Hindi
स्वयं प्रकाश का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1945
- 1947
- 1950
- 1952
Explanation:
- स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में हुआ था।
- उनका जन्म इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था।
स्वयं प्रकाश का जन्म कहाँ हुआ था?
- भोपाल
- जयपुर
- इंदौर
- उज्जैन
Explanation:
- स्वयं प्रकाश का जन्म इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था।
- उनका बचपन और नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता।
स्वयं प्रकाश ने किस विषय में पढ़ाई की थी?
- सिविल इंजीनियरिंग
- साहित्य
- इतिहास
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग
Explanation:
- स्वयं प्रकाश ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।
- इसके बाद उन्होंने एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी की।
स्वयं प्रकाश का बचपन और नौकरी का बड़ा हिस्सा किस राज्य में बीता?
- मध्यप्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- गुजरात
Explanation:
- स्वयं प्रकाश का बचपन और नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता।
- उनका साहित्यिक जीवन भी राजस्थान से जुड़ा रहा।
स्वयं प्रकाश किस पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे?
- हंस
- पहल
- वसुधा
- तद्भव
Explanation:
- स्वयं प्रकाश वसुधा पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे।
- वसुधा हिंदी की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं में रही है।
स्वयं प्रकाश हिंदी कहानी के किस दौर में उभरे?
- छठे दशक
- सातवें दशक
- आठवें दशक
- नवें दशक
Explanation:
- आठवें दशक में उभरे स्वयं प्रकाश समकालीन कहानी के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर माने जाते हैं।
- उनकी कहानियों में सामाजिक जीवन की समस्याओं का चित्रण मिलता है।
स्वयं प्रकाश की कहानियों की प्रमुख शैली क्या है?
- आत्मकथात्मक शैली
- पत्रात्मक शैली
- काव्यात्मक शैली
- किस्सागोई शैली
Explanation:
- स्वयं प्रकाश की कहानियाँ रोचक किस्सागोई शैली में लिखी गई हैं।
- उनकी शैली हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती है।
स्वयं प्रकाश की कहानियों में किसके विरुद्ध चेतना दिखाई देती है?
- प्राकृतिक जीवन के विरुद्ध
- वर्ग-शोषण के विरुद्ध
- शिक्षा के विरुद्ध
- विज्ञान के विरुद्ध
Explanation:
- स्वयं प्रकाश की कहानियों में वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना दिखाई देती है।
- वे सामाजिक असमानताओं और शोषण के प्रश्नों को कहानी के माध्यम से सामने रखते हैं।
स्वयं प्रकाश की कहानियाँ किन सामाजिक भेदभावों के खिलाफ प्रतिकार का स्वर प्रस्तुत करती हैं?
- केवल आर्थिक भेदभाव
- केवल भाषाई भेदभाव
- जाति, संप्रदाय और लिंग आधारित भेदभाव
- केवल क्षेत्रीय भेदभाव
Explanation:
- उनकी कहानियों में जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ प्रतिकार का स्वर मिलता है।
- इस कारण उनका साहित्य सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ा है।
निम्नलिखित में से कौन-सा स्वयं प्रकाश का कहानी-संग्रह है?
- मैला आँचल
- राग दरबारी
- सूरज कब निकलेगा
- गोदान
Explanation:
- सूरज कब निकलेगा स्वयं प्रकाश के उल्लेखनीय कहानी-संग्रहों में शामिल है।
- उनके अन्य चर्चित संग्रहों में आएँगे अच्छे दिन भी, आदमी जात का आदमी और संधान शामिल हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा स्वयं प्रकाश का कहानी-संग्रह है?
- आएँगे अच्छे दिन भी
- पूस की रात
- परिंदे
- उसने कहा था
Explanation:
- आएँगे अच्छे दिन भी स्वयं प्रकाश का उल्लेखनीय कहानी-संग्रह है।
- यह उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों में गिना जाता है।
स्वयं प्रकाश के किस कहानी-संग्रह का नाम ‘आदमी जात का आदमी’ है?
- यह उनका उपन्यास है
- यह उनकी कविता है
- यह उनका कहानी-संग्रह है
- यह उनकी आत्मकथा है
Explanation:
- आदमी जात का आदमी स्वयं प्रकाश के उल्लेखनीय कहानी-संग्रहों में शामिल है।
- स्वयं प्रकाश ने तेरह कहानी-संग्रह प्रकाशित किए थे।
स्वयं प्रकाश के किस उपन्यास का उल्लेख उनकी प्रमुख कृतियों में किया गया है?
- गोदान
- कामायनी
- ईंधन
- गबन
Explanation:
- ईंधन स्वयं प्रकाश का चर्चित उपन्यास है।
- उनकी साहित्यिक पहचान मुख्यतः कहानीकार के रूप में रही।
स्वयं प्रकाश को निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मान प्राप्त हुआ था?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- पहल सम्मान
- भारत रत्न
- साहित्य अकादमी फैलोशिप
Explanation:
- स्वयं प्रकाश को पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार और राजस्थान साहित्य अकादेमी पुरस्कार आदि प्राप्त हुए थे।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी में कैप्टन चश्मे वाला किस बात को रेखांकित करता है?
- केवल सैनिकों के योगदान को
- केवल नेताओं के योगदान को
- देश के सामान्य नागरिकों के योगदान को
- केवल कलाकारों के योगदान को
Explanation:
- कैप्टन चश्मे वाला देश के करोड़ों नागरिकों के योगदान का प्रतीक बनकर सामने आता है।
- कहानी बताती है कि देश निर्माण में सामान्य नागरिक भी अपने-अपने तरीके से योगदान करते हैं।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के अनुसार देश केवल किससे नहीं बनता?
- नागरिकों से
- प्रकृति से
- पशु-पक्षियों से
- केवल चारों ओर की सीमाओं से घिरे भूभाग से
Explanation:
- कहानी के अनुसार चारों ओर सीमाओं से घिरे भूभाग का नाम ही देश नहीं होता।
- देश उसमें रहने वाले नागरिकों और प्रकृति के विभिन्न घटकों से मिलकर बनता है।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के अनुसार देशभक्ति का वास्तविक अर्थ क्या है?
- केवल देश की सीमाओं की रक्षा करना
- केवल राष्ट्रीय पर्व मनाना
- देश के नागरिकों, प्रकृति और सभी जीव-जगत से प्रेम तथा उनकी समृद्धि के लिए प्रयास करना
- केवल सरकारी संस्थाओं का सम्मान करना
Explanation:
- कहानी देशभक्ति को व्यापक अर्थ में प्रस्तुत करती है।
- नागरिकों, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों और पशु-पक्षियों से प्रेम करना तथा उनकी समृद्धि के लिए प्रयास करना देशभक्ति का हिस्सा है।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
- केवल बड़े लोगों का योगदान महत्त्वपूर्ण है
- देश का विकास केवल सरकार करती है
- देश निर्माण में सामान्य नागरिकों और बच्चों का भी योगदान महत्त्वपूर्ण है
- देश निर्माण केवल सैनिकों का कार्य है
Explanation:
- कहानी देश निर्माण में सामान्य नागरिकों की भूमिका को सामने लाती है।
- कहानी यह भी बताती है कि बड़े लोगों के साथ बच्चे भी देश के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
‘नेताजी का चश्मा’ के लेखक कौन हैं?
- फणीश्वरनाथ रेणु
- मनोहर श्याम जोशी
- रघुवीर सहाय
- स्वयं प्रकाश
Explanation:
- ‘नेताजी का चश्मा’ के लेखक स्वयं प्रकाश हैं।
- वे समकालीन हिंदी कहानी के महत्त्वपूर्ण कहानीकार हैं।
स्वयं प्रकाश का निधन किस वर्ष हुआ?
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
Explanation:
- स्वयं प्रकाश का निधन सन् 2019 में हुआ था।
- उनका साहित्य सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदना के लिए जाना जाता है।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के लेखक कौन हैं?
- प्रेमचंद
- हरिशंकर परसाई
- स्वयं प्रकाश
- फणीश्वर नाथ रेणु
Explanation:
- ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश हैं।
- स्वयं प्रकाश हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार हैं।
- कहानी में सामान्य व्यक्ति की देशभक्ति, संवेदनशीलता और मानवीय भावनाओं को प्रमुखता दी गई है।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का प्रमुख केंद्र क्या है?
- एक विद्यालय
- एक रेलवे स्टेशन
- नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा और उस पर लगे चश्मे
- एक बाजार
Explanation:
- कहानी का केंद्र कस्बे के मुख्य चौराहे पर लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा है।
- प्रतिमा पर बदलते हुए चश्मे कहानी की घटनाओं को आगे बढ़ाते हैं।
- चश्मा कैप्टन की नेताजी के प्रति श्रद्धा और देशभक्ति का प्रतीक बन जाता है।
हालदार साहब कितने अंतराल पर उस कस्बे से गुजरते थे?
- हर सप्ताह
- हर पंद्रहवें दिन
- हर महीने
- हर तीन महीने में
Explanation:
- हालदार साहब कंपनी के काम से हर पंद्रहवें दिन उस कस्बे से गुजरते थे।
- इसी नियमित यात्रा के कारण वे नेताजी की प्रतिमा में होने वाले परिवर्तनों को लगातार देख पाते हैं।
नेताजी की प्रतिमा कहाँ स्थापित थी?
- विद्यालय के मैदान में
- रेलवे स्टेशन के सामने
- कस्बे के मुख्य चौराहे पर
- नगरपालिका भवन में
Explanation:
- नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा कस्बे के मुख्य चौराहे पर लगी थी।
- यह चौराहा कहानी में हालदार साहब, पानवाले और कैप्टन से जुड़ी घटनाओं का प्रमुख स्थान है।
नेताजी की प्रतिमा किसने बनाई थी?
- कैप्टन ने
- पानवाले ने
- मास्टर मोतीलाल ने
- नगरपालिका के अधिकारी ने
Explanation:
- नेताजी की प्रतिमा स्थानीय हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल ने बनाई थी।
- वे उस विद्यालय के इकलौते ड्राइंग मास्टर थे।
प्रतिमा पर चश्मे को लेकर क्या विशेष बात थी?
- प्रतिमा पर कभी चश्मा नहीं लगाया जाता था
- चश्मा सोने का बना था
- प्रतिमा पर असली चश्मा लगाया जाता था और वह बदलता रहता था
- चश्मा केवल त्योहारों पर लगाया जाता था
Explanation:
- प्रतिमा पर पत्थर का चश्मा नहीं बना था।
- कैप्टन उपलब्ध असली चश्मों में से एक चश्मा नेताजी की प्रतिमा को पहना देता था।
- ग्राहक के माँगने पर वह चश्मा उतारकर बेच देता और दूसरा चश्मा प्रतिमा पर लगा देता था।
हालदार साहब को प्रतिमा पर बदलते हुए चश्मे देखकर क्या हुआ?
- वे नाराज़ हो गए
- उन्होंने इसे मजाक समझा
- उनमें कौतूहल उत्पन्न हुआ
- उन्होंने प्रतिमा को हटाने की माँग की
Explanation:
- हर बार अलग प्रकार का चश्मा देखकर हालदार साहब के मन में कौतूहल उत्पन्न हुआ।
- उन्होंने पानवाले से इस रहस्य के बारे में जानकारी प्राप्त की।
नेताजी की प्रतिमा पर चश्मा कौन लगाता था?
- हालदार साहब
- मास्टर मोतीलाल
- पानवाला
- कैप्टन चश्मेवाला
Explanation:
- प्रतिमा पर चश्मा लगाने वाला कैप्टन चश्मेवाला था।
- वह एक बूढ़ा, लँगड़ा और मरियल-सा फेरीवाला था।
- उसका यह कार्य नेताजी के प्रति उसकी श्रद्धा और देशभक्ति को दर्शाता है।
कैप्टन का मुख्य व्यवसाय क्या था?
- पान बेचना
- मूर्ति बनाना
- चश्मे बेचना
- कपड़े बेचना
Explanation:
- कैप्टन एक चश्मे बेचने वाला फेरीवाला था।
- वह अपनी दुकान पर उपलब्ध चश्मों में से कोई एक चश्मा नेताजी की प्रतिमा को पहना देता था।
पानवाला कैप्टन को किस रूप में देखता था?
- बहुत बड़ा देशभक्त
- नगरपालिका का कर्मचारी
- पागल
- मूर्ति कलाकार
Explanation:
- पानवाला कैप्टन की भावना को समझ नहीं पाता था और उसे ‘पागल’ कहकर उसकी बात को हल्के में लेता था।
- इसके विपरीत हालदार साहब धीरे-धीरे कैप्टन की संवेदनशीलता और देशभक्ति को समझने लगते हैं।
मास्टर मोतीलाल से संबंधित सही कथन कौन-सा है?
- वे पान की दुकान चलाते थे
- वे कैप्टन के सहायक थे
- वे स्थानीय हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर थे
- वे हालदार साहब के ड्राइवर थे
Explanation:
- मास्टर मोतीलाल स्थानीय हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर थे।
- उन्होंने नेताजी की प्रतिमा बनाई थी।
- प्रतिमा में पत्थर का चश्मा न होने के कारण कैप्टन ने चश्मा लगाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
नेताजी की प्रतिमा पर मूल रूप से किस प्रकार का चश्मा नहीं था?
- काँच का
- धूप का
- पत्थर का
- धातु का
Explanation:
- मूर्ति बनाते समय पत्थर का चश्मा नहीं बनाया गया था।
- यही कमी कैप्टन को प्रतिमा पर असली चश्मा लगाने के लिए प्रेरित करती है।
कैप्टन नेताजी की प्रतिमा पर चश्मा क्यों लगाता था?
- चश्मे बेचने के लिए विज्ञापन करने हेतु
- पैसे कमाने के लिए
- नेताजी के प्रति श्रद्धा और सम्मान के कारण
- पानवाले को परेशान करने के लिए
Explanation:
- कैप्टन के लिए नेताजी केवल पत्थर की प्रतिमा नहीं थे।
- वह उनके प्रति गहरी श्रद्धा और देशभक्ति रखता था।
- प्रतिमा पर चश्मा लगाना उसके भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक था।
कैप्टन की मृत्यु के बाद प्रतिमा की आँखों पर क्या दिखाई दिया?
- सोने का चश्मा
- कोई चश्मा नहीं
- सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा
- काले काँच का चश्मा
Explanation:
- कैप्टन की मृत्यु के बाद एक समय प्रतिमा पर कोई चश्मा नहीं था।
- बाद में हालदार साहब ने प्रतिमा की आँखों पर सरकंडे का बना छोटा-सा चश्मा देखा।
- यह दृश्य कहानी के सबसे मार्मिक क्षणों में से एक है।
कैप्टन की मृत्यु की सूचना हालदार साहब को किसने दी?
- ड्राइवर ने
- मास्टर मोतीलाल ने
- पानवाले ने
- नगरपालिका अधिकारी ने
Explanation:
- जब हालदार साहब ने प्रतिमा पर चश्मा नहीं देखा, तब उन्होंने पानवाले से कारण पूछा।
- पानवाले ने बताया कि कैप्टन मर गया।
- यह सुनकर हालदार साहब बहुत दुखी हुए।
हालदार साहब को कैप्टन की मृत्यु का समाचार सुनकर कैसा लगा?
- वे प्रसन्न हुए
- उन्हें कोई प्रभाव नहीं पड़ा
- वे बहुत दुखी और भावुक हो गए
- वे पानवाले से झगड़ने लगे
Explanation:
- कैप्टन की देशभक्ति और संवेदनशीलता से हालदार साहब पहले ही प्रभावित हो चुके थे।
- उसकी मृत्यु का समाचार सुनकर वे बहुत दुखी हुए।
- बाद में सरकंडे का चश्मा देखकर उनकी आँखें भीग गईं।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी में चश्मा किसका प्रतीक माना जा सकता है?
- धन और संपत्ति का
- व्यापार का
- श्रद्धा, देशभक्ति और संवेदनशीलता का
- राजनीतिक सत्ता का
Explanation:
- कहानी में चश्मा केवल प्रतिमा की सजावट नहीं है।
- यह कैप्टन की नेताजी के प्रति श्रद्धा, देशभक्ति और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन जाता है।
- कैप्टन की मृत्यु के बाद भी चश्मे का बने रहना उसके भाव की निरंतरता को दर्शाता है।
कहानी में हालदार साहब किस प्रकार के पात्र हैं?
- मुख्य विरोधी पात्र
- व्यापारी पात्र
- दृष्टा और संवेदनशील पात्र
- हास्य पात्र
Explanation:
- हालदार साहब कहानी की घटनाओं को देखते और समझते हैं।
- वे कैप्टन के कार्य के पीछे छिपी भावना और देशभक्ति को पहचानते हैं।
- इसलिए वे कहानी के संवेदनशील दृष्टा के रूप में सामने आते हैं।
कहानी में कैप्टन का चरित्र किस भावना को सबसे अधिक व्यक्त करता है?
- स्वार्थ
- लोभ
- निस्वार्थ देशभक्ति
- ईर्ष्या
Explanation:
- कैप्टन आर्थिक रूप से साधारण व्यक्ति होते हुए भी नेताजी की प्रतिमा पर चश्मा लगाता है।
- उसका यह कार्य किसी व्यक्तिगत लाभ के बजाय निस्वार्थ श्रद्धा और देशभक्ति से प्रेरित है।
- इसी कारण वह कहानी का अत्यंत महत्वपूर्ण पात्र बन जाता है।
‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
- धनवान व्यक्ति ही देश की सेवा कर सकता है
- व्यापार ही सबसे बड़ा धर्म है
- सच्ची देशभक्ति और मानवीय संवेदना साधारण व्यक्ति में भी जीवित रहती है
- मूर्तियों का निर्माण आवश्यक नहीं है
Explanation:
- कहानी दिखाती है कि देशभक्ति केवल बड़े पदों या प्रसिद्ध व्यक्तियों तक सीमित नहीं है।
- एक साधारण चश्मेवाला भी अपने छोटे-से कार्य के माध्यम से गहरी श्रद्धा और देशप्रेम व्यक्त कर सकता है।
- कैप्टन की मृत्यु के बाद भी चश्मे का दिखाई देना इस भावना के जीवित रहने का प्रतीक है।
‘बालगोबिन भगत’ के लेखक कौन हैं?
- मुंशी प्रेमचंद
- फणीश्वर नाथ रेणु
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation:
- ‘बालगोबिन भगत’ के लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी हैं।
- वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी थे।
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म किस राज्य में हुआ था?
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- झारखंड
- बिहार
Explanation:
- रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म बिहार में हुआ था।
- उनका जन्म मुजफ़्फ़रपुर जिले के बेनीपुर गाँव में हुआ था।
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म किस गाँव में हुआ था?
- सोनपुर
- बेनीपुर
- मधुबनी
- दरभंगा
Explanation:
- उनका जन्म बिहार के मुजफ़्फ़रपुर जिले के बेनीपुर गाँव में हुआ था।
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1895
- 1901
- 1899
- 1905
Explanation:
- रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म सन् 1899 में हुआ था।
बालगोबिन भगत किस गद्य विधा की रचना है?
- कहानी
- संस्मरण
- उपन्यास
- रेखाचित्र
Explanation:
- ‘बालगोबिन भगत’ एक रेखाचित्र है।
- रेखाचित्र के माध्यम से लेखक ने बालगोबिन भगत के विलक्षण व्यक्तित्व और ग्रामीण जीवन का सजीव चित्र प्रस्तुत किया है।
‘बालगोबिन भगत’ में किस प्रकार के चरित्र का उद्घाटन किया गया है?
- राजनीतिक नेता का
- शहरी व्यापारी का
- विलक्षण मानवीय चरित्र का
- सैनिक का
Explanation:
- बालगोबिन भगत के माध्यम से एक ऐसे विलक्षण चरित्र को प्रस्तुत किया गया है जो मनुष्यता, लोक संस्कृति और सामूहिक चेतना का प्रतीक है।
बालगोबिन भगत किसका प्रतीक माने गए हैं?
- धन और संपत्ति का
- राजसत्ता का
- मनुष्यता, लोक संस्कृति और सामूहिक चेतना का
- औद्योगिक विकास का
Explanation:
- बालगोबिन भगत का चरित्र मानवीय संवेदना और लोकजीवन की सामूहिक चेतना को अभिव्यक्त करता है।
लेखक के अनुसार संन्यासी होने का आधार क्या है?
- विशेष वेशभूषा
- बाहरी अनुष्ठान
- जंगल में रहना
- जीवन के मानवीय सरोकार
Explanation:
- पाठ में बताया गया है कि केवल वेशभूषा या बाह्य अनुष्ठानों से कोई संन्यासी नहीं होता।
- संन्यास का वास्तविक आधार मानवीय सरोकार और जीवन के प्रति संवेदनशील दृष्टि है।
बालगोबिन भगत लेखक को किस रूप में दिखाई देते हैं?
- साधारण किसान
- राजनेता
- संन्यासी
- व्यापारी
Explanation:
- बालगोबिन भगत के जीवन में मानवीय सरोकारों और त्याग की भावना के कारण लेखक उन्हें संन्यासी के रूप में देखते हैं।
‘बालगोबिन भगत’ पाठ में किस पर प्रहार किया गया है?
- औद्योगीकरण पर
- शहरी जीवन पर
- सामाजिक रूढ़ियों पर
- वैज्ञानिक विकास पर
Explanation:
- पाठ सामाजिक रूढ़ियों और बाहरी आडंबरों पर प्रश्न उठाता है।
- बालगोबिन भगत का चरित्र मानवीय मूल्यों को रूढ़िगत सोच से ऊपर रखता है।
‘बालगोबिन भगत’ की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
- ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत वर्णन
- शहरी संस्कृति का चित्रण
- ग्रामीण जीवन की सजीव झाँकी
- राजनीतिक घटनाओं का वर्णन
Explanation:
- इस रेखाचित्र में बालगोबिन भगत के माध्यम से ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति और लोक चेतना की सजीव झाँकी प्रस्तुत की गई है।
रामवृक्ष बेनीपुरी ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से कब भाग लिया?
- 1915
- 1920
- 1930
- 1942
Explanation:
- दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे सन् 1920 में राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए।
- स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
रामवृक्ष बेनीपुरी ने कितनी कक्षा तक औपचारिक शिक्षा प्राप्त की थी?
- आठवीं तक
- बारहवीं तक
- दसवीं तक
- स्नातक तक
Explanation:
- रामवृक्ष बेनीपुरी ने दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त की थी।
- इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए।
रामवृक्ष बेनीपुरी की रचनाएँ कितनी वर्ष की अवस्था में पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी थीं?
- 10 वर्ष
- 12 वर्ष
- 15 वर्ष
- 18 वर्ष
Explanation:
- लगभग 15 वर्ष की अवस्था में ही बेनीपुरी जी की रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी थीं।
रामवृक्ष बेनीपुरी को किस उपनाम से जाना जाता है?
- राष्ट्रकवि
- कलम के सिपाही
- कलम का जादूगर
- कथा सम्राट
Explanation:
- उनकी विशिष्ट लेखन शैली और प्रभावशाली अभिव्यक्ति के कारण उन्हें ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है।
बेनीपुरी रचनावली कितने खंडों में प्रकाशित हुई है?
- चार खंड
- छह खंड
- आठ खंड
- दस खंड
Explanation:
- रामवृक्ष बेनीपुरी का पूरा साहित्य ‘बेनीपुरी रचनावली’ के आठ खंडों में प्रकाशित हुआ है।
‘माटी की मूरतें’ रामवृक्ष बेनीपुरी की किस विधा की रचना है?
- उपन्यास
- कहानी
- रेखाचित्र
- नाटक
Explanation:
- ‘माटी की मूरतें’ बेनीपुरी जी की प्रसिद्ध रेखाचित्र रचना है।
- ‘बालगोबिन भगत’ भी रेखाचित्र विधा से संबंधित है।
‘अंबपाली’ रामवृक्ष बेनीपुरी की किस विधा की रचना है?
- उपन्यास
- नाटक
- संस्मरण
- यात्रा-वृत्तांत
Explanation:
- ‘अंबपाली’ रामवृक्ष बेनीपुरी का नाटक है।
- उनका साहित्य गद्य की अनेक विधाओं में फैला हुआ है।
‘पैरों में पंख बाँधकर’ किस विधा की रचना है?
- कहानी
- उपन्यास
- संस्मरण
- यात्रा-वृत्तांत
Explanation:
- ‘पैरों में पंख बाँधकर’ रामवृक्ष बेनीपुरी का यात्रा-वृत्तांत है।
‘ज़ंजीरें और दीवारें’ रामवृक्ष बेनीपुरी की किस विधा की रचना है?
- नाटक
- उपन्यास
- संस्मरण
- रेखाचित्र
Explanation:
- ‘ज़ंजीरें और दीवारें’ बेनीपुरी जी की संस्मरणात्मक रचना है।
रामवृक्ष बेनीपुरी की रचनाओं में प्रमुख रूप से किन भावों की अभिव्यक्ति मिलती है?
- केवल प्रेम और सौंदर्य
- केवल हास्य और व्यंग्य
- स्वाधीनता की चेतना, मनुष्यता की चिंता और इतिहास की युगानुरूप व्याख्या
- केवल धार्मिक आस्था
Explanation:
- बेनीपुरी के साहित्य में स्वाधीनता की चेतना, मनुष्यता के प्रति चिंता और इतिहास की युगानुरूप व्याख्या प्रमुख है।
- ‘बालगोबिन भगत’ में भी मानवीय मूल्यों और लोक संस्कृति को विशेष महत्व दिया गया है।
‘बालगोबिन भगत’ के लेखक कौन हैं?
- फणीश्वर नाथ रेणु
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- प्रेमचंद
Explanation:
- ‘बालगोबिन भगत’ रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्मरणात्मक रेखाचित्र है।
- इसमें बालगोबिन भगत के व्यक्तित्व, जीवन-दर्शन, संगीत-साधना और कबीर-भक्ति का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
बालगोबिन भगत किस संत के अनुयायी थे?
- तुलसीदास
- सूरदास
- गुरु नानक
- कबीर
Explanation:
- बालगोबिन भगत कबीर के अनुयायी थे और कबीर को अपना ‘साहब’ मानते थे।
- वे कबीर के पदों को गाते और उनके विचारों के अनुसार अपना जीवन जीते थे।
बालगोबिन भगत का जीवन किस प्रकार का था?
- पूर्णतः संन्यासी
- राजसी जीवन
- गृहस्थ होते हुए भी साधु जैसा
- व्यापारी जीवन
Explanation:
- बालगोबिन भगत गृहस्थ थे; उनके पास पत्नी, बेटा, बहू, मकान और खेती थी।
- फिर भी उनके आचरण, सत्यनिष्ठा और आध्यात्मिक जीवन के कारण उन्हें गृहस्थ-साधु कहा जा सकता है।
बालगोबिन भगत की सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक क्या थी?
- कुश्ती लड़ना
- चित्रकारी करना
- व्यापार करना
- मधुर गान करना
Explanation:
- बालगोबिन भगत अत्यंत मधुर स्वर में कबीर के पद गाते थे।
- उनके गीतों का प्रभाव बच्चों, स्त्रियों और किसानों तक पर पड़ता था।
बालगोबिन भगत अपनी उपज का पहला हिस्सा कहाँ भेंट करते थे?
- गाँव के मंदिर में
- राजा के दरबार में
- कबीरपंथी मठ में
- गंगा में
Explanation:
- वे अपनी खेती की उपज का पहला हिस्सा कबीरपंथी मठ में ‘भेंट’ के रूप में देते थे।
- मठ से प्राप्त अन्न को वे ‘प्रसाद’ मानकर उसका उपयोग करते थे।
बालगोबिन भगत दूसरे के खेत में शौच करने से भी क्यों बचते थे?
- उन्हें खेतों से डर लगता था
- वे खेतों में जाना पसंद नहीं करते थे
- वे किसी दूसरे की वस्तु का उपयोग नहीं करना चाहते थे
- उन्हें बीमारी थी
Explanation:
- उनकी साधुता और सत्यनिष्ठा अत्यंत सूक्ष्म थी।
- वे दूसरे की वस्तु या भूमि पर अपना अधिकार नहीं मानते थे और किसी की चीज़ छूने से भी बचते थे।
बालगोबिन भगत किस वाद्य यंत्र का प्रयोग करके गाते थे?
- ढोलक
- बाँसुरी
- मंजीरा
- खँजड़ी
Explanation:
- बालगोबिन भगत खँजड़ी बजाते हुए कबीर के पद और अन्य गीत गाते थे।
- खँजड़ी उनके संगीत और भक्ति-साधना का प्रमुख साधन थी।
बालगोबिन भगत भादो की अँधेरी रात में क्या करते थे?
- खेती की रखवाली करते थे
- कथा सुनाते थे
- खँजड़ी लेकर गाते थे
- गंगा-स्नान करते थे
Explanation:
- भादो की अँधेरी अधरतिया में भी उनकी संगीत-साधना जारी रहती थी।
- वे खँजड़ी बजाते हुए कबीर के पदों का गायन करते थे।
बालगोबिन भगत की प्रभातियाँ मुख्यतः किस समय गाई जाती थीं?
- चैत्र से ज्येष्ठ तक
- आषाढ़ से भादो तक
- कातिक से फागुन तक
- जेठ से आषाढ़ तक
Explanation:
- कातिक से फागुन तक बालगोबिन भगत प्रभातियाँ गाते थे।
- उनका संगीत उनके दैनिक जीवन और ऋतु-चक्र से गहराई से जुड़ा हुआ था।
बालगोबिन भगत के गीतों का सामान्य लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता था?
- लोग भयभीत हो जाते थे
- लोग काम छोड़ देते थे
- बच्चे झूमते, स्त्रियाँ गुनगुनातीं और हलवाहों के पैर ताल से उठते थे
- लोग वहाँ से चले जाते थे
Explanation:
- उनके गीतों में ऐसा आकर्षण था कि सुनने वाले स्वतः ही संगीत में डूब जाते थे।
- उनका गायन पूरे ग्रामीण वातावरण को जीवंत बना देता था।
बालगोबिन भगत के इकलौते बेटे की मृत्यु के समय भगत ने क्या किया?
- घर छोड़कर चले गए
- बहुत दिनों तक मौन रहे
- पार्थिव शरीर के सामने बैठकर गीत गाया
- गाँव वालों से झगड़ा किया
Explanation:
- बेटे की मृत्यु के बाद भगत ने उसके पार्थिव शरीर को चटाई पर लिटाया।
- उन्होंने फूल और तुलसीदल चढ़ाए तथा उसके सामने बैठकर गीत गाया।
- उनके लिए मृत्यु आत्मा के परमात्मा से मिलन का अवसर थी।
बालगोबिन भगत ने पुत्र की मृत्यु को किस रूप में देखा?
- जीवन की सबसे बड़ी पराजय
- ईश्वर का अन्याय
- आत्मा का परमात्मा से मिलन
- सामाजिक संकट
Explanation:
- कबीरपंथी विचारों से प्रभावित भगत मृत्यु को अंत नहीं मानते थे।
- वे इसे आत्मा के परमात्मा से मिलन और विरह के समाप्त होने के रूप में देखते थे।
बालगोबिन भगत की पतोहू के प्रति उनका दृष्टिकोण कैसा था?
- वे उसे घर में बंद रखना चाहते थे
- वे उसे घर से निकालना चाहते थे
- उन्होंने उसके पुनर्विवाह का समर्थन किया
- उन्होंने उससे संबंध तोड़ लिया
Explanation:
- पुत्र की मृत्यु के बाद भगत ने पतोहू को दूसरी शादी करने के लिए प्रेरित किया।
- वे उसके भविष्य और स्वतंत्र जीवन की चिंता करते थे।
- यह उनके रूढ़ियों से अलग मानवीय और प्रगतिशील दृष्टिकोण को दिखाता है।
यदि पतोहू दूसरी शादी के लिए तैयार नहीं होती, तो बालगोबिन भगत ने क्या कहा था?
- वे उसे घर से निकाल देंगे
- वे गाँव छोड़ देंगे
- वे स्वयं घर छोड़ देंगे
- वे पुनर्विवाह रोक देंगे
Explanation:
- भगत चाहते थे कि उनकी पतोहू अपना नया जीवन शुरू करे।
- उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वह नहीं जाएगी तो वे स्वयं घर छोड़ देंगे।
बालगोबिन भगत प्रतिवर्ष कहाँ स्नान करने जाते थे?
- यमुना
- सरयू
- नर्मदा
- गंगा
Explanation:
- बालगोबिन भगत प्रतिवर्ष पैदल लगभग तीस कोस की यात्रा करके गंगा-स्नान के लिए जाते थे।
- उनके लिए यात्रा का उद्देश्य केवल स्नान नहीं बल्कि संत-समागम और लोक-दर्शन भी था।
बालगोबिन भगत की गंगा-यात्रा की प्रमुख विशेषता क्या थी?
- वे बैलगाड़ी से जाते थे
- वे भिक्षा माँगते हुए जाते थे
- वे पैदल जाते हुए रास्ते भर गाते और खँजड़ी बजाते थे
- वे केवल रात में यात्रा करते थे
Explanation:
- भगत लगभग तीस कोस की यात्रा पैदल करते थे।
- वे न तो साधु की तरह भिक्षा माँगते थे और न ही गृहस्थ की तरह धन-संपत्ति का प्रदर्शन करते थे।
- वे घर से खाकर जाते और घर लौटकर ही भोजन करते थे।
बालगोबिन भगत की मृत्यु किस प्रकार हुई?
- यात्रा के दौरान
- दुर्घटना में
- अपने नियमित जीवन और साधना के बीच सहज रूप से
- युद्ध में
Explanation:
- बुढ़ापे में बीमारी और कमजोरी के बावजूद उन्होंने अपने नेम-व्रत नहीं छोड़े।
- अंतिम दिन भी उन्होंने संध्या-गीत गाया।
- अगली भोर उनका निधन हो गया और उनकी जीवन-साधना उसी सहजता से पूर्ण हुई।
बालगोबिन भगत के जीवन का कौन-सा गुण उन्हें साधारण गृहस्थ से अलग बनाता है?
- धन-संपत्ति
- राजनीतिक प्रभाव
- सत्यनिष्ठा, कबीर-भक्ति और वैराग्यपूर्ण जीवन
- व्यापारिक कुशलता
Explanation:
- भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु की तरह निष्काम, सत्यनिष्ठ और आध्यात्मिक जीवन जीते थे।
- उनका जीवन कबीर के विचारों और भक्ति-साधना से प्रभावित था।
‘बालगोबिन भगत’ में लेखक ने बालगोबिन भगत के किस पक्ष को विशेष रूप से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है?
- उनकी आर्थिक स्थिति
- उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ
- उनका व्यक्तित्व, संगीत और जीवन-दर्शन
- उनकी व्यापारिक यात्रा
Explanation:
- रामवृक्ष बेनीपुरी ने बालगोबिन भगत के बाहरी रूप के साथ-साथ उनके आंतरिक व्यक्तित्व को भी उभारा है।
- उनकी कबीर-भक्ति, संगीत-साधना, सत्यनिष्ठा और मृत्यु के प्रति दृष्टिकोण रेखाचित्र के प्रमुख आधार हैं।
‘बालगोबिन भगत’ रचना की प्रमुख विधा क्या है?
- नाटक
- उपन्यास
- कहानी
- संस्मरण/रेखाचित्र
Explanation:
- ‘बालगोबिन भगत’ रामवृक्ष बेनीपुरी का संस्मरणात्मक रेखाचित्र है।
- इसमें लेखक ने अपने अनुभव और स्मृतियों के आधार पर एक विशिष्ट ग्रामीण व्यक्तित्व का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया है।
‘लखनवी अंदाज़’ के लेखक कौन हैं?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- प्रेमचंद
- यशपाल
- जैनेेंद्र कुमार
Explanation:
- ‘लखनवी अंदाज़’ के लेखक यशपाल हैं।
- यह एक व्यंग्यात्मक कहानी है, जिसमें बनावटी तहज़ीब और खोखले सामंती जीवन पर व्यंग्य किया गया है।
यशपाल का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1901
- 1903
- 1905
- 1907
Explanation:
- यशपाल का जन्म सन् 1903 में हुआ था।
- उनका जन्म पंजाब के फीरोज़पुर छावनी में हुआ था।
यशपाल का जन्म कहाँ हुआ था?
- लाहौर
- काँगड़ा
- अमृतसर
- फीरोज़पुर छावनी
Explanation:
- यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फीरोज़पुर छावनी में हुआ था।
यशपाल ने प्रारंभिक शिक्षा कहाँ ग्रहण की थी?
- लाहौर
- अमृतसर
- काँगड़ा
- फीरोज़पुर
Explanation:
- यशपाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा काँगड़ा में ग्रहण की थी।
- इसके बाद उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया।
यशपाल ने बी.ए. की शिक्षा किस कॉलेज से प्राप्त की?
- हिंदू कॉलेज, दिल्ली
- नेशनल कॉलेज, लाहौर
- सेंट स्टीफेंस कॉलेज
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
Explanation:
- यशपाल ने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया था।
- वहीं उनका परिचय भगत सिंह और सुखदेव से हुआ।
नेशनल कॉलेज, लाहौर में यशपाल का परिचय किन क्रांतिकारियों से हुआ?
- चंद्रशेखर आज़ाद और रामप्रसाद बिस्मिल
- सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह
- भगत सिंह और सुखदेव
- राजगुरु और अशफाक उल्ला खाँ
Explanation:
- लाहौर के नेशनल कॉलेज में यशपाल का परिचय भगत सिंह और सुखदेव से हुआ।
- यशपाल स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़े थे।
स्वाधीनता संग्राम की किस धारा से जुड़ाव के कारण यशपाल जेल गए?
- सामाजिक सुधार आंदोलन
- किसान आंदोलन
- क्रांतिकारी धारा
- भाषा आंदोलन
Explanation:
- यशपाल स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़े हुए थे।
- इसी गतिविधि के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
यशपाल की मृत्यु किस वर्ष हुई?
- 1972
- 1974
- 1976
- 1978
Explanation:
- यशपाल का निधन सन् 1976 में हुआ था।
यशपाल की रचनाओं में मुख्य रूप से किसके सरोकार दिखाई देते हैं?
- केवल राजाओं के जीवन के
- केवल धार्मिक जीवन के
- आम आदमी के
- केवल प्रकृति के
Explanation:
- यशपाल की रचनाओं में आम आदमी के सरोकार प्रमुखता से उपस्थित हैं।
- वे सामाजिक विषमता और राजनीतिक पाखंड जैसी समस्याओं के प्रति मुखर रहे।
यशपाल किस साहित्यिक शैली के विशिष्ट रचनाकार माने जाते हैं?
- छायावादी
- रहस्यवादी
- यथार्थवादी
- प्रयोगवादी
Explanation:
- यशपाल यथार्थवादी शैली के विशिष्ट रचनाकार हैं।
- उनकी रचनाओं में सामाजिक जीवन की वास्तविक समस्याओं का चित्रण मिलता है।
यशपाल की रचनाएँ किनके खिलाफ मुखर हैं?
- केवल प्रकृति के विरुद्ध
- सामाजिक विषमता, राजनीतिक पाखंड और रूढ़ियों के खिलाफ
- केवल ग्रामीण जीवन के खिलाफ
- केवल आधुनिक शिक्षा के खिलाफ
Explanation:
- यशपाल की रचनाएँ सामाजिक विषमता, राजनीतिक पाखंड और रूढ़ियों के विरुद्ध आवाज उठाती हैं।
- उनकी भाषा स्वाभाविक और सजीव है।
निम्नलिखित में से कौन-सा यशपाल का कहानी-संग्रह है?
- गोदान
- मैला आँचल
- ज्ञानदान
- राग दरबारी
Explanation:
- ‘ज्ञानदान’ यशपाल का उल्लेखनीय कहानी-संग्रह है।
- उनके अन्य कहानी-संग्रहों में ‘तर्क का तूफ़ान’, ‘पिंजरे की उड़ान’ और ‘फूलों का कुर्ता’ आदि शामिल हैं।
‘झूठा सच’ किसकी रचना है?
- फणीश्वर नाथ रेणु
- श्रीलाल शुक्ल
- यशपाल
- धर्मवीर भारती
Explanation:
- ‘झूठा सच’ यशपाल का प्रसिद्ध उपन्यास है।
- यह भारत-विभाजन की त्रासदी का मार्मिक दस्तावेज माना जाता है।
‘लखनवी अंदाज़’ किस प्रकार की रचना है?
- ऐतिहासिक उपन्यास
- आत्मकथा
- व्यंग्य-कहानी
- जीवनी
Explanation:
- ‘लखनवी अंदाज़’ एक व्यंग्यात्मक कहानी है।
- इसमें बनावटी तहज़ीब, खोखलेपन और पतनशील सामंती संस्कृति पर व्यंग्य किया गया है।
‘लखनवी अंदाज़’ की कहानी मुख्य रूप से कहाँ घटित होती है?
- लखनऊ के एक महल में
- गाँव के एक घर में
- ट्रेन के सेकंड क्लास के डिब्बे में
- किसी बाजार में
Explanation:
- कहानी की शुरुआत ट्रेन के सेकंड क्लास के डिब्बे से होती है।
- लेखक इसी डिब्बे में नवाब साहब से मिलता है।
नवाब साहब के सामने डिब्बे में क्या रखा हुआ था?
- सेब
- आम
- दो ताज़े खीरे
- संतरे
Explanation:
- नवाब साहब के सामने दो ताज़े खीरे रखे थे।
- कहानी में इन्हीं खीरों के माध्यम से नवाबी दिखावे और खोखली तहज़ीब पर व्यंग्य किया गया है।
नवाब साहब ने खीरों को किस प्रकार तैयार किया?
- उन्हें पकाकर
- उन्हें तलकर
- धोकर, छीलकर और जीरा-नमक तथा लाल मिर्च लगाकर
- उन्हें दूध में डालकर
Explanation:
- नवाब साहब ने बड़ी नफ़ासत के साथ खीरों को धोया और छीला।
- उन्होंने फाँकों पर जीरा-नमक और लाल मिर्च छिड़की।
- पूरी प्रक्रिया को उन्होंने अत्यंत शालीन और बनावटी अंदाज़ में किया।
नवाब साहब ने खीरे की फाँकों के साथ क्या किया?
- उन्हें खा लिया
- लेखक को दे दिया
- उन्हें वापस रख दिया
- उन्हें सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया
Explanation:
- नवाब साहब खीरे की फाँक को सूँघते और उसके स्वाद की कल्पना करते थे।
- इसके बाद वे फाँक को खिड़की से बाहर फेंक देते थे।
- यह व्यवहार उनकी बनावटी रईसी और खोखली नफ़ासत का प्रतीक है।
नवाब साहब के अनुसार खीरा कैसा होता है?
- बहुत हल्का
- मीठा और पौष्टिक
- सकील अर्थात भारी
- बहुत कड़वा
Explanation:
- नवाब साहब कहते हैं कि खीरा ‘सकील’ यानी भारी होता है।
- वे इसे पेट पर बोझ डालने वाला बताते हैं, जबकि स्वयं खीरा खाया ही नहीं था।
‘लखनवी अंदाज़’ में खीरे का प्रसंग किस पर व्यंग्य करता है?
- कृषि व्यवस्था पर
- रेल यात्रा पर
- बनावटी तहज़ीब और खोखली रईसी पर
- ग्रामीण जीवन पर
Explanation:
- खीरे का प्रसंग नवाबी जीवन की बनावटी नफ़ासत और खोखली रईसी को उजागर करता है।
- नवाब साहब वास्तविक उपभोग के बजाय केवल दिखावे को महत्व देते हैं।
कहानी के अंत में लेखक नवाब साहब को किस रूप में पहचानता है?
- व्यापारी के रूप में
- कवि के रूप में
- ‘नयी कहानी’ के लेखक के रूप में
- अभिनेता के रूप में
Explanation:
- अंत में लेखक को पता चलता है कि नवाब साहब ‘नयी कहानी’ के लेखक हैं।
- यहाँ यशपाल बिना कथ्य के कहानी लिखने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करते हैं।
‘लखनवी अंदाज़’ का मुख्य व्यंग्य किस सामाजिक वर्ग पर है?
- किसान वर्ग
- मजदूर वर्ग
- पतनशील सामंती वर्ग
- मध्यवर्गीय विद्यार्थी वर्ग
Explanation:
- यशपाल पतनशील सामंती वर्ग की बनावटी जीवन-शैली पर कटाक्ष करते हैं।
- यह वर्ग वास्तविकता से कटकर दिखावे और कृत्रिम प्रतिष्ठा को महत्व देता है।
‘लखनवी अंदाज़’ का व्यंग्यात्मक निष्कर्ष किस विचार को सामने लाता है?
- कहानी केवल कल्पना से बनती है
- रईसी ही साहित्य का आधार है
- बिना कथ्य के केवल इच्छा मात्र से कहानी नहीं बन सकती
- कहानी में पात्रों की आवश्यकता नहीं होती
Explanation:
- यशपाल इस रचना के माध्यम से बिना कथ्य के कहानी लिखने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करते हैं।
- खीरे को केवल सूँघकर फेंक देना और फिर तृप्ति का प्रदर्शन करना उसी खोखलेपन का प्रतीक है।
- इस प्रकार कहानी ‘कला के नाम पर निरर्थकता’ और दिखावे पर कटाक्ष करती है।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ के लेखक कौन हैं?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
- मुक्तिबोध
Explanation:
- ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ के लेखक सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हैं।
- वे कवि, कहानीकार, उपन्यासकार, निबंधकार और नाटककार के रूप में प्रसिद्ध थे।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1925
- 1926
- 1927
- 1929
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म 1927 में हुआ था।
- उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ था।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म कहाँ हुआ था?
- इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
- गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
- बस्ती, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- उनका जन्म बस्ती जिले, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
- बाद में उन्होंने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की उच्च शिक्षा कहाँ हुई थी?
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- दिल्ली विश्वविद्यालय
- लखनऊ विश्वविद्यालय
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की थी।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का निधन किस वर्ष हुआ?
- 1980
- 1981
- 1982
- 1983
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का 1983 में आकस्मिक निधन हुआ था।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने आकाशवाणी में किस पद पर कार्य किया था?
- निदेशक
- समाचार संपादक
- सहायक प्रोड्यूसर
- उद्घोषक
Explanation:
- उन्होंने आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर के रूप में कार्य किया था।
- वे अध्यापक और पत्रकारिता से भी जुड़े रहे।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने ‘दिनमान’ में किस पद पर कार्य किया?
- प्रधान संपादक
- प्रबंध संपादक
- संवाददाता
- उपसंपादक
Explanation:
- उन्होंने दिनमान में उपसंपादक के रूप में कार्य किया।
- वे ‘दिनमान’ में ‘चरचे और चरखे’ नामक स्तंभ भी लिखते थे।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना किस बाल पत्रिका के संपादक रहे?
- नंदन
- चंपक
- पराग
- बाल भारती
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ‘पराग’ के संपादक रहे थे।
- उन्होंने बाल साहित्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पहचान किस रूप में की जाती है?
- ग्रामीण जीवन के लेखक
- ऐतिहासिक साहित्य के लेखक
- प्रकृति के लेखक
- मध्यवर्गीय आकांक्षाओं के लेखक
Explanation:
- सर्वेश्वर की पहचान मध्यवर्गीय आकांक्षाओं के लेखक के रूप में की जाती है।
- उन्होंने मध्यवर्गीय जीवन की महत्वाकांक्षाओं, सपनों, संघर्ष, शोषण, हताशा और कुंठा को चित्रित किया।
निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का कविता-संग्रह है?
- सोया हुआ जल
- पागल कुत्तों का मसीहा
- काठ की घंटियाँ
- लड़ाई
Explanation:
- काठ की घंटियाँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का कविता-संग्रह है।
- उनके अन्य कविता-संग्रहों में कुआनो नदी, जंगल का दर्द और खूँटियों पर टँगे लोग शामिल हैं।
‘कुआनो नदी’ किसकी रचना है?
- धर्मवीर भारती
- रघुवीर सहाय
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- नागार्जुन
Explanation:
- ‘कुआनो नदी’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रमुख कविता-संग्रह है।
‘खूँटियों पर टँगे लोग’ किसकी प्रमुख कृति है?
- मुक्तिबोध
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- शमशेर बहादुर सिंह
- कुँवर नारायण
Explanation:
- ‘खूँटियों पर टँगे लोग’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रमुख कविता-संग्रह है।
- इस कृति के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला था।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को साहित्य अकादेमी पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
- काठ की घंटियाँ
- कुआनो नदी
- जंगल का दर्द
- खूँटियों पर टँगे लोग
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को ‘खूँटियों पर टँगे लोग’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का उपन्यास है?
- लड़ाई
- बकरी
- सोया हुआ जल
- काठ की घंटियाँ
Explanation:
- ‘सोया हुआ जल’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का उपन्यास है।
- ‘पागल कुत्तों का मसीहा’ भी उनकी प्रमुख उपन्यास-कृति है।
‘लड़ाई’ किस विधा की कृति है?
- उपन्यास
- कहानी-संग्रह
- नाटक
- कविता-संग्रह
Explanation:
- ‘लड़ाई’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का कहानी-संग्रह है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रसिद्ध नाटक कौन-सा है?
- लड़ाई
- सोया हुआ जल
- बकरी
- जंगल का दर्द
Explanation:
- ‘बकरी’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रसिद्ध नाटक है।
निम्नलिखित में से कौन-सी सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की बाल साहित्य की कृति है?
- कुआनो नदी
- बकरी
- सोया हुआ जल
- बतूता का जूता
Explanation:
- ‘बतूता का जूता’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की बाल साहित्य संबंधी प्रमुख रचना है।
- ‘भौं भौं खौं खौं’ और ‘लाख की नाक’ भी उनके बाल साहित्य में शामिल हैं।
‘चरचे और चरखे’ नामक स्तंभ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना किस पत्रिका में लिखते थे?
- पराग
- धर्मयुग
- दिनमान
- साप्ताहिक हिंदुस्तान
Explanation:
- ‘चरचे और चरखे’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का स्तंभ था, जिसे वे दिनमान में लिखते थे।
- इस स्तंभ में उनकी बेबाक और स्पष्ट अभिव्यक्ति दिखाई देती थी।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की अभिव्यक्ति की प्रमुख विशेषता क्या थी?
- अत्यधिक अलंकारिकता
- कठिन एवं दुरूह भाषा
- रहस्यात्मकता
- सहजता और स्वाभाविकता
Explanation:
- सर्वेश्वर की अभिव्यक्ति में सहजता और स्वाभाविकता प्रमुख थी।
- वे बेबाक ढंग से अपनी बात कहने के लिए प्रसिद्ध थे।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के साहित्य में मुख्य रूप से किस जीवन-वर्ग की आकांक्षाओं और संघर्षों का चित्रण मिलता है?
- राजघराने के जीवन का
- आदिवासी जीवन का
- किसान जीवन का
- मध्यवर्गीय जीवन का
Explanation:
- सर्वेश्वर ने मध्यवर्गीय जीवन की महत्वाकांक्षाओं, सपनों, संघर्ष, शोषण, हताशा और कुंठा को प्रमुखता से चित्रित किया।
- इसी कारण उन्हें मध्यवर्गीय आकांक्षाओं का लेखक कहा जाता है।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ संस्मरण के लेखक कौन हैं?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- हरिशंकर परसाई
- फणीश्वर नाथ रेणु
Explanation:
- सही उत्तर: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ फ़ादर कामिल बुल्के पर लिखा गया संस्मरण है।
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने फ़ादर बुल्के के व्यक्तित्व और उनके मानवीय गुणों को आत्मीयता से प्रस्तुत किया है।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ किस विधा की रचना है?
- कहानी
- नाटक
- संस्मरण
- उपन्यास
Explanation:
- सही उत्तर: संस्मरण
- संस्मरण स्मृतियों पर आधारित साहित्यिक विधा है।
- इस रचना में लेखक ने फ़ादर कामिल बुल्के के साथ अपने आत्मीय संबंधों और उनसे जुड़ी स्मृतियों को प्रस्तुत किया है।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ का प्रमुख विषय किस व्यक्तित्व से संबंधित है?
- महात्मा गांधी
- कबीर
- तुलसीदास
- फ़ादर कामिल बुल्के
Explanation:
- सही उत्तर: फ़ादर कामिल बुल्के
- यह संस्मरण फ़ादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व, मानवीय करुणा और हिंदी-प्रेम पर केंद्रित है।
- लेखक ने उनके जीवन और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव को विशेष महत्त्व दिया है।
फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म किस देश में हुआ था?
- भारत
- फ्रांस
- बेल्जियम
- जर्मनी
Explanation:
- सही उत्तर: बेल्जियम
- फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म यूरोप के बेल्जियम में हुआ था।
- बाद में उन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया।
फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म बेल्जियम के किस स्थान पर हुआ था?
- ब्रुसेल्स
- एंटवर्प
- गेन्ट
- रैम्सचैपल
Explanation:
- सही उत्तर: रैम्सचैपल
- रैम्सचैपल बेल्जियम का वह स्थान है जहाँ फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म हुआ था।
- लेखक ने इसे गिरजों, पादरियों, धर्मगुरुओं और संतों की भूमि के रूप में याद किया है।
फ़ादर कामिल बुल्के ने अपनी कर्मभूमि किस देश को बनाया?
- बेल्जियम
- फ्रांस
- इटली
- भारत
Explanation:
- सही उत्तर: भारत
- जन्म से विदेशी होने के बावजूद फ़ादर बुल्के ने भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया।
- उनका भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा से गहरा जुड़ाव था।
फ़ादर कामिल बुल्के किस भाषा से अगाध प्रेम के लिए प्रसिद्ध थे?
- अंग्रेज़ी
- फ्रेंच
- हिंदी
- जर्मन
Explanation:
- सही उत्तर: हिंदी
- फ़ादर बुल्के को हिंदी भाषा और उसकी बोलियों से गहरा प्रेम था।
- उनका हिंदी के प्रति समर्पण उन्हें भारतीय साहित्य और संस्कृति से जोड़ता है।
फ़ादर बुल्के के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता क्या थी?
- राजनीतिक सक्रियता
- धन-संग्रह
- सत्ता-प्रेम
- मानवीय करुणा
Explanation:
- सही उत्तर: मानवीय करुणा
- रचना का शीर्षक ही फ़ादर बुल्के की मानवीय करुणा की विशेष चमक को रेखांकित करता है।
- उनका व्यक्तित्व आत्मीयता, संवेदना और मानव-प्रेम से जुड़ा हुआ था।
फ़ादर कामिल बुल्के किस अर्थ में ‘भारतीय’ माने जाते हैं?
- उनका जन्म भारत में हुआ था
- उनके माता-पिता भारतीय थे
- उन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया और भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव रखा
- उन्होंने केवल कुछ वर्ष भारत में बिताए
Explanation:
- सही उत्तर: उन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया और भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव रखा
- फ़ादर बुल्के जन्म से बेल्जियम के थे, लेकिन उनका जीवन भारत और भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा था।
- इसी कारण लेखक उन्हें ‘विदेशी भारतीय साधु’ के रूप में स्मरण करता है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का फ़ादर बुल्के से कैसा संबंध था?
- औपचारिक संबंध
- केवल साहित्यिक परिचय
- राजनीतिक संबंध
- अंतरंग और आत्मीय संबंध
Explanation:
- सही उत्तर: अंतरंग और आत्मीय संबंध
- लेखक का फ़ादर बुल्के से निकट संबंध था।
- इसी आत्मीयता के कारण संस्मरण में फ़ादर बुल्के के व्यक्तित्व की जीवंत झलक दिखाई देती है।
फ़ादर बुल्के किस रूप में संन्यासी थे?
- केवल पारंपरिक धार्मिक अर्थ में
- राजनीतिक संन्यासी के रूप में
- संन्यासी थे, लेकिन पारंपरिक अर्थ में नहीं
- गृहस्थ संन्यासी के रूप में
Explanation:
- सही उत्तर: संन्यासी थे, लेकिन पारंपरिक अर्थ में नहीं
- फ़ादर बुल्के का संन्यास मानवीय सेवा, प्रेम और समर्पण से जुड़ा था।
- उनका जीवन सामान्य रूढ़ अर्थों वाले संन्यास से अलग था।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ में संस्मरण विधा की विश्वसनीयता किस आधार पर महत्त्वपूर्ण बताई गई है?
- कल्पना के आधार पर
- ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर
- स्मृतियों की विश्वसनीयता के आधार पर
- लोककथाओं के आधार पर
Explanation:
- सही उत्तर: स्मृतियों की विश्वसनीयता के आधार पर
- संस्मरण स्मृतियों से निर्मित होता है।
- जब स्मृतियाँ विश्वसनीय होती हैं, तब संस्मरण अधिक प्रभावशाली और महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
फ़ादर कामिल बुल्के को किस रूप में याद किए जाने की संभावना लेखक व्यक्त करता है?
- एक महान राजनीतिज्ञ के रूप में
- एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक के रूप में
- एक सफल व्यापारी के रूप में
- हिंदी भाषा और बोलियों के अगाध प्रेमी के रूप में
Explanation:
- सही उत्तर: हिंदी भाषा और बोलियों के अगाध प्रेमी के रूप में
- फ़ादर बुल्के का हिंदी और उसकी बोलियों के प्रति गहरा अनुराग था।
- लेखक उनके इसी भाषायी प्रेम को उनकी स्थायी पहचान का महत्त्वपूर्ण आधार मानता है।
लेखक के अनुसार फ़ादर बुल्के को कब तक याद किया जाएगा?
- जब तक भारत स्वतंत्र रहेगा
- जब तक हिंदी भाषा जीवित रहेगी
- जब तक रामकथा रहेगी
- जब तक यूरोप का इतिहास पढ़ा जाएगा
Explanation:
- सही उत्तर: जब तक रामकथा रहेगी
- लेखक का मानना है कि फ़ादर बुल्के का रामकथा के प्रति गहरा जुड़ाव और अध्ययन उन्हें स्थायी स्मृति प्रदान करता है।
- रामकथा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अत्यंत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
फ़ादर बुल्के के व्यक्तित्व को ‘विदेशी भारतीय साधु’ कहना किस बात को दर्शाता है?
- उनका भारत से कोई संबंध नहीं था
- वे केवल विदेशी संस्कृति के समर्थक थे
- विदेश में जन्म लेने के बावजूद उनका जीवन भारत और भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा था
- वे भारत में केवल यात्रा करने आए थे
Explanation:
- सही उत्तर: विदेश में जन्म लेने के बावजूद उनका जीवन भारत और भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा था
- फ़ादर बुल्के जन्म से बेल्जियम के थे, लेकिन भारत उनकी कर्मभूमि बना।
- उनका हिंदी, भारतीय संस्कृति और रामकथा के प्रति गहरा अनुराग था।
फ़ादर बुल्के का हिंदी-प्रेम किससे संबंधित था?
- केवल हिंदी साहित्य से
- केवल हिंदी व्याकरण से
- हिंदी भाषा और उसकी बोलियों से
- केवल हिंदी पत्रकारिता से
Explanation:
- सही उत्तर: हिंदी भाषा और उसकी बोलियों से
- फ़ादर बुल्के हिंदी के साथ-साथ उसकी बोलियों के भी गहरे प्रेमी थे।
- उनका यह प्रेम उनके भारतीय जीवन और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ में फ़ादर बुल्के के व्यक्तित्व का कौन-सा पक्ष प्रमुखता से उभरता है?
- व्यापारिक कुशलता
- राजनीतिक चतुराई
- मानवीय संवेदना और आत्मीयता
- सैन्य क्षमता
Explanation:
- सही उत्तर: मानवीय संवेदना और आत्मीयता
- लेखक ने फ़ादर बुल्के को करुणाशील और आत्मीय व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है।
- उनका जीवन मानव-प्रेम और भारतीय समाज से आत्मीय जुड़ाव का उदाहरण है।
फ़ादर बुल्के का जन्म किस महाद्वीप में हुआ था?
- एशिया
- अफ्रीका
- यूरोप
- दक्षिण अमेरिका
Explanation:
- सही उत्तर: यूरोप
- बेल्जियम यूरोप महाद्वीप में स्थित है।
- फ़ादर बुल्के का जन्म बेल्जियम के रैम्सचैपल में हुआ था।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने फ़ादर बुल्के को किस कारण विशेष रूप से स्मरणीय माना है?
- उनकी राजनीतिक शक्ति के कारण
- उनके आर्थिक योगदान के कारण
- उनके मानवीय प्रेम, हिंदी-प्रेम और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव के कारण
- उनके विदेशी होने के कारण
Explanation:
- सही उत्तर: उनके मानवीय प्रेम, हिंदी-प्रेम और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव के कारण
- फ़ादर बुल्के का व्यक्तित्व मानवता, करुणा और आत्मीयता से जुड़ा था।
- हिंदी तथा भारतीय संस्कृति के प्रति उनका समर्पण उन्हें विशिष्ट बनाता है।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ शीर्षक में ‘दिव्य चमक’ मुख्यतः किस गुण का संकेत देती है?
- धन-संपत्ति
- बाहरी सौंदर्य
- विद्वता का प्रदर्शन
- मानवीय करुणा और संवेदनशीलता
Explanation:
- सही उत्तर: मानवीय करुणा और संवेदनशीलता
- शीर्षक फ़ादर बुल्के के भीतर मौजूद मानवीय संवेदना की उज्ज्वलता को व्यक्त करता है।
- यह रचना बाहरी पहचान की अपेक्षा उनके मानवीय व्यक्तित्व को केंद्र में रखती है।
फ़ादर कामिल बुल्के की स्थायी पहचान किन दो पक्षों से विशेष रूप से जुड़ी है?
- राजनीति और अर्थशास्त्र
- विज्ञान और तकनीक
- रामकथा और हिंदी-प्रेम
- व्यापार और प्रशासन
Explanation:
- सही उत्तर: रामकथा और हिंदी-प्रेम
- लेखक के अनुसार फ़ादर बुल्के रामकथा और हिंदी भाषा-बोलियों के प्रति अपने गहरे प्रेम के कारण लंबे समय तक स्मरण किए जाएंगे।
- उनका भारतीय जीवन और साहित्यिक-सांस्कृतिक जुड़ाव उनकी पहचान का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
मन्नू भंडारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
- सन् 1929, अजमेर
- सन् 1931, भानपुरा, ज़िला मंदसौर (मध्य प्रदेश)
- सन् 1935, जयपुर
- सन् 1937, दिल्ली
Explanation:
- मन्नू भंडारी का जन्म सन् 1931 में भानपुरा गाँव, ज़िला मंदसौर, मध्य प्रदेश में हुआ था।
- वे स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कथा साहित्य की प्रमुख लेखिकाओं में गिनी जाती हैं।
मन्नू भंडारी की इंटर तक की शिक्षा-दीक्षा कहाँ हुई?
- दिल्ली
- मंदसौर
- अजमेर
- जयपुर
Explanation:
- मन्नू भंडारी ने इंटर तक की शिक्षा राजस्थान के अजमेर शहर में प्राप्त की।
मन्नू भंडारी ने उच्च शिक्षा में किस विषय में एम.ए. किया?
- इतिहास
- अंग्रेज़ी
- समाजशास्त्र
- हिंदी
Explanation:
- इंटर तक की शिक्षा के बाद मन्नू भंडारी ने हिंदी विषय में एम.ए. किया।
मन्नू भंडारी ने किस कॉलेज में अध्यापन कार्य किया?
- हिंदू कॉलेज
- लेडी श्रीराम कॉलेज
- मिरांडा हाउस कॉलेज, दिल्ली
- रामजस कॉलेज
Explanation:
- मन्नू भंडारी ने दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापन कार्य किया और वहीं से अवकाश प्राप्त किया।
मन्नू भंडारी का देहांत किस वर्ष हुआ?
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
Explanation:
- मन्नू भंडारी का निधन सन् 2021 में हुआ।
मन्नू भंडारी किस साहित्यिक विधा की प्रमुख लेखिका थीं?
- केवल कविता
- केवल नाटक
- हिंदी कथा साहित्य
- केवल आलोचना
Explanation:
- मन्नू भंडारी स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कथा साहित्य की प्रमुख हस्ताक्षर थीं।
- उन्होंने कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से विशेष पहचान बनाई।
निम्नलिखित में से कौन-सा मन्नू भंडारी का कहानी-संग्रह है?
- एक प्लेट सैलाब
- आपका बंटी
- महाभोज
- आवारा मसीहा
Explanation:
- ‘एक प्लेट सैलाब’ मन्नू भंडारी का कहानी-संग्रह है।
- ‘मैं हार गई’, ‘यही सच है’ और ‘त्रिशंकु’ भी उनके प्रमुख कहानी-संग्रहों में शामिल हैं।
‘आपका बंटी’ किसकी रचना है?
- महादेवी वर्मा
- कृष्णा सोबती
- उषा प्रियंवदा
- मन्नू भंडारी
Explanation:
- ‘आपका बंटी’ मन्नू भंडारी का प्रसिद्ध उपन्यास है।
- ‘महाभोज’ भी उनका प्रमुख उपन्यास है।
‘महाभोज’ किसकी प्रमुख रचना है?
- ममता कालिया
- मन्नू भंडारी
- शिवानी
- कृष्णा सोबती
Explanation:
- ‘महाभोज’ मन्नू भंडारी का चर्चित उपन्यास है।
‘एक कहानी यह भी’ किस विधा से संबंधित आत्मकथ्य है?
- जीवनी
- यात्रावृत्तांत
- आत्मकथ्य
- नाटक
Explanation:
- ‘एक कहानी यह भी’ में मन्नू भंडारी ने अपने जीवन और लेखकीय व्यक्तित्व से जुड़े व्यक्तियों तथा घटनाओं को आत्मकथ्य के रूप में प्रस्तुत किया है।
- यह पारिभाषिक अर्थ में सिलसिलेवार आत्मकथा नहीं है।
‘एक कहानी यह भी’ में मुख्य रूप से किनसे जुड़े प्रसंग उभरकर आते हैं?
- केवल उनके साहित्यिक मित्रों से
- केवल उनके विद्यार्थियों से
- उनके किशोर जीवन, पिताजी और प्राध्यापिका शीला अग्रवाल से
- केवल उनके पुरस्कारों से
Explanation:
- इस आत्मकथ्य में मन्नू भंडारी के किशोर जीवन की घटनाओं के साथ उनके पिताजी और कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का व्यक्तित्व विशेष रूप से उभरता है।
मन्नू भंडारी के लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण में किस प्राध्यापिका की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही?
- सुधा अग्रवाल
- कमला शर्मा
- शीला अग्रवाल
- निर्मला वर्मा
Explanation:
- कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने मन्नू भंडारी के लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘एक कहानी यह भी’ में मन्नू भंडारी के जीवन का कौन-सा पक्ष विशेष रूप से दिखाई देता है?
- केवल पारिवारिक जीवन
- केवल वैवाहिक जीवन
- साधारण लड़की से असाधारण व्यक्तित्व बनने की प्रारंभिक यात्रा
- केवल पुरस्कार प्राप्त करने की यात्रा
Explanation:
- आत्मकथ्य में लेखिका ने साधारण लड़की के असाधारण बनने के प्रारंभिक पड़ावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
सन् 1946-47 की किस घटना या परिस्थिति ने मन्नू भंडारी को भी प्रभावित किया?
- औद्योगिक क्रांति
- हरित क्रांति
- आज़ादी की आँधी
- भाषाई आंदोलन
Explanation:
- सन् 1946-47 की आज़ादी की आँधी ने मन्नू भंडारी को भी प्रभावित किया।
- उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के वातावरण में सक्रिय भागीदारी दिखाई।
आज़ादी की लड़ाई में मन्नू भंडारी की भागीदारी में कौन-सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं?
- निष्क्रियता और भय
- केवल भाषण देने की प्रवृत्ति
- उत्साह, ओज, संगठन-क्षमता और विरोध करने का तरीका
- केवल साहित्यिक रुचि
Explanation:
- छोटे शहर की युवा होती लड़की के रूप में मन्नू भंडारी ने आज़ादी की लड़ाई में उत्साह और ओज के साथ भाग लिया।
- उनकी संगठन-क्षमता और विरोध करने का तरीका भी उल्लेखनीय था।
मन्नू भंडारी की रचनाओं की भाषा और शिल्प की प्रमुख विशेषता क्या है?
- अत्यधिक अलंकारिकता
- जटिलता और दुरूहता
- सादगी और प्रामाणिक अनुभूति
- केवल संस्कृतनिष्ठ भाषा
Explanation:
- मन्नू भंडारी की कहानियों और उपन्यासों में भाषा तथा शिल्प की सादगी दिखाई देती है।
- उनकी रचनाओं में जीवन की प्रामाणिक अनुभूतियों का प्रभाव मिलता है।
मन्नू भंडारी की रचनाओं में किस प्रकार की अनुभूतियों की अभिव्यक्ति विशेष रूप से देखी जाती है?
- केवल युद्ध संबंधी अनुभूतियाँ
- केवल प्रकृति संबंधी अनुभूतियाँ
- स्त्री-मन से जुड़ी अनुभूतियाँ
- केवल धार्मिक अनुभूतियाँ
Explanation:
- मन्नू भंडारी की रचनाओं में स्त्री-मन से जुड़ी अनुभूतियों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिलती है।
मन्नू भंडारी ने साहित्य के अतिरिक्त किन क्षेत्रों के लिए पटकथाएँ लिखीं?
- केवल रेडियो के लिए
- फ़िल्म एवं टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए
- केवल रंगमंच के लिए
- केवल विज्ञापनों के लिए
Explanation:
- मन्नू भंडारी ने साहित्य लेखन के अलावा फ़िल्म और टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए भी पटकथाएँ लिखीं।
निम्नलिखित में से कौन-सा पुरस्कार मन्नू भंडारी को प्राप्त साहित्यिक सम्मानों में शामिल है?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- हिंदी अकादमी का शिखर मन्नू भंडारी सम्मान
- भारत रत्न
Explanation:
- मन्नू भंडारी को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए हिंदी अकादमी का शिखर मन्नू भंडारी सम्मान सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए।
- भारतीय भाषा परिषद्, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कार भी उनके प्रमुख सम्मानों में शामिल हैं।
‘एक कहानी यह भी’ में मन्नू भंडारी के लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण में किन दो व्यक्तियों की भूमिका विशेष रूप से उभरती है?
- कबीर और प्रेमचंद
- जयशंकर प्रसाद और निराला
- उनके पिताजी और प्राध्यापिका शीला अग्रवाल
- महादेवी वर्मा और सुभद्रा कुमारी चौहान
Explanation:
- ‘एक कहानी यह भी’ के संकलित अंश में मन्नू भंडारी के पिताजी और कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल के व्यक्तित्व विशेष रूप से सामने आते हैं।
- इन दोनों के प्रभाव ने उनके व्यक्तित्व और आगे के लेखकीय विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘एक कहानी यह भी’ किसकी आत्मकथात्मक रचना है?
- महादेवी वर्मा
- कृष्णा सोबती
- मन्नू भंडारी
- शिवानी
Explanation:
- ‘एक कहानी यह भी’ मन्नू भंडारी का आत्मकथात्मक संस्मरण है।
- इसमें लेखिका ने अपने बचपन, परिवार, पिता के व्यक्तित्व, माँ के त्याग और अपने विद्रोही व्यक्तित्व के विकास को प्रस्तुत किया है।
मन्नू भंडारी का जन्म कहाँ हुआ था?
- अजमेर
- इंदौर
- कोलकाता
- भानपुरा गाँव, मध्य प्रदेश
Explanation:
- लेखिका का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था।
- हालाँकि उनकी आरंभिक स्मृतियाँ अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले से जुड़ी हैं।
मन्नू भंडारी की आरंभिक स्मृतियाँ किस स्थान से जुड़ी हैं?
- भानपुरा
- अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले
- इंदौर
- कोलकाता
Explanation:
- लेखिका की यादें अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के उस मकान से शुरू होती हैं, जहाँ उनके पिता का प्रभाव था।
- वह घर किताबों और अखबारों से भरा रहता था।
लेखिका के पिता का व्यक्तित्व किन विशेषताओं से जुड़ा था?
- केवल धार्मिकता से
- केवल व्यापारिक सोच से
- समाज-सुधार, कांग्रेस और शिक्षा-प्रेम से
- केवल साहित्य-लेखन से
Explanation:
- लेखिका के पिता समाज-सुधारक, कांग्रेसी और शिक्षा-प्रेमी थे।
- उन्होंने कई विद्यार्थियों को अपने घर में रखकर पढ़ाया था।
आर्थिक झटके के बाद लेखिका के पिता इंदौर से कहाँ आ गए?
- दिल्ली
- कोलकाता
- भानपुरा
- अजमेर
Explanation:
- एक बड़े आर्थिक संकट के बाद परिवार इंदौर से अजमेर आ गया।
- अजमेर आने के बाद पिता के व्यक्तित्व में संकुचन दिखाई देने लगा और वे अधिक क्रोधी तथा शक्की हो गए।
लेखिका के अनुसार उसकी माँ का सबसे प्रमुख गुण क्या था?
- विद्रोही स्वभाव
- महत्त्वाकांक्षा
- अत्यधिक सहनशीलता और त्याग
- राजनीतिक सक्रियता
Explanation:
- लेखिका की माँ बेपढ़ी-लिखी और अत्यंत सहनशील थीं।
- वे परिवार के सभी सदस्यों की इच्छाओं को बिना शिकायत स्वीकार करती थीं।
- लेखिका उनके त्याग को आदर्श के बजाय असहाय मजबूरी के रूप में देखती है।
लेखिका की बड़ी बहिन का नाम क्या था?
- शीला
- सुशीला
- सरला
- कमला
Explanation:
- सुशीला लेखिका से दो वर्ष बड़ी थीं।
- वे गोरी, स्वस्थ और हँसमुख थीं तथा पिता उनकी खूब प्रशंसा करते थे।
सुशीला की तुलना में लेखिका के मन में कौन-सी भावना विकसित हुई?
- आत्मविश्वास
- श्रेष्ठता-बोध
- हीन-भावना की ग्रंथि
- ईर्ष्या समाप्त हो गई
Explanation:
- पिता गोरे रंग के कारण सुशीला की अधिक प्रशंसा करते थे।
- बार-बार की गई तुलना से लेखिका के भीतर हीन-भावना की गहरी ग्रंथि पैदा हुई।
लेखिका के बचपन के खेलों में कौन-सा खेल शामिल था?
- क्रिकेट
- हॉकी
- सतोलिया
- टेनिस
Explanation:
- लेखिका और सुशीला बचपन में सतोलिया, लँगड़ी-टाँग, पकड़म-पकड़ाई, गुड्डे-गुड़ियों का ब्याह, गिल्ली-डंडा और पतंग उड़ाने जैसे खेल खेलती थीं।
‘एक कहानी यह भी’ में वर्णित पुराने समय के सामाजिक जीवन की कौन-सी विशेषता थी?
- लोग एक-दूसरे से दूर रहते थे
- केवल परिवार तक संबंध सीमित थे
- पड़ोस-कल्चर बहुत गहरा था
- मोहल्ले में आना-जाना बंद था
Explanation:
- उस समय पड़ोस के लोगों के बीच बहुत आत्मीय संबंध थे।
- किसी के भी घर आना-जाना सहज और स्वाभाविक माना जाता था।
मन्नू भंडारी की आरंभिक कहानियों के पात्र मुख्यतः कहाँ से आए?
- विद्यालय से
- कॉलेज से
- अजमेर के मोहल्ले से
- दिल्ली के साहित्यिक समाज से
Explanation:
- लेखिका के बचपन के मोहल्ले के लोग उनकी रचनात्मक कल्पना के पात्र बने।
- ‘दा साहब’ जैसा पात्र बाद में उनके उपन्यास ‘महाभोज’ में दिखाई देता है।
लेखिका के पिता की दो अनिवार्य योग्यताएँ क्या थीं?
- उम्र में 18 वर्ष और शिक्षा में स्नातक
- उम्र में 16 वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक
- उम्र में 20 वर्ष और शिक्षा में इंटर
- उम्र में 15 वर्ष और शिक्षा में प्राथमिक
Explanation:
- लेखिका ने अपने पिता की विवाह संबंधी अपेक्षाओं का उल्लेख करते हुए उनकी दो अनिवार्य योग्यताएँ बताई हैं।
- वे उम्र में 16 वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक को आवश्यक मानते थे।
1944 में सुशीला की शादी के बाद लेखिका के जीवन में क्या परिवर्तन आया?
- उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी
- वे अजमेर से चली गईं
- उन्हें पहली बार अपने वजूद का एहसास हुआ
- वे राजनीति से दूर हो गईं
Explanation:
- 1944 में सुशीला की शादी होकर कोलकाता चले जाने और भाइयों के बाहर चले जाने के बाद लेखिका अकेली रह गईं।
- इसी परिस्थिति में उन्हें पहली बार अपने स्वतंत्र अस्तित्व का एहसास हुआ।
मन्नू भंडारी की मुलाकात शीला अग्रवाल से किस वर्ष हुई?
- 1944
- 1945
- 1946
- 1947
Explanation:
- 1945 में लेखिका की मुलाकात शीला अग्रवाल से हुई।
- शीला अग्रवाल उनकी हिंदी की प्राध्यापिका थीं और उन्होंने लेखिका को साहित्य की नई दुनिया से परिचित कराया।
शीला अग्रवाल ने मन्नू भंडारी को किस क्षेत्र में विशेष रूप से प्रेरित किया?
- खेलकूद
- चित्रकला
- साहित्य और आलोचनात्मक चिंतन
- व्यापार
Explanation:
- शीला अग्रवाल ने लेखिका को चुन-चुनकर साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने के लिए दीं।
- पढ़ी हुई पुस्तकों पर चर्चा और बहस के माध्यम से लेखिका की साहित्यिक दृष्टि विकसित हुई।
शीला अग्रवाल के मार्गदर्शन में मन्नू भंडारी ने किन लेखकों को पढ़ना शुरू किया?
- केवल तुलसीदास और सूरदास
- शरत, प्रेमचंद, जैनेंद्र, अज्ञेय और यशपाल
- केवल विदेशी लेखक
- केवल आधुनिक कवि
Explanation:
- लेखिका की साहित्यिक दुनिया शरत और प्रेमचंद से शुरू होकर जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल तथा भगवतीचरण वर्मा तक विस्तृत हुई।
- इससे उनके साहित्यिक संस्कार मजबूत हुए।
1946-47 के आंदोलन-काल में मन्नू भंडारी की भूमिका कैसी हो गई थी?
- वे केवल दर्शक बनी रहीं
- वे आंदोलन से दूर रहीं
- वे सक्रिय आंदोलनकारी बन गईं
- उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया
Explanation:
- शीला अग्रवाल के प्रभाव से लेखिका निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय भागीदार बन गईं।
- उन्होंने प्रभात-फेरियों, हड़तालों, जुलूसों और भाषणों में भाग लिया।
मन्नू भंडारी की राजनीतिक सक्रियता के कारण किससे उनका खुला टकराव शुरू हुआ?
- शीला अग्रवाल से
- बहिन सुशीला से
- अपने पिता से
- डॉ. अंबालाल से
Explanation:
- लेखिका की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से पिता-पुत्री के बीच वैचारिक और व्यवहारिक टकराव शुरू हुआ।
- फिर भी पिता के मन में बेटी की प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता को लेकर गर्व भी था।
कॉलेज की प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता से क्या कहा था?
- लेखिका कॉलेज छोड़ रही है
- लेखिका पढ़ाई में असफल है
- “सारा कॉलेज तुम्हारी बेटी के इशारे पर चल रहा है”
- लेखिका साहित्य नहीं पढ़ती
Explanation:
- प्रिंसिपल की इस बात से पिता पहले नाराज हुए।
- लेकिन बेटी के प्रभाव और नेतृत्व को देखकर उनके भीतर गुस्से के साथ गर्व की भावना भी उभर आई।
डॉ. अंबालाल ने लेखिका के बारे में क्या किया?
- उन्होंने उसकी पढ़ाई बंद करवा दी
- उन्होंने पिता से उसकी शिकायत की
- उन्होंने उसके भाषण की प्रशंसा की
- उन्होंने उसे राजनीति से दूर रहने को कहा
Explanation:
- डॉ. अंबालाल लेखिका के पिता के अभिन्न मित्र थे।
- उन्होंने लेखिका के भाषण की प्रशंसा की, जिससे पिता का गुस्सा गर्व में बदल गया।
1947 में शीला अग्रवाल को कॉलेज ने किस आरोप में नोटिस दिया?
- परीक्षा में अनियमितता
- कॉलेज से अनुपस्थिति
- लड़कियों को भड़काने
- साहित्य पढ़ाने
Explanation:
- 1947 में शीला अग्रवाल को कॉलेज की ओर से नोटिस दिया गया।
- उन पर लड़कियों को राजनीतिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया गया।
‘एक कहानी यह भी’ का समापन किस ऐतिहासिक घटना के साथ होता है?
- भारत छोड़ो आंदोलन
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड
- असहयोग आंदोलन
- 15 अगस्त 1947 को भारत की आज़ादी
Explanation:
- संस्मरण का अंतिम प्रसंग 15 अगस्त 1947 की स्वतंत्रता से जुड़ा है।
- कॉलेज में छात्राओं और छात्रों के संघर्ष तथा देश की स्वतंत्रता—दोनों घटनाएँ लेखिका की स्मृतियों में विशेष स्थान रखती हैं।
‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ के लेखक कौन हैं?
- रामचंद्र शुक्ल
- महावीरप्रसाद द्विवेदी
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
- बालकृष्ण भट्ट
Explanation:
- ‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ के लेखक महावीरप्रसाद द्विवेदी हैं।
- इस निबंध में उन्होंने स्त्री-शिक्षा के विरोध में दिए जाने वाले तर्कों का तार्किक ढंग से खंडन किया है।
महावीरप्रसाद द्विवेदी का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1860
- 1862
- 1864
- 1868
Explanation:
- महावीरप्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1864 में हुआ था।
- वे हिंदी नवजागरण और आधुनिक हिंदी गद्य के प्रमुख निर्माताओं में गिने जाते हैं।
महावीरप्रसाद द्विवेदी का जन्म कहाँ हुआ था?
- काशी, उत्तर प्रदेश
- प्रयाग, उत्तर प्रदेश
- दौलतपुर, जिला रायबरेली, उत्तर प्रदेश
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- उनका जन्म ग्राम दौलतपुर, जिला रायबरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
- उनका जन्म एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने आर्थिक कठिनाइयों के कारण स्कूली शिक्षा के बाद क्या किया?
- अध्यापन कार्य शुरू किया
- पत्रकारिता शुरू की
- रेलवे में नौकरी कर ली
- वकालत शुरू की
Explanation:
- परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद रेलवे में नौकरी कर ली।
- बाद में उन्होंने रेलवे की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने सन् 1903 में किस प्रसिद्ध पत्रिका का संपादन शुरू किया?
- हंस
- माधुरी
- सरस्वती
- सरस्वती
Explanation:
- सन् 1903 में उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी मासिक पत्रिका ‘सरस्वती’ का संपादन शुरू किया।
- उनके संपादन ने हिंदी पत्रकारिता और साहित्य को नई दिशा दी।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादन से किस वर्ष तक जुड़े रहे?
- 1915
- 1920
- 1925
- 1930
Explanation:
- महावीरप्रसाद द्विवेदी सन् 1903 से सन् 1920 तक ‘सरस्वती’ के संपादन से जुड़े रहे।
- उनका संपादन-काल हिंदी साहित्य में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
महावीरप्रसाद द्विवेदी का देहांत किस वर्ष हुआ?
- 1935
- 1936
- 1938
- 1940
Explanation:
- महावीरप्रसाद द्विवेदी का देहांत सन् 1938 में हुआ।
- उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक चिंतन को व्यापक रूप से प्रभावित किया।
महावीरप्रसाद द्विवेदी को हिंदी का कैसा संपादक माना जाता है?
- पहला मनोरंजनात्मक संपादक
- पहला राजनीतिक संपादक
- पहला व्यवस्थित संपादक
- पहला समाचार संपादक
Explanation:
- उन्हें हिंदी का पहला व्यवस्थित संपादक माना जाता है।
- ‘सरस्वती’ के संपादन के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य और पत्रकारिता को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने हिंदी गद्य की भाषा के संबंध में क्या महत्वपूर्ण कार्य किया?
- हिंदी में उर्दू शैली को अनिवार्य बनाया
- ब्रजभाषा को गद्य की भाषा बनाया
- हिंदी गद्य की भाषा का परिष्कार किया
- हिंदी गद्य को समाप्त किया
Explanation:
- महावीरप्रसाद द्विवेदी ने हिंदी गद्य की भाषा के परिष्कार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्होंने लेखकों की सुविधा के लिए व्याकरण और वर्तनी के नियमों को स्थिर करने में योगदान दिया।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने कविता की भाषा के रूप में किस भाषा को प्रतिष्ठित करने में योगदान दिया?
- ब्रजभाषा
- अवधी
- संस्कृत
- खड़ी बोली
Explanation:
- उन्होंने कविता की भाषा के रूप में ब्रजभाषा के स्थान पर खड़ी बोली को प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- इसी कारण आधुनिक हिंदी कविता के विकास में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने स्वाधीनता की चेतना विकसित करने के लिए किस चिंतन को व्यापक बनाया?
- साम्राज्यवाद
- औद्योगिक चिंतन
- स्वदेशी चिंतन
- उपनिवेशवादी चिंतन
Explanation:
- उन्होंने स्वाधीनता की चेतना विकसित करने के लिए स्वदेशी चिंतन को व्यापक बनाया।
- उनका साहित्यिक और पत्रकारिता संबंधी कार्य हिंदी नवजागरण से भी जुड़ा हुआ था।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने पत्रकारिता का श्रेष्ठ स्वरूप मुख्य रूप से किस पत्रिका के माध्यम से प्रस्तुत किया?
- हंस
- प्रताप
- सरस्वती
- विशाल भारत
Explanation:
- ‘सरस्वती’ के माध्यम से उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को साहित्यिक, सामाजिक और वैचारिक दृष्टि से प्रभावशाली बनाया।
- उनका संपादन हिंदी नवजागरण के महत्वपूर्ण चरण से जुड़ा है।
हिंदी में पहली बार समालोचना को स्थापित करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
- भारतेंदु हरिश्चंद्र
- बालकृष्ण भट्ट
- महावीरप्रसाद द्विवेदी
- प्रेमचंद
Explanation:
- महावीरप्रसाद द्विवेदी को हिंदी में समालोचना को स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है।
- उन्होंने साहित्य के मूल्यांकन को तार्किक और व्यवस्थित दृष्टि प्रदान करने में योगदान दिया।
महावीरप्रसाद द्विवेदी ने भारतीय पुरातत्व और इतिहास के क्षेत्र में किस प्रकार का कार्य किया?
- केवल अनुवाद कार्य
- केवल कविता लेखन
- खोजपरक कार्य
- केवल कहानी लेखन
Explanation:
- उन्होंने भारतीय पुरातत्व एवं इतिहास पर खोजपरक कार्य किए।
- उनकी विद्वता केवल साहित्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि अनेक ज्ञान-क्षेत्रों तक विस्तृत थी।
निम्नलिखित में से कौन-सी महावीरप्रसाद द्विवेदी की अर्थशास्त्र से संबंधित पुस्तक है?
- महिला मोद
- द्विवेदी काव्य माला
- संपत्तिशास्त्र
- अद्भुत आलाप
Explanation:
- ‘संपत्तिशास्त्र’ महावीरप्रसाद द्विवेदी की अर्थशास्त्र से संबंधित पुस्तक है।
- यह उनकी बहुआयामी विद्वता का उदाहरण है।
‘महिला मोद’ किस प्रकार की पुस्तक है?
- अर्थशास्त्र से संबंधित
- दर्शन से संबंधित
- महिला-उपयोगी पुस्तक
- इतिहास से संबंधित
Explanation:
- ‘महिला मोद’ को महिला-उपयोगी पुस्तक के रूप में बताया गया है।
- महावीरप्रसाद द्विवेदी के लेखन में सामाजिक विषयों को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला।
महावीरप्रसाद द्विवेदी की कविताएँ किस कृति में संकलित हैं?
- अद्भुत आलाप
- साहित्य-संदर्भ
- द्विवेदी काव्य माला
- संपत्तिशास्त्र
Explanation:
- ‘द्विवेदी काव्य माला’ में महावीरप्रसाद द्विवेदी की कविताएँ संकलित हैं।
- वे निबंध, आलोचना, अनुवाद और अन्य विधाओं के साथ कविता से भी जुड़े थे।
महावीरप्रसाद द्विवेदी का संपूर्ण साहित्य कितने खंडों में प्रकाशित हुआ है?
- 10 खंड
- 12 खंड
- 15 खंड
- 20 खंड
Explanation:
- उनका संपूर्ण साहित्य ‘महावीरप्रसाद द्विवेदी रचनावली’ के पंद्रह खंडों में प्रकाशित हुआ है।
- यह उनके व्यापक साहित्यिक योगदान को दर्शाता है।
महावीरप्रसाद द्विवेदी को किन-किन क्षेत्रों का विद्वान माना जाता है?
- केवल कवि और कहानीकार
- केवल पत्रकार और संपादक
- केवल इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता
- संपादक, भाषावैज्ञानिक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, समालोचक और अनुवादक
Explanation:
- महावीरप्रसाद द्विवेदी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे।
- उन्हें संपादक, भाषावैज्ञानिक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, वैज्ञानिक चिंतन एवं लेखन के स्थापक, समालोचक और अनुवादक के रूप में जाना जाता है।
महावीरप्रसाद द्विवेदी के लेखन की प्रमुख विशेषताओं में क्या शामिल है?
- केवल कल्पनाशीलता
- केवल श्रृंगारिकता
- विद्वता, बहुज्ञता, सरसता और व्यंग्य की छटा
- केवल रहस्यवाद
Explanation:
- उनके लेखन में विद्वता और बहुज्ञता के साथ सरसता प्रमुख विशेषता है।
- उनकी रचनाओं में व्यंग्य की प्रभावशाली छटा भी दिखाई देती है।
‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ निबंध का मूल उद्देश्य क्या है?
- स्त्री-शिक्षा का विरोध करना
- केवल प्राचीन शिक्षा-पद्धति का वर्णन करना
- स्त्री-शिक्षा के विरोध में दिए जाने वाले कुतर्कों का तार्किक खंडन करना
- केवल पुरुष शिक्षा का समर्थन करना
Explanation:
- निबंध का मूल उद्देश्य स्त्री-शिक्षा के विरोध में प्रस्तुत किए जाने वाले आधारहीन और तर्कहीन विचारों का खंडन करना है।
- इससे लेखक की सामाजिक सुधार और तार्किक चिंतन की दृष्टि स्पष्ट होती है।
‘नौबतखाने में इबादत’ के लेखक कौन हैं?
- हरिशंकर परसाई
- यतींद्र मिश्र
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation:
- यतींद्र मिश्र ‘नौबतखाने में इबादत’ के लेखक हैं।
- यह पाठ प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व और संगीत-साधना पर आधारित व्यक्ति-चित्र है।
यतींद्र मिश्र का जन्म किस वर्ष हुआ था?
- 1975
- 1976
- 1977
- 1978
Explanation:
- यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में हुआ था।
- उनका जन्म अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ।
यतींद्र मिश्र का जन्म कहाँ हुआ था?
- लखनऊ
- वाराणसी
- प्रयागराज
- अयोध्या
Explanation:
- यतींद्र मिश्र का जन्म अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
- उनकी रचनात्मक रुचियों में कविता, संगीत और ललित कलाओं का विशेष स्थान है।
यतींद्र मिश्र ने हिंदी में एम.ए. कहाँ से किया?
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- लखनऊ विश्वविद्यालय
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
- दिल्ली विश्वविद्यालय
Explanation:
- उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से हिंदी में एम.ए. किया।
यतींद्र मिश्र ने सन् 1999 में किस सांस्कृतिक न्यास का संचालन शुरू किया?
- कला भारती न्यास
- साहित्य संस्कृति न्यास
- विमला देवी फाउंडेशन
- अयोध्या कला परिषद
Explanation:
- सन् 1999 में यतींद्र मिश्र ने साहित्य और कलाओं के संवर्द्धन एवं अनुशीलन के लिए ‘विमला देवी फाउंडेशन’ का संचालन किया।
यतींद्र मिश्र के निम्नलिखित में से कौन-सा काव्य-संग्रह है?
- यदा-कदा
- कामायनी
- उर्वशी
- साकेत
Explanation:
- ‘यदा-कदा’ यतींद्र मिश्र का काव्य-संग्रह है।
- उनके अन्य काव्य-संग्रहों में ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’ और ‘ड्योढ़ी पर आलाप’ शामिल हैं।
‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’ किसकी कृति है?
- कुँवर नारायण
- केदारनाथ सिंह
- यतींद्र मिश्र
- मंगलेश डबराल
Explanation:
- ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’ यतींद्र मिश्र का काव्य-संग्रह है।
‘ड्योढ़ी पर आलाप’ किस लेखक का काव्य-संग्रह है?
- निराला
- अज्ञेय
- रघुवीर सहाय
- यतींद्र मिश्र
Explanation:
- ‘ड्योढ़ी पर आलाप’ यतींद्र मिश्र के प्रमुख काव्य-संग्रहों में से एक है।
यतींद्र मिश्र ने किस शास्त्रीय गायिका के जीवन और संगीत-साधना पर पुस्तक लिखी?
- किशोरी अमोनकर
- गिरिजा देवी
- एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी
- बेगम अख्तर
Explanation:
- यतींद्र मिश्र ने प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर ‘गिरिजा’ नामक पुस्तक लिखी।
‘गिरिजा’ पुस्तक किससे संबंधित है?
- उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ
- कुँवर नारायण
- गिरिजा देवी
- द्विजदेव
Explanation:
- ‘गिरिजा’ प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर आधारित पुस्तक है।
यतींद्र मिश्र ने रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की किस कृति का सह-संपादन किया?
- कवितावली
- रसिकप्रिया
- द्विजदेव की ग्रंथावली
- सतसई
Explanation:
- यतींद्र मिश्र ने द्विजदेव की ग्रंथावली (2000) का सह-संपादन किया।
- द्विजदेव को रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवियों में माना जाता है।
‘नौबतखाने में इबादत’ किस प्रसिद्ध कलाकार पर लिखा गया व्यक्ति-चित्र है?
- उस्ताद जाकिर हुसैन
- पंडित रविशंकर
- उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ
- पंडित भीमसेन जोशी
Explanation:
- ‘नौबतखाने में इबादत’ प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व और संगीत-साधना पर आधारित व्यक्ति-चित्र है।
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ किस वाद्य के लिए प्रसिद्ध थे?
- तबला
- सारंगी
- सितार
- शहनाई
Explanation:
- उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ शहनाई के महान वादक थे।
- उन्होंने शहनाई को शास्त्रीय संगीत के प्रमुख मंच तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘नौबतखाने में इबादत’ में मुख्य रूप से किस विषय को प्रमुखता दी गई है?
- राजनीतिक संघर्ष
- ग्रामीण जीवन
- संगीत-साधना और बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्तित्व
- प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- पाठ में बिस्मिल्ला खाँ की संगीत-साधना, लगन, रुचियों, अंतर्मन और व्यक्तित्व का संवेदनशील चित्रण किया गया है।
लेखक के अनुसार संगीत को किस रूप में समझना चाहिए?
- केवल मनोरंजन
- केवल व्यवसाय
- केवल प्रदर्शन
- आराधना
Explanation:
- पाठ में संगीत को आराधना के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- सच्ची संगीत-साधना के लिए नियम, शास्त्र, अभ्यास, गुरु-शिष्य परंपरा और पूर्ण तन्मयता आवश्यक मानी गई है।
संगीत के अभ्यास के लिए पाठ में किस परंपरा को आवश्यक बताया गया है?
- लोक परंपरा
- राजदरबारी परंपरा
- गुरु-शिष्य परंपरा
- पारिवारिक परंपरा
Explanation:
- पाठ के अनुसार संगीत के शास्त्र से परिचय के साथ उसका निरंतर अभ्यास आवश्यक है।
- इस अभ्यास के लिए गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व है।
बिस्मिल्ला खाँ की संगीत-साधना में किन गुणों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है?
- धन और प्रसिद्धि
- प्रतियोगिता और प्रदर्शन
- लगन और धैर्य
- यात्रा और मनोरंजन
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ में संगीत के प्रति लगन और धैर्य विशेष रूप से विद्यमान था।
- इसी निरंतर साधना के कारण वे वृद्धावस्था में भी संगीत का अभ्यास करते रहे।
यतींद्र मिश्र के अनुसार संगीत-साधना के लिए निम्नलिखित में से क्या आवश्यक नहीं बल्कि अनिवार्य है?
- पूर्ण तन्मयता
- धैर्य
- मंथन
- केवल प्रसिद्धि प्राप्त करना
Explanation:
- संगीत-साधना के लिए पूर्ण तन्मयता, धैर्य और मंथन आवश्यक हैं।
- साधना का उद्देश्य केवल प्रसिद्धि प्राप्त करना नहीं है।
‘नौबतखाने में इबादत’ की भाषा की प्रमुख विशेषता क्या है?
- अत्यंत कठिन और क्लिष्ट
- केवल संस्कृतनिष्ठ
- सहज और प्रवाहमयी
- केवल उर्दूनिष्ठ
Explanation:
- पाठ की भाषा सहज, प्रवाहमयी और प्रसंगों-संदर्भों से भरपूर है।
- लेखक ने संगीत और कलाकार के व्यक्तित्व को संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत किया है।
यतींद्र मिश्र को निम्नलिखित में से कौन-सा पुरस्कार प्राप्त हुआ?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- भारत भूषण अग्रवाल कविता सम्मान
- पुलित्जर पुरस्कार
- नोबेल पुरस्कार
Explanation:
- यतींद्र मिश्र को भारत भूषण अग्रवाल कविता सम्मान सहित कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
- उन्हें हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार और ऋतुराज सम्मान भी प्राप्त हुआ।
‘नौबतखाने में इबादत’ किस विधा का उदाहरण है?
- आत्मकथा
- यात्रावृत्तांत
- कहानी
- व्यक्ति-चित्र
Explanation:
- ‘नौबतखाने में इबादत’ उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया व्यक्ति-चित्र है।
- इसमें लेखक ने उनके व्यक्तित्व, संगीत-रुचि, साधना और जीवन-दर्शन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
‘नौबतखाने में इबादत’ के लेखक कौन हैं?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- यतीन्द्र मिश्र
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
- विष्णु खरे
Explanation:
- ‘नौबतखाने में इबादत’ के लेखक यतीन्द्र मिश्र हैं।
- यह आलेख उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, संगीत-साधना और काशी-प्रेम पर केंद्रित है।
‘नौबतखाने में इबादत’ का केंद्रीय व्यक्तित्व कौन है?
- कंठे महाराज
- तानसेन
- उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ
- अलीबख्श खाँ
Explanation:
- इस आलेख का केंद्रीय व्यक्तित्व उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ हैं।
- लेख में उनके शहनाई-वादन, साधना, आस्था और काशी से लगाव का चित्रण है।
बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था?
- शम्सुद्दीन
- अमीरुद्दीन
- पैगंबरबख्श
- सलार हुसैन
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम अमीरुद्दीन था।
- बचपन में ही उन्होंने शहनाई के प्रति गहरी रुचि विकसित कर ली थी।
बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कहाँ हुआ था?
- काशी, उत्तर प्रदेश
- पटना, बिहार
- डुमराँव, बिहार
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव, बिहार में हुआ था।
- डुमराँव शहनाई की रीड (नरकट) के लिए प्रसिद्ध था।
बिस्मिल्ला खाँ के पहले गुरु और उस्ताद कौन थे?
- सादिक हुसैन
- तानसेन
- अलीबख्श खाँ
- कंठे महाराज
Explanation:
- अलीबख्श खाँ बिस्मिल्ला खाँ के मामा और गुरु थे।
- बालाजी मंदिर के नौबतखाने में उन्होंने बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई का रियाज़ कराया।
बालाजी मंदिर का नौबतखाना किस वाद्य की साधना से जुड़ा था?
- तबला
- सारंगी
- सितार
- शहनाई
Explanation:
- बालाजी मंदिर के नौबतखाने में शहनाई बजाई जाती थी।
- यहीं बालक अमीरुद्दीन ने नियमित रियाज़ किया।
बिस्मिल्ला खाँ के बड़े भाई का नाम क्या था?
- अलीबख्श
- सादिक हुसैन
- शम्सुद्दीन
- पैगंबरबख्श
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ के बड़े भाई का नाम शम्सुद्दीन था।
- बाल्यावस्था में अमीरुद्दीन अपने बड़े भाई के साथ रियाज़ के लिए मंदिर जाते थे।
शहनाई किस प्रकार का वाद्य है?
- तंत्री वाद्य
- घन वाद्य
- अवनद्ध वाद्य
- सुषिर वाद्य
Explanation:
- शहनाई सुषिर वाद्य है।
- सुषिर वाद्य वे वाद्य हैं जिनमें वायु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
शहनाई की रीड (नरकट) के लिए कौन-सा स्थान प्रसिद्ध था?
- लखनऊ
- प्रयागराज
- डुमराँव
- गया
Explanation:
- डुमराँव शहनाई की रीड या नरकट के लिए प्रसिद्ध था।
- सोन नदी के किनारे मिलने वाला नरकट शहनाई के निर्माण में उपयोगी था।
बिस्मिल्ला खाँ किस वाद्य के महान कलाकार थे?
- सारंगी
- तबला
- सितार
- शहनाई
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ शहनाई को शास्त्रीय संगीत के ऊँचे मंच तक पहुँचाने वाले महान कलाकार थे।
- उनकी शहनाई-वादन शैली भारतीय संगीत की महत्वपूर्ण पहचान बनी।
बिस्मिल्ला खाँ अपने जीवन में किस चीज़ की तलाश को सबसे महत्वपूर्ण मानते थे?
- धन की
- प्रसिद्धि की
- सुर की
- राजकीय सम्मान की
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ जीवनभर सुर की तलाश में रहे।
- वे प्रार्थना करते थे कि उनके मालिक उन्हें ऐसा सुर दें जिसमें सच्चे आँसू पैदा करने वाली तासीर हो।
बिस्मिल्ला खाँ के अनुसार सच्चा सुर किससे संबंधित था?
- केवल तकनीकी अभ्यास से
- धन-संपत्ति से
- ईश्वरीय अनुग्रह से
- राजकीय पुरस्कार से
Explanation:
- वे सुर को ईश्वरीय उपहार मानते थे।
- नमाज़ और सज़दे में भी वे सच्चे सुर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते थे।
मुहर्रम के दस दिनों में बिस्मिल्ला खाँ क्या नहीं करते थे?
- काशी जाते थे
- रियाज़ करते थे
- शहनाई बजाते और संगीत कार्यक्रमों में जाते थे
- गंगा के किनारे जाते थे
Explanation:
- मुहर्रम के दस दिनों को वे शोक-काल के रूप में मानते थे।
- इस अवधि में वे शहनाई नहीं बजाते और संगीत कार्यक्रमों में भी नहीं जाते थे।
मुहर्रम की आठवीं तारीख को बिस्मिल्ला खाँ कहाँ जाकर नौहा बजाते थे?
- संकटमोचन मंदिर
- बालाजी मंदिर
- पंचगंगा घाट
- दालमंडी
Explanation:
- मुहर्रम की आठवीं तारीख को वे दालमंडी तक पैदल जाकर नौहा बजाते थे।
- उस दिन राग के बजाय अज़ादारी की भावना प्रमुख रहती थी।
बिस्मिल्ला खाँ को बचपन में संगीत की प्रेरणा किन गायिका बहनों से मिली?
- गौहर और मलका
- रसूलनबाई और बतूलनबाई
- विद्याधरी और सिद्धेश्वरी
- कुलसुम और सुलोचना
Explanation:
- रसूलनबाई और बतूलनबाई गायिका बहनें थीं।
- उनके ठुमरी, टप्पा और दादरा जैसे गायन से बालक अमीरुद्दीन प्रभावित हुआ।
बिस्मिल्ला खाँ की काशी के प्रति भावना को किस रूप में समझा जा सकता है?
- केवल जन्मभूमि के प्रति लगाव
- केवल रोजगार का संबंध
- संगीत, संस्कृति और आस्था से जुड़ा गहरा प्रेम
- केवल पर्यटन का आकर्षण
Explanation:
- काशी उनके लिए केवल एक शहर नहीं बल्कि संगीत, संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र थी।
- वे शहनाई और काशी को धरती की जन्नत मानते थे।
‘नौबतखाने में इबादत’ में काशी किस सांस्कृतिक विशेषता का प्रतीक है?
- केवल राजनीतिक संस्कृति
- केवल ग्रामीण संस्कृति
- गंगा-जमुनी संस्कृति
- केवल औद्योगिक संस्कृति
Explanation:
- काशी में गंगा, विश्वनाथ, संगीत, होली, मुहर्रम और ताजिया जैसी विविध परंपराएँ साथ दिखाई देती हैं।
- यह विविधता गंगा-जमुनी संस्कृति की समन्वयकारी भावना को दर्शाती है।
‘भारतरत्न शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं’ कथन किससे संबंधित है?
- अलीबख्श खाँ
- शम्सुद्दीन
- बिस्मिल्ला खाँ
- कंठे महाराज
Explanation:
- यह कथन बिस्मिल्ला खाँ की विनम्रता और सहज व्यक्तित्व को दिखाता है।
- भारतरत्न मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी नहीं छोड़ी।
बिस्मिल्ला खाँ को भारतरत्न किस क्षेत्र में योगदान के लिए मिला?
- साहित्य
- चित्रकला
- नृत्य
- शहनाई वादन एवं संगीत
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ भारतीय शहनाई वादन और संगीत के महान कलाकार थे।
- उनकी साधना ने शहनाई को शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट प्रतिष्ठा दिलाई।
बिस्मिल्ला खाँ का निधन कब हुआ?
- 10 फरवरी 1975
- 15 अगस्त 2005
- 21 अगस्त 2006
- 26 जनवरी 2007
Explanation:
- उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का निधन 21 अगस्त 2006 को हुआ।
- उस समय उनकी आयु लगभग 90 वर्ष थी।
‘नौबतखाने में इबादत’ शीर्षक बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व के किस पक्ष को सबसे अधिक उभारता है?
- उनके राजनीतिक जीवन को
- उनके व्यापारिक जीवन को
- संगीत-साधना को इबादत के रूप में देखने की भावना को
- उनके पारिवारिक जीवन को
Explanation:
- बिस्मिल्ला खाँ के लिए संगीत केवल कला नहीं बल्कि इबादत और साधना था।
- वे जीवनभर सच्चे सुर की तलाश में रियाज़ करते रहे।
- शीर्षक उनके संगीत और आध्यात्मिक साधना के गहरे संबंध को व्यक्त करता है।
भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म किस सन् में हुआ था?
- 1901
- 1905
- 1910
- 1915
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म सन् 1905 में हुआ था।
- उनका जन्म तत्कालीन पंजाब के अंबाला ज़िले के सोहाना गाँव में हुआ था।
भदंत आनंद कौसल्यायन का बचपन का नाम क्या था?
- आनंद दास
- रामदास
- हरनाम दास
- गोविंद दास
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन के बचपन का नाम हरनाम दास था।
भदंत आनंद कौसल्यायन ने बी.ए. की शिक्षा कहाँ से प्राप्त की थी?
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- पटना विश्वविद्यालय
- नेशनल कॉलेज, लाहौर
Explanation:
- उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया था।
भदंत आनंद कौसल्यायन किस धर्म के भिक्षु थे?
- जैन धर्म
- हिंदू धर्म
- बौद्ध धर्म
- सिख धर्म
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन बौद्ध भिक्षु थे।
- उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
भदंत आनंद कौसल्यायन लंबे समय तक किस महापुरुष के साथ वर्धा में रहे?
- जवाहरलाल नेहरू
- सुभाषचंद्र बोस
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- महात्मा गांधी
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन लंबे समय तक महात्मा गांधी के साथ वर्धा में रहे।
- वे गांधी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से विशेष रूप से प्रभावित थे।
भदंत आनंद कौसल्यायन का निधन किस सन् में हुआ था?
- 1980
- 1985
- 1988
- 1990
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन का निधन सन् 1988 में हुआ था।
भदंत आनंद कौसल्यायन की कितनी से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई थीं?
- 10
- 15
- 20
- 50
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन की 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना भदंत आनंद कौसल्यायन की है?
- भारत-दुर्दशा
- शिरीष के फूल
- भिक्षु के पत्र
- कामायनी
Explanation:
- ‘भिक्षु के पत्र’ भदंत आनंद कौसल्यायन की प्रमुख रचनाओं में शामिल है।
- उनकी अन्य रचनाओं में ‘जो भूल ना सका’, ‘आह! ऐसी दरिद्रता’, ‘बहानेबाजी’ आदि शामिल हैं।
‘जो भूल ना सका’ किसकी रचना है?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- भदंत आनंद कौसल्यायन
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
- जैनेन्द्र कुमार
Explanation:
- ‘जो भूल ना सका’ भदंत आनंद कौसल्यायन की प्रमुख पुस्तकों में से एक है।
भदंत आनंद कौसल्यायन की किस प्रकार की रचनाएँ विशेष रूप से चर्चित रही हैं?
- केवल उपन्यास
- केवल नाटक
- केवल कविताएँ
- निबंध, संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत
Explanation:
- उनके निबंध, संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत काफी चर्चित रहे।
- उनकी भाषा सरल, सहज और बोलचाल की थी।
भदंत आनंद कौसल्यायन ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए क्या किया?
- राजनीतिक आंदोलन चलाया
- केवल विद्यालय स्थापित किए
- अपना सारा जीवन समर्पित किया
- केवल विदेशी यात्राएँ कीं
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
- उन्होंने देश-विदेश की अनेक यात्राएँ भी कीं।
भदंत आनंद कौसल्यायन ने किस संस्था के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया?
- साहित्य अकादमी
- भारतीय ज्ञानपीठ
- हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग
- संगीत नाटक अकादमी
Explanation:
- उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग तथा राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, वर्धा के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण कार्य किया।
राष्ट्र भाषा प्रचार समिति किस स्थान से संबंधित है?
- प्रयाग
- लाहौर
- पटना
- वर्धा
Explanation:
- राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, वर्धा के माध्यम से भदंत आनंद कौसल्यायन ने हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया।
भदंत आनंद कौसल्यायन की रचनात्मकता को किससे व्यापकता और समृद्धि मिली?
- केवल शिक्षा से
- केवल राजनीति से
- देश-विदेश के भ्रमण से
- केवल धार्मिक गतिविधियों से
Explanation:
- देश-विदेश के भ्रमण ने उन्हें व्यापक अनुभव प्रदान किया।
- इन यात्राओं ने उनकी सृजनात्मकता को भी समृद्ध किया।
भदंत आनंद कौसल्यायन किस व्यक्तित्व से विशेष रूप से प्रभावित थे?
- सुभाषचंद्र बोस
- डॉ. भीमराव आंबेडकर
- रवींद्रनाथ ठाकुर
- महात्मा गांधी
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन गांधी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से विशेष प्रभावित थे।
- वे लंबे समय तक गांधी जी के साथ वर्धा में भी रहे।
‘संस्कृति’ निबंध का मुख्य विषय क्या है?
- केवल बौद्ध धर्म
- केवल गांधीवाद
- सभ्यता और संस्कृति से जुड़े प्रश्न
- केवल हिंदी भाषा का इतिहास
Explanation:
- ‘संस्कृति’ निबंध में सभ्यता और संस्कृति की अवधारणाओं तथा उनके संबंध पर विचार किया गया है।
- निबंध अनेक जटिल प्रश्नों पर विचार करने की प्रेरणा देता है।
भदंत आनंद कौसल्यायन के अनुसार सभ्यता किसका परिणाम है?
- धर्म का
- राजनीति का
- अर्थव्यवस्था का
- संस्कृति का
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन के अनुसार सभ्यता संस्कृति का परिणाम है।
- वे संस्कृति को मानव जीवन की व्यापक और अविभाज्य वस्तु मानते हैं।
भदंत आनंद कौसल्यायन मानव संस्कृति को किस प्रकार की वस्तु मानते हैं?
- विभाज्य वस्तु
- क्षेत्रीय वस्तु
- धार्मिक वस्तु
- अविभाज्य वस्तु
Explanation:
- उनकी दृष्टि में मानव संस्कृति अविभाज्य वस्तु है।
- वे संस्कृति को अलग-अलग हिस्सों में बाँटने की प्रवृत्ति को उचित नहीं मानते।
भदंत आनंद कौसल्यायन को संस्कृति का बँटवारा करने वाले लोगों पर कैसी अनुभूति होती है?
- गर्व
- प्रसन्नता
- आश्चर्य और दुख
- उत्साह
Explanation:
- भदंत आनंद कौसल्यायन को संस्कृति का बँटवारा करने वाले लोगों पर आश्चर्य भी होता है और दुख भी।
- उनकी दृष्टि में संस्कृति मानवता से जुड़ी व्यापक और अविभाज्य अवधारणा है।
भदंत आनंद कौसल्यायन के अनुसार जो मनुष्य के लिए कल्याणकारी नहीं है, वह क्या नहीं है?
- धर्म और दर्शन
- ज्ञान और विज्ञान
- शिक्षा और साहित्य
- सभ्यता और संस्कृति
Explanation:
- उनके अनुसार जो चीज मनुष्य के लिए कल्याणकारी नहीं है, वह न सभ्यता है और न संस्कृति।
- इस प्रकार वे सभ्यता और संस्कृति को मानव-कल्याण से जोड़कर देखते हैं।
‘संस्कृति’ निबंध के लेखक कौन हैं?
- रामवृक्ष बेनीपुरी
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
- भदंत आनंद कौसल्यायन
- महादेवी वर्मा
Explanation:
- ‘संस्कृति’ निबंध के लेखक भदंत आनंद कौसल्यायन हैं।
- निबंध में लेखक ने ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ के अर्थ, अंतर तथा संबंध को स्पष्ट किया है।
‘संस्कृति’ निबंध का मुख्य विषय क्या है?
- भारतीय राजनीति
- धार्मिक कर्मकांड
- प्रकृति-चित्रण
- सभ्यता और संस्कृति का अर्थ, अंतर एवं संबंध
Explanation:
- लेखक ने सभ्यता और संस्कृति जैसे प्रचलित शब्दों के वास्तविक अर्थ को समझाने का प्रयास किया है।
- निबंध का केंद्रीय विचार मानव की सृजनात्मक, ज्ञानात्मक और कल्याणकारी प्रवृत्तियों से जुड़ा है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार लेखक ने संस्कृति और सभ्यता को समझाने के लिए किन आविष्कारों का उदाहरण दिया है?
- पहिया और नाव
- अग्नि तथा सुई-धागा
- कागज और छापाखाना
- बिजली और टेलीफोन
Explanation:
- अग्नि तथा सुई-धागे के आविष्कार के माध्यम से लेखक संस्कृति और सभ्यता का अंतर स्पष्ट करते हैं।
- आविष्कार करने की योग्यता और प्रेरणा संस्कृति है, जबकि आविष्कार उसका परिणाम या सभ्यता है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार लेखक के अनुसार संस्कृति किसे कहा जा सकता है?
- केवल भौतिक वस्तुओं को
- केवल पुरानी परंपराओं को
- आविष्कार और सृजन के पीछे की योग्यता, प्रवृत्ति या प्रेरणा को
- केवल सामाजिक व्यवस्था को
Explanation:
- संस्कृति मनुष्य की उस योग्यता, प्रवृत्ति और प्रेरणा का नाम है जिसके कारण वह नई खोज या सृजन करता है।
- यह केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार लेखक के अनुसार सभ्यता किसे कहा जा सकता है?
- मनुष्य की कल्पना को
- मनुष्य की जिज्ञासा को
- मनुष्य के त्याग को
- आविष्कारों तथा उनसे प्राप्त भौतिक साधनों और व्यवस्थाओं को
Explanation:
- सभ्यता संस्कृति से उत्पन्न परिणामों का रूप है।
- खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने, आवागमन और आपसी संबंधों के साधन सभ्यता के उदाहरण हैं।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार संस्कृत व्यक्ति और उसके उत्तराधिकारी में लेखक ने क्या अंतर बताया है?
- उत्तराधिकारी हमेशा अधिक संस्कृत होता है
- संस्कृत व्यक्ति स्वयं खोज करता है, जबकि उत्तराधिकारी को उसका परिणाम अनायास मिल जाता है
- दोनों में कोई अंतर नहीं है
- उत्तराधिकारी खोज को नष्ट कर देता है
Explanation:
- संस्कृत व्यक्ति अपनी योग्यता और प्रेरणा से नई खोज करता है।
- उसका उत्तराधिकारी उस खोज की सुविधा बिना स्वयं वैसी खोज किए प्राप्त कर सकता है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार न्यूटन को ‘संस्कृत’ मानव का उदाहरण क्यों माना गया है?
- क्योंकि वे बहुत धनवान थे
- क्योंकि उन्होंने बहुत यात्रा की
- क्योंकि उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की
- क्योंकि वे शिक्षक थे
Explanation:
- न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की।
- लेखक के अनुसार खोज करने की मौलिक योग्यता और प्रेरणा संस्कृति का उदाहरण है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार आज का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन की तुलना में किस अर्थ में अधिक सभ्य कहा गया है?
- वह न्यूटन से अधिक संस्कृत है
- उसने गुरुत्वाकर्षण की खोज की है
- उसे न्यूटन की खोज सहित अधिक विकसित ज्ञान और सुविधाएँ प्राप्त हैं
- वह न्यूटन से अधिक त्यागी है
Explanation:
- आज के विद्यार्थी को न्यूटन की खोज सहित विज्ञान का बहुत अधिक विकसित ज्ञान सहज रूप से उपलब्ध है।
- इसलिए वह अधिक सभ्य हो सकता है, लेकिन लेखक के तर्क में न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कहा जा सकता।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार संस्कृति की प्रेरणा केवल किन आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है?
- शिक्षा और मनोरंजन
- पेट भरने और तन ढकने जैसी भौतिक आवश्यकताओं तक
- ज्ञान और करुणा
- त्याग और परोपकार
Explanation:
- लेखक के अनुसार संस्कृति की प्रेरणा केवल पेट भरने और तन ढकने जैसी भौतिक आवश्यकताओं से नहीं आती।
- ज्ञान-पिपासा, करुणा, त्याग और परोपकार भी संस्कृति की महत्वपूर्ण प्रेरणाएँ हैं।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार रात के तारों को देखकर न सो पाने वाला मनीषी किस प्रकार की संस्कृति का उदाहरण है?
- भौतिक संस्कृति
- युद्ध संस्कृति
- ज्ञान-पिपासा से प्रेरित संस्कृति
- व्यापारिक संस्कृति
Explanation:
- तारों को देखकर उनके रहस्य जानने की इच्छा ज्ञान-पिपासा का उदाहरण है।
- लेखक इसे मनुष्य की संस्कृत और जिज्ञासु प्रवृत्ति मानते हैं।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार , निबंध में रोगी बच्चे की माँ किस भावना का उदाहरण है?
- स्वार्थ
- जिज्ञासा
- प्रतिस्पर्धा
- त्याग और करुणा
Explanation:
- रोगी बच्चे की माँ उसकी सेवा के लिए रात भर जागती है।
- यह निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और करुणा की संस्कृति का उदाहरण है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार लेखक ने लेनिन को किस रूप में प्रस्तुत किया है?
- वैज्ञानिक के रूप में
- कलाकार के रूप में
- अपनी रोटी दूसरों को दे देने वाले त्यागी व्यक्ति के रूप में
- व्यापारी के रूप में
Explanation:
- निबंध में लेनिन के माध्यम से त्याग और परोपकार की भावना को व्यक्त किया गया है।
- वे अपनी रोटी दूसरों को खिला देते थे।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार कार्ल मार्क्स ने किसके सुख के लिए अपना जीवन कष्ट में बिताया?
- राजाओं के
- व्यापारियों के
- मजदूरों के
- सैनिकों के
Explanation:
- लेखक कार्ल मार्क्स को मानव-कल्याण और त्याग की संस्कृति का उदाहरण मानते हैं।
- उन्होंने मजदूरों के सुख और हित के लिए अपने जीवन में अनेक कष्ट सहे।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार सिद्धार्थ ने घर का त्याग किस उद्देश्य से किया था?
- राज्य प्राप्त करने के लिए
- धन कमाने के लिए
- मानवता को तृष्णा से मुक्त कर सुखी बनाने के उद्देश्य से
- युद्ध करने के लिए
Explanation:
- सिद्धार्थ अर्थात गौतम बुद्ध ने मानवता के कल्याण की खोज में गृहत्याग किया।
- लेखक इसे संस्कृति के सर्वोच्च रूप—त्याग और मानव-कल्याण—का उदाहरण मानते हैं।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार , लेखक के अनुसार सभ्यता किन क्षेत्रों के साधनों और तरीकों से संबंधित है?
- केवल युद्ध से
- केवल शिक्षा से
- खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने, गमनागमन और आपसी संबंधों से
- केवल धार्मिक अनुष्ठानों से
Explanation:
- सभ्यता संस्कृति से उत्पन्न विभिन्न साधनों और व्यवस्थाओं का व्यावहारिक रूप है।
- इसमें जीवन-यापन, आवागमन और सामाजिक संबंधों से जुड़े साधन शामिल हैं।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार , यदि संस्कृति आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराए तो लेखक के अनुसार वह क्या बन जाती है?
- सभ्यता
- श्रेष्ठ संस्कृति
- असंस्कृति
- परंपरा
Explanation:
- संस्कृति का संबंध मानव-कल्याण की भावना से टूट जाए और वह विनाश का साधन बनने लगे तो वह असंस्कृति हो जाती है।
- युद्ध और आत्म-विनाश के साधनों का निर्माण इसका उदाहरण है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार असंस्कृति का परिणाम लेखक के अनुसार क्या होता है?
- सच्ची सभ्यता
- ज्ञान-वृद्धि
- असभ्यता
- मानव-मुक्ति
Explanation:
- कल्याण-भावना से रहित संस्कृति विनाशकारी बन जाती है।
- ऐसी संस्कृति का परिणाम लेखक के अनुसार असभ्यता है।
‘संस्कृति’ निबंध के लेखक के अनुसार संस्कृति को किस प्रकार बाँटना उचित नहीं है?
- ज्ञान और विज्ञान में
- दलबंदी, कट्टरता और संकीर्णता के आधार पर
- व्यक्ति और समाज में
- अतीत और वर्तमान में
Explanation:
- लेखक संस्कृति को अविभाज्य और एकात्म मानते हैं।
- इसे दलबंदी, कट्टरता या संकीर्णता में बाँटना संस्कृति की मूल भावना के विरुद्ध है।
‘संस्कृति’ निबंध के अनुसार सच्ची संस्कृति की प्रमुख विशेषता क्या है?
- भौतिक संपत्ति का संचय
- शक्ति और प्रभुत्व
- आत्म-विनाश के साधनों का विकास
- मानव-कल्याण, करुणा, त्याग और प्रज्ञा
Explanation:
- सच्ची संस्कृति मनुष्य के कल्याण की भावना को जन्म देती है।
- करुणा, त्याग, प्रज्ञा और परोपकार इसके प्रमुख आधार हैं।
- लेखक के अनुसार विनाशकारी प्रवृत्तियों से जुड़ी संस्कृति असंस्कृति बन जाती है।
