SCIENCE

_______ मनुष्य में उत्सर्जन अंग के रूप में कार्य नहीं करता है।

  • छोटी आंत
  • त्वचा
  • बड़ी आंत
  • फेफड़े

Explanation:

  • छोटी आंत (Small Intestine) मनुष्य में उत्सर्जन अंग (excretory organ) के रूप में कार्य नहीं करती है।
  • यह पाचन (digestion) और अवशोषण (absorption) का अंग है, उत्सर्जन का नहीं।
  • मनुष्य के मुख्य उत्सर्जन अंग:
    1. वृक्क (Kidney) – मुख्य उत्सर्जन अंग
    2. त्वचा (Skin) – पसीने के माध्यम से
    3. फेफड़े (Lungs) – CO₂ और जल वाष्प
    4. बड़ी आंत (Large Intestine) – ठोस अपशिष्ट (मल)

निम्नलिखित में से कौन-सा भाग मूत्राशय और वृक्क को जोड़ता है?

  • मूत्रमार्ग
  • नलिकाएं
  • वृक्काणु
  • मूत्रवाहिनी

Explanation:

  • मूत्रवाहिनी (Ureter) मूत्राशय और वृक्क को जोड़ती है।
  • यह एक पेशीय नली है जो वृक्क से मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती है।
  • अन्य भाग:
    • मूत्रमार्ग (Urethra) – मूत्राशय को शरीर के बाहर से जोड़ता है
    • वृक्काणु (Nephron) – वृक्क की कार्यात्मक इकाई
  • मूत्र पथ: वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग

पौधे के किस भाग में अपशिष्ट उत्पादों जैसे गोंद और रेजिन को संग्रहीत किया जाता है?

  • फल
  • कोशिकीय रिक्तिका
  • पत्तियाँ
  • पुराना जाइलम

Explanation:

  • पौधों में अपशिष्ट उत्पादों जैसे गोंद (gum) और रेजिन (resin) को पुराने जाइलम (old xylem) में संग्रहीत किया जाता है।
  • जाइलम जल और खनिजों के परिवहन के लिए होता है, लेकिन पुराना जाइलम निष्क्रिय हो जाता है और अपशिष्टों के लिए भंडारण स्थान बन जाता है।
  • अन्य भंडारण स्थान:
    • रसधानी (Vacuole) – कुछ अपशिष्ट
    • पत्तियाँ (Leaves) – कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल
    • फल (Fruits) – कुछ अपशिष्ट नहीं, बल्कि भोजन

रिक्त स्थानों की पूर्ति अंगों के सही अनुक्रम से कीजिए। मूत्र का निर्माण _______ में होता है → _______ से होकर गुजरता है → _______ में संग्रहित होता है → और अंत में _______ के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है।

  • वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग
  • मूत्रमार्ग → मूत्राशय → मूत्रवाहिनी → वृक्क
  • मूत्रवाहिनी → वृक्क → मूत्रमार्ग → मूत्राशय
  • मूत्राशय → वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्रमार्ग

Explanation:

  • मूत्र का सही प्रवाह: वृक्क (Kidney)मूत्रवाहिनी (Ureter)मूत्राशय (Urinary Bladder)मूत्रमार्ग (Urethra)
  • वृक्क – मूत्र का निर्माण (निस्पंदन, पुनः अवशोषण, निष्कासन)
  • मूत्रवाहिनी – मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक ले जाती है
  • मूत्राशय – मूत्र का संग्रह
  • मूत्रमार्ग – मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है

निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प पौधों द्वारा उत्पादित मुख्य अपशिष्ट उत्पादों को दर्शाता है?

  • CO2, O2 और जल वाष्प
  • केवल CO2 और O2
  • केवल O2 और जल वाष्प
  • केवल CO2 और जल वाष्प

Explanation:

  • पौधों द्वारा उत्पादित मुख्य अपशिष्ट उत्पाद CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड), O₂ (ऑक्सीजन) और जल वाष्प (Water Vapour) हैं।
  • CO₂ – श्वसन (respiration) का अपशिष्ट उत्पाद
  • O₂ – प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) का उपोत्पाद (by-product)
  • जल वाष्प – वाष्पोत्सर्जन (transpiration) और श्वसन से
  • पौधों में विशेष उत्सर्जन अंग नहीं होते, इसलिए ये गैसें रंध्रों (stomata) के माध्यम से बाहर निकलती हैं।

पादप द्वारा उत्पादित कई उत्सर्जन उत्पाद मनुष्यों के लिए उपयोगी होते हैं। उस उत्पाद की पहचान कीजिए जो श्वसन द्वारा अंदर लेने पर मनुष्यों के लिए हानिकारक होता है।

  • गोंद
  • रेज़िन
  • कार्बन डाइऑक्साइड
  • ऑक्सीजन

Explanation:

  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) श्वसन द्वारा अंदर लेने पर मनुष्यों के लिए हानिकारक (harmful) होता है।
  • उच्च सांद्रता में CO₂ दम घुटने, सिरदर्द और मृत्यु का कारण बन सकता है।
  • अन्य उत्सर्जन उत्पाद जो उपयोगी हैं:
    • गोंद (Gum) – औषधि और उद्योग में
    • रेज़िन (Resin) – वार्निश और औषधियों में
    • ऑक्सीजन (O₂) – श्वसन के लिए आवश्यक

मानव उत्सर्जन तंत्र का आरेख नीचे दिया गया है। उस विकल्प का चयन कीजिए जो भाग ‘a’ और ‘b’ के कार्यों को उचित रूप से दर्शाता है।

  • a – मूत्र का निर्माण, b – मूत्र को शरीर के बाहर निकालना
  • a – मूत्र का संग्रह, b – मूत्र का निर्माण
  • a – मूत्र का निर्माण, b – मूत्र का संग्रह
  • a – मूत्र का निर्माण, b – भंडारण के लिए मूत्र ले जाना

Explanation:

  • ‘a’ (वृक्क)मूत्र का निर्माण (formation of urine)
  • ‘b’ (मूत्रवाहिनी)भंडारण के लिए मूत्र ले जाना (carries urine for storage)
  • वृक्क नेफ्रॉन में निस्पंदन, पुनः अवशोषण और निष्कासन द्वारा मूत्र बनाते हैं।
  • मूत्रवाहिनी पेरिस्टाल्टिक गति द्वारा मूत्र को मूत्राशय तक पहुँचाती है।

वृक्कीय धमनी और वृक्कीय शिरे के बीच कौन-सा अपशिष्ट-आधारित मुख्य अंतर सीधे तौर पर उत्सर्जन क्रिया से संबंधित है?

  • वृक्कीय शिरे में उच्च दाब होता है।
  • वृक्कीय धमनी में अधिक कपाट होते हैं।
  • वृक्कीय धमनी में अधिक यूरिया होता है।
  • वृक्कीय शिरे में अधिक ऑक्सीजन होती है।

Explanation:

  • वृक्कीय धमनी (Renal Artery) में अधिक यूरिया (urea) होता है क्योंकि यह शरीर से अपशिष्ट लेकर वृक्क में आती है।
  • वृक्कीय शिरा (Renal Vein) में कम यूरिया होता है क्योंकि वृक्क ने अपशिष्ट को निकाल दिया है।
  • यह उत्सर्जन (excretion) का सीधा प्रमाण है।
  • वृक्कीय धमनी ऑक्सीजन युक्त रक्त लाती है, जबकि वृक्कीय शिरा ऑक्सीजन रहित रक्त ले जाती है।

निम्नलिखित में से कौन-सा एक जानवरों द्वारा उत्पन्न नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट उत्पाद नहीं है?

  • अमोनिया
  • लैक्टिक अम्ल
  • यूरिया
  • यूरिक अम्ल

Explanation:

  • लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) एक नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट उत्पाद (nitrogenous waste) नहीं है।
  • यह अवायवीय श्वसन (anaerobic respiration) का उपोत्पाद है।
  • नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट:
    • अमोनिया (Ammonia) – उभयचरों और मछलियों का मुख्य अपशिष्ट
    • यूरिया (Urea) – मनुष्यों और स्तनधारियों का मुख्य अपशिष्ट
    • यूरिक अम्ल (Uric Acid) – पक्षियों और सरीसृपों का मुख्य अपशिष्ट

वृषण, उदर गुहा के बाह्य स्थित होते हैं, जिन्हें क्या कहा जाता है?

  • मूत्राशय (Bladder)
  • मूत्रवाहिनी (Ureter)
  • वृषणकोष (Scrotum)
  • शिश्न (Penis)

Explanation:

  • वृषण (Testes) उदर गुहा के बाह्य (outside abdominal cavity) वृषणकोष (Scrotum) में स्थित होते हैं।
  • वृषणकोष शरीर के तापमान से लगभग 2-3°C कम तापमान पर वृषणों को रखता है, जो शुक्राणु निर्माण (spermatogenesis) के लिए आवश्यक है।
  • अन्य भाग:
    • मूत्राशय – मूत्र का भंडारण
    • मूत्रवाहिनी – मूत्र ले जाती है
    • शिश्न – मैथुन और मूत्र निष्कासन

निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ गुर्दे द्वारा पुनः अवशोषित नहीं होता है?

  • क्रिएटिनिन
  • लवण
  • अमीनो अम्ल
  • शर्करा

Explanation:

  • क्रिएटिनिन (Creatinine) गुर्दे द्वारा पुनः अवशोषित (reabsorbed) नहीं होता है।
  • यह मांसपेशियों के चयापचय का अपशिष्ट उत्पाद है और मूत्र में उत्सर्जित होता है।
  • गुर्दे द्वारा पुनः अवशोषित पदार्थ:
    • ग्लूकोज (शर्करा) – पूर्ण पुनः अवशोषण
    • अमीनो अम्ल (Amino acids) – पूर्ण पुनः अवशोषण
    • लवण (Salts) – आंशिक पुनः अवशोषण
    • जल (Water) – 99% पुनः अवशोषण

कृत्रिम गुर्दे का उपयोग करके नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट को समाप्त करने की प्रक्रिया को ______ कहा जाता है।

  • एंजियोग्राम
  • राइनोप्लास्टी
  • प्रत्यारोपण
  • हेमोडायलिसिस

Explanation:

  • कृत्रिम गुर्दा (Artificial Kidney) का उपयोग करके नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट को समाप्त करने की प्रक्रिया को हेमोडायलिसिस (Hemodialysis) कहा जाता है।
  • इसमें डायलाइज़र (Dialyzer) नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है।
  • यह अर्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) के माध्यम से काम करता है।
  • अन्य चिकित्सा प्रक्रियाएँ:
    • एंजियोग्राम – रक्त वाहिकाओं की जाँच
    • राइनोप्लास्टी – नाक की सर्जरी
    • प्रत्यारोपण – अंग का स्थानांतरण

निम्नलिखित में से कौन-सी संरचना गुर्दों में कुंडलित नली के एक छोर पर कप के आकार की होती है?

  • संग्राहक वाहिनी (Collecting duct)
  • हेनली लूप (Loop of Henle)
  • बोमन-संपुट (Bowman’s capsule)
  • केशिका गुच्छ (Glomerulus)

Explanation:

  • बोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) गुर्दों में कुंडलित नली के एक छोर पर कप के आकार (cup-shaped) की संरचना है।
  • यह ग्लोमेरुलस (Glomerulus) को घेरता है और साथ मिलकर वृक्काणु (Malpighian body/renal corpuscle) बनाते हैं।
  • अन्य संरचनाएँ:
    • ग्लोमेरुलस – केशिकाओं का गुच्छ (निस्पंदन)
    • हेनली लूप – जल और लवणों का पुनः अवशोषण
    • संग्राहक वाहिनी – मूत्र का संग्रह

पादप अपने अपशिष्ट उत्पादों को किन विभिन्न भागों में संग्रहित करते हैं?

  • पत्तियों, लयनकाय (लाइसोसोम) और अवर्णीलवक (ल्यूकोप्लास्ट)
  • लयनकाय (लाइसोसोम), फल और अवर्णीलवक (ल्यूकोप्लास्ट)
  • रसधानी, वल्क और लयनकाय (लाइसोसोम)
  • पुरानी जाइलम, फल और रसधानी

Explanation:

  • पादप अपने अपशिष्ट उत्पादों को रसधानी (Vacuole), वल्क (Bark) और लयनकाय (Lysosome) में संग्रहित करते हैं।
  • रसधानी – कई अपशिष्टों का भंडारण
  • वल्क – कुछ अपशिष्ट (जैसे गोंद, रेजिन)
  • लयनकाय – कोशिकीय अपशिष्टों का विघटन
  • अन्य भंडारण स्थान:
    • पत्तियाँ – कैल्शियम ऑक्सालेट (गिरने पर उत्सर्जित)
    • पुराना जाइलम – गोंद, रेजिन

पौधे किस प्रक्रिया द्वारा अतिरिक्त जल को बाहर निकालते हैं?

  • वाष्पोत्सर्जन
  • परिवहन
  • स्थानांतरण
  • प्रकाश संश्लेषण

Explanation:

  • पौधे वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा अतिरिक्त जल को बाहर निकालते हैं।
  • यह पत्तियों के रंध्रों (stomata) के माध्यम से जल वाष्प के रूप में होता है।
  • अन्य प्रक्रियाएँ:
    • परिवहन (Transport) – पदार्थों का स्थानांतरण
    • स्थानांतरण (Translocation) – फ्लोएम द्वारा भोजन का परिवहन
    • प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) – भोजन का निर्माण
  • वाष्पोत्सर्जन जल अवशोषण और ताप नियमन में भी सहायक है।

सामान्यतः, एक स्वस्थ वयस्क में, वृक्क में प्रारंभिक निस्यंदन प्रतिदिन लगभग ______ होता है।

  • 130 L
  • 150 L
  • 160 L
  • 180 L

Explanation:

  • एक स्वस्थ वयस्क में, वृक्क में प्रारंभिक निस्यंदन (initial filtration) प्रतिदिन लगभग 180 लीटर (180 L) होता है।
  • यह ग्लोमेरुलर निस्यंदन दर (GFR) का संकेत है।
  • हालाँकि, 99% जल पुनः अवशोषित हो जाता है।
  • अंतिम मूत्र उत्सर्जन केवल 1-2 लीटर प्रतिदिन होता है।

मानव शरीर में ग्लोमेरुलस कहाँ पाया जाता है?

  • अस्थि मज्जा में
  • गर्भाशय में
  • गुर्दे में
  • यकृत में

Explanation:

  • ग्लोमेरुलस (Glomerulus) गुर्दे (Kidney) में पाया जाता है।
  • यह केशिकाओं (capillaries) का एक गुच्छा है जो बोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) के अंदर स्थित होता है।
  • यह रक्त का निस्पंदन (blood filtration) करता है।
  • ग्लोमेरुलस और बोमन-संपुट मिलकर माल्पीघी काय (Malpighian body) बनाते हैं।

गुर्दे में मूत्र का निर्माण निम्नलिखित में से किस क्रम में तीन प्रक्रियाओं में शामिल होता है?

  • निस्पंदन, निष्कासन, चयनात्मक पुनः अवशोषण
  • निस्पंदन, चयनात्मक पुनः अवशोषण, निष्कासन
  • चयनात्मक पुनः अवशोषण, निस्पंदन, निष्कासन
  • चयनात्मक पुनः अवशोषण, निष्कासन, निस्पंदन

Explanation:

  • गुर्दे में मूत्र निर्माण की तीन प्रक्रियाएँ सही क्रम में:
    1. निस्पंदन (Filtration) – ग्लोमेरुलस में रक्त का निस्पंदन
    2. चयनात्मक पुनः अवशोषण (Selective Reabsorption) – उपयोगी पदार्थों का पुनः अवशोषण
    3. निष्कासन (Secretion) – अतिरिक्त अपशिष्टों का निष्कासन
  • यह नेफ्रॉन में होता है, जो वृक्क की कार्यात्मक इकाई है।

मनुष्यों में निम्नलिखित में से कौन घुलनशील नाइट्रोजन यौगिकों के रूप में उत्सर्जी पदार्थों को हटाता है?

  • वृक्काणु
  • मूत्रमार्ग
  • मूत्राशय
  • ऊर्ध्वाधर केशनली

Explanation:

  • वृक्काणु (Nephron) मनुष्यों में घुलनशील नाइट्रोजन यौगिकों (जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रिएटिनिन) के रूप में उत्सर्जी पदार्थों को हटाता है।
  • वृक्काणु वृक्क की कार्यात्मक इकाई (functional unit) है।
  • प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं।
  • अन्य संरचनाएँ केवल परिवहन और भंडारण में सहायक हैं।

पौधे अपने अपशिष्ट उत्पादों का उत्सर्जन कैसे करते हैं?

  • सभी अपशिष्टों को ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित करके
  • नेफ्रॉन नामक विशेष उत्सर्जक अंगों के माध्यम से उन्हें मुक्त करके
  • उन्हें रिक्तिकाओं में संग्रहीत करके या गिरती पत्तियों और रेजिन के माध्यम से उत्सर्जित करके
  • केवल मूल रोमों के माध्यम से सीधे अपशिष्टों को हटाकर

Explanation:

  • पौधों में विशेष उत्सर्जन अंग (excretory organs) नहीं होते हैं।
  • वे अपशिष्टों को:
    1. रिक्तिकाओं (vacuoles) में संग्रहीत करते हैं
    2. गिरती पत्तियों (falling leaves) के माध्यम से उत्सर्जित करते हैं
    3. रेजिन (resin) और गोंद (gum) के रूप में उत्सर्जित करते हैं
    4. वल्क (bark) में संग्रहीत करते हैं
  • गैसीय अपशिष्ट रंध्रों (stomata) के माध्यम से बाहर निकलते हैं।

मानव शरीर में उत्सर्जन तंत्र का सही क्रम पहचानें।

  • गुर्दा, मूत्राशय, मूत्रवाहिनी, मूत्रमार्ग
  • गुर्दा, मूत्रमार्ग, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय
  • गुर्दा, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय, मूत्रमार्ग
  • गुर्दा, मूत्रवाहिनी, मूत्रमार्ग, मूत्राशय

Explanation:

  • मानव उत्सर्जन तंत्र का सही क्रम: गुर्दा (Kidney)मूत्रवाहिनी (Ureter)मूत्राशय (Urinary Bladder)मूत्रमार्ग (Urethra)
  • यह मूत्र का प्रवाह (flow of urine) है।
  • गुर्दा मूत्र बनाता है, मूत्रवाहिनी ले जाती है, मूत्राशय संग्रहित करता है, मूत्रमार्ग बाहर निकालता है

आम तौर पर, एक स्वस्थ वयस्क में, वृक्क में प्रारंभिक निस्यंदन प्रतिदिन लगभग 180 लीटर होता है। हालाँकि, वास्तव में उत्सर्जित मात्रा केवल है:

  • प्रतिदिन 1 या 2 लीटर
  • 2 या 3 लीटर
  • प्रतिदिन 3 या 3.5 लीटर
  • प्रतिदिन 2 या 3.5 लीटर

Explanation:

  • हालाँकि वृक्क में प्रारंभिक निस्यंदन (initial filtration) प्रतिदिन 180 लीटर होता है, लेकिन वास्तव में उत्सर्जित (actually excreted) मात्रा केवल 1 या 2 लीटर प्रतिदिन होती है।
  • 99% जल और अन्य उपयोगी पदार्थ पुनः अवशोषित (reabsorbed) हो जाते हैं।
  • मूत्र की मात्रा जल सेवन, तापमान और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है।

बोमन संपुट ______ को घेरता है।

  • पट्टिकाणु
  • नेफ्रॉन
  • न्यूरॉन
  • ग्लोमेरुलस

Explanation:

  • बोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) ग्लोमेरुलस (Glomerulus) को घेरता है।
  • बोमन-संपुट कप के आकार की संरचना है।
  • ये दोनों मिलकर वृक्काणु (Malpighian body/renal corpuscle) बनाते हैं।
  • ग्लोमेरुलस रक्त के निस्पंदन का कार्य करता है, जबकि बोमन-संपुट निस्यंदन (filtrate) को एकत्रित करता है।

निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

  • मानव उत्सर्जन तंत्र में एक जोड़ी वृक्क, एक जोड़ी मूत्रवाहिनी, एक मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग होते हैं।
  • प्रत्येक वृक्क में अधिक संख्या में निस्यंदन इकाइयाँ होती हैं जिन्हें न्यूरॉन कहा जाता है जो एक-साथ संकुलित होती हैं।
  • आम तौर पर, एक स्वस्थ वयस्क में, वृक्क में प्रारंभिक निस्यंदन प्रतिदिन लगभग 180 लीटर होता है।
  • वृक्क उदर में, रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर एक-एक स्थित होते हैं।

Explanation:

  • प्रत्येक वृक्क में अधिक संख्या में निस्यंदन इकाइयाँ होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन (Nephron) कहा जाता है, न्यूरॉन (Neuron) नहीं। यह कथन गलत है।
  • न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र (nervous system) की इकाई है।
  • प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं।
  • शेष कथन सही हैं।

मानव गुर्दे में निस्यंदन इकाइयाँ ______ के रूप में जानी जाती हैं।

  • नेफ्रॉन
  • प्रोटॉन
  • न्यूरॉन
  • न्यूक्लियॉन

Explanation:

  • मानव गुर्दे में निस्यंदन इकाइयाँ (filtration units) नेफ्रॉन (Nephrons) के रूप में जानी जाती हैं।
  • नेफ्रॉन गुर्दे की कार्यात्मक इकाई (functional unit of kidney) है।
  • प्रत्येक नेफ्रॉन में बोमन-संपुट, ग्लोमेरुलस, समीपस्थ कुंडलित नलिका, हेनली लूप, दूरस्थ कुंडलित नलिका और संग्राहक वाहिनी होते हैं।
  • अन्य शब्द:
    • प्रोटॉन – परमाणु का कण
    • न्यूरॉन – तंत्रिका कोशिका
    • न्यूक्लियॉन – परमाणु नाभिक का कण

वृक्कों में बनने वाला मूत्र ______ से होकर ______ में जाता है, जहाँ यह उत्सर्जित किए जाने तक संग्रहित रहता है।

  • मूत्राशय; मूत्रमार्ग (urinary bladder; urethra)
  • मूत्रवाहिनी; मूत्राशय (ureters; urinary bladder)
  • नेफ्रॉन; मूत्रमार्ग (nephrons; urethra)
  • मूत्रमार्ग; मूत्रवाहिनी (urethra; ureters)

Explanation:

  • वृक्कों में बनने वाला मूत्र मूत्रवाहिनी (ureters) से होकर मूत्राशय (urinary bladder) में जाता है।
  • मूत्राशय मूत्र को उत्सर्जित किए जाने तक संग्रहित करता है।
  • मूत्र का सही प्रवाह: वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग
  • मूत्राशय एक पेशीय थैली है जो लगभग 400-600 mL मूत्र संग्रहित कर सकती है।

बोमन संपुट मानव शरीर में कहाँ स्थित होता है?

  • फेफड़े
  • आमाशय
  • यकृत
  • वृक्क

Explanation:

  • बोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) मानव शरीर में वृक्क (kidney) में स्थित होता है।
  • यह ग्लोमेरुलस को घेरने वाली कप के आकार की संरचना है।
  • बोमन-संपुट और ग्लोमेरुलस मिलकर वृक्काणु (renal corpuscle/Malpighian body) बनाते हैं।
  • बोमन-संपुट निस्यंदन (filtration) की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

‘यूरिया चक्र’ मानव के ________ में होता है।

  • अग्नाशय
  • फेफड़े
  • वृक्क
  • यकृत

Explanation:

  • ‘यूरिया चक्र’ (Urea Cycle) मानव के यकृत (liver) में होता है।
  • इसे ऑर्निथिन चक्र (Ornithine Cycle) भी कहा जाता है।
  • इस चक्र में अमोनिया (NH₃) को यूरिया में परिवर्तित किया जाता है, जो कम विषैला (less toxic) होता है।
  • यह प्रक्रिया अमोनिया विषाक्तता से बचने के लिए आवश्यक है।

एक वयस्क मानव मूत्र में होता है:

  • 95% जल, 2.0% यूरिया और 2.0% अमोनिया
  • 85% जल, 2.5% यूरिया और 2.5% अमोनिया
  • 95% जल, 2.5% यूरिया और 2.5% अन्य अपशिष्ट उत्पाद
  • 85% जल, 2.0% यूरिया और 2.0% क्रिएटिनिन

Explanation:

  • एक वयस्क मानव मूत्र में 95% जल (water), 2.5% यूरिया (urea) और 2.5% अन्य अपशिष्ट उत्पाद (other waste products) होते हैं।
  • अन्य अपशिष्ट उत्पादों में शामिल हैं:
    • क्रिएटिनिन (Creatinine)
    • यूरिक अम्ल (Uric acid)
    • लवण (Salts)
    • अमोनिया (Ammonia) – बहुत कम मात्रा में
  • मूत्र का pH सामान्यतः 4.5-8.0 के बीच होता है।

पौधों में उत्सर्जन की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

  • अपशिष्ट उत्पाद पुराने जाइलम में रेजिन और गोंद के रूप में संग्रहीत होते हैं।
  • अपशिष्ट उत्पाद गिरने वाली पत्तियों में संग्रहित होते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण का अपशिष्ट उत्पाद स्टार्च के रूप में संग्रहित होता है।
  • अपशिष्ट उत्पाद कोशिकीय रिक्तिकाओं में संग्रहित होते हैं।

Explanation:

  • प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) का अपशिष्ट उत्पाद ऑक्सीजन (O₂) है, स्टार्च (starch) नहीं। यह कथन गलत है।
  • स्टार्च भोजन (food) का संग्रहित रूप है, अपशिष्ट नहीं।
  • पौधों में अपशिष्टों के संग्रहण स्थान:
    • पुराना जाइलम – रेजिन, गोंद
    • गिरती पत्तियाँ – कैल्शियम ऑक्सालेट
    • कोशिकीय रिक्तिकाएँ – विभिन्न अपशिष्ट

जलीय जीव, जैसे मछलियाँ, निम्नलिखित में से किस रूप में अपशिष्ट उत्सर्जित करती हैं?

  • यूरिया
  • अमोनिया
  • यूरिक अम्ल
  • पसीने के लवण

Explanation:

  • जलीय जीव (जैसे मछलियाँ) अपशिष्ट को अमोनिया (Ammonia) के रूप में उत्सर्जित करती हैं।
  • अमोनिया अत्यधिक विषैला (highly toxic) होता है, लेकिन पानी में आसानी से घुल जाता है
  • जलीय जीवों को अमोनिया को पतला (dilute) करने के लिए बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
  • अन्य जीवों के उत्सर्जन उत्पाद:
    • यूरिया – स्तनधारी, मनुष्य
    • यूरिक अम्ल – पक्षी, सरीसृप

किडनी की संरचनात्मक इकाई है-

  • न्यूरॉन
  • साइटोन
  • कीटोन
  • नेफ्रॉन

Explanation:

  • गुर्दे (Kidney) की संरचनात्मक इकाई (structural unit) नेफ्रॉन (Nephron) है।
  • प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख (1 million) नेफ्रॉन होते हैं।
  • नेफ्रॉन मूत्र के निर्माण (निस्पंदन, पुनः अवशोषण, निष्कासन) में शामिल है।
  • अन्य शब्द:
    • न्यूरॉन – तंत्रिका तंत्र की इकाई
    • कीटोन – कार्बनिक यौगिक
    • साइटोन – कोशिका द्रव्य

निम्नलिखित में से कौन सा मानव उत्सर्जन तंत्र के बारे में सही नहीं है?

  • मूत्रमार्ग – एक युग्म
  • वृक्क – एक युग्म
  • मूत्रवाहिनी – एक युग्म
  • मूत्राशय – अयुग्मित

Explanation:

  • मूत्रमार्ग (Urethra) एक (single) होता है, युग्म (pair) नहीं। यह कथन सही नहीं है।
  • मानव उत्सर्जन तंत्र में:
    • वृक्क (Kidney) – एक युग्म (2)
    • मूत्रवाहिनी (Ureter) – एक युग्म (2)
    • मूत्राशय (Urinary Bladder) – अयुग्मित (1)
    • मूत्रमार्ग (Urethra) – अयुग्मित (1) (पुरुषों में लंबा, महिलाओं में छोटा)

हमारे शरीर से हानिकारक उपापचय अपशिष्टों को हटाने की जैविक प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

  • मलत्याग
  • परिवहन
  • स्रावण
  • उत्सर्जन

Explanation:

  • हमारे शरीर से हानिकारक उपापचय अपशिष्टों (harmful metabolic wastes) को हटाने की जैविक प्रक्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहते हैं।
  • मुख्य उत्सर्जन अंग: वृक्क, त्वचा, फेफड़े, बड़ी आंत
  • अन्य प्रक्रियाएँ:
    • मलत्याग (Egestion/Defecation) – अपाच्य भोजन का निष्कासन
    • परिवहन (Transport) – पदार्थों का स्थानांतरण
    • स्रावण (Secretion) – उपयोगी पदार्थों का स्राव

नेफ्रॉन का कौन सा भाग रक्त से प्रारंभिक निस्यंदन एकत्र करता है?

  • ग्लोमेरुलस
  • बोमन कैप्सूल
  • संग्रह नलिका
  • वृक्क शिरा

Explanation:

  • नेफ्रॉन का बोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) रक्त से प्रारंभिक निस्यंदन (initial filtrate) एकत्र करता है।
  • ग्लोमेरुलस रक्त का निस्पंदन करता है, और बोमन-संपुट इस निस्यंदन को एकत्रित करता है।
  • बोमन-संपुट में एकत्रित तरल को ग्लोमेरुलर निस्यंद (glomerular filtrate) कहते हैं।
  • यह निस्यंदन उच्च दाब (high pressure) के तहत होता है।

एक पौधा संग्रहीत अपशिष्ट उत्पादों को निष्कासित करने के लिए अपने पत्ते और छाल गिरा देता है। यह विधि जंतुओं द्वारा अपशिष्ट उत्सर्जित करने की विधि से कैसे अलग है?

  • जंतुओं के विपरीत, पौधे उत्सर्जन के लिए रक्त परिसंचरण का उपयोग करते हैं।
  • जंतुओं के विपरीत, पौधे अपशिष्ट उत्सर्जित करने के लिए पाचन तंत्र का उपयोग करते हैं।
  • जंतुओं के विपरीत, पौधों में अपशिष्ट उत्सर्जन के लिए एक ही अंग प्रणाली होती है।
  • पौधे उन भागों का उपयोग करते हैं जिन्हें त्यागा जाएगा, जबकि जंतुओं में उत्सर्जन के लिए विशेष अंग होते हैं।

Explanation:

  • पौधे उन भागों (parts) का उपयोग करते हैं जिन्हें त्यागा जाएगा (जैसे गिरती पत्तियाँ, छाल), जबकि जंतुओं में उत्सर्जन के लिए विशेष अंग (specialized organs) होते हैं।
  • पौधों के उत्सर्जन के तरीके:
    1. पत्तियों का गिरना – कैल्शियम ऑक्सालेट आदि
    2. छाल का गिरना – गोंद, रेजिन
    3. रंध्रों के माध्यम से – गैसीय अपशिष्ट
  • जंतुओं के उत्सर्जन अंग: वृक्क, फेफड़े, त्वचा, यकृत आदि।

जलीय जीवों का उत्सर्जन उत्पाद क्या होता है?

  • क्रिएटिनिन
  • अमोनिया
  • यूरिया
  • यूरिक एसिड

Explanation:

  • जलीय जीवों (जैसे मछलियाँ) का उत्सर्जन उत्पाद (excretory product) अमोनिया (Ammonia) होता है।
  • अमोनिया अत्यधिक विषैला (highly toxic) होता है, लेकिन पानी में आसानी से घुल जाता है
  • जलीय जीव अमोनियोटेलिक (ammoniotelic) जीव कहलाते हैं।
  • अन्य जीव:
    • यूरियोटेलिक (Ureotelic) – मनुष्य, स्तनधारी (यूरिया)
    • यूरिकोटेलिक (Uricotelic) – पक्षी, सरीसृप (यूरिक अम्ल)

कृत्रिम गुर्दे द्वारा रक्त से यूरिया कैसे हटाई जाती है?

  • अवशोषण द्वारा
  • निस्यंदन द्वारा
  • एंजाइम क्रिया द्वारा
  • परासरण द्वारा

Explanation:

  • कृत्रिम गुर्दा (Artificial Kidney) रक्त से यूरिया को निस्यंदन (filtration) द्वारा हटाता है।
  • इसे हेमोडायलिसिस (Hemodialysis) कहते हैं।
  • रक्त एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) से होकर गुजरता है, जिससे अपशिष्ट बाहर निकल जाते हैं।
  • यह प्रक्रिया विसरण (diffusion) और निस्यंदन (filtration) पर आधारित है।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, कृत्रिम वृक्क में अपोहन (dialysis) के कार्य सिद्धांत की सही व्याख्या करता है?

  • अपोहन अर्धपारगम्य झिल्ली के पार विसरण द्वारा रक्त से अपशिष्ट पदार्थ को हटाता है।
  • अपोहन सक्रिय परिवहन द्वारा रक्त से नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थ को हटाता है।
  • अपोहन उच्च दाब का उपयोग करके अपशिष्ट पदार्थ को रक्त से अपोहन-तरल में बाहर निकालता है।
  • अपोहन एक सामान्य वृक्क की भांति आवश्यक पोषक तत्वों तथा लवणों को पुनः अवशोषित करता है।

Explanation:

  • अपोहन (Dialysis) अर्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) के पार विसरण (diffusion) द्वारा रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को हटाता है। यह कथन सही है।
  • अपोहन में सक्रिय परिवहन (active transport) शामिल नहीं है।
  • अपोहन पुनः अवशोषण (reabsorption) नहीं करता, केवल अपशिष्टों को हटाता है।
  • डायलाइज़र (Dialyzer) कृत्रिम वृक्क का मुख्य घटक है।

एक वयस्क मनुष्य 24 घंटे में मूत्र की कितनी औसत मात्रा का उत्पादन करता है?

  • 1.5-2.5 लीटर
  • 1.5-2 लीटर
  • 1-1.5 लीटर
  • 1-1.8 लीटर

Explanation:

  • एक वयस्क मनुष्य 24 घंटे में मूत्र की औसतन 1.5-2.5 लीटर (1.5-2.5 L) मात्रा का उत्पादन करता है।
  • यह मात्रा जल सेवन, तापमान, शारीरिक गतिविधि और भोजन पर निर्भर करती है।
  • वृक्क में प्रारंभिक निस्यंदन लगभग 180 L/दिन होता है, लेकिन 99% पुनः अवशोषित हो जाता है।
  • मूत्र की विशिष्ट गुरुत्व (specific gravity) 1.003-1.035 के बीच होती है।

______ का प्राथमिक उत्सर्जित उत्पाद यूरिक अम्ल है।

  • मछली
  • गाय
  • पक्षी
  • मानव

Explanation:

  • पक्षी (Birds) का प्राथमिक उत्सर्जित उत्पाद (primary excretory product) यूरिक अम्ल (Uric acid) है।
  • यूरिक अम्ल अर्ध-ठोस (semi-solid) होता है और इसे उत्सर्जित करने के लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है।
  • यह पक्षियों, सरीसृपों और कुछ कीड़ों का उत्सर्जन उत्पाद है।
  • अन्य जीवों के उत्सर्जन उत्पाद:
    • मछली – अमोनिया
    • गाय/मानव – यूरिया

निम्नलिखित में से कौन सा स्थल संयंत्रों में अपशिष्ट उत्पादों के भंडारण के लिए उपयोग किया जाता है?

  • रक्षक कोशिकाएँ
  • मूल रोम
  • फ्लोएम फाइबर
  • पुराना जाइलम

Explanation:

  • पुराना जाइलम (Old Xylem) पौधों में अपशिष्ट उत्पादों (waste products) के भंडारण के लिए उपयोग किया जाता है।
  • इसमें रेजिन (resin) और गोंद (gum) जैसे अपशिष्ट संग्रहित होते हैं।
  • अन्य संरचनाएँ:
    • रक्षक कोशिकाएँ (Guard cells) – रंध्रों को नियंत्रित करती हैं
    • मूल रोम (Root hairs) – जल और खनिज अवशोषण
    • फ्लोएम फाइबर (Phloem fibers) – सहायक ऊतक

एक 20 सेमी लंबी नली है, जो मूत्राशय से मूत्र ले जाती है।

  • मूत्रवाहिनी
  • मूत्रमार्ग
  • वृक्क
  • वृषण

Explanation:

  • मूत्रमार्ग (Urethra) एक 20 सेमी लंबी नली है जो मूत्राशय से मूत्र को शरीर के बाहर ले जाती है।
  • पुरुषों में मूत्रमार्ग 20-25 सेमी लंबा होता है, जबकि महिलाओं में 3-4 सेमी
  • मूत्रवाहिनी (Ureter) लगभग 25-30 सेमी लंबी होती है और वृक्क को मूत्राशय से जोड़ती है।

निम्नलिखित में से कौन से पदार्थ मानव गुर्दों में नेफ्रॉन के नलिकाकार भाग द्वारा प्रारंभिक निस्यंद से चुनिंदा रूप से पुनः अवशोषित होते हैं?

  • लवण, ग्लूकोज, वसा और जल
  • ग्लूकोज, जल, अमीनो अम्ल और प्रोटीन
  • ग्लूकोज, जल, लवण और अमीनो अम्ल
  • जल, ग्लूकोज, लवण और प्रोटीन

Explanation:

  • नेफ्रॉन के नलिकाकार भाग (tubular part) द्वारा ग्लूकोज (glucose), जल (water), लवण (salts) और अमीनो अम्ल (amino acids) को प्रारंभिक निस्यंदन से चुनिंदा रूप से पुनः अवशोषित (selectively reabsorbed) किया जाता है।
  • ग्लूकोज और अमीनो अम्ल का पूर्ण (100%) पुनः अवशोषण होता है।
  • जल का लगभग 99% पुनः अवशोषण होता है।
  • प्रोटीन (Protein) और वसा (Fat) सामान्यतः निस्यंदन में नहीं आते (बड़े अणु होने के कारण)।

हेमोडायलिसिस में टैंक में निलंबित अर्ध-पारगम्य आवरण वाली कई ट्यूबें होती हैं जिनमें तरल पदार्थ होता है जो ________ होता है।

  • रक्त के समान संरचना, सिवाय इसके कि इसमें अधिक हेपरिन होता है
  • रक्त के समान परासरण दाब और नाइट्रोजन युक्त अपशिष्टों से रहित
  • गुर्दे के निस्यंद के समान संरचना वाला
  • अणुओं की गति को सक्षम करने के लिए कम परासरण दाब

Explanation:

  • हेमोडायलिसिस में टैंक में तरल पदार्थ रक्त के समान परासरण दाब (same osmotic pressure) और नाइट्रोजन युक्त अपशिष्टों से रहित (nitrogenous waste-free) होता है।
  • इसे डायलाइज़िंग द्रव (dialysing fluid) कहते हैं।
  • यह अर्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) के माध्यम से विसरण (diffusion) की अनुमति देता है।
  • डायलाइज़िंग द्रव में नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट नहीं होते, जिससे वे रक्त से बाहर निकल जाते हैं।

मानव शरीर में मूत्र बनाने का क्या उद्देश्य है?

  • मूत्राशय को खाली करना
  • रक्त से अपशिष्ट उत्पादों को छानना
  • हृदय में आने वाले अशुद्ध रक्त को साफ करना
  • फेफड़ों में रक्त से CO2 को निकालना

Explanation:

  • मानव शरीर में मूत्र बनाने का मुख्य उद्देश्य रक्त से अपशिष्ट उत्पादों (waste products) को छानना (filtering) है।
  • वृक्क रक्त से यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रिएटिनिन आदि अपशिष्टों को हटाते हैं।
  • यह प्रक्रिया जल और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन भी बनाए रखती है।
  • CO₂ का निष्कासन फेफड़े करते हैं, वृक्क नहीं।

एक सामान्य वयस्क मानव प्रतिदिन लगभग ____ mL मूत्र का उत्पादन करता है।

  • 100 – 200
  • 10 – 20
  • 10000 – 20000
  • 1000 – 2000

Explanation:

  • एक सामान्य वयस्क मानव प्रतिदिन लगभग 1000-2000 mL (1-2 L) मूत्र का उत्पादन करता है।
  • यह मात्रा जल सेवन, शारीरिक गतिविधि और तापमान पर निर्भर करती है।
  • ओलिगुरिया (Oliguria) – कम मूत्र उत्पादन (< 400 mL/दिन)
  • पॉलीयूरिया (Polyuria) – अधिक मूत्र उत्पादन (> 2500 mL/दिन)

मूत्र में जल की मात्रा ____ होती है।

  • 83%
  • 95%
  • 68%
  • 79%

Explanation:

  • मूत्र में जल (water) की मात्रा 95% होती है।
  • शेष 5% में यूरिया (2.5%) और अन्य अपशिष्ट (2.5%) होते हैं।
  • मूत्र का रंग, गंध और घनत्व इसमें मौजूद अन्य घटकों पर निर्भर करता है।
  • यूरोक्रोम (Urochrome) मूत्र को पीला रंग देता है।

नीचे मानव उत्सर्जन तंत्र का आरेख दिया गया है। उस विकल्प का चयन कीजिए जो भाग ‘a’ और ‘b’ के कार्यों को सही ढंग से दर्शाता है।

  • a – मूत्र का निर्माण, b – मूत्र का संग्रह
  • a – मूत्र का निर्माण, b – मूत्र को भंडारण के लिए ले जाना
  • a – मूत्र का बनना, b – मूत्र को शरीर से बाहर निकालना
  • a – मूत्र का संग्रह, b – मूत्र निर्माण करना

Explanation:

  • ‘a’ (वृक्क)मूत्र का निर्माण (urine formation)
  • ‘b’ (मूत्रवाहिनी)मूत्र को भंडारण के लिए ले जाना (carries urine for storage)
  • वृक्क नेफ्रॉन में मूत्र का निर्माण करता है।
  • मूत्रवाहिनी मूत्राशय तक मूत्र पहुँचाती है।

मानव उत्सर्जन तंत्र के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा गलत ढंग से सुमेलित है?

  • मूत्रवाहिनी – युग्म
  • वृक्क – युग्म
  • मूत्राशय – अयुग्म
  • मूत्रमार्ग – युग्म

Explanation:

  • मूत्रमार्ग (Urethra) युग्म (paired) नहीं है, यह अयुग्मित (unpaired/single) है। यह गलत सुमेलित है।
  • मानव उत्सर्जन तंत्र में:
    • वृक्क (Kidney) – युग्म ✓
    • मूत्रवाहिनी (Ureter) – युग्म ✓
    • मूत्राशय (Urinary Bladder) – अयुग्म ✓
    • मूत्रमार्ग (Urethra) – अयुग्म (1) ✗

छोटी आंत में विलाई के कार्य से संबंधित सही विकल्प का चयन करें।

  • खनिजों का स्राव
  • अवशोषण सतह क्षेत्र में वृद्धि
  • अम्ल से सुरक्षा
  • मलत्याग में सहायता

Explanation:

  • विलाई (Villi) छोटी आंत में अवशोषण सतह क्षेत्र (absorption surface area) को बढ़ाते हैं।
  • ये उंगली जैसी (finger-like) संरचनाएँ हैं जो पोषक तत्वों (nutrients) के अवशोषण को बढ़ाती हैं।
  • विलाई रक्त केशिकाओं (blood capillaries) और लैक्टियल (lacteals – लसीका वाहिकाएँ) से युक्त होते हैं।
  • ये ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल और विटामिन के अवशोषण में सहायक होते हैं।

निम्नलिखित आकृति एक मानव नेफ्रॉन को दर्शाती है। इसका कौन-सा भाग संग्रहण वाहिनी है?

  • क्षेत्र a
  • क्षेत्र c
  • क्षेत्र b
  • क्षेत्र d

Explanation:

  • नेफ्रॉन में संग्रहण वाहिनी (Collecting Duct) क्षेत्र ‘a’ है।
  • संग्रहण वाहिनी कई नेफ्रॉनों से मूत्र एकत्र करती है और इसे वृक्क श्रोणि (renal pelvis) तक ले जाती है।
  • यह जल और लवणों के पुनः अवशोषण में भी सहायक है।
  • संग्रहण वाहिनी का कार्य ADH (Antidiuretic Hormone) द्वारा नियंत्रित होता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा मानव उत्सर्जन तंत्र का गठन करता है?

  • एक युग्म वृक्क, एक युग्म मूत्रवाहिनी, एक मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग
  • एक युग्म वृक्क, एक मूत्रवाहिनी, एक मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग
  • एक युग्म वृक्क, एक मूत्राशय, एक मूत्रवाहिनी और एक युग्म मूत्रमार्ग
  • एक वृक्क, एक मूत्रवाहिनी, एक युग्म मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग

Explanation:

  • मानव उत्सर्जन तंत्र में एक युग्म वृक्क (pair of kidneys), एक युग्म मूत्रवाहिनी (pair of ureters), एक मूत्राशय (one urinary bladder) और एक मूत्रमार्ग (one urethra) होता है।
  • यह सही संरचना है:
    1. वृक्क – 2 (युग्म)
    2. मूत्रवाहिनी – 2 (युग्म)
    3. मूत्राशय – 1 (अयुग्म)
    4. मूत्रमार्ग – 1 (अयुग्म)

नीचे दिए गए चित्र में कौन सा अक्षर बोमन संपुट क्षेत्र को दर्शाता है?

  • क्षेत्र a
  • क्षेत्र b
  • क्षेत्र c
  • क्षेत्र d

Explanation:

  • नेफ्रॉन में बोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) क्षेत्र ‘a’ है।
  • बोमन-संपुट ग्लोमेरुलस को घेरने वाली कप के आकार की संरचना है।
  • यह प्रारंभिक निस्यंदन (initial filtrate) को एकत्रित करता है।
  • बोमन-संपुट और ग्लोमेरुलस मिलकर माल्पीघी काय (Malpighian body) बनाते हैं।

हम ______ के रूप में पेशाब करने की इच्छा को नियंत्रित कर सकते हैं।

  • पेशीय मूत्राशय तंत्रिका नियंत्रण में है
  • मूत्राशय आसानी से नहीं भरता
  • स्फिंक्टर पेशी मूत्राशय और मूत्रमार्ग के बीच मौजूद होती है
  • मूत्राशय कम पानी से भर जाता है

Explanation:

  • हम पेशीय मूत्राशय (muscular urinary bladder) के तंत्रिका नियंत्रण (nervous control) में होने के कारण पेशाब करने की इच्छा को नियंत्रित कर सकते हैं।
  • मूत्राशय स्फिंक्टर पेशियों (sphincter muscles) से युक्त होता है जो ऐच्छिक (voluntary) नियंत्रण में होती हैं।
  • आंतरिक स्फिंक्टर – अनैच्छिक (involuntary)
  • बाह्य स्फिंक्टर – ऐच्छिक (voluntary)

स्तनधारियों में वृक्क की तरह पौधों में परिभाषित उत्सर्जन तंत्र का अभाव क्यों होता है?

  • क्योंकि पौधे अपशिष्ट पदार्थों का उत्पादन नहीं करते हैं
  • क्योंकि पौधे केवल गैसीय अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं जो फैलकर बाहर निकल जाते हैं
  • वे अपने वानस्पतिक भागों के माध्यम से उत्सर्जन करते हैं
  • क्योंकि पौधों में परिसंचरण तंत्र का अभाव होता है

Explanation:

  • पौधों में परिभाषित उत्सर्जन तंत्र का अभाव होता है क्योंकि वे अपने वानस्पतिक भागों (vegetative parts) के माध्यम से उत्सर्जन करते हैं।
  • पौधों के उत्सर्जन के तरीके:
    1. पत्तियों का गिरना – कैल्शियम ऑक्सालेट आदि
    2. छाल का गिरना – गोंद, रेजिन
    3. रंध्रों (stomata) के माध्यम से – गैसीय अपशिष्ट
    4. रसधानियों (vacuoles) में संग्रहण
  • पौधे अपशिष्टों का उत्पादन करते हैं, लेकिन धीमी गति से।

नीचे नेफ्रॉन का आरेख दिया गया है। a, b, c और d भागों के लिए सही लेबलिंग वाले विकल्प का चयन कीजिए।

  • a – वृक्क शिरा की शाखा, b – बोमन संपुट, c – ग्लोमेरुलस, d – वृक्क धमनी की शाखा
  • a – वृक्क धमनी की शाखा, b – ग्लोमेरुलस, c – बोमन कैप्सूल, d – वृक्क शिरा की शाखा
  • a – वृक्क धमनी की शाखा, b – बोमन संपुट, c – ग्लोमेरुलस, d – वृक्क शिरा की शाखा
  • a – वृक्क शिरा की शाखा, b – ग्लोमेरुलस, c – बोमन संपुट, d – वृक्क धमनी की शाखा

Explanation:

  • नेफ्रॉन के भागों की सही लेबलिंग:
    • aवृक्क धमनी की शाखा (branch of renal artery) – रक्त को ग्लोमेरुलस तक लाती है
    • bग्लोमेरुलस (Glomerulus) – केशिकाओं का गुच्छा (निस्पंदन)
    • cबोमन-संपुट (Bowman’s Capsule) – निस्यंदन एकत्र करता है
    • dवृक्क शिरा की शाखा (branch of renal vein) – शुद्ध रक्त ले जाती है
  • वृक्क धमनी ऑक्सीजन युक्त रक्त लाती है, वृक्क शिरा ऑक्सीजन रहित रक्त ले जाती है।

निम्न चित्र में मनुष्य का दाहिना गुर्दा (kidney) दिखाया गया है। मूत्रवाहिनी किस बिंदु पर गुर्दे से बाहर निकलती है?

  • बिंदु 2
  • बिंदु 4
  • बिंदु 1
  • बिंदु 3

Explanation:

  • मूत्रवाहिनी (Ureter) बिंदु 2 पर गुर्दे से बाहर निकलती है।
  • मूत्रवाहिनी वृक्क श्रोणि (renal pelvis) से निकलती है और मूत्राशय तक जाती है।
  • गुर्दे की संरचना:
    1. वृक्क धमनी (Renal artery) – रक्त लाती है
    2. वृक्क शिरा (Renal vein) – रक्त ले जाती है
    3. मूत्रवाहिनी (Ureter) – मूत्र ले जाती है
    4. वृक्क श्रोणि (Renal pelvis) – मूत्र एकत्र करती है

कई एककोशिकीय जीवों में चयापचयी-अपशिष्ट (metabolic waste) के निष्कासन का तरीका क्या है?

  • विशिष्ट अंगों के उपयोग के द्वारा
  • परासरण (osmosis) के द्वारा
  • किडनी से फिल्ट्रेशन के द्वारा
  • एक सरल विसरण प्रक्रम के द्वारा

Explanation:

  • कई एककोशिकीय जीवों (unicellular organisms) में चयापचयी-अपशिष्ट (metabolic waste) का निष्कासन सरल विसरण (simple diffusion) द्वारा होता है।
  • इन जीवों में विशिष्ट उत्सर्जन अंग (specific excretory organs) नहीं होते।
  • अपशिष्ट कोशिका झिल्ली (cell membrane) के माध्यम से उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर जाते हैं।
  • उदाहरण: अमीबा (Amoeba), पैरामीशियम (Paramecium)

पौधों में उत्सर्जन के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से एक के अलावा अन्य सभी सही हैं उस गलत कथन की पहचान कीजिए।

  • पौधे अपशिष्ट उत्पादों का उत्सर्जन बहुत कम मात्रा में करते हैं।
  • पौधे अपशिष्ट उत्पादों का उत्सर्जन करते हैं, किंतु बहुत धीमी गति से करते हैं।
  • पौधों में उनके अपशिष्ट उत्पादों के निष्कासन के लिए कई विशिष्ट अंग होते हैं।
  • उत्सर्जन का तात्पर्य शरीर के अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालना है।

Explanation:

  • पौधों में उनके अपशिष्ट उत्पादों के निष्कासन के लिए कई विशिष्ट अंग (specific organs) होते हैं – यह कथन गलत है।
  • पौधों में कोई विशिष्ट उत्सर्जन अंग नहीं होते (जैसे स्तनधारियों में वृक्क)।
  • पौधों के उत्सर्जन के तरीके:
    1. अपशिष्टों का रसधानियों (vacuoles) में संग्रहण
    2. गिरती पत्तियों के माध्यम से उत्सर्जन
    3. रंध्रों (stomata) के माध्यम से गैसीय अपशिष्ट
    4. वाष्पोत्सर्जन (transpiration) द्वारा अतिरिक्त जल

घनीभूत वृक्क निस्पंदन इकाई को ______ कहा जाता है।

  • ग्लोमेरुलस
  • नेफ्रॉन
  • कैशिका
  • न्यूरॉन

Explanation:

  • घनीभूत वृक्क निस्पंदन इकाई (condensed kidney filtration unit) को ग्लोमेरुलस (Glomerulus) कहा जाता है।
  • ग्लोमेरुलस केशिकाओं (capillaries) का एक गुच्छा है जो बोमन-संपुट के अंदर स्थित होता है।
  • यह रक्त का निस्पंदन (blood filtration) करता है।
  • नेफ्रॉन (Nephron) संपूर्ण कार्यात्मक इकाई है, जिसमें ग्लोमेरुलस, बोमन-संपुट और नलिकाएँ शामिल हैं।

पौधे जानवरों की तुलना में उत्सर्जन के लिए एक पूरी तरह से अलग प्रक्रिया का उपयोग करते हैं। निम्नलिखित में से कौन सी प्रक्रिया पौधों द्वारा उत्सर्जन के लिए नहीं अपनाई जाती है?

  • पत्तियों के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को छानकर
  • वाष्पोत्सर्जन द्वारा अतिरिक्त जल बाहर निकालकर
  • कुछ अपशिष्ट मिट्टी में उत्सर्जित करके
  • अपशिष्ट उत्पादों को रिक्तिकाओं में संग्रहित करके

Explanation:

  • पत्तियों के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को छानकर (filtering toxins through leaves)यह प्रक्रिया पौधों द्वारा नहीं अपनाई जाती है।
  • पौधे पत्तियों के माध्यम से अपशिष्टों को संग्रहित करते हैं, फिर पत्तियों को गिरा देते हैं, फ़िल्टर नहीं करते।
  • पौधों में उत्सर्जन के तरीके:
    1. वाष्पोत्सर्जन – अतिरिक्त जल
    2. रंध्रों के माध्यम से – CO₂, O₂
    3. रिक्तिकाओं में संग्रहण
    4. गिरती पत्तियों और छाल के माध्यम से
    5. मूल रोमों के माध्यम से मिट्टी में उत्सर्जन

जलीय पादपों द्वारा उपापचयी अपशिष्ट ______ के माध्यम से उत्सर्जित होते हैं।

  • परासरण
  • सक्रिय परिवहन
  • विसरण
  • संचयन

Explanation:

  • जलीय पादपों (aquatic plants) द्वारा उपापचयी अपशिष्ट (metabolic wastes) विसरण (diffusion) के माध्यम से उत्सर्जित होते हैं।
  • जलीय पादप पानी में डूबे होते हैं, इसलिए अपशिष्ट सीधे पानी में विसरित हो जाते हैं।
  • उनमें रंध्र (stomata) नहीं होते, इसलिए गैसीय अपशिष्ट सीधे जल में विसरित होते हैं।
  • परासरण (Osmosis) – जल का संचलन
  • सक्रिय परिवहन (Active Transport) – ऊर्जा की आवश्यकता

मानवी मूत्रपिंडांमध्ये लघवीच्या निर्मितीदरम्यान पुन्हा किती पाणी शोषले जाते हे कशाद्वारे ठरवले जाते?

  • संपूर्ण शरीरभर फिरणाऱ्या रक्तामध्ये असलेली ऑक्सिजनची पातळी
  • नियमितपणे खाल्ल्या जाणाऱ्या आणि सामान्यतः दररोज खाल्ल्या जाणाऱ्या विशिष्ट प्रकारच्या अन्नाचा प्रकार
  • मानवी मूत्रपिंडांचा एकूण शारीरिक आकार आणि मापन करता येण्याजोगे परिमाण
  • मानवी शरीराने काढून टाकावे लागणारे अतिरिक्त पाणी आणि विरघळलेले कचरा

Explanation:

  • मानवी वृक्क (kidney) में मूत्र निर्माण के दौरान पानी का पुनः अवशोषण (reabsorption of water) शरीर द्वारा निकाले जाने वाले अतिरिक्त पानी और विघटित अपशिष्ट (excess water and dissolved wastes) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
  • यह ADH (Antidiuretic Hormone) द्वारा नियंत्रित होता है।
  • यदि शरीर में अतिरिक्त पानी है, तो कम पानी पुनः अवशोषित होता है (पतला मूत्र)।
  • यदि शरीर में पानी की कमी है, तो अधिक पानी पुनः अवशोषित होता है (गाढ़ा मूत्र)।

डायलिसिस वह प्रक्रिया है जो रक्त से अपशिष्ट उत्पादों को निकालने के लिए की जाती है जब गुर्दे की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। डायलिसिस के चरण नीचे दिए गए हैं लेकिन उचित क्रम में नहीं। कौन सा विकल्प इन चरणों का सही क्रम दर्शाता है?
a) रेखा से शिरा तक
b) रोगी के रक्त को डायलिसिस द्रव के साथ एक टैंक से गुजारा गया
c) धमनी से रेखा
d) रक्त से अपशिष्ट उत्पाद डायलिसिस द्रव में चले जाते हैं
e) अपोहन द्रव का आसमाटिक दबाव रक्त के समान होता है, सिवाय अपशिष्ट के

  • c—b—d—a—e
  • c—b—e—d—a
  • a—c—d—b—e
  • a—b—c—d—e

Explanation:

  • डायलिसिस (Dialysis/Hemodialysis) के चरणों का सही क्रम:
    1. c) धमनी से रेखा – रोगी की धमनी से रक्त निकाला जाता है
    2. b) रोगी के रक्त को डायलिसिस द्रव के साथ एक टैंक से गुजारा गया – रक्त को डायलाइज़र में भेजा जाता है
    3. e) अपोहन द्रव का आसमाटिक दबाव रक्त के समान होता है, सिवाय अपशिष्ट के – डायलिसिस द्रव की संरचना
    4. d) रक्त से अपशिष्ट उत्पाद डायलिसिस द्रव में चले जाते हैं – विसरण द्वारा अपशिष्ट हटते हैं
    5. a) रेखा से शिरा तक – शुद्ध रक्त वापस शिरा में लौटाया जाता है
  • डायलिसिस अर्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) के पार विसरण (diffusion) के सिद्धांत पर काम करता है।

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