• कहानी वापसी का सामान्य परिचय
    • कहानीकार: उषा प्रियंवदा
    • प्रकाशन वर्ष: 1960 ई. (कहानी संग्रह ‘एक कोई दूसरा‘ तथा बाद में ‘कितने चौराहे’ आदि में संकलित)।
    • मूल संवेदना/विषय: सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद बुजुर्गों की पारिवारिक उपेक्षा, दो पीढ़ियों के बीच का वैचारिक अंतराल (Generation Gap), आधुनिक मध्यमवर्गीय परिवार की आत्मकेंद्रितता और एकाकीपन।
    • विशेष महत्व: यह कहानी सेवानिवृत्त व्यक्ति के अपने ही घर में ‘अजनबी’ बन जाने की मर्मांतक पीड़ा और अप्रासंगिकता को उजागर करती है।
  • मुख्य पात्र एवं उनका चरित्र चित्रण
    • गजाधर बाबू (केंद्रीय पात्र):
      • रेलवे में 35 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त (Retire) होकर घर लौटने वाले वरिष्ठ नागरिक।
      • चरित्र की विशेषता: स्नेही, सहृदय, परिवारप्रेमी और भावुक व्यक्ति, जो सोचता है कि सेवानिवृत्ति के बाद वह अपने परिवार के साथ सुखी जीवन बिताएगा।
    • गजाधर बाबू की पत्नी:
      • केवल घर के कामकाज, रसोई और बच्चों के गृहस्थ जीवन में उलझी हुई महिला।
      • चरित्र की विशेषता: वह गजाधर बाबू के भावनात्मक पक्ष को समझने में असमर्थ है; उसके लिए वे केवल एक कमाने वाले साधन थे।
    • अमर (बड़ा बेटा):
      • अपनी अलग दुनिया और पत्नी (बहू) के प्रभाव में रहने वाला स्वार्थी और आधुनिक सोच का युवक।
    • नरेंद्र (छोटा बेटा):
      • गैर-जिम्मेदार, पिता की उपस्थिति को अपनी स्वतंत्रता में बाधा मानने वाला युवक।
    • कांति (बड़ी बेटी – विवाहित):
      • अपने ससुराल में रहने वाली पुत्री।
    • बसंती (छोटी बेटी):
      • आवारागर्दी और आधुनिकता में रुचि रखने वाली, जो पिता की रोक-टोक को पसंद नहीं करती।
    • गणेशी:
      • रेलवे स्टेशन का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (रेलवे क्वार्टर का नौकर/साथी), जो गजाधर बाबू का बहुत सम्मान करता है और उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझता है।

‘वापसी’ कहानी का संक्षिप्त कथा-सार

  • सेवानिवृत्ति और मधुर स्वप्न: गजाधर बाबू रेलवे से रिटायर होकर बेहद खुश हैं। वे 35 साल तक परिवार से दूर अकेले रहे और अब अपने घर लौटकर अपनी पत्नी, बच्चों के साथ एक भरा-पूरा पारिवारिक जीवन जीने का सपना देखते हैं।
  • घर में अनपेक्षित माहौल: घर पहुँचने पर उनका उत्साह धीरे-धीरे टूटने लगता है। परिवार के सदस्य अपने-अपने जीवन में इतने व्यस्त और आत्मकेंद्रित हैं कि गजाधर बाबू की मौजूदगी उनके लिए एक ‘रुकावट’ बनने लगती है।
  • घर में बेगानी स्थिति:
    • जब वे घर की अव्यवस्था या बच्चों की आदतों में सुधार करने का प्रयास करते हैं, तो बेटा अमर और बेटी बसंती उनसे चिढ़ जाते हैं।
    • पत्नी भी उनके भावनात्मक एकाकीपन को समझने के बजाय उनसे शिकायतें करती हैं और उन्हें रसोई व घर की शांति में बाधक मानती हैं।
    • बैठक (Drawing room) से उनकी चारपाई हटाकर अंदर एक तंग जगह/गलियारे में डाल दी जाती है।
  • अनुभव की अप्रासंगिकता: गजाधर बाबू को अहसास होता है कि परिवार के लिए उनका महत्व केवल एक धन-उपार्जक (पैसा कमाने वाले) व्यक्ति के रूप में था। रिटायरमेंट के बाद अब वे अपने ही घर में एक फालतू वस्तु बन गए हैं।
  • पुनः प्रस्थान (वापसी): गहरी निराशा और आहत स्वाभिमान के कारण गजाधर बाबू एक चीनी मिल (Sugar Mill) में पैंतालीस रुपये की छोटी-सी नौकरी स्वीकार कर लेते हैं।
  • त्रासद अंत: वे अपना ट्रंक उठाकर फिर से अकेलेपन की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। उनके जाने पर परिवार के सदस्य राहत की साँस लेते हैं। कहानी का शीर्षक ‘वापसी’ यहाँ व्यंग्यात्मक है—घर वापसी वास्तव में उनके एकाकीपन और निष्कासन की वापसी बन जाती है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • कहानीकार का दृष्टिकोण: उषा प्रियंवदा साठोत्तरी हिंदी कहानी (1960 के बाद की कहानी) की प्रमुख महिला कथाकार हैं, जो महानगरीय जीवन और व्यक्तिवादी चेतना के चित्रण के लिए जानी जाती हैं।
    • प्रतीकात्मकता:
      • ‘चारपाई का हटाया जाना’: परिवार से वृद्ध व्यक्ति के स्थान और आदर के खिसकने का प्रतीक।
      • ‘ट्रंक/अटैची’: गजाधर बाबू के घुमंतू और स्थायी रूप से बेघर होने का प्रतीक।
    • शीर्षक की सार्थकता: ‘वापसी’ शीर्षक में द्वि-स्तरीय अर्थ है—पहला, रेलवे की नौकरी से घर वापसी; दूसरा, घर से दुखी होकर पुनः नौकरी/अकेलेपन की ओर वापसी।
    • उषा प्रियंवदा के अन्य प्रमुख कहानी संग्रह: जिंदगी और गुलाब के फूल (1961), एक कोई दूसरा (1966), कितने चौराहे (1985)।
    • प्रमुख कथन/संवाद:
      • “गजाधर बाबू ने देखा कि उनके घर में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है… वे एक ऐसी फालतू चीज़ थे जो घर के व्यवस्थित जीवन में बाधा डाल रही थी।”
वापसी- उषा प्रियंवदा JSSC Graduate Level Exams Paper -2 Hindi Notes