना
Explanation:
- अज्ञेय के लिए कविता अच्छी या बुरी होने से अधिक महत्त्वपूर्ण उसका अनुभूति से उत्पन्न होना है।
- उनके लिए वह कविता इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि वह उनके लिए सत्य है।
‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ निबंध के अनुसार लेखन का अंतिम उद्देश्य क्या माना जा सकता है?
- धन और प्रसिद्धि
- साहित्यिक पुरस्कार
- पाठकों का मनोरंजन
- आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक मुक्ति
Explanation:
- अज्ञेय के अनुसार लेखन स्वयं को जानने और भीतर की अनुभूति को पहचानने का माध्यम है।
- लेखन के द्वारा व्यक्ति आंतरिक विवशता से मुक्ति प्राप्त करता है।
‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ निबंध का स्वर मुख्यतः कैसा है?
- हास्यात्मक
- व्यंग्यात्मक
- आत्मचिंतनपरक
- ऐतिहासिक
Explanation:
- निबंध में अज्ञेय अपने लेखन के कारणों और रचना-प्रक्रिया का स्वयं विश्लेषण करते हैं।
- इसलिए इसका स्वर आत्मचिंतनपरक है।
