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विद्यापति का पूरा नाम क्या था?
- विद्यापति मिश्र
- विद्यापति ठाकुर
- विद्यापति शर्मा
- विद्यापति झा
Explanation:
- विद्यापति का पूरा नाम विद्यापति ठाकुर था।
- वे मध्यकालीन मैथिली साहित्य के महान कवि माने जाते हैं।
विद्यापति का प्रसिद्ध उपनाम कौन-सा है?
- राष्ट्रकवि
- महाप्राण
- मैथिल कोकिल
- भारतेंदु
Explanation:
- विद्यापति को उनकी मधुर और रसमय मैथिली रचनाओं के कारण ‘मैथिल कोकिल’ कहा जाता है।
- उनकी अन्य उपाधियों में अभिनव जयदेव, कविशेखर और कविरंजन आदि शामिल हैं।
विद्यापति का जन्मस्थान कहाँ माना जाता है?
- दरभंगा
- पटना
- बिसफी गाँव, मधुबनी
- मुजफ्फरपुर
Explanation:
- विद्यापति का जन्म बिहार के वर्तमान मधुबनी जिले के बिसफी गाँव में माना जाता है।
- उनका संबंध मिथिला क्षेत्र से था।
विद्यापति के प्रमुख आश्रयदाता राजाओं में कौन शामिल थे?
- चंद्रगुप्त और समुद्रगुप्त
- अशोक और बिंबिसार
- कीर्ति सिंह और शिवसिंह
- हर्षवर्धन और भोज
Explanation:
- विद्यापति को तिरहुत/मिथिला के ओइनवार वंश के राजा कीर्ति सिंह और शिवसिंह का आश्रय प्राप्त था।
विद्यापति किस धार्मिक परंपरा से विशेष रूप से संबंधित थे?
- बौद्ध परंपरा
- जैन परंपरा
- शैव परंपरा
- सूफी परंपरा
Explanation:
- विद्यापति शिव के अनन्य भक्त माने जाते हैं।
- उनकी शिव-विषयक रचनाएँ मिथिला में ‘नचारी’ और ‘महेशवाणी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।
विद्यापति ने मुख्य रूप से किन भाषाओं में रचनाएँ कीं?
- हिंदी, बंगाली और उर्दू
- पाली, प्राकृत और फारसी
- संस्कृत, अवहट्ठ/अपभ्रंश और मैथिली
- संस्कृत, हिंदी और उर्दू
Explanation:
- विद्यापति बहुभाषी रचनाकार थे।
- उन्होंने संस्कृत में शास्त्रीय एवं धार्मिक ग्रंथ, अवहट्ठ में प्रशस्ति एवं ऐतिहासिक काव्य तथा मैथिली में गीतों की रचना की।
‘कीर्तिलता’ किस भाषा में रचित प्रमुख कृति है?
- संस्कृत
- मैथिली
- अवहट्ठ
- ब्रजभाषा
Explanation:
- ‘कीर्तिलता’ विद्यापति की महत्वपूर्ण अवहट्ठ रचना है।
- इसमें राजा कीर्ति सिंह की वीरता और उदारता का वर्णन किया गया है।
‘कीर्तिलता’ में किस राजा की वीरता और उदारता का वर्णन मिलता है?
- शिवसिंह
- कीर्ति सिंह
- गणेश्वर
- नरसिंह
Explanation:
- ‘कीर्तिलता’ में राजा कीर्ति सिंह की वीरता और उदारता का वर्णन है।
- यह विद्यापति की प्रशस्तिपरक अवहट्ठ रचनाओं में महत्वपूर्ण है।
‘कीर्तिलता’ किस संवाद के रूप में लिखी गई है?
- राजा-प्रजा संवाद
- गुरु-शिष्य संवाद
- भृंग-भृंगी संवाद
- नायक-नायिका संवाद
Explanation:
- ‘कीर्तिलता’ को भृंग-भृंगी संवाद के रूप में लिखा गया है।
- यह विद्यापति की रचनात्मक शैली की विशिष्ट विशेषता है।
‘कीर्तिलता’ में विद्यापति ने अवहट्ठ भाषा के संबंध में किस प्रसिद्ध कथन का प्रयोग किया है?
- भाषा जननी है
- संस्कृत सर्वश्रेष्ठ भाषा है
- “देसिल बअना सब जन मिट्ठा”
- भाषा ही साहित्य है
Explanation:
- विद्यापति ने लोकभाषा की मधुरता और लोकप्रियता को महत्व देते हुए कहा—“देसिल बअना सब जन मिट्ठा।”
- यह कथन उनकी लोकभाषा के प्रति सजगता को दर्शाता है।
‘कीर्तिपताका’ में मुख्य रूप से किस राजा का वर्णन मिलता है?
- कीर्ति सिंह
- शिवसिंह
- समुद्रगुप्त
- रामगुप्त
Explanation:
- ‘कीर्तिपताका’ में राजा शिवसिंह की वीरता और प्रेम का वर्णन मिलता है।
- यह रचना अपूर्ण मानी जाती है।
विद्यापति की प्रसिद्धि का मुख्य आधार कौन-सी रचना है?
- कीर्तिलता
- पुरुषपरीक्षा
- पदावली
- लिखनावली
Explanation:
- ‘पदावली’ विद्यापति की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में प्रमुख है।
- इसमें राधा-कृष्ण के प्रेम और सौंदर्य का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है।
‘पदावली’ में मुख्य रूप से किसका प्रेम-वर्णन मिलता है?
- शिव-पार्वती
- राम-सीता
- राधा-कृष्ण
- नल-दमयंती
Explanation:
- ‘पदावली’ में राधा और कृष्ण के प्रेम, सौंदर्य तथा श्रृंगारिक भावों का सजीव चित्रण है।
- विद्यापति की काव्य-प्रतिभा का सबसे प्रसिद्ध पक्ष उनकी पदावली है।
‘गोरक्षविजय’ किस प्रकार की रचना है?
- महाकाव्य
- उपन्यास
- नाटक/रंगमंचीय कृति
- नीतिग्रंथ
Explanation:
- ‘गोरक्षविजय’ एक नाटक या रंगमंचीय कृति है।
- इसके गद्य भाग संस्कृत और प्राकृत में तथा गीत मैथिली में हैं।
‘पुरुषपरीक्षा’ किस भाषा में रचित विद्यापति की कृति है?
- मैथिली
- अवहट्ठ
- संस्कृत
- हिंदी
Explanation:
- ‘पुरुषपरीक्षा’ विद्यापति की संस्कृत रचना है।
- यह नीतिशास्त्र और कथा साहित्य से संबंधित कृति है।
‘लिखनावली’ किस विषय से संबंधित है?
- शिव पूजा
- गंगा महात्म्य
- पत्र-लेखन और प्रशासनिक शैली
- दुर्गा पूजा
Explanation:
- ‘लिखनावली’ पत्र-लेखन तथा प्रशासनिक शैली से संबंधित संस्कृत कृति है।
- यह विद्यापति की बहुमुखी विद्वत्ता को दर्शाती है।
विद्यापति को ‘अभिनव जयदेव’ की उपाधि किस कारण से मिली?
- शिव की भक्ति के कारण
- संस्कृत विद्वत्ता के कारण
- जयदेव की ‘गीतगोविंद’ शैली के अनुरूप ‘पदावली’ रचने के कारण
- राजनीतिक रचनाओं के कारण
Explanation:
- विद्यापति की प्रेम और श्रृंगार प्रधान पद-रचना में जयदेव की परंपरा का प्रभाव दिखाई देता है।
- इसी कारण उन्हें ‘अभिनव जयदेव’ कहा गया।
विद्यापति को ‘मैथिल कोकिल’ क्यों कहा जाता है?
- उनकी संस्कृत रचनाओं के कारण
- उनकी ऐतिहासिक रचनाओं के कारण
- मैथिली भाषा में मधुर और रसमय पदों की रचना के कारण
- उनके राजनीतिक जीवन के कारण
Explanation:
- विद्यापति के मैथिली पद अत्यंत मधुर, गीतात्मक और रसमय हैं।
- इसी विशेषता के कारण उन्हें ‘मैथिल कोकिल’ की उपाधि मिली।
विद्यापति को आदिकाल और भक्ति काल के बीच किस रूप में माना जाता है?
- भक्त कवि
- रीतिकालीन कवि
- संधिकाल के कवि
- आधुनिक कवि
Explanation:
- विद्यापति को आदिकाल और भक्ति काल के बीच का संधि-कवि माना जाता है।
- उनकी रचनाओं में श्रृंगार, भक्ति और लोकभाषा की समृद्ध परंपरा का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
संत कबीरदास का जन्म किस संवत् में माना जाता है?
- संवत् 1400
- संवत् 1455
- संवत् 1500
- संवत् 1575
Explanation:
- कबीरदास का जन्म संवत् 1455 अर्थात 1398 ई. में माना जाता है।
संत कबीरदास का जन्म स्थान कहाँ माना जाता है?
- मगहर
- अयोध्या
- लहरतारा ताल, काशी
- मथुरा
Explanation:
- कबीरदास का जन्म लहरतारा ताल, काशी (वाराणसी) में माना जाता है।
कबीरदास के पालक माता-पिता कौन थे?
- रामानंद और लोई
- नीरू और नीमा
- धर्मदास और कमाली
- शेख तकी और नीमा
Explanation:
- कबीर के पालक माता-पिता नीरू और नीमा थे।
- वे जुलाहा दंपति थे।
कबीरदास की पत्नी का नाम क्या था?
- कमाली
- नीमा
- लोई
- मंदाकिनी
Explanation:
- कबीरदास की पत्नी का नाम लोई माना जाता है।
कबीरदास के पुत्र और पुत्री के नाम क्या थे?
- राम और सीता
- कमाल और कमाली
- धर्मदास और लोई
- नीरू और नीमा
Explanation:
- कबीरदास के पुत्र का नाम कमाल और पुत्री का नाम कमाली बताया जाता है।
कबीरदास के प्रमुख गुरु के रूप में किसका नाम लिया जाता है?
- तुलसीदास
- सूरदास
- स्वामी रामानंद
- गुरु नानक
Explanation:
- कबीरदास के प्रमुख गुरु स्वामी रामानंद माने जाते हैं।
- स्वामी रामानंद वैष्णव संत थे।
कबीरदास का संबंध किस मुस्लिम गुरु से भी बताया जाता है?
- बाबर
- अमीर खुसरो
- शेख तकी
- दारा शिकोह
Explanation:
- कबीरदास के गुरु के रूप में शेख तकी का नाम भी मिलता है।
- उन्हें मुस्लिम/सूफी संत के रूप में बताया जाता है।
कबीरदास ने अपनी निरक्षरता को किस कथन के माध्यम से व्यक्त किया है?
- पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ
- “मसि कागद छूओ नहीं, कलम गही नहिं हाथ”
- गुरु गोविंद दोऊ खड़े
- साईं इतना दीजिए
Explanation:
- कबीर ने कहा—“मसि कागद छूओ नहीं, कलम गही नहिं हाथ।”
- इससे उनके औपचारिक रूप से निरक्षर होने की बात व्यक्त होती है।
कबीर की वाणी का संग्रह उनके किस शिष्य ने किया?
- रैदास
- मलूकदास
- धर्मदास
- दादूदयाल
Explanation:
- कबीर की वाणी के संग्रह से धर्मदास का नाम जोड़ा जाता है।
- कबीर की वाणी मुख्यतः मौखिक परंपरा के माध्यम से आगे बढ़ी।
कबीरदास का प्रमुख ग्रंथ कौन-सा है?
- रामचरितमानस
- सूरसागर
- बीजक
- पद्मावत
Explanation:
- ‘बीजक’ कबीर की वाणी का प्रमुख संकलन माना जाता है।
- इसके तीन प्रमुख भाग हैं—साखी, सबद और रमैनी।
‘बीजक’ के कितने प्रमुख भाग हैं?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
Explanation:
- ‘बीजक’ के तीन प्रमुख भाग हैं—साखी, सबद और रमैनी।
‘बीजक’ के किस भाग में मुख्यतः दोहा छंद का प्रयोग हुआ है?
- सबद
- रमैनी
- साखी
- उलटबाँसी
Explanation:
- साखी में मुख्यतः दोहा छंद का प्रयोग मिलता है।
- इसमें कबीर के व्यावहारिक ज्ञान और सिद्धांतों का वर्णन है।
‘बीजक’ के किस भाग में गेय पद मिलते हैं?
- साखी
- सबद
- रमैनी
- उलटबाँसी
Explanation:
- ‘सबद’ में गेय अर्थात संगीतबद्ध पद हैं।
- इनमें कबीर के धार्मिक और दार्शनिक विचार व्यक्त हुए हैं।
‘बीजक’ के किस भाग में चौपाई और दोहा छंद का प्रयोग मिलता है?
- साखी
- सबद
- रमैनी
- पदावली
Explanation:
- रमैनी में चौपाई और दोहा छंद का प्रयोग मिलता है।
- इसमें रहस्यवादी और दार्शनिक विचार व्यक्त किए गए हैं।
कबीरदास की भाषा को रामचंद्र शुक्ल ने क्या कहा है?
- ब्रजभाषा
- अवधी
- सधुक्कड़ी
- खड़ी बोली
Explanation:
- रामचंद्र शुक्ल ने कबीर की भाषा को ‘सधुक्कड़ी’ कहा है।
- इसमें विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के शब्द मिलते हैं।
श्यामसुंदर दास ने कबीर की भाषा को किस नाम से संबोधित किया?
- ब्रजभाषा
- पंचमेल खिचड़ी
- साहित्यिक हिंदी
- राजस्थानी
Explanation:
- श्यामसुंदर दास ने कबीर की भाषा को ‘पंचमेल खिचड़ी’ कहा।
- कबीर की भाषा में अवधी, ब्रज, खड़ी बोली, राजस्थानी, पंजाबी और पूर्वी हिंदी के शब्द मिलते हैं।
कबीर की ‘उलटबासियाँ’ किस प्रकार की शैली का उदाहरण हैं?
- ऐतिहासिक शैली
- वर्णनात्मक शैली
- रहस्यवादी एवं अप्रत्यक्ष शैली
- वैज्ञानिक शैली
Explanation:
- उलटबासियों में कथन का अर्थ सामान्य रूप से उलटा या विरोधाभासी प्रतीत होता है।
- इनके माध्यम से कबीर ने रहस्यवादी और गूढ़ विचार व्यक्त किए।
कबीरदास की विचारधारा मुख्यतः किस भक्ति धारा से संबंधित है?
- सगुण रामभक्ति
- सगुण कृष्णभक्ति
- निर्गुण संत काव्यधारा
- रीतिकालीन काव्यधारा
Explanation:
- कबीर निर्गुण संत काव्यधारा के प्रमुख प्रतिनिधि कवि हैं।
- वे निराकार ब्रह्म की उपासना पर बल देते हैं।
कबीरदास ने किन सामाजिक प्रवृत्तियों का कड़ा विरोध किया?
- मानवतावाद और प्रेम
- गुरु-भक्ति
- बाह्याडंबर, जाति-पाति, मूर्तिपूजा और धार्मिक संकीर्णता
- सत्य और सद्भाव
Explanation:
- कबीर ने धार्मिक पाखंड, बाह्याडंबर और जातिगत भेदभाव का विरोध किया।
- उन्होंने मानवतावाद, सद्भाव और आंतरिक भक्ति को महत्व दिया।
कबीरदास को “वाणी का डिक्टेटर” किस विद्वान ने कहा?
- रामचंद्र शुक्ल
- श्यामसुंदर दास
- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
- नंददुलारे वाजपेयी
Explanation:
- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को “वाणी का डिक्टेटर” कहा है।
- इसका आशय है कि कबीर अपनी अभिव्यक्ति के अनुसार भाषा से प्रभावशाली ढंग से काम लेते थे।
कबीरदास का देहावसान किस संवत् में माना जाता है?
- संवत् 1455
- संवत् 1500
- संवत् 1575
- संवत् 1600
Explanation:
- कबीरदास का देहावसान संवत् 1575 अर्थात 1518 ई. में माना जाता है।
- उनका मृत्यु-स्थल मगहर माना जाता है।
कबीरदास अपने अंतिम समय में मगहर क्यों गए?
- राजनीतिक कारणों से
- व्यापार करने के लिए
- काशी में मृत्यु से स्वर्ग और मगहर में मृत्यु से नरक की मान्यता का विरोध करने के लिए
- अपने शिष्यों से मिलने के लिए
Explanation:
- उस समय यह अंधविश्वास प्रचलित था कि काशी में मृत्यु होने पर स्वर्ग और मगहर में मृत्यु होने पर नरक मिलता है।
- कबीर ने इस अंधविश्वास को चुनौती देते हुए अपने अंतिम समय में मगहर जाना स्वीकार किया।
- इससे उनके पाखंड-विरोधी और तर्कशील दृष्टिकोण का परिचय मिलता है।
सूरदास का जन्म किस संवत् में माना जाता है?
- संवत् 1500
- संवत् 1535
- संवत् 1550
- संवत् 1583
Explanation:
- सूरदास का जन्म संवत् 1535 अर्थात लगभग 1478 ई. में माना जाता है।
- उनके जन्मस्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद है।
सूरदास के जन्मस्थान के संबंध में आधुनिक विद्वानों द्वारा किस स्थान को अधिक प्रामाणिक माना गया है?
- रुनाक्ता
- रेणुका क्षेत्र
- सीही
- पारसोली
Explanation:
- डॉ. नगेंद्र और गणपतिचंद्र गुप्त जैसे आधुनिक विद्वान सीही को सूरदास का जन्मस्थान अधिक प्रामाणिक मानते हैं।
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल और श्यामसुंदर दास ने रुनाक्ता/रेणुका क्षेत्र का समर्थन किया है।
सूरदास किस साहित्यिक युग से संबंधित हैं?
- आदिकाल
- रीतिकाल
- भक्तिकाल
- आधुनिक काल
Explanation:
- सूरदास भक्तिकाल के महान कवि हैं।
- वे सगुण भक्तिधारा की कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख कवि माने जाते हैं।
सूरदास के दीक्षा गुरु कौन थे?
- रामानंद
- चैतन्य महाप्रभु
- महाप्रभु वल्लभाचार्य
- कबीर
Explanation:
- सूरदास के दीक्षा गुरु महाप्रभु वल्लभाचार्य माने जाते हैं।
- वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक थे।
सूरदास का संबंध किस भक्ति संप्रदाय से था?
- रामानंदी संप्रदाय
- नाथ संप्रदाय
- वल्लभ संप्रदाय/पुष्टिमार्ग
- सूफी संप्रदाय
Explanation:
- सूरदास वल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्ग से जुड़े थे।
- कृष्ण की बाल-लीला और प्रेम-भक्ति उनके काव्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
सूरदास का प्रमुख निवास स्थान कौन-सा माना जाता है, जहाँ वे कीर्तन करते थे?
- काशी
- अयोध्या
- गऊघाट
- चित्रकूट
Explanation:
- सूरदास गऊघाट में रहते थे, जो आगरा-मथुरा के बीच स्थित माना जाता है।
- वे श्रीनाथ जी के मंदिर में कीर्तन करते थे।
‘पुष्टिमार्ग का जहाज’ उपाधि सूरदास को किसने दी थी?
- वल्लभाचार्य
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल
- विट्ठलनाथ
- अमृतलाल नागर
Explanation:
- वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ ने सूरदास के निधन के समय उन्हें ‘पुष्टिमार्ग का जहाज’ कहा था।
- इस उपाधि से पुष्टिमार्ग और कृष्णभक्ति परंपरा में सूरदास के महत्व का पता चलता है।
‘वात्सल्य रस का सम्राट’ किस कवि को कहा जाता है?
- तुलसीदास
- कबीरदास
- सूरदास
- मीराबाई
Explanation:
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सूरदास को वात्सल्य रस का सम्राट माना है।
- कृष्ण की बाल-लीलाओं और यशोदा-कृष्ण संबंध का अत्यंत मार्मिक चित्रण उनके काव्य में मिलता है।
विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित अष्टछाप में सूरदास का स्थान कैसा माना जाता है?
- सामान्य
- द्वितीय
- सर्वोपरि
- अंतिम
Explanation:
- अष्टछाप में आठ कृष्णभक्त कवि शामिल थे।
- सूरदास को इन कवियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
सूरदास की नेत्रहीनता के संबंध में विद्वानों में क्या मत है?
- सभी विद्वान उन्हें जन्मांध मानते हैं
- सभी विद्वान उन्हें पूर्णतः दृष्टिवान मानते हैं
- इस विषय में विद्वानों में मतभेद है
- इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है
Explanation:
- सूरदास जन्मांध थे या बाद में दृष्टिहीन हुए, इस पर विद्वानों में मतभेद है।
- उनके काव्य में बाल-लीला और रूप-सौंदर्य के सूक्ष्म वर्णन के कारण अनेक विद्वान उन्हें जन्मांध नहीं मानते।
सूरदास के तीन प्रामाणिक और उपलब्ध ग्रंथों को किस संस्था के अनुसार माना जाता है?
- हिंदी साहित्य सम्मेलन
- साहित्य अकादमी
- काशी नागरी प्रचारिणी सभा
- हिंदुस्तानी अकादमी
Explanation:
- काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अनुसार सूरदास के तीन ग्रंथ प्रामाणिक और उपलब्ध माने जाते हैं।
- ये हैं—सूरसागर, सूरसारावली और साहित्य लहरी।
सूरदास का सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख ग्रंथ कौन-सा है?
- सूरसारावली
- साहित्य लहरी
- सूरसागर
- ब्याहलो
Explanation:
- ‘सूरसागर’ सूरदास का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है।
- यह श्रीमद्भागवत पुराण के 12 स्कंधों पर आधारित माना जाता है।
- इसका महत्वपूर्ण अंश ‘भ्रमरगीत’ है।
‘सूरसागर’ का सबसे महत्वपूर्ण अंश कौन-सा है?
- रामचरित
- विनय पद
- भ्रमरगीत
- नायिका-भेद
Explanation:
- ‘भ्रमरगीत’ सूरसागर के दशम स्कंध से संबंधित महत्वपूर्ण अंश है।
- इसमें गोपियों और उद्धव के संवाद के माध्यम से भक्ति और ज्ञान के संबंध को प्रस्तुत किया गया है।
‘सूरसारावली’ में कुल कितने छंद/पद बताए जाते हैं?
- 1000
- 1107
- 118
- 4930
Explanation:
- ‘सूरसारावली’ में कुल 1107 छंद/पद बताए जाते हैं।
- इसे ‘सूरसागर’ का सारांश या अनुक्रमणिका माना जाता है।
- इसकी रचना ‘संसार रूपी होली’ के रूपक पर की गई है।
‘साहित्य लहरी’ मुख्य रूप से किस विषय का निरूपण करने वाला ग्रंथ है?
- इतिहास और राजनीति
- भक्ति और दर्शन मात्र
- रस, अलंकार और नायिका-भेद
- युद्ध और वीरता
Explanation:
- ‘साहित्य लहरी’ में रस, अलंकार और नायिका-भेद का निरूपण मिलता है।
- इसमें 118 दृष्टिकोण पद बताए जाते हैं।
- इसके अंत में सूरदास के वंशवृक्ष का उल्लेख भी मिलता है।
‘साहित्य लहरी’ में सूरदास ने अपने वंशवृक्ष को किससे जोड़ा है?
- तुलसीदास
- विद्यापति
- चंदबरदाई
- अमीर खुसरो
Explanation:
- ‘साहित्य लहरी’ के अंत में दिए गए वंशवृक्ष के अनुसार सूरदास को चंदबरदाई का वंशज बताया गया है।
- चंदबरदाई ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता माने जाते हैं।
‘ऊधो, तुम हौं अति बड़भागी’ किस काव्य-परंपरा से संबंधित प्रसिद्ध पद है?
- रामभक्ति
- वीरगाथा
- भ्रमरगीत
- रीतिकाव्य
Explanation:
- ‘ऊधो, तुम हौं अति बड़भागी’ भ्रमरगीत परंपरा का प्रसिद्ध पद है।
- इसमें गोपियों और उद्धव के संवाद के माध्यम से सगुण भक्ति की भावप्रधानता सामने आती है।
हिंदी साहित्य में ‘भ्रमरगीत काव्य परंपरा’ का मूल प्रवर्तक किसे माना जाता है?
- तुलसीदास
- कबीर
- सूरदास
- रसखान
Explanation:
- हिंदी साहित्य में भ्रमरगीत काव्य परंपरा का मूल प्रवर्तक सूरदास को माना जाता है।
- गोपियों और उद्धव के संवाद के माध्यम से भक्ति और ज्ञान के बीच का भावात्मक संघर्ष प्रस्तुत किया गया है।
सूरदास के काव्य में कौन-सा रस प्रधान है?
- वीर रस
- करुण रस
- वात्सल्य रस
- भयानक रस
Explanation:
- सूरदास के काव्य में वात्सल्य रस प्रधान है।
- इसके साथ शृंगार रस भी महत्वपूर्ण है, जिसमें संयोग और वियोग दोनों का चित्रण मिलता है।
सूरदास की काव्य-भाषा कौन-सी है?
- अवधी
- खड़ी बोली
- ब्रजभाषा
- मैथिली
Explanation:
- सूरदास ने शुद्ध और साहित्यिक ब्रजभाषा को काव्य की प्रभावशाली भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया।
- उनकी भाषा में माधुर्य, सरसता और संगीतात्मकता प्रमुख हैं।
सूरदास की काव्य-शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?
- गद्यात्मक वर्णन
- केवल वीरगाथा शैली
- गेय पद शैली
- नाटकीय संवाद शैली
Explanation:
- सूरदास के पद गेय हैं और संगीत तथा राग-रागिनियों से जुड़े हुए हैं।
- उनकी रचनाओं में भाव, संगीत और भक्ति का सुंदर समन्वय मिलता है।
सूरदास का निधन किस स्थान पर माना जाता है?
- काशी
- गऊघाट
- पारसोली
- सीही
Explanation:
- सूरदास का निधन संवत् 1640 अर्थात लगभग 1583 ई. में माना जाता है।
- निधन-स्थान पारसोली बताया जाता है, जो गोवर्धन के पास स्थित है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सूरदास की कविता की किस विशेषता को रेखांकित किया है?
- केवल वीरता
- केवल राजनीतिक चेतना
- वात्सल्य और शृंगार के सूक्ष्म चित्रण तथा माधुर्य-सरसता
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- रामचंद्र शुक्ल के अनुसार सूरदास वात्सल्य और शृंगार के भावों के सूक्ष्म चित्रण में अत्यंत समर्थ हैं।
- उनकी कविता का माधुर्य और सरसता हिंदी भक्तिकाव्य की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जाती है।
गोस्वामी तुलसीदास का मूल नाम क्या था?
- हरिराम
- रामानंद
- रामबोला
- गोपालदास
Explanation:
- गोस्वामी तुलसीदास का मूल नाम रामबोला माना जाता है।
- वे हिंदी भक्ति साहित्य के महान कवि और रामभक्ति शाखा के प्रमुख प्रतिनिधि हैं।
तुलसीदास का जन्म लगभग किस वर्ष माना जाता है?
- 1450 ई.
- 1532 ई.
- 1600 ई.
- 1623 ई.
Explanation:
- तुलसीदास का जन्म 16वीं शताब्दी में लगभग 1532 ई. में माना जाता है।
- विक्रम संवत 1589 को भी उनके जन्मकाल से जोड़ा जाता है।
तुलसीदास का जन्मस्थान सामान्यतः किसे माना जाता है?
- काशी
- अयोध्या
- राजापुर, बाँदा
- चित्रकूट
Explanation:
- तुलसीदास का जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गांव में माना जाता है।
- कुछ विद्वान सूकरखेत/सोरों को भी उनका जन्मस्थान मानते हैं।
तुलसीदास की माता का नाम क्या था?
- रत्नावली
- हुलसी
- पार्वती
- जानकी
Explanation:
- तुलसीदास की माता का नाम हुलसी माना जाता है।
- उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे बताया जाता है।
तुलसीदास के पिता का नाम क्या था?
- नरहरिदास
- शेष सनातन
- आत्माराम दुबे
- रामदास
Explanation:
- तुलसीदास के पिता आत्माराम दुबे थे।
- उनकी माता का नाम हुलसी था।
तुलसीदास की पत्नी का नाम क्या था?
- हुलसी
- मंदाकिनी
- रत्नावली
- जानकी
Explanation:
- तुलसीदास की पत्नी का नाम रत्नावली था।
- परंपरागत रूप से माना जाता है कि रत्नावली के वैराग्य-प्रेरक वचनों के बाद तुलसीदास सांसारिक जीवन से विरक्त हुए।
तुलसीदास के दीक्षा गुरु कौन थे?
- शेष सनातन
- सूरदास
- स्वामी नरहरियानंद (नरहरिदास)
- नाभादास
Explanation:
- तुलसीदास के दीक्षा गुरु स्वामी नरहरियानंद, जिन्हें नरहरिदास भी कहा जाता है, माने जाते हैं।
तुलसीदास के शिक्षा गुरु कौन थे?
- नरहरिदास
- शेष सनातन
- नाभादास
- रहीम
Explanation:
- तुलसीदास के शिक्षा गुरु शेष सनातन माने जाते हैं।
- उन्होंने काशी में उनसे शिक्षा प्राप्त की थी।
तुलसीदास किस भक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं?
- निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा
- निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा
- सगुण रामाश्रयी शाखा
- सगुण कृष्णाश्रयी शाखा
Explanation:
- तुलसीदास सगुण भक्ति की रामाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं।
- उनकी भक्ति का केंद्र भगवान श्रीराम हैं।
तुलसीदास की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
- विनय पत्रिका
- कवितावली
- रामचरितमानस
- दोहावली
Explanation:
- ‘रामचरितमानस’ तुलसीदास की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति है।
- यह अवधी भाषा में रचित रामकथा-आधारित महाकाव्यात्मक ग्रंथ है।
‘रामचरितमानस’ की रचना किस भाषा में हुई है?
- ब्रजभाषा
- खड़ी बोली
- अवधी
- मैथिली
Explanation:
- ‘रामचरितमानस’ मुख्यतः अवधी भाषा में रचित है।
- यह तुलसीदास की रामभक्ति और लोकभाषा में साहित्य-सृजन की महान उपलब्धि है।
‘रामचरितमानस’ में कुल कितने कांड हैं?
- पाँच
- छह
- सात
- आठ
Explanation:
- ‘रामचरितमानस’ में सात कांड हैं।
- क्रम है—बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड।
‘रामचरितमानस’ का सबसे बड़ा कांड कौन-सा है?
- अयोध्याकांड
- सुंदरकांड
- बालकांड
- उत्तरकांड
Explanation:
- ‘रामचरितमानस’ का सबसे बड़ा कांड बालकांड माना जाता है।
- इसमें राम के जन्म और बाल्यकाल से संबंधित अनेक प्रसंगों का वर्णन है।
‘रामचरितमानस’ का सबसे छोटा कांड कौन-सा है?
- बालकांड
- अरण्यकांड
- किष्किंधाकांड
- उत्तरकांड
Explanation:
- ‘रामचरितमानस’ का सबसे छोटा कांड किष्किंधाकांड है।
- इसमें राम और सुग्रीव की मित्रता तथा बालि-वध जैसे प्रमुख प्रसंग आते हैं।
‘जानकी मंगल’ में किस प्रसंग का वर्णन किया गया है?
- राम का वनवास
- राम-रावण युद्ध
- सीता-राम विवाह
- राम का राज्याभिषेक
Explanation:
- ‘जानकी मंगल’ में सीता और राम के विवाह का वर्णन है।
- यह तुलसीदास की अवधी भाषा में रचित प्रमुख रचनाओं में शामिल है।
‘पार्वती मंगल’ में किसका विवाह वर्णित है?
- राम और सीता
- कृष्ण और राधा
- शिव और पार्वती
- भरत और मांडवी
Explanation:
- ‘पार्वती मंगल’ में शिव-पार्वती विवाह का वर्णन किया गया है।
- यह तुलसीदास की अवधी रचनाओं में प्रमुख है।
‘विनय पत्रिका’ का प्रमुख विषय क्या है?
- कृष्ण की बाल लीलाएँ
- नीति संबंधी दोहे
- कलिकाल के कष्टों से मुक्ति के लिए श्रीराम से प्रार्थना
- शिव-पार्वती विवाह
Explanation:
- ‘विनय पत्रिका’ में तुलसीदास ने श्रीराम के समक्ष अपनी विनय और प्रार्थना प्रस्तुत की है।
- कलियुग के कष्टों से मुक्ति और भक्ति-भाव इसकी प्रमुख विशेषता है।
- यह ब्रजभाषा में रचित प्रमुख कृति है।
‘कवितावली’ किस शैली में रचित है?
- दोहा और चौपाई
- गीत और पद
- कवित्त और सवैया
- बरवै और सोरठा
Explanation:
- ‘कवितावली’ में कवित्त और सवैया छंदों का प्रमुख प्रयोग हुआ है।
- इसमें वाराणसी में फैली महामारी का भी उल्लेख मिलता है।
‘हनुमान बाहुक’ के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
- यह सूरदास की रचना है।
- यह रामचरितमानस का एक कांड है।
- इसे कवितावली का एक भाग माना जाता है और बाहु-पीड़ा से मुक्ति के लिए रचा गया था।
- यह कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित है।
Explanation:
- ‘हनुमान बाहुक’ को तुलसीदास की ‘कवितावली’ से संबंधित माना जाता है।
- परंपरा के अनुसार इसकी रचना तुलसीदास ने अपनी बाहु-पीड़ा से मुक्ति की कामना से की थी।
तुलसीदास को ‘कलिकाल का वाल्मीकि’ किसने कहा था?
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल
- जॉर्ज ग्रियर्सन
- नाभादास
- वी. ए. स्मिथ
Explanation:
- भक्तमाल के रचयिता नाभादास ने तुलसीदास को ‘कलिकाल का वाल्मीकि’ कहा।
- यह उपाधि तुलसीदास की रामकथा-परंपरा में महान भूमिका को दर्शाती है।
तुलसीदास का निधन किस वर्ष माना जाता है?
- 1556 ई.
- 1605 ई.
- 1623 ई.
- 1640 ई.
Explanation:
- तुलसीदास का निधन 1623 ई. में माना जाता है।
- उनका निधन काशी के असी घाट पर हुआ माना जाता है।
- प्रसिद्ध पंक्ति है— “संवत सोरह सौ असी, असी गंग के तीर। सावन शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर॥”
‘बिहारी’ का वास्तविक नाम क्या था?
- बिहारीदास
- केशवदास
- बिहारीलाल
- गोवर्धनदास
Explanation:
- बिहारी का पूरा नाम बिहारीलाल माना जाता है।
- वे रीतिकाल के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं।
बिहारी का जन्म किस संवत् में माना जाता है?
- संवत् 1600
- संवत् 1652
- संवत् 1700
- संवत् 1720
Explanation:
- बिहारी का जन्म संवत् 1652 अर्थात लगभग 1595 ई. में माना जाता है।
बिहारी का जन्मस्थान कौन-सा माना जाता है?
- वृंदावन
- जयपुर
- बसुआ गोविंदपुर
- काशी
Explanation:
- बिहारी का जन्म बसुआ गोविंदपुर में माना जाता है।
- यह स्थान वर्तमान मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।
बिहारी के पिता का नाम क्या था?
- नरहरिदास
- केशवराय
- जयसिंह
- गोवर्धनाचार्य
Explanation:
- बिहारी के पिता का नाम केशवराय था।
- वे चौबे ब्राह्मण परिवार से संबंधित थे।
बिहारी के गुरु कौन थे?
- केशवराय
- गोवर्धनाचार्य
- नरहरिदास
- अमरु
Explanation:
- बिहारी के गुरु नरहरिदास माने जाते हैं।
बिहारी के प्रमुख आश्रयदाता कौन थे?
- अकबर
- शाहजहाँ
- जयपुर के मिर्जा राजा जयसिंह
- महाराणा प्रताप
Explanation:
- बिहारी को जयपुर के मिर्जा राजा जयसिंह का आश्रय प्राप्त था।
- राजा जयसिंह से जुड़ा प्रसिद्ध दोहा बिहारी की काव्य-कुशलता का उदाहरण माना जाता है।
राजा जयसिंह को कर्तव्यपथ पर लाने के लिए बिहारी ने किस माध्यम का प्रयोग किया?
- कविता-पत्र
- कहानी
- दोहा
- नाटक
Explanation:
- प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार बिहारी ने राजा जयसिंह को एक दोहा भेजा।
- दोहा था— “नहिं परागु नहिं मधुर मधु, नहिं विकासु इहिं कालि…”।
- इस दोहे के माध्यम से उन्होंने राजा को कर्तव्य की ओर संकेत किया।
राजा जयसिंह ने प्रसन्न होकर बिहारी को क्या देने का वचन दिया था?
- एक स्वर्ण-मुद्रा प्रतिदिन
- एक घोड़ा प्रत्येक दोहे पर
- हर दोहे पर एक अशर्फी
- एक गांव प्रत्येक कविता पर
Explanation:
- प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार राजा जयसिंह बिहारी के दोहे से प्रभावित हुए।
- उन्होंने प्रत्येक दोहे पर एक अशर्फी देने का वचन दिया था।
बिहारी की अमर कीर्ति का आधार उनकी किस रचना को माना जाता है?
- रसिकप्रिया
- कविप्रिया
- बिहारी सतसई
- साहित्य लहरी
Explanation:
- बिहारी की प्रमुख और एकमात्र प्रसिद्ध रचना ‘बिहारी सतसई’ है।
- इसी रचना ने उन्हें हिंदी साहित्य में अमर स्थान दिलाया।
‘बिहारी सतसई’ किस छंद में रचित है?
- सवैया
- कवित्त
- सोरठा
- दोहा
Explanation:
- ‘बिहारी सतसई’ के दोहे दोहा छंद में रचे गए हैं।
- बिहारी ने दोहे जैसे छोटे छंद में अत्यंत व्यापक अर्थ व्यक्त किए हैं।
‘बिहारी सतसई’ की भाषा कौन-सी है?
- अवधी
- खड़ी बोली
- ब्रजभाषा
- मैथिली
Explanation:
- बिहारी की भाषा परिमार्जित और रस-सिक्त ब्रजभाषा है।
- उनकी भाषा में कम शब्दों में गहरे भाव व्यक्त करने की विशेष क्षमता दिखाई देती है।
‘बिहारी सतसई’ में लगभग कितने दोहे माने जाते हैं?
- 500
- 600
- 713
- 1000
Explanation:
- ‘बिहारी सतसई’ में 713 दोहे माने जाते हैं।
- कुछ विद्वानों ने इनकी संख्या 719 या 726 भी मानी है।
‘बिहारी सतसई’ में मुख्य रूप से किस रस का वर्णन मिलता है?
- वीर रस
- करुण रस
- श्रृंगार रस
- भयानक रस
Explanation:
- ‘बिहारी सतसई’ में मुख्य रूप से श्रृंगार रस की प्रधानता है।
- इसके साथ भक्ति और नीति संबंधी दोहे भी मिलते हैं।
- इसी कारण बिहारी के काव्य में श्रृंगार, भक्ति और नीति का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
बिहारी के काव्य में श्रृंगार के कौन-कौन से दोनों पक्ष मिलते हैं?
- वीर और करुण
- संयोग और वियोग
- हास्य और अद्भुत
- भक्ति और नीति
Explanation:
- बिहारी ने संयोग और वियोग दोनों प्रकार के श्रृंगार का सजीव चित्रण किया है।
- वियोग-वर्णन में कहीं-कहीं अतिशयोक्ति या ऊहात्मकता भी दिखाई देती है।
बिहारी की काव्य-शैली की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?
- विस्तृत वर्णन
- सरल गद्य
- कम शब्दों में व्यापक अर्थ व्यक्त करना
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- बिहारी के दोहों में समास शक्ति और समाहार शक्ति अत्यंत प्रभावशाली है।
- उनकी शैली को “गागर में सागर भरना” कहकर व्यक्त किया जाता है।
“सतसैया के दोहरा ज्यों नावक के तीर” पंक्ति किस कवि से संबंधित है?
- केशवदास
- घनानंद
- बिहारी
- भूषण
Explanation:
- बिहारी ने अपने दोहों की प्रभावशाली संक्षिप्तता को इस प्रकार व्यक्त किया— “सतसैया के दोहरा ज्यों नावक के तीर।”
- अर्थात दोहे छोटे दिखाई देते हैं, लेकिन उनका प्रभाव बहुत गहरा होता है।
बिहारी की ‘सतसई’ किस परंपरा से संबंधित है?
- महाकाव्य परंपरा
- वीरगाथा परंपरा
- ‘सप्तशती’ परंपरा
- आधुनिक गद्य परंपरा
Explanation:
- ‘बिहारी सतसई’ ‘सप्तशती’ परंपरा का ग्रंथ है।
- इस परंपरा में बड़ी संख्या में स्वतंत्र पदों या दोहों के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति की जाती है।
बिहारी की ‘बिहारी सतसई’ के प्रमुख प्रेरणा स्रोतों में कौन-सा ग्रंथ शामिल है?
- रामचरितमानस
- पद्मावत
- गाथासप्तशती
- पृथ्वीराज रासो
Explanation:
- बिहारी की रचना के प्रेरणा स्रोतों में ‘गाथासप्तशती’, गोवर्धनाचार्य की ‘आर्यासप्तशती’ और ‘अमरु शतक’ प्रमुख हैं।
बिहारी को रीतिकाल की किस काव्यधारा का सिरमौर कवि माना जाता है?
- रीतिबद्ध धारा
- रीतिमुक्त धारा
- रीतिसिद्ध धारा
- भक्तिकालीन धारा
Explanation:
- बिहारी को रीतिसिद्ध धारा का सिरमौर कवि माना जाता है।
- उनकी काव्य-कला, श्रृंगार-वर्णन और संक्षिप्त अभिव्यक्ति उन्हें रीतिकाल में विशिष्ट स्थान देती है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने बिहारी की भाषा को किस प्रकार की भाषा कहा है?
- सरल और सामान्य ब्रजभाषा
- कठोर और अलंकारहीन भाषा
- रस-सिक्त और परिमार्जित ब्रजभाषा
- अवधी मिश्रित भाषा
Explanation:
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार बिहारी की भाषा रस-सिक्त और परिमार्जित ब्रजभाषा है।
- उनकी भाषा में भाव, अलंकार और शब्द-सौंदर्य का प्रभावशाली संयोजन मिलता है।
बिहारी की मृत्यु लगभग किस वर्ष मानी जाती है?
- 1650 ई.
- 1660 ई.
- 1663 ई.
- 1675 ई.
Explanation:
- बिहारी की मृत्यु संवत् 1720 अर्थात लगभग 1663 ई. में मानी जाती है।
- उनकी साहित्यिक ख्याति मुख्यतः ‘बिहारी सतसई’ के कारण अमर हुई।
रसखान का मूल नाम क्या था?
- अब्दुल रहीम
- मलिक मोहम्मद जायसी
- सैयद इब्राहिम
- अमीर खुसरो
Explanation:
- रसखान का मूल नाम सैयद इब्राहिम था।
- वे मुस्लिम पृष्ठभूमि से आए कृष्णभक्त कवि थे।
रसखान का जन्म लगभग किस वर्ष हुआ माना जाता है?
- 1530 ई.
- 1548 ई.
- 1565 ई.
- 1580 ई.
Explanation:
- रसखान का जन्म संवत् 1605 अर्थात लगभग 1548 ई. माना जाता है।
- उनके जन्मस्थान के संबंध में विद्वानों में मतभेद भी मिलता है।
रसखान के जन्मस्थान के रूप में निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान माना जाता है?
- वाराणसी
- मथुरा
- अमरोहा
- आगरा
Explanation:
- रसखान का जन्मस्थान अमरोहा माना जाता है।
- कुछ विद्वान हरदोई, उत्तर प्रदेश को भी उनका जन्मस्थान मानते हैं।
रसखान किस आराध्य देव के अनन्य भक्त थे?
- राम
- शिव
- हनुमान
- श्रीकृष्ण
Explanation:
- रसखान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे।
- उनके काव्य में कृष्ण-प्रेम, ब्रजभूमि और राधा-कृष्ण की लीलाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।
रसखान के गुरु कौन थे?
- वल्लभाचार्य
- सूरदास
- गोस्वामी विट्ठलनाथ
- हित हरिवंश
Explanation:
- रसखान ने गोस्वामी विट्ठलनाथ से दीक्षा ली थी।
- विट्ठलनाथ पुष्टिमार्ग से संबंधित प्रमुख आचार्य थे।
दीक्षा लेने के बाद रसखान ने किस स्थान को अपना निवास बनाया?
- काशी
- अयोध्या
- ब्रजभूमि/वृंदावन
- प्रयाग
Explanation:
- रसखान ने ब्रजभूमि को अपना निवास स्थान बनाया।
- उनकी काव्य-साधना में ब्रज और कृष्ण-लीला का विशेष महत्व है।
रसखान की प्रमुख काव्य-भाषा कौन-सी है?
- अवधी
- खड़ी बोली
- ब्रजभाषा
- मैथिली
Explanation:
- रसखान ने मुख्यतः मधुर, सरस और परिमार्जित ब्रजभाषा में काव्य रचा।
- उनकी भाषा में कृष्ण-भक्ति और ब्रज संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति मिलती है।
रसखान किस छंद के सिद्धहस्त कवि माने जाते हैं?
- दोहा
- चौपाई
- सवैया
- रोला
Explanation:
- रसखान सवैया छंद के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं।
- हिंदी साहित्य में “सवैया रसखान का” उक्ति प्रसिद्ध है।
रसखान की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
- प्रेमवाटिका
- दानलीला
- अष्टयाम
- सुजान रसखान
Explanation:
- ‘सुजान रसखान’ रसखान की प्रसिद्ध रचना है।
- इसमें कृष्ण-प्रेम, राधा-कृष्ण की लीलाओं, ब्रज-महिमा और रूप-सौंदर्य का वर्णन मिलता है।
‘सुजान रसखान’ में मुख्य रूप से किसका वर्णन मिलता है?
- वीरगाथाओं का
- राजनीतिक संघर्षों का
- कृष्ण-प्रेम और ब्रज-महिमा का
- प्रकृति के वैज्ञानिक स्वरूप का
Explanation:
- ‘सुजान रसखान’ में कृष्ण-प्रेम और राधा-कृष्ण की लीलाएँ प्रमुख हैं।
- ब्रजभूमि और कृष्ण के रूप-सौंदर्य का भी सुंदर चित्रण मिलता है।
‘प्रेमवाटिका’ में कुल कितने दोहे हैं?
- 32 दोहे
- 42 दोहे
- 53 दोहे
- 64 दोहे
Explanation:
- ‘प्रेमवाटिका’ रसखान की लघु रचना है।
- इसमें 53 दोहों के माध्यम से प्रेम के गूढ़ तत्त्वों का काव्यात्मक विवेचन किया गया है।
‘प्रेमवाटिका’ का रचना-काल लगभग कौन-सा है?
- 1605 ई.
- 1614 ई.
- 1628 ई.
- 1640 ई.
Explanation:
- ‘प्रेमवाटिका’ का रचना-काल 1614 ई. अर्थात संवत् 1671 माना जाता है।
- इसमें प्रेम के स्वरूप और उसके गूढ़ तत्त्वों का विवेचन है।
‘दानलीला’ किस प्रसंग पर आधारित रचना है?
- राम-सीता मिलन
- कृष्ण-कंस युद्ध
- राधा-कृष्ण की दान-लीला
- कृष्ण का मथुरा गमन
Explanation:
- ‘दानलीला’ राधा और कृष्ण के बीच होने वाली दान-लीला के प्रसंग पर आधारित है।
- यह रसखान की छोटी प्रबंधात्मक रचना मानी जाती है।
‘अष्टयाम’ में मुख्य रूप से किसका वर्णन किया गया है?
- युद्धों का
- राजाओं की वंशावली का
- श्रीकृष्ण की आठों पहरों की दिनचर्या और लीलाओं का
- भारत के तीर्थों का
Explanation:
- ‘अष्टयाम’ में श्रीकृष्ण की दिनचर्या और विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया गया है।
- कृष्ण-भक्ति इसकी मूल संवेदना है।
रसखान की भक्ति में किस भाव की प्रधानता मानी जाती है?
- वीर भाव
- करुण भाव
- माधुर्य और कान्ता भाव
- भयानक भाव
Explanation:
- रसखान की कृष्ण-भक्ति में माधुर्य भाव और कान्ता भाव की प्रधानता है।
- उनकी भक्ति सहज प्रेम और अनुराग पर आधारित है।
“मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन” पंक्ति में कवि की कौन-सी भावना व्यक्त होती है?
- राजसत्ता की इच्छा
- धन-संपत्ति की इच्छा
- ब्रजभूमि और कृष्ण-भक्ति के प्रति गहरा प्रेम
- युद्ध की इच्छा
Explanation:
- इस पंक्ति में रसखान ब्रजभूमि में रहने की तीव्र इच्छा व्यक्त करते हैं।
- उनके लिए ब्रज का जीवन और कृष्ण से जुड़ाव सांसारिक वैभव से अधिक महत्वपूर्ण है।
“या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं” पंक्ति में किस भावना की अभिव्यक्ति है?
- राजसत्ता की लालसा
- कृष्ण और ब्रज के प्रति प्रेम के सामने सांसारिक वैभव का त्याग
- धन की इच्छा
- युद्ध-भावना
Explanation:
- रसखान ब्रज की लकुटी और कामरिया को तीनों लोकों के राज्य से भी श्रेष्ठ मानते हैं।
- इससे कृष्ण-भक्ति और ब्रज-प्रेम की गहराई स्पष्ट होती है।
रसखान को ‘छंद-सम्राट’ कहने का प्रमुख कारण क्या है?
- दोहा लेखन में निपुणता
- चौपाई लेखन में निपुणता
- सवैया छंद में असाधारण दक्षता
- मुक्तछंद में दक्षता
Explanation:
- रसखान सवैया छंद के अत्यंत प्रसिद्ध और सिद्धहस्त कवि हैं।
- उनके सवैयों में कृष्ण-प्रेम और ब्रज-सौंदर्य का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने रसखान जैसे कृष्णभक्त मुस्लिम कवियों के संदर्भ में कौन-सा प्रसिद्ध कथन किया था?
- “भक्ति में ज्ञान प्रधान है।”
- “इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिन हिंदू वारिये।”
- “सवैया रसखान का।”
- “ब्रजभाषा रसखान की भाषा है।”
Explanation:
- यह कथन भारतेंदु हरिश्चंद्र से संबंधित प्रसिद्ध उक्ति है।
- इसमें रसखान जैसे मुस्लिम कृष्णभक्त कवियों की भक्ति के प्रति सम्मान और प्रशंसा व्यक्त होती है।
रसखान नाम का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- ज्ञान का भंडार
- प्रेम का सागर
- रस की खान
- भक्ति का मंदिर
Explanation:
- ‘रसखान’ का शाब्दिक अर्थ ‘रस की खान’ अर्थात रस और आनंद का भंडार है।
- उनके काव्य में प्रेम और भक्ति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति मिलती है।
कवि भूषण का जन्म किस संवत् में माना जाता है?
- संवत् 1650
- संवत् 1670
- संवत् 1685
- संवत् 1700
Explanation:
- भूषण का जन्म संवत् 1670 अर्थात लगभग 1613 ई. में माना जाता है।
- वे रीतिकाल के प्रमुख वीर रस के कवि थे।
भूषण का जन्म स्थान कहाँ माना जाता है?
- आगरा
- चित्रकूट
- तिकवांपुर, कानपुर
- पन्ना
Explanation:
- भूषण का जन्म तिकवांपुर, कानपुर जिला, उत्तर प्रदेश में माना जाता है।
भूषण का मूल नाम क्या माना जाता है?
- केशवदास
- चिंतामणि
- पतिराम या मनिराम
- रुद्रशाह
Explanation:
- भूषण के मूल नाम को लेकर विद्वानों में मतभेद है।
- पतिराम और मनिराम दोनों नाम उनके मूल नाम के रूप में बताए जाते हैं।
‘भूषण’ उपाधि किसने प्रदान की थी?
- छत्रपति शिवाजी महाराज
- छत्रसाल बुंदेला
- चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्रशाह
- औरंगजेब
Explanation:
- चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्रशाह ने उन्हें ‘भूषण’ की उपाधि प्रदान की थी।
- बाद में वे इसी नाम से प्रसिद्ध हुए।
भूषण के प्रमुख आश्रयदाता कौन थे?
- अकबर और जहाँगीर
- छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रसाल बुंदेला
- रुद्रशाह और औरंगजेब
- केशवदास और बिहारी
Explanation:
- भूषण को छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा छत्रसाल बुंदेला का आश्रय प्राप्त था।
- उन्होंने दोनों वीर शासकों के शौर्य और पराक्रम का काव्यात्मक वर्णन किया।
भूषण की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
- छत्रसाल दशक
- शिवा बावनी
- शिवराज भूषण
- भूषण हजारा
Explanation:
- ‘शिवराज भूषण’ भूषण का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है।
- यह अलंकार-निरूपक ग्रंथ है और इसमें उदाहरणों के माध्यम से अलंकारों का वर्णन किया गया है।
‘शिवराज भूषण’ में कितने अलंकारों का सोदाहरण वर्णन किया गया है?
- 52
- 75
- 105
- 108
Explanation:
- ‘शिवराज भूषण’ में 105 अलंकारों का सोदाहरण वर्णन मिलता है।
- इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, दान और पराक्रम का भी प्रभावशाली वर्णन है।
‘शिवराज भूषण’ का संबंध मुख्य रूप से किस शासक से है?
- महाराजा छत्रसाल बुंदेला
- रुद्रशाह
- छत्रपति शिवाजी महाराज
- औरंगजेब
Explanation:
- ‘शिवराज भूषण’ में शिवाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम का वर्णन प्रमुख रूप से किया गया है।
- यह भूषण की वीर रस प्रधान काव्य-प्रतिभा का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
‘शिवा बावनी’ में मुख्य रूप से किसका यशोगान किया गया है?
- छत्रसाल बुंदेला
- रुद्रशाह
- शिवाजी महाराज
- औरंगजेब
Explanation:
- ‘शिवा बावनी’ में शिवाजी महाराज के पराक्रम और चरित्र की प्रशंसा की गई है।
- इसमें 52 छप्पय/कवित्त रचे गए हैं।
‘छत्रसाल दशक’ में किस शासक की वीरता का वर्णन है?
- शिवाजी महाराज
- रुद्रशाह
- छत्रसाल बुंदेला
- रामसिंह
Explanation:
- ‘छत्रसाल दशक’ में पन्ना के राजा छत्रसाल बुंदेला की वीरता और दानशीलता का वर्णन किया गया है।
- इसमें 10 कवित्तों का उल्लेख मिलता है।
‘छत्रसाल दशक’ में कितने कवित्तों में छत्रसाल की वीरता और दानशीलता का वर्णन है?
- 5
- 10
- 20
- 52
Explanation:
- ‘छत्रसाल दशक’ में 10 कवित्तों के माध्यम से छत्रसाल बुंदेला की वीरता और दानशीलता का वर्णन किया गया है।
- ‘दशक’ नाम भी दस की संख्या से संबंधित है।
रीतिकाल में भूषण किस रस के प्रमुख कवि माने जाते हैं?
- शृंगार रस
- करुण रस
- वीर रस
- हास्य रस
Explanation:
- भूषण रीतिकाल के प्रमुख वीर रस के कवि हैं।
- उनकी कविता में शौर्य, पराक्रम, उत्साह और राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति प्रमुख है।
भूषण के काव्य में किस गुण की प्रधानता है?
- माधुर्य गुण
- प्रसाद गुण
- ओज गुण
- कोमलता गुण
Explanation:
- भूषण की कविता में ओजगुण की प्रधानता है।
- उनकी भाषा और शैली वीरता, उत्साह तथा पराक्रम की भावना को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।
भूषण की काव्य-भाषा मुख्यतः कौन-सी है?
- अवधी
- खड़ी बोली
- ब्रजभाषा
- मैथिली
Explanation:
- भूषण ने मुख्यतः ओजस्वी और प्रवाहपूर्ण ब्रजभाषा का प्रयोग किया।
- उनकी भाषा में अरबी, फारसी, बुंदेलखंडी और मराठी के शब्दों का भी मिश्रण मिलता है।
भूषण ने किन छंदों का बहुलता से प्रयोग किया?
- दोहा और चौपाई
- सोरठा और रोला
- कवित्त और सवैया
- हरिगीतिका और गीतिका
Explanation:
- भूषण के काव्य में कवित्त, विशेषकर मनहरण कवित्त, और सवैया छंद का बहुल प्रयोग मिलता है।
- इन छंदों से उनकी कविता में ओज और प्रभावशीलता बढ़ती है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भूषण को किस रूप में महत्वपूर्ण माना?
- शृंगार रस का प्रतिनिधि कवि
- प्रकृति का कवि
- हिंदू समाज के प्रतिनिधि वीर रस के कवि
- भक्ति आंदोलन का कवि
Explanation:
- रामचंद्र शुक्ल ने भूषण के वीर रस को व्यापक सामाजिक भावना से जोड़ा है।
- उन्होंने भूषण को लोक-संग्रह का कार्य करने वाले रीतिकालीन कवि के रूप में भी महत्व दिया।
‘इन्द्र जिमि जम्भ पर बाढव सुअम्भ पर, रावन सदम्भ पर रघुकुल राज हैं’ पंक्ति किस कवि की है?
- बिहारी
- केशवदास
- भूषण
- घनानंद
Explanation:
- यह प्रसिद्ध पंक्ति भूषण के वीर रस प्रधान काव्य से संबंधित है।
- इसमें वीरता और पराक्रम को प्रभावशाली उपमानों के माध्यम से व्यक्त किया गया है।
‘सबन के ऊपर ही ठाढ़ो रहिबे के जोग…’ पंक्ति में मुख्य रूप से किस वीर का शौर्य चित्रित है?
- छत्रसाल बुंदेला
- रुद्रशाह
- शिवाजी महाराज
- रामगुप्त
Explanation:
- इस पंक्ति में शिवाजी महाराज के शौर्य और स्वाभिमान का चित्रण किया गया है।
- यह भूषण की वीर रस और ओजपूर्ण शैली का प्रसिद्ध उदाहरण है।
‘छतनि छत्रसाल महा बाहुबली…’ पंक्ति किस वीर शासक से संबंधित है?
- शिवाजी महाराज
- छत्रसाल बुंदेला
- रुद्रशाह
- औरंगजेब
Explanation:
- इस पंक्ति में छत्रसाल बुंदेला की वीरता और बाहुबल का वर्णन किया गया है।
- छत्रसाल भूषण के प्रमुख आश्रयदाताओं में से एक थे।
भूषण की मृत्यु लगभग किस वर्ष मानी जाती है?
- 1690 ई.
- 1707 ई.
- 1715 ई.
- 1730 ई.
Explanation:
- भूषण की मृत्यु संवत् 1772 अर्थात लगभग 1715 ई. में मानी जाती है।
- जन्म और मृत्यु की तिथियों के संबंध में साहित्यिक स्रोतों में मतभेद मिल सकते हैं।
