Hindi
निम्नलिखित में से कौन तत्पुरुष समास का उदाहरण नहीं है?
- राजकुमार
- यज्ञवेदी
- आजन्म
- ग्रामवासी
Explanation:
- ‘आजन्म’ (जन्म से लेकर) अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, जिसमें पहला पद (अव्यय) प्रधान होता है। अन्य विकल्पों में तत्पुरुष समास है, जिसमें उत्तर पद प्रधान होता है।
निम्नलिखित किस एक में कर्मधारय समास है?
- लड़का भूख से अधमरा हो गया था।
- तुम्हें अपना भला बुरा स्वयं सोचना चाहिए
- विवाह संबंध में ऊँच नीच देखना पड़ता है।
- उठो, दिया बत्ती का समय हो गया
Explanation:
- लड़का भूख से अधमरा हो गया था में ‘अधमरा’ (अर्ध-मरा) कर्मधारय समास है, जबकि शेष विकल्पों में ‘भला-बुरा’, ‘ऊँच-नीच’, ‘दिया-बत्ती’ द्वन्द्व समास (दोनों पद प्रधान) के उदाहरण हैं।
‘गुरुदेव’ शब्द में समास है :
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- बहुव्रीहि समास
- कर्मधारय समास
Explanation:
- ‘गुरु देव’ (गुरु ही देव) – विशेषण-विशेष्य संबंध, कर्मधारय समास का उदाहरण है।
‘बारहसिंगा’ शब्द में समास है-
- बहुव्रीहि समास
- कर्मधारय समास
- द्वन्द्व समास
- अव्ययीभाव समास
Explanation:
- ‘बारह सींग वाला (हिरण)’ – यह बहुव्रीहि समास है, जिसमें समस्त पद किसी अन्य (तीसरे) संज्ञा का बोध कराता है।
कर्मधारय समास का उदाहरण है-
- गगनचुम्बी
- पाठशाला
- श्वेतपत्र
- नीलकण्ठ
Explanation:
- ‘श्वेत पत्र’ (श्वेत है जो पत्र) – विशेषण-विशेष्य संबंध, कर्मधारय समास।
‘परमानन्द’ में समास है :
- द्वन्द्व समास
- कर्मधारय समास
- अव्ययीभाव समास
- बहुव्रीहि समास
Explanation:
- ‘परम आनन्द’ (परम है जो आनन्द) – कर्मधारय समास।
निम्नलिखित में से कौन-सा समास नहीं है?
- अव्ययीभाव समास
- कर्मकारक समास
- द्वन्द्व समास
- बहुव्रीहि समास
Explanation:
- हिंदी व्याकरण में समास के मुख्य चार भेद हैं – अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्वन्द्व, बहुव्रीहि, द्विगु। ‘कर्मकारक समास’ कोई मान्य भेद नहीं है।
किस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं?
- बहुव्रीहि समास
- तत्पुरुष समास
- द्वन्द्व समास
- द्विगु समास
Explanation:
- द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं (जैसे – राम-लक्ष्मण)।
किस समास में प्रथम पद संख्यावाची तथा अन्तिम पद संज्ञा हो, वह है :
- द्वन्द्व समास
- तत्पुरुष समास
- द्विगु समास
- अव्ययीभाव समास
Explanation:
- द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है (जैसे – त्रिलोक, चौराहा)।
‘महाजन’ शब्द में समास है :
- कर्मधारय समास
- द्वन्द्व समास
- द्विगु समास
- अव्ययीभाव समास
Explanation:
- ‘महा जन’ (महान है जो जन) – कर्मधारय समास।
जिसमें कोई पद प्रधान नहीं होता तथा अत्यन्त अर्थ प्रधान होता है, वहाँ होता है :
- कर्मधारय समास
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- बहुव्रीहि समास
Explanation:
- बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता, बल्कि समस्त पद किसी अन्य (तीसरे) संज्ञा के लिए विशेषण बन जाता है।
‘जलमन’ शब्द में समास होगा :
- द्विगु
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘जल का मन’ (मन = घर) – तत्पुरुष समास (संबंध कारक)।
‘बालापाणि’ शब्द में कौन-सा समास है?
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्विगु
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘बाला (युवती) के हाथ में है’ – यह बहुव्रीहि समास (उपमान-पूर्वपद बहुव्रीहि) है।
‘पंचवटी’ शब्द में समास होगा :
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- द्विगु
- द्वन्द्व (नोट: मानक व्याकरण के अनुसार ‘पंचवटी’ (पाँच वट वृक्षों का समूह) द्विगु समास है, किन्तु दिए गए उत्तर कुंजी में द्वन्द्व है।)
Explanation:
- यहाँ उत्तर कुंजी ‘द्वन्द्व’ दे रही है, जबकि सामान्यतः ‘पंचवटी’ (पाँच वट वृक्ष) द्विगु समास होता है।
‘सुनीता के बच्चे घास-फूस की तरह बढ़ रहे हैं’ उपयुक्त वाक्य में प्रयुक्त ‘घास-फूस’ शब्द में समास होगा :
- कर्मधारय
- द्विगु
- द्वन्द्व
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘घास और फूस’ – द्वन्द्व समास (दोनों पद प्रधान), यहाँ उत्तर कुंजी ‘द्विगु’ दे रही है।
निम्नलिखित शब्दों में से कौन-सा शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण है?
- शूलपाणि
- यथाक्रम
- हंसमुख
- हथकड़ी
Explanation:
- ‘शूल’ (त्रिशूल) ‘पाणि’ (हाथ) – जिसके हाथ में शूल है, अर्थात् भगवान शिव। यह बहुव्रीहि समास है।
इनमें से कौन-सा शब्द ‘द्विगु’ समास है?
- भुजदंड
- माखनचोर
- भला-बुरा
- चतुर्थज
Explanation:
- ‘चतुर्थ’ (चौथा) + ‘अज’ (जन्म) – चौथी पीढ़ी में जन्मा। पहला पद संख्यावाची, अतः द्विगु समास।
‘प्रतिदिन’ शब्द में समास होगा :
- द्विगु
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘प्रति’ (अव्यय) + ‘दिन’ = प्रत्येक दिन। अव्ययीभाव समास (अव्यय पूर्व पद)।
जिन समस्त पदों में पहला शब्द संख्यावाची हो और उससे समुदाय का बोध होता हो तो उसे कहते हैं-
- द्विगु समास
- द्वन्द्व समास
- कर्मधारय समास
- अव्ययीभाव समास
Explanation:
- द्विगु समास की यही परिभाषा है – संख्यावाची पूर्वपद से समूह/समुदाय का बोध।
जिसमें पहला शब्द विशेषण हो और दूसरा शब्द विशेष्य तो उसे कौन-सा समास कहेंगे?
- द्विगु
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
- तत्पुरुष
Explanation:
- कर्मधारय समास का मुख्य लक्षण – विशेषण-विशेष्य संबंध (जैसे – नीलकमल)।
जिस समास में दूसरा शब्द प्रधान रहता है, उसे कहते हैं
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- द्वन्द्व समास
- बहुव्रीहि समास
Explanation:
- तत्पुरुष समास में उत्तर पद (दूसरा) प्रधान होता है।
‘कृष्ण और सुदामा गुरुभाई थे’ – रेखांकित में समास है-
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- द्वन्द्व समास
- बहुव्रीहि समास
Explanation:
- ‘गुरुभाई’ = गुरु का भाई (संबंध कारक) – तत्पुरुष समास।
‘लंकी चौलडी पहने है’ – रेखांकित में समास है
- द्विगु समास
- बहुव्रीहि समास
- अव्ययीभाव समास
- द्वन्द्व समास
Explanation:
- ‘लंकी’ (लंका की) – यह द्विगु समास नहीं है, बल्कि तत्पुरुष समास है। उत्तर कुंजी ‘द्विगु’ दे रही है।
जिस समास के दोनों ही पद प्रधान हों, उसे कहते हैं
- द्विगु समास
- द्वन्द्व समास
- तत्पुरुष समास
- कर्मधारय समास
Explanation:
- द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं।
जिस समास में पहले या बाद का कोई भी पद प्रधान नहीं होता, उसे कहते हैं,
- अव्ययीभाव समास
- बहुव्रीहि समास
- द्वन्द्व समास
- कर्मधारय समास
Explanation:
- बहुव्रीहि समास – दोनों पद गौण होते हैं और समस्त पद अन्य संज्ञा के लिए विशेषण बन जाता है।
जिस समास में अर्थ की दृष्टि से उत्तर पद प्रधान और पूर्व पद गौण हो, उसे कहते हैं,
- द्विगु समास
- कर्मधारय समास
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
Explanation:
- तत्पुरुष समास – उत्तर पद प्रधान, पूर्व पद गौण (जैसे – राजपुत्र)।
‘यथाशक्ति’ में कौन सा समास है?
- बहुव्रीहि समास
- अव्ययीभाव समास
- करण तत्पुरुष समास
- द्वन्द्व समास
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘शक्ति’ = शक्ति के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
‘धनुबाण’ में किस तरह का समास है –
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘धनु और बाण’ – दोनों पद प्रधान, द्वन्द्व समास।
‘शोकाकुल’ में समास है –
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘शोक से आकुल’ (करण कारक) – तत्पुरुष समास।
‘अकाल पीडित’ में समास होगा –
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘अकाल से पीडित’ (करण कारक) – तत्पुरुष समास।
‘जय-पराजय’ में कौन-सा समास है –
- द्वन्द्व समास
- कर्मधारय समास
- द्वन्द्व समास
- तत्पुरुष समास
Explanation:
- ‘जय और पराजय’ – द्वन्द्व समास।
‘पर्णकुटी’ शब्द का समास है-
- तत्पुरुष
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘पर्ण की कुटी’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘सिंह द्वार’ शब्द में समास है
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- ‘सिंह का द्वार’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘कोशकार’ में समास है
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
- द्विगु
Explanation:
- ‘कोश का कर्ता’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘यथोचित’ में समास है
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘उचित’ = उचित के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
‘नरभक्षी’ में समास है
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्विगु
Explanation:
- ‘नर को भक्षण करने वाला’ (कर्म कारक) – तत्पुरुष समास।
‘नीलाम्बर’ में समास है
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- द्विगु
Explanation:
- ‘नील (नीला) है अम्बर (आकाश) जिसका’ – बहुव्रीहि समास (विष्णु का नाम)।
‘सप्तर्षि’ में समास है
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- द्विगु
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘सप्त’ (सात) + ‘ऋषि’ – सात ऋषियों का समूह। द्विगु समास।
‘नीलोत्पलम्’ में कौन सा समास है
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘नीलम् उत्पलम्’ (नीला है जो उत्पल) – विशेषण-विशेष्य संबंध, कर्मधारय।
‘धनंजय’ में समास है –
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘धनं (धन को) जयति’ – जिसने धन को जीता, अर्थात् अर्जुन। यह बहुव्रीहि समास है (धनंजय = अर्जुन का नाम)।
‘मनमाना’ में कौन-सा समास है –
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘मन से माना हुआ’ (करण कारक) – तत्पुरुष समास।
‘कत्तर-ब्योत’ में कौन सा समास है –
- द्वन्द्व
- द्विगु
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘कत्तर और ब्योत’ – दोनों पद प्रधान, द्वन्द्व समास।
‘हानि-लाभ’ में कौन-सा समास है ?
- द्विगु समास
- तत्पुरुष समास
- बहुव्रीहि समास
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- ‘हानि और लाभ’ – यह द्वन्द्व समास है, जो विकल्पों में नहीं है, अतः ‘इनमें से कोई नहीं’।
‘जय-पराजय’ में कौन-सा समास है ?
- अव्ययी-भाव
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- द्विगु
Explanation:
- ‘जय और पराजय’ – द्वन्द्व समास।
‘लंबोदर’ उदाहरण है
- बहुव्रीहि समास का
- द्वन्द्व समास का
- द्विगु समास का
- कर्मधारय का
Explanation:
- ‘लम्बा है उदर (पेट) जिसका’ – बहुव्रीहि समास (गणेश का नाम)।
‘तिरंगा’ शब्द में समास है
- द्वन्द्व समास
- अव्ययीभाव समास
- द्विगु समास
- कर्मधारय समास
Explanation:
- ‘तीन रंग’ – पहला पद संख्यावाची, अतः द्विगु समास।
‘पंचवटी’ शब्द में कौन सा समास है?
- कर्मधारय
- द्विगु
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘पाँच वट’ – पहला पद संख्यावाची, द्विगु समास।
‘परमानन्द’ शब्द में कौन सा समास है?
- तत्पुरुष
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘परम आनन्द’ – विशेषण-विशेष्य, कर्मधारय समास।
निम्नलिखित में द्वन्द्व समास बताइए?
- शोकाकुल
- सवोत्तम
- वीरपुरुष
- पीप-पुण्य
Explanation:
- ‘पीप और पुण्य’ – दोनों पद प्रधान, द्वन्द्व समास।
‘यथारुचि’ में समास है :
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- अव्ययीभाव
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘रुचि’ = रुचि के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
‘समास’ का शाब्दिक अर्थ होता है-
- संक्षेप
- विस्तार
- विग्रह
- नवीन अर्थ
Explanation:
- ‘समास’ का शाब्दिक अर्थ ‘संक्षेप’ (संक्षिप्तीकरण) होता है।
‘उपकूल’ में कौन सा समास है?
- द्वन्द्व
- द्विगु
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘उप’ (अव्यय) + ‘कूल’ = कूल के समीप। अव्ययीभाव समास।
‘यथाशीघ्र’ शब्द का समास बताइए।
- अव्ययीभाव
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘शीघ्र’ = शीघ्र के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
‘चौराहा’ कौन-सा समास है?
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- द्विगु
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘चार राह’ – संख्यावाची पूर्वपद, द्विगु समास।
‘निर्विवाद’ में समास है-
- कर्मधारय
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘निर्’ (नहीं/रहित) + ‘विवाद’ = विवाद रहित। विशेषण-विशेष्य संबंध, कर्मधारय समास।
निम्न में तत्पुरुष समास का उदाहरण है-
- एकतरका
- धनंजय
- आत्मनिर्भर
- वक्तुण्ड
Explanation:
- ‘आत्मा पर निर्भर’ (अधिकरण कारक) – तत्पुरुष समास।
‘चन्द्रशेखर’ शब्द में समास है-
- तत्पुरुष
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘चन्द्र (चंद्रमा) है शेखर (मस्तक) जिसका’ – बहुव्रीहि समास (शिव का नाम)।
निम्नलिखित में से ‘द्विगु समास’ का उदाहरण है-
- विभुवन
- तिरंगा
- एकदन्त
- दशानन
Explanation:
- ‘वि’ (अनेक) + ‘भुवन’ = अनेक भुवन (तीनों लोक) – यह द्विगु समास का उदाहरण है।
‘चौराहा’ कौन-सा समास है?
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- द्विगु
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘चार राह’ – संख्यावाची पूर्वपद, द्विगु समास।
‘समास’ का शाब्दिक अर्थ होता है-
- संक्षेप
- विस्तार
- विग्रह
- विच्छेद
Explanation:
- ‘समास’ का अर्थ ‘संक्षेप’ है – अर्थात संक्षिप्तीकरण।
‘दशानन’ में समास है
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘दश’ (दस) है ‘आनन’ (मुख) जिसके’ – बहुव्रीहि समास (रावण का नाम)।
‘रोग पीडित’ में समास है
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘रोग से पीडित’ – करण कारक तत्पुरुष।
‘प्रतिमान’ में समास है
- कर्मधारय
- अव्ययीभाव
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘प्रति’ (अव्यय) + ‘मान’ = मान के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
‘वीर पुरुष’ में समास है
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘वीर है जो पुरुष’ – विशेषण-विशेष्य संबंध, कर्मधारय समास (परंतु उत्तर कुंजी ‘तत्पुरुष’ दे रही है।)
‘रसोईचर’ में कौन सा समास है?
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘रसोई का चर (कर्ता)’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘नीलगाय’ में कौन-सा समास है?
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
- द्विगु
Explanation:
- ‘नील (नीली) है जो गाय’ – विशेषण-विशेष्य, कर्मधारय समास।
‘पीताम्बर’ पीत है अम्बर जिसका अर्थात् विष्णु, इसे कौन-सा समास कहेंगे?
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘पीत (पीला) है अम्बर (वस्त्र) जिसका’ – बहुव्रीहि समास।
‘पंचवटी’ में समास है
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- द्विगु
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘पाँच वट’ – संख्यावाची पूर्वपद, द्विगु समास।
‘घनश्याम’ में समास है
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘घन (बादल) सा श्याम (काला)’ – उपमान-उपमेय संबंध, कर्मधारय समास।
‘पीताम्बर’ में समास है
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- बहुव्रीहि
- द्विगु
Explanation:
- ‘पीत है अम्बर जिसका’ – बहुव्रीहि समास (विष्णु)।
‘यथाशक्ति’ में समास है
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘शक्ति’ = शक्ति के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
जब दो शब्द समास बनाकर तीसरे शब्द का विशेषण बन जाए तो उसे क्या कहते हैं?
- द्विगु
- द्वन्द्व
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
Explanation:
- बहुव्रीहि समास – समस्त पद अन्य संज्ञा के लिए विशेषण बन जाता है।
‘समास’ शब्द का अर्थ है-
- संक्षेप
- टिप्पणी
- सार
- व्यास
Explanation:
- ‘समास’ का अर्थ ‘संक्षेप’ है।
‘अनायास’ में समास है-
- द्विगु
- अव्ययीभाव
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘अ’ (निषेध/अव्यय) + ‘आयास’ = आयास (प्रयास) के बिना। अव्ययीभाव समास।
‘चन्द्रशेखर’ में समास है
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- द्विगु
Explanation:
- ‘चन्द्र है शेखर जिसका’ – बहुव्रीहि समास (शिव)।
‘रात-दिन’ में समास है
- द्वन्द्व
- द्विगु
- कर्मधारय
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘रात और दिन’ – द्वन्द्व समास।
‘बहन-भाई’ में समास है
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
- द्वन्द्व
- द्विगु
Explanation:
- ‘बहन और भाई’ – द्वन्द्व समास।
‘दशमुख’ में समास है
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘दश मुख हैं जिसके’ – बहुव्रीहि समास (रावण)।
‘यथाशक्ति’ में समास है
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘शक्ति’ – अव्ययीभाव समास।
‘देशभक्ति’ में समास है
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्विगु
- अव्ययीभाव
Explanation:
- ‘देश की भक्ति’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘हस्तलिखित’ में समास है
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
Explanation:
- ‘हस्त से लिखित’ – करण कारक तत्पुरुष।
‘त्रिनेत्र’ में समास है
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्विगु
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘त्रि’ (तीन) + ‘नेत्र’ – संख्यावाची पूर्वपद, द्विगु समास।
‘भरपेट’ में समास है
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
- द्विगु
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘भर’ (अव्यय) + ‘पेट’ = पेट भर (भरकर)। अव्ययीभाव समास।
‘आनन्दमन’ में समास है
- द्विगु
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘आनन्द का मन’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘आनन्दमन’ में समास है
- द्विगु
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘आनन्द का मन’ – तत्पुरुष समास।
‘बनवास’ में समास है
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘बन का वास’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘पंचवटी’ में समास है
- द्विगु
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘पाँच वट’ – द्विगु समास।
‘पीताम्बर’ में समास है
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- द्विगु
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘पीत है अम्बर जिसका’ – बहुव्रीहि समास।
‘नरोत्तम’ में समास है
- द्वन्द्व
- तत्पुरुष
- अव्ययीभाव
- कर्मधारय
Explanation:
- ‘नरों में उत्तम’ – अधिकरण कारक तत्पुरुष।
‘नरोत्तम’ में समास है
- द्विगु
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘नरों में उत्तम’ – तत्पुरुष समास।
‘धनहीन’ में समास है
- द्विगु
- तत्पुरुष
- द्वन्द्व
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘धन से हीन’ – करण कारक तत्पुरुष।
‘स्वर्गगत’ में समास है
- तत्पुरुष
- द्विगु
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘स्वर्ग को गत’ – कर्म कारक तत्पुरुष।
‘पुस्तकालय’ में समास है
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
- द्वन्द्व
- बहुव्रीहि
Explanation:
- ‘पुस्तकों का आलय’ – संबंध कारक तत्पुरुष।
‘दशानन’ में समास है
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- द्विगु
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘दश आनन हैं जिसके’ – बहुव्रीहि समास।
‘त्रिलोचन’ में समास है
- बहुव्रीहि
- द्वन्द्व
- द्विगु
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘त्रि’ (तीन) ‘लोचन’ (आँखें) हैं जिसके’ – बहुव्रीहि समास (शिव)।
‘कमलनयन’ में समास है
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘कमल (कमल के समान) नयन’ – उपमान-उपमेय, कर्मधारय समास।
‘अग्नि-जल’ में समास है
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘अग्नि और जल’ – द्वन्द्व समास।
‘अष्टाध्यायी’ में समास है
- द्विगु
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘अष्ट’ (आठ) + ‘अध्याय’ – आठ अध्यायों का समूह। द्विगु समास।
‘यथासमय’ में समास है
- अव्ययीभाव
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘यथा’ (अव्यय) + ‘समय’ = समय के अनुसार। अव्ययीभाव समास।
‘भरपेट’ में समास है
- अव्ययीभाव
- द्वन्द्व
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
Explanation:
- ‘भर’ (अव्यय) + ‘पेट’ = पेट भर। अव्ययीभाव समास।
