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मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?
- रामचंद्र शुक्ल
- धनपत राय श्रीवास्तव
- गोवर्धन दास
- श्यामलाल वर्मा
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।
- हिंदी और उर्दू साहित्य में वे ‘प्रेमचंद’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
मुंशी प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था?
- 31 जुलाई 1880
- 31 जुलाई 1880
- 8 अक्टूबर 1885
- 30 नवंबर 1875
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ था।
- उनका जन्म वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था।
मुंशी प्रेमचंद का जन्मस्थान कौन-सा है?
- लमही, इलाहाबाद
- लमही, लखनऊ
- लमही, वाराणसी
- लमही, कानपुर
Explanation:
- प्रेमचंद का जन्म लमही गाँव में हुआ था, जो वाराणसी के निकट स्थित है।
- लमही को प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
मुंशी प्रेमचंद का निधन कब हुआ था?
- 31 जुलाई 1936
- 8 अक्टूबर 1936
- 15 अगस्त 1935
- 10 जनवरी 1937
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ था।
- उनका जीवन हिंदी-उर्दू साहित्य में यथार्थवादी लेखन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
मुंशी प्रेमचंद मुख्यतः किस साहित्यिक विधा के लिए प्रसिद्ध हैं?
- केवल कविता
- केवल नाटक
- उपन्यास और कहानी
- केवल यात्रा-वृत्तांत
Explanation:
- प्रेमचंद हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार और कहानीकार थे।
- उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री, गरीब और शोषित वर्ग के जीवन को साहित्य में प्रमुख स्थान दिया।
प्रेमचंद को किस उपनाम से जाना जाता है?
- भारतेंदु
- राष्ट्रकवि
- उपन्यास सम्राट
- आधुनिक मीरा
Explanation:
- प्रेमचंद को हिंदी साहित्य में ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है।
- उनके उपन्यासों में भारतीय समाज और सामान्य जनजीवन का व्यापक यथार्थ चित्रण मिलता है।
प्रेमचंद की प्रारंभिक साहित्यिक रचनाएँ मुख्यतः किस भाषा में थीं?
- संस्कृत
- बांग्ला
- उर्दू
- मराठी
Explanation:
- प्रेमचंद ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत उर्दू लेखन से की थी।
- बाद में वे हिंदी के प्रमुख साहित्यकार बने और दोनों भाषाओं में लेखन किया।
प्रेमचंद ने प्रारंभ में किस नाम से लेखन किया था?
- प्रेमचंद
- नवाब राय
- धनपत
- सज्जाद
Explanation:
- प्रेमचंद ने प्रारंभ में ‘नवाब राय’ नाम से लेखन किया।
- बाद में वे ‘प्रेमचंद’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
प्रेमचंद की पहली प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘सोज़-ए-वतन’ किस भाषा में था?
- हिंदी
- संस्कृत
- उर्दू
- बंगाली
Explanation:
- ‘सोज़-ए-वतन’ प्रेमचंद की आरंभिक उर्दू रचनाओं से संबंधित प्रसिद्ध कृति है।
- इसमें देशभक्ति की भावना से जुड़ी कहानियाँ थीं।
‘गोदान’ किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?
- 1926
- 1930
- 1936
- 1942
Explanation:
- प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास ‘गोदान’ 1936 में प्रकाशित हुआ।
- इसे भारतीय कृषक जीवन का महत्त्वपूर्ण यथार्थवादी चित्रण माना जाता है।
प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास ‘गोदान’ का मुख्य पात्र कौन है?
- गोबर
- दातादीन
- होरी
- मेहता
Explanation:
- होरी ‘गोदान’ का केंद्रीय पात्र है।
- उसके माध्यम से भारतीय किसान के आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है।
‘निर्मला’ उपन्यास का प्रमुख विषय क्या है?
- किसान आंदोलन
- दहेज और अनमेल विवाह की समस्या
- औद्योगिक विकास
- स्वतंत्रता आंदोलन
Explanation:
- ‘निर्मला’ में दहेज प्रथा और अनमेल विवाह से उत्पन्न सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं को प्रमुखता दी गई है।
- यह प्रेमचंद के सामाजिक यथार्थवादी लेखन का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।
‘गबन’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- यशपाल
- मुंशी प्रेमचंद
- फणीश्वर नाथ रेणु
Explanation:
- ‘गबन’ प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास है।
- इसमें मध्यवर्गीय जीवन, आभूषणों के प्रति आकर्षण, आर्थिक दबाव और सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे विषय उभरते हैं।
प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ का मुख्य पात्र कौन है?
- होरी
- गोबर
- हामिद
- माधव
Explanation:
- ‘ईदगाह’ का मुख्य पात्र हामिद है।
- कहानी में हामिद का अपनी दादी अमीना के प्रति प्रेम और त्याग अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
‘पूस की रात’ कहानी में मुख्य किसान पात्र कौन है?
- होरी
- हल्कू
- गोबर
- घीसू
Explanation:
- ‘पूस की रात’ का मुख्य पात्र हल्कू है।
- कहानी में किसान की गरीबी, ठंड और आर्थिक विवशता का यथार्थ चित्रण मिलता है।
‘कफन’ कहानी के प्रमुख पात्र कौन हैं?
- हामिद और अमीना
- घीसू और माधव
- होरी और धनिया
- जुम्मन और अलगू
Explanation:
- ‘कफन’ के प्रमुख पात्र घीसू और माधव हैं।
- कहानी अत्यधिक गरीबी, सामाजिक विडंबना और मानवीय संवेदनाओं के जटिल रूप को सामने लाती है।
‘पंच परमेश्वर’ कहानी में किन दो पात्रों की मित्रता प्रमुख है?
- होरी और गोबर
- जुम्मन शेख और अलगू चौधरी
- घीसू और माधव
- हामिद और मोहसिन
Explanation:
- ‘पंच परमेश्वर’ में जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की मित्रता कथा का प्रमुख आधार है।
- कहानी न्याय और मित्रता के बीच संबंध तथा न्याय की निष्पक्षता को उजागर करती है।
प्रेमचंद के साहित्य की प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है?
- केवल कल्पना और रोमांस
- केवल प्रकृति-चित्रण
- सामाजिक यथार्थ का चित्रण
- केवल पौराणिक कथाएँ
Explanation:
- प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक यथार्थ को विशेष महत्त्व प्राप्त है।
- उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री, गरीब और शोषित वर्ग की समस्याओं को साहित्य का विषय बनाया।
प्रेमचंद के साहित्य में निम्नलिखित में से किस वर्ग को विशेष स्थान मिला?
- केवल राजघराने
- केवल उच्च अधिकारी
- किसान, मजदूर और शोषित वर्ग
- केवल व्यापारी वर्ग
Explanation:
- प्रेमचंद ने सामान्य जनता के जीवन को साहित्य के केंद्र में रखा।
- उनकी रचनाओं में किसान, मजदूर, गरीब, स्त्रियाँ और वंचित वर्ग की समस्याएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं।
प्रेमचंद के साहित्य को किस साहित्यिक प्रवृत्ति से विशेष रूप से जोड़ा जाता है?
- छायावाद
- रहस्यवाद
- यथार्थवाद
- प्रयोगवाद
Explanation:
- प्रेमचंद का साहित्य यथार्थवादी परंपरा का प्रमुख उदाहरण है।
- उन्होंने तत्कालीन भारतीय समाज की वास्तविक समस्याओं, विषमताओं और संघर्षों को साहित्य में अभिव्यक्त किया।
‘गोदान’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- फणीश्वर नाथ रेणु
- मुंशी प्रेमचंद
- यशपाल
Explanation:
- ‘गोदान’ के रचनाकार मुंशी प्रेमचंद हैं।
- यह हिंदी साहित्य की अत्यंत प्रसिद्ध यथार्थवादी कृति है।
मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?
- गोवर्धन दास
- धनपत राय श्रीवास्तव
- रामचंद्र राय श्रीवास्तव
- श्यामलाल वर्मा
Explanation:
- मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।
- हिंदी साहित्य में वे ‘प्रेमचंद’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
‘गोदान’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1926 ई.
- 1930 ई.
- 1936 ई.
- 1940 ई.
Explanation:
- ‘गोदान’ का प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था।
- इसे प्रेमचंद की अंतिम पूर्ण कृतियों में प्रमुख स्थान प्राप्त है।
‘गोदान’ किस विधा की रचना है?
- कहानी
- नाटक
- निबंध
- उपन्यास
Explanation:
- ‘गोदान’ उपन्यास विधा की रचना है।
- यह यथार्थवादी परंपरा में भारतीय कृषक जीवन का व्यापक चित्र प्रस्तुत करता है।
‘गोदान’ को किस रूप में जाना जाता है?
- श्रमिक जीवन का महाकाव्य
- नारी जीवन का महाकाव्य
- कृषक जीवन का महाकाव्य
- औद्योगिक जीवन का महाकाव्य
Explanation:
- ‘गोदान’ को प्रायः कृषक जीवन का महाकाव्य कहा जाता है।
- इसमें किसान के आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संघर्षों का व्यापक चित्रण है।
‘गोदान’ का केंद्रीय पात्र कौन है?
- गोबर
- दातादीन
- होरी
- मेहता
Explanation:
- होरी ‘गोदान’ का केंद्रीय पात्र है।
- वह एक साधारण, धर्मभीरु किसान है, जिसकी गाय पाने की इच्छा उसके जीवन-संघर्ष का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
होरी की पत्नी का नाम क्या है?
- झुनिया
- सोना
- धनिया
- रूपा
Explanation:
- धनिया होरी की पत्नी है।
- वह साहसी, स्वाभिमानी और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने वाली स्त्री के रूप में प्रस्तुत हुई है।
होरी की सबसे बड़ी लालसा क्या थी?
- जमीन खरीदना और गोदान करना
- शहर जाना और गोदान करना
- गाय प्राप्त करना और गोदान करना
- खेती करना और गोदान करना
Explanation:
- होरी की सबसे बड़ी इच्छा गाय प्राप्त करने की थी।
- गोदान की धार्मिक-सामाजिक धारणा उसके जीवन की आकांक्षा और संघर्ष से जुड़ी हुई है।
होरी और धनिया के पुत्र का नाम क्या है?
- हीरा
- शोभा
- गोबर
- भोला
Explanation:
- होरी और धनिया के पुत्र का नाम गोबर है।
- उसका वास्तविक नाम गोवर्धन बताया जाता है और वह नई पीढ़ी के विद्रोही तेवरों का प्रतिनिधित्व करता है।
होरी और धनिया के पुत्र गोबर किसका प्रतीक माना जाता है?
- पुरानी परंपराओं का
- सामंती व्यवस्था का
- नई पीढ़ी और विद्रोही चेतना का
- महाजनी व्यवस्था का
Explanation:
- गोबर पुरानी रूढ़ियों और शोषणकारी व्यवस्था के प्रति नई पीढ़ी के विद्रोही दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।
- वह परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय उनका विरोध करने की कोशिश करता है।
झुनिया किसकी बेटी थी?
- दातादीन की
- राय साहब की
- भोला की
- नोखेराम की
Explanation:
- झुनिया भोला की बेटी थी।
- उसका संबंध गोबर से होता है और वह होरी-धनिया के परिवार से जुड़ जाती है।
होरी की बेटियों के नाम क्या हैं?
- झुनिया और सिलिया
- रूपा और सोना
- मालती और गोविंदी
- धनिया और सोना
Explanation:
- होरी की बेटियों के नाम रूपा और सोना हैं।
- उनके विवाह और पारिवारिक परिस्थितियाँ भी उपन्यास में किसान परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को सामने लाती हैं।
होरी के भाइयों के नाम क्या हैं?
- गोबर और भोला
- हीरा और शोभा
- दातादीन और मातादीन
- नोखेराम और पटेश्वरी
Explanation:
- होरी के भाइयों के नाम हीरा और शोभा हैं।
- पारिवारिक संबंधों और संपत्ति से जुड़ी ईर्ष्या तथा तनाव उपन्यास की कथा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
होरी की गाय को किसने जहर दिया था?
- गोबर
- भोला
- हीरा
- दातादीन
Explanation:
- होरी के भाई हीरा ने ईर्ष्या के कारण होरी की गाय को जहर दे दिया था।
- यह घटना होरी के जीवन में एक नई समस्या और आर्थिक संकट पैदा करती है।
‘गोदान’ में दातादीन का चरित्र किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है?
- किसान वर्ग
- मजदूर वर्ग
- शोषक ब्राह्मण/महाजनी वर्ग
- औद्योगिक मजदूर वर्ग
Explanation:
- दातादीन गांव के प्रभावशाली और शोषक ब्राह्मण पात्र के रूप में प्रस्तुत है।
- उसके माध्यम से धार्मिक-सामाजिक सत्ता के दुरुपयोग और ग्रामीण शोषण को दिखाया गया है।
दातादीन का पुत्र मातादीन का संबंध किससे था?
- झुनिया
- रूपा
- सिलिया
- सोना
Explanation:
- मातादीन का संबंध सिलिया से था।
- सिलिया दलित चमार समुदाय से संबंधित पात्र है और यह प्रसंग जातिगत भेदभाव तथा सामाजिक पाखंड को उजागर करता है।
‘गोदान’ में पटेश्वरी कौन था?
- जमींदार
- महाजन
- पटवारी
- डॉक्टर
Explanation:
- पटेश्वरी गांव का पटवारी था।
- ग्रामीण प्रशासन और किसानों पर प्रभाव रखने वाले स्थानीय शोषक तंत्र को समझने में उसका चरित्र महत्त्वपूर्ण है।
‘गोदान’ में नोखेराम की भूमिका क्या थी?
- किसान
- गांव का पटवारी
- जमींदार का कारिंदा
- गांव का महाजन
Explanation:
- नोखेराम जमींदार का कारिंदा था।
- उसका चरित्र ग्रामीण किसानों पर जमींदारी व्यवस्था के दबाव और शोषण को दर्शाता है।
‘गोदान’ में झिंगुरी सिंह किस वर्ग से संबंधित था?
- किसान
- मजदूर
- महाजन
- शिक्षक
Explanation:
- झिंगुरी सिंह गांव का महाजन था।
- उसके माध्यम से ऋण और महाजनी व्यवस्था से किसानों के शोषण की समस्या सामने आती है।
‘गोदान’ की ग्रामीण पृष्ठभूमि मुख्यतः किस क्षेत्र से संबंधित है?
- बंगाल
- पंजाब
- उत्तर प्रदेश का अवध क्षेत्र
- राजस्थान
Explanation:
- उपन्यास की ग्रामीण पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र से जुड़ी है।
- बेलारी और सेमरी जैसे स्थानों के माध्यम से ग्रामीण तथा जमींदारी जीवन का चित्रण किया गया है।
‘गोदान’ में बेलारी किस प्रकार की पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करता है?
- औद्योगिक जीवन
- महानगरीय जीवन
- ग्रामीण जीवन
- विदेशी जीवन
Explanation:
- बेलारी ग्रामीण जीवन की पृष्ठभूमि से जुड़ा है।
- यहाँ किसान, खेती, गरीबी, ऋण और ग्रामीण शोषण की समस्याएँ प्रमुख हैं।
‘गोदान’ में राय साहब अमरपाल सिंह कौन थे?
- डॉक्टर
- बैंक मैनेजर
- जमींदार
- महाजन
Explanation:
- राय साहब अमरपाल सिंह सेमरी के जमींदार थे।
- उनके माध्यम से जमींदारी व्यवस्था और किसानों के शोषण के बीच का संबंध सामने आता है।
‘गोदान’ में प्रोफेसर मेहता किस विषय के प्रोफेसर थे?
- इतिहास
- अर्थशास्त्र
- दर्शनशास्त्र
- विज्ञान
Explanation:
- प्रोफेसर मेहता दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे।
- वे आदर्शवादी और प्रगतिशील विचारों वाले पात्र हैं तथा उपन्यास के वैचारिक पक्ष को मजबूत करते हैं।
डॉ. मालती के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?
- रूढ़िवादी दृष्टिकोण
- स्वतंत्र विचारों वाली महिला
- महाजनी मानसिकता
- सामंती सोच
Explanation:
- डॉ. मालती आधुनिक, शिक्षित और स्वतंत्र विचारों वाली महिला हैं।
- वे इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर बनी हैं और आगे चलकर समाज सेवा की ओर उन्मुख होती हैं।
‘गोदान’ में मिस्टर खन्ना किस क्षेत्र से जुड़े थे?
- कृषि
- शिक्षा
- बैंकिंग और चीनी मिल उद्योग
- चिकित्सा
Explanation:
- मिस्टर खन्ना बैंक मैनेजर और चीनी मिल के मालिक थे।
- उनका चरित्र औद्योगिक और पूंजीवादी मानसिकता के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत होता है।
