Skip to content
- वाक्य का अर्थ एवं अनिवार्य तत्त्व
- परिभाषा: सार्थक शब्दों का वह व्यवस्थित समूह जो किसी विचार या भाव को पूर्णतः व्यक्त करता है, ‘वाक्य’ कहलाता है।
- वाक्य के दो मुख्य अंग होते हैं:
- उद्देश्य (Subject): वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाए (उदा. राम पड़ता है)।
- विधेय (Predicate): उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाए (उदा. राम पढ़ता है)।
- वाक्य के अनिवार्य तत्त्व (6): सार्थकता, योग्यता, आकांक्षा, आसक्ति (समीपता), पदक्रम, और अन्वय (मेल)।
- वाक्य का वर्गीकरण (भेद)
- रचना/बनावट के आधार पर (3 भेद)
- अर्थ के आधार पर (8 भेद)
- रचना के आधार पर वाक्य भेद (3 भेद)
- (i) सरल / साधारण वाक्य (Simple Sentence)
- पहचान: जिस वाक्य में केवल एक ही मुख्य उद्देश्य (Subject) और एक ही मुख्य विधेय (Predicate/Verb) होता है।
- विशेषता: इसमें कोई योजक शब्द (कनेक्टर) नहीं होता।
- उदाहरण:
- “सूरज पूरब में उगता है।”
- “राधा और मीरा गाना गाती हैं।” (यहाँ उद्देश्य दो हैं, परंतु क्रिया/विधेय एक ही है, अतः यह भी सरल वाक्य है)।
- (ii) संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)
- पहचान: दो या दो से अधिक स्वतंत्र (प्रधान) उपवाक्य आपस में समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय (योजकों) द्वारा जुड़े होते हैं।
- प्रमुख योजक शब्द: और, एवं, तथा, या, अथवा, किंतु, परंतु, लेकिन, इसलिए, अतः, मगर।
- विशेषता: यदि इन योजकों को हटा दिया जाए, तो दोनों वाक्य अपना स्वतंत्र अर्थ प्रदान करते हैं।
- उदाहरण:
- “वह सुबह गया और शाम को लौट आया।”
- “मैंने बहुत परिश्रम किया, किंतु सफलता नहीं मिली।”
- (iii) मिश्र / मिश्रित वाक्य (Complex Sentence)
- पहचान: जिस वाक्य में एक मुख्य (प्रधान) उपवाक्य हो और अन्य आश्रित (Dependent) उपवाक्य हों।
- प्रमुख योजक शब्द: कि, जो, जितना, उतना, जैसा-वैसा, जब-तब, जहाँ-तहाँ, जिधर-उधर, यदि-तो, क्योंकि, ताकि, यद्यपि-तथापि।
- विशेषता: आश्रित उपवाक्य अपने पूर्ण अर्थ के लिए प्रधान उपवाक्य पर निर्भर रहता है।
- उदाहरण:
- “शिक्षक ने कहा कि कल छुट्टी रहेगी।”
- “यदि तुम परिश्रम करोगे, तो सफल हो जाओगे।”
- “यह वही लड़का है, जिसने कल पुरस्कार जीता था।”
- मिश्र वाक्य के आश्रित उपवाक्य के प्रकार (परीक्षा हेतु विशेष):
- संज्ञा उपवाक्य: जो ‘कि’ से शुरू होते हैं (उदा. उसने कहा कि मैं आऊँगा)।
- विशेषण उपवाक्य: जो ‘जो, जिसे, जिसका’ से शुरू होते हैं (उदा. जो परिश्रम करता है, वह फल पाता है)।
- क्रियाविशेषण उपवाक्य: जो ‘जब, जहाँ, जैसे, यदि’ से शुरू होते हैं और काल, स्थान, रीति या शर्त बताते हैं।
- अर्थ के आधार पर वाक्य भेद (8 भेद)
- विधानवाचक वाक्य (Assertive): किसी कार्य के होने या सामान्य कथन का बोध।
- उदाहरण: “भारत एक महान देश है।”
- निषेधवाचक वाक्य (Negative): कार्य न होने या इनकार का बोध (नहीं, न, मत)।
- उदाहरण: “आज बारिश नहीं होगी।”
- प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative): प्रश्न पूछने का बोध (? चिह्न अनिवार्य)।
- उदाहरण: “आपका नाम क्या है?”
- आज्ञावाचक वाक्य (Imperative): आदेश, प्रार्थना, अनुमति या उपदेश का बोध।
- उदाहरण: “सदा सत्य बोलो।” / “शांत बैठो।”
- इच्छावाचक वाक्य (Optative): इच्छा, शुभकामना, आशीर्वाद या शाप का बोध।
- उदाहरण: “आपकी यात्रा मंगलमय हो।”
- संदेहवाचक वाक्य (Doubtful): कार्य होने में संदेह या संभावना का बोध।
- उदाहरण: “शायद आज धूप निकले।”
- विस्मयादिबोधक वाक्य (Exclamatory): आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा आदि भावों का बोध (! चिह्न)।
- उदाहरण: “वाह! कितना सुंदर दृश्य है।”
- संकेतवाचक / शर्तवाचक वाक्य (Conditional): एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर करे।
- उदाहरण: “यदि फसल अच्छी होगी, तो महँगाई कम होगी।”
- वाक्य रूपांतरण
- सरल से संयुक्त:
- सरल: “सूर्योदय होने पर अंधकार दूर हो गया।”
- संयुक्त: “सूर्योदय हुआ और अंधकार दूर हो गया।”
- सरल से मिश्र:
- सरल: “परिश्रमी व्यक्ति को सफलता मिलती है।”
- मिश्र: “जो व्यक्ति परिश्रमी होता है, उसे सफलता मिलती है।”
- संयुक्त से मिश्र:
- संयुक्त: “उसने मेहनत की और वह प्रथम आया।”
- मिश्र: “चूँकि उसने मेहनत की, इसलिए वह प्रथम आया।”
- परीक्षा के लिए ‘क्विक हैक्स’
- ‘कि’ दिखा ➔ प्रायः मिश्र वाक्य (संज्ञा उपवाक्य)।
- ‘जो/जिसका/जिन्हें’ दिखा ➔ मिश्र वाक्य (विशेषण उपवाक्य)।
- ‘और/तथा/किंतु/परंतु/इसलिए’ दिखा ➔ संयुक्त वाक्य।
- वाक्य में कोई योजक शब्द नहीं और एक ही मुख्य क्रिया है ➔ सरल वाक्य।