JharkhandGK
देवघर में शिव मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
- पूरनमल
- चन्द्रगुप्त-II
- धर्मपाल
- लक्ष्मण सेन
Explanation:
- सही उत्तर: पूरनमल – देवघर (झारखंड) में स्थित बैद्यनाथ मंदिर का निर्माण पूरनमल नामक स्थानीय जमींदार ने 16वीं शताब्दी में करवाया था।
- यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और 51 शक्तिपीठों में भी शामिल है।
- चन्द्रगुप्त-II, धर्मपाल और लक्ष्मण सेन – ये सभी इस मंदिर निर्माण से संबंधित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- देवघर का बैद्यनाथ मंदिर ‘बाबा धाम’ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
- यहाँ हर वर्ष श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का भव्य आयोजन होता है।
- बैद्यनाथ मंदिर को ‘बैजनाथ धाम’ भी कहा जाता है।
छिन्नमस्तिका मंदिर किस नदी के किनारे स्थित है?
- दामोदर
- दामोदर-भैरवी (भेडा)
- सुवर्णरेखा
- दामोदर-बराकर
Explanation:
- सही उत्तर: दामोदर-भैरवी (भेडा) – छिन्नमस्तिका मंदिर रजरप्पा, रामगढ़ (झारखंड) में दामोदर और भैरवी (जिसे स्थानीय भाषा में ‘भेडा’ कहा जाता है) नदियों के संगम पर स्थित है।
- यह मंदिर दस महाविद्याओं में से एक ‘माँ छिन्नमस्तिका’ को समर्पित है।
- यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ और तांत्रिक साधना का केंद्र है।
- Extra Facts:
- छिन्नमस्तिका मंदिर को ‘रजरप्पा मंदिर’ भी कहा जाता है।
- दामोदर नदी को ‘झारखंड की गंगा’ भी कहा जाता है।
- यहाँ बलि प्रथा (पशु बलि) की परंपरा आज भी विद्यमान है।
देवघर में बैद्यनाथ मंदिर भारत के ………. में से एक शिव ज्योतिर्लिंग है और साथ ही वह …….. शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है?
- 12, 45
- 12, 61
- 12, 51
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- सही उत्तर: 12, 51 – बैद्यनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और साथ ही 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ भी है।
- ज्योतिर्लिंग – भगवान शिव के 12 प्रमुख तीर्थ स्थल।
- शक्तिपीठ – देवी सती के शरीर के 51 भागों के गिरने के स्थान।
- Extra Facts:
- बैद्यनाथ मंदिर एकमात्र ऐसा स्थान है जो ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों है।
- शक्तिपीठों की संख्या कुछ मान्यताओं में 51 और कुछ में 52 बताई जाती है, किंतु प्रचलित मान्यता 51 है।
- अन्य 11 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ आदि प्रमुख हैं।
‘स्क्रॉल चित्रकला’ का श्रेय झारखण्ड की निम्न जनजाति को दिया जाता है?
- संथाल
- खरवार
- सबर
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- सही उत्तर: सबर – झारखंड की सबर जनजाति को ‘स्क्रॉल चित्रकला’ (Scroll Painting / पट्ट चित्र) का श्रेय दिया जाता है।
- इस कला में कपड़े या कागज के लंबे स्क्रॉल पर धार्मिक और पौराणिक कथाओं का चित्रण किया जाता है।
- संथाल और खरवार जनजातियाँ भी झारखंड में निवास करती हैं, किंतु स्क्रॉल चित्रकला सबर जनजाति की विशेष पहचान है।
- Extra Facts:
- सबर जनजाति मुख्यतः पलामू, लातेहार और गढ़वा जिलों में निवास करती है।
- इस चित्रकला को ‘जादू-पटुआ’ या ‘पटुआ कला’ भी कहा जाता है।
- इसमें प्राकृतिक रंगों (पौधों और मिट्टी से निर्मित) का उपयोग किया जाता है।
गलत जोड़े की पहचान करें
- बैद्यनाथ मंदिर – देवघर
- तपोवन – रामगढ़
- हल्दीघाटी मंदिर – गुमला
- जगन्नाथ मंदिर – राँची
Explanation:
- सही उत्तर: तपोवन – रामगढ़ – तपोवन मंदिर वास्तव में देवघर जिले में स्थित है, रामगढ़ में नहीं।
- बैद्यनाथ मंदिर – देवघर (सही)
- हल्दीघाटी मंदिर – गुमला (सही)
- जगन्नाथ मंदिर – राँची (सही)
- Extra Facts:
- तपोवन देवघर में बैद्यनाथ धाम के पास स्थित है, जहाँ भगवान शिव ने तपस्या की थी।
- रामगढ़ जिले में छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) और कैथा शिव मंदिर स्थित हैं।
- गुमला जिले में टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम और महामाया मंदिर स्थित हैं।
वैद्यनाथ मंदिर (बैजनाथ मंदिर), किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- धनबाद
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: देवघर – वैद्यनाथ मंदिर (बैद्यनाथ धाम) झारखंड के देवघर जिले में स्थित है।
- यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और 51 शक्तिपीठों में से भी एक है।
- दुमका जिले में बासुकीनाथ धाम और मौलीक्षा मंदिर हैं।
- धनबाद जिले में शक्ति मंदिर प्रमुख है।
- गुमला जिले में टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम और महामाया मंदिर हैं।
- Extra Facts:
- देवघर को ‘बाबा धाम’ और ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है।
- बैद्यनाथ मंदिर को ‘बैजनाथ धाम’ के नाम से भी जाना जाता है।
- हिमाचल प्रदेश में भी एक बैजनाथ मंदिर है, किंतु यह ज्योतिर्लिंग नहीं है।
तपोवन मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- धनबाद
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: देवघर – तपोवन मंदिर देवघर जिले में बैद्यनाथ धाम के समीप स्थित है।
- मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव ने तपस्या की थी, इसलिए इसका नाम ‘तपोवन’ पड़ा।
- दुमका – बासुकीनाथ और मौलीक्षा।
- धनबाद – शक्ति मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- तपोवन में ‘हर-शिव’ मंदिर भी स्थित है।
- श्रावणी मेले के दौरान यहाँ कांवड़ियों की भारी भीड़ होती है।
- ‘तपोवन’ का अर्थ है – ‘तपस्या का वन’।
युगल मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- धनबाद
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: देवघर – युगल मंदिर (युगल-किशोर मंदिर) देवघर जिले में बैद्यनाथ धाम के समीप स्थित है।
- यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- धनबाद – शक्ति मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- ‘युगल’ का अर्थ ‘युग्म’ या ‘जोड़ा’ होता है – कृष्ण और राधा की युगल मूर्ति है।
- यह देवघर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है।
- मंदिर में होली और जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव मनाए जाते हैं।
पथरौल काली मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- धनबाद
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: देवघर – पथरौल काली मंदिर देवघर जिले के पथरौल गाँव में स्थित है।
- यह मंदिर माँ काली को समर्पित है।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- धनबाद – शक्ति मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- पथरौल काली मंदिर नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से प्रसिद्ध होता है।
- यह बैद्यनाथ धाम के आसपास के प्रमुख मंदिरों में से एक है।
- यहाँ काली पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
बासुकीनाथ धाम, जरमुंडी किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- धनबाद
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: दुमका – बासुकीनाथ धाम दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड में स्थित है।
- यह एक प्राचीन शिव मंदिर है और इसे ‘झारखंड का काशी’ भी कहा जाता है।
- देवघर – बैद्यनाथ, तपोवन, युगल, पथरौल काली।
- धनबाद – शक्ति मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- बासुकीनाथ धाम को ‘बाबा बासुकीनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है।
- श्रावण मास में यहाँ विशाल मेला लगता है और कांवड़ियों की भीड़ होती है।
- यह दुमका जिले का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल है।
मौलीक्षा मंदिर किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- धनबाद
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: दुमका – मौलीक्षा मंदिर (मौलीक्षा महादेव) दुमका जिले में स्थित है।
- यह एक प्राचीन शिव मंदिर है और संथाल परगना क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- देवघर – बैद्यनाथ, तपोवन, युगल, पथरौल काली।
- धनबाद – शक्ति मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- मौलीक्षा मंदिर बासुकीनाथ धाम के समीप स्थित है।
- यहाँ शिवलिंग स्थापित है और महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा होती है।
- ‘मौलीक्षा’ का अर्थ – ‘मूल’ (root) + ‘ईक्षा’ (sight) है।
झारखण्ड धाम मंदिर किस जिले में स्थित है?
- देवघर
- दुमका
- गिरिडीह
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गिरिडीह – झारखण्ड धाम मंदिर गिरिडीह जिले के उतरी क्षेत्र में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को समर्पित है और इसे ‘झारखंड का अयोध्या’ भी कहा जाता है।
- देवघर – बैद्यनाथ, तपोवन, युगल, पथरौल काली।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- झारखण्ड धाम को ‘राम रेखा धाम’ भी कहा जाता है।
- यहाँ रामनवमी पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।
- यह मंदिर गिरिडीह शहर से कुछ दूरी पर स्थित है।
मां योगिनी मंदिर किस जिले में स्थित है?
- गोड्डा
- दुमका
- गिरिडीह
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गोड्डा – माँ योगिनी मंदिर गोड्डा जिले के बरगरिया क्षेत्र में स्थित है।
- यह मंदिर देवी दुर्गा (माँ योगिनी) को समर्पित है और इसे ‘सिद्धिपीठ’ भी कहा जाता है।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- गिरिडीह – झारखण्ड धाम।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- यह मंदिर तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध है।
- गोड्डा जिला संथाल परगना प्रमंडल में आता है।
- नवरात्रि में यहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती है।
बेलनीगढ़ किस जिले में स्थित है?
- गोड्डा
- दुमका
- गिरिडीह
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गोड्डा – बेलनीगढ़ (ऐतिहासिक किला और मंदिर परिसर) गोड्डा जिले में स्थित है।
- यह गोड्डा शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है और यहाँ एक देवी मंदिर है।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- गिरिडीह – झारखण्ड धाम।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- बेलनीगढ़ एक पुरातात्विक महत्व का स्थल है।
- यहाँ पहाड़ी पर एक प्राचीन किला है।
- यह गोड्डा जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल है।
छिन्नमस्तिका मंदिर किस कहाँ स्थित है?
- रजरप्पा गोड्डा
- रजरप्पा दुमका
- रजरप्पा, रामगढ़
- रजरप्पा गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: रजरप्पा, रामगढ़ – छिन्नमस्तिका मंदिर रजरप्पा में स्थित है, जो रामगढ़ जिले में आता है।
- यह मंदिर दामोदर और भैरवी (भेडा) नदियों के संगम पर स्थित है।
- गोड्डा – माँ योगिनी, बेलनीगढ़।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- रजरप्पा को ‘छिन्नमस्तिका धाम’ भी कहा जाता है।
- यहाँ बलि प्रथा की परंपरा आज भी विद्यमान है।
- यह दस महाविद्याओं के पूजा स्थलों में से एक है।
कैथा शिव मंदिर किस जिले में स्थित है?
- गोड्डा
- दुमका
- रामगढ़
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: रामगढ़ – कैथा शिव मंदिर रामगढ़ जिले के कैथा गाँव में स्थित है।
- यह एक प्राचीन शिव मंदिर है और तांत्रिक पूजा के लिए जाना जाता है।
- गोड्डा – माँ योगिनी, बेलनीगढ़।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- रामगढ़ जिला छिन्नमस्तिका (रजरप्पा) और कैथा शिव मंदिर – दोनों के लिए प्रसिद्ध है।
- कैथा मंदिर झारखंड के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है।
शिव मंदिर, बादमगाँव किस जिले में स्थित है?
- हजारीबाग
- दुमका
- रामगढ़
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: हजारीबाग – बादमगाँव शिव मंदिर हजारीबाग जिले के बादमगाँव गाँव में स्थित है।
- यह हजारीबाग शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है और पुरातात्विक महत्व रखता है।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- रामगढ़ – छिन्नमस्तिका, कैथा शिव मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- बादमगाँव मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है।
- हजारीबाग जिला अपने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है।
माता चंचला देवी मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- हजारीबाग
- दुमका
- कोडरमा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: कोडरमा – माता चंचला देवी मंदिर कोडरमा जिले में स्थित है।
- यह देवी दुर्गा को समर्पित है और नवरात्रि में यहाँ विशेष पूजा होती है।
- हजारीबाग – बादमगाँव शिव मंदिर।
- दुमका – बासुकीनाथ, मौलीक्षा।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- कोडरमा जिला अभ्रक (माइका) उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
- चंचला देवी मंदिर कोडरमा का प्रमुख शक्तिपीठ है।
वंशीधर मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- हजारीबाग
- गढ़वा
- कोडरमा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गढ़वा – वंशीधर मंदिर गढ़वा जिले में स्थित है।
- ‘वंशीधर’ भगवान कृष्ण का एक नाम है, जो बाँसुरी धारण करते हैं।
- हजारीबाग – बादमगाँव शिव मंदिर।
- कोडरमा – चंचला देवी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- गढ़वा जिला पलामू प्रमंडल में आता है।
- वंशीधर मंदिर गढ़वा शहर का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
राम-लक्ष्मण मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- गढ़वा
- कोडरमा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: पलामू – राम-लक्ष्मण मंदिर पलामू जिले के मेदिनीनगर (पूर्व में डाल्टनगंज) में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान राम और लक्ष्मण को समर्पित है।
- गढ़वा – वंशीधर मंदिर।
- कोडरमा – चंचला देवी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- पलामू जिला अपने किले और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है।
- राम-लक्ष्मण मंदिर पलामू का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
दशशीश महादेव मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- गढ़वा
- कोडरमा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: पलामू – दशशीश महादेव मंदिर पलामू जिले में मेदिनीनगर के समीप स्थित है।
- ‘दशशीश’ – दस सिरों वाले भगवान शिव – यह मंदिर उन्हीं को समर्पित है।
- गढ़वा – वंशीधर मंदिर।
- कोडरमा – चंचला देवी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- दशशीश महादेव – भगवान शिव का एक विशेष रूप है।
- यह पलामू जिले का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
- पलामू में राम-लक्ष्मण और दशशीश महादेव – दोनों मंदिर प्रसिद्ध हैं।
उग्रतारा मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- लातेहार
- कोडरमा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: लातेहार – उग्रतारा मंदिर लातेहार जिले में स्थित है।
- ‘उग्रतारा’ – देवी तारा का उग्र रूप – यह मंदिर उन्हीं को समर्पित है।
- पलामू – राम-लक्ष्मण, दशशीश महादेव।
- कोडरमा – चंचला देवी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- उग्रतारा मंदिर तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध है।
- लातेहार जिला पलामू प्रमंडल में आता है।
- यह लातेहार का प्रमुख शक्तिपीठ है।
नगर मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- लातेहार
- कोडरमा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: लातेहार – नगर मंदिर लातेहार जिले के नगर क्षेत्र में स्थित है।
- यह एक प्राचीन शिव मंदिर है और लातेहार का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- पलामू – राम-लक्ष्मण, दशशीश महादेव।
- कोडरमा – चंचला देवी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- नगर मंदिर लातेहार का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है।
- लातेहार में उग्रतारा और नगर – दोनों मंदिर प्रसिद्ध हैं।
भद्रकाली मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: चतरा – भद्रकाली मंदिर चतरा जिले में स्थित है।
- भद्रकाली – देवी काली का शांत रूप – यह मंदिर उन्हीं को समर्पित है।
- पलामू – राम-लक्ष्मण, दशशीश महादेव।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- चतरा जिला कोयल नदी के किनारे स्थित है।
- भद्रकाली मंदिर चतरा का प्रमुख शक्तिपीठ है।
कौलेश्वरी मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: चतरा – कौलेश्वरी मंदिर चतरा जिले में स्थित है।
- कौलेश्वरी – देवी दुर्गा का एक रूप – यह मंदिर उन्हीं को समर्पित है।
- पलामू – राम-लक्ष्मण, दशशीश महादेव।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- श्रावण मास में कौलेश्वरी मंदिर में मेला लगता है।
- चतरा में भद्रकाली, कौलेश्वरी और कांटेश्वरनाथ – तीनों मंदिर प्रसिद्ध हैं।
कांटेश्वरनाथ, किस जिले में स्थित है?
- पलामू
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: चतरा – कांटेश्वरनाथ मंदिर चतरा जिले के कांटा क्षेत्र में स्थित है।
- ‘कांटेश्वरनाथ’ – भगवान शिव का एक नाम है – ‘कांट’ (thorn) + ‘ईश्वर’ (lord)।
- पलामू – राम-लक्ष्मण, दशशीश महादेव।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया।
- Extra Facts:
- चतरा जिले में तीन प्रमुख मंदिर – भद्रकाली, कौलेश्वरी और कांटेश्वरनाथ।
- कांटेश्वरनाथ झारखंड के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है।
टाँगीनाथ धाम मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – टाँगीनाथ धाम मंदिर गुमला जिले के टाँगी क्षेत्र में स्थित है।
- यह भगवान शिव को समर्पित है और शिवरात्रि पर यहाँ विशाल मेला लगता है।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- Extra Facts:
- गुमला को ‘मंदिरों की नगरी’ भी कहा जाता है।
- गुमला में टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम और महामाया – पाँच प्रमुख मंदिर हैं।
चिंतामणि मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – चिंतामणि मंदिर गुमला जिले में स्थित है।
- ‘चिंतामणि’ – भगवान शिव का नाम, जिसका अर्थ है ‘चिंता हरण करने वाले’।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- Extra Facts:
- गुमला जिले में चिंतामणि एक प्रमुख शिव मंदिर है।
- यह गुमला शहर के समीप स्थित है।
कपिलनाथ मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – कपिलनाथ मंदिर गुमला जिले में स्थित है।
- ‘कपिलनाथ’ – महर्षि कपिल के नाम पर भगवान शिव का नाम।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- Extra Facts:
- कपिलनाथ मंदिर गुमला का प्रमुख शिव मंदिर है।
- गुमला में पाँच प्रमुख मंदिरों में कपिलनाथ भी शामिल है।
अंजन धाम मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – अंजन धाम मंदिर गुमला जिले के अंजन गाँव में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है – ‘अंजन’ हनुमान जी के पिता का नाम है।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- Extra Facts:
- हनुमान जयंती पर अंजन धाम में विशेष आयोजन होता है।
- गुमला का यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
महामाया मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – महामाया मंदिर गुमला जिले में स्थित है।
- महामाया – देवी दुर्गा का एक रूप – यह मंदिर उन्हीं को समर्पित है।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- Extra Facts:
- नवरात्रि के दौरान महामाया मंदिर में विशेष मेला लगता है।
- गुमला के पाँच प्रमुख मंदिरों में महामाया भी शामिल है।
- गुमला को ‘मंदिरों की नगरी’ कहा जाता है।
वासुदेवराय मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – वासुदेवराय मंदिर गुमला जिले में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान कृष्ण (वासुदेव) को समर्पित है।
- गुमला जिले में टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया और वासुदेवराय – सभी प्रमुख मंदिर स्थित हैं।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, 16 भुजी माँ दुर्गा मंदिर, मदन मोहन मंदिर, राधावल्लभ मंदिर, शिव मंदिर (हारिण, बेड़ो)।
- लातेहार – उग्रतारा मंदिर, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- Extra Facts:
- गुमला को ‘मंदिरों की नगरी’ भी कहा जाता है।
- वासुदेवराय मंदिर गुमला के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में से एक है।
- यहाँ जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – जगन्नाथ मंदिर राँची जिले में स्थित है।
- यह मंदिर झारखंड की राजधानी राँची का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- इस मंदिर का निर्माण 1691 में नागवंशी राजा द्वारा करवाया गया था।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- राँची का जगन्नाथ मंदिर पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना है।
- यहाँ प्रतिवर्ष रथ यात्रा का भव्य आयोजन होता है।
- राँची को ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है।
सूर्य मंदिर बुण्डू, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – सूर्य मंदिर बुण्डू राँची जिले के बुण्डू प्रखंड में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- बुण्डू सूर्य मंदिर झारखंड का एक प्रमुख सूर्य मंदिर है।
- यहाँ मकर संक्रांति पर विशेष पूजा-अर्चना होती है।
- कोणार्क और बुण्डू – दोनों सूर्य मंदिरों के बीच वास्तुशिल्प समानताएँ हैं।
16 भुजी माँ दुर्गा की मूर्ति, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – 16 भुजी माँ दुर्गा की मूर्ति राँची जिले में स्थित है।
- यह एक अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ मूर्ति है, जिसमें माँ दुर्गा को 16 भुजाओं (हाथों) के साथ दिखाया गया है।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- अधिकांश दुर्गा मूर्तियाँ 8 या 10 भुजाओं वाली होती हैं, 16 भुजाएँ अत्यंत विशिष्ट हैं।
- यह मूर्ति राँची के एक प्राचीन मंदिर में स्थित है।
- नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं।
मदन मोहन मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – मदन मोहन मंदिर राँची जिले में स्थित है।
- मदन मोहन भगवान कृष्ण का एक रूप है – ‘मदन’ का अर्थ कामदेव और ‘मोहन’ का अर्थ मोहित करने वाला।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- राँची का मदन मोहन मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- यहाँ होली और जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव मनाए जाते हैं।
राधावल्लभ मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – राधावल्लभ मंदिर राँची जिले में स्थित है।
- राधावल्लभ – भगवान कृष्ण का एक स्वरूप है, जहाँ राधा और कृष्ण की एक साथ पूजा होती है।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- राधावल्लभ मंदिर राँची का प्रमुख कृष्ण मंदिर है।
- यहाँ राधाष्टमी पर विशेष पूजा-अर्चना होती है।
शिव मंदिर, हारिण, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – शिव मंदिर, हारिण राँची जिले के हारिण गाँव में स्थित है।
- यह एक प्राचीन शिव मंदिर है और महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष पूजा होती है।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- हारिण गाँव राँची जिले के बेड़ो प्रखंड में आता है।
- यह मंडर की पहाड़ियों के निकट स्थित है।
शिव मंदिर, बेड़ो, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- चतरा
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: राँची – शिव मंदिर, बेड़ो राँची जिले के बेड़ो प्रखंड में स्थित है।
- बेड़ो प्रखंड राँची जिले का एक प्रमुख क्षेत्र है और यहाँ कई प्राचीन मंदिर हैं।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- चतरा – भद्रकाली, कौलेश्वरी, कांटेश्वरनाथ।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- बेड़ो प्रखंड में झील और पहाड़ियाँ हैं, जो इसे पर्यटन के लिए आकर्षक बनाती हैं।
- यहाँ का शिव मंदिर बेड़ो झील के निकट स्थित है।
आम्रेश्वर धाम, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- खूटी
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: खूटी – आम्रेश्वर धाम खूटी जिले में स्थित है।
- खूटी झारखंड का एक जिला है, जो राँची से अलग होकर बना था।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, 16 भुजी दुर्गा, मदन मोहन, राधावल्लभ, शिव मंदिर (हारिण, बेड़ो)।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- खूटी जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है।
- आम्रेश्वर धाम एक प्रमुख शिव मंदिर है, जहाँ महाशिवरात्रि पर मेला लगता है।
रंकिनी मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- राँची
- लातेहार
- पूर्वी सिंहभूम
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: पूर्वी सिंहभूम – रंकिनी मंदिर पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित है।
- पूर्वी सिंहभूम का मुख्यालय जमशेदपुर है।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, 16 भुजी दुर्गा, मदन मोहन, राधावल्लभ, शिव मंदिर (हारिण, बेड़ो)।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- रंकिनी मंदिर पूर्वी सिंहभूम का एक प्राचीन और प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और नक्काशी के लिए जाना जाता है।
महादेवशाला मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पश्चिमी सिंहभूम
- लातेहार
- पूर्वी सिंहभूम
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: पश्चिमी सिंहभूम – महादेवशाला मंदिर पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित है।
- पश्चिमी सिंहभूम का मुख्यालय चाईबासा है।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- पूर्वी सिंहभूम – रंकिनी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- महादेवशाला मंदिर पश्चिमी सिंहभूम का एक प्रमुख शिव मंदिर है।
- यहाँ शिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है।
बेनीसागर का शिव मंदिर, किस जिले में स्थित है?
- पश्चिमी सिंहभूम
- लातेहार
- पूर्वी सिंहभूम
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: पश्चिमी सिंहभूम – बेनीसागर का शिव मंदिर पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित है।
- बेनीसागर – पश्चिमी सिंहभूम का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- लातेहार – उग्रतारा, नगर मंदिर।
- पूर्वी सिंहभूम – रंकिनी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- बेनीसागर मंदिर झारखंड के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है।
- यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।
राजा मान सिंह द्वारा निर्मित जामी मस्जिद, किस जिले में स्थित है?
- पश्चिमी सिंहभूम
- साहेबगंज
- पूर्वी सिंहभूम
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: साहेबगंज – राजा मान सिंह द्वारा निर्मित जामी मस्जिद साहेबगंज जिले में स्थित है।
- राजा मान सिंह – अकबर के समय में बंगाल और बिहार के सूबेदार थे।
- यह मस्जिद अपनी ऐतिहासिकता और वास्तुकला के लिए जानी जाती है।
- पश्चिमी सिंहभूम – महादेवशाला, बेनीसागर।
- पूर्वी सिंहभूम – रंकिनी मंदिर।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- साहेबगंज संथाल परगना प्रमंडल में आता है।
- जामी मस्जिद साहेबगंज की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है।
स्टीवेंशन मेमोरियल चर्च, किस जिले में स्थित है?
- गिरिडीह
- साहेबगंज
- राँची
- गुमला
Explanation:
- सही उत्तर: गिरिडीह – स्टीवेंशन मेमोरियल चर्च गिरिडीह जिले में स्थित है।
- यह चर्च ब्रिटिश काल (19वीं शताब्दी) में निर्मित एक ऐतिहासिक चर्च है।
- साहेबगंज – जामी मस्जिद।
- राँची – जगन्नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, 16 भुजी दुर्गा, मदन मोहन, राधावल्लभ, शिव मंदिर (हारिण, बेड़ो)।
- गुमला – टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम, महामाया, वासुदेवराय।
- Extra Facts:
- गिरिडीह में स्टीवेंशन मेमोरियल चर्च के अलावा झारखण्ड धाम मंदिर भी स्थित है।
- यह चर्च अपनी गोथिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
चर्च जी. ई. एल. चर्च / क्राइस्ट चर्च का निर्माण, किस वर्ष किया गया है?
- 1855
- 1869
- 1871
- 1873
Explanation:
- सही उत्तर: 1855 – जी.ई.एल. चर्च (G.E.L. Church) / क्राइस्ट चर्च (Christ Church) का निर्माण 1855 में किया गया था।
- यह चर्च झारखंड के प्राचीन चर्चों में से एक है, जिसे ब्रिटिश शासन काल में बनाया गया था।
- यह चर्च अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।
- 1869 – स्वेज नहर का उद्घाटन वर्ष – यह चर्च निर्माण से संबंधित नहीं।
- 1871 और 1873 – ये वर्ष भी गलत हैं, क्योंकि चर्च का निर्माण 1855 में हुआ था।
- Extra Facts:
- जी.ई.एल. का पूर्ण रूप ‘Gossner Evangelical Lutheran Church’ है।
- इस चर्च की स्थापना जर्मन मिशनरी (Gossner Mission) द्वारा की गई थी।
- यह झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में ईसाई मिशनरी गतिविधियों का केंद्र था।
किस मंदिर को ‘पत्थर पर लिखी कविता’ की संज्ञा दी जाती है?
- जगन्नाथ मंदिर, राँची
- सूर्य मंदिर, राँची
- बासुदेवराय मंदिर, गुमला
- बैद्यनाथ मंदिर, देवघर
Explanation:
- सही उत्तर: सूर्य मंदिर, राँची – राँची जिले के बुण्डू में स्थित सूर्य मंदिर को ‘पत्थर पर लिखी कविता’ (Poetry in Stone) की संज्ञा दी जाती है।
- इस मंदिर की वास्तुकला अत्यंत सुंदर और कलात्मक है, जो पत्थर पर उकेरी गई कविता की भाँति प्रतीत होती है।
- जगन्नाथ मंदिर – राँची में है, लेकिन यह उपाधि सूर्य मंदिर को दी गई है।
- बासुदेवराय मंदिर – गुमला में स्थित है।
- बैद्यनाथ मंदिर – देवघर में स्थित ज्योतिर्लिंग है।
- Extra Facts:
- सूर्य मंदिर के शिल्पकार एस. आर. एन. कालिया हैं।
- यह मंदिर अपनी अनोखी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है।
चतरा के कौलेश्वरी मंदिर का संबंध किस धर्म से है?
- हिन्दू
- बौद्ध
- जैन
- उपरोक्त तीनों
Explanation:
- सही उत्तर: उपरोक्त तीनों – चतरा जिले का कौलेश्वरी मंदिर हिन्दू, बौद्ध और जैन – तीनों धर्मों का एक पवित्र तीर्थ स्थल है।
- यह मंदिर अपनी त्रि-धार्मिक (syncretic) परंपरा के लिए विशिष्ट है, जहाँ तीनों धर्मों के अनुयायी पूजा करते हैं।
- Extra Facts:
- कौलेश्वरी मंदिर चतरा जिले के तीन प्रमुख मंदिरों में से एक है (अन्य: भद्रकाली, कांटेश्वरनाथ)।
- यहाँ हर वर्ष श्रावण मास में विशाल मेला लगता है।
झारखण्ड के किस मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यहाँ प्राचीन समय में सीता जी की दाहिनी जांघ गिरी थी, जिसका प्रस्तर अंश यहाँ स्थापित है?
- युगल मंदिर
- माँ छिन्नमस्तिका मंदिर
- अंजन ग्राम मंदिर
- माँ योगिनी मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: माँ योगिनी मंदिर – गोड्डा जिले में स्थित माँ योगिनी मंदिर के बारे में मान्यता है कि प्राचीन काल में देवी सती के शरीर का अंश (दाहिनी जांघ) यहाँ गिरा था, जिसका प्रस्तर अंश मंदिर में स्थापित है।
- यह एक प्रमुख शक्तिपीठ है और इसे ‘सिद्धिपीठ’ भी कहा जाता है।
- युगल मंदिर – देवघर में स्थित कृष्ण-राधा मंदिर।
- छिन्नमस्तिका मंदिर – रामगढ़ में स्थित है।
- अंजन ग्राम मंदिर – हनुमान जी के जन्म स्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- Extra Facts:
- माँ योगिनी मंदिर गोड्डा जिले के बरगरिया क्षेत्र में स्थित है।
- यहाँ तांत्रिक साधना की भी परंपरा है।
- नवरात्रि में यहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती है।
निम्न में से किस मंदिर को हनुमान जी का जन्म स्थान भी माना जाता है?
- युगल मंदिर
- माँ छिन्नमस्तिका मंदिर
- अंजन ग्राम मंदिर
- माँ योगिनी मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: अंजन ग्राम मंदिर – गुमला जिले के अंजन गाँव में स्थित अंजन ग्राम मंदिर को हनुमान जी का जन्म स्थान माना जाता है।
- हनुमान जी के पिता ‘केशरी’ और माता ‘अंजनी’ के नाम पर इस स्थान का नाम ‘अंजन’ पड़ा।
- युगल मंदिर – देवघर में कृष्ण-राधा मंदिर।
- छिन्नमस्तिका मंदिर – रामगढ़ में शक्तिपीठ।
- माँ योगिनी मंदिर – गोड्डा में शक्तिपीठ।
- Extra Facts:
- अंजन ग्राम मंदिर को ‘अंजन धाम’ भी कहा जाता है।
- हनुमान जयंती पर यहाँ विशेष उत्सव मनाया जाता है।
- यह गुमला जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
झारखण्ड के किस मंदिर को ‘नौलखा मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है?
- युगल मंदिर
- माँ छिन्नमस्तिका मंदिर
- अंजन ग्राम मंदिर
- माँ योगिनी मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: युगल मंदिर – देवघर में स्थित युगल मंदिर को ‘नौलखा मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है – क्योंकि इसके निर्माण पर 9 लाख रुपये (नौ लाख) खर्च हुए थे।
- यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है।
- छिन्नमस्तिका मंदिर – रामगढ़।
- अंजन ग्राम मंदिर – गुमला।
- माँ योगिनी मंदिर – गोड्डा।
- Extra Facts:
- ‘नौलखा’ का अर्थ है – नौ लाख (9 लाख) की लागत से बना मंदिर।
- यह देवघर का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है।
राँची के बुण्डू में स्थित सूर्य मंदिर को ‘पत्थर पर लिखी कविता’ की संज्ञा दी जाती है। इस मंदिर के शिल्पकार कौन हैं?
- वंशी प्रसाद सिंह
- एन. के. लाल
- एस. आर. एन. कालिया
- चारूशीला देवी
Explanation:
- सही उत्तर: एस. आर. एन. कालिया – राँची जिले के बुण्डू में स्थित सूर्य मंदिर की स्थापत्य कला का श्रेय प्रसिद्ध शिल्पकार एस. आर. एन. कालिया को दिया जाता है।
- इन्होंने मंदिर को अत्यंत सुंदर नक्काशी और कलात्मकता से सजाया, जिसे ‘पत्थर पर लिखी कविता’ कहा जाता है।
- Extra Facts:
- यह मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- बुण्डू सूर्य मंदिर राँची का प्रमुख पर्यटन स्थल है।
बेनीसागर का शिव मंदिर के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- राजा सुजन सिंह
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: गौड़ शासक शशांक – बेनीसागर (Benisagar) का शिव मंदिर प्राचीन गौड़ राजवंश (Gauda dynasty) के शासक शशांक (Shashanka) द्वारा बनवाया गया था।
- शशांक बंगाल के प्रसिद्ध राजा थे, जिन्होंने लगभग 600-625 ई. के आसपास शासन किया।
- यह मंदिर झारखंड के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है।
- Extra Facts:
- बेनीसागर में शिव मंदिर के अलावा एक प्राचीन तालाब भी है।
- शशांक को बंगाल का पहला स्वतंत्र शासक माना जाता है।
राम-सीता मंदिर के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- राजा सुजन सिंह
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: रघुनाथ शाह – राम-सीता मंदिर के निर्माता रघुनाथ शाह (Raghunath Shah) थे – जो छोटानागपुर के नागवंशी राजा थे।
- उन्होंने 17वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
- यह मंदिर भगवान राम और सीता को समर्पित है।
- Extra Facts:
- रघुनाथ शाह छोटानागपुर के प्रसिद्ध शासक थे।
- उन्होंने कई धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का निर्माण करवाया।
लिल्लोरी मंदिर, धनबाद में माँ काली की प्रतिमा की स्थापना किसने किया ?
- गौड़ शासक शशांक
- राजा सुजन सिंह
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: राजा सुजन सिंह – धनबाद के लिल्लोरी मंदिर में माँ काली की प्रतिमा की स्थापना राजा सुजन सिंह ने करवाई थी।
- लिल्लोरी मंदिर (Lillori Temple) धनबाद जिले का एक प्रमुख शक्ति पीठ है।
- सुजन सिंह धनबाद क्षेत्र के एक प्रसिद्ध जमींदार थे।
- Extra Facts:
- लिल्लोरी मंदिर को ‘लिलोरी काली मंदिर’ भी कहा जाता है।
- यहाँ काली पूजा के अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं।
आम्रेश्वर धाम, जिसे ‘अंगराबारी’ के नाम से भी जाना जाता है, का ‘अंगराबारी’ के रूप में नामकरण किसके द्वारा किया गया है।
- गौड़ शासक शशांक
- राजा सुजन सिंह
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती – आम्रेश्वर धाम (Amreshwar Dham), जिसे ‘अंगराबारी’ (Angarabari) के नाम से भी जाना जाता है, का यह नामकरण स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने किया था।
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती एक प्रसिद्ध संत एवं समाज सुधारक थे।
- ‘अंगराबारी’ नाम उन्होंने इस स्थान की महत्ता को देखते हुए दिया था।
- Extra Facts:
- आम्रेश्वर धाम एक प्राचीन शिव मंदिर है।
- यह झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
मदन मोहन मंदिर, बोड़ेया के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- लक्ष्मीनारायण तिवारी
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: लक्ष्मीनारायण तिवारी – बोड़ेया (Bodeya) स्थित मदन मोहन मंदिर (Madan Mohan Temple) का निर्माण लक्ष्मीनारायण तिवारी ने करवाया था।
- यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है।
- बोड़ेया – राँची जिले का एक क्षेत्र है।
- Extra Facts:
- मदन मोहन मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- यहाँ हर वर्ष जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर, जगन्नाथपुर (राँची) के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- लक्ष्मीनारायण तिवारी
- ठाकुर ऐनी शाह
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: ठाकुर ऐनी शाह – राँची के जगन्नाथपुर में स्थित जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) का निर्माण ठाकुर ऐनी शाह ने करवाया था।
- यह मंदिर ओडिशा के पुरी के जगन्नाथ मंदिर की शैली पर बना है।
- जगन्नाथपुर राँची शहर के पास स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- Extra Facts:
- राँची के जगन्नाथ मंदिर को ‘राँची का पुरी’ भी कहा जाता है।
- यहाँ रथ यात्रा (Rath Yatra) का भव्य आयोजन होता है।
कपिलनाथ मंदिर, दोइसानगर (गुमला) के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- राजा रामशाह
- ठाकुर ऐनी शाह
- रघुनाथ शाह
Explanation:
- सही उत्तर: राजा रामशाह – गुमला जिले के दोइसानगर (Doisanagar) में स्थित कपिलनाथ मंदिर (Kapilnath Temple) का निर्माण राजा रामशाह ने करवाया था।
- राजा रामशाह – नागवंशी राजा थे, जिन्होंने छोटानागपुर क्षेत्र में शासन किया।
- कपिलनाथ मंदिर गुमला जिले के पाँच प्रमुख मंदिरों में से एक है।
- Extra Facts:
- कपिलनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
- गुमला को ‘मंदिरों की नगरी’ भी कहा जाता है।
महामाया मंदिर, हापामुनी गाँव (गुमला) के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- राजा रामशाह
- ठाकुर ऐनी शाह
- गजघंट राय
Explanation:
- सही उत्तर: गजघंट राय – गुमला जिले के हापामुनी गाँव में स्थित महामाया मंदिर (Mahamaya Temple) का निर्माण गजघंट राय ने करवाया था।
- गजघंट राय क्षेत्र के एक प्रसिद्ध जमींदार थे।
- यह मंदिर देवी महामाया (दुर्गा) को समर्पित है।
- Extra Facts:
- महामाया मंदिर गुमला के पाँच प्रमुख मंदिरों में से एक है।
- नवरात्रि पर यहाँ विशेष मेला लगता है।
कैथा शिव मंदिर, रामगढ़ के निर्माणकर्ता है ?
- गौड़ शासक शशांक
- दलेर सिंह
- ठाकुर ऐनी शाह
- गजघंट राय
Explanation:
- सही उत्तर: दलेर सिंह – रामगढ़ जिले के कैथा गाँव में स्थित कैथा शिव मंदिर (Kaitha Shiv Temple) का निर्माण दलेर सिंह ने करवाया था।
- दलेर सिंह रामगढ़ क्षेत्र के प्रसिद्ध जमींदार थे।
- कैथा शिव मंदिर एक प्राचीन शिव मंदिर है।
- Extra Facts:
- कैथा शिव मंदिर तांत्रिक पूजा के लिए भी प्रसिद्ध है।
- रामगढ़ जिले में छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) और कैथा शिव मंदिर – दोनों प्रमुख हैं।
मौलीक्षा मंदिर, दुमका के निर्माणकर्ता है ?
- बसंत राय
- दलेर सिंह
- ठाकुर ऐनी शाह
- गजघंट राय
Explanation:
- सही उत्तर: बसंत राय – दुमका जिले में स्थित मौलीक्षा मंदिर (Mauliksha Temple) के निर्माता बसंत राय थे।
- यह एक प्राचीन शिव मंदिर है और दुमका का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- बसंत राय दुमका क्षेत्र के एक प्रसिद्ध व्यक्ति थे।
- Extra Facts:
- मौलीक्षा मंदिर बासुकीनाथ धाम के समीप स्थित है।
- यहाँ महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा होती है।
बासुकीनाथ धाम, जरमुंडी (दुमका) के निर्माणकर्ता है ?
- बसंत राय
- दलेर सिंह
- ठाकुर ऐनी शाह
- वसाकी तांती
Explanation:
- सही उत्तर: वसाकी तांती – दुमका जिले के जरमुंडी में स्थित बासुकीनाथ धाम (Basukinath Dham) का निर्माण वसाकी तांती ने करवाया था।
- बासुकीनाथ धाम को ‘झारखंड का काशी’ भी कहा जाता है।
- वसाकी तांती दुमका क्षेत्र के एक प्रसिद्ध जमींदार थे।
- Extra Facts:
- बासुकीनाथ धाम को ‘बाबा बासुकीनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है।
- श्रावण मास में यहाँ विशाल मेला लगता है।
पथरौल काली मंदिर, देवघर के निर्माणकर्ता है ?
- बसंत राय
- दिग्विजय सिंह
- ठाकुर ऐनी शाह
- वसाकी तांती
Explanation:
- सही उत्तर: दिग्विजय सिंह – देवघर जिले के पथरौल में स्थित पथरौल काली मंदिर (Pathraul Kali Temple) का निर्माण दिग्विजय सिंह ने करवाया था।
- यह मंदिर माँ काली को समर्पित है और देवघर का प्रमुख मंदिर है।
- दिग्विजय सिंह देवघर क्षेत्र के प्रसिद्ध जमींदार थे।
- Extra Facts:
- पथरौल काली मंदिर बैद्यनाथ धाम के समीप स्थित है।
- नवरात्रि में यहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती है।
वंशीधर मंदिर नगर ऊंटारी (गढ़वा) का निर्माण कब किया गया था।
- 1885 ई. में
- 1895 ई. में
- 1865 ई. में
- 1875 ई. में
Explanation:
- सही उत्तर: 1885 ई. में – गढ़वा जिले के नगर ऊंटारी (Nagar Untari) में स्थित वंशीधर मंदिर (Vanshidhar Temple) का निर्माण सन् 1885 ई. में किया गया था।
- ‘वंशीधर’ – भगवान कृष्ण का एक नाम है – जो बाँसुरी धारण करते हैं।
- यह मंदिर गढ़वा का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- Extra Facts:
- गढ़वा जिला पलामू प्रमंडल में आता है।
- वंशीधर मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
बैद्यनाथ मंदिर ……….. शिव ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
- 18
- 12
- 16
- 15
Explanation:
- सही उत्तर: 12 – बैद्यनाथ मंदिर (देवघर) 12 शिव ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlingas) में से एक है।
- 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 प्रमुख पवित्र स्थल हैं, जो पूरे भारत में फैले हुए हैं।
- अन्य 11 ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, नागेश्वर, भीमशंकर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन, ओंकारेश्वर।
- Extra Facts:
- बैद्यनाथ मंदिर को ‘बैजनाथ धाम’ और ‘बाबा धाम’ भी कहा जाता है।
- यह देवघर (झारखंड) में स्थित है।
बैद्यनाथ मंदिर भारत में……….शक्तिपीठों में से एक है?
- 52
- 21
- 61
- 51
Explanation:
- सही उत्तर: 51 – बैद्यनाथ मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों (Shakti Peethas) में से एक है।
- शक्तिपीठ – वे पवित्र स्थल हैं – जहाँ देवी सती के शरीर के अंश गिरे थे।
- बैद्यनाथ मंदिर एकमात्र ऐसा स्थान है जो ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों है।
- Extra Facts:
- शक्तिपीठों की संख्या विभिन्न मान्यताओं में भिन्न है – 51, 52, 64 आदि।
- प्रचलित मान्यता 51 शक्तिपीठों की है।
भारत में एकमात्र जगह है जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक साथ है :
- महाकाल मंदिर
- बैद्यनाथ मंदिर
- महाकालेश्वर मंदिर
- शिव शक्ति मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: बैद्यनाथ मंदिर – भारत में एकमात्र स्थान जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों एक साथ (simultaneously) स्थित हैं – बैद्यनाथ मंदिर, देवघर (झारखंड) है।
- यह एक अद्वितीय (unique) स्थान है – जहाँ भगवान शिव (ज्योतिर्लिंग) और माँ शक्ति (शक्तिपीठ) – दोनों की पूजा एक साथ होती है।
- महाकाल मंदिर – उज्जैन – ज्योतिर्लिंग है – पर शक्तिपीठ नहीं।
- महाकालेश्वर – यह भी उज्जैन का ही दूसरा नाम है।
- शिव शक्ति मंदिर – कोई विशिष्ट प्रसिद्ध स्थान नहीं।
- Extra Facts:
- बैद्यनाथ मंदिर को ‘बाबा धाम’ भी कहा जाता है।
- यहाँ श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का भव्य आयोजन होता है।
पुराणों में बैद्यनाथ मंदिर को………के लिए उपयुक्त जगह कहा गया है।
- जन्म समारोह
- शादी
- अंतिम संस्कार
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- सही उत्तर: अंतिम संस्कार – पुराणों (Puranas) में बैद्यनाथ मंदिर को अंतिम संस्कार (last rites / मोक्ष प्रदान करने वाला स्थान) के लिए उपयुक्त (appropriate) स्थान बताया गया है।
- मान्यता है कि यहाँ मरने वाले को मोक्ष (salvation) की प्राप्ति होती है – इसलिए इसे ‘मोक्षदायिनी’ नगरी भी कहा जाता है।
- यह स्थान वाराणसी (काशी) की भाँति ही मुक्ति (liberation) प्रदान करने वाला माना जाता है – इसलिए इसे ‘बाबा धाम’ या ‘मोक्षधाम’ भी कहते हैं।
- Extra Facts:
- बैद्यनाथ मंदिर को ‘बैजनाथ धाम’ के नाम से भी जाना जाता है।
- यह झारखंड के देवघर जिले में स्थित है।
- यहाँ अंतिम संस्कार के लिए विशेष पूजा-विधि का प्रावधान है।
देवघर में इनमें से कौन-सा ज्योतिर्लिंग मंदिर स्थित है?
- महाकालेश्वर
- बैद्यनाथ
- ओंकारेश्वर
- घृष्णेश्वर
Explanation:
- सही उत्तर: बैद्यनाथ – देवघर (झारखंड) में बैद्यनाथ (Baidyanath) ज्योतिर्लिंग मंदिर स्थित है – इसे ‘बैजनाथ धाम’ और ‘बाबा धाम’ भी कहा जाता है।
- महाकालेश्वर – उज्जैन (मध्य प्रदेश) में स्थित है।
- ओंकारेश्वर – मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है।
- घृष्णेश्वर – महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास स्थित है।
- Extra Facts:
- 12 ज्योतिर्लिंगों में बैद्यनाथ एक है – और यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जो शक्तिपीठ भी है।
- देवघर – झारखंड राज्य का एक प्रमुख तीर्थस्थल है।
- बैद्यनाथ मंदिर के दर्शन श्रावण मास में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
झारखण्ड के किस मंदिर में सावन का प्रसिद्ध मेला मनाया जाता है?
- महाकालेश्वर
- बैद्यनाथ
- ओंकारेश्वर
- घृष्णेश्वर
Explanation:
- सही उत्तर: बैद्यनाथ – झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ मंदिर (बाबा धाम) में सावन का प्रसिद्ध मेला मनाया जाता है।
- इस मेले में श्रावण मास के दौरान पूरे भारत से कांवड़िये (शिव भक्त) पवित्र जल लेकर देवघर पहुँचते हैं।
- महाकालेश्वर (उज्जैन), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) – ये तीनों अन्य ज्योतिर्लिंग हैं, झारखंड में नहीं।
- Extra Facts:
- बैद्यनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और 51 शक्तिपीठों में भी शामिल है।
- सावन मेला झारखंड का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।
- श्रावणी मेला की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।
शासक पूरणमल के द्वारा निम्नलिखित में से किस मंदिर का निर्माण करवाया गया?
- राँची स्थित जगन्नाथ मंदिर
- देवघर स्थित शिव मंदिर
- रांची स्थित पहाड़ी शिव मंदिर
- इटखोरी स्थित भद्रकाली मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: देवघर स्थित शिव मंदिर – शासक पूरणमल ने देवघर स्थित बैद्यनाथ (शिव) मंदिर का निर्माण/पुनर्निर्माण करवाया था।
- पूरणमल 16वीं शताब्दी में बंगाल के नवाब के अधीन एक स्थानीय जमींदार थे।
- राँची का जगन्नाथ मंदिर – अनंतवर्मन चोड़गंगदेव (जगन्नाथपुरी) से संबंधित, पूरणमल से नहीं।
- रांची का पहाड़ी शिव मंदिर और इटखोरी का भद्रकाली मंदिर भी पूरणमल द्वारा निर्मित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- बैद्यनाथ मंदिर को ‘बैजनाथ धाम’ भी कहा जाता है।
- पूरणमल ने मंदिर के जीर्णोद्धार (मरम्मत) का कार्य भी करवाया था।
- मंदिर का निर्माण काल अत्यंत प्राचीन है, लेकिन वर्तमान संरचना पूरणमल के काल की मानी जाती है।
गलत जोड़े की पहचान करें: Excise Constable – 2019
- बैद्यनाथ मंदिर – देवघर
- हल्दीघाटी मंदिर – गुमला
- तपोवन – रामगढ़
- जगन्नाथ मंदिर – रांची
Explanation:
- सही उत्तर: तपोवन – रामगढ़ – तपोवन वास्तव में देवघर जिले में स्थित है, रामगढ़ में नहीं।
- बैद्यनाथ मंदिर – देवघर (सही)
- हल्दीघाटी मंदिर – गुमला (सही)
- जगन्नाथ मंदिर – राँची (सही)
- Extra Facts:
- तपोवन देवघर में बैद्यनाथ धाम के पास स्थित है, जहाँ भगवान शिव ने तपस्या की थी।
- रामगढ़ जिले में छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) और कैथा शिव मंदिर स्थित हैं।
- गुमला जिले में टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, अंजन धाम और महामाया मंदिर हैं।
झारखण्ड में किस प्रसिद्ध तीर्थ को ‘सम्मेद शिखर’ भी कहा जाता है?
- पारसनाथ हिल्स
- राजमहल हिल्स
- रांची हिल्स
- बागरू हिल्स
Explanation:
- सही उत्तर: पारसनाथ हिल्स – झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ियों को ‘सम्मेद शिखर’ भी कहा जाता है।
- यह जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जहाँ 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया था।
- राजमहल हिल्स – साहिबगंज जिले में, बागरू हिल्स – राँची के पास, रांची हिल्स – राँची शहर की पहाड़ियाँ।
- Extra Facts:
- पारसनाथ पहाड़ी की ऊँचाई लगभग 1,366 मीटर है – यह झारखंड की सबसे ऊँची चोटी है।
- यहाँ 24 जैन मंदिरों का समूह है।
- ‘सम्मेद शिखर’ का अर्थ है ‘समाधि का शिखर’ (मोक्ष प्राप्ति का स्थान)।
निम्नलिखित में से कौन-से धर्म के लोग तीर्थयात्रियों के रूप में पारसनाथ पहाड़ी पर आते हैं?
- हिन्दू
- मुसलमान
- जैन
- ईसाई
Explanation:
- सही उत्तर: जैन – पारसनाथ पहाड़ी (सम्मेद शिखर) जैन धर्म के अनुयायियों का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है।
- जैन मान्यता के अनुसार, 20 जैन तीर्थंकरों ने यहाँ मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया था।
- यह स्थान दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों जैन संप्रदायों के लिए पवित्र है।
- Extra Facts:
- पारसनाथ पहाड़ी का नाम 23वें जैन तीर्थंकर ‘पार्श्वनाथ’ के नाम पर रखा गया है।
- यहाँ प्रतिवर्ष दीपावली और जैन त्योहारों पर बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं।
- हिंदू, मुसलमान और ईसाई यहाँ धार्मिक स्थलों पर नहीं आते – यह विशेष रूप से जैन तीर्थ है।
गिरिडीह जिले के किस स्थान पर श्वेताम्बरी जैनियों का तीर्थस्थल है?
- मधुवन
- मीरजागंज
- राजधनवार
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- सही उत्तर: मधुवन – गिरिडीह जिले का मधुवन श्वेताम्बरी जैनियों का प्रमुख तीर्थस्थल है।
- मधुवन में एक प्राचीन जैन मंदिर है, जो श्वेताम्बर जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र है।
- मीरजागंज – रामगढ़ जिले में, राजधनवार – गिरिडीह में परंतु जैन तीर्थ नहीं।
- Extra Facts:
- श्वेताम्बर जैनियों के 24 तीर्थंकरों में से कई से मधुवन का संबंध है।
- यह स्थान पारसनाथ पहाड़ी के निकट स्थित है।
- मधुवन का जैन मंदिर अपनी वास्तुकला और प्राचीन मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
हरिहर धाम, बगोदर झारखण्ड में किस स्थान पर स्थित है?
- बोकारो जिला
- लातेहार जिला
- गिरिडीह जिला
- जमशेदपुर जिला
Explanation:
- सही उत्तर: गिरिडीह जिला – हरिहर धाम झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान शिव (हरि-हर = विष्णु-शिव) को समर्पित है।
- बोकारो, लातेहार और जमशेदपुर जिले इस मंदिर के स्थान से संबंधित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- हरिहर धाम बगोदर में एक प्राचीन मंदिर है, जो अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- यहाँ प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है।
- हरिहर धाम गिरिडीह शहर से लगभग 20 किमी दूर है।
झारखण्ड धाम किस जिले में है?
- बोकारो जिला
- लातेहार जिला
- गिरिडीह जिला
- जमशेदपुर जिला
Explanation:
- सही उत्तर: गिरिडीह जिला – झारखण्ड धाम मंदिर गिरिडीह जिले के उतरी क्षेत्र में स्थित है।
- इसे ‘झारखंड का अयोध्या’ या ‘राम रेखा धाम’ भी कहा जाता है।
- यह मंदिर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को समर्पित है।
- Extra Facts:
- झारखण्ड धाम का नाम झारखंड राज्य के नाम पर रखा गया है।
- यहाँ रामनवमी पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।
- यह गिरिडीह का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
झारखण्ड राज्य में किस स्थान पर सूर्य मंदिर स्थित है?
- बार्किंग
- बुण्डू
- देवघर
- नेतरहाट
Explanation:
- सही उत्तर: बुण्डू – झारखंड में सूर्य मंदिर राँची जिले के बुण्डू (बुंडू) प्रखंड में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है और इसकी वास्तुकला अद्वितीय है।
- बार्किंग – बोकारो जिले में, देवघर – बैद्यनाथ धाम के लिए, नेतरहाट – लातेहार जिले का पर्यटन स्थल।
- Extra Facts:
- बुण्डू सूर्य मंदिर अपनी प्राचीनता और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है।
- यहाँ मकर संक्रांति पर विशेष पूजा-अर्चना होती है।
- यह मंदिर राँची शहर से लगभग 30 किमी दूर स्थित है।
कांके (रांची) के बोड़ेया मंदिर के निर्माण में………. वर्ष का समय लगा।
- 14
- 21
- 17
- 9
Explanation:
- सही उत्तर: 17 – राँची के कांके प्रखंड में स्थित बोड़ेया मंदिर (बोड़ेया शिव मंदिर) के निर्माण में 17 वर्ष लगे थे।
- यह मंदिर अपनी भव्यता और विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है।
- 14, 21 और 9 वर्ष – ये इस मंदिर के निर्माण काल से संबंधित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- बोड़ेया मंदिर राँची का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- यहाँ महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
- मंदिर की वास्तुकला में पारंपरिक नागर शैली का प्रभाव है।
रांची में जगन्नाथ मंदिर कब बनाया गया?
- 1691
- 1654
- 1680
- 1855
Explanation:
- सही उत्तर: 1691 – राँची स्थित जगन्नाथ मंदिर का निर्माण सन् 1691 में हुआ था।
- इस मंदिर का निर्माण उड़ीसा (ओडिशा) के शासकों से प्रेरित था और यह पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना है।
- 1654, 1680 और 1855 – ये वर्ष इस मंदिर निर्माण से संबंधित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- राँची का जगन्नाथ मंदिर पुरी जगन्नाथ मंदिर की शैली में बना है।
- यहाँ प्रतिवर्ष रथयात्रा (जगन्नाथ रथयात्रा) का आयोजन होता है, जो झारखंड का प्रमुख आयोजन है।
- मंदिर राँची शहर के मुख्य क्षेत्र में स्थित है और स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत पवित्र है।
झारखण्ड के 72 प्राचीन मंदिरों में गाँव मलुटी से किस वंश का संबंध है?
- पाल राजवंश
- बाज बसंत राजवंश
- शुंग राजवंश
- शशांक राजवंश
Explanation:
- सही उत्तर: बाज बसंत राजवंश – झारखंड के दुमका जिले में स्थित मलुटी गाँव के 72 प्राचीन मंदिरों का संबंध बाज बसंत राजवंश से है।
- बाज बसंत राजवंश ने 17वीं-18वीं शताब्दी में इन मंदिरों का निर्माण करवाया था।
- पाल, शुंग और शशांक वंश – ये मलुटी मंदिरों से संबंधित नहीं हैं, ये अन्य क्षेत्रों के राजवंश हैं।
- Extra Facts:
- मलुटी गाँव को ‘पूर्व का खजुराहो’ भी कहा जाता है।
- यहाँ 72 मंदिरों का समूह है, जिनमें से अधिकांश शिव मंदिर हैं।
- ये मंदिर अपनी नक्काशी और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
झारखण्ड के किस स्थान पर मलूटी मंदिर स्थित है?
- गोड्डा
- धनबाद
- दुमका
- हजारीबाग
Explanation:
- सही उत्तर: दुमका – मलूटी (Maluti) गाँव झारखंड के दुमका जिले में स्थित है।
- यह स्थान अपने 72 प्राचीन मंदिरों के समूह के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- गोड्डा – योगिनी मंदिर, धनबाद – शक्ति मंदिर, हजारीबाग – बादमगाँव शिव मंदिर – मलूटी दुमका में है।
- Extra Facts:
- मलूटी गाँव को ‘पूर्व का खजुराहो’ कहा जाता है।
- यहाँ के मंदिर बंगाली वास्तुकला शैली में निर्मित हैं।
- यह स्थान पुरातात्विक महत्व रखता है और पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है।
योगिनी शक्तिपीठ झारखण्ड के किस जिले में स्थित है?
- गोड्डा
- धनबाद
- दुमका
- हजारीबाग
Explanation:
- सही उत्तर: गोड्डा – योगिनी शक्तिपीठ (माँ योगिनी मंदिर) झारखंड के गोड्डा जिले में स्थित है।
- यह मंदिर गोड्डा जिले के बरगरिया/बारकोपा क्षेत्र में स्थित है और 51 शक्तिपीठों में से एक है।
- धनबाद – शक्ति मंदिर, दुमका – बासुकीनाथ/मौलीक्षा, हजारीबाग – बादमगाँव शिव मंदिर।
- Extra Facts:
- योगिनी शक्तिपीठ देवी सती के गिरे हुए भागों में से एक माना जाता है।
- यहाँ तांत्रिक साधना की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
- नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती है।
‘अंजन धाम’ झारखण्ड के किस जिले में है?
- गोड्डा
- गुमला
- दुमका
- हजारीबाग
Explanation:
- सही उत्तर: गुमला – अंजन धाम मंदिर झारखंड के गुमला जिले के अंजन गाँव में स्थित है।
- यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और इसे भगवान हनुमान का जन्म स्थल भी माना जाता है।
- गोड्डा – योगिनी शक्तिपीठ, दुमका – बासुकीनाथ/मौलीक्षा, हजारीबाग – बादमगाँव शिव मंदिर।
- Extra Facts:
- अंजन धाम को ‘हनुमान जन्म स्थली’ भी कहा जाता है।
- यहाँ हनुमान जयंती पर विशाल मेला लगता है।
- गुमला जिले में अंजन धाम के अलावा टाँगीनाथ, चिंतामणि, कपिलनाथ, महामाया मंदिर भी हैं।
झारखण्ड के किस स्थान पर ‘रामरेखा धाम’ है जो एक ऐसे स्थान के रूप में विख्यात है जहाँ प्रभु राम वनवास के दौरान दो बार आए थे?
- गोड्डा
- गुमला
- दुमका
- सिमडेगा
Explanation:
- सही उत्तर: सिमडेगा – रामरेखा धाम झारखंड के सिमडेगा जिले में स्थित है।
- मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान दो बार इस स्थान का भ्रमण किया था।
- गोड्डा – योगिनी शक्तिपीठ, गुमला – अंजन धाम/टाँगीनाथ, दुमका – मलूटी मंदिर/बासुकीनाथ।
- Extra Facts:
- रामरेखा धाम को ‘झारखंड का अयोध्या’ भी कहा जाता है।
- यहाँ भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियाँ स्थापित हैं।
- यह स्थान सिमडेगा जिले का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल है।
झारखण्ड के किस स्थान पर 500 फीट ऊँचा भुवनेश्वरी मंदिर स्थित है?
- जमशेदपुर
- गुमला
- दुमका
- सिमडेगा
Explanation:
- सही उत्तर: जमशेदपुर – भुवनेश्वरी मंदिर झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में स्थित है और यह 500 फीट ऊँचा है।
- यह मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और देवी भुवनेश्वरी को समर्पित है।
- गुमला – टाँगीनाथ/अंजन धाम,
- दुमका – मलूटी/बासुकीनाथ,
- सिमडेगा – रामरेखा धाम।
- Extra Facts:
- भुवनेश्वरी मंदिर जमशेदपुर का प्रमुख शक्तिपीठ है।
- यहाँ से पूरे जमशेदपुर शहर का दृश्य दिखाई देता है।
- नवरात्रि के अवसर पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
झारखण्ड का प्रसिद्ध पारसी अग्नि मंदिर कहाँ स्थित है?
- जमशेदपुर
- गुमला
- दुमका
- सिमडेगा
Explanation:
- सही उत्तर: जमशेदपुर – झारखंड का प्रसिद्ध पारसी अग्नि मंदिर (जोरोस्ट्रियन फायर टेंपल) जमशेदपुर शहर में स्थित है।
- जमशेदपुर में पारसी समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति है, जो टाटा स्टील की स्थापना के समय से यहाँ बसा है।
- गुमला, दुमका और सिमडेगा में पारसी अग्नि मंदिर नहीं है।
- Extra Facts:
- जमशेदपुर के पारसी समुदाय ने शहर के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
- अग्नि मंदिर में पवित्र अग्नि को सदैव जलाया जाता है – यह जरथुस्त्री (पारसी) धर्म का मुख्य केंद्र है।
- भारत में पारसी अग्नि मंदिर मुख्यतः मुंबई, सूरत और जमशेदपुर में स्थित हैं।
नगर उंटारी में स्थित बाबा वंशीधर मंदिर में सोने से बनी भगवान कृष्ण की मूर्ति का वजन है।
- 1,400 किलोग्राम
- 1,560 किलोग्राम
- 1,100 किलोग्राम
- 1,280 किलोग्राम
Explanation:
- सही उत्तर: 1,280 किलोग्राम – गढ़वा जिले के नगर उंटारी में स्थित बाबा वंशीधर मंदिर में सोने से बनी भगवान कृष्ण की मूर्ति का वजन 1,280 किलोग्राम है।
- यह मूर्ति अत्यंत भव्य है और अपने सोने के निर्माण के कारण विश्व प्रसिद्ध है।
- 1,400, 1,560 और 1,100 किलोग्राम – ये इस मूर्ति के वजन से संबंधित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- बाबा वंशीधर मंदिर गढ़वा जिले का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- ‘वंशीधर’ भगवान कृष्ण का नाम है, जो बाँसुरी धारण करते हैं।
- यह मूर्ति अपनी विशालता और स्वर्ण निर्माण के लिए पूरे झारखंड में प्रसिद्ध है।
टाँगीनाथ केन्द्र था:
- वैष्णव धर्म
- पाशुपत सम्प्रदाय
- बौद्ध धर्म
- जैन धर्म
Explanation:
- सही उत्तर: पाशुपत सम्प्रदाय – गुमला जिले का टाँगीनाथ मंदिर पाशुपत सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र था।
- टाँगीनाथ धाम झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में स्थित है।
- यह प्राचीन शिव मंदिर एवं महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।
- टाँगीनाथ की प्रमुख विशेषता भूमि में गड़ा हुआ विशाल लोहे का त्रिशूल है।
- झारखंड पर्यटन के अनुसार, पौराणिक मान्यता है कि भगवान परशुराम ने यहां तपस्या की और भगवान शिव की पूजा की थी।
- टाँगीनाथ को गुमला जिले के पाँच महत्वपूर्ण पुरातात्विक विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।
- अन्य प्रमुख पुरातात्विक विरासत स्थलों में पालकोट किला, अंजनधाम, नवरत्नगढ़ और गोबिंदपुर का कैथोलिक मिशन चर्च शामिल हैं।
- महाशिवरात्रि के दौरान टाँगीनाथ में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ होती है और गुमला से यहां के लिए बसें चलती हैं।
झारखण्ड में कौन-से स्थान को भगवान हनुमान का जन्म स्थान भी कहा जाता है?
- अलीनगर
- अंजनधाम
- बलरामपुर
- बादाम
Explanation:
- सही उत्तर: अंजनधाम – झारखंड के गुमला जिले का अंजन धाम भगवान हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है।
- यह गुमला जिला मुख्यालय से लगभग 18 किमी दूर आंजन ग्राम में स्थित है।
- गांव का नाम माता अंजनी, जो हनुमान की माता मानी जाती हैं, के नाम पर पड़ा है।
- अंजनी गुफा आंजन गांव से लगभग 4 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।
- सरकारी पर्यटन स्रोत के अनुसार यहां कभी 360 शिवलिंग और 360 तालाब होने की संभावना बताई जाती है; वर्तमान में 100 से अधिक शिवलिंग और कई तालाबों के अवशेष मौजूद बताए गए हैं।
लिल्लोरी स्थान मंदिर किस देवी या देवता को समर्पित है?
- शनि
- जगन्नाथ
- काली
- शिव
Explanation:
- सही उत्तर: काली
- लिल्लोरी स्थान मंदिर झारखंड के धनबाद जिले का प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल है।
- यह मंदिर कतरास क्षेत्र में स्थित है।
- मंदिर की प्रमुख देवी माँ लिल्लोरी (लिलौरी/लिलौरी देवी) हैं।
- माँ लिल्लोरी को स्थानीय स्तर पर शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है।
- यह मंदिर कतरास राज परिवार की कुलदेवी से जुड़ा हुआ माना जाता है।
- लिल्लोरी स्थान को धनबाद के प्रमुख शक्तिपीठ-सदृश स्थानीय धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
कौन-सा मंदिर भूमि और धरती के जनजातीय देवता को समर्पित है?
- झिंझीपहाड़ी मंदिर
- शक्ति मंदिर
- भूफोर मंदिर
- भुवनेश्वरी मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: भूफोर मंदिर – भूफोर मंदिर झारखंड में भूमि और धरती के जनजातीय देवता को समर्पित है।
- भूइफोड़ मंदिर झारखंड के धनबाद जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- इसे भूइफोड़ मंदिर (Bhuiphore/Bhuiphod Temple) के नाम से जाना जाता है।
- मंदिर के मुख्य आराध्य भगवान शिव हैं।
- ‘भूइफोड़’ नाम इस मान्यता से जुड़ा है कि शिवलिंग भूमि को फोड़कर/धरती से बाहर निकला।
- मंदिर धनबाद के कलाकुसुमा/चाणक्य नगर क्षेत्र में स्थित बताया जाता है।
झारखण्ड स्थित किस मंदिर में हिमाचल के ज्वालाजी मंदिर से लाकर अखंड ज्योति स्थापित करने की मान्यता है?
- शक्ति मंदिर
- भुवनेश्वरी मंदिर
- छिन्नमस्तिका मंदिर
- कबीर ज्ञान मंदिर
Explanation:
- सही उत्तर: शक्ति मंदिर – झारखंड के धनबाद जिले में स्थित शक्ति मंदिर में हिमाचल के ज्वालाजी मंदिर से लाकर अखंड ज्योति स्थापित करने की मान्यता है।
- यह मंदिर माँ शक्ति को समर्पित है और यहाँ ज्वालाजी (हिमाचल) की तर्ज पर अखंड अग्नि जलाई जाती है।
- भुवनेश्वरी मंदिर – जमशेदपुर,
- छिन्नमस्तिका मंदिर – रामगढ़,
- कबीर ज्ञान मंदिर –
योगिनी शक्तिपीठ गोड्डा जिले के किस गाँव में स्थित है?
- लखनपहाड़ी गाँव
- बारकोपा/जोगन पहाड़ी गाँव
- रामगढ़ गाँव
- बरई गाँव
Explanation:
- सही उत्तर: बारकोपा/जोगन पहाड़ी गाँव – योगिनी शक्तिपीठ गोड्डा जिले के बारकोपा (जोगन पहाड़ी) गाँव में स्थित है।
- यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और माँ योगिनी को समर्पित है।
- Extra Facts:
- योगिनी शक्तिपीठ गोड्डा जिले का प्रमुख शक्तिपीठ है।
- यहाँ तांत्रिक साधना की परंपरा है।
- नवरात्रि में यहाँ विशेष मेला लगता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
योगिनी शक्तिपीठ किस देवी से जुड़ी हुई है?
- काली
- दुर्गा
- लक्ष्मी
- सती
Explanation:
- सही उत्तर: सती – योगिनी शक्तिपीठ (माँ योगिनी मंदिर) देवी सती (पार्वती) से जुड़ा हुआ है।
- मान्यता है कि देवी सती के शरीर के कुछ अंश यहाँ गिरे थे, इसलिए यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।
- काली और दुर्गा – देवी सती के अन्य रूप हैं, लेकिन शक्तिपीठ का संबंध विशेष रूप से सती के शरीर के अंशों से है।
- लक्ष्मी – धन की देवी हैं और शक्तिपीठ से संबंधित नहीं हैं।
- Extra Facts:
- 51 शक्तिपीठ देवी सती के शरीर के 51 भागों से जुड़े हैं।
- योगिनी शक्तिपीठ गोड्डा जिले में स्थित है।
- शक्तिपीठों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन सभी का मूल संबंध सती से है।
