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भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म कब हुआ था?
- 9 सितंबर 1849
- 9 सितंबर 1850
- 15 अगस्त 1850
- 6 जनवरी 1851
Explanation:
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म 9 सितंबर 1850 को हुआ था।
- उनका जन्म काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्मस्थान कहाँ था?
- प्रयागराज
- लखनऊ
- काशी (वाराणसी)
- मथुरा
Explanation:
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म काशी में हुआ था।
- काशी उनके साहित्यिक जीवन का भी प्रमुख केंद्र रहा।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के पिता का नाम क्या था?
- बाबू हरिश्चन्द्र
- बाबू गोपालचंद्र ‘गिरिधरदास’
- बालकृष्ण भट्ट
- प्रतापनारायण मिश्र
Explanation:
- उनके पिता बाबू गोपालचंद्र ‘गिरिधरदास’ स्वयं अच्छे कवि थे।
- वे ‘नहुष’ नाटक के रचयिता भी थे।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का काव्य/उर्दू उपनाम क्या था?
- हरिऔध
- दास
- ‘रसामय’ / ‘रसा’
- प्रेमघन
Explanation:
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ‘रसामय’ तथा ‘रसा’ उपनाम से भी जाने जाते थे।
- वे उर्दू में ‘रसा’ उपनाम से कविताएँ लिखते थे।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को ‘भारतेंदु’ की उपाधि कब प्रदान की गई?
- 1875 ई.
- 1876 ई.
- 1880 ई.
- 1885 ई.
Explanation:
- 1880 ई. में देश के विद्वानों ने उन्हें ‘भारतेंदु’ की उपाधि से विभूषित किया।
- ‘भारतेंदु’ का अर्थ ‘भारत का चंद्रमा’ है।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को हिंदी साहित्य में किस उपाधि से जाना जाता है?
- उपन्यास सम्राट
- राष्ट्रकवि
- आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह
- कविकुलगुरु
Explanation:
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह कहा जाता है।
- उन्होंने हिंदी गद्य, नाटक और पत्रकारिता को नई दिशा दी।
‘भारत दुर्दशा’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1875 ई.
- 1878 ई.
- 1880 ई.
- 1881 ई.
Explanation:
- ‘भारत दुर्दशा’ 1880 ई. की महत्वपूर्ण मौलिक नाट्यकृति है।
- इसमें भारत की तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का चित्रण किया गया है।
‘अंधेर नगरी’ किस वर्ष प्रकाशित हुई?
- 1875 ई.
- 1878 ई.
- 1881 ई.
- 1885 ई.
Explanation:
- ‘अंधेर नगरी’ का प्रकाशन 1881 ई. में हुआ।
- यह विवेकहीन और भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य करने वाली प्रसिद्ध रचना है।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रसिद्ध मौलिक नाट्यकृति ‘सत्य हरिश्चंद्र’ किस वर्ष की है?
- 1873 ई.
- 1875 ई.
- 1876 ई.
- 1880 ई.
Explanation:
- ‘सत्य हरिश्चंद्र’ भारतेन्दु की प्रमुख मौलिक नाट्यकृतियों में शामिल है।
- इसका प्रकाशन 1875 ई. से संबंधित है।
‘नीलदेवी’ की विधागत विशेषता क्या है?
- सामाजिक उपन्यास
- व्यंग्य नाटक
- ऐतिहासिक गीतिरूपक
- आत्मकथा
Explanation:
- ‘नीलदेवी’ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रमुख मौलिक रचनाओं में है।
- इसे ऐतिहासिक गीतिरूपक के रूप में जाना जाता है।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का पहला अनूदित नाटक कौन-सा माना जाता है?
- मुद्राराक्षस
- कर्पूरमंजरी
- विद्यासुंदर
- रत्नावली
Explanation:
- ‘विद्यासुंदर’ भारतेन्दु का पहला अनूदित नाटक माना जाता है।
- यह संस्कृत/बांग्ला से अनूदित रचनाओं की परंपरा से संबंधित है।
‘प्रेम मालिका’ किसकी कृति है?
- जयशंकर प्रसाद
- मैथिलीशरण गुप्त
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
- बालकृष्ण भट्ट
Explanation:
- ‘प्रेम मालिका’ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रमुख काव्य कृतियों में से एक है।
- इसका रचना-वर्ष 1871 माना जाता है।
‘विजयायिनी विजय वैजयंती’ किस घटना से संबंधित कविता है?
- 1857 के विद्रोह
- भारत के स्वतंत्रता आंदोलन
- भारतीय सेना की मिस्र विजय
- पानीपत के युद्ध
Explanation:
- ‘विजयायिनी विजय वैजयंती’ भारतीय सेना की मिस्र विजय पर रचित कविता है।
- यह भारतेन्दु की प्रमुख काव्य रचनाओं में शामिल है।
‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है?’ किस प्रकार की रचना है?
- नाटक
- कविता
- प्रसिद्ध व्याख्यान/निबंध
- उपन्यास
Explanation:
- ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है?’ भारतेन्दु की प्रसिद्ध विचारपरक रचना है।
- इसमें देश की उन्नति और राष्ट्रीय चेतना से संबंधित विचार व्यक्त किए गए हैं।
‘कविवचनसुधा’ का प्रकाशन किस वर्ष प्रारंभ हुआ?
- 1865 ई.
- 1868 ई.
- 1873 ई.
- 1874 ई.
Explanation:
- ‘कविवचनसुधा’ का प्रकाशन 1868 ई. में काशी से हुआ।
- यह भारतेन्दु के पत्रकारिता संबंधी महत्वपूर्ण योगदान का उदाहरण है।
‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ का बाद में क्या नाम हो गया?
- कविवचनसुधा
- बालबोधिनी
- हरिश्चंद्र चंद्रिका
- भारत चंद्रिका
Explanation:
- ‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ 1873 ई. में प्रकाशित हुई।
- आठ अंकों के बाद इसका नाम ‘हरिश्चंद्र चंद्रिका’ हो गया।
‘बालबोधिनी’ पत्रिका विशेष रूप से किसके लिए निकाली गई थी?
- बच्चों के लिए
- किसानों के लिए
- स्त्रियों के लिए
- व्यापारियों के लिए
Explanation:
- ‘बालबोधिनी’ का प्रकाशन 1874 ई. में हुआ।
- इसे विशेष रूप से स्त्रियों के लिए निकाली गई हिंदी पत्रिका के रूप में जाना जाता है।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कविता के लिए मुख्यतः किस भाषा का प्रयोग किया?
- खड़ी बोली
- अवधी
- ब्रजभाषा
- भोजपुरी
Explanation:
- भारतेन्दु ने पद्य के लिए मुख्यतः ब्रजभाषा का प्रयोग किया।
- गद्य के लिए उन्होंने परिमार्जित खड़ी बोली को अपनाया।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के गद्य की प्रमुख भाषा कौन-सी थी?
- ब्रजभाषा
- अवधी
- परिमार्जित खड़ी बोली
- मैथिली
Explanation:
- भारतेन्दु ने हिंदी गद्य को परिमार्जित खड़ी बोली के माध्यम से नई दिशा दी।
- भाषा के इस प्रयोग ने आधुनिक हिंदी गद्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ पंक्ति किससे संबंधित है?
- प्रेमचंद
- महावीर प्रसाद द्विवेदी
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
- मैथिलीशरण गुप्त
Explanation:
- यह प्रसिद्ध पंक्ति भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की मातृभाषा संबंधी चेतना को व्यक्त करती है।
- वे भाषा की उन्नति को समाज और राष्ट्र की उन्नति का महत्वपूर्ण आधार मानते थे।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का निधन कब हुआ था?
- 9 सितंबर 1880
- 31 दिसंबर 1884
- 6 जनवरी 1885
- 15 अगस्त 1885
Explanation:
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का निधन 6 जनवरी 1885 को काशी में हुआ।
- उनका निधन मात्र 35 वर्ष की आयु में हुआ था।
मैथिलीशरण गुप्त को महात्मा गांधी ने किस उपाधि से सम्मानित किया था?
- कविवर
- महाकवि
- राष्ट्रकवि
- जनकवि
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त को महात्मा गांधी ने ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी थी।
- उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय जागरण और देशप्रेम का स्वर प्रमुख है।
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब हुआ था?
- 15 अगस्त 1885
- 3 अगस्त 1886
- 2 अक्टूबर 1887
- 3 अगस्त 1888
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को हुआ था।
- उनका जन्म चिरगाँव, झाँसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
मैथिलीशरण गुप्त का जन्मस्थान कहाँ है?
- इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
- वाराणसी, उत्तर प्रदेश
- चिरगाँव, झाँसी, उत्तर प्रदेश
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त का जन्म चिरगाँव में हुआ था।
- चिरगाँव वर्तमान उत्तर प्रदेश के झाँसी क्षेत्र में स्थित है।
मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक उपनाम ‘दद्दा’ किस रूप में प्रसिद्ध है?
- राजनीतिक जीवन में
- पत्रकारिता में
- साहित्यिक जगत में
- शिक्षण क्षेत्र में
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त को साहित्यिक जगत में स्नेहपूर्वक ‘दद्दा’ कहा जाता था।
मैथिलीशरण गुप्त के गुरु कौन थे?
- रामचंद्र शुक्ल
- भारतेंदु हरिश्चंद्र
- आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
- जयशंकर प्रसाद
Explanation:
- आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक गुरु थे।
- द्विवेदी जी के मार्गदर्शन में उन्होंने ‘सरस्वती’ पत्रिका में लेखन प्रारंभ किया।
मैथिलीशरण गुप्त किस युग के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं?
- भारतेंदु युग
- द्विवेदी युग
- छायावाद
- प्रगतिवाद
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के प्रमुख प्रतिनिधि कवि हैं।
- वे खड़ी बोली हिंदी के प्रारंभिक महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं।
मैथिलीशरण गुप्त को खड़ी बोली हिंदी के संदर्भ में किस रूप में जाना जाता है?
- प्रथम गद्य लेखक
- प्रथम नाटककार
- प्रथम महत्वपूर्ण कवियों में से एक
- प्रथम आलोचक
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त खड़ी बोली हिंदी के प्रथम महत्वपूर्ण कवियों में माने जाते हैं।
- उन्होंने खड़ी बोली को काव्य की प्रभावी भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
‘साकेत’ के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- रामधारी सिंह दिनकर
- मैथिलीशरण गुप्त
- सुमित्रानंदन पंत
Explanation:
- ‘साकेत’ मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध काव्य-कृति है।
- इसमें रामकथा की पृष्ठभूमि में उर्मिला के विरह और त्याग को विशेष महत्व दिया गया है।
‘साकेत’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1912
- 1925
- 1931
- 1936
Explanation:
- ‘साकेत’ का प्रकाशन 1931 में हुआ था।
- यह रामकथा पर आधारित प्रमुख काव्य-कृति है।
‘साकेत’ में किस पात्र के विरह का मार्मिक चित्रण मिलता है?
- सीता
- कैकेयी
- उर्मिला
- मंदोदरी
Explanation:
- ‘साकेत’ में उर्मिला के विरह, त्याग और भावनात्मक संघर्ष को प्रमुखता दी गई है।
- यह उपेक्षित नारी पात्र को साहित्यिक केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
‘यशोधरा’ काव्य किसके त्याग पर केंद्रित है?
- सीता
- उर्मिला
- गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा
- द्रौपदी
Explanation:
- ‘यशोधरा’ में गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा के त्याग और विरह को केंद्र में रखा गया है।
- इस कृति की प्रसिद्ध पंक्ति है— “सखि, वे मुझसे कहकर जाते।”
‘यशोधरा’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1925
- 1930
- 1932
- 1935
Explanation:
- ‘यशोधरा’ का प्रकाशन 1932 में हुआ था।
- इसमें यशोधरा के त्याग और नारी की भावनात्मक पीड़ा को अभिव्यक्ति मिली है।
‘भारत-भारती’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1905
- 1910
- 1912
- 1920
Explanation:
- ‘भारत-भारती’ का प्रकाशन 1912 में हुआ था।
- यह देशप्रेम और राष्ट्रीय जागरण से ओत-प्रोत महत्वपूर्ण कृति है।
‘भारत-भारती’ की प्रमुख विशेषता क्या है?
- श्रृंगार वर्णन
- प्रकृति चित्रण
- राष्ट्रीय जागरण और देशप्रेम
- हास्य-व्यंग्य
Explanation:
- ‘भारत-भारती’ में राष्ट्रीय चेतना और देशप्रेम का प्रभावशाली स्वर मिलता है।
- इस कृति ने मैथिलीशरण गुप्त की राष्ट्रवादी कवि के रूप में पहचान को मजबूत किया।
‘जयद्रथ वध’ किसकी प्रमुख कृति है?
- रामधारी सिंह दिनकर
- मैथिलीशरण गुप्त
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
- माखनलाल चतुर्वेदी
Explanation:
- ‘जयद्रथ वध’ मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख खंडकाव्य रचनाओं में शामिल है।
- इसका प्रकाशन 1910 में हुआ था।
‘पंचवटी’ काव्य किस प्रसंग से संबंधित है?
- कृष्ण और कंस
- राम और भरत
- लक्ष्मण और शूर्पणखा
- अर्जुन और कर्ण
Explanation:
- ‘पंचवटी’ में रामकथा की पृष्ठभूमि में लक्ष्मण और शूर्पणखा से संबंधित प्रसंग प्रमुख है।
- यह मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख खंडकाव्य रचनाओं में से एक है।
मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख कविता कौन-सी है?
- कामायनी
- राम की शक्ति पूजा
- मनुष्यता
- कुकुरमुत्ता
Explanation:
- ‘मनुष्यता’ मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध कविता है।
- उनकी काव्य-रचनाओं में मानवता, राष्ट्रीय चेतना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का स्वर मिलता है।
मैथिलीशरण गुप्त को पद्म भूषण से किस वर्ष सम्मानित किया गया?
- 1947
- 1950
- 1954
- 1960
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त को 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
- यह उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए प्राप्त महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मान था।
मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य मुख्यतः किन भावों से जुड़ा है?
- केवल हास्य और व्यंग्य
- केवल रहस्य और रोमांच
- भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय जागरण और नारी गरिमा
- केवल प्रकृति और श्रृंगार
Explanation:
- मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय जागरण का प्रमुख स्वर है।
- उन्होंने उर्मिला और यशोधरा जैसे उपेक्षित या कम चर्चित नारी पात्रों को काव्य में प्रमुखता देकर नारी गरिमा को भी अभिव्यक्ति दी।
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का संबंध हिंदी साहित्य के किस युग से है?
- भारतेंदु युग
- द्विवेदी युग
- छायावादी युग
- प्रगतिवादी युग
Explanation:
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
- अन्य प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा हैं।
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ को हिंदी कविता में किसका प्रवर्तक माना जाता है?
- दोहा छंद
- सोरठा छंद
- मुक्त छंद
- रोला छंद
Explanation:
- निराला को हिंदी कविता में मुक्त छंद का प्रमुख प्रवर्तक माना जाता है।
- उन्होंने कविता को पारंपरिक छंदों के बंधन से काफी हद तक मुक्त किया।
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का प्रसिद्ध उपनाम कौन-सा है?
- राष्ट्रकवि
- दिनकर
- महाप्राण
- कविगुरु
Explanation:
- निराला को ‘महाप्राण’ के नाम से प्रसिद्धि मिली।
- उनके व्यक्तित्व और काव्य में विद्रोह, स्वाभिमान और संघर्ष की भावना प्रमुख है।
निराला का जन्म किस तिथि को माना जाता है?
- 15 अगस्त 1898
- 21 फरवरी 1899
- 26 जनवरी 1900
- 15 अक्टूबर 1899
Explanation:
- परीक्षा की दृष्टि से निराला की जन्मतिथि 21 फरवरी 1899 मानी जाती है।
- कुछ विद्वान वसंत पंचमी 1896 को भी उनकी जन्मतिथि मानते हैं।
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्मस्थान कहाँ था?
- गढ़ाकोला, उन्नाव
- वाराणसी, उत्तर प्रदेश
- महिषादल, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल
- इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
Explanation:
- निराला का जन्म महिषादल राज्य, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल में हुआ था।
- उनका मूल निवास गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश माना जाता है।
निराला का मूल निवास किस स्थान को माना जाता है?
- महिषादल
- कोलकाता
- गढ़ाकोला, उन्नाव
- लखनऊ
Explanation:
- निराला का मूल निवास गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश था।
- उनका जन्म पश्चिम बंगाल के महिषादल में हुआ था।
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में निम्नलिखित में से कौन शामिल हैं?
- प्रेमचंद, निराला, दिनकर, बच्चन
- प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी
- तुलसीदास, सूरदास, कबीर और जायसी
- भारतेंदु, द्विवेदी, प्रेमचंद और प्रसाद
Explanation:
- छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं—जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा।
निराला ने ‘मतवाला’ पत्रिका का संपादन किस वर्ष किया?
- 1919
- 1921
- 1923
- 1930
Explanation:
- निराला ने 1923 में कोलकाता से प्रकाशित ‘मतवाला’ पत्रिका के संपादन से जुड़कर साहित्यिक पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- उन्होंने ‘समन्वय’ और ‘सुधा’ पत्रिका का भी संपादन किया।
निराला की प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘परिमल’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ?
- 1923
- 1930
- 1936
- 1942
Explanation:
- ‘परिमल’ का प्रकाशन 1930 में हुआ।
- इसमें छायावादी और प्रगतिशील दोनों प्रकार की काव्य-चेतना दिखाई देती है।
- ‘जूही की कली’ और ‘बादल राग’ जैसी कविताएँ इससे संबंधित हैं।
‘कुकुरमुत्ता’ किसकी प्रसिद्ध काव्य-कृति है?
- जयशंकर प्रसाद
- सुमित्रानंदन पंत
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
- महादेवी वर्मा
Explanation:
- ‘कुकुरमुत्ता’ निराला की प्रसिद्ध काव्य-कृति है।
- यह उनकी व्यंग्यात्मक और प्रगतिशील चेतना को अभिव्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण रचना है।
‘सरोज स्मृति’ कविता निराला ने किसके निधन पर लिखी?
- अपनी माता के निधन पर
- अपनी पत्नी के निधन पर
- अपनी पुत्री सरोज के निधन पर
- अपने मित्र के निधन पर
Explanation:
- ‘सरोज स्मृति’ निराला की पुत्री सरोज के असामयिक निधन की पीड़ा से उपजी रचना है।
- इसे हिंदी के महत्वपूर्ण शोकगीतों में स्थान दिया जाता है।
‘राम की शक्ति पूजा’ के रचनाकार कौन हैं?
- मैथिलीशरण गुप्त
- जयशंकर प्रसाद
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
- रामधारी सिंह दिनकर
Explanation:
- ‘राम की शक्ति पूजा’ निराला की अत्यंत प्रसिद्ध कविता है।
- यह राम के संघर्ष, शक्ति-साधना और आत्मविश्वास की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है।
‘भिक्षुक’ कविता में किस प्रकार की चेतना प्रमुख रूप से दिखाई देती है?
- श्रृंगार चेतना
- रहस्यवादी चेतना
- प्रगतिवादी चेतना
- पौराणिक चेतना
Explanation:
- ‘भिक्षुक’ में गरीबी और सामाजिक विषमता का मार्मिक चित्रण मिलता है।
- यह कविता निराला की सामाजिक और प्रगतिशील चेतना को व्यक्त करती है।
‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता में किसका चित्रण किया गया है?
- एक किसान पुरुष का
- एक सैनिक का
- एक मजदूर स्त्री का
- एक कवि का
Explanation:
- ‘वह तोड़ती पत्थर’ में श्रम करती हुई एक मजदूर स्त्री का यथार्थवादी चित्रण है।
- कविता श्रम, गरीबी और सामाजिक विषमता की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
‘बादल राग’ कविता को किस कक्षा की NCERT ‘आरोह’ पुस्तक में शामिल किया गया है?
- कक्षा 8
- कक्षा 10
- कक्षा 12
- कक्षा 11
Explanation:
- ‘बादल राग’ कक्षा 12 की हिंदी पुस्तक ‘आरोह’ में शामिल निराला की प्रसिद्ध कविता है।
- इसमें बादल को क्रांति और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
कक्षा 10 की ‘क्षितिज’ पुस्तक में निराला की कौन-सी रचनाएँ शामिल हैं?
- सरोज स्मृति और भिक्षुक
- उत्साह और अट नहीं रही है
- राम की शक्ति पूजा और बादल राग
- कुकुरमुत्ता और बेला
Explanation:
- कक्षा 10 की हिंदी ‘क्षितिज’ में निराला की ‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ कविताएँ शामिल हैं।
कक्षा 12 की ‘आरोह’ पुस्तक में निराला की ‘बादल राग’ के साथ कौन-सी रचना शामिल है?
- जूही की कली
- सरोज स्मृति
- गीत गाने दो मुझे
- वह तोड़ती पत्थर
Explanation:
- कक्षा 12 की ‘आरोह’ में ‘बादल राग’ और ‘गीत गाने दो मुझे’ निराला की प्रमुख रचनाओं के रूप में शामिल हैं।
निराला का प्रथम उपन्यास कौन-सा माना जाता है?
- अलका
- अप्सरा
- प्रभावती
- निरुपमा
Explanation:
- ‘अप्सरा’ निराला का प्रमुख आरंभिक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1931 में हुआ।
- इसके बाद ‘अलका’, ‘प्रभावती’, ‘निरुपमा’ आदि उपन्यास प्रकाशित हुए।
निराला की प्रसिद्ध रचना ‘पंत और पल्लव’ किस प्रकार की कृति है?
- उपन्यास
- कहानी संग्रह
- आलोचनात्मक ग्रंथ
- काव्य संग्रह
Explanation:
- ‘पंत और पल्लव’ निराला की आलोचनात्मक कृति है।
- निराला ने साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
‘निराला की साहित्य साधना’ नामक प्रसिद्ध कृति किस आलोचक ने लिखी?
- रामचंद्र शुक्ल
- नामवर सिंह
- रामविलास शर्मा
- हजारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation:
- डॉ. रामविलास शर्मा ने ‘निराला की साहित्य साधना’ नाम से निराला के जीवन और साहित्य पर तीन खंडों में महत्वपूर्ण कृति लिखी।
सुमित्रानंदन पंत को हिंदी साहित्य में किस युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है?
- रीतिकाल
- भक्तिकाल
- छायावादी युग
- प्रगतिवादी युग
Explanation:
- सुमित्रानंदन पंत छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
- छायावाद के प्रमुख कवियों में जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा शामिल हैं।
सुमित्रानंदन पंत का जन्म कब हुआ था?
- 1898 ई.
- 1900 ई.
- 1902 ई.
- 1905 ई.
Explanation:
- सुमित्रानंदन पंत का जन्म 1900 ई. में हुआ था।
- उनका जीवनकाल 1900 से 1977 तक रहा।
सुमित्रानंदन पंत का जन्मस्थान कौन-सा है?
- नैनीताल
- शिमला
- कौसानी, अल्मोड़ा
- देहरादून
Explanation:
- पंत जी का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था।
- कौसानी की प्राकृतिक सुंदरता का उनके काव्य पर गहरा प्रभाव पड़ा।
सुमित्रानंदन पंत को किस उपनाम से जाना जाता है?
- आधुनिक मीरा
- राष्ट्रकवि
- प्रकृति का सुकुमार कवि
- जनकवि
Explanation:
- पंत जी को ‘प्रकृति का सुकुमार कवि’ कहा जाता है।
- उनकी कविताओं में प्रकृति के कोमल, सुंदर और सजीव रूप का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
पंत जी के काव्य के प्रारंभिक चरण की प्रमुख विशेषता क्या थी?
- राजनीतिक व्यंग्य
- सामाजिक यथार्थ
- प्रकृति-प्रेम
- धार्मिक उपदेश
Explanation:
- पंत जी के प्रारंभिक काव्य में प्रकृति-सौंदर्य और अलौकिक प्रेम की प्रमुखता दिखाई देती है।
- यह चरण मुख्यतः छायावादी प्रवृत्तियों से जुड़ा है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कृति पंत के छायावादी युग से संबंधित है?
- युगांत
- ग्राम्या
- पल्लव
- लोकायतन
Explanation:
- ‘पल्लव’ पंत की प्रसिद्ध छायावादी कृति है।
- इस चरण में प्रकृति-सौंदर्य और कोमल भावनाओं की प्रधानता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना पंत के प्रगतिवादी चरण से संबंधित है?
- वीणा
- पल्लव
- युगवाणी
- स्वर्ण किरण
Explanation:
- ‘युगवाणी’ पंत के प्रगतिवादी चरण की प्रमुख कृतियों में है।
- इस चरण में वे मानवतावाद, समाजवाद और शोषित वर्ग की समस्याओं की ओर उन्मुख हुए।
पंत के प्रगतिवादी चरण की प्रमुख कृतियों में कौन-सी रचना शामिल है?
- पल्लव
- गुंजन
- ग्राम्या
- स्वर्ण धुलि
Explanation:
- ‘ग्राम्या’ पंत के प्रगतिवादी चरण की प्रमुख कृति है।
- इस चरण में ग्रामीण जीवन, मानवतावाद और सामाजिक विषमता जैसे विषयों पर ध्यान दिया गया।
पंत के अंतिम काव्य चरण पर किस दार्शनिक विचारधारा का प्रभाव पड़ा?
- बौद्ध दर्शन
- गांधी दर्शन
- महर्षि अरविंद का दर्शन
- चार्वाक दर्शन
Explanation:
- पंत के अंतिम चरण पर महर्षि अरविंद के दर्शन का प्रभाव पड़ा।
- इस चरण में मानवता के आध्यात्मिक उत्थान और व्यापक चेतना की भावना दिखाई देती है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कृति पंत के अध्यात्मवादी चरण से संबंधित है?
- वीणा
- युगांत
- स्वर्ण किरण
- ग्राम्या
Explanation:
- ‘स्वर्ण किरण’ पंत के अध्यात्मवादी चरण की प्रमुख कृति है।
- इस चरण में अरविंद दर्शन और आध्यात्मिक चेतना का प्रभाव दिखाई देता है।
सुमित्रानंदन पंत को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
- लोकायतन
- ग्राम्या
- चिदंबरा
- पल्लव
Explanation:
- पंत जी को ‘चिदंबरा’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
- वे हिंदी के प्रारंभिक ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त साहित्यकारों में शामिल हैं।
सुमित्रानंदन पंत को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस वर्ष मिला?
- 1965 ई.
- 1967 ई.
- 1968 ई.
- 1970 ई.
Explanation:
- पंत जी को 1968 ई. में ‘चिदंबरा’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
- यह हिंदी साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
सुमित्रानंदन पंत को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
- चिदंबरा
- पल्लव
- कला और बूढ़ा चाँद
- लोकायतन
Explanation:
- ‘कला और बूढ़ा चाँद’ के लिए पंत जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
सुमित्रानंदन पंत को भारत सरकार ने किस सम्मान से सम्मानित किया?
- भारत रत्न
- पद्म विभूषण
- पद्म भूषण
- पद्म श्री
Explanation:
- साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पंत जी को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
‘लोकायतन’ के लिए सुमित्रानंदन पंत को कौन-सा पुरस्कार प्राप्त हुआ?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार
- पद्म भूषण
Explanation:
- ‘लोकायतन’ पंत की महत्वपूर्ण कृति है।
- इस कृति पर उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार प्राप्त हुआ।
पंत की काव्य-भाषा की प्रमुख विशेषता क्या है?
- केवल बोलचाल की भाषा
- उर्दू-फारसी प्रधान भाषा
- मधुर, चित्रमयी और संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली
- अत्यधिक तकनीकी भाषा
Explanation:
- पंत की भाषा कोमल, मधुर और चित्रमयी है।
- उनकी काव्य-भाषा में संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रभाव प्रमुख है।
पंत के काव्य में प्रकृति को किस रूप में प्रस्तुत किया गया है?
- केवल निर्जीव वस्तु के रूप में
- भयावह शक्ति के रूप में
- सजीव चेतना के रूप में
- केवल वैज्ञानिक विषय के रूप में
Explanation:
- पंत प्रकृति को जड़ वस्तु नहीं, बल्कि सजीव और संवेदनशील चेतना के रूप में देखते हैं।
- प्रकृति का मानवीकरण उनके काव्य की प्रमुख विशेषता है।
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में पंत का प्रमुख काव्यात्मक परिचय क्या है?
- ओज और विद्रोह के कवि
- आधुनिक मीरा
- प्रकृति के सुकुमार कवि
- छायावाद के प्रवर्तक
Explanation:
- सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में जाना जाता है।
- छायावाद के अन्य प्रमुख स्तंभों में जयशंकर प्रसाद, निराला और महादेवी वर्मा शामिल हैं।
सुमित्रानंदन पंत ने किस पत्रिका का संपादन किया था?
- सरस्वती
- हंस
- रूपाभ
- माधुरी
Explanation:
- पंत जी ने ‘रूपाभ’ पत्रिका का संपादन किया।
- इस पत्रिका ने प्रगतिशील साहित्य को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई।
‘छोड़ द्रुमों की मृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया’ पंक्तियाँ किस कवि की प्रकृति-प्रेम भावना को व्यक्त करती हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
- सुमित्रानंदन पंत
- महादेवी वर्मा
Explanation:
- इन पंक्तियों में पंत का प्रकृति के प्रति गहरा आकर्षण व्यक्त हुआ है।
- कवि प्रकृति के सौंदर्य को सांसारिक मोह से अधिक महत्वपूर्ण मानता है।
- यह पंत की प्रकृति-केंद्रित छायावादी काव्य-दृष्टि का सुंदर उदाहरण है।
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य के किस युग की प्रमुख कवयित्री हैं?
- रीतिकाल
- भक्तिकाल
- छायावादी युग
- प्रगतिवाद
Explanation:
- महादेवी वर्मा छायावादी युग की प्रमुख कवयित्री और गद्यकार हैं।
- उन्हें हिंदी साहित्य की प्रमुख महिला रचनाकारों में गिना जाता है।
महादेवी वर्मा का जन्म कब हुआ था?
- 15 अगस्त 1905
- 26 मार्च 1907
- 10 अप्रैल 1908
- 12 जनवरी 1910
Explanation:
- महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को हुआ था।
- उनका जन्म फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
महादेवी वर्मा का जन्मस्थान कौन-सा है?
- प्रयागराज
- लखनऊ
- फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
- वाराणसी
Explanation:
- महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
- वे आगे चलकर हिंदी साहित्य में छायावाद की प्रमुख कवयित्री बनीं।
महादेवी वर्मा को किस उपनाम से प्रसिद्धि मिली?
- राष्ट्रकवि
- उपन्यास सम्राट
- आधुनिक मीरा
- कलम का सिपाही
Explanation:
- महादेवी वर्मा को ‘आधुनिक मीरा’ कहा जाता है।
- उनकी काव्य-चेतना में वेदना, करुणा और रहस्यवादी भावनाओं की प्रमुखता दिखाई देती है।
महादेवी वर्मा को ‘वेदना की कवयित्री’ क्यों कहा जाता है?
- उन्होंने केवल युद्ध का वर्णन किया
- उनकी रचनाएँ हास्य प्रधान हैं
- उनकी कविताओं में वेदना और करुणा की प्रधानता है
- उन्होंने केवल ऐतिहासिक घटनाएँ लिखीं
Explanation:
- महादेवी वर्मा की काव्य-रचनाओं में वेदना और करुणा का गहरा स्वर मिलता है।
- इसी कारण उन्हें ‘वेदना की कवयित्री’ कहा जाता है।
महादेवी वर्मा का प्रथम काव्य-संग्रह कौन-सा है?
- नीरजा
- रश्मि
- नीहार
- दीपशिखा
Explanation:
- ‘नीहार’ महादेवी वर्मा का प्रथम काव्य-संग्रह है।
- इसका प्रकाशन 1930 में हुआ था।
‘नीहार’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1928
- 1930
- 1932
- 1935
Explanation:
- ‘नीहार’ महादेवी वर्मा का प्रथम काव्य-संग्रह है।
- इसका प्रकाशन 1930 में हुआ था।
निम्नलिखित में से कौन-सा महादेवी वर्मा का काव्य-संग्रह है?
- कामायनी
- उर्वशी
- नीरजा
- कुरुक्षेत्र
Explanation:
- ‘नीरजा’ महादेवी वर्मा का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है।
- उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत और दीपशिखा शामिल हैं।
महादेवी वर्मा के किस काव्य-संग्रह में आत्मा-परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन की भावना प्रमुख है?
- नीहार
- रश्मि
- नीरजा
- सांध्यगीत
Explanation:
- ‘रश्मि’ में आत्मा और परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन की भावना को प्रमुखता दी गई है।
- यह महादेवी वर्मा की रहस्यवादी काव्य-चेतना से जुड़ा है।
‘यामा’ किन काव्य-संग्रहों का संकलन है?
- नीरजा, दीपशिखा और सप्तपर्णा
- नीहार, रश्मि, नीरजा और सांध्यगीत
- रश्मि, दीपशिखा और क्षणदा
- नीहार, सप्तपर्णा और स्मृति की रेखाएँ
Explanation:
- ‘यामा’ में नीहार, रश्मि, नीरजा और सांध्यगीत का संकलन है।
- यह महादेवी वर्मा की महत्वपूर्ण काव्य-कृति है।
‘सप्तपर्णा’ में मुख्यतः किसका हिंदी अनुवाद है?
- उपनिषदों का
- रामायण का
- ऋग्वेद के मंत्रों का
- महाभारत का
Explanation:
- ‘सप्तपर्णा’ में ऋग्वेद के मंत्रों का हिंदी अनुवाद मिलता है।
- यह महादेवी वर्मा की साहित्यिक विविधता को दर्शाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी महादेवी वर्मा की रेखाचित्र एवं संस्मरण संबंधी कृति है?
- कामायनी
- चंद्रगुप्त
- अतीत के चलचित्र
- गुनाहों का देवता
Explanation:
- ‘अतीत के चलचित्र’ महादेवी वर्मा की गद्य रचनाओं में महत्वपूर्ण है।
- उनकी प्रमुख गद्य कृतियों में ‘स्मृति की रेखाएँ’ और ‘पथ के साथी’ भी शामिल हैं।
‘पथ के साथी’ किस प्रकार की रचना है?
- उपन्यास
- नाटक
- समकालीन साहित्यकारों के संस्मरण
- काव्य-संग्रह
Explanation:
- ‘पथ के साथी’ में महादेवी वर्मा ने समकालीन साहित्यकारों से संबंधित संस्मरण लिखे हैं।
- यह उनकी संस्मरणात्मक गद्य-रचनाओं में महत्वपूर्ण है।
‘मेरा परिवार’ में मुख्यतः किसका चित्रण मिलता है?
- राजनीतिक नेताओं का
- ऐतिहासिक राजाओं का
- पशु-पक्षियों से जुड़े संस्मरणों का
- स्वतंत्रता सेनानियों का
Explanation:
- ‘मेरा परिवार’ में महादेवी वर्मा ने पशु-पक्षियों के साथ अपने आत्मीय संबंधों को संस्मरणात्मक रूप में प्रस्तुत किया है।
- गिल्लू और गौरा जैसे पशु-पक्षी इन रचनाओं से जुड़े प्रसिद्ध पात्र हैं।
‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ किस विषय से संबंधित महत्वपूर्ण ग्रंथ है?
- प्रकृति-वर्णन
- इतिहास
- नारी-विमर्श
- युद्ध-वर्णन
Explanation:
- ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ महादेवी वर्मा की महत्वपूर्ण गद्य-कृति है।
- इसमें नारी की सामाजिक स्थिति और उसके अधिकारों से जुड़े प्रश्नों पर विचार किया गया है।
महादेवी वर्मा ने किस प्रसिद्ध महिला पत्रिका का संपादन किया?
- सरस्वती
- हंस
- चाँद
- माधुरी
Explanation:
- महादेवी वर्मा ने प्रसिद्ध महिला पत्रिका ‘चाँद’ का संपादन किया।
- पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
- नीहार
- नीरजा
- यामा
- दीपशिखा
Explanation:
- महादेवी वर्मा को 1982 में ‘यामा’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
- वे ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाली हिंदी की पहली महिला साहित्यकार थीं।
महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस वर्ष प्राप्त हुआ?
- 1975
- 1979
- 1982
- 1987
Explanation:
- महादेवी वर्मा को 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- यह सम्मान उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए प्रदान किया गया।
महादेवी वर्मा को ‘नीरजा’ के लिए कौन-सा पुरस्कार मिला था?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- पद्म विभूषण
- सेकसरिया पुरस्कार
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
Explanation:
- ‘नीरजा’ के लिए महादेवी वर्मा को सेकसरिया पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
- उनकी साहित्यिक प्रतिभा को अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया।
महादेवी वर्मा की रचनाओं में किन भावों की प्रधानता मानी जाती है?
- वीरता और हास्य
- केवल शृंगार
- करुणा और रहस्यवाद
- केवल राजनीतिक चेतना
Explanation:
- महादेवी वर्मा की कविताओं में करुणा और रहस्यवाद की प्रधानता दिखाई देती है।
- उनकी काव्य-चेतना में वेदना, आध्यात्मिक अनुभूति और आत्मा-परमात्मा के संबंध की भावना भी महत्वपूर्ण है।
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ था?
- 15 नवंबर 1889
- 30 जनवरी 1889
- 30 जनवरी 1890
- 15 नवंबर 1937
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 को वाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश में हुआ था।
- वे छायावाद के प्रमुख स्तंभों में शामिल हैं।
जयशंकर प्रसाद का निधन कब हुआ था?
- 30 जनवरी 1937
- 8 अक्टूबर 1936
- 15 नवंबर 1937
- 15 नवंबर 1938
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद का निधन 15 नवंबर 1937 को वाराणसी में हुआ था।
जयशंकर प्रसाद किस प्रसिद्ध परिवार से संबंधित थे?
- काशी नरेश परिवार
- बनारस के जमींदार परिवार
- ‘सुंघनी साहू’ परिवार
- अवध के नवाब परिवार
Explanation:
- प्रसाद जी वाराणसी के प्रसिद्ध वैश्य ‘सुंघनी साहू’ परिवार से संबंधित थे।
- उनका पारिवारिक परिवेश साहित्य और संस्कृति से भी जुड़ा हुआ था।
जयशंकर प्रसाद का काव्य-उपनाम क्या था?
- निराला
- कलानाथ
- कलाधर
- रसिक
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद प्रारंभ में ब्रजभाषा में ‘कलाधर’ उपनाम से कविताएँ लिखते थे।
जयशंकर प्रसाद किस साहित्यिक युग के प्रमुख स्तंभ हैं?
- रीतिकाल
- द्विवेदी युग
- छायावाद
- प्रगतिवाद
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
- छायावाद का काल सामान्यतः 1918 से 1936 ई. के आसपास माना जाता है।
जयशंकर प्रसाद को छायावाद के चार स्तंभों में किस नाम से संबोधित किया जाता है?
- विष्णु
- महेश
- ब्रह्मा
- इंद्र
Explanation:
- जयशंकर प्रसाद को छायावाद का ‘ब्रह्मा’ कहा जाता है।
- निराला को ‘महेश’ और सुमित्रानंदन पंत को ‘विष्णु’ कहा जाता है।
‘कामायनी’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1925 ई.
- 1931 ई.
- 1935 ई.
- 1937 ई.
Explanation:
- ‘कामायनी’ 1935 ई. में प्रकाशित हुई।
- यह जयशंकर प्रसाद की सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य-कृति और हिंदी साहित्य का युगांतकारी महाकाव्य मानी जाती है।
‘कामायनी’ में कुल कितने सर्ग हैं?
- 12
- 14
- 15
- 18
Explanation:
- ‘कामायनी’ 15 सर्गों में विभक्त है।
- इसके सर्ग हैं—चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य और आनंद।
‘कामायनी’ में मनु किसके प्रतीक हैं?
- हृदय
- बुद्धि
- मन
- समाज
Explanation:
- ‘कामायनी’ में मनु मन के प्रतीक हैं।
- श्रद्धा हृदय और इड़ा बुद्धि की प्रतीक हैं।
‘कामायनी’ में श्रद्धा किसकी प्रतीक है?
- बुद्धि
- मन
- हृदय
- कर्म
Explanation:
- श्रद्धा हृदय या भाव-जगत की प्रतीक है।
- कामायनी में मनु, श्रद्धा और इड़ा के माध्यम से मनुष्य के विभिन्न मानसिक और भावात्मक पक्षों को प्रस्तुत किया गया है।
‘कामायनी’ में इड़ा किसकी प्रतीक है?
- हृदय
- आत्मा
- बुद्धि
- प्रकृति
Explanation:
- इड़ा बुद्धि या तर्क-बुद्धि की प्रतीक है।
- मनु, श्रद्धा और इड़ा के माध्यम से मन, हृदय और बुद्धि के संतुलन की अवधारणा सामने आती है।
‘कामायनी’ का मूल दर्शन किन विचारों से संबंधित है?
- केवल भौतिकवाद
- केवल रहस्यवाद
- प्रत्यभिज्ञा दर्शन और आनंदवाद
- केवल मार्क्सवाद
Explanation:
- ‘कामायनी’ में प्रत्यभिज्ञा दर्शन और आनंदवाद का प्रभाव माना जाता है।
- कृति में जीवन के समन्वय और आनंद की अवधारणा महत्वपूर्ण है।
‘कामायनी’ की रचना किस छंद में हुई है?
- दोहा
- चौपाई
- ताटंक
- सोरठा
Explanation:
- ‘कामायनी’ की रचना ताटंक छंद में हुई है।
- यह तथ्य परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
‘आँसू’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1918 ई.
- 1925 ई.
- 1931 ई.
- 1935 ई.
Explanation:
- ‘आँसू’ का प्रकाशन 1925 ई. में हुआ।
- इसे हिंदी का प्रसिद्ध स्मृति-काव्य और विरह-काव्य माना जाता है।
‘झरना’ को किस रूप में जाना जाता है?
- प्रथम उपन्यास
- प्रथम एकांकी
- छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला
- प्रथम ऐतिहासिक नाटक
Explanation:
- ‘झरना’ 1918 ई. का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है।
- इसे छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला के रूप में जाना जाता है।
‘कानन कुसुम’ किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?
- 1911 ई.
- 1913 ई.
- 1918 ई.
- 1925 ई.
Explanation:
- ‘कानन कुसुम’ का प्रकाशन 1913 ई. में हुआ।
- इसे खड़ी बोली का प्रथम काव्य-संग्रह माना जाता है।
‘करुणालय’ की प्रमुख विशेषता क्या है?
- प्रथम ऐतिहासिक उपन्यास
- प्रथम कहानी संग्रह
- हिंदी का प्रथम गीतिनाट्य
- प्रथम एकांकी
Explanation:
- ‘करुणालय’ 1912 ई. की रचना है।
- इसे हिंदी का प्रथम गीतिनाट्य माना जाता है।
जयशंकर प्रसाद का कौन-सा नाटक नारी-मुक्ति और पुनर्विवाह की समस्या से संबंधित है?
- स्कंदगुप्त
- चंद्रगुप्त
- ध्रुवस्वामिनी
- अजातशत्रु
Explanation:
- ‘ध्रुवस्वामिनी’ 1933 ई. में प्रकाशित ऐतिहासिक एवं समस्या नाटक है।
- इसमें नारी-मुक्ति, स्त्री स्वातंत्र्य, विवाह-विच्छेद और पुनर्विवाह जैसे प्रश्न उठाए गए हैं।
‘एक घूँट’ की प्रमुख साहित्यिक विशेषता क्या है?
- हिंदी का प्रथम ऐतिहासिक नाटक
- हिंदी का प्रथम गीतिनाट्य
- हिंदी का प्रथम एकांकी
- हिंदी का प्रथम महाकाव्य
Explanation:
- ‘एक घूँट’ 1930 ई. की रचना है।
- इसे हिंदी का प्रथम एकांकी माना जाता है।
जयशंकर प्रसाद का कौन-सा उपन्यास ग्रामीण जीवन और कृषक समस्या पर आधारित है?
- कंकाल
- तितली
- इरावती
- आकाशदीप
Explanation:
- ‘तितली’ 1934 ई. का उपन्यास है।
- इसमें ग्रामीण जीवन और कृषक समस्या को आधार बनाया गया है।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म कब हुआ था?
- 15 अगस्त 1907
- 23 सितंबर 1908
- 26 जनवरी 1909
- 2 अक्टूबर 1908
Explanation:
- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म 23 सितंबर 1908 को हुआ था।
- उनका जन्म सिमरिया, बेगूसराय, बिहार में हुआ था।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्मस्थान कहाँ है?
- पटना, बिहार
- मुजफ्फरपुर, बिहार
- सिमरिया, बेगूसराय, बिहार
- भागलपुर, बिहार
Explanation:
- दिनकर का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में हुआ था।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को किस उपनाम से विशेष रूप से जाना जाता है?
- कविगुरु
- महाप्राण
- राष्ट्रकवि
- प्रकृति के सुकुमार कवि
Explanation:
- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को राष्ट्रकवि के नाम से प्रसिद्धि मिली।
- वे ओज, वीरता और राष्ट्रीय चेतना के प्रमुख कवि थे।
‘दिनकर’ की प्रथम काव्य-कृति कौन-सी मानी जाती है?
- हुंकार
- कुरुक्षेत्र
- रेणुका
- रश्मिरथी
Explanation:
- ‘रेणुका’ 1935 में प्रकाशित दिनकर का प्रथम काव्य-संग्रह है।
- इसके बाद उनकी ओजपूर्ण राष्ट्रीय कविताओं ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
‘हुंकार’ की प्रमुख विशेषता क्या है?
- प्रकृति-वर्णन
- प्रेम और विरह
- ओजपूर्ण और राष्ट्रीय चेतना से युक्त कविताएँ
- केवल हास्य-व्यंग्य
Explanation:
- ‘हुंकार’ में ओज और विद्रोह की भावना प्रमुख है।
- दिनकर की काव्य-धारा में राष्ट्रीयता और संघर्ष की चेतना महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
‘कुरुक्षेत्र’ किस विषय पर आधारित काव्य-कृति है?
- रामायण की कथा
- बुद्ध का जीवन
- युद्ध और शांति
- प्रकृति और प्रेम
Explanation:
- ‘कुरुक्षेत्र’ 1946 की महत्वपूर्ण कृति है।
- इसमें महाभारत की पृष्ठभूमि के माध्यम से युद्ध, शांति और मानवता जैसे प्रश्नों पर विचार किया गया है।
- इसे आधुनिक युग की ‘गीता’ भी कहा जाता है।
‘रश्मिरथी’ का केंद्रीय पात्र कौन है?
- अर्जुन
- भीष्म
- कर्ण
- युधिष्ठिर
Explanation:
- ‘रश्मिरथी’ 1952 में प्रकाशित प्रसिद्ध खंडकाव्य है।
- इसका केंद्रीय पात्र महाभारत का महान योद्धा कर्ण है।
‘उर्वशी’ किस प्रकार की काव्य-कृति है?
- महाकाव्य
- खंडकाव्य
- काव्य-नाटक
- दोहा-संग्रह
Explanation:
- ‘उर्वशी’ 1961 की प्रसिद्ध काव्य-कृति है।
- इसे काव्य-नाटक की श्रेणी में रखा जाता है और इसमें कामाध्यात्म की अवधारणा प्रमुख है।
‘उर्वशी’ के लिए रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को कौन-सा पुरस्कार मिला?
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- पद्म भूषण
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- भारत रत्न
Explanation:
- दिनकर को ‘उर्वशी’ के लिए 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
- यह हिंदी साहित्य का सर्वोच्च प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक है।
‘संस्कृति के चार अध्याय’ किस प्रकार की रचना है?
- उपन्यास
- काव्य-संग्रह
- गद्य/वैचारिक रचना
- नाटक
Explanation:
- ‘संस्कृति के चार अध्याय’ में भारतीय इतिहास और संस्कृति का विश्लेषण किया गया है।
- इस कृति के लिए दिनकर को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए दिनकर को कौन-सा पुरस्कार मिला?
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- पद्म विभूषण
- भारत रत्न
Explanation:
- ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए दिनकर को 1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
- यह भारतीय संस्कृति और इतिहास के विश्लेषण पर आधारित महत्वपूर्ण गद्य-कृति है।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को पद्म भूषण किस वर्ष मिला?
- 1954
- 1959
- 1962
- 1972
Explanation:
- दिनकर को भारत सरकार ने 1959 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
‘परशुराम की प्रतीक्षा’ की पृष्ठभूमि किस घटना से जुड़ी है?
- भारत की स्वतंत्रता
- भारत-पाक युद्ध
- 1962 का चीनी आक्रमण
- 1857 का विद्रोह
Explanation:
- ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ की रचना 1962 के चीनी आक्रमण की पृष्ठभूमि से जुड़ी है।
- इसमें राष्ट्रीय चेतना और संघर्ष की भावना दिखाई देती है।
दिनकर की काव्य-रचनाओं में किन रसों का विशेष समन्वय मिलता है?
- हास्य और करुण
- भयानक और वीभत्स
- वीर और श्रृंगार
- अद्भुत और शांत
Explanation:
- दिनकर की काव्य-विशेषता में वीर रस और श्रृंगार रस का अनूठा समन्वय माना जाता है।
- उनकी रचनाओं में ओज, राष्ट्रीयता और प्रेम की भावनाएँ साथ-साथ दिखाई देती हैं।
हिंदी साहित्य की किन दो काव्यधाराओं के बीच दिनकर ने सेतु का कार्य किया?
- रीतिकाल और भक्तिकाल
- भक्तिकाल और रीतिकाल
- छायावाद और प्रगतिवाद
- आदिकाल और भक्तिकाल
Explanation:
- दिनकर की काव्यधारा में छायावादी संवेदनशीलता और प्रगतिशील सामाजिक-राष्ट्रीय चेतना का समन्वय दिखाई देता है।
- इसी कारण उन्हें छायावाद और प्रगतिवाद के बीच सेतु माना जाता है।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने किस साप्ताहिक पत्र का संपादन किया?
- सरस्वती
- हंस
- हुंकार
- मतवाला
Explanation:
- दिनकर ने ‘साप्ताहिक हुंकार’ का संपादन किया।
- पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ किस विश्वविद्यालय के कुलपति रहे?
- पटना विश्वविद्यालय
- मगध विश्वविद्यालय
- भागलपुर विश्वविद्यालय
- रांची विश्वविद्यालय
Explanation:
- दिनकर भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।
- वे राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके थे।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का निधन किस वर्ष हुआ?
- 1969
- 1972
- 1974
- 1978
Explanation:
- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जीवनकाल 1908 से 1974 तक रहा।
- हिंदी साहित्य में उनकी पहचान प्रमुख कवि और निबंधकार के रूप में है।
‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ पंक्ति किस कवि की प्रसिद्ध पंक्ति है?
- मैथिलीशरण गुप्त
- जयशंकर प्रसाद
- रामधारी सिंह ‘दिनकर’
- सुमित्रानंदन पंत
Explanation:
- ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ दिनकर की प्रसिद्ध पंक्ति है।
- यह पंक्ति जनतांत्रिक चेतना और जनता की शक्ति को अभिव्यक्त करती है।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ मुख्य रूप से किन साहित्यिक विधाओं के लिए प्रसिद्ध हैं?
- केवल उपन्यास और कहानी
- केवल नाटक
- कविता और निबंध
- केवल आत्मकथा
Explanation:
- दिनकर मुख्य रूप से कवि और निबंधकार थे।
- उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में ‘रेणुका’, ‘हुंकार’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘रश्मिरथी’ और ‘उर्वशी’ शामिल हैं।
- ‘संस्कृति के चार अध्याय’, ‘मिट्टी की ओर’, ‘अर्धनारीश्वर’ और ‘रेती के फूल’ उनकी प्रमुख गद्य रचनाएँ हैं।
अज्ञेय का पूरा नाम क्या था?
- सच्चिदानंद हीरानंद वाजपेयी
- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
- सच्चिदानंद हरिनारायण वात्स्यायन
- सच्चिदानंद हीरालाल वात्स्यायन
Explanation:
- अज्ञेय का पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन था।
- वे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख प्रयोगवादी और नई कविता के प्रवर्तक साहित्यकारों में माने जाते हैं।
अज्ञेय का जन्म कब हुआ था?
- 5 मार्च 1910
- 7 मार्च 1911
- 8 मार्च 1912
- 10 मार्च 1913
Explanation:
- अज्ञेय का जन्म 7 मार्च 1911 को हुआ था।
अज्ञेय का जन्मस्थान कहाँ था?
- लखनऊ
- वाराणसी
- कसया, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
- प्रयागराज
Explanation:
- अज्ञेय का जन्म कसया, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
अज्ञेय को हिंदी साहित्य में मुख्यतः किस साहित्यिक धारा का प्रवर्तक माना जाता है?
- रीतिवाद
- प्रगतिवाद
- प्रयोगवाद और नई कविता
- छायावाद
Explanation:
- अज्ञेय प्रयोगवाद और नई कविता के प्रमुख प्रवर्तकों में माने जाते हैं।
- उन्होंने कविता में नए विषयों, प्रतीकों, बिंबों और अभिव्यक्ति के नए तरीकों को प्रोत्साहित किया।
अज्ञेय नाम से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या है?
- यह उनका जन्मनाम था
- यह उन्हें उनके पिता ने दिया था
- जेल में उनकी रचनाएँ बिना नाम के भेजे जाने के संदर्भ में यह नाम प्रचलित हुआ
- यह नाम उन्होंने विदेश यात्रा के समय रखा
Explanation:
- दिए गए साहित्यिक तथ्यों के अनुसार, जेल में रहते समय उनकी रचनाएँ बिना नाम के भेजी जा रही थीं।
- इसी संदर्भ में ‘अज्ञेय’ नाम का प्रयोग प्रसिद्ध हुआ।
अज्ञेय को ‘तार सप्तक’ की परंपरा शुरू करने का श्रेय क्यों दिया जाता है?
- उन्होंने सात उपन्यास लिखे
- उन्होंने सात नाटक लिखे
- उन्होंने प्रयोगवादी कवियों को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला ‘तार सप्तक’ संपादित किया
- उन्होंने सात पत्रिकाओं का संपादन किया
Explanation:
- प्रथम ‘तार सप्तक’ का प्रकाशन 1943 ई. में हुआ।
- इस संकलन को हिंदी में प्रयोगवाद के प्रारंभ से जोड़ा जाता है।
प्रथम ‘तार सप्तक’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ?
- 1937 ई.
- 1940 ई.
- 1943 ई.
- 1947 ई.
Explanation:
- प्रथम ‘तार सप्तक’ 1943 ई. में प्रकाशित हुआ।
- इसमें सात कवियों की रचनाएँ शामिल थीं और यह प्रयोगवादी काव्यधारा के विकास में महत्वपूर्ण रहा।
प्रथम ‘तार सप्तक’ में कितने कवि शामिल थे?
- 5
- 6
- 7
- 8
Explanation:
- ‘तार सप्तक’ में सात कवियों की रचनाएँ संकलित थीं।
- इसी कारण इसका नाम ‘सप्तक’ रखा गया।
अज्ञेय का प्रथम काव्य-संग्रह कौन-सा माना जाता है?
- चिंता
- इत्यलम्
- भग्नदूत
- हरी घास पर क्षण भर
Explanation:
- ‘भग्नदूत’ अज्ञेय का प्रथम काव्य-संग्रह है।
- इसका प्रकाशन 1933 ई. में हुआ था।
‘आँगन के पार द्वार’ किसकी कृति है?
- मुक्तिबोध
- शमशेर बहादुर सिंह
- अज्ञेय
- कुँवर नारायण
Explanation:
- ‘आँगन के पार द्वार’ अज्ञेय का महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह है।
- इसका प्रकाशन 1961 ई. में हुआ था।
अज्ञेय को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
- भग्नदूत
- शेखर: एक जीवनी
- आँगन के पार द्वार
- नदी के द्वीप
Explanation:
- अज्ञेय को 1964 ई. में ‘आँगन के पार द्वार’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
अज्ञेय को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
- असाध्य वीणा
- आँगन के पार द्वार
- कितनी नावों में कितनी बार
- शेखर: एक जीवनी
Explanation:
- अज्ञेय को 1978 ई. में ‘कितनी नावों में कितनी बार’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
- यह उनकी महत्वपूर्ण काव्य-कृतियों में से एक है।
‘असाध्य वीणा’ कविता किस काव्य-संग्रह में संकलित है?
- भग्नदूत
- हरी घास पर क्षण भर
- आँगन के पार द्वार
- सागर मुद्रा
Explanation:
- ‘असाध्य वीणा’ अज्ञेय की प्रसिद्ध लंबी कविता है।
- यह ‘आँगन के पार द्वार’ संग्रह में संकलित है।
- इसमें प्रियंवद केशकंबली प्रमुख पात्र है।
‘यह दीप अकेला’ कविता का मुख्य आधार क्या है?
- प्रकृति और ऋतु-वर्णन
- ऐतिहासिक युद्ध
- व्यक्ति और समाज के संबंध
- धार्मिक आस्था
Explanation:
- ‘यह दीप अकेला’ में व्यक्ति और समाज के संबंध को प्रमुखता दी गई है।
- यह कविता अज्ञेय की प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल है।
‘साँप’ कविता में अज्ञेय ने किस पर व्यंग्य किया है?
- प्रकृति पर
- कृषि व्यवस्था पर
- आधुनिक सभ्यता पर
- प्राचीन इतिहास पर
Explanation:
- ‘साँप’ अज्ञेय की प्रसिद्ध कविता है।
- इसमें आधुनिक सभ्यता और उसके विकास के दावों पर व्यंग्यात्मक दृष्टि दिखाई देती है।
अज्ञेय का प्रसिद्ध मनोविश्लेषणवादी उपन्यास कौन-सा है?
- नदी के द्वीप
- अपने-अपने अजनबी
- शेखर: एक जीवनी
- गोदान
Explanation:
- ‘शेखर: एक जीवनी’ अज्ञेय का प्रसिद्ध मनोविश्लेषणवादी उपन्यास है।
- यह दो भागों में प्रकाशित हुआ—‘उत्थान’ और ‘संघर्ष’।
‘अपने-अपने अजनबी’ उपन्यास किस दर्शन से संबंधित माना जाता है?
- मार्क्सवाद
- गांधीवाद
- अस्तित्ववाद
- रहस्यवाद
Explanation:
- ‘अपने-अपने अजनबी’ में अस्तित्ववादी चिंतन का प्रभाव दिखाई देता है।
- अज्ञेय के साहित्य में व्यक्ति, स्वतंत्रता, अस्तित्व और आत्मचेतना जैसे प्रश्न महत्वपूर्ण हैं।
अज्ञेय का कौन-सा यात्रा-वृत्तांत स्वदेश यात्रा से संबंधित है?
- एक बूंद सहसा उछली
- अरे यायावर रहेगा याद
- त्रिशंकु
- आत्मनेपद
Explanation:
- ‘अरे यायावर रहेगा याद’ अज्ञेय का यात्रा-वृत्तांत है।
- यह 1953 ई. में प्रकाशित हुआ और स्वदेश यात्रा से संबंधित है।
अज्ञेय का कौन-सा नाटक सम्राट अशोक पर आधारित है?
- ध्रुवस्वामिनी
- उत्तररामचरित
- उत्तर प्रियदर्शी
- अंधायुग
Explanation:
- ‘उत्तर प्रियदर्शी’ अज्ञेय की नाट्य-कृति है।
- यह गीतिनाट्य है और सम्राट अशोक के जीवन से संबंधित है।
अज्ञेय का निधन कब हुआ था?
- 4 अप्रैल 1985
- 7 मार्च 1987
- 4 अप्रैल 1987
- 10 अप्रैल 1988
Explanation:
- अज्ञेय का निधन 4 अप्रैल 1987 को नई दिल्ली में हुआ था।
- उन्होंने कविता, उपन्यास, कहानी, निबंध, यात्रा-वृत्तांत और पत्रकारिता सहित हिंदी साहित्य की अनेक विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नागार्जुन का मूल नाम क्या था?
- रामधारी सिंह
- हरिप्रसाद
- वैद्यनाथ मिश्र
- विद्यानिवास मिश्र
Explanation:
- नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
- हिंदी साहित्य में वे ‘नागार्जुन’ और मैथिली साहित्य में ‘यात्री’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
नागार्जुन को किस उपाधि से विशेष रूप से जाना जाता है?
- राष्ट्रकवि
- कविगुरु
- जनकवि
- महाकवि
Explanation:
- नागार्जुन को ‘जनकवि’ और ‘बाबा नागार्जुन’ के नाम से जाना जाता है।
- उनकी रचनाओं में किसान, मजदूर और आम जनता के जीवन तथा संघर्षों की अभिव्यक्ति मिलती है।
मैथिली भाषा में नागार्जुन किस उपनाम से लिखते थे?
- बाबा
- यात्री
- यात्री
- वैद्यनाथ
Explanation:
- नागार्जुन मैथिली साहित्य में ‘यात्री’ उपनाम से लेखन करते थे।
- हिंदी में उनका प्रसिद्ध नाम ‘नागार्जुन’ है।
नागार्जुन का जन्म कब हुआ था?
- 15 अगस्त 1910
- 30 जून 1911
- 5 नवंबर 1912
- 30 जून 1913
Explanation:
- नागार्जुन का जन्म 30 जून 1911 को हुआ था।
- उनका जन्म बिहार के सतलखा गांव में उनके ननिहाल में हुआ था।
- उनका पैतृक गांव तरौनी, जिला दरभंगा था।
नागार्जुन का निधन कब हुआ था?
- 5 नवंबर 1996
- 30 जून 1997
- 5 नवंबर 1998
- 8 अक्टूबर 1998
Explanation:
- नागार्जुन का निधन 5 नवंबर 1998 को दरभंगा, बिहार में हुआ।
नागार्जुन ने 1936 में किस धर्म की दीक्षा ली थी?
- जैन धर्म
- सिख धर्म
- बौद्ध धर्म
- इस्लाम धर्म
Explanation:
- 1936 में नागार्जुन श्रीलंका गए और बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।
- इसी दौरान उन्होंने ‘वैद्यनाथ मिश्र’ से ‘नागार्जुन’ नाम धारण किया।
नागार्जुन की साहित्यिक चेतना मुख्यतः किससे जुड़ी है?
- रीतिवादी चिंतन
- छायावादी रहस्यवाद
- प्रगतिवादी और जनवादी चेतना
- दरबारी काव्य
Explanation:
- नागार्जुन की रचनाओं में प्रगतिवादी और जनवादी चेतना प्रमुख है।
- उनकी रचनाओं में किसान-मजदूर जीवन और राजनीतिक चेतना का प्रभाव दिखाई देता है।
नागार्जुन का पहला प्रसिद्ध काव्य-संग्रह कौन-सा माना जाता है?
- सतरंगे पंखों वाली
- प्यासी पथराई आँखें
- युगधारा
- तालाब की मछलियाँ
Explanation:
- ‘युगधारा’ नागार्जुन का पहला प्रसिद्ध काव्य-संग्रह माना जाता है।
- इसका प्रकाशन 1953 में हुआ था।
‘अकाल और उसके बाद’ कविता के रचनाकार कौन हैं?
- केदारनाथ सिंह
- मुक्तिबोध
- नागार्जुन
- धूमिल
Explanation:
- ‘अकाल और उसके बाद’ नागार्जुन की प्रसिद्ध कविता है।
- इसमें अकाल और उसके कारण उत्पन्न मानवीय पीड़ा तथा अभाव का मार्मिक चित्रण मिलता है।
‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता में मुख्य रूप से किसका चित्रण किया गया है?
- किसान के संघर्ष का
- प्रकृति के सौंदर्य का
- शिशु की निश्छल मुस्कान के सौंदर्य का
- अकाल की समस्या का
Explanation:
- ‘यह दंतुरित मुस्कान’ में शिशु की निश्छल मुस्कान का सुंदर चित्रण है।
- यह कविता नागार्जुन की प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल है।
‘फसल’ कविता में फसल को किन तत्वों के सम्मिश्रण के रूप में देखा गया है?
- केवल मिट्टी और पानी
- केवल किसान के श्रम
- मिट्टी, पानी, हवा, सूरज की किरणों और मानव-श्रम
- केवल वर्षा और सूर्य
Explanation:
- ‘फसल’ में फसल को प्रकृति और मानव-श्रम के सम्मिलित परिणाम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- मिट्टी, पानी, हवा, सूरज की किरणें और किसान का श्रम फसल के निर्माण में योगदान देते हैं।
नागार्जुन की प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य कविता कौन-सी है?
- बादल को घिरते देखा है
- सिंदूर तिलकित भाल
- शासन की बंदूक
- फसल
Explanation:
- ‘शासन की बंदूक’ नागार्जुन की प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य कविता है।
- नागार्जुन ने अपनी कविताओं में सत्ता और राजनीतिक व्यवस्था पर बेबाक टिप्पणी की है।
‘आओ रानी हम ढोएंगे पालकी’ कविता में किस प्रकार का स्वर प्रमुख है?
- श्रृंगारिक
- प्रकृति-प्रधान
- राजनीतिक व्यंग्य
- आध्यात्मिक
Explanation:
- ‘आओ रानी हम ढोएंगे पालकी’ नागार्जुन की प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य कविता है।
- इसमें सत्ता और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य किया गया है।
नागार्जुन का पहला उपन्यास कौन-सा है?
- बलचनमा
- नयी पौध
- रतिनाथ की चाची
- दुखमोचन
Explanation:
- ‘रतिनाथ की चाची’ नागार्जुन का पहला उपन्यास है।
- इसका प्रकाशन 1948 में हुआ था।
‘बलचनमा’ उपन्यास का मुख्य विषय क्या है?
- राजदरबार का जीवन
- शहरी मध्यम वर्ग
- शोषित किसान बालक का संघर्ष
- ऐतिहासिक युद्ध
Explanation:
- ‘बलचनमा’ में शोषित किसान बालक बलचनमा के संघर्ष को केंद्र में रखा गया है।
- यह नागार्जुन की महत्वपूर्ण उपन्यास-कृतियों में शामिल है।
‘बाबा बटेसरनाथ’ उपन्यास की प्रमुख विशेषता क्या है?
- राजनीतिक नेता को केंद्र में रखना
- किसी ऐतिहासिक युद्ध का वर्णन
- बरगद के वृक्ष को केंद्र में रखना
- समुद्री जीवन का चित्रण
Explanation:
- ‘बाबा बटेसरनाथ’ में बरगद के वृक्ष को केंद्र में रखकर कथा विकसित की गई है।
- यह नागार्जुन के प्रमुख उपन्यासों में से एक है।
‘वरुण के बेटे’ उपन्यास किस जीवन और संघर्ष पर आधारित है?
- सैनिकों के जीवन पर
- शहरी मजदूरों के जीवन पर
- मछुआरों के जीवन और संघर्ष पर
- राजाओं के जीवन पर
Explanation:
- ‘वरुण के बेटे’ में मछुआरा समुदाय के जीवन और संघर्ष का चित्रण मिलता है।
- नागार्जुन की रचनाओं में सामान्य और श्रमजीवी जनता के जीवन को विशेष महत्व मिला है।
नागार्जुन को ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ किस कृति के लिए मिला?
- युगधारा
- बलचनमा
- ‘पत्रहीन नग्न गाछ’
- बाबा बटेसरनाथ
Explanation:
- नागार्जुन को 1969 में मैथिली काव्य-संग्रह ‘पत्रहीन नग्न गाछ’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
- यह उनकी मैथिली भाषा की महत्वपूर्ण कृति है।
नागार्जुन को ‘कबीर की परंपरा का आधुनिक कवि’ क्यों कहा जाता है?
- वे केवल धार्मिक कविताएँ लिखते थे
- वे दरबारी कवि थे
- वे सीधे, फक्कड़, बेबाक और जनभाषा में तीखा प्रहार करते थे
- वे केवल प्रकृति का वर्णन करते थे
Explanation:
- नागार्जुन की काव्य-भाषा सहज, जनसामान्य के निकट और बेबाक है।
- कबीर की तरह वे सामाजिक विसंगतियों और अन्याय पर सीधे प्रहार करते हैं।
- उनकी रचनाओं में तत्सम, देशज और खड़ी बोली के शब्दों का प्रभावी प्रयोग मिलता है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म कब हुआ था?
- 15 अगस्त 1925
- 15 सितंबर 1927
- 24 सितंबर 1927
- 15 सितंबर 1930
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म 15 सितंबर 1927 को बस्ती, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का निधन कब हुआ था?
- 15 सितंबर 1983
- 15 अगस्त 1982
- 24 सितंबर 1983
- 24 अक्टूबर 1983
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का निधन 24 सितंबर 1983 को नई दिल्ली में हुआ था।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना किस काव्य-संकलन ‘सप्तक’ से जुड़े महत्वपूर्ण कवि थे?
- पहला सप्तक
- दूसरा सप्तक
- तीसरा सप्तक
- चौथा सप्तक
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ‘तीसरा सप्तक’ के महत्वपूर्ण कवियों में शामिल थे।
- ‘तीसरा सप्तक’ का संपादन अज्ञेय ने 1959 में किया था।
‘तीसरा सप्तक’ का संपादन किसने किया था?
- रामधारी सिंह दिनकर
- निराला
- अज्ञेय
- नामवर सिंह
Explanation:
- ‘तीसरा सप्तक’ का संपादन सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने किया था।
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना इसमें शामिल प्रमुख कवियों में थे।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने ‘दिनमान’ पत्रिका में किस नाम से लोकप्रिय स्तंभ लिखा?
- चरखे की आवाज
- चरखे और चरचे
- समय की आवाज
- कुछ रंग कुछ गंध
Explanation:
- उन्होंने ‘दिनमान’ पत्रिका में ‘चरखे और चरचे’ नाम से लोकप्रिय व्यंग्यात्मक स्तंभ लिखा।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना किस प्रसिद्ध बाल पत्रिका के संपादक रहे?
- नंदन
- चंपक
- पराग
- बाल भारती
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ‘पराग’ बाल पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे।
- उन्होंने बाल-साहित्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचना ‘काठ की घंटियाँ’ किस विधा से संबंधित है?
- उपन्यास
- काव्य-संग्रह
- नाटक
- निबंध-संग्रह
Explanation:
- ‘काठ की घंटियाँ’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रमुख काव्य-संग्रह है।
- यह 1959 में प्रकाशित हुआ था।
‘कुआनो नदी’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की किस प्रकार की रचना है?
- कहानी संग्रह
- नाटक
- प्रबंधात्मक काव्य
- उपन्यास
Explanation:
- ‘कुआनो नदी’ 1973 में प्रकाशित प्रसिद्ध प्रबंधात्मक काव्य है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस काव्य-संग्रह के लिए मिला?
- काठ की घंटियाँ
- कुआनो नदी
- जंगल का दर्द
- खूटियों पर टंगे लोग
Explanation:
- ‘खूटियों पर टंगे लोग’ के लिए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
- यह पुरस्कार 1983 में प्रदान किया गया था।
‘खूटियों पर टंगे लोग’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1973
- 1976
- 1982
- 1983
Explanation:
- ‘खूटियों पर टंगे लोग’ 1982 का प्रमुख काव्य-संग्रह है।
- इसी कृति के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
‘इब्ने बतूता’ कविता किस कवि की प्रसिद्ध रचना है?
- केदारनाथ सिंह
- कुंवर नारायण
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- रघुवीर सहाय
Explanation:
- ‘इब्ने बतूता’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की प्रसिद्ध कविता है।
- यह कविता NCERT और बाल साहित्य में भी लोकप्रिय है।
‘मेघ आए’ कविता किसकी रचना है?
- नागार्जुन
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- भवानीप्रसाद मिश्र
- शमशेर बहादुर सिंह
Explanation:
- ‘मेघ आए’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की प्रसिद्ध कविता है।
- यह कविता मानवीकरण अलंकार के सुंदर प्रयोग के लिए जानी जाती है।
‘शाम – एक किसान’ कविता में किस काव्य-तत्व की प्रमुखता बताई जाती है?
- उपमा
- अनुप्रास
- रूपक
- यमक
Explanation:
- ‘शाम – एक किसान’ में शाम का किसान के रूप में रूपकात्मक चित्रण किया गया है।
- यह कविता NCERT की पाठ्यपुस्तक में भी शामिल रही है।
‘बकरी’ नाटक के रचनाकार कौन हैं?
- मोहन राकेश
- लक्ष्मीनारायण लाल
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- धर्मवीर भारती
Explanation:
- ‘बकरी’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य नाटक है।
- इसमें जनवादी नाट्य परंपरा के माध्यम से राजनीतिक भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया गया है।
‘बकरी’ नाटक किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?
- 1968
- 1970
- 1974
- 1979
Explanation:
- ‘बकरी’ का प्रकाशन 1974 में हुआ था।
- यह सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यंग्यात्मक रचना है।
‘अब गरीबी हटाओ’ किस विधा की रचना है?
- काव्य-संग्रह
- उपन्यास
- नाटक
- कहानी-संग्रह
Explanation:
- ‘अब गरीबी हटाओ’ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की नाट्य रचनाओं में शामिल है।
- इसमें सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों को अभिव्यक्ति मिली है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रमुख साहित्यिक सरोकार क्या था?
- केवल राजदरबार का जीवन
- केवल पौराणिक कथाएँ
- आम आदमी का संघर्ष और मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाएँ
- केवल प्रकृति का सौंदर्य
Explanation:
- उनकी रचनाओं में आम आदमी का संघर्ष, मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाएँ और व्यवस्था के प्रति व्यंग्य प्रमुख हैं।
- प्रकृति और मानवीय संवेदना भी उनके साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
‘सोया हुआ जल’ किस विधा की रचना है?
- कविता
- नाटक
- उपन्यास
- निबंध
Explanation:
- ‘सोया हुआ जल’ 1977 में प्रकाशित सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का प्रयोगात्मक उपन्यास है।
‘पागल कुत्तों का मसीहा’ किस प्रकार की रचना है?
- महाकाव्य
- नाटक
- लघु उपन्यास
- काव्य-संग्रह
Explanation:
- ‘पागल कुत्तों का मसीहा’ 1977 की व्यंग्यात्मक लघु उपन्यास रचना है।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के साहित्य की प्रमुख विशेषता क्या है?
- केवल श्रृंगार वर्णन
- केवल पौराणिकता
- आम आदमी की संवेदना, व्यवस्था पर व्यंग्य और मानवीय सरोकार
- केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन
Explanation:
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का साहित्य आम आदमी के जीवन और संघर्ष से गहराई से जुड़ा है।
- उनकी रचनाओं में व्यवस्था की विसंगतियों पर व्यंग्य के साथ मानवीय संवेदना और प्रकृति-प्रेम भी दिखाई देता है।
‘धूमिल’ उपनाम से कौन जाने जाते थे ?
- सुदामा प्रसाद शर्मा
- सुदामा प्रसाद पांडेय
- राम प्रसाद पांडेय
- शिव प्रसाद पांडेय
Explanation:
- धूमिल का मूल नाम सुदामा प्रसाद पांडेय था।
- ‘धूमिल’ उनका साहित्यिक उपनाम था।
धूमिल का जन्म कब हुआ था?
- 20 नवंबर 1935
- 30 नवंबर 1936
- 10 फरवरी 1937
- 30 दिसंबर 1936
Explanation:
- धूमिल का जन्म 30 नवंबर 1936 को हुआ था।
- वे स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं।
धूमिल का जन्म स्थान कहाँ था?
- लखनऊ
- प्रयागराज
- खेवली गाँव, वाराणसी
- कानपुर
Explanation:
- धूमिल का जन्म खेवली गाँव, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
धूमिल ने किस क्षेत्र में डिप्लोमा प्राप्त किया था?
- सिविल इंजीनियरिंग
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग
- विद्युत (इलेक्ट्रिकल)
- कंप्यूटर विज्ञान
Explanation:
- धूमिल ने वाराणसी से आईटीआई में विद्युत का डिप्लोमा प्राप्त किया था।
धूमिल व्यावसायिक रूप से किस पद पर कार्यरत रहे?
- प्रधानाचार्य
- क्लर्क
- आईटीआई में अनुदेशक
- पत्रकार
Explanation:
- धूमिल आईटीआई में अनुदेशक के पद पर कार्यरत रहे।
- उनका व्यावसायिक जीवन तकनीकी शिक्षा से जुड़ा था।
धूमिल की कविताओं का प्रमुख स्वर क्या है?
- श्रृंगार और प्रकृति-सौंदर्य
- पौराणिक आख्यान
- मोहभंग, व्यवस्था-विरोध और आम आदमी की पीड़ा
- आध्यात्मिक साधना
Explanation:
- धूमिल ने आजादी के बाद के भारतीय समाज में व्याप्त राजनीतिक पाखंड और व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया।
- आम आदमी की पीड़ा और मोहभंग उनकी कविता के प्रमुख विषय हैं।
धूमिल के जीवनकाल में प्रकाशित एकमात्र काव्य-संग्रह कौन-सा है?
- कल सुनना मुझे
- सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र
- संसद से सड़क तक
- नक्सलबाड़ी
Explanation:
- ‘संसद से सड़क तक’ 1972 ई. में प्रकाशित हुआ।
- यह धूमिल के जीवनकाल में प्रकाशित उनका एकमात्र काव्य-संग्रह था।
‘संसद से सड़क तक’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1968 ई.
- 1972 ई.
- 1975 ई.
- 1977 ई.
Explanation:
- ‘संसद से सड़क तक’ का प्रकाशन 1972 ई. में हुआ।
- इसमें आम आदमी के मोहभंग और व्यवस्था के प्रति आक्रोश का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
‘कल सुनना मुझे’ किस प्रकार प्रकाशित हुआ?
- धूमिल के जीवनकाल में
- मरणोपरांत
- उनके जन्म से पहले
- केवल पत्रिका में
Explanation:
- ‘कल सुनना मुझे’ 1977 ई. में मरणोपरांत प्रकाशित हुआ।
- इसी काव्य-संग्रह के लिए धूमिल को मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
धूमिल को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस काव्य-संग्रह के लिए मिला?
- संसद से सड़क तक
- सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र
- कल सुनना मुझे
- पटकथा
Explanation:
- धूमिल को ‘कल सुनना मुझे’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
- यह पुरस्कार उन्हें मरणोपरांत मिला।
धूमिल को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस वर्ष प्रदान किया गया?
- 1975 ई.
- 1977 ई.
- 1979 ई.
- 1984 ई.
Explanation:
- धूमिल को 1979 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
- यह सम्मान उनके काव्य-संग्रह ‘कल सुनना मुझे’ के लिए मरणोपरांत दिया गया।
‘सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र’ किस वर्ष प्रकाशित हुआ?
- 1972 ई.
- 1977 ई.
- 1984 ई.
- 1988 ई.
Explanation:
- ‘सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र’ 1984 ई. में प्रकाशित हुआ।
- इसे धूमिल के पुत्र डॉ. रत्नशंकर पांडेय ने संपादित एवं प्रकाशित किया।
‘मोचीराम’ कविता का प्रमुख विषय क्या है?
- प्रकृति-सौंदर्य
- प्रेम-विरह
- श्रम की प्रतिष्ठा और सामाजिक विषमता
- धार्मिक आस्था
Explanation:
- ‘मोचीराम’ धूमिल की प्रसिद्ध कविता है।
- इसमें श्रम की गरिमा और समाज में मौजूद वर्गीय एवं सामाजिक विषमता को उभारा गया है।
‘रोटी और संसद’ कविता में ‘तीसरा आदमी’ किस व्यवस्था की ओर संकेत करता है?
- किसान
- मजदूर
- रोटी से खेलने वाली सत्ता/व्यवस्था
- शिक्षक
Explanation:
- ‘रोटी और संसद’ में रोटी बेलने और रोटी खाने वाले लोगों के बीच एक तीसरे व्यक्ति की चर्चा है।
- यह तीसरा आदमी उस सत्ता और व्यवस्था का प्रतीक है जो आम जनता की जरूरतों और श्रम से खेलती है।
‘पटकथा’ कविता में मुख्य रूप से किस स्थिति का चित्रण है?
- प्राकृतिक सौंदर्य
- प्राचीन इतिहास
- समकालीन भारत की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति
- पौराणिक कथा
Explanation:
- ‘पटकथा’ समकालीन भारतीय समाज और राजनीति पर केंद्रित लंबी कविता है।
- इसमें स्वतंत्रता के बाद की सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं और मोहभंग को अभिव्यक्ति मिलती है।
धूमिल की भाषा की प्रमुख विशेषता क्या है?
- अत्यधिक अलंकारिक और कोमल
- केवल संस्कृतनिष्ठ
- सीधी, आक्रामक और नुकीली
- केवल फारसीनिष्ठ
Explanation:
- धूमिल की भाषा बनावटीपन से मुक्त और सीधे कड़वे यथार्थ को व्यक्त करने वाली है।
- उनकी कविता में आक्रोश, व्यंग्य और व्यवस्था-विरोध स्पष्ट दिखाई देता है।
धूमिल को मुख्य रूप से किसका कवि कहा जाता है?
- प्रकृति का कवि
- श्रृंगार का कवि
- मोहभंग का कवि
- भक्ति का कवि
Explanation:
- आजादी के बाद आम जनता की बदहाली और राजनीतिक वादों से उत्पन्न असंतोष धूमिल की कविता में प्रमुखता से दिखाई देता है।
- इसी कारण उन्हें ‘मोहभंग का कवि’ कहा जाता है।
धूमिल हिंदी कविता के किस आंदोलन से प्रमुख रूप से जुड़े माने जाते हैं?
- छायावाद
- रीतिकाल
- अकविता आंदोलन
- भक्तिकाल
Explanation:
- धूमिल साठोत्तरी हिंदी कविता और अकविता आंदोलन के प्रमुख एवं मुखर कवियों में गिने जाते हैं।
- उनकी कविता में परंपरागत काव्य-सौंदर्य के बजाय यथार्थ, आक्रोश और व्यवस्था-विरोध प्रमुख हैं।
धूमिल की प्रसिद्ध कविता ‘अकाल दर्शन’ किस कवि की रचना है?
- नागार्जुन
- मुक्तिबोध
- धूमिल
- केदारनाथ सिंह
Explanation:
- ‘अकाल दर्शन’ धूमिल की प्रमुख कविताओं में शामिल है।
- उनकी रचनाओं में सामाजिक विषमता और आम जनता की पीड़ा को प्रमुख स्थान मिलता है।
धूमिल का निधन कब हुआ था?
- 10 फरवरी 1974
- 10 फरवरी 1975
- 30 नवंबर 1975
- 8 अक्टूबर 1976
Explanation:
- धूमिल का निधन 10 फरवरी 1975 को वाराणसी में हुआ।
- उनका जीवन अल्पायु में ही समाप्त हो गया।
धूमिल की कविता का केंद्रीय सरोकार किससे जुड़ा है?
- राजदरबार और सामंती जीवन
- प्रकृति और रोमांटिक प्रेम
- आम आदमी, व्यवस्था-विरोध और राजनीतिक पाखंड
- पौराणिक देवी-देवता
Explanation:
- धूमिल ने स्वतंत्रता के बाद के भारत में आम आदमी की समस्याओं और व्यवस्था की विसंगतियों को अपनी कविता का विषय बनाया।
- राजनीतिक पाखंड, झूठे वादे, सामाजिक विषमता और जनता के मोहभंग पर उनकी कविताओं में तीखा आक्रोश दिखाई देता है।
