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क्लोर-क्षार प्रक्रिया के दौरान, विभिन्न इलेक्ट्रोडों पर निर्मित होने वाले उत्पादों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • कैथोड पर हाइड्रोजन गैस तथा ऐनोड पर क्लोरीन गैस विमुक्त होती है।
  • कैथोड पर क्लोरीन गैस तथा ऐनोड पर हाइड्रोजन गैस विमुक्त होती है।
  • ऐनोड पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड और कैथोड पर क्लोरीन गैस निर्मित होती है।
  • ऐनोड पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस, दोनों निर्मित होती हैं।

Explanation:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali process) में NaCl (ब्राइन) के जलीय विलयन का विद्युत अपघटन (electrolysis) किया जाता है।
  • कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) पर H⁺ (जल से) आयन अपचयित होकर H₂ (हाइड्रोजन) गैस बनाते हैं: 2H⁺ + 2e⁻ → H₂
  • एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) पर Cl⁻ आयन ऑक्सीकृत होकर Cl₂ (क्लोरीन) गैस बनाते हैं: 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻
  • NaOH विलयन में बनता है (निकट कैथोड पर), पर वहाँ गैस नहीं निकलती।

Quick Facts:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया: 2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + Cl₂ + H₂
  • कैथोड → अपचयन (reduction), एनोड → ऑक्सीकरण (oxidation)

विद्युत अपघटनी शोधन में अशुद्ध धातु का उपयोग निम्नलिखित में से किसके रूप में किया जाता है?

  • लवण
  • इलेक्ट्रोलाइट
  • कैथोड
  • एनोड

Explanation:

  • विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic refining) में अशुद्ध धातु को एनोड (anode) के रूप में और शुद्ध धातु को कैथोड (cathode) के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • विद्युत धारा प्रवाहित करने पर, एनोड से धातु विलयन में घुल जाती है और शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है।

Quick Facts:

  • उदाहरण: कॉपर (Cu) के शोधन में – अशुद्ध Cu → एनोड, शुद्ध Cu → कैथोड, इलेक्ट्रोलाइट → CuSO₄ + H₂SO₄

नमक के विद्युत अपघटन के दौरान ‘X’ गैस उत्पन्न होती है। फिर, ‘X’ गैस का उपयोग शुष्क बुझे हुए चूने में CaOCl₂ बनाने के लिए किया जाता है। ‘X’ क्या है?

  • नाइट्रोजन
  • हाइड्रोजन
  • क्लोरीन
  • गंधक

Explanation:

  • NaCl (नमक) के विद्युत अपघटन से क्लोरीन (Cl₂) गैस उत्पन्न होती है (एनोड पर)।
  • Cl₂ गैस का उपयोग ब्लीचिंग पाउडर (CaOCl₂) बनाने के लिए किया जाता है: Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O

Quick Facts:

  • ब्लीचिंग पाउडर = कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड (CaOCl₂)

निम्नलिखित में से कौन सा उत्पाद ब्राइन के विद्युत अपघटन द्वारा बनता है?

  • पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड
  • कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड
  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड
  • ब्लीचिंग पाउडर

Explanation:

  • ब्राइन (NaCl का जलीय विलयन) के विद्युत अपघटन से NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड), Cl₂ और H₂ बनते हैं – यह क्लोर-क्षार प्रक्रिया है।

Quick Facts:

  • 2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + Cl₂ + H₂

क्लोरो-क्षार प्रक्रिया में ______, ______ और ______ तीन उत्पाद बनते हैं।

  • क्लोरीन, हाइड्रोजन, Na₂CO₃
  • क्लोरीन, ऑक्सीजन, Na₂CO₃
  • हाइड्रोजन, क्लोरीन, NaOH
  • ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, NaOH

Explanation:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया के तीन उत्पाद: H₂ (हाइड्रोजन), Cl₂ (क्लोरीन), NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड)

Quick Facts:

  • इन उत्पादों का उपयोग विभिन्न उद्योगों (साबुन, कागज, कीटाणुशोधन) में होता है।

धारा प्रवाहित करने के लिए प्रयुक्त तरल को कहा जाता है:

  • निलंबन
  • गैर-विद्युत अपघट्य
  • पायसन
  • विद्युत अपघट्य

Explanation:

  • विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले तरल (या पिघले हुए पदार्थ) को विद्युत अपघट्य (Electrolyte) कहते हैं, क्योंकि यह आयनों में विघटित (dissociate) होकर आवेश का वहन (conduct) करता है।
  • उदाहरण: NaCl का जलीय विलयन, CuSO₄ का विलयन, पिघला हुआ NaCl, आदि।

Quick Facts:

  • विद्युत अपघट्य = आयनिक यौगिक (ionic compound) जो जल में या पिघली अवस्था में आयनों में विघटित होकर विद्युत का चालन करता है।

क्लोर-क्षार प्रक्रिया के बारे में सही कथन की पहचान कीजिए।

  • इसका उपयोग लवण-जल के विद्युत अपघटन द्वारा Na₂CO₃ विलयन तैयार करने के लिए किया जाता है।
  • कैथोड पर हाइड्रोजन गैस और एनोड पर क्लोरीन गैस बनती है।
  • विद्युत अपघटन के दौरान एनोड के पास सोडियम हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न होता है।
  • एनोड में NaOH और कैथोड में क्लोरीन गैस बनती है।

Explanation:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया में कैथोड पर H₂ और एनोड पर Cl₂ बनता है – यह सही कथन है।
  • NaOH विलयन में बनता है (कैथोड के निकट), पर एनोड पर नहीं।
  • इसका उपयोग NaOH बनाने के लिए होता है, Na₂CO₃ नहीं (सोल्वे प्रक्रिया द्वारा बनता है)।

Quick Facts:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया NaOH, Cl₂, H₂ का उत्पादन करती है।

उच्च अभिक्रियाशीलता श्रेणी वाली धातुओं को निष्कर्षित करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?

  • निस्तापन
  • कार्बन के साथ गरम करना
  • भर्जन
  • इलेक्ट्रोलिटिक अपचयन

Explanation:

  • Na, K, Mg, Ca, Al जैसी अत्यधिक सक्रिय (उच्च अभिक्रियाशीलता) धातुओं को उनके अयस्कों से विद्युत अपघटनी अपचयन (electrolytic reduction) द्वारा निकाला जाता है, क्योंकि कार्बन (C) उनके ऑक्साइड को अपचयित नहीं कर सकता।
  • उदाहरण: Al₂O₃ का विद्युत अपघटन (हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया), NaCl का पिघलित विद्युत अपघटन (डेवी प्रक्रिया)।

Quick Facts:

  • निस्तापन/भर्जन – अयस्कों के पूर्व-उपचार के लिए, कार्बन अपचयन – मध्यम सक्रिय धातुओं (Fe, Zn) के लिए।

तांबे के विद्युत अपघटनी शोधन में, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इलेक्ट्रोड की भूमिका का सही वर्णन करता है?

  • शुद्ध तांबे का उपयोग एनोड के रूप में और अशुद्ध तांबे का उपयोग कैथोड के रूप में किया जाता है
  • दोनों इलेक्ट्रोड शुद्ध तांबे से बने होते हैं
  • अशुद्ध तांबे का उपयोग एनोड के रूप में और शुद्ध तांबे का उपयोग कैथोड के रूप में किया जाता है
  • दोनों इलेक्ट्रोड अशुद्ध तांबे से बने होते हैं

Explanation:

  • तांबे के विद्युत अपघटनी शोधन (electrolytic refining of copper) में:
  • एनोड (Anode): अशुद्ध तांबा (Impure Cu)
  • कैथोड (Cathode): शुद्ध तांबा (Pure Cu)
  • विद्युत अपघट्य: अम्लीकृत CuSO₄ विलयन (acidified copper sulphate solution)

Quick Facts:

  • शुद्ध Cu, कैथोड पर जमा होता है, अशुद्धियाँ एनोड पंक (anode mud) के रूप में नीचे बैठ जाती हैं।

निम्नलिखित में से कौन सी रासायनिक प्रतिक्रिया क्लोर-क्षार प्रक्रिया का प्रतिनिधित्व करती है?

  • NaHCO₃ + H⁺ → CO₂ + H₂O + अम्ल का सोडियम लवण
  • NaCl + H₂O + CO₂ + NH₃ → NH₄Cl + NaHCO₃
  • 2NaCl(aq) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + Cl₂(g) + H₂(g)
  • Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O

Explanation:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया: NaCl (ब्राइन) के जलीय विद्युत अपघटन से NaOH, Cl₂ और H₂ बनते हैं।
  • समीकरण: 2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + Cl₂ + H₂ (विद्युत अपघटन द्वारा)
  • अन्य: NaHCO₃ + H⁺ → CO₂ (बेकिंग सोडा), NaCl + CO₂ + NH₃ → NaHCO₃ (सोल्वे प्रक्रिया), Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ (ब्लीचिंग पाउडर)

Quick Facts:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया का उद्योग में बहुत महत्व है।

कॉपर की वैद्युत अपघटनी परिष्करण प्रक्रिया में, निम्नलिखित में से कौन-सा सुमेलित है?

  • कैथोड – अशुद्ध कॉपर
  • वैद्युत अपघट्य – अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन
  • कैथोड पंक – शुद्ध कॉपर के क्रिस्टल
  • एनोड – शुद्ध कॉपर

Explanation:

  • कॉपर के विद्युत अपघटनी शोधन में:
  • विद्युत अपघट्य: अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन (CuSO₄ + H₂SO₄)
  • कैथोड: शुद्ध Cu, एनोड: अशुद्ध Cu, एनोड पंक (anode mud): अविलेय अशुद्धियाँ (Au, Ag, Pt आदि)

Quick Facts:

  • तांबे का शोधन: एनोड → Cu²⁺ (घुलता है), Cu²⁺ → कैथोड (जमा होता है)

ब्राइन के विद्युत अपघटन के दौरान कौन-सी गैस उत्पन्न होती है, जो पॉप की ध्वनि के साथ जलती है?

  • Cl₂
  • H₂
  • O₂
  • N₂

Explanation:

  • ब्राइन (NaCl) के विद्युत अपघटन में H₂ (हाइड्रोजन) गैस कैथोड पर बनती है, जो पॉप (pop) ध्वनि के साथ जलती है – यह H₂ का विशिष्ट परीक्षण है।
  • Cl₂ (क्लोरीन) – पीली-हरी गैस, तीखी गंध, पॉप ध्वनि नहीं।

Quick Facts:

  • H₂ का परीक्षण: जलती हुई माचिस (किनारे पर) को H₂ के पास लाने पर ‘पॉप’ ध्वनि होती है।

विद्युत अपघटनी शोधन में शुद्ध धातु का उपयोग …………. के रूप में किया जाता है।

  • सल्फर
  • एक एनोड
  • एक कैथोड
  • एक इलेक्ट्रोलाइट

Explanation:

  • विद्युत अपघटनी शोधन (electrolytic refining) में शुद्ध धातु को कैथोड (cathode) के रूप में उपयोग किया जाता है, जिस पर शुद्ध धातु जमा होती है।
  • अशुद्ध धातु – एनोड के रूप में।

Quick Facts:

  • कैथोड पर शुद्ध धातु का निक्षेपण (deposition) होता है।

कॉपर, जिंक और सिल्वर जैसी धातुओं का परिष्करण करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है?

  • आसवन
  • निष्कर्ष
  • विद्युत अपघटनी परिष्करण
  • प्रगलन

Explanation:

  • Cu, Zn, Ag, Au जैसी धातुओं का विद्युत अपघटनी परिष्करण (electrolytic refining) किया जाता है, जो उच्च शुद्धता (99.99%) प्रदान करती है।
  • आसवन (distillation) – Hg, Zn (वाष्पशील) के लिए, निष्कर्ष (extraction) – धातु निकालने के लिए, प्रगलन (smelting) – अयस्क से धातु निकालने के लिए।

Quick Facts:

  • विद्युत अपघटनी परिष्करण – सबसे सामान्य परिष्करण विधि।

यौगिक के माध्यम से बिजली पास करके एक यौगिक के रासायनिक अपघटन के उत्पादन की प्रक्रिया को ______ कहा जाता है।

  • विद्युत-अपघटन
  • विद्युत-अपघट्य
  • विद्युतलेपन
  • वैद्युतकणसंचलन

Explanation:

  • विद्युत धारा प्रवाहित करके किसी यौगिक (विद्युत अपघट्य) का अपघटन (decomposition) करने की प्रक्रिया को विद्युत-अपघटन (Electrolysis) कहते हैं।
  • विद्युत-अपघट्य (Electrolyte) – वह पदार्थ जो विद्युत का चालन करता है और अपघटित होता है।
  • विद्युतलेपन (Electroplating) – धातु की परत चढ़ाना, वैद्युतकणसंचलन (Electrophoresis) – कोलॉइडी कणों की गति।

Quick Facts:

  • विद्युत-अपघटन में विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके रासायनिक परिवर्तन (अपघटन) किया जाता है।

अनुगमन वेग क्या है?

  • एकदम निश्चित समान वेग
  • तीव्र गति से बिंदु का चलना
  • चालक में इलेक्ट्रॉन स्थिर औसत गति के साथ चलते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनों का असमान वेग

Explanation:

  • अनुगमन वेग (Drift velocity) – चालक (conductor) में इलेक्ट्रॉनों द्वारा विद्युत क्षेत्र (electric field) के प्रभाव में प्राप्त स्थिर औसत वेग (steady average velocity)।
  • यह बहुत कम होता है (~10⁻⁴ m/s), पर विद्युत सिग्नल बहुत तीव्र (लगभग प्रकाश की चाल) संचरित होता है।

Quick Facts:

  • अनुगमन वेग v_d = (eEτ)/m (जहाँ τ = विश्रांति समय, relaxation time)

धातुओं के संक्षारण को रोकने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी विधि प्रभावी नहीं है?

  • पेंटिंग
  • नमी के संपर्क में आना
  • उत्सर्गी एनोड लगाना
  • गैल्वनीकरण

Explanation:

  • संक्षारण (Corrosion) को रोकने के लिए नमी (moisture) और वायु (ऑक्सीजन) से बचाना आवश्यक है।
  • नमी के संपर्क में आना – यह संक्षारण को बढ़ावा देता है, रोकता नहीं (इसलिए प्रभावी नहीं है)।
  • अन्य विधियाँ: पेंटिंग (coating), उत्सर्गी एनोड (sacrificial anode) – जैसे Zn (गैल्वनीकरण), तेल लगाना, आदि – ये सभी संक्षारण रोकने में प्रभावी हैं।

Quick Facts:

  • संक्षारण रोकने की विधियाँ: पेंटिंग, गैल्वनीकरण (Zn की परत), टिनिंग, क्रोमियम चढ़ाना, तैलीकरण, उत्सर्गी एनोड (Mg, Zn) का उपयोग।

विद्युतसंयोजी यौगिक विद्युत का चालन दर्शाते हैं:

  • केरोसीन में
  • ठोस अवस्था में
  • पेट्रोल में
  • पिघली अवस्था में

Explanation:

  • विद्युतसंयोजी (आयनिक) यौगिक (जैसे NaCl) ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते (क्योंकि आयन स्थिर होते हैं और गतिमान नहीं होते)।
  • ये पिघली (molten) अवस्था में या जलीय (aqueous) विलयन में विद्युत का चालन करते हैं, क्योंकि आयन मुक्त (free) होकर गति करते हैं।
  • केरोसीन/पेट्रोल में ये घुलते नहीं, इसलिए चालन नहीं करते।

Quick Facts:

  • ठोस NaCl → विद्युत रोधी (insulator), पिघला हुआ NaCl → चालक (conductor)

बॉक्साइट से ऐलुमिनियम निष्कर्षण के लिए किस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?

  • निस्तापन के बाद कार्बन अपचयन
  • भर्जन के बाद अपचयन
  • जस्ता द्वारा विस्थापन
  • पिघले हुए ऐलुमिनियम ऑक्साइड का विद्युत अपघटन

Explanation:

  • Al (ऐलुमिनियम) एक अत्यधिक सक्रिय धातु है, इसका निष्कर्षण पिघले हुए Al₂O₃ (बॉक्साइट) के विद्युत अपघटन से किया जाता है (हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया, Hall-Héroult process)।
  • कार्बन अपचयन से Al नहीं निकाला जा सकता (क्योंकि Al, C से अधिक अभिक्रियाशील है)।

Quick Facts:

  • Al₂O₃ (पिघला हुआ) + क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) → विद्युत अपघटन → Al (कैथोड पर) + O₂ (एनोड पर)

जलीय सोडियम क्लोराइड के इलेक्ट्रोलाइटिक अपघटन के दौरान क्रमशः एनोड और कैथोड में निम्नलिखित में से कौन सी गैसें विकसित होती हैं?

  • एनोड पर H₂ गैस और कैथोड पर O₂ गैस
  • एनोड पर O₂ गैस और कैथोड पर H₂ गैस
  • एनोड पर Cl₂ गैस और कैथोड पर H₂ गैस
  • एनोड पर H₂ गैस और कैथोड पर Cl₂ गैस

Explanation:

  • जलीय NaCl (ब्राइन) के विद्युत अपघटन में:
  • एनोड (Anode) पर Cl⁻ ऑक्सीकृत होकर Cl₂ (क्लोरीन) गैस बनाता है।
  • कैथोड (Cathode) पर H⁺ (जल से) अपचयित होकर H₂ (हाइड्रोजन) गैस बनाता है।

Quick Facts:

  • यह क्लोर-क्षार प्रक्रिया का सार है।

CH₃OH, C₂H₅OH, C₃H₇OH और C₄H₉OH यौगिक लगभग समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं क्योंकि वे ______ से संबंधित हैं?

  • एक आवर्त श्रेणी
  • एक समजातीय श्रेणी
  • एक विषमजातीय श्रेणी
  • एक विद्युत रासायनिक श्रेणी

Explanation:

  • CH₃OH (मेथेनॉल), C₂H₅OH (इथेनॉल), C₃H₇OH (प्रोपेनॉल), C₄H₉OH (ब्यूटेनॉल) – ये सभी ऐल्कोहॉल (alcohols) हैं, जो समजातीय श्रेणी (homologous series) –OH समूह के साथ बनाते हैं, और इनके रासायनिक गुण समान (लगभग) होते हैं।
  • समजातीय श्रेणी का प्रत्येक सदस्य –CH₂– से भिन्न होता है और समान कार्यात्मक समूह रखता है।

Quick Facts:

  • ऐल्कोहॉल की समजातीय श्रेणी: CₙH₂ₙ₊₁OH
  • ये समान रासायनिक गुण (जैसे Na के साथ H₂ निकलना, एस्टरीफिकेशन) दिखाते हैं।

विद्युत अपघटनी परिशोधन प्रक्रिया में, धारा प्रवाहित करने पर अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं, उन अशुद्धियों को ______ के रूप में जाना जाता है।

  • कैथोड पंक
  • विद्युतअपघटनी पंक
  • गैंग
  • एनोड पंक

Explanation:

  • विद्युत अपघटनी शोधन में, एनोड पर मौजूद अशुद्धियाँ (जो विलयन में नहीं घुलतीं) एनोड पंक (Anode mud) के रूप में नीचे बैठ जाती हैं।
  • उदाहरण: कॉपर शोधन में, Ag, Au, Pt जैसी अशुद्धियाँ एनोड पंक में एकत्र हो जाती हैं।
  • गैंग (Gangue) – अयस्क में मौजूद अशुद्धियाँ (निष्कर्षण से पहले)।

Quick Facts:

  • एनोड पंक में अक्सर कीमती धातुएँ (Au, Ag) होती हैं, जिन्हें पुनः प्राप्त (recover) किया जाता है।

क्लोर-क्षारीय प्रक्रिया के दौरान, निम्नलिखित में से कौन सा उत्पाद सीधे लवण के विद्युत अपघटन से प्राप्त नहीं होता है?

  • कैथोड पर हाइड्रोजन गैस (Hydrogen gas at the cathode)
  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन (Sodium hydroxide solution)
  • एनोड पर क्लोरीन गैस (Chlorine gas at the anode)
  • कैथोड पर निक्षेपित सोडियम धातु (Sodium metal deposited at the cathode)

Explanation:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया में NaCl के जलीय विलयन का विद्युत अपघटन होता है, जिसमें Na धातु नहीं बनती (क्योंकि H⁺, Na⁺ से पहले अपचयित हो जाता है, इसलिए H₂ बनता है, Na नहीं)।
  • Na धातु प्राप्त करने के लिए पिघले हुए NaCl (molten NaCl) का विद्युत अपघटन किया जाता है (डेवी प्रक्रिया)।

Quick Facts:

  • जलीय NaCl → H₂ (कैथोड), Cl₂ (एनोड), NaOH (विलयन)
  • पिघला NaCl → Na (कैथोड), Cl₂ (एनोड)

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा का सही वर्णन करता है?

  • सेल के ऋणात्मक टर्मिनल से धनात्मक टर्मिनल तक
  • दिशा यादृच्छिक होती है और आवेश एकसमान रूप से प्रवाहित होते हैं
  • इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के समान
  • सेल के धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल तक

Explanation:

  • पारंपरिक विद्युत धारा (Conventional current) की दिशा धनात्मक (+) से ऋणात्मक (-) की ओर होती है (यह इस धारणा पर आधारित है कि धनात्मक आवेश प्रवाहित होते हैं)।
  • इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह (Electron flow) इसके विपरीत होता है (ऋणात्मक से धनात्मक)।

Quick Facts:

  • यह परंपरा बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा स्थापित की गई थी।

निम्नलिखित में से किसमें एक निश्चित प्रतिरूप में चांदी के तारों के साथ बड़ी संख्या में जुड़े सौर सेल शामिल हैं?

  • लेड अम्ल बैटरी
  • शुष्क सेल
  • क्षारीय सेल
  • सौर सेल पैनल

Explanation:

  • सौर सेल पैनल (Solar cell panel) में बड़ी संख्या में सौर सेल (solar cells) एक निश्चित प्रतिरूप (pattern) में चांदी के तारों (silver wires) द्वारा जुड़े होते हैं, जो सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
  • लेड अम्ल बैटरी, शुष्क सेल, क्षारीय सेल – ये ऊर्जा भंडारण (storage) उपकरण हैं, सौर सेल नहीं।

Quick Facts:

  • सौर सेल (Solar cell) = फोटोवोल्टिक सेल (photovoltaic cell) – अर्धचालक (Si) से बना होता है।

ऐनोड पंक (anode mud) क्या है?

  • मृदा और जल का विलयन
  • वैद्युतअपघटनी परिशोधन में कैथोड पर निक्षेपित अविलेय अशुद्धियाँ
  • वैद्युतअपघटनी परिशोधन में विलयन में विलेय अशुद्धियाँ
  • वैद्युतअपघटनी परिशोधन में एनोड पर निक्षेपित अविलेय अशुद्धियाँ

Explanation:

  • एनोड पंक (Anode mud) – विद्युत अपघटनी शोधन (electrolytic refining) में एनोड पर/से नीचे बैठने वाली अविलेय अशुद्धियाँ (जो विलयन में नहीं घुलतीं) हैं।
  • उदाहरण: कॉपर शोधन में – Au, Ag, Pt एनोड पंक में एकत्र होते हैं।

Quick Facts:

  • एनोड पंक में अक्सर कीमती धातुएँ पाई जाती हैं, जिन्हें पुनः प्राप्त किया जाता है।

लवण-जल के विद्युत अपघटन के दौरान, निम्नलिखित में से कौन-सा, प्रत्येक इलेक्ट्रोड और विलयन में निर्मित होने वाले उत्पादों से सुमेलित है?

  • एनोड – Cl₂, कैथोड – H₂, विलयन – NaOH
  • एनोड – NaOH, कैथोड – Cl₂, विलयन – H₂
  • एनोड – Cl₂, कैथोड – NaOH, विलयन – H₂
  • एनोड – H₂, कैथोड – Cl₂, विलयन – NaOH

Explanation:

  • ब्राइन (NaCl) के विद्युत अपघटन में:
  • एनोड पर Cl₂ गैस, कैथोड पर H₂ गैस, और विलयन में NaOH बनता है – यह क्लोर-क्षार प्रक्रिया है।

Quick Facts:

  • 2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + Cl₂ + H₂

निम्नलिखित में से कौन-सी विधि अशुद्ध धातुओं को शोधित करने के लिए उपयोग की जाती है?

  • विद्युत अपघटनी शोधन
  • निस्तापन
  • तैलीकरण
  • भर्जन

Explanation:

  • अशुद्ध धातुओं को शुद्ध (शोधित, refine) करने के लिए विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic refining) का उपयोग किया जाता है (Cu, Zn, Ag, Au आदि के लिए)।
  • निस्तापन (calcination) और भर्जन (roasting) – अयस्कों के पूर्व-उपचार (अशुद्धियाँ हटाना), तैलीकरण (oiling) – संक्षारण रोकने के लिए।

Quick Facts:

  • विद्युत अपघटनी शोधन उच्च शुद्धता (99.99%) प्रदान करता है।

वह प्रक्रिया जहाँ विद्युत 10% NaCl के विलयन के माध्यम से प्रवाहित होती है, कहलाती है।

  • हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया
  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया
  • बायर प्रक्रिया
  • सॉल्वे प्रक्रिया

Explanation:

  • 10% NaCl (ब्राइन) के विलयन में विद्युत प्रवाहित करने की प्रक्रिया क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali process) है, जिससे NaOH, Cl₂, H₂ प्राप्त होते हैं।
  • हॉल-हेरॉल्ट – Al निष्कर्षण, बायर – Al₂O₃ शुद्धिकरण, सॉल्वे – Na₂CO₃ निर्माण

Quick Facts:

  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया में 10% NaCl विलयन का विद्युत अपघटन होता है।

दी गई रासायनिक अभिक्रिया में कैथोड के पास कौन सा उत्पाद बनता है? 2NaCl(aq) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + H₂(g) + Cl₂(g)

  • NaOH, H₂
  • NaOH
  • NaOH, Cl₂
  • H₂, Cl₂

Explanation:

  • अभिक्रिया: 2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + H₂ + Cl₂
  • कैथोड पर H₂ गैस बनती है, और NaOH (विलयन) भी कैथोड के निकट बनता है (Na⁺ + OH⁻ → NaOH)।
  • Cl₂ एनोड पर बनता है।

Quick Facts:

  • कैथोड: H₂ और NaOH (विलयन में), एनोड: Cl₂

विद्युत अपघटन द्वारा धातुओं के शोधन के दौरान प्रयुक्त विद्युत अपघट्य का आवश्यक गुण क्या है?

  • यह किसी उपयुक्त धातु लवण का जलीय या पिघला हुआ घोल होना चाहिए
  • पूरी प्रक्रिया के दौरान इसे पूरी तरह से गैर-प्रतिक्रियाशील रहना चाहिए
  • इसे विद्युत रासायनिक प्रक्रिया के दौरान कुशलतापूर्वक ऊष्मा का चालन करना चाहिए
  • इसमें जल और उदासीन तेल की एक परत दोनों शामिल होनी चाहिए

Explanation:

  • विद्युत अपघटनी शोधन में विद्युत अपघट्य (electrolyte) को उस धातु के उपयुक्त लवण का जलीय (aqueous) या पिघला हुआ (molten) विलयन होना चाहिए, ताकि आयन मुक्त रूप से गति कर सकें और धातु का स्थानांतरण हो सके।
  • उदाहरण: CuSO₄ + H₂SO₄ (जलीय) – तांबे के शोधन के लिए।

Quick Facts:

  • विद्युत अपघट्य को आयनों (cation/anion) का स्रोत होना चाहिए।

जब लवण-जल का विद्युत अपघटन किया जाता है, तो कैथोड पर एक गैस X बनती है, जो जलती हुई तीली के पास लाने पर पॉप ध्वनि उत्पन्न करती है। गैस X है:

  • CO₂
  • H₂
  • Cl₂
  • O₂

Explanation:

  • ब्राइन (NaCl) के विद्युत अपघटन में कैथोड पर H₂ (हाइड्रोजन) गैस बनती है, जो ‘पॉप’ ध्वनि के साथ जलती है (यह H₂ का परीक्षण है)।

Quick Facts:

  • H₂ – ज्वलनशील (flammable), पॉप ध्वनि के साथ जलती है।

धातुओं के वैद्युतअपघटनी परिशोधन की प्रक्रिया के दौरान, विद्युतअपघट्य से धारा प्रवाहित करने पर, ______ से अशुद्ध धातु, विद्युत अपघट्य में विलीन हो जाती है।

  • लवण सेतु (salt bridge)
  • एनोड
  • कैथोड
  • विद्युत अपघट्य

Explanation:

  • विद्युत अपघटनी शोधन में, धारा प्रवाहित करने पर एनोड (anode) पर स्थित अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल (dissolve) जाती है (ऑक्सीकरण होता है: M → Mⁿ⁺ + ne⁻)।
  • कैथोड पर शुद्ध धातु जमा होती है (अपचयन: Mⁿ⁺ + ne⁻ → M)।

Quick Facts:

  • एनोड → विघटन (dissolution), कैथोड → निक्षेपण (deposition)
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