• कहानी अभिशप्त का सामान्य परिचय
    • कहानीकार: यशपाल
    • प्रकाशन वर्ष: 1943 ई. (कहानी संग्रह ‘पिंजड़े की उड़ान’ या ‘अभिशप्त’ संग्रह में संकलित)।
    • मूल संवेदना/विषय: सामाजिक-आर्थिक विषमता, पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा शोषित वर्ग का उत्पीड़न, गरीबी और सामाजिक नियतिवादी (भाग्यवादी) सोच पर करारा व्यंग्य।
    • विशेषता: यशपाल मार्क्सवादी चेतना के कथाकार हैं। इस कहानी में उन्होंने दिखाया है कि कैसे गरीब और शोषित वर्ग को समाज और परिस्थितियाँ जन्म से ही ‘अभिशप्त’ (शापित) बना देती हैं।
  • मुख्य पात्र एवं उनका चरित्र चित्रण
  • रघुआ (केंद्रीय/शोषित पात्र):
    • कहानी का मुख्य पात्र, जो अत्यंत निर्धन, असहाय और समाज के सबसे निचले तबके का प्रतिनिधि है।
    • चरित्र की विशेषता: ईमानदार और मेहनती होने के बावजूद आर्थिक विषमता और सामाजिक शोषण के कारण आजीवन कष्ट भोगने के लिए विवश।
  • साहूकार/पूंजीपति वर्ग के पात्र:
    • समाज के उस शोषक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो गरीबों की लाचारी का फायदा उठाते हैं और उन्हें ऋण के जाल में फंसाकर रखते हैं।
  • समाज/व्यवस्था (अदृश्य पात्र के रूप में):
    • वह वर्ग-विभाजित सामाजिक ढांचा जो एक वर्ग को जन्मजात विशेषाधिकार और दूसरे वर्ग को जन्मजात ‘अभिशाप’ (गरीबी) देता है।

‘अभिशप्त’ कहानी का संक्षिप्त कथा-सार

  • आर्थिक विपन्नता का चित्रण: कहानी रघुआ के जीवन की भीषण गरीबी और उसके दैनिक संघर्ष से शुरू होती है। वह दिन-रात कड़ा परिश्रम करता है, फिर भी अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का प्रबंध नहीं कर पाता।
  • भाग्य बनाम व्यवस्था: समाज और धर्म के ठेकेदार गरीब व्यक्ति की इस दुर्दशा को उसके “पूर्व जन्मों के पापों का फल” या “भाग्य का अभिशाप” बताकर टाल देते हैं।
  • शोषक वर्ग की क्रूरता: साहूकार और उच्च वर्ग के लोग उसकी मेहनत का शोषण करते हैं। रघुआ जितना अधिक काम करता है, उसका कर्ज और लाचारी उतनी ही बढ़ती जाती है।
  • मार्क्सवादी दृष्टिकोण: यशपाल अपनी प्रगतिवादी दृष्टि से यह उजागर करते हैं कि गरीबी कोई दैवीय अभिशाप या भाग्य का खेल नहीं है, बल्कि यह पूंजीवादी सामाजिक व्यवस्था द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यवस्था है।
  • दुखांत निष्पत्ति: रघुआ जीवन भर इस शोषण चक्र से बाहर निकलने का प्रयास करता है, लेकिन व्यवस्था उसे उबरने नहीं देती और वह अंततः उसी गरीबी और पीड़ा में घुट-घुट कर मरने को विवश होता है।
  •  महत्वपूर्ण तथ्य
    • विचारधारा: यशपाल ‘प्रगतिवादी कहानी आंदोलन’ (मार्क्सवादी चेतना) के प्रमुख प्रतिनिधि कथाकार हैं।
    • मुख्य विषयवस्तु: वर्ग-संघर्ष (Class Struggle), आर्थिक विषमता, सामाजिक न्याय और भाग्यवादी मान्यताओं का खंडन।
    • प्रतीकात्मकता:
      • अभिशप्त‘ (शापित): यह शब्द किसी दैवीय श्राप को नहीं, बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा गरीब पर थोपी गई सामाजिक-आर्थिक लाचारी को रेखांकित करता है।
  • यशपाल के प्रमुख कहानी संग्रह: पिंजड़े की उड़ान (1939), ज्ञानदान (1943), अभिशप्त (1943), तर्क का तूफान (1944), भस्मावृत चिंगारी (1946), वो दुनिया (1948), फूलो का कुर्ता (1955), उत्तमी की मां (1955)।
  • प्रमुख कथन/संवाद विचार:
    • > “मनुष्य का दुख और उसकी गरीबी ईश्वर की देन नहीं, बल्कि समाज की विषमतापूर्ण व्यवस्था की उपज है।” (यशपाल का प्रगतिवादी दृष्टिकोण)
अभिशप्त – यशपाल JSSC Graduate Level Exams Paper -2 Hindi Notes