SCIENCE
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- यह बल चालक में प्रवाहित धारा से स्वतंत्र होता है।
- किसी धारावाही चालक पर लगने वाला बल चुंबकीय क्षेत्र में चालक की लम्बाई के समानुपाती होता है।
- बल चालक के प्रतिरोध पर निर्भर करता है।
- किसी चालक पर बल चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के अनुदिश होता है।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल F = BIL sin θ (जहाँ B = चुंबकीय क्षेत्र, I = धारा, L = लंबाई)
- अतः F ∝ L (लंबाई के समानुपाती) – यह कथन सही है।
- F धारा (I) पर भी निर्भर करता है, इसलिए ‘धारा से स्वतंत्र’ गलत है।
- बल प्रतिरोध पर निर्भर नहीं करता (प्रतिरोध परिपथ की धारा को प्रभावित करता है, पर सूत्र में सीधे नहीं आता)।
- बल चुंबकीय क्षेत्र और धारा दोनों के लंबवत होता है (Fleming का बायाँ हाथ नियम), क्षेत्र की दिशा में नहीं।
Quick Facts:
- F = BIL sin θ, θ = धारा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण
- यदि θ = 90°, तो F अधिकतम; θ = 0° पर F = 0
ऊतक घनत्व में परिवर्तन वाले स्थान से गुजरने वाली पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic waves) वापस परावर्तित होती हैं, जिन्हें विद्युत सिग्नलों में परिवर्तित करके अंगों की छवियाँ प्राप्त की जाती हैं। इस तकनीक को क्या कहा जाता है?
- अल्ट्रासोनोग्राफी
- चुंबकीय अनुनाद
- मैमोग्राफी
- कंप्यूटेड टोमोग्राफी
Explanation:
- अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography) में पराश्रव्य (ultrasonic) तरंगों का उपयोग करके शरीर के आंतरिक अंगों (गर्भस्थ शिशु, हृदय, गुर्दे आदि) की छवियाँ बनाई जाती हैं।
- यह ‘इको’ (echo) सिद्धांत पर आधारित है – तरंगें विभिन्न ऊतक घनत्वों से परावर्तित होती हैं, और परावर्तित तरंगों को विद्युत सिग्नलों में बदलकर छवि बनाई जाती है।
Quick Facts:
- अल्ट्रासोनोग्राफी को ‘सोनोग्राफी’ भी कहते हैं।
- यह आयनकारी विकिरण (X-रे) का उपयोग नहीं करती, इसलिए सुरक्षित है, विशेषकर गर्भावस्था में।
निम्नलिखित में से कौन सा/से गुणधर्म एक दंड चुंबक के परितः चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के लिए सही है:
- (i) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संवृत लूप बनाती हैं।
- (ii) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
- (iii) चुंबक के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के दक्षिण से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं।
- दोनों (i) और (ii)
- केवल (ii)
- दोनों (ii) और (iii)
- केवल (i)
Explanation:
- कथन (i): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव संवृत (closed) लूप बनाती हैं (बाहर N से S, अंदर S से N)। सत्य।
- कथन (ii): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद (intersect) नहीं करतीं – यदि करें, तो एक बिंदु पर दो दिशाएँ होंगी, जो असंभव है। सत्य।
- कथन (iii): चुंबक के बाहर, क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी (N) से दक्षिणी (S) ध्रुव की ओर जाती हैं (S से N नहीं)। गलत।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव संवृत लूप होती हैं (विद्युत क्षेत्र रेखाओं के विपरीत, जो धनात्मक से ऋणात्मक पर समाप्त होती हैं)।
- रेखाओं की सघनता (density) क्षेत्र की प्रबलता (strength) दर्शाती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग नहीं करता है?
- चुंबकीय कम्पास
- विद्युत जनित्र
- विद्युत मोटर
- माइक्रोफ़ोन
Explanation:
- चुंबकीय कम्पास (Magnetic compass) स्थायी चुंबक (पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र) का उपयोग करता है, यह विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर आधारित नहीं है (जब तक कि धारा प्रवाहित न हो)।
- विद्युत जनित्र (Generator) → चुंबकीय प्रेरण, मोटर → धारा पर बल, माइक्रोफोन → ध्वनि तरंगों को विद्युत सिग्नल में (चुंबकीय प्रभाव) – ये सभी धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग करते हैं।
Quick Facts:
- चुंबकीय कम्पास की सुई एक छोटा दंड चुंबक होती है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार संरेखित होती है।
- इसे विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग नहीं माना जाता, क्योंकि इसमें विद्युत धारा की आवश्यकता नहीं होती।
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम में, मध्यमा उंगली किस भौतिक राशि को निरूपित करती है?
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
- विद्युत धारा की दिशा
- बल की दिशा
- चालक की गति की दिशा
Explanation:
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) – अंगूठा (Thumb) → बल (Force), तर्जनी (Index finger) → चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field), मध्यमा (Middle finger) → विद्युत धारा (Current)।
- यह नियम विद्युत मोटर (motor) में बल की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग होता है।
Quick Facts:
- FLHR: Force (Thumb), Magnetic Field (Index), Current (Middle) – याद रखें: ‘FBI’ (Force, Field, Current) – बाएँ हाथ के लिए।
- दायाँ हाथ नियम (FRHR) जनरेटर के लिए है: Thumb (Motion), Index (Field), Middle (Current)।
एक विद्युत जनित्र में, __________ ऊर्जा का उपयोग एक चालक को एक _________ क्षेत्र में घुमाने के लिए किया जाता है ताकि बिजली का उत्पादन हो सके।
- विद्युत, विद्युत
- यांत्रिक, विद्युत
- यांत्रिक, चुंबकीय
- विद्युत, चुंबकीय
Explanation:
- जनित्र (Generator) यांत्रिक ऊर्जा (mechanical energy) को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है, विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर।
- यांत्रिक ऊर्जा (टरबाइन/इंजन) से चालक को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है (प्रेरित EMF)।
Quick Facts:
- जनित्र का सिद्धांत: फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम
- मोटर (Motor) विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है (विपरीत प्रक्रिया)।
एक सीधे धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का निर्धारण निम्नलिखित का उपयोग करके किया जा सकता है:
- फ्लेमिंग का वामहस्त नियम
- दाएं हाथ का अंगूठा नियम
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम
- बाएं हाथ का अंगूठा नियम
Explanation:
- दाएं हाथ का अंगूठा नियम (Right-Hand Thumb Rule) – यदि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (वृत्ताकार) बताती हैं।
- इसे ‘मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम’ (Maxwell’s corkscrew rule) भी कहते हैं।
Quick Facts:
- सीधे चालक के लिए, B ∝ 1/r (दूरी के व्युत्क्रमानुपाती), और दिशा वृत्ताकार होती है (चालक के चारों ओर)।
- फ्लेमिंग के नियम बल/प्रेरित धारा के लिए हैं, क्षेत्र की दिशा के लिए नहीं।
एक छड़ चुम्बक के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ निर्देशित होती हैं:
- दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव तक
- उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक
- केंद्र से दक्षिण ध्रुव तक
- केंद्र से उत्तरी ध्रुव तक
Explanation:
- दंड चुंबक के अंदर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणी (S) ध्रुव से उत्तरी (N) ध्रुव की ओर निर्देशित होती हैं।
- बाहर, ये N से S तक जाती हैं, जिससे संवृत (closed) लूप बनते हैं।
Quick Facts:
- यह याद रखें: क्षेत्र रेखाएँ बाहर N → S, अंदर S → N (निरंतरता के लिए)
- यह सभी चुंबकों (दंड, U-आकार, सोलेनॉइड) के लिए सत्य है।
कौन सा चुम्बक कक्षीय तापमान पर लम्बे समय तक लौह-चुम्बकीय गुणों को बरकरार रखता है?
- स्थायी चुंबक
- ध्रुव चुम्बक
- विषम चुंबक
- अस्थायी चुम्बक
Explanation:
- स्थायी चुंबक (Permanent magnet) – ये उच्च निग्रहिता (coercivity) और उच्च अवशिष्टता (retentivity) रखते हैं, जिससे ये बाहरी चुंबकीय क्षेत्र हटाने पर भी अपने चुंबकीय गुणों को लंबे समय तक बनाए रखते हैं।
- अस्थायी चुंबक (जैसे नर्म लोहा) चुंबकीय क्षेत्र हटते ही चुंबकीय गुण खो देते हैं।
Quick Facts:
- स्थायी चुंबक सामग्री: ऐलनिको (AlNiCo), फेराइट, नियोडिमियम (NdFeB)
- अस्थायी चुंबक: नर्म लोहा (soft iron) – विद्युत चुंबकों में उपयोग किया जाता है।
मान लीजिए कि राममोहन ने एक बेलनाकार छड़ चुंबक को एक वृत्ताकार परिनालिका के अक्ष के अनुदिश रखा है। अब, वह चुंबक को परिनालिका के अक्ष के चारों ओर घुमा रहा है। कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा होगी:
- परिनालिका में फेरों की संख्या के समानुपाती
- परिनालिका की लंबाई के समानुपाती
- शून्य
- परिनालिका के प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती
Explanation:
- प्रेरित EMF (ε) = -dΦ/dt (फैराडे का नियम), जहाँ Φ = चुंबकीय फ्लक्स = B·A·cosθ
- यहाँ चुंबक अक्ष के अनुदिश है, और उसे अक्ष के चारों ओर घुमाया जा रहा है – इससे θ (चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली के क्षेत्रफल के बीच कोण) नहीं बदलता (क्योंकि अक्ष के अनुदिश घुमाने पर cosθ स्थिर रहता है) → फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं → प्रेरित EMF = 0 → धारा = 0
Quick Facts:
- प्रेरित धारा के लिए, फ्लक्स परिवर्तन (flux change) आवश्यक है – या तो चुंबक को अंदर-बाहर करना, या कुंडली को घुमाना (θ बदलना), पर यहाँ केवल अक्षीय घुमाव है, जिससे फ्लक्स नहीं बदलता।
धारा वहन करने वाले एक सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा कैसी होती हैं?
- धारा की दिशा के समानांतर
- चालक की लंबाई के समानांतर
- एक दूसरे को प्रतिच्छेद करती हुई
- धारा की दिशा के लंबवत
Explanation:
- सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ वृत्ताकार (concentric circles) होती हैं, जो धारा की दिशा के लंबवत (perpendicular) तल में स्थित होती हैं।
- क्षेत्र की दिशा दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम द्वारा ज्ञात की जाती है (अंगूठा → धारा, उंगलियाँ → क्षेत्र की दिशा)।
Quick Facts:
- B = μ₀I/(2πr) (अनंत लंबे चालक के लिए)
- क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित (concentric) वृत्त होती हैं – ये कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
प्रेरित धारा का दक्षिण-हस्त नियम किसने दिया था?
- फ्लेमिंग
- फैराडे
- ओर्स्टेड
- एम्पियर
Explanation:
- प्रेरित धारा की दिशा के लिए फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) जॉन एम्ब्रोस फ्लेमिंग (John Ambrose Fleming) द्वारा दिया गया था।
- यह नियम जनरेटर में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग होता है।
Quick Facts:
- FLHR (बायाँ) → मोटर (Motor) – बल की दिशा
- FRHR (दायाँ) → जनरेटर (Generator) – प्रेरित धारा की दिशा
- फैराडे ने प्रेरण (induction) का नियम दिया, फ्लेमिंग ने दिशा का नियम।
सॉलिनॉइड में उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता निम्नलिखित में से किस कारक पर निर्भर नहीं करती है:
- सॉलिनॉइड में धारा की तीव्रता
- कोर पदार्थ के रूप में प्रयुक्त नर्म लोहा
- कोर पदार्थ के रूप में प्रयुक्त लकड़ी की छड़
- सॉलिनॉइड में घुमावों की संख्या
Explanation:
- सोलेनॉइड का चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ n I (निर्वात/वायु कोर के लिए), और B = μ₀ μ_r n I (चुंबकीय कोर के लिए)।
- यह धारा (I), फेरों की संख्या (n), और कोर की सापेक्ष पारगम्यता (μ_r) पर निर्भर करता है।
- लकड़ी (wood) एक अचुंबकीय पदार्थ है (μ_r ≈ 1), इसलिए यह क्षेत्र को प्रभावित नहीं करता – यह वायु कोर के समान है, पर B लकड़ी पर निर्भर नहीं करता (यह μ_r पर निर्भर करता है, जो लकड़ी के लिए लगभग 1 है, पर ‘लकड़ी’ स्वयं कारक नहीं है, प्रश्न में ‘निर्भर नहीं करता’ का अर्थ है कि लकड़ी कोर के रूप में B को बढ़ाती नहीं है, पर वायु/लकड़ी में B का मान μ₀ n I ही होता है, जो लकड़ी पर निर्भर नहीं है – सही उत्तर लकड़ी की छड़ है, क्योंकि यह चुंबकीय गुण नहीं बढ़ाती)।
Quick Facts:
- नर्म लोहे की कोर → चुंबकीय क्षेत्र बहुत बढ़ जाता है (μ_r उच्च)
- लकड़ी, काँच, प्लास्टिक → μ_r ≈ 1 (कोई प्रभाव नहीं)
निम्नलिखित स्थितियों में प्रेरित विभवांतर के परिमाण और दिशाओं पर विचार करें:
- (a) एक धारावाही सीधा तार एक स्थिर कुंडली की ओर 1.5 मीटर/सेकेंड की चाल से गति कर रहा है।
- (b) वही धारावाही सीधा तार उसी स्थिर कुंडली से 1.5 मीटर/सेकेंड की चाल से दूर जा रहा है।
- प्रेरित विभवांतर ________ परिमाण के हैं और उपरोक्त दो स्थितियों में ________ चिह्न वाले हैं।
- भिन्न, समान
- समान, विपरीत
- भिन्न, विपरीत
- समान, समान
Explanation:
- दोनों स्थितियों में चाल समान (1.5 m/s) है, केवल दिशा विपरीत है (पास/दूर) – इसलिए फ्लक्स परिवर्तन की दर (जो प्रेरित EMF का परिमाण निर्धारित करती है) का परिमाण समान होगा, पर चिह्न (दिशा) विपरीत होगा (लेंज का नियम – विपरीत दिशा में फ्लक्स परिवर्तन का विरोध)।
- EMF = -dΦ/dt, दिशा फ्लक्स परिवर्तन की दर के चिह्न पर निर्भर करती है।
Quick Facts:
- लेंज का नियम (Lenz’s law): प्रेरित धारा की दिशा ऐसी होती है कि वह उस कारण (फ्लक्स परिवर्तन) का विरोध करती है जिसने उसे उत्पन्न किया।
- परिमाण फैराडे के नियम द्वारा, दिशा लेंज के नियम द्वारा
एक सोलेनॉइड चुंबक की तरह व्यवहार करता है क्योंकि:
- इसका प्रतिरोध उच्च होता है
- यह बिजली संग्रहीत करता है
- इसके फेरों में प्रवाहित धारा एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है
- इसमें अंदर लोहा होता है
Explanation:
- जब धारा एक सोलेनॉइड (कुंडली) में प्रवाहित होती है, तो इसके अंदर एक एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (B = μ₀ n I) उत्पन्न होता है, और यह एक दंड चुंबक की तरह व्यवहार करता है (एक सिरा N, दूसरा S)।
- यह चुंबकीय क्षेत्र स्वयं धारा के कारण है (ओर्स्टेड का प्रयोग) – लोहे की आवश्यकता नहीं (हालाँकि लोहा क्षेत्र को बढ़ाता है)।
Quick Facts:
- सोलेनॉइड का एक सिरा उत्तरी (N) ध्रुव के रूप में, दूसरा दक्षिणी (S) ध्रुव के रूप में व्यवहार करता है (धारा की दिशा के अनुसार)।
- इसका उपयोग विद्युत चुंबक (electromagnet) बनाने में होता है।
बैलिस्टिक गैल्वेनोमीटर को इसकी सुई को इसके चल कुंडली से गुजरने वाले के समानुपाती विस्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- चुंबकीय बल
- दाब ऊर्जा
- आवेश
- ऊष्मा ऊर्जा
Explanation:
- बैलिस्टिक गैल्वेनोमीटर (Ballistic galvanometer) एक उपकरण है जो इसके माध्यम से गुजरने वाले आवेश (charge) की मात्रा को मापता है, विशेषतः अल्पकालिक धारा (short-duration current) के लिए।
- इसकी सुई का विक्षेपण आवेश (Q = I·t) के समानुपाती होता है, न कि स्थिर धारा के।
Quick Facts:
- सामान्य गैल्वेनोमीटर (स्पंदनशील) धारा (current) मापता है।
- बैलिस्टिक गैल्वेनोमीटर आवेश (charge) मापता है, इसका उपयोग फ्लक्स मापन (fluxmeter) में होता है।
धारा वाहक एक सीधे चालक से दूरी r, 2r और 3r पर तीन बिंदुओं P, Q और S पर विचार कीजिये। निम्नलिखित में से कौन-सा संबंध क्रमशः बिंदु P, Q और S पर चुंबकीय क्षेत्र Bp, BQ और BS के परिमाण के बारे में सत्य है?
- Bp > BQ > BS
- BS > Bp > BQ
- BQ > BS > Bp
- Bp = BQ = BS
Explanation:
- सीधे धारावाही चालक के लिए चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण B ∝ 1/r (दूरी के व्युत्क्रमानुपाती)।
- r < 2r < 3r ⇒ B(P) > B(Q) > B(S) (क्योंकि P निकटतम है, इसलिए क्षेत्र सबसे अधिक, S सबसे दूर, इसलिए सबसे कम)।
Quick Facts:
- B = μ₀I/(2πr) (अनंत लंबे चालक के लिए)
- क्षेत्र की तीव्रता चालक से दूरी बढ़ने पर घटती है (व्युत्क्रमानुपाती नियम)।
फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम के अनुसार, अंगूठा किस दिशा को दर्शाता है?
- चालक की गति
- चुंबकीय फ्लक्स
- प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF)
- चुंबकीय बल
Explanation:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम (FRHR): अंगूठा (Thumb) → गति (Motion) की दिशा (चालक की), तर्जनी (Index) → चुंबकीय क्षेत्र (Field), मध्यमा (Middle) → प्रेरित धारा (Current/EMF) की दिशा।
- यह जनरेटर (generator) में प्रेरित EMF की दिशा ज्ञात करने के लिए है।
Quick Facts:
- FLHR (बायाँ): Thumb = Force, Index = Field, Middle = Current (Motor)
- FRHR (दायाँ): Thumb = Motion, Index = Field, Middle = Current (Generator)
एक दंड चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या दर्शाती हैं?
- गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र
- चुंबक के चारों ओर वायु का प्रवाह
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और प्रबलता
- चुंबक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की गति
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic field lines) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (प्रत्येक बिंदु पर स्पर्श रेखा) और प्रबलता (रेखाओं की सघनता – जितनी अधिक सघन, उतना अधिक प्रबल क्षेत्र) को प्रदर्शित करती हैं।
- ये क्षेत्र की एक दृश्यात्मक (visual) प्रस्तुति हैं।
Quick Facts:
- रेखाओं की दिशा: N → S (बाहर), S → N (अंदर)
- सघनता (density) क्षेत्र की प्रबलता (strength) को दर्शाती है – ध्रुवों के निकट अधिक सघन।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता सही है?
- ये सदैव संवृत लूप बनाती हैं।
- ये विवृत वक्र होती हैं।
- ये एक दूसरे को प्रतिच्छेदित करती हैं।
- ये सदैव समान ध्रुव पर प्रारंभ और समापन करती हैं।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव संवृत (closed) लूप बनाती हैं, अर्थात ये कहीं से प्रारंभ नहीं होतीं या समाप्त नहीं होतीं (विद्युत क्षेत्र रेखाओं के विपरीत, जो आवेश पर प्रारंभ/समाप्त होती हैं)।
- वे कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं, और N से बाहर, S से अंदर जाती हैं (अंदर S से N तक)।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का संवृत होना इस बात का संकेत है कि चुंबकीय एकध्रुव (magnetic monopole) अस्तित्व में नहीं है (गॉस का चुंबकत्व का नियम: ∇·B = 0)।
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा किसी कुंडली में विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है, इसमें शामिल है:
- प्रणाली में दिव्यपरिवर्तक का अंतर्वेशन
- कुंडल और चुंबक की आपेक्षिक गति
- स्थिर स्थिति में चुंबक और कुंडली
- प्रणाली में गैल्वेनोमीटर की उपस्थिति
Explanation:
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के लिए कुंडली और चुंबक के बीच आपेक्षिक गति (relative motion) आवश्यक है – इससे फ्लक्स में परिवर्तन होता है, जो EMF प्रेरित करता है।
- स्थिर चुंबक और कुंडली से कोई प्रेरण नहीं होगी।
Quick Facts:
- फैराडे का नियम: ε = -N dΦ/dt (फ्लक्स परिवर्तन की दर) – आपेक्षिक गति ही फ्लक्स परिवर्तन का कारण है।
- यह जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर, माइक्रोफोन आदि का आधार है।
एक वाणिज्यिक मोटर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- (a) यह स्थायी चुंबक के स्थान पर विद्युत चुंबक का उपयोग करता है।
- (b) यह नर्म लोहे की कोर का उपयोग करता है।
- निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल (a)
- केवल (b)
- (a) और (b) दोनों
- न तो (a) न ही (b)
Explanation:
- वाणिज्यिक (व्यावहारिक) मोटर में, स्थायी चुंबक के स्थान पर विद्युत चुंबक (electromagnet) का उपयोग किया जाता है (क्योंकि यह अधिक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और नियंत्रित किया जा सकता है) – (a) सही।
- आर्मेचर (armature) में नर्म लोहे की कोर (soft iron core) का उपयोग होता है, जो चुंबकीय प्रवाह को बढ़ाता है और मोटर की दक्षता बढ़ाता है – (b) सही।
Quick Facts:
- वाणिज्यिक मोटर में: फील्ड चुंबक → विद्युत चुंबक, आर्मेचर → नर्म लोहा कोर, कम्यूटेटर → विभाजित वलय, ब्रश → कार्बन
- यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
एक लंबे चालक तार में धारा प्रवाहित हो रही है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
- यदि हम धारा की दिशा उलट देते हैं, तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी उलट जाएगी।
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए हम फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम का उपयोग कर सकते हैं।
- तार से दूर जाने पर चुंबकीय क्षेत्र कम होता जाता है।
- यदि हम धारा बढ़ाते हैं, तो चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।
Explanation:
- सीधे चालक के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाएँ हाथ के अंगूठे (Right-hand thumb rule) द्वारा ज्ञात होती है, फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (FLHR) से नहीं (FLHR बल की दिशा के लिए है, जब चालक चुंबकीय क्षेत्र में हो)।
- अन्य कथन: धारा उलटने पर क्षेत्र की दिशा उलट जाती है (सत्य), B ∝ 1/r (दूरी पर, सत्य), B ∝ I (धारा के समानुपाती, सत्य)।
Quick Facts:
- दाएँ हाथ का अंगूठा नियम: अंगूठा → I, उंगलियाँ → B की दिशा
- फ्लेमिंग का बायाँ नियम (FLHR) बल (Force) के लिए है, जब धारा और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर लंबवत हों।
एक प्रत्यावर्ती धारा जनित्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
- विद्युत चुंबकत्व
- धारावाही चालक पर बल
- विद्युत धारा का ताप प्रभाव
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण
Explanation:
- AC जनित्र (Alternating Current Generator) विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है – इसमें एक कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, जिससे प्रेरित EMF उत्पन्न होता है (जो प्रत्यावर्ती होता है)।
- यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
Quick Facts:
- AC जनरेटर में स्लिप रिंग (slip rings) का उपयोग होता है, जिससे धारा की दिशा प्रत्यावर्ती होती है।
- DC जनरेटर में कम्यूटेटर (commutator) का उपयोग होता है।
विद्युत चुंबक में, ऊर्जा ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है।
- चुंबकीय, ऊष्मीय
- विद्युत, चुंबकीय
- विद्युत, प्रकाश
- विद्युत, ऊष्मीय
Explanation:
- विद्युत चुंबक (Electromagnet) में, विद्युत ऊर्जा (electric energy) को चुंबकीय ऊर्जा (magnetic energy) में परिवर्तित किया जाता है – यह धारा प्रवाहित करने पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के रूप में संग्रहीत होती है।
- यह विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव है।
Quick Facts:
- विद्युत चुंबक का उपयोग: मोटर, जनरेटर, सोलेनॉइड वाल्व, क्रेन (भारी धातु उठाने) में होता है।
- ऊर्जा रूपांतरण: Electric → Magnetic (विद्युत चुंबक), Mechanical → Electric (जनरेटर), Electric → Mechanical (मोटर)।
परिनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र बढ़ाया जाता है।
- धारा की दिशा बदलकर
- इसके अंदर नरम लौहे का क्रोड़ प्रविष्ट करके
- परिनालिका की दिशा बदलकर
- फेरों की संख्या कम करके
Explanation:
- सोलेनॉइड के अंदर नर्म लोहे (soft iron) की कोर डालने से चुंबकीय क्षेत्र बहुत बढ़ जाता है, क्योंकि नर्म लोहे की उच्च चुंबकीय पारगम्यता (μ_r >> 1) होती है – यह विद्युत चुंबक का सिद्धांत है।
- फेरों की संख्या बढ़ाने या धारा बढ़ाने से भी क्षेत्र बढ़ता है, पर ‘बढ़ाया जाता है’ का अर्थ कोर डालने से है (सबसे प्रभावी तरीका)।
Quick Facts:
- B = μ₀ μ_r n I (नर्म लोहे के लिए μ_r ≈ 200-5000)
- नर्म लोहे को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह अस्थायी चुंबक है (धारा हटते ही चुंबकीय गुण खो देता है)।
फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम में अंगूठा किस दिशा को दर्शाता है?
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
- प्रेरित धारा की दिशा
- गति की दिशा
- वोल्टता की दिशा
Explanation:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम (FRHR) – अंगूठा (Thumb) → गति (Motion) की दिशा (चालक की) को दर्शाता है।
- यह जनरेटर (generator) में उपयोग होता है, जहाँ यांत्रिक गति से विद्युत उत्पन्न होती है।
Quick Facts:
- FRHR: Thumb = Motion (गति), Index = Field (क्षेत्र), Middle = Current (धारा) – ‘FIM’ के रूप में याद रखें (दाएँ हाथ के लिए)।
अनुचुंबकीय पदार्थ हैं –
- लोहे को क्यूरी बिंदु से ऊपर गर्म करने पर उत्पन्न होते हैं
- चुंबक द्वारा दुर्बलता से प्रतिकर्षित
- चुंबक द्वारा दुर्बलता से आकर्षित
- व्यास चुंबकीय पदार्थों के समान
Explanation:
- अनुचुंबकीय पदार्थ (Paramagnetic) – इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, और ये बाहरी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा दुर्बलता से आकर्षित (weakly attracted) होते हैं।
- प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) → दुर्बलता से प्रतिकर्षित, लौहचुंबकीय (Ferromagnetic) → प्रबलता से आकर्षित।
Quick Facts:
- उदाहरण: अनुचुंबकीय – Al, Pt, Mn, O₂; प्रतिचुंबकीय – Bi, Cu, Pb, जल; लौहचुंबकीय – Fe, Ni, Co
- लौहचुंबकीय क्यूरी तापमान से ऊपर अनुचुंबकीय हो जाते हैं।
एक चुंबकीय क्षेत्र में स्थापित एक सीधे चालक पर कार्यरत बल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- (a) बल की दिशा चालक में धारा की दिशा पर निर्भर नहीं करती है।
- (b) बल की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा पर निर्भर करती है, जिसमें चालक रखा जाता है।
- उपरोक्त में से कौन-सा कथन सही है?
- केवल (a)
- केवल (b)
- (a) और (b) दोनों
- न तो (a) न ही (b)
Explanation:
- F = B I L sin θ, बल की दिशा धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों पर निर्भर करती है (फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम द्वारा)।
- अतः (a) ‘निर्भर नहीं करती’ – गलत है।
- (b) बल की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा पर निर्भर करती है – सत्य है।
Quick Facts:
- Fleming का बायाँ हाथ नियम: अंगूठा (Force) → I और B दोनों पर निर्भर
- यदि I या B की दिशा उलट दी जाए, तो बल की दिशा उलट जाती है (यदि दोनों उलटें, तो बल की दिशा समान रहेगी)।
जब किसी धारा वाहक कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल उत्पन्न होता है। यह निम्न का कार्य सिद्धांत है:
- शीतक
- मोटर
- टरबाइन
- जनित्र
Explanation:
- धारावाही कुंडली पर चुंबकीय क्षेत्र में बल का अनुभव विद्युत मोटर (Electric Motor) का कार्य सिद्धांत है – इसमें विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है (कुंडली घूमती है)।
- जनरेटर (Generator) विपरीत प्रक्रिया है – यांत्रिक → विद्युत (प्रेरण पर आधारित)।
Quick Facts:
- मोटर: चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल (F = BIL)
- जनरेटर: चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में प्रेरित EMF (फैराडे का नियम)
जब एक चुंबक को गैल्वेनोमीटर से जुड़ी कुंडली में ले जाया जाता है, तो कुंडली में धारा प्रेरित होती है। प्रेरित विद्युत धारा निम्नलिखित में से किस कारक पर निर्भर नहीं करती?
- कुंडली के घुमावों की संख्या
- चुंबक का ध्रुव सामर्थ्य
- चुंबक की गति का वेग
- कुंडली में जुड़े गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध
Explanation:
- प्रेरित EMF (ε) = -N dΦ/dt, यह N (फेरों की संख्या), चुंबकीय फ्लक्स (B·A) (जो ध्रुव सामर्थ्य पर निर्भर करता है), और फ्लक्स परिवर्तन की दर (गति/वेग) पर निर्भर करता है।
- प्रेरित धारा I = ε/R (जहाँ R = कुल प्रतिरोध – कुंडली + गैल्वेनोमीटर)। गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध धारा के परिमाण को प्रभावित करता है, पर EMF (प्रेरित वोल्टता) को नहीं – प्रश्न ‘प्रेरित विद्युत धारा’ पूछ रहा है, पर यदि EMF स्थिर है, तो धारा प्रतिरोध पर निर्भर करेगी, पर ‘EMF’ पर निर्भर नहीं – प्रश्न में ‘प्रेरित विद्युत धारा’ (current) कहा है, जो प्रतिरोध पर निर्भर करती है – पर कई प्रश्नों में ‘प्रेरित EMF’ को ‘धारा’ कह दिया जाता है, पर यहाँ ‘कारक’ के रूप में ‘गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध’ सही उत्तर है, क्योंकि EMF उस पर निर्भर नहीं करता।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF: ε = -N dΦ/dt (फैराडे)
- प्रेरित धारा: I = ε/R – अतः धारा प्रतिरोध पर निर्भर करती है, पर EMF नहीं – इस प्रश्न का सही उत्तर ‘गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध’ है, क्योंकि यह EMF का कारक नहीं है।
जब किसी दंड चुंबक के पास एक दिक्सूचक सुई लाई जाती है, तो वह क्यों विक्षेपित हो जाती है?
- दिक्सूचक सुई एक छोटा दंड चुंबक होती है।
- दिक्सूचक सुई अचुंबकीय होती है।
- दिक्सूचक सुई में विद्युत आवेश होता है।
- दिक्सूचक सुई लोहे से बनी होती है।
Explanation:
- दिक्सूचक (कम्पास) सुई एक छोटा दंड चुंबक होती है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (या किसी बाहरी चुंबक) के अनुसार संरेखित (align) होती है, इसलिए जब कोई दंड चुंबक पास लाया जाता है, तो वह विक्षेपित हो जाती है।
- यह चुंबकीय बलों की क्रिया के कारण होता है।
Quick Facts:
- कम्पास सुई का उत्तरी (N) सिरा पृथ्वी के उत्तरी चुंबकीय ध्रुव (जो भौगोलिक दक्षिण है) की ओर संकेत करता है।
- यह स्थायी चुंबक या विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का पता लगाने का सरल उपकरण है।
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम में अंगूठा और मध्यमा उंगली के बीच का कोण है:
- 90°
- 45°
- 120°
- 180°
Explanation:
- फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (FLHR) में, तीनों उंगलियाँ (अंगूठा, तर्जनी, मध्यमा) परस्पर 90° (लंबवत) पर होती हैं, क्योंकि बल (F), चुंबकीय क्षेत्र (B), और धारा (I) तीनों परस्पर लंबवत होते हैं।
- यह नियम केवल तभी लागू होता है जब तीनों राशियाँ परस्पर लंबवत हों।
Quick Facts:
- FLHR: F (अंगूठा) ⊥ B (तर्जनी) ⊥ I (मध्यमा)
- यह मोटर (motor) में बल की दिशा ज्ञात करने के लिए है।
यदि किसी चालक में से प्रवाहित धारा की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बीच का कोण शून्य है, तो चालक पर कार्य करने वाला बल (F) होगा।
- शून्य
- 2F
- F/2
- F
Explanation:
- बल का सूत्र: F = B I L sin θ (जहाँ θ = I और B के बीच कोण)
- यदि θ = 0°, तो sin 0° = 0 ⇒ F = 0 (बल शून्य)
- अतः जब धारा और चुंबकीय क्षेत्र समानांतर (parallel) हों, तो चालक पर कोई बल नहीं लगता।
Quick Facts:
- F अधिकतम (max) होता है जब θ = 90° (sin 90° = 1)
- यही कारण है कि मोटर में कुंडली को क्षेत्र के लंबवत रखा जाता है।
निम्नलिखित में से कौन सा नियम या नियम सही ढंग से बल, चुंबकीय क्षेत्र और धारा की दिशा का वर्णन करता है?
- एम्पियर का परिपथीय नियम
- दायाँ हाथ का अंगूठा नियम
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ का नियम
- ताड़ नियम
Explanation:
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ का नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) बल (Force), चुंबकीय क्षेत्र (Field), और धारा (Current) की दिशा के बीच संबंध बताता है।
- यह विद्युत मोटर (motor) में बल की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग होता है।
Quick Facts:
- एम्पियर का परिपथीय नियम: B और I के बीच संबंध (क्षेत्र का परिमाण)
- दायाँ हाथ का अंगूठा नियम: धारा और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (बल नहीं)
- ताड़ नियम (Palm rule): FLHR का एक रूप
ग्रह सूर्य के चारों ओर किस बल के कारण घूमते हैं?
- चुंबकीय
- घर्षण
- विद्युत
- गुरुत्वाकर्षण
Explanation:
- ग्रह (planets) सूर्य के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) के कारण घूमते हैं, जो न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम (F = G M m / r²) द्वारा निर्धारित होता है।
- यह बल केंद्र की ओर (अभिकेन्द्रमुखी) कार्य करता है, जो ग्रहों को उनकी कक्षाओं में बनाए रखता है।
Quick Facts:
- गुरुत्वाकर्षण बल सबसे दुर्बल मौलिक बलों में से एक है, पर बड़े पैमाने (खगोलीय) पर यह प्रमुख है।
- यही बल पृथ्वी पर वस्तुओं के भार (weight) का कारण है।
एक परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न किसके समान होता है?
- दंड चुंबक
- होर्सशू चुंबक
- बटन चुंबक
- वलय चुंबक
Explanation:
- एक धारावाही सोलेनॉइड (परिनालिका) के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न दंड चुंबक (bar magnet) के समान होता है – इसका एक सिरा उत्तरी (N) और दूसरा दक्षिणी (S) ध्रुव के रूप में व्यवहार करता है।
- बाहर N से S, अंदर S से N – बिल्कुल दंड चुंबक की तरह।
Quick Facts:
- सोलेनॉइड को विद्युत चुंबक भी कहा जाता है, जब इसके अंदर नर्म लोहा होता है।
- ध्रुवों की पहचान: धारा की दिशा से (दाएँ हाथ का नियम) – यदि धारा दक्षिणावर्त (clockwise) है तो N, वामावर्त (anticlockwise) तो S।
किसी दंड चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसका उपयोग करके नहीं खींची जा सकती हैं?
- लोहे के बुरादे
- चुंबकीय दिक्सूचक
- लकड़ी के कण
- दूसरा दंड चुंबक
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ लकड़ी के कणों (wood particles) द्वारा नहीं खींची जा सकतीं, क्योंकि लकड़ी अचुंबकीय (non-magnetic) है और चुंबकीय क्षेत्र से प्रभावित नहीं होती (लोहे के बुरादे की तरह संरेखित नहीं होती)।
- लोहे के बुरादे (iron filings), चुंबकीय कम्पास, या दूसरे चुंबक का उपयोग क्षेत्र रेखाओं का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
Quick Facts:
- लोहे के बुरादे (Iron filings) क्षेत्र रेखाओं के पैटर्न को दिखाने के लिए सबसे सामान्य तरीका है (प्रयोगशाला में)।
- लकड़ी, काँच, प्लास्टिक चुंबकीय क्षेत्र से प्रभावित नहीं होते।
दक्षिण हस्त अंगूठे के नियम के अनुसार, चालक के चारों ओर मुड़ी हुई अंगुलियाँ किस प्रावल को दर्शाती हैं?
- सुई का विक्षेपण
- चुंबकीय क्षेत्र
- बल
- धारा
Explanation:
- दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम (Right-Hand Thumb Rule) में, अंगूठा → धारा (I) की दिशा, और मुड़ी हुई अंगुलियाँ → चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा (वृत्ताकार) को दर्शाती हैं।
- यह नियम सीधे धारावाही चालक के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
Quick Facts:
- इसे ‘मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम’ भी कहते हैं (corkscrew rule)।
- यह क्षेत्र की दिशा बताता है, परिमाण नहीं।
प्रेरित धारा अधिकतम होती है, जब –
- कुंडली की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत होती है।
- कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर दिशा में रखा जाता है।
- कुंडली की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर होती है।
- कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत दिशा में रखा जाता है।
Explanation:
- प्रेरित EMF = -dΦ/dt = B A ω sin θ (जनरेटर में), यह तब अधिकतम होता है जब θ = 90° (क्षेत्र और कुंडली के तल के लंबवत) – अर्थात जब कुंडली की गति (घूर्णन) क्षेत्र के लंबवत होती है, तो फ्लक्स परिवर्तन की दर अधिकतम होती है।
- सरल शब्दों में: जब कुंडली का तल चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर होता है (या गति लंबवत होती है), तो प्रेरित धारा अधिकतम होती है।
Quick Facts:
- जनरेटर में, प्रेरित EMF sin θ पर निर्भर करता है – यह अधिकतम होता है जब कुंडली का तल क्षेत्र के समानांतर हो (θ=90°)।
- जब कुंडली का तल क्षेत्र के लंबवत हो (θ=0°), तो EMF शून्य होता है।
फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम तभी लागू किया जा सकता है जब प्रयुक्त चुंबकीय क्षेत्र की दिशा, चालक की गति और प्रेरित धारा की दिशा एक दूसरे के साथ _____ परस्पर लंबवत हों।
- 60°
- 45°
- 30°
- 90°
Explanation:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम (FRHR) तीनों राशियों – चुंबकीय क्षेत्र (B), गति (v), और प्रेरित धारा (I) – के बीच 90° (लंबवत) होने पर लागू होता है।
- यह जनरेटर (generator) में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए है।
Quick Facts:
- FRHR: Thumb (Motion) ⊥ Index (Field) ⊥ Middle (Current)
- यदि कोई भी दो समानांतर हों, तो नियम लागू नहीं होता (EMF शून्य हो सकता है)।
धारावाही वृत्ताकार कुंडली के कारण चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण n फेरों की संख्या के साथ _____ के रूप में बदलता है।
- 1/2
- n
- n²
- 1/4
Explanation:
- वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ n I / (2R) (जहाँ n = फेरों की संख्या)।
- अतः B ∝ n (फेरों की संख्या के अनुक्रमानुपाती)।
- उदाहरण: यदि फेरे दोगुने कर दिए जाएँ, तो B दोगुना हो जाता है।
Quick Facts:
- B = μ₀ n I / (2R) – केंद्र पर (n फेरे)
- यदि त्रिज्या (R) या धारा (I) भी बदले, तो वे भी प्रभावित करेंगे (B ∝ I/R)
विद्युत-चुंबकीय प्रेरण वह घटना है जिसमें:
- एक चालक का गतिशील संवृत्त लूप दूसरे चालक के संवृत्त लूप में EMF प्रेरित करता है
- एक गतिमान चुंबक किसी चालक के संवृत्त लूप पर बल लगाता है
- एक गतिमान चुंबक किसी चालक के संवृत्त लूप में EMF प्रेरित करता है
- धारा प्रवाहित करने वाली एक गतिमान कुंडली चुंबक पर बल उत्पन्न करती है
Explanation:
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) वह घटना है जिसमें एक गतिमान चुंबक (या बदलता चुंबकीय क्षेत्र) किसी चालक (बंद लूप) में EMF (विभवांतर) प्रेरित करता है।
- इसकी खोज माइकल फैराडे (Faraday) ने की थी।
Quick Facts:
- फैराडे का नियम: ε = -N dΦ/dt
- यह जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर, माइक्रोफोन, इंडक्शन कुकर आदि का आधार है।
फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम _____ में गतिमान चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
- विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र
- गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र
- विद्युत क्षेत्र
- चुम्बकीय क्षेत्र
Explanation:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम (FRHR) का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) में गतिमान चालक में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
- यह जनरेटर (generator) के सिद्धांत पर आधारित है।
Quick Facts:
- FRHR: Thumb = Motion (गति), Index = Field (क्षेत्र), Middle = Current (धारा)
- FLHR: बायाँ हाथ – मोटर (Motor) – बल के लिए
विद्युत मोटर में, ______ बैटरी के टर्मिनलों और कम्यूटेटर के बीच संपर्क के रूप में कार्य करता है।
- प्लग कुंजी
- ब्रश
- विभाजित वलय
- आर्मेचर
Explanation:
- विद्युत मोटर (Electric motor) में ब्रश (Brushes) – जो सामान्यतः कार्बन (carbon) से बने होते हैं – बैटरी (या विद्युत स्रोत) के टर्मिनलों और कम्यूटेटर (विभाजित वलय) के बीच विद्युत संपर्क (contact) का कार्य करते हैं।
- ब्रश घूमने वाले कम्यूटेटर के साथ स्लाइड करते हैं, जिससे धारा का प्रवाह निरंतर बना रहता है।
Quick Facts:
- कम्यूटेटर (Commutator): विभाजित वलय (split rings) – धारा की दिशा को प्रत्यावर्ती से एकदिशीय में बदलने (या मोटर में दिशा बनाए रखने) के लिए
- ब्रश: स्थिर भाग (बैटरी) और गतिशील भाग (आर्मेचर) के बीच संपर्क
चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- किसी भी बिंदु पर इसकी दिशा चुंबकीय कम्पास द्वारा मापी जाती है
- यह एक अदिश राशि है
- यह हमेशा सीधी रेखाओं के रूप में होता है
- यह केवल चुंबक के बाहर मौजूद होता है
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) एक सदिश (vector) राशि है, जिसकी दिशा किसी भी बिंदु पर चुंबकीय कम्पास (compass) या दिक्सूचक सुई द्वारा ज्ञात की जा सकती है (सुई का उत्तरी सिरा क्षेत्र की दिशा में संकेत करता है)।
- यह चुंबक के अंदर भी मौजूद होता है (अंदर S → N), और क्षेत्र रेखाएँ वक्र (curved) होती हैं, सीधी नहीं (सिवाय एकसमान क्षेत्र के)।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा: उस बिंदु पर रखी कम्पास सुई के N ध्रुव की दिशा
- B की SI इकाई: टेस्ला (T) = N/(A·m)
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी परस्पर प्रतिच्छेद नहीं करती हैं। इस तथ्य का तात्पर्य है कि चुंबकीय क्षेत्र में सदैव ______ होता है।
- निर्वात में किसी भी बिंदु पर दोहरे मान
- निर्वात में किसी भी बिंदु पर तिहरा मान
- निर्वात में किसी भी बिंदु पर एकाधिक मान
- निर्वात में किसी भी बिंदु पर एक अद्वितीय मान
Explanation:
- यदि दो क्षेत्र रेखाएँ प्रतिच्छेद (intersect) करें, तो उस बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ होंगी (जो असंभव है, क्योंकि किसी बिंदु पर क्षेत्र की दिशा अद्वितीय (unique) होती है)।
- इसलिए, क्षेत्र रेखाएँ कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं, जिससे प्रत्येक बिंदु पर क्षेत्र का एक अद्वितीय मान (unique value) होता है।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश क्षेत्र है – प्रत्येक बिंदु पर एक निश्चित दिशा और परिमाण
- यही कारण है कि विद्युत क्षेत्र रेखाएँ भी प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
छह फेरी वाली एक धारावाही वृत्ताकार कुंडली के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, समान धारावाही एकल वृत्ताकार पाश (लूप) के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के ______ के बराबर होगा।
- 6 गुने
- 2 गुने
- 8 गुने
- 4 गुने
Explanation:
- B = μ₀ n I / (2R) (n = फेरों की संख्या)
- B ∝ n, अतः 6 फेरों के लिए B = 6 × (एक फेरे का B)
- इसलिए चुंबकीय क्षेत्र 6 गुना होगा।
Quick Facts:
- यही कारण है कि अधिक फेरे वाली कुंडली (जैसे सोलेनॉइड) अधिक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
- यदि फेरे दोगुने हो जाएँ, तो क्षेत्र दोगुना (अन्य कारक समान रहने पर)।
______ पर विद्युत चुंबक का निर्माण होता है।
- कांच की छड के चारों ओर कुंडलित कुंडली के माध्यम से धारा प्रवाहित करने
- चूंबक को धारावाही चालक के पास में रखने
- चूंबक से धारा के गुजरने
- मृदु लोहे की कोर के चारों ओर कुंडलित कुंडली के माध्यम से धारा प्रवाहित करने
Explanation:
- विद्युत चुंबक (Electromagnet) नर्म लोहे (soft iron) की कोर के चारों ओर कुंडली लपेटकर और उसमें धारा प्रवाहित करके बनाया जाता है – इससे चुंबकीय क्षेत्र अत्यधिक प्रबल हो जाता है (नर्म लोहा उच्च पारगम्यता के कारण)।
- काँच, लकड़ी आदि अचुंबकीय होते हैं – इनसे विद्युत चुंबक नहीं बनता।
Quick Facts:
- नर्म लोहा: उच्च पारगम्यता, कम निग्रहिता – धारा हटते ही चुंबकीय गुण खो देता है (अस्थायी चुंबक)।
- विद्युत चुंबक का उपयोग: क्रेन, रिले, स्पीकर, मोटर, जनरेटर में होता है।
चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन द्वारा प्रेरित धारा उत्पन्न करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- विद्युतचुंबकत्व
- विद्युत-चुंबकीय प्रेरण
- विद्युत चालन
- विद्युत चुंबकीय विकिरण
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन (या फ्लक्स परिवर्तन) द्वारा कुंडली में धारा प्रेरित करने की प्रक्रिया को विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहते हैं।
- इसकी खोज माइकल फैराडे (1831) ने की थी।
Quick Facts:
- फैराडे का नियम: ε = -N dΦ/dt
- यह जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर, इंडक्शन कुकर आदि का मूल सिद्धांत है।
निम्नलिखित स्थितियों में से, एक बंद संवाहक कुंडली में विभवांतर तब प्रेरित होता है जब:
- जब बंद कुंडली को केवल दंड चूंबक की ओर गतिमान किया जाता है
- या तो बार चूंबक को बंद कुंडली की ओर ले जाया जाता है या बंद कुंडली को बार चूंबक की ओर ले जाया जाता है
- बार चूंबक और बंद कुंडली दोनों समान गति और समान दिशा में घूम रहे हैं
- एक बार चूंबक को केवल बंद कुंडली की ओर ले जाया जाता है
Explanation:
- प्रेरित EMF (विभवांतर) के लिए चुंबक और कुंडली के बीच आपेक्षिक गति (relative motion) आवश्यक है – चाहे चुंबक चले या कुंडली, या दोनों विपरीत दिशा में चलें – फ्लक्स परिवर्तन होना चाहिए।
- यदि दोनों समान गति और समान दिशा में चलें, तो कोई सापेक्ष गति नहीं – EMF = 0।
Quick Facts:
- यह फैराडे के प्रयोग का सार है – चुंबक या कुंडली की गति से फ्लक्स परिवर्तन
- स्थिति (i) और (iv) आपेक्षिक गति के उदाहरण हैं, पर सबसे सामान्य कथन ‘या तो… या’ है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक दंड चुंबक के अंदर इस प्रकार गति करती हुई प्रतीत होती है:
- उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक
- केवल मध्य से उत्तरी ध्रुव तक
- दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव तक
- मध्य से सभी ओर
Explanation:
- दंड चुंबक के अंदर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणी (S) ध्रुव से उत्तरी (N) ध्रुव की ओर निर्देशित होती हैं, जिससे संवृत लूप (closed loop) बनते हैं (बाहर N → S)।
- यह सभी चुंबकों (दंड, सोलेनॉइड, U-आकार) के लिए सत्य है।
Quick Facts:
- बाहर: N → S, अंदर: S → N – यह क्षेत्र रेखाओं की निरंतरता (continuity) सुनिश्चित करता है।
- यही कारण है कि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संवृत होती हैं।
एक दंड चुंबक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ:
- इसके उत्तरी ध्रुव से उत्पन्न होती हैं और इसके दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
- इसके उत्तरी ध्रुव से उत्पन्न होती हैं और इसके दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
- इसके दक्षिणी ध्रुव से उत्पन्न होती हैं और इसके उत्तरी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
- इसके उत्तरी ध्रुव से उत्पन्न होती हैं और इसके पूर्वी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
Explanation:
- दंड चुंबक के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी (N) ध्रुव से उत्पन्न (start) होती हैं और दक्षिणी (S) ध्रुव पर समाप्त (end) होती हैं।
- यह चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की पारंपरिक दिशा है (N → S बाहर)।
Quick Facts:
- अंदर: S → N (विपरीत)
- यह परिपाटी (convention) इसलिए है क्योंकि कम्पास सुई का N ध्रुव क्षेत्र की दिशा में संकेत करता है, और N ध्रुव से बाहर निकलती रेखाएँ S पर जाती हैं।
चूंबक के आसपास के उस क्षेत्र को क्या कहते हैं, जहां चूंबक के बल का पता लगाया जा सकता है?
- चूंबकीय ध्रुव
- चूंबकीय जोन
- चूंबकीय क्षेत्र
- चूंबकीय रेखा
Explanation:
- चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र (region) जिसमें उसका बल (चुंबकीय प्रभाव) अनुभव किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) कहलाता है।
- इस क्षेत्र का पता लगाने के लिए कम्पास सुई, लोहे के बुरादे आदि का उपयोग किया जाता है।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश क्षेत्र (vector field) है – इसे B (चुंबकीय फ्लक्स घनत्व) द्वारा दर्शाया जाता है।
- SI इकाई: टेस्ला (T)
निम्नलिखित में से क्या ज्ञात करने के लिए दक्षिण-हस्त अंगूष्ठ नियम (right-hand thumb rule) का प्रयोग किया जाता है?
- धारा का परिमाण
- धारावाही चालक पर बल की दिशा
- तार का प्रतिरोध
- धारावाही चालक के परितः चूंबकीय क्षेत्र की दिशा
Explanation:
- दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम (Right-Hand Thumb Rule) धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- अंगूठा → धारा (I), मुड़ी हुई अंगुलियाँ → चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा (वृत्ताकार)।
Quick Facts:
- यह नियम सीधे चालक, सोलेनॉइड, वृत्ताकार लूप आदि के लिए उपयोगी है।
- बल की दिशा → फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम (FLHR)
एक चूंबक को जब कुंडली के पास ले जाया जाता है, तो प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। प्रेरित धारा के परिमाण को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग किया जा सकता है?
- (i) कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाना
- (ii) चूंबक की गति बढ़ाना
- (iii) कुंडली के तार की प्रतिरोधकता बढ़ाना
- केवल (i)
- केवल (iii)
- (i) और (ii) दोनों
- (i) और (ii) दोनों
Explanation:
- प्रेरित EMF का परिमाण: ε = -N dΦ/dt – यह फेरों की संख्या (N) और फ्लक्स परिवर्तन की दर (dΦ/dt) (जो चुंबक की गति बढ़ाने से बढ़ती है) पर निर्भर करता है – अतः (i) और (ii) से धारा (या EMF) बढ़ता है।
- (iii) प्रतिरोधकता बढ़ाने से प्रतिरोध (R) बढ़ता है, जिससे धारा I = ε/R घट जाती है, इसलिए यह धारा को बढ़ाने का तरीका नहीं है।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF बढ़ाने के तरीके: (1) फेरे बढ़ाएँ, (2) चुंबक को तीव्र गति से घुमाएँ, (3) प्रबल चुंबक का उपयोग करें
- धारा बढ़ाने के लिए EMF बढ़ाएँ या प्रतिरोध घटाएँ।
यदि 4Ω प्रतिरोध के एक चालक की कुंडली में प्रेरित धारा 1 mA है, तो कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) है:
- 1 mV
- 4 V
- 1 V
- 4 mV
Equation: E = I × R = 1 × 10⁻³ × 4 = 4 × 10⁻³ V = 4 mV
Explanation:
- ओम के नियम (Ohm’s law) के अनुसार, V = IR (वोल्टेज = धारा × प्रतिरोध)।
- I = 1 mA = 1 × 10⁻³ A, R = 4 Ω ⇒ V = 4 × 10⁻³ V = 4 mV
- EMF (विद्युत वाहक बल) भी वोल्टेज के समान है (बाह्य स्रोत के लिए)।
Quick Facts:
- 1 mA = 10⁻³ A, 1 mV = 10⁻³ V
- ओम का नियम: V = I × R (प्रतिरोधक परिपथ के लिए)
एक चूंबक, जब किसी कुंडली के पास ले जाया जाता है, तो कुंडली में एक प्रेरित विभवांतर उत्पन्न करता है। क्या होता है जब हम कुंडली के पास चूंबक की गति बढ़ाते हैं?
- कुण्डली में प्रेरित धारा समान रहती है।
- प्रेरित विभवांतर समान रहता है।
- कुण्डली में प्रेरित विभवान्तर घट जाता है।
- कुण्डली में प्रेरित विभवान्तर बढ़ जाता है।
Explanation:
- फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियम (Faraday’s law) के अनुसार, प्रेरित EMF चुंबकीय फ्लक्स (magnetic flux) के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
- चुंबक की गति बढ़ाने पर फ्लक्स परिवर्तन की दर बढ़ जाती है, जिससे प्रेरित विभवांतर (EMF) बढ़ जाता है, और इसलिए धारा भी बढ़ती है (यदि प्रतिरोध स्थिर हो)।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF (ε) = -dΦ/dt (फैराडे का नियम)
- गति बढ़ने से dΦ/dt बढ़ता है ⇒ EMF बढ़ता है।
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा एक चालक में एक परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र एक विभवांतर उत्पन्न करता है जो एक प्रेरित विद्युत धारा स्थापित करता है, _____ कहलाती है।
- उष्मीय प्रेरण
- चुंबकीय प्रेरण
- विद्युत प्रेरण
- वैद्युतचुंबकीय प्रेरण
Explanation:
- परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र द्वारा चालक में विभवांतर (EMF) उत्पन्न होने की प्रक्रिया को विद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहते हैं।
- इसकी खोज माइकल फैराडे (Michael Faraday) ने की थी।
Quick Facts:
- फैराडे का नियम: ε = -dΦ/dt
- लेन्ज़ का नियम (Lenz’s law) प्रेरित धारा की दिशा बताता है (ε = -dΦ/dt में ऋण चिह्न)।
एक घोड़े की नाल के आकार के चुंबक पर विचार करें जिसका उत्तरी ध्रुव पश्चिम की ओर और दक्षिणी ध्रुव पूर्व की ओर है। एक चालक छड़ को गैल्वेनोमीटर से क्षैतिज रूप से जोड़ा गया है। यदि इस छड़ को अब चुंबक के ध्रुवों के बीच लंबवत नीचे की ओर ले जाया जाता है, तो इसमें प्रेरित धारा की दिशा _____ होगी।
- पूर्व से पश्चिम दिशा
- पश्चिम से पूर्व दिशा
- उत्तर से दक्षिण दिशा
- दक्षिण से उत्तर दिशा
Explanation:
- यह प्रश्न फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) पर आधारित है, जिसका उपयोग प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा पश्चिम (N) से पूर्व (S) की ओर है (क्षैतिज, पूर्व-पश्चिम), और चालक की गति लंबवत नीचे की ओर है।
- फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम (अंगूठा = गति, तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र, मध्यमा = धारा) को लागू करने पर, प्रेरित धारा की दिशा उत्तर से दक्षिण (या दक्षिण से उत्तर, दिशा पर निर्भर करता है, पर विकल्पों में उत्तर-दक्षिण सही है) होगी।
Quick Facts:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम → जनरेटर (प्रेरित धारा)
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम → मोटर (बल)
फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम के अनुसार, जिसका उपयोग चुंबकीय क्षेत्र के अंदर रखे धारावाही चालक पर बल की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है, मध्यमा और तर्जनी क्रमशः _____ और _____ की दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
- बल, चुंबकीय क्षेत्र
- चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत धारा
- विद्युत धारा, चुंबकीय क्षेत्र
- चुंबकीय क्षेत्र, बल
Explanation:
- फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) में:
- तर्जनी (Forefinger) → चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) की दिशा
- मध्यमा (Middle finger) → विद्युत धारा (Current) की दिशा
- अंगूठा (Thumb) → बल (Force) की दिशा
- अतः मध्यमा = धारा, तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र।
Quick Facts:
- बायाँ हाथ → मोटर (धारा + क्षेत्र = बल)
- दायाँ हाथ → जनरेटर (गति + क्षेत्र = धारा)
क्षैतिज सीधे तार से होकर धारा पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है। पूर्वी छोर से देखने पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा होगी:
- तार के लंबवत तल में वामावर्त
- तार के लंबवत तल में दक्षिणावर्त
- तार के तल में वामावर्त
- तार के तल में दक्षिणावर्त
Explanation:
- दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule): यदि अंगूठा धारा की दिशा (पश्चिम → पूर्व) में हो, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं।
- पूर्वी छोर से देखने पर (अर्थात धारा की दिशा में देखने पर), क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणावर्त (clockwise) होती हैं।
Quick Facts:
- दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम: अंगूठा → धारा, उंगलियाँ → चुंबकीय क्षेत्र (वृत्ताकार)।
- धारा की दिशा में देखने पर, क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणावर्त होती हैं (यदि धारा आपकी ओर है, तो वामावर्त)।
सोलनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र होता है:
- एकसमान
- बीच में कमजोर
- बीच में मजबूत
- शून्य
Explanation:
- एक लंबे परिनालिका (solenoid) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है, अर्थात इसका परिमाण और दिशा अंदर सभी बिंदुओं पर समान होती है।
- यह क्षेत्र अक्ष के समानांतर होता है और बाहर लगभग शून्य होता है।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर B = μ₀ n I (n = प्रति मीटर फेरों की संख्या)
- यह एकसमान क्षेत्र विद्युत चुंबक (electromagnet) बनाने में उपयोगी है।
धारावाही परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- (a) परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र सीधी समानांतर रेखाओं के रूप में होता है।
- (b) परिनालिका के भीतर उत्पन्न प्रबल चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग चुंबकीय सामग्री के एक भाग को चुंबकित करने के लिए किया जा सकता है।
- उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल (a)
- ना तो (a) और ना ही (b)
- (a) और (b) दोनों
- केवल (b)
Explanation:
- कथन (a): परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र सीधी, समानांतर रेखाओं (uniform) के रूप में होता है। सत्य।
- कथन (b): इस प्रबल, एकसमान क्षेत्र का उपयोग लौहचुंबकीय (ferromagnetic) पदार्थों (जैसे नरम लोहा) को चुंबकित करने के लिए किया जा सकता है (यह विद्युत चुंबक का सिद्धांत है)। सत्य।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर B = μ₀ n I (निर्वात में)
- यदि अंदर लोहे का कोर (core) हो, तो B = μ₀ μ_r n I (μ_r = सापेक्ष पारगम्यता) – बहुत प्रबल हो जाता है।
यदि 10 Ω प्रतिरोध के चालक की कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल -2 V है, तो कुंडली में प्रेरित धारा क्या है?
- 2 A
- -2 A
- -0.2 A
- 0.2 A
Equation: I = V/R = -2/10 = -0.2 A
Explanation:
- ओम के नियम के अनुसार, I = V/R = -2 / 10 = -0.2 A
- ऋणात्मक चिह्न दिशा (लेन्ज़ के नियम के अनुसार) को दर्शाता है, पर परिमाण 0.2 A है।
Quick Facts:
- लेन्ज़ का नियम: प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि वह उस कारण (फ्लक्स परिवर्तन) का विरोध करे।
- ऋणात्मक EMF का अर्थ है कि धारा की दिशा विपरीत है।
एक अपरिवर्ती धारावाही वृत्तीय कुंडली में, निम्नलिखित में से कौन-सा कारक इसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण को प्रभावित नहीं करता है?
- कोर सामग्री की चुंबकीय पारगम्यता
- कुंडली के फेरों की संख्या
- कुंडली के वाइडिंग की दिशा
- कुंडली की त्रिज्या
Explanation:
- वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ n I / (2R) (या μ₀ N I / (2R) के रूप में), जहाँ N = फेरे, I = धारा, R = त्रिज्या, और μ₀ = निर्वात पारगम्यता (या कोर सामग्री की μ)।
- B का परिमाण N, I, R और μ (कोर सामग्री) पर निर्भर करता है, पर वाइंडिंग की दिशा (clockwise/counter-clockwise) केवल क्षेत्र की दिशा को प्रभावित करती है, परिमाण को नहीं।
Quick Facts:
- B = μ₀ N I / (2R) (केंद्र पर)
- फेरे बढ़ाने, धारा बढ़ाने या त्रिज्या घटाने से B बढ़ता है।
यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को इंगित करती है और अंगूठा किसी चालक की गति की दिशा को दर्शाता है, तो मध्यमा उसी प्रेरित धारा की दिशा को दिखाएगी, जब अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा एक दूसरे के लंबवत फैले हुए हों। इसे _____ कहा जाता है।
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ का नियम
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ का नियम
- दायाँ हाथ का अंगूठे का नियम
- कॉर्कस्कू नियम
Explanation:
- यहाँ अंगूठा = गति (motion), तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र (field), मध्यमा = प्रेरित धारा (induced current) – यह फ्लेमिंग का दायाँ हाथ का नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) है, जिसका उपयोग जनरेटर (प्रेरित धारा) की दिशा ज्ञात करने के लिए होता है।
- बायाँ हाथ का नियम: अंगूठा = बल (force), तर्जनी = क्षेत्र, मध्यमा = धारा (मोटर के लिए)।
Quick Facts:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ → जनरेटर (प्रेरित EMF/धारा)
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ → मोटर (बल)
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी _____ नहीं हो सकती हैं:
- एक दूसरे के लंबवत
- एक दूसरे के समानांतर
- समान रूप से वितरित
- असमान रूप से वितरित
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (magnetic field lines) एकसमान क्षेत्र में समानांतर (parallel) हो सकती हैं (जैसे परिनालिका के अंदर), या असमान रूप से वितरित हो सकती हैं।
- वे कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (intersect) नहीं कर सकतीं, पर ‘एक दूसरे के समानांतर नहीं’ गलत है – वे समानांतर हो सकती हैं।
- प्रश्न संभवतः ‘प्रतिच्छेद’ के संदर्भ में है, पर विकल्पों में ‘समानांतर’ दिया है, जो गलत है (क्योंकि वे समानांतर हो सकती हैं)।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सतत (continuous) बंद लूप (closed loops) होती हैं।
- वे एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं (यदि काटें, तो एक बिंदु पर दो दिशाएँ होंगी, जो असंभव है)।
एक चुंबक, जब किसी कुंडली के पास ले जाया जाता है, तो एक प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। प्रेरित धारा के परिमाण को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग किया जा सकता है?
- (i) कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाना
- (ii) चुंबक की गति बढ़ाना
- (iii) कुंडली के तार की प्रतिरोधकता बढ़ाना
- दोनों (i) और (ii)
- केवल (iii)
- दोनों (ii) और (iii)
- केवल (i)
Explanation:
- प्रेरित धारा I = ε/R = (dΦ/dt)/R
- (i) फेरे (N) बढ़ाने से Φ = BA cos θ में N गुना वृद्धि होती है, इसलिए ε और I बढ़ते हैं।
- (ii) चुंबक की गति बढ़ाने से dΦ/dt बढ़ता है, इसलिए ε और I बढ़ते हैं।
- (iii) प्रतिरोधकता (resistivity) बढ़ाने से R बढ़ता है, जिससे I = ε/R घटता है (यह I को बढ़ाने की विधि नहीं है)।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF: ε = -N dΦ/dt
- धारा बढ़ाने के लिए: फेरे बढ़ाएँ, गति बढ़ाएँ, प्रतिरोध घटाएँ।
एक विज्ञान की पुस्तक में A और B द्वारा नामांकित दो छड़ चुंबकों के चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को दर्शाया गया है। A में, क्षेत्र रेखाएं इसके दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं, और B में, इसके उत्तरी ध्रुव से तीन रेखाएं निकलती हैं। A की सामर्थ्य, B की सामर्थ्य की ______ होगी।
- दोगुनी
- तीन गुनी
- आधी
- के समान
Explanation:
- चुंबक की सामर्थ्य (strength) उसके उत्तरी ध्रुव से निकलने वाली (या दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करने वाली) क्षेत्र रेखाओं की संख्या के समानुपाती होती है।
- A में दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करने वाली रेखाएँ (जो उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं) की संख्या = 3 (B के उत्तरी ध्रुव से निकलने वाली रेखाओं के बराबर)।
- प्रश्न के अनुसार, A की सामर्थ्य, B की सामर्थ्य की तीन गुनी है? वास्तव में, A में 3 रेखाएँ हैं, B में 3 रेखाएँ हैं? यदि A में 3 रेखाएँ हैं, तो A और B समान हैं, पर विकल्पों में ‘तीन गुनी’ दिया है (यदि A में 9 रेखाएँ हों तो 3 गुनी)।
Quick Facts:
- क्षेत्र रेखाओं की संख्या = चुंबकीय प्रवाह (magnetic flux) का माप।
- उत्तरी ध्रुव से निकलने वाली (N) और दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करने वाली (S) रेखाओं की संख्या समान होती है (अंदर बंद लूप के कारण)।
फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम का उपयोग प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है जब चुंबकीय क्षेत्र और चालक की गति के बीच का कोण हो:
- 30°
- 0°
- 180°
- 90°
Explanation:
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Right-hand rule) तब लागू होता है जब चुंबकीय क्षेत्र (B) और चालक की गति (v) परस्पर लंबवत (perpendicular) होते हैं (θ = 90°)।
- प्रेरित EMF = B l v sin θ, जो θ = 90° पर अधिकतम होता है (sin 90° = 1)।
- यदि θ = 0° या 180°, तो sin θ = 0 और कोई प्रेरित धारा नहीं होती।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF: ε = B l v sin θ (जहाँ θ = B और v के बीच कोण)
- अधिकतम EMF के लिए θ = 90°, शून्य के लिए θ = 0° या 180°।
ओरस्टेड के प्रयोग से निम्नलिखित में से कौन सा/से निष्कर्ष सही है/हैं?
- (a) धारावाही चालक के किनारे पर रखी चुंबकीय कम्पास सुई विक्षेपित होती है
- (b) धारावाही चालक अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करेगा।
- (c) धारावाही चालक के किनारे पर रखी कम्पास सुई के विक्षेपण की दिशा धारा की दिशा के उलटने पर नहीं बदलती है।
- केवल (a) और (c) सही हैं
- केवल (b) और (c) सही हैं
- केवल (a) और (b) सही हैं
- केवल (a), (b) और (c) सही हैं
Explanation:
- ओरस्टेड (Oersted) के प्रयोग (1820) ने दिखाया कि:
- (a) धारावाही चालक के पास रखी चुंबकीय सुई (compass) विक्षेपित होती है। सत्य।
- (b) धारावाही चालक अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। सत्य।
- (c) धारा की दिशा उलटने पर विक्षेपण की दिशा बदल जाती है (विपरीत हो जाती है), इसलिए यह गलत है।
Quick Facts:
- ओरस्टेड ने विद्युत और चुंबकत्व के बीच संबंध (विद्युतचुंबकत्व) की खोज की।
- धारा की दिशा बदलने पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी बदल जाती है।
किस वैज्ञानिक ने सुझाव दिया कि कोई चुंबक एक धारावाही चालक पर बराबर और विपरीत बल लगाता है?
- ओस्टेंड (Oersted)
- एम्पीयर (Ampere)
- मैक्सवेल (Maxwell)
- फैराडे (Faraday)
Explanation:
- एंड्रे-मैरी एम्पीयर (André-Marie Ampère) ने धारावाही चालकों के बीच चुंबकीय बल का अध्ययन किया और यह सुझाव दिया कि कोई चुंबक एक धारावाही चालक पर बल लगाता है (एम्पीयर का बल नियम)।
- उन्होंने धारा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच संबंध को गणितीय रूप दिया।
Quick Facts:
- एम्पीयर का नियम: ∮ B · dl = μ₀ I (धारा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच)
- SI इकाई ‘एम्पीयर’ (धारा की) उनके नाम पर है।
चुंबकीय क्षेत्र में रखे विद्युत धारावाही चालक पर लगने वाला बल होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के समानांतर तथा विद्युत धारा की दिशा के लंबवत
- विद्युत धारा और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत
- विद्युत धारा और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के समानांतर
- विद्युत धारा की दिशा के समानांतर और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत
Explanation:
- चुंबकीय बल F = q(v × B) या F = I (L × B) – यह एक सदिश गुणनफल (cross product) है, जिसका परिणाम धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों के लंबवत होता है।
- यह फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुरूप है।
Quick Facts:
- बल की दिशा: F = I (L × B)
- यदि I और B समानांतर हैं, तो F = 0 (sin 0° = 0)।
निम्नलिखित में से कौन-सी व्यवस्था, स्थायी स्थितियों में, एक वृत्ताकार धारावाही निकाय के केंद्रीय क्षेत्र में लगभग एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है?
- अलग-अलग त्रिज्याओं के पाश का उपयोग करते हुए
- एक समान त्रिज्या के अनेक पास-पास सटे हुए फेरों वाली कुंडली में नियत धारा का उपयोग करते हुए
- यादृच्छिक विन्यास में पाशों को व्यवस्थित करके
- एक ही पाश में समय के साथ धारा को परिवर्तित होते देने
Explanation:
- एक लंबी परिनालिका (solenoid) में, जो एक समान त्रिज्या के पास-पास लपेटे गए अनेक फेरों से बनी होती है, अंदर एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है (सिरों के पास को छोड़कर)।
- यह व्यवस्था एक वृत्ताकार धारावाही निकाय (कुंडली) के केंद्रीय क्षेत्र में लगभग एकसमान क्षेत्र देती है।
Quick Facts:
- परिनालिका: B = μ₀ n I (एकसमान, अंदर)
- हेल्महोल्ट्ज़ कुंडली (Helmholtz coil) भी एकसमान क्षेत्र उत्पन्न करती है।
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का एक ही बिंदु पर एक-दूसरे को काटना असंभव क्यों है?
- क्योंकि उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी
- क्योंकि वे चुंबक के अंदर हमेशा समानांतर होती हैं
- क्योंकि वे समान ध्रुवता के कारण एक दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं
- क्योंकि इसका अर्थ यह होगा कि कम्पास की सुई एक साथ दो दिशाओं में संकेत कर सकती है
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं (intersect) क्योंकि यदि वे काटतीं, तो उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो असंभव है – किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की केवल एक ही दिशा हो सकती है (जैसा कि कम्पास सुई द्वारा इंगित किया जाता है)।
Quick Facts:
- क्षेत्र रेखाएँ = चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और सामर्थ्य दर्शाती हैं।
- यदि वे काटें, तो एक बिंदु पर दो दिशाएँ → भौतिक रूप से असंभव।
______ बढ़ने पर धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र घट जाता है।
- दूरी
- विद्युत धारा
- वोल्टता
- प्रतिरोध
Explanation:
- सीधे चालक के लिए चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ I / (2π r) – अर्थात B ∝ 1/r (दूरी के व्युत्क्रमानुपाती)।
- अतः दूरी (r) बढ़ने पर चुंबकीय क्षेत्र (B) घटता है।
- धारा (I) बढ़ने पर B बढ़ता है, वोल्टता/प्रतिरोध B को सीधे प्रभावित नहीं करते (पर I के माध्यम से)।
Quick Facts:
- B ∝ I (धारा), B ∝ 1/r (दूरी)
- व्युत्क्रम-वर्ग नियम नहीं (गुरुत्वाकर्षण/विद्युत की तरह), बल्कि व्युत्क्रम (1/r) है।
किसी भी दिए गए बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा ज्ञात करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जा सकता है?
- परिनालिका
- जनित्र
- चुंबकीय कम्पास
- विद्युत मोटर
Explanation:
- चुंबकीय कम्पास (Magnetic compass) का उपयोग किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है (इसकी सुई क्षेत्र की दिशा में संरेखित हो जाती है)।
- कम्पास का उत्तरी ध्रुव क्षेत्र की दिशा (उत्तर) को इंगित करता है।
Quick Facts:
- कम्पास सुई एक छोटा चुंबक है, जो बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में संरेखित हो जाती है।
- इसका उपयोग क्षेत्र रेखाओं का पता लगाने (mapping) के लिए किया जाता है।
धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं वृत्तीय होती हैं तथा परिनालिका के अक्ष के लंबवत होती हैं।
- परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं यादृच्छिक होती हैं।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं परिनालिका के उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक समानांतर तथा अक्ष के अनुदिश होती हैं।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं परिनालिका के दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव तक समानांतर तथा अक्ष के अनुदिश होती हैं।
Explanation:
- परिनालिका (solenoid) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ समानांतर (parallel) और अक्ष के अनुदिश (along the axis) होती हैं।
- चुंबक के बाहर की तरह, क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणी ध्रुव (S) से उत्तरी ध्रुव (N) की ओर (अंदर) जाती हैं (बाहर N → S, अंदर S → N)।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर B एकसमान, अक्ष के समानांतर, S → N दिशा में (अंदर)।
- बाहर: N से S तक (दंड चुंबक के समान)।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के बारे में कौन-सा कथन सही है?
- वे कभी भी एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
- वे ध्रुवों पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं।
- वे दक्षिणी ध्रुव से शुरू होती हैं।
- वे यादृच्छिक वक्र बनाती हैं।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (intersect) नहीं करतीं (क्योंकि एक बिंदु पर केवल एक ही दिशा हो सकती है)।
- वे चुंबक के बाहर उत्तरी (N) ध्रुव से शुरू होकर दक्षिणी (S) ध्रुव पर समाप्त होती हैं, और अंदर S से N की ओर जाती हैं (बंद लूप)।
- वे यादृच्छिक नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित वक्र होती हैं।
Quick Facts:
- क्षेत्र रेखाएँ सतत, बंद लूप होती हैं (प्रकृति में कोई मुक्त चुंबकीय ध्रुव नहीं होता)।
- रेखाओं की निकटता (density) क्षेत्र की प्रबलता (strength) दर्शाती है।
विद्युत मोटर के आर्मेचर में निम्नलिखित में से कौन सा/से नाम शामिल होते हैं?
- (i) नरम लोहे का कोर
- (ii) कुंडली
- (iii) चूंबक
- (i) और (iii) दोनों
- केवल (ii)
- (i) और (ii) दोनों
- केवल (i)
Explanation:
- विद्युत मोटर का आर्मेचर (armature) एक कोर (core) और कुंडली (coil) से बना होता है, जो चुंबकीय क्षेत्र में घूमता है।
- (i) नरम लोहे का कोर → चुंबकीय क्षेत्र बढ़ाने के लिए
- (ii) कुंडली → धारा ले जाने के लिए (बल उत्पन्न करने के लिए)
- (iii) चुंबक → आर्मेचर का हिस्सा नहीं, बल्कि स्टेटर (stator) का हिस्सा है (क्षेत्र प्रदान करता है)।
Quick Facts:
- मोटर: आर्मेचर (घूमता है) + चुंबक (स्थिर)
- आर्मेचर में कोर (soft iron) और वाइंडिंग (कुंडली) होते हैं।
विद्युत धारावाही तार चुंबक के ध्रुवों के बीच रखा जाता है। इस पर अधिकतम बल तब लगता है जब यह ______।
- चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत होता है
- चुंबकीय क्षेत्र के बाहर होता है
- चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर होता है
- चुंबकीय क्षेत्र से 45° के कोण पर होता है
Explanation:
- चुंबकीय बल F = I L B sin θ, जहाँ θ = धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) के बीच का कोण।
- F अधिकतम तब होता है जब sin θ = 1, अर्थात θ = 90° – अर्थात तार चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत (perpendicular) होता है।
- यदि θ = 0° (समानांतर), तो F = 0 (sin 0° = 0)।
Quick Facts:
- F = I L B sin θ
- अधिकतम बल के लिए θ = 90°, शून्य के लिए θ = 0° या 180°।
चुंबकीय रेखाएँ पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर होती हैं और क्षैतिज रूप से रखा चालक ऊपर की दिशा की ओर बढ़ता है। ऐसी स्थिति में प्रेरित धारा की दिशा किस ओर होती है?
- पश्चिम
- दक्षिण
- उत्तर
- पूर्व
Explanation:
- फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम (RHR) का उपयोग करें: अंगूठा = गति (ऊपर), तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र (पश्चिम → पूर्व), मध्यमा = प्रेरित धारा।
- इन्हें लंबवत रखने पर, मध्यमा उत्तर (या दक्षिण, पर विकल्पों में उत्तर सही है) दिशा को इंगित करती है।
Quick Facts:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम: क्षेत्र, गति और धारा के बीच संबंध (जनरेटर)।
- प्रेरित EMF = B l v sin θ, दिशा RHR द्वारा।
यदि किसी AC जनरेटर के आर्मेचर को तेजी से घुमाया जाए, तो:
- प्रेरित विभवांतर घटता है
- प्रेरित धारा घटती है
- प्रेरित धारा में कोई परिवर्तन नहीं होता
- प्रेरित विभवांतर बढ़ता है
Explanation:
- AC जनरेटर में प्रेरित EMF: ε = NBAω sin(ωt), जहाँ ω = कोणीय वेग (angular speed)।
- आर्मेचर को तेजी से घुमाने से ω बढ़ता है, जिससे ε (प्रेरित विभवांतर) बढ़ जाता है, और इसलिए धारा (I = ε/R) भी बढ़ती है (यदि R स्थिर हो)।
Quick Facts:
- AC जनरेटर: ε = ε₀ sin ωt, ε₀ = NBAω
- गति (ω) बढ़ने पर अधिकतम EMF (ε₀) बढ़ता है।
चुंबकीय क्षेत्र में किसी चालक पर लगने वाले बल का परिमाण तब बढ़ता है जब ______।
- चुंबकीय क्षेत्र घटता है
- धारा बढ़ती है
- लंबाई घटती है
- धारा घटती है
Explanation:
- चुंबकीय बल F = I L B sin θ – अतः बल (F) धारा (I), लंबाई (L), चुंबकीय क्षेत्र (B) के समानुपाती होता है।
- इसलिए, धारा बढ़ने पर बल बढ़ता है।
Quick Facts:
- F = I L B (जब θ = 90°)
- यह फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम द्वारा दिशा निर्धारित होती है।
निम्नलिखित में से किस स्थिति में कुंडली में प्रेरित विभवांतर अधिकतम होगा?
- (a) 2 m/s की गति से एक स्थिर कुंडली की ओर गतिमान एक छड़ चुंबक
- (b) 2 m/s की गति से एक स्थिर छड़ चुंबक की ओर गतिमान एक कुंडली
- (c) 2 m/s की गति से एक ही दिशा में गतिमान एक कुंडली और एक छड़ चुंबक
- (d) 2 m/s की गति से एक दूसरे की ओर गतिमान एक कुंडली और एक छड़ चुंबक
- (d)
- (c)
- (b)
- (a)
Explanation:
- प्रेरित EMF, चुंबकीय फ्लक्स (Φ) के परिवर्तन की दर (dΦ/dt) पर निर्भर करता है।
- जब चुंबक और कुंडली एक-दूसरे की ओर गति करते हैं, तो सापेक्ष गति (relative speed) = 2 + 2 = 4 m/s होती है, जो अधिकतम है, इसलिए dΦ/dt अधिकतम होगा और प्रेरित विभवांतर अधिकतम होगा।
- स्थिर/एक ही दिशा में गति में सापेक्ष गति कम होती है।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF ∝ सापेक्ष गति (relative velocity)
- अधिकतम सापेक्ष गति → अधिकतम EMF
एक लंबी विद्युत धारावाही सीधी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति है?
- मध्य में अधिकतम
- केंद्र में न्यूनतम
- केंद्र की तुलना में अंत में अधिक
- परिनालिका के भीतर सभी बिंदुओं पर एकसमान
Explanation:
- एक आदर्श (लंबी) परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र सभी बिंदुओं पर एकसमान (uniform) होता है (सिरों के पास के अपवाद को छोड़कर, पर लंबी परिनालिका में यह अपवाद नगण्य होता है)।
Quick Facts:
- B = μ₀ n I (n = फेरे/मीटर)
- यह क्षेत्र अंदर स्थिर और अक्ष के समानांतर होता है।
धारावाही लंबे परिनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र है:
- परिनालिका के सिरों पर अधिकतम
- परिनालिका के अंदर असमान
- परिनालिका के अंदर शून्य
- परिनालिका के अंदर एकसमान
Explanation:
- लंबी परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है, जबकि बाहर लगभग शून्य होता है।
- सिरों के पास क्षेत्र थोड़ा असमान होता है, पर केंद्र में एकसमान होता है।
Quick Facts:
- यह एकसमान क्षेत्र विद्युत चुंबकों, सोलेनॉइड वाल्व आदि में उपयोगी है।
- परिनालिका का क्षेत्र दंड चुंबक के समान होता है (N और S ध्रुव सिरों पर)।
विद्युत मोटर में धारावाही चालक पर बल की दिशा निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित में से किस नियम का उपयोग किया जाता है?
- एम्पियर का नियम
- दक्षिण-हस्त अंगूषक का नियम
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम
- फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम
Explanation:
- फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल (force) की दिशा ज्ञात करने के लिए होता है – यह विद्युत मोटर (electric motor) का सिद्धांत है।
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम → जनरेटर (प्रेरित धारा) के लिए।
Quick Facts:
- बायाँ हाथ: अंगूठा (बल), तर्जनी (क्षेत्र), मध्यमा (धारा)
- दायाँ हाथ: अंगूठा (गति), तर्जनी (क्षेत्र), मध्यमा (धारा)
चुंबकीय क्षेत्र में स्थापित किए विद्युत धारावाही सीधे चालक पर लगने वाले बल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- (a) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा उलटने पर भी बल की दिशा वही रहती है।
- (b) बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम का उपयोग करके निर्धारित की जा सकती है।
- उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल (a)
- केवल (b)
- (a) और (b) दोनों
- न तो (a) न ही (b)
Explanation:
- (a) चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा उलटने पर, बल (F) की दिशा भी उलट जाती है (F = I L × B, B उलटने पर F उलट जाता है)। अतः (a) गलत है।
- (b) बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम द्वारा निर्धारित की जा सकती है – यह सत्य है।
Quick Facts:
- F = I (L × B) – B की दिशा उलटने पर F की दिशा भी उलट जाती है (वेक्टर क्रॉस उत्पाद)।
- वाम हस्त नियम: धारा, क्षेत्र, बल (मोटर के लिए)।
एक कुण्डली में प्रेरित धारा और चुंबकीय प्रवाह में परिवर्तन को जोड़ने वाली परिघटना कहलाती है:
- वैद्युत चुंबकीय तरंग
- वैद्युत चुंबकीय तरंग प्रसार
- वैद्युत चुंबकीय विकिरण
- वैद्युत चुंबकीय प्रेरण
Explanation:
- चुंबकीय प्रवाह (magnetic flux) में परिवर्तन के कारण कुंडली में धारा उत्पन्न होने की घटना को विद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहते हैं।
- यह फैराडे के नियम द्वारा वर्णित है: ε = -dΦ/dt
Quick Facts:
- यह प्रक्रिया जनरेटर, ट्रांसफार्मर, इंडक्शन कुकर आदि का आधार है।
- इसकी खोज माइकल फैराडे (1831) ने की थी।
जब एक दंड चुंबक को स्थिर चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है, तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा होती है:
- चुंबक की लंबाई के लंबवत
- चुंबक के दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव तक
- चुंबक के उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तक
- चुंबक के दक्षिण ध्रुव के लंबवत
Explanation:
- एक दंड चुंबक (bar magnet) के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव (N) से दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर जाती हैं।
- अंदर (चुंबक के भीतर), वे S से N की ओर जाती हैं (बंद लूप बनाने के लिए)।
Quick Facts:
- बाहर: N → S, अंदर: S → N (बंद लूप)
- क्षेत्र रेखाएँ N ध्रुव से निकलती हैं और S ध्रुव में प्रवेश करती हैं (बाहर)।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं पर विचार करते हुए, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं।
- चुंबकीय क्षेत्र की सापेक्षिक सामर्थ्य मौजूद होती है और इसे क्षेत्र रेखाओं की निकटता की डिग्री द्वारा दिखाया जा सकता है।
- यदि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ समानांतर और समदूरस्थ हैं, तो वे शून्य क्षेत्र सामर्थ्य का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा वह दिशा मानी जाती है जिसमें चुंबकीय कम्पास सूई का उत्तरी ध्रुव इंगित करता है।
Explanation:
- यदि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ समानांतर और समदूरस्थ (equally spaced) हैं, तो यह एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (uniform magnetic field) को दर्शाता है, शून्य क्षेत्र को नहीं।
- अतः यह कथन सत्य नहीं है (गलत है)।
Quick Facts:
- एकसमान क्षेत्र: समानांतर, समदूरस्थ रेखाएँ (परिनालिका के अंदर)।
- शून्य क्षेत्र: कोई रेखा नहीं (या रेखाएँ अनुपस्थित)।
चुंबकीय क्षेत्र के क्षेत्र में चालक के गतिमान होने पर प्रेरित धारा की दिशा किसके द्वारा दी जाती है?
- दक्षिण-हस्त अंगूठे का नियम
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ का नियम
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ का नियम
- मैक्सवेल का कॉर्कस्कू नियम
Explanation:
- जब कोई चालक चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) द्वारा दी जाती है (यह जनरेटर सिद्धांत है)।
- इसमें अंगूठा = गति, तर्जनी = क्षेत्र, मध्यमा = प्रेरित धारा।
Quick Facts:
- दायाँ हाथ: प्रेरित धारा (जनरेटर)
- बायाँ हाथ: बल (मोटर)
इनमें से कौन-सा चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का गुण नहीं है?
- वे परस्पर को प्रतिकर्षित करती हैं।
- वे सतत बंद लूप हैं।
- वे चुंबक के अंदर दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हैं।
- वे कभी प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) नहीं करतीं – वे केवल क्षेत्र की दिशा और सामर्थ्य दर्शाती हैं।
- वे बंद लूप होती हैं, चुंबक के अंदर S → N, और कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं – ये सभी गुण हैं, पर ‘प्रतिकर्षण’ एक गुण नहीं है।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: बंद, सतत, नॉन-इंटरसेक्टिंग, S→N (अंदर), N→S (बाहर)
- वे तनाव (tension) में होती हैं (उनके बीच पार्श्व प्रतिकर्षण हो सकता है, पर रेखाएँ स्वयं प्रतिकर्षित नहीं होतीं)।
जब एक प्रतिक्रिया अन्य प्रतिक्रिया की दर को प्रभावित करती है, जो सामान्य परिस्थितियों में नहीं होता है, तो इस घटना को ____ के रूप में जाना जाता है।
- नकारात्मक प्रेरण
- सकारात्मक प्रेरण
- प्रेरित प्रेरण
- स्व प्रेरण
Explanation:
- यह प्रश्न संभवतः ‘प्रेरित प्रेरण’ (induced induction) या ‘पारस्परिक प्रेरण’ (mutual induction) के संदर्भ में है – जब एक कुंडली में धारा/EMF दूसरी कुंडली को प्रभावित करती है।
- हालाँकि, रसायन विज्ञान में ‘प्रेरित प्रभाव’ (inductive effect) भी होता है, पर भौतिकी के संदर्भ में ‘पारस्परिक प्रेरण’ (mutual induction) सही है।
Quick Facts:
- पारस्परिक प्रेरण (Mutual induction): एक कुंडली में बदलती धारा दूसरी कुंडली में EMF प्रेरित करती है।
- स्व-प्रेरण (Self-induction): स्वयं में EMF प्रेरित होता है (L dI/dt)।
मोटर की कुंडली में धारा की दिशा किसके द्वारा उलट जाती है?
- स्लिप रिंग
- ब्रश
- ऐक्सल
- स्प्लिट रिंग
Explanation:
- DC मोटर में, स्प्लिट रिंग (commutator) का उपयोग कुंडली में धारा की दिशा को प्रत्येक आधे चक्र (half rotation) के बाद उलटने (reverse) के लिए किया जाता है, ताकि बल की दिशा एक समान बनी रहे और मोटर एक ही दिशा में घूमती रहे।
- AC जनरेटर में स्लिप रिंग (slip rings) होती हैं।
Quick Facts:
- DC मोटर: स्प्लिट रिंग (दिक्परिवर्तक, commutator)
- AC जनरेटर: स्लिप रिंग
पूर्व दिशा में धारावाही सीधे चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ____ दिशा के अनुदिश होती है।
- दक्षिण
- पश्चिम
- उत्तर
- पूर्व
Explanation:
- दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule): धारा की दिशा (पूर्व) में अंगूठा रखने पर, मुड़ी हुई उंगलियाँ वृत्ताकार क्षेत्र की दिशा बताती हैं।
- चालक के उत्तर (ऊपर) या दक्षिण (नीचे) की ओर, क्षेत्र की दिशा दक्षिण (या उत्तर) होती है, पर विकल्पों में ‘दक्षिण’ सही है।
Quick Facts:
- धारा की दिशा में देखने पर, क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणावर्त (clockwise) होती हैं (यदि धारा आपकी ओर है, तो वामावर्त)।
- क्षेत्र की दिशा तार के चारों ओर वृत्ताकार होती है।
वृक्क और पित्ताशय की थैली में पथरी का पता लगाने के लिए ऐसी कौन सी चिकित्सा तकनीक का उपयोग किया जाता है जिसका उपयोग गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की जांच के लिए भी किया जाता है?
- इलेक्ट्रॉकार्डियोग्राफी
- इकोकार्डियोग्राफी
- अल्ट्रासोनोग्राफी
- चुम्बकीय अनुनाद प्रतिबिंबन
Explanation:
- अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography) – गुर्दे (किडनी), पित्ताशय (gall bladder) की पथरी और गर्भावस्था में भ्रूण की जाँच के लिए पराश्रव्य (ultrasound) तरंगों का उपयोग किया जाता है।
- इकोकार्डियोग्राफी → हृदय, MRI/ECG → अन्य प्रयोग।
Quick Facts:
- अल्ट्रासाउंड सुरक्षित, गैर-आक्रामक, और विकिरण-मुक्त है।
- इसका उपयोग स्त्री रोग (gynecology), यूरोलॉजी आदि में होता है।
धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ____ के अनुक्रमानुपाती होता है।
- वृत्ताकार लूप की त्रिज्या के वर्ग
- लूप से प्रवाहित धारा
- लूप से प्रवाहित धारा के वर्ग
- लूप से प्रवाहित धारा के व्युत्क्रम
Explanation:
- वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ I / (2R) (एक फेरे के लिए) – अर्थात B ∝ I (धारा) और B ∝ 1/R (त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती)।
- अतः B, धारा (I) के अनुक्रमानुपाती है, और त्रिज्या (R) के व्युत्क्रमानुपाती है।
Quick Facts:
- N फेरों के लिए: B = μ₀ N I / (2R)
- B ∝ I, B ∝ N, B ∝ 1/R
एक लंबे धारावाही परिनालिका के अंदर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसके समान होती हैं?
- वलय चुंबक
- दंड चुंबक
- डिस्क चुंबक
- अश्वनाल चुंबक
Explanation:
- एक धारावाही परिनालिका (solenoid) के अंदर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ और ध्रुवीयता (N-S) दंड चुंबक (bar magnet) के समान होती हैं – एक सिरा N, दूसरा S, और अंदर S→N, बाहर N→S रेखाएँ।
- अतः परिनालिका एक विद्युत चुंबक (electromagnet) के रूप में कार्य करती है।
Quick Facts:
- परिनालिका = कुंडली, जो धारा प्रवाहित होने पर दंड चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
- N और S की पहचान: उत्तरी ध्रुव वह छोर है जहाँ से क्षेत्र रेखाएँ निकलती हैं।
छड़ चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- (a) इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं।
- (b) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संवृत वक्र होती हैं।
- उपरोक्त में से कौन-सा कथन सही हैं?
- (a) तथा (b) दोनों
- (a) तथा (b) दोनों नहीं
- केवल (a)
- केवल (b)
Explanation:
- (a) चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि (vector quantity) है, जिसमें परिमाण (magnitude) और दिशा (direction) दोनों होते हैं। सत्य।
- (b) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद (closed) वक्र होती हैं (N से बाहर, S में प्रवेश, और अंदर S से N)। सत्य।
Quick Facts:
- सदिश क्षेत्र: B = (magnitude, direction)
- कोई मुक्त चुंबकीय ध्रुव (monopole) नहीं होता, इसलिए रेखाएँ बंद लूप होती हैं।
निम्नलिखित में से किस स्थिति में एक वृत्ताकार कुंडली से संयोजित गैल्वेनोमीटर द्वारा धारा दर्ज की जाएगी?
- (i) जब किसी चुंबक को कुंडली के पास स्थिर रखा जाता है।
- (ii) जब चुंबक को कुंडली की ओर ले जाया जाता है।
- (iii) जब चुंबक को कुंडली से दूर ले जाया जाता है।
- (i) और (iii) दोनों
- केवल (iii)
- (ii) और (iii) दोनों
- केवल (i)
Explanation:
- गैल्वेनोमीटर में धारा तभी दर्ज होती है जब कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स (magnetic flux) में परिवर्तन होता है (फैराडे का नियम)।
- (i) चुंबक स्थिर है → फ्लक्स स्थिर → कोई प्रेरित धारा नहीं।
- (ii) चुंबक को पास ले जाने पर → फ्लक्स बढ़ता है → धारा प्रेरित होती है।
- (iii) चुंबक को दूर ले जाने पर → फ्लक्स घटता है → धारा प्रेरित होती है।
Quick Facts:
- फैराडे: ε = -dΦ/dt
- प्रेरित धारा केवल तभी होती है जब फ्लक्स परिवर्तित हो (गति/सापेक्ष गति)।
निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति संभव है/हैं?
- (a) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक दूसरे के समानांतर हो सकती हैं।
- (b) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं संकेंद्रित वृत्त हो सकती हैं।
- (c) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक दूसरे को प्रतिच्छेद कर सकती हैं।
- केवल (b)
- (a) और (b) दोनों
- (a) और (c) दोनों
- केवल (a)
Explanation:
- (a) एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (जैसे परिनालिका के अंदर) में क्षेत्र रेखाएँ समानांतर हो सकती हैं। संभव।
- (b) सीधे धारावाही चालक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त (concentric circles) होती हैं। संभव।
- (c) क्षेत्र रेखाएँ कभी भी प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं – असंभव।
Quick Facts:
- एकसमान क्षेत्र: समानांतर रेखाएँ
- सीधा चालक: संकेंद्रित वृत्त
एक गैल्वेनोमीटर का उपयोग किया जाता है:
- प्रकाश की दिशा का पता लगाने के लिए
- ध्वनि की दिशा का पता लगाने के लिए
- धारा की दिशा का पता लगाने के लिए
- चुंबकीय प्रेरण की दिशा का पता लगाने के लिए
Explanation:
- गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) एक उपकरण है जिसका उपयोग परिपथ में विद्युत धारा की दिशा और परिमाण (छोटी धाराएँ) का पता लगाने के लिए किया जाता है।
- इसमें एक सुई होती है जो धारा की दिशा के अनुसार विक्षेपित होती है।
Quick Facts:
- गैल्वेनोमीटर का उपयोग एमीटर/वोल्टमीटर में किया जाता है (शंट/प्रतिरोध के साथ)।
- यह चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल के सिद्धांत पर कार्य करता है।
एक धारावाही सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- (a) तार से r की दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र एक संकेंद्रित चक्र के रूप में है।
- (b) जैसे-जैसे चालक से दूरी बढ़ती है, संकेंद्रित वृत्त की त्रिज्या बढ़ती जाती है।
- उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) और (b) दोनों
- केवल (a)
- केवल (b)
- न तो (a) न ही (b)
Explanation:
- (a) सीधे धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त (concentric circles) होती हैं, जिनका केंद्र चालक होता है। सत्य।
- (b) जैसे-जैसे चालक से दूरी (r) बढ़ती है, वृत्तों की त्रिज्या बढ़ती है। सत्य।
Quick Facts:
- B = μ₀ I / (2π r) – रेखाएँ वृत्ताकार, r बढ़ने पर त्रिज्या बढ़ती है, पर B घटता है।
- क्षेत्र की दिशा: दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम द्वारा।
धारावाही चालक पर बल की दिशा बदलने के लिए निम्नलिखित में से किस/किन विधि(ओं) का उपयोग किया जा सकता है?
- (i) धारा के परिमाण में परिवर्तन
- (ii) चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता में परिवर्तन
- (iii) धारा की दिशा में परिवर्तन
- केवल (i)
- दोनों (ii) और (iii)
- दोनों (i) और (iii)
- केवल (iii)
Explanation:
- बल की दिशा F = I (L × B) द्वारा दी जाती है – यह दिशा धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों पर निर्भर करती है।
- धारा की दिशा बदलने (या B की दिशा बदलने) पर बल की दिशा बदल जाती है।
- (i) धारा का परिमाण बदलने से बल का परिमाण बदलता है, दिशा नहीं।
- (ii) क्षेत्र की प्रबलता (magnitude) बदलने से परिमाण बदलता है, दिशा नहीं (जब तक दिशा न बदले)।
- (iii) धारा की दिशा बदलने से बल की दिशा बदलती है – सही।
Quick Facts:
- F की दिशा: I × B (क्रॉस उत्पाद)
- I या B में से किसी एक की दिशा उलटने पर F उलट जाता है।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
- किसी सीधे धारावाही चालक के परितः चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम द्वारा दी जा सकती है।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं दक्षिणी ध्रुव से शुरू होकर चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
- धारावाही तार की सतह पर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सदैव सीधी रेखाएँ होती हैं।
Explanation:
- दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम (Right-hand thumb rule) का उपयोग सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है – यह सत्य है।
- अन्य: क्षेत्र रेखाएँ बाहर N से S तक होती हैं (S से N नहीं), तार की सतह पर B शून्य नहीं, रेखाएँ सीधी नहीं (वक्र हो सकती हैं)।
Quick Facts:
- दक्षिण-हस्त अंगूठा: अंगूठा → धारा, उंगलियाँ → क्षेत्र (वृत्ताकार)।
- यह नियम मैक्सवेल के कॉर्कस्क्रू नियम के समतुल्य है।
चुंबक का वह भाग क्या कहलाता है, जहाँ से चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ निकलती हैं?
- उत्तरी ध्रुव
- चुंबक के बीच
- उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव
- दक्षिणी ध्रुव
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (field lines) चुंबक के उत्तरी ध्रुव (North Pole) से निकलती हैं और दक्षिणी ध्रुव (South Pole) में प्रवेश करती हैं (चुंबक के बाहर)।
- अतः उत्तरी ध्रुव को ‘स्रोत’ (source) कहा जा सकता है (बाहर के लिए)।
Quick Facts:
- बाहर: N → S (रेखाएँ N से निकलती हैं)
- अंदर: S → N (बंद लूप)
अनेक वृत्ताकार फेरों वाली विद्युतरोधी ताँबे के तार की कुंडली को बेलन के आकार में कसकर लपेटने पर क्या बनता है?
- वृत्ताकार कुंडली
- परिनालिका
- सीधा चालक
- टोरॉयड
Explanation:
- विद्युतरोधी ताँबे के तार को बेलन (cylinder) के आकार में कसकर लपेटने पर परिनालिका (Solenoid) बनती है।
- परिनालिका धारा प्रवाहित होने पर दंड चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
Quick Facts:
- परिनालिका: सीधी कुंडली (straight coil)
- टोरॉयड: वृत्ताकार कुंडली (doughnut-shaped)
चुंबकीय क्षेत्र के अंदर रखे धारावाही चालक पर बल ज्ञात करने के लिए उपयोग किए जाने वाले फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुसार, अंगूठा और तर्जनी क्रमशः _____ और _____ की दिशाओं को दर्शाते हैं।
- क्षेत्र, धारा
- चुंबकीय क्षेत्र, बल
- बल, चुंबकीय क्षेत्र
- धारा, क्षेत्र
Explanation:
- फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (FLHR) में:
- अंगूठा (Thumb) → बल (Force) की दिशा
- तर्जनी (Forefinger) → चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) की दिशा
- मध्यमा (Middle finger) → धारा (Current) की दिशा
- अतः अंगूठा = बल, तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र।
Quick Facts:
- FLHR: अंगूठा (बल), तर्जनी (क्षेत्र), मध्यमा (धारा) – ये तीनों परस्पर लंबवत होते हैं।
- इसका उपयोग मोटर (motor) के बल की दिशा ज्ञात करने में होता है।
दिए गए कथन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प गलत है? दंड चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसके द्वारा खींची जा सकती हैं:
- एक अन्य दंड चुंबक
- लोहे के बुरादे
- एक चुंबकीय दिक्सूचक
- लकड़ी के कण
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पता लगाने के लिए लोहे के बुरादे (iron filings), चुंबकीय दिक्सूचक (compass), या अन्य दंड चुंबक का उपयोग किया जाता है, क्योंकि ये चुंबकीय पदार्थ हैं।
- लकड़ी के कण (wood particles) चुंबकीय नहीं हैं, इसलिए इनसे क्षेत्र रेखाएँ नहीं खींची जा सकतीं – अतः यह विकल्प गलत है।
Quick Facts:
- लोहे के बुरादे चुंबकीय क्षेत्र में संरेखित होकर रेखाओं का पैटर्न बनाते हैं।
- कम्पास सुई क्षेत्र की दिशा को इंगित करती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन धारावाही सीधे चालक के लिए सत्य है/हैं?
- (i) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं केंद्र में चालक के साथ संकेंद्रित वृत्त होती हैं।
- (ii) जैसे-जैसे हम चालक से दूर जाते हैं चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता बढ़ती जाती है।
- (iii) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम का उपयोग करके निर्धारित की जा सकती है।
- केवल (i)
- केवल (ii)
- (i) और (ii) दोनों
- (i) और (iii) दोनों
Explanation:
- (i) सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त (concentric circles) होती हैं। सत्य।
- (ii) जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, B ∝ 1/r, इसलिए प्रबलता घटती है, बढ़ती नहीं। असत्य।
- (iii) दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम (Right-hand thumb rule) क्षेत्र की दिशा निर्धारित करता है। सत्य।
Quick Facts:
- B = μ₀ I / (2π r) – दूरी बढ़ने पर B घटता है।
- रेखाएँ वृत्ताकार, केंद्र चालक पर।
निम्नलिखित में से गलत कथन की पहचान कीजिए।
- एक स्वतंत्र रूप से लटका हुआ दंड चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा को इंगित करता है।
- एक दंड चुंबक के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तर से दक्षिण ध्रुव की ओर निर्दिष्ट होती है।
- एक चुंबकीय क्षेत्र के अंदर कई क्षेत्र रेखाएँ एक दिए गए बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं।
- प्रतिकर्षण चुंबकत्व की एक निश्चित परीक्षा है।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी प्रतिच्छेद (intersect) नहीं करती हैं (एक बिंदु पर केवल एक दिशा होती है)।
- अतः “कई क्षेत्र रेखाएँ एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं” – यह गलत कथन है।
- अन्य कथन सत्य हैं (चुंबक का उत्तर-दक्षिण संरेखण, बाहर N→S, प्रतिकर्षण = चुंबकत्व की निश्चित परीक्षा)।
Quick Facts:
- प्रतिकर्षण (repulsion) चुंबकत्व की निश्चित परीक्षा है (आकर्षण दोनों ध्रुवों से हो सकता है, पर प्रतिकर्षण केवल समान ध्रुवों से)।
- क्षेत्र रेखाएँ सदैव एकल-मूल्यवान (single-valued) होती हैं।
यदि 15 Ω प्रतिरोध की कुंडली A तथा 5 Ω प्रतिरोध की कुंडली B समय परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के अंतर्गत हैं, तो इन कुंडलियों में प्रेरित धारा ______ हैं।
- 1:2 के अनुपात में
- 1:1 के अनुपात में
- समान
- भिन्न
Explanation:
- प्रेरित EMF (ε) = -dΦ/dt (फैराडे का नियम) – यदि Φ का परिवर्तन समान है, तो ε दोनों कुंडलियों में समान होगा (यदि फेरे समान हैं)।
- लेकिन प्रेरित धारा I = ε/R है, और R भिन्न है (15 Ω और 5 Ω), इसलिए I भिन्न होगी (I_A = ε/15, I_B = ε/5) – अतः धाराएँ भिन्न हैं।
Quick Facts:
- यदि R भिन्न है, तो I भी भिन्न होगी (यदि EMF समान है)।
- धारा का अनुपात: I_A : I_B = (ε/15) : (ε/5) = 1 : 3
किसी छड़ चुंबक के चारों ओर लौह चूर्ण से बना पैटर्न ______ प्रदर्शित करता है।
- गुरुत्वीय क्षेत्र रेखाएं
- स्थिर वैद्युत बल
- विद्युत क्षेत्र रेखाएं
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं
Explanation:
- छड़ चुंबक के चारों ओर लोहे के बुरादे (iron filings) का पैटर्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं (magnetic field lines) को दर्शाता है।
- यह एक क्लासिक प्रयोग है जो चुंबकीय क्षेत्र के आकार (N→S, बंद लूप) को प्रदर्शित करता है।
Quick Facts:
- लोहे के बुरादे छोटे चुंबकों की तरह कार्य करते हैं और क्षेत्र रेखाओं के अनुदिश संरेखित हो जाते हैं।
- पैटर्न: चुंबक के ध्रुवों पर रेखाएँ घनी, दूर पर विरल।
चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति ______ द्वारा निर्धारित की जा सकती है।
- एक वोल्टमीटर
- एक गैल्वेनोमीटर
- एक चुंबकीय सुई
- एक एमीटर
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति को चुंबकीय सुई (magnetic needle/compass) द्वारा निर्धारित किया जा सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र में संरेखित हो जाती है (विक्षेपित होती है)।
- गैल्वेनोमीटर/एमीटर/वोल्टमीटर विद्युत धारा/वोल्टेज मापते हैं, चुंबकीय क्षेत्र नहीं।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र का पता लगाने के लिए: कम्पास, लोहे के बुरादे, या हॉल प्रभाव (Hall effect) सेंसर।
- कम्पास सुई क्षेत्र की दिशा को भी इंगित करती है।
एक गैल्वेनोमीटर का उपयोग किया जाता है:
- प्रकाश की दिशा का पता लगाने के लिए
- विद्युत प्रवाह की दिशा का पता लगाने के लिए
- चुंबकीय प्रेरण की दिशा का पता लगाने के लिए
- ध्वनि की दिशा का पता लगाने के लिए
Explanation:
- गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) – विद्युत धारा की दिशा और छोटी मात्रा को मापने के लिए उपकरण।
- इसमें सुई का विक्षेपण धारा की दिशा पर निर्भर करता है।
Quick Facts:
- गैल्वेनोमीटर को एमीटर (समानांतर शंट) या वोल्टमीटर (श्रेणी प्रतिरोध) में बदला जा सकता है।
- यह चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल के सिद्धांत पर कार्य करता है।
चुंबकीय क्षेत्र के समकोण पर कुंडली की गति के कारण प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित में से किस नियम का उपयोग किया जाता है?
- फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम
- मैक्सवेल का कॉर्कस्कू नियम
- दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम
- फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम
Explanation:
- जब कोई चालक/कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में समकोण (perpendicular) पर गति करती है, तो प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) द्वारा दी जाती है (जनरेटर सिद्धांत)।
- इसमें अंगूठा = गति (motion), तर्जनी = क्षेत्र (field), मध्यमा = धारा (current)।
Quick Facts:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ → प्रेरित धारा (जनरेटर)
- बायाँ हाथ → बल (मोटर)
निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (i) छड़ चुंबक के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य सबसे प्रबल होती है।
- (ii) कोई भी दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं प्रतिच्छेद नहीं कर सकती हैं।
- (iii) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं हमेशा बंद सतत वक्र बनाती हैं।
- केवल (ii)
- केवल (i)
- (ii) और (iii) दोनों
- केवल (i) और (ii)
Explanation:
- कथन (i) गलत है: छड़ चुंबक के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य न्यूनतम (लगभग शून्य) होती है, सबसे प्रबल ध्रुवों पर होती है।
- कथन (ii) सही है: दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कभी भी प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं, क्योंकि यदि वे प्रतिच्छेद करतीं, तो उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो असंभव है।
- कथन (iii) सही है: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सदैव बंद सतत वक्र (closed continuous curves) होती हैं, जो चुंबक के उत्तरी ध्रुव से निकलकर बाहर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं, और चुंबक के अंदर दक्षिणी से उत्तरी ध्रुव तक जाती हैं।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
- ये रेखाएँ बंद लूप बनाती हैं (चुंबक के अंदर S से N तक, बाहर N से S तक)।
निम्नलिखित में से सही कथन पहचानें।
- (a) किसी बिंदु पर चुंबकीय दिक्सूचक रखकर उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जा सकती है।
- (b) एक स्वतंत्र रूप से लटकी हुई चुंबकीय सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में इंगित करती है।
- (c) चुंबक के ध्रुवों के पास चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सघन होती हैं।
- (d) दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक दिए गए बिंदु पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं।
- (a), (b) और (c)
- (a), (b) और (d)
- (a) और (c) दोनों
- (c) और (d) दोनों
Explanation:
- (a) सही: दिक्सूचक (compass) की सुई किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित होती है, अतः इसकी सहायता से दिशा ज्ञात की जा सकती है।
- (b) सही: स्वतंत्र रूप से लटकी चुंबकीय सुई पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्तर-दक्षिण (N-S) दिशा में संरेखित होती है (उत्तरी ध्रुव भौगोलिक उत्तर की ओर इंगित करता है)।
- (c) सही: चुंबक के ध्रुवों (उत्तरी/दक्षिणी) के पास क्षेत्र रेखाएँ सघन (dense) होती हैं, जो दर्शाता है कि वहाँ क्षेत्र की तीव्रता अधिकतम होती है।
- (d) गलत: दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं।
Quick Facts:
- दिक्सूचक (compass) का उत्तरी सिरा पृथ्वी के चुंबकीय उत्तरी ध्रुव (जो भौगोलिक दक्षिण में है) की ओर आकर्षित होता है।
- क्षेत्र रेखाओं का घनत्व (density) क्षेत्र की प्रबलता (strength) को दर्शाता है।
दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम के अनुसार, ______ धारा की दिशा को दर्शाता है।
- छोटी उंगली
- तर्जनी
- मध्यमा उंगली
- अंगूष्ठ
Explanation:
- दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule) में, अंगूठा (thumb) धारा (current) की दिशा को दर्शाता है, और मुड़ी हुई उंगलियाँ (curled fingers) चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) की दिशा को दर्शाती हैं।
- यह नियम सीधे धारावाही चालक के परितः चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग होता है।
Quick Facts:
- इसे ‘मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम’ (Maxwell’s corkscrew rule) भी कहते हैं।
- यह नियम विद्युत धारा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच दिशात्मक संबंध बताता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा नियम, धारावाही वृत्ताकार लूप द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को निर्धारित करता है?
- फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम
- वाम-हस्त अंगूष्ठ नियम
- दक्षिण-हस्त अंगूष्ठ नियम
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम
Explanation:
- धारावाही वृत्ताकार लूप (current-carrying circular loop) के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule) द्वारा निर्धारित की जाती है: यदि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं (लूप के लिए, अंगूठा लूप के अक्ष के अनुदिश होता है)।
- फ्लेमिंग के नियम बल/प्रेरित धारा के लिए हैं, क्षेत्र की दिशा के लिए नहीं।
Quick Facts:
- वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ I / (2R) (एक फेरे के लिए)।
- यदि धारा वामावर्त (anticlockwise) है, तो क्षेत्र बाहर की ओर, यदि दक्षिणावर्त (clockwise) है, तो अंदर की ओर होता है।
प्रेरित धारा ______ होती है जब कुंडली की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्र के समकोण पर होती है।
- शून्य
- अनंतता
- न्यूनतम
- अधिकतम
Explanation:
- प्रेरित धारा (induced current) का मान चुंबकीय अभिवाह (flux) के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है।
- जब कुंडली की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्र के समकोण (perpendicular, θ = 90°) होती है, तो अभिवाह परिवर्तन की दर अधिकतम होती है, इसलिए प्रेरित धारा अधिकतम होती है (फैराडे का नियम: E = -dΦ/dt)।
- यदि गति क्षेत्र के समानांतर (θ = 0°) हो, तो प्रेरित धारा शून्य होती है।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF = -N (dΦ/dt), जहाँ Φ = BA cos θ (θ = चुंबकीय क्षेत्र और तल के अभिलम्ब के बीच कोण)।
- अधिकतम प्रेरण के लिए, अभिलम्ब और क्षेत्र के बीच कोण 0° होना चाहिए (तल क्षेत्र के लंबवत)।
दो कुंडली A और B परस्पर समानांतर और निकट इस प्रकार व्यवस्थित होती हैं कि A एक कुंजी और धारा नियंत्रण के माध्यम से बैटरी से जुड़ी हुई है और B एक गैल्वेनोमीटर से जुड़ी हुई है। बताए गए अनुसार निम्नलिखित में से किस अवधि में B में धारा प्रेरित होती है/हैं?
- (a) 0 से 50 s: A में धारा नियत होती है।
- (b) 50 से 60 s: A में धारा नियत दर से कम हो जाती है।
- केवल (b)
- (a) और (b) दोनों
- केवल (a)
- न तो (a) न ही (b)
Explanation:
- फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा तभी उत्पन्न होती है जब कुंडली (A) से गुजरने वाला चुंबकीय अभिवाह (flux) में परिवर्तन होता है।
- (a) में: A में धारा नियत है ⇒ अभिवाह स्थिर है ⇒ B में कोई प्रेरित धारा नहीं (शून्य EMF)।
- (b) में: A में धारा बदल रही है (कम हो रही है) ⇒ अभिवाह परिवर्तित हो रहा है ⇒ B में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
- अतः केवल (b) में प्रेरित धारा होगी।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF = -dΦ/dt (फैराडे का नियम)
- यदि धारा स्थिर है, तो dI/dt = 0, अतः कोई प्रेरण नहीं होता (चाहे धारा कितनी भी अधिक क्यों न हो)।
किसी आर्मेचर की भुजाओं पर कार्यरत बल का परिमाण अधिकतम होता है, जब भुजाओं की लंबाई ______ होती है।
- चुंबकीय क्षेत्र से 45° के कोण पर
- चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत
- चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर
- चुंबकीय क्षेत्र से 60° के कोण पर
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल: F = BIL sin θ, जहाँ θ = चालक (धारा) और चुंबकीय क्षेत्र B के बीच कोण।
- F अधिकतम (maximum) होता है जब sin θ = 1, अर्थात θ = 90° (लंबवत, perpendicular) हो।
- यदि θ = 0° (समानांतर), तो F = 0 (शून्य) होता है।
Quick Facts:
- F = BIL sin θ (जहाँ L = चालक की लंबाई)
- बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम द्वारा निर्धारित होती है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ ______।
- एक दूसरे को 90° के कोण पर प्रतिच्छेद करती हैं
- एक दूसरे को 45° के कोण पर प्रतिच्छेद करती हैं
- एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं
- एक दूसरे को 60° के कोण पर प्रतिच्छेद करती हैं
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (magnetic field lines) एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं (never intersect)।
- यदि वे प्रतिच्छेद करतीं, तो उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो अलग-अलग दिशाएँ होतीं, जो असंभव है (क्षेत्र की दिशा अद्वितीय होती है)।
Quick Facts:
- क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं और कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
- यह एक मौलिक गुण है (विद्युत क्षेत्र रेखाएँ भी प्रतिच्छेद नहीं करतीं) – क्षेत्र की दिशा अद्वितीय होती है।
वृत्तीय लूप के कारण चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- क्षेत्र रेखाएं लूप के तल के समानांतर होती हैं।
- लूप के परितः प्रत्येक स्थान पर क्षेत्र एकसमान होता है।
- केंद्र पर क्षेत्र रेखाएँ वृत्तीय होती हैं।
- क्षेत्र धारा और त्रिज्या पर निर्भर करता है।
Explanation:
- वृत्तीय धारावाही लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ I / (2R) (एक फेरे के लिए) या B = μ₀ n I / (2R) (बहु-फेरों के लिए) – अतः यह धारा (I) और त्रिज्या (R) पर निर्भर करता है।
- क्षेत्र रेखाएँ लूप के लंबवत होती हैं (अक्ष के अनुदिश), तल के समानांतर नहीं।
- लूप के सभी बिंदुओं पर क्षेत्र एकसमान नहीं होता (केंद्र पर अधिकतम, दूर जाने पर घटता है)।
Quick Facts:
- केंद्र पर B ∝ I और B ∝ 1/R (त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती)।
- यदि लूप में N फेरे हैं, तो B = μ₀ N I / (2R)
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की खोज निम्न के द्वारा की गई थी:
- माइकल फैराडे
- एलेसेंड्रो वोल्टा
- आइजैक न्यूटन
- अल्बर्ट आइनस्टाइन
Explanation:
- माइकल फैराडे (Michael Faraday) ने 1831 में विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (electromagnetic induction) की खोज की, जिसमें उन्होंने दिखाया कि बदलते चुंबकीय अभिवाह के कारण कुंडली में धारा प्रेरित होती है।
- उन्होंने फैराडे के प्रेरण नियम को प्रतिपादित किया।
Quick Facts:
- फैराडे ने विद्युत चुंबकत्व के क्षेत्र में मौलिक योगदान दिया (विद्युत चुंबकीय प्रेरण, मोटर, जनित्र)।
- उनके नाम पर ‘फैराडे’ (धारिता की इकाई) रखी गई है।
जब कम्पास की सुई को छड़ चुम्बक के पास लाया जाता है तो वह विक्षेपित हो जाती है, क्योंकि यह ______
- एक छोटा चुंबक है।
- एक चालक है।
- धारा वहन करती है।
- एक लोहे की छड़ है।
Explanation:
- कम्पास की सुई (compass needle) स्वयं एक छोटा चुंबक (small magnet) है, इसलिए जब इसे किसी दूसरे चुंबक (छड़ चुंबक) के पास लाया जाता है, तो वह चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में विक्षेपित (deflected) हो जाती है।
- यह चुंबकीय बलों के कारण होता है (चुंबकीय द्विध्रुव की तरह व्यवहार)।
Quick Facts:
- कम्पास सुई का उत्तरी सिरा (N-pole) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित होता है।
- इसका उपयोग चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का पता लगाने में होता है।
जब किसी विद्युत धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल उत्पन्न होता है। यह किसका कार्य सिद्धांत है?
- मोटर
- टरबाइन
- शीतक
- जनित्र
Explanation:
- विद्युत मोटर (electric motor) का कार्य सिद्धांत यह है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुंडली पर बल (और बल आघूर्ण) कार्य करता है, जिससे वह घूर्णन करती है (यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है)।
- जनित्र (generator) में गतिमान कुंडली में धारा प्रेरित होती है (विद्युत चुम्बकीय प्रेरण) – यह विपरीत प्रक्रिया है।
Quick Facts:
- मोटर: विद्युत → यांत्रिक ऊर्जा (Fleming’s left-hand rule)
- जनित्र: यांत्रिक → विद्युत ऊर्जा (Fleming’s right-hand rule)
n फेरों (turns) और प्रवाहित धारा वाली किसी परिनालिका के अंदर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ______ के समानुपाती होता है।
- n
- n¹/²
- n²/²
- n²
Explanation:
- एक परिनालिका (solenoid) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ n I (जहाँ n = प्रति मीटर फेरों की संख्या, I = धारा)।
- अतः B, n (फेरों की संख्या) के अनुक्रमानुपाती (directly proportional) होता है।
- यदि n दोगुना हो जाए, तो B भी दोगुना हो जाता है (I स्थिर रहने पर)।
Quick Facts:
- B = μ₀ n I (परिनालिका के अंदर, सिरों से दूर)
- n = कुल फेरे (N) / लंबाई (L)
मान लीजिए कि एक प्रोटॉन नीचे की दिशा में एक समान चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करके पूर्व की ओर गति करता है। प्रोटॉन पर कार्यरत बल की दिशा होगी?
- पश्चिम की ओर
- पूर्व की ओर
- उत्तर की ओर
- दक्षिण की ओर
Explanation:
- प्रोटॉन पर चुंबकीय बल: F = q (v × B) – लोरेंत्ज़ बल (Lorentz force)
- यहाँ v = पूर्व (East), B = नीचे (Down) (माना –z दिशा)
- v × B = (East) × (Down) = (i) × (-k) = – (i × k) = – (-j) = +j (उत्तर, North)
- अतः बल उत्तर की ओर (North) होगा। (प्रोटॉन धनात्मक है, q > 0)।
Quick Facts:
- लोरेंत्ज़ बल: F = q(v × B) (आवेशित कण पर चुंबकीय बल)
- यदि कण ऋणात्मक (इलेक्ट्रॉन) होता, तो बल विपरीत दिशा (दक्षिण) में होता।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
- दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम एक सीधे चालक के परितः चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताता है।
- दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम वृत्तीय लूप पर लागू नहीं किया जा सकता।
- चुंबकीय क्षेत्र में किसी चालक पर लगने वाले बल को ज्ञात करने के लिए दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम का उपयोग किया जा सकता है।
- सीधे चालक पर दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम लागू नहीं किया जा सकता।
Explanation:
- सही कथन: दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम (Right-hand thumb rule) का उपयोग सीधे धारावाही चालक के परितः चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
- यह नियम वृत्ताकार लूप पर भी लागू होता है (अंगूठा धारा की दिशा में, उंगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं)।
- बल की दिशा के लिए फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम (Fleming’s left-hand rule) का उपयोग होता है, न कि दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम का।
Quick Facts:
- दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम → चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (current, field)
- फ्लेमिंग बायाँ हाथ → बल की दिशा (force, motor)
- फ्लेमिंग दायाँ हाथ → प्रेरित धारा की दिशा (induced current, generator)
एक धारावाही परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- (a) परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है।
- (b) परिनालिका का एक सिरा उत्तरी ध्रुव की तरह व्यवहार करता है और दूसरा एक छड़ चुंबक के दक्षिणी ध्रुव की तरह व्यवहार करता है।
- उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) और (b) दोनों
- केवल (a)
- न तो (a) न (b)
- केवल (b)
Explanation:
- (a) सही: एक लंबी परिनालिका (solenoid) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है (अक्ष के समानांतर, सिरों से दूर)।
- (b) सही: धारावाही परिनालिका एक छड़ चुंबक (bar magnet) की तरह व्यवहार करती है – एक सिरा उत्तरी ध्रुव (N) और दूसरा दक्षिणी ध्रुव (S) की तरह, जिसके परितः चुंबकीय क्षेत्र बंद लूप बनाता है।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर B = μ₀ n I (एकसमान, अक्ष के समानांतर)
- परिनालिका का व्यवहार ‘दंड चुंबक’ (bar magnet) के समान होता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की निकटता निम्नलिखित में से क्या इंगित करती है?
- ध्रुवों की स्थिति
- चुंबक की लंबाई
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
- चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की निकटता (closeness/density) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (strength) को इंगित करती है।
- जहाँ रेखाएँ सघन (dense) होती हैं, वहाँ क्षेत्र अधिक प्रबल (strong) होता है (जैसे ध्रुवों पर), और जहाँ विरल (sparse) होती हैं, वहाँ क्षेत्र दुर्बल (weak) होता है।
Quick Facts:
- क्षेत्र रेखाओं का घनत्व (density) = क्षेत्र की तीव्रता का माप
- ध्रुवों पर रेखाएँ सबसे अधिक सघन होती हैं, केंद्र पर सबसे कम।
आधुनिक विद्युत जनित्र ______ के सिद्धांत पर काम करता है।
- चुंबकीय प्रेरण
- विद्युत चुम्बकीय प्रेरण
- विद्युत प्रेरण
- विद्युत ऊर्जा
Explanation:
- विद्युत जनित्र (electric generator) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (electromagnetic induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है – जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उसमें प्रेरित EMF (विद्युत धारा) उत्पन्न होती है।
- यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है (फैराडे का नियम)।
Quick Facts:
- AC जनित्र: स्लिप रिंग (slip rings) का उपयोग, DC जनित्र: कम्यूटेटर (commutator) का उपयोग।
- फैराडे का नियम: E = -N dΦ/dt
निम्नलिखित में से कौन-सा कारक धारावाही वृत्तीय लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण बढ़ाएगा?
- लूप के फेरों की संख्या में वृद्धि
- लूप की त्रिज्या में वृद्धि
- लूप में प्रवाहित धारा में कमी
- लूप के तल का क्षैतिज से ऊर्ध्वाधर में परिवर्तन
Explanation:
- वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ N I / (2R) (जहाँ N = फेरों की संख्या, I = धारा, R = त्रिज्या)
- B बढ़ेगा यदि N (फेरों की संख्या) बढ़े, या I बढ़े, या R घटे।
- अतः विकल्प (a) सही है – फेरों की संख्या बढ़ाने से B बढ़ता है।
Quick Facts:
- B ∝ N (फेरों की संख्या)
- B ∝ I (धारा)
- B ∝ 1/R (त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती)
विद्युत चुंबकीय प्रेरण की घटना ______ के कारण घटित होती है।
- निकाय को विद्युतचुंबक से जोड़ने
- कुंडली से गुजरने वाले चुंबक अभिवाह में परिवर्तन
- चुंबक और कुंडली की स्थिर स्थिति
- निकाय में गैल्वेनोमीटर का स्थानन
Explanation:
- विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (electromagnetic induction) तब होता है जब कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय अभिवाह (magnetic flux) में परिवर्तन होता है (चाहे चुंबक हिले, कुंडली हिले, या धारा बदले)।
- यह फैराडे के नियम (E = -dΦ/dt) का सार है – स्थिर अभिवाह से कोई प्रेरण नहीं होता।
Quick Facts:
- अभिवाह (Φ) = B · A = BA cos θ
- प्रेरित EMF तभी उत्पन्न होता है जब Φ में परिवर्तन हो (dΦ/dt ≠ 0)
एक विज्ञान की पुस्तक में, समान औसत त्रिज्या और समान लंबाई की दो परिनालिका, P और Q दिखाए गए हैं। Q के अंदर खींची गई क्षेत्र रेखाओं की संख्या P के अंदर खींची गई क्षेत्र रेखाओं की संख्या से दोगुनी है। यदि दो परिनालिकाओं में फेरों की संख्या समान है, तो परिनालिका P में धारा, परिनालिका Q में धारा की ______ गुनी है।
- 1/2
- 1/2
- 4
- 1
Explanation:
- क्षेत्र रेखाओं की संख्या (या घनत्व) चुंबकीय क्षेत्र B के अनुक्रमानुपाती है।
- परिनालिका के अंदर B = μ₀ n I, जहाँ n = फेरों/लंबाई (समान है, क्योंकि फेरे और लंबाई समान हैं)।
- अतः B ∝ I (धारा के समानुपाती)
- Q में क्षेत्र रेखाएँ P से दोगुनी ⇒ B_Q = 2 B_P ⇒ I_Q = 2 I_P ⇒ I_P = (1/2) I_Q
Quick Facts:
- B ∝ I (धारा के समानुपाती) – परिनालिका के लिए
- यदि रेखाओं की संख्या दोगुनी है, तो धारा भी दोगुनी होगी।
छः मोड़ों वाली धारा प्रवाहित करने वाली एक वृत्ताकार कुंडली के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, समान धारा प्रवाहित करने वाले एक वृत्ताकार लूप के कारण उत्पन्न कितने गुना होगा?
- 2 गुना
- 4 गुना
- 8 गुना
- 6 गुना
Explanation:
- वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ N I / (2R), जहाँ N = फेरों (turns) की संख्या, I = धारा, R = त्रिज्या।
- एक लूप (N=1) के लिए B₁ = μ₀ I / (2R)
- 6 मोड़ों (N=6) के लिए B₂ = μ₀ (6) I / (2R) = 6 × B₁
- अतः क्षेत्र 6 गुना होगा।
Quick Facts:
- B ∝ N (फेरों की संख्या) – यदि समान धारा और त्रिज्या हो
- छः मोड़ों वाली कुंडली में क्षेत्र छः गुना अधिक होता है।
आरेख धारा-ले जाने वाले तार द्वारा उत्पादित बल क्षेत्र को दर्शाता है। बल क्षेत्र का नाम बताइए।
- विद्युत्स्थितिक क्षेत्र
- चुंबकीय क्षेत्र
- विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र
- स्थैतिक क्षेत्र
Explanation:
- धारावाही तार (current-carrying wire) अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) उत्पन्न करता है, जिसके क्षेत्र रेखाएँ संकेन्द्रित वृत्त (concentric circles) होते हैं (ओर्स्टेड का प्रयोग)।
- यह विद्युत क्षेत्र (electrostatic) या स्थैतिक (static) क्षेत्र नहीं है (विद्युत आवेशों द्वारा उत्पन्न होते हैं)।
Quick Facts:
- ओर्स्टेड ने 1820 में खोजा कि धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र होता है (विद्युत-चुंबकत्व का पहला प्रमाण)।
- क्षेत्र रेखाएँ संकेन्द्रित वृत्त होती हैं, जिनकी दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से ज्ञात होती है।
चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें चुम्बक द्वारा बल लगाया जाता है, कहलाता है:
- चुंबकीय रेखाएँ
- चुंबकीय क्षेत्र
- ध्रुव
- चुंबकीय प्रभाव
Explanation:
- चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र (region) जिसमें उसका चुंबकीय प्रभाव अनुभव होता है (बल लगता है), चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) कहलाता है।
- इसे चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं (magnetic field lines) द्वारा दर्शाया जाता है।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि है (B), इसकी दिशा और परिमाण होता है।
- SI मात्रक: टेस्ला (T) या गौस (G) (1 T = 10⁴ G)।
जब कोई पदार्थ अतिचालक बन जाता है और मीस्नर प्रभाव का अनुभव करता है, तो चुंबकीय क्षेत्र में क्या होता है?
- चुंबकीय क्षेत्र पदार्थ के आंतरिक भाग से पूरी तरह से बाहर निकाल दिए जाते हैं।
- चुंबकीय क्षेत्र पदार्थ में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करते हैं।
- पदार्थ के भीतर चुंबकीय क्षेत्रों की शक्ति बढ़ जाती है।
- चुंबकीय क्षेत्र अवशोषित हो जाते हैं और पदार्थ के अंदर संग्रहीत हो जाते हैं।
Explanation:
- मीस्नर प्रभाव (Meissner effect) अतिचालक (superconductor) का एक गुण है, जिसमें यह अपने आंतरिक भाग से सभी चुंबकीय क्षेत्रों को पूर्णतः बाहर निकाल (expel) देता है (जब इसका तापमान क्रांतिक तापमान से नीचे चला जाता है)।
- यह अतिचालकता की पहचान है – पदार्थ के अंदर B = 0 हो जाता है।
Quick Facts:
- अतिचालक में प्रतिरोध शून्य हो जाता है, और यह एक पूर्ण विचुंबक (perfect diamagnet) बन जाता है।
- मीस्नर प्रभाव की खोज 1933 में हुई थी।
निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर अत्यधिक चुंबकीय हो जाता है?
- लौहचुम्बकीय पदार्थ
- अनुचुम्बकीय पदार्थ
- विचुंबकीय पदार्थ
- प्रतिचुम्बकीय पदार्थ
Explanation:
- लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic materials) (जैसे Fe, Co, Ni) बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर अत्यधिक (strongly) चुंबकीय हो जाते हैं, क्योंकि इनमें डोमेन (domains) संरेखित हो जाते हैं, जिससे चुंबकन (magnetization) अत्यधिक बढ़ जाता है।
- अनुचुम्बकीय (paramagnetic) दुर्बल (weak) चुंबकीय होते हैं, विचुंबकीय (diamagnetic) अत्यंत दुर्बल प्रतिकर्षण दिखाते हैं।
Quick Facts:
- लौहचुम्बकीय पदार्थों में स्थायी चुंबकत्व (permanent magnetization) बन सकता है।
- उदाहरण: लोहा (Fe), कोबाल्ट (Co), निकल (Ni), इनके मिश्रधातु (alloys)।
एक धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा जाता है। फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम के अनुसार, चालक पर लगने वाले बल की दिशा ___________।
- चुंबकीय क्षेत्र के अनुदिश होगी
- धारा के विपरीत होगी
- चुंबकीय क्षेत्र और धारा दोनों के लंबवत होगी
- चालक पर कोई बल कार्य नहीं करता है
Explanation:
- फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम (Fleming’s left-hand rule): अंगूठा (thumb) → बल (Force), तर्जनी (forefinger) → चुंबकीय क्षेत्र (Field), मध्यमा (middle finger) → धारा (Current)।
- ये तीनों परस्पर लंबवत (perpendicular) होते हैं। अतः बल, क्षेत्र और धारा दोनों के लंबवत होता है (F = IL × B)।
Quick Facts:
- F = IL × B (सदिश गुणन) – बल सदैव IL और B दोनों के लंबवत होता है।
- यह नियम विद्युत मोटर के सिद्धांत पर आधारित है।
चुंबक के परितः चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिकतम कहाँ होती है?
- ध्रुवों से समदूरस्थ
- चुंबक के ध्रुवों पर
- अनंत पर
- चुंबक के केंद्र पर
Explanation:
- चुंबक के ध्रुवों (poles) पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (intensity) अधिकतम (maximum) होती है, क्योंकि वहाँ क्षेत्र रेखाएँ सबसे अधिक सघन (dense) होती हैं।
- केंद्र पर क्षेत्र न्यूनतम (या शून्य के निकट) होता है, और दूरी बढ़ने पर घटता है।
Quick Facts:
- क्षेत्र की तीव्रता ∝ रेखाओं का घनत्व
- ध्रुवों पर रेखाएँ सघनतम होती हैं, इसलिए वहाँ बल अधिकतम होता है।
धारा प्रवाहित करने वाले सीधे चालक से दूरी r पर एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण क्रमशः B₁, B₂ और B₃ हैं। इनमें से कौन सा संबंध सही है?
- B₂ > B₃ > B₁
- B₃ > B₂ > B₁
- B₁ > B₂ > B₃
- B₁ = B₂ = B₃
Explanation:
- सीधे धारावाही चालक से दूरी r पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ I / (2π r) ⇒ B ∝ 1/r (व्युत्क्रमानुपाती)
- अतः r (दूरी) जितनी कम, B उतना अधिक।
- यदि r₁ < r₂ < r₃, तो B₁ > B₂ > B₃
Quick Facts:
- B ∝ 1/r (व्युत्क्रमानुपाती, inverse proportion)
- यह ‘व्युत्क्रम दूरी नियम’ (inverse distance law) है (वर्ग नहीं, क्योंकि यह 2D रेखा के लिए है)।
स्व-प्रेरण क्या है?
- एक कुण्डली में धारा के कारण पास की कुण्डली में EMF का प्रेरण
- चुंबकीय क्षेत्र में गति के कारण एक कुण्डली में EMF का प्रेरण
- एक कुण्डली में उसकी अपनी धारा में परिवर्तन के कारण EMF का प्रेरण
- तापमान परिवर्तन के कारण एक कुण्डली में धारा का उत्पादन
Explanation:
- स्व-प्रेरण (Self-induction) वह घटना है जिसमें एक कुंडली में धारा में परिवर्तन होने पर, उसी कुंडली में एक प्रेरित EMF उत्पन्न होता है (जो धारा परिवर्तन का विरोध करता है – लेंज़ का नियम)।
- प्रेरित EMF = -L (dI/dt), जहाँ L = स्व-प्रेरकत्व (self-inductance)।
- यह ‘विद्युत चुम्बकीय जड़त्व’ (electromagnetic inertia) के समान है।
Quick Facts:
- L का SI मात्रक: हेनरी (H) = V·s/A
- अन्योन्य प्रेरण (mutual induction) – दो कुंडलियों के बीच।
फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम में तर्जनी किस दिशा को इंगित करती है:
- चुंबकीय बल
- विद्युत धारा
- चुंबकीय क्षेत्र
- चालक की गति
Explanation:
- फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (Fleming’s left-hand rule) में:
- तर्जनी (Forefinger) → चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की दिशा
- मध्यमा (Middle finger) → धारा (Current) की दिशा
- अंगूठा (Thumb) → बल (Force) की दिशा
Quick Facts:
- यह नियम मोटर (motor) में बल की दिशा ज्ञात करने के लिए है।
- दायाँ हाथ का नियम → प्रेरित धारा (generator) के लिए।
एक सीधे धारावाही चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक, चालक पर कार्य करने वाले बल के परिमाण को प्रभावित करता है?
- चालक का प्रतिरोध
- चालक का रंग
- चालक की आकृति
- चुंबकीय क्षेत्र सामर्थ्य
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल F = BIL sin θ, जहाँ θ = B और I के बीच कोण (यहाँ θ = 90°, sin 90° = 1)
- F, चुंबकीय क्षेत्र सामर्थ्य (B), धारा (I), और चालक की लंबाई (L) पर निर्भर करता है।
- प्रतिरोध, रंग, आकृति बल को प्रभावित नहीं करते (आकृति से लंबाई प्रभावित हो सकती है, पर यहाँ ‘आकृति’ का सीधा प्रभाव नहीं)।
Quick Facts:
- F = B I L (जब B ⊥ I)
- B का मान जितना अधिक, बल उतना अधिक।
यदि उत्तर की ओर एक आवेशित कण प्रक्षेपित किया जाए तो वह चुंबकीय क्षेत्र द्वारा पूर्व की ओर विक्षेपित हो जाता है, तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी?
- दक्षिण की ओर
- ऊपर की ओर
- पूर्व की ओर
- नीचे की ओर
Explanation:
- लोरेंत्ज़ बल F = q (v × B)
- यहाँ v = उत्तर (North), F = पूर्व (East) (मान लें कण धनात्मक है, q > 0)
- v × B = F ⇒ उत्तर × B = पूर्व
- दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार, यदि उत्तर (N) × ऊपर (Up) = पूर्व (E) होता है (क्योंकि N × U = E).
- अतः B की दिशा ऊपर (Up) है।
Quick Facts:
- यदि कण ऋणात्मक होता, तो दिशा विपरीत होती।
- यह ‘लोरेंत्ज़ बल’ (Lorentz force) का अनुप्रयोग है।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
- जब क्षेत्र रेखाएं सघन होती हैं, तो किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सदैव चुंबक के उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं और चुंबक के बाहर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं दक्षिणी ध्रुव से प्रारंभ होकर उत्तरी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं।
Explanation:
- सही कथन: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं, और चुंबक के अंदर S से N तक जाती हैं, जिससे बंद लूप बनते हैं।
- सघन रेखाएँ → प्रबल क्षेत्र (शून्य नहीं)।
- ये रेखाएँ प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
Quick Facts:
- यह क्षेत्र रेखाओं की मानक परिभाषा है (बाहर N → S, अंदर S → N)।
- क्षेत्र रेखाओं की दिशा उत्तरी ध्रुव पर क्षेत्र की दिशा होती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर बल की अवधारणा पर आधारित नहीं है?
- ध्वनि-विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर)
- एमीटर
- वोल्टमीटर
- विद्युत फ्यूज
Explanation:
- विद्युत फ्यूज (Electric fuse) ‘तापीय प्रभाव’ (heating effect) पर कार्य करता है (जब धारा अधिक होती है, तो तार गर्म होकर पिघल जाता है), न कि चुंबकीय बल पर।
- लाउडस्पीकर, एमीटर, वोल्टमीटर – सभी धारावाही कुंडली पर चुंबकीय बल के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
Quick Facts:
- फ्यूज: I²Rt (जूल तापन) – अतिधारा से बचाता है।
- एमीटर/वोल्टमीटर: धारा/वोल्टता के अनुपात में विक्षेपण (moving coil galvanometer) – चुंबकीय बल पर आधारित।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण की परिघटना के दौरान एक कुंडली में प्रेरित EMF ______ के अनुक्रमानुपाती होता है।
- चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन
- चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर
- चुंबकीय फ्लक्स
- परिपथ के प्रतिरोध
Explanation:
- फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का नियम: प्रेरित EMF, चुंबकीय अभिवाह (magnetic flux) के परिवर्तन की दर (rate of change) के अनुक्रमानुपाती होता है।
- E = -N dΦ/dt (जहाँ N = फेरों की संख्या)
- यदि Φ में परिवर्तन की दर अधिक है, तो EMF अधिक होता है (चाहे Φ का मान बड़ा हो या छोटा, केवल dΦ/dt मायने रखता है)।
Quick Facts:
- यदि Φ स्थिर है (dΦ/dt = 0), तो EMF = 0 (कोई प्रेरण नहीं)।
- यह नियम लेंज़ के नियम (Lenz’s law) द्वारा पूरक है, जो दिशा बताता है।
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल का परिमाण किस स्थानिक स्थिति में सर्वाधिक पाया जाता है?
- जब धारा और क्षेत्र एक दूसरे के लंबवत हों।
- जब धारा चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव की ओर प्रवाहित हो।
- जब धारा में तात्कालिक परिवर्तन हो।
- जब धारा और क्षेत्र समानांतर हों।
Explanation:
- F = BIL sin θ, जहाँ θ = धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) के बीच कोण।
- F अधिकतम (maximum) होता है जब sin θ = 1, अर्थात θ = 90° (धारा और क्षेत्र लंबवत हों)।
- जब θ = 0° (समानांतर), तो F = 0 (शून्य)।
Quick Facts:
- F = BIL (जब θ = 90°)
- बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम द्वारा निर्धारित होती है।
धारावाही परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न निम्न के समान होता है:
- धारा वाहक सीधा तार
- दंड चुंबक
- धारा वाहक वृत्ताकार पाश
- नाल चुंबक
Explanation:
- धारावाही परिनालिका (current-carrying solenoid) के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न दंड चुंबक (bar magnet) के समान होता है – एक सिरा उत्तरी (N) और दूसरा दक्षिणी (S) ध्रुव के रूप में व्यवहार करता है, और क्षेत्र रेखाएँ बंद लूप बनाती हैं (बाहर N से S, अंदर S से N)।
- सीधे तार के चारों ओर संकेन्द्रित वृत्त होते हैं, वृत्ताकार लूप के केंद्र पर अक्ष के अनुदिश क्षेत्र होता है।
Quick Facts:
- परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र ‘दंड चुंबक’ (bar magnet) के समान होता है।
- यही कारण है कि परिनालिका का उपयोग ‘विद्युत चुंबक’ (electromagnet) बनाने में होता है।
धारावाही सोलेनॉयड (current carrying solenoid) के परितः चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- सोलेनॉयड से जुड़े चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को इसके माध्यम से प्रवाहित धारा की दिशा को व्युत्क्रमित करके बदला जा सकता है।
- सोलेनॉयड में फेरों की संख्या कम करके सोलेनॉयड से जुड़े क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है।
- सोलेनॉयड का क्षेत्र रेखा पैटर्न सीधे धारावाही तार के चुंबकीय क्षेत्र रेखा पैटर्न जैसा दिखता है।
- सोलेनॉयड के कोर में क्षेत्र एक छोर से दूसरे छोर तक घटता है।
Explanation:
- सत्य कथन: परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा बदलने पर, चुंबकीय क्षेत्र की दिशा विपरीत (reverse) हो जाती है (N और S ध्रुव आपस में बदल जाते हैं) – यह दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम पर आधारित है।
- क्षेत्र की तीव्रता बढ़ाने के लिए फेरों की संख्या बढ़ानी चाहिए (कम नहीं)।
- सोलेनॉयड का पैटर्न दंड चुंबक (bar magnet) जैसा है, सीधे तार जैसा नहीं।
Quick Facts:
- B = μ₀ n I (सोलेनॉयड के अंदर, एकसमान)
- धारा की दिशा उलटने पर क्षेत्र की दिशा उलट जाती है (लेंज़/फैराडे नियम)।
निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण विद्युत मोटर का उपयोग नहीं करता है?
- गैल्वेनोमीटर
- विद्युत मिक्सर
- कंप्यूटर
- विद्युत पंखा
Explanation:
- गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) एक मापन उपकरण (measuring instrument) है, जो विद्युत धारा का पता लगाने/मापने के लिए है – यह मोटर (motor) नहीं है (यद्यपि यह चुंबकीय बल पर आधारित है, पर इसमें निरंतर घूर्णन नहीं होता, यह सुई का विक्षेपण है)।
- विद्युत मिक्सर, पंखा, कंप्यूटर (शीतलन पंखा) – सभी मोटर का उपयोग करते हैं।
Quick Facts:
- गैल्वेनोमीटर का उपयोग धारा (current) और वोल्टता (voltage) मापन में होता है (एमीटर/वोल्टमीटर का सिद्धांत)।
- मोटर: विद्युत → यांत्रिक ऊर्जा, गैल्वेनोमीटर: विद्युत → यांत्रिक विक्षेपण (मापन के लिए)।
DC और AC जनरेटर के बीच सबसे आवश्यक अंतर ______ है।
- DC जनरेटर द्वारा ही उच्च वोल्टता उत्पन्न किए जाते हैं
- केवल AC जनरेटर द्वारा उच्च वोल्टता उत्पन्न किए जाते हैं
- DC जनरेटर में स्थायी चुंबक होता है और AC में विद्युत चुंबक होता है
- DC जनरेटर एक कम्यूटेटर का उपयोग करता है और AC जनरेटर स्लिप रिंग का उपयोग करता है
Explanation:
- DC जनरेटर (दिष्ट धारा) में कम्यूटेटर (commutator – विभाजित वलय) का उपयोग होता है, जो धारा को एक दिशा में (दिष्ट) करता है।
- AC जनरेटर (प्रत्यावर्ती धारा) में स्लिप रिंग (slip rings) का उपयोग होता है, जो धारा को प्रत्यावर्ती (alternating) बनाए रखता है।
- यह मूलभूत संरचनात्मक अंतर है।
Quick Facts:
- DC जनरेटर: कम्यूटेटर (दिष्ट धारा), AC जनरेटर: स्लिप रिंग (प्रत्यावर्ती धारा)
- दोनों ही विद्युत चुम्बकीय प्रेरण पर कार्य करते हैं।
किसी चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति में एक धारावाही चालक पर कार्यरत बल की दिशा निर्भर करती है:
- न तो धारा की दिशा न ही चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
- अकेले धारा की दिशा
- अकेले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
- चुंबकीय क्षेत्र और धारा दोनों की दिशा
Explanation:
- धारावाही चालक पर बल की दिशा F = IL × B (सदिश गुणन) द्वारा दी जाती है, अतः यह धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों की दिशा पर निर्भर करती है।
- यदि I या B की दिशा बदलती है, तो F की दिशा भी बदल जाती है (फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम)।
Quick Facts:
- F = IL × B (दायाँ-हस्त नियम, क्रॉस उत्पाद)
- यदि I और B समानांतर हैं, तो बल शून्य (sin θ = 0) होता है।
फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम क्या ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता है?
- धारावाही चालक से संबद्ध चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
- गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की दिशा
- धारावाही चालक में प्रेरित धारा की दिशा
- धारावाही चालक की गति की दिशा
Explanation:
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Fleming’s right-hand rule) का उपयोग प्रेरित धारा (induced current) की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है, जब चालक चुंबकीय क्षेत्र में गतिशील हो (जनित्र का सिद्धांत)।
- अंगूठा (thumb) → गति (Motion), तर्जनी (forefinger) → क्षेत्र (Field), मध्यमा (middle finger) → प्रेरित धारा (Induced current)।
Quick Facts:
- बायाँ हाथ (left-hand) → मोटर (बल) के लिए, दायाँ हाथ (right-hand) → जनित्र (प्रेरित धारा) के लिए।
- यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (फैराडे) पर आधारित है।
निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन डी सी मोटर के लिए सत्य है/हैं?
- (i) विभाजित वलयों का कार्य धारा के प्रवाह को उलटना है।
- (ii) चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर संरेखित कुंडली की भुजाओं द्वारा अधिकतम बल अनुभव किया जाता है
- (iii) प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद धारा को उलटने से कुंडली का घूर्णन निरंतर होता है।
- (i) और (ii) दोनों
- केवल (i)
- (i) और (iii) दोनों
- केवल (ii)
Explanation:
- (i) सही: DC मोटर में विभाजित वलय (split rings/commutator) धारा की दिशा को प्रत्येक आधे चक्र (half rotation) पर उलट देते हैं, ताकि कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहे।
- (ii) गलत: बल अधिकतम (maximum) तब होता है जब कुंडली की भुजाएँ क्षेत्र के लंबवत (perpendicular) होती हैं (θ = 90°), समानांतर (θ = 0°) पर बल शून्य होता है।
- (iii) सही: धारा को प्रत्येक आधे घूर्णन पर उलटने (reversing) से कुंडली का घूर्णन निरंतर (continuous) बना रहता है (अन्यथा यह दोलन करती)।
Quick Facts:
- DC मोटर में कम्यूटेटर (split rings) धारा को उलटता है, जिससे बलाघूर्ण (torque) एकदिशीय बना रहता है।
- F = BIL sin θ – θ = 90° पर अधिकतम, 0° पर शून्य
कोबाल्ट ______ सामग्री का एक उदाहरण है।
- अचुंबकीय (Non-magnetic)
- लौहचुंबकीय (Ferromagnetic)
- प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic)
- अनुचुंबकीय (Paramagnetic)
Explanation:
- कोबाल्ट (Co) एक लौहचुम्बकीय (ferromagnetic) पदार्थ है, जो चुंबकीय क्षेत्र में अत्यधिक प्रबलता से चुंबकित होता है (Fe, Co, Ni)।
- इसका उपयोग स्थायी चुंबक (permanent magnets) और मिश्रधातुओं (alloys) में होता है।
Quick Facts:
- लौहचुम्बकीय पदार्थ: Fe, Co, Ni, Gd, Dy
- अनुचुम्बकीय: Al, Pt, Mn (दुर्बल), प्रतिचुम्बकीय: Bi, Cu, Au (अत्यंत दुर्बल प्रतिकर्षण)
जटिल आकृतियों वाली वस्तुओं के निर्मलन के लिए अल्ट्रासाउंड को क्यों वरीयता दी जाती है?
- इनसे चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होता है
- द्रव्य में इनकी चाल अत्यधिक तीव्र होती है
- इनकी उच्च आवृत्ति से धूल के कण विस्थापित हो जाते हैं
- इससे विलयन के तापमान में वृद्धि हो जाती है
Explanation:
- अल्ट्रासाउंड (ultrasound) की उच्च आवृत्ति (high frequency, > 20 kHz) के कारण यह सूक्ष्म कणों (धूल, गंदगी) को हटाने (cleaning) के लिए प्रभावी होता है – यह ‘कैविटेशन’ (cavitation) प्रक्रिया द्वारा काम करता है, जिसमें उच्च-आवृत्ति तरंगें द्रव में बुलबुले उत्पन्न करती हैं जो फटकर धूल के कणों को विस्थापित कर देते हैं।
- इसलिए जटिल आकृतियों (जैसे आभूषण, चिकित्सा उपकरण) की सफाई के लिए अल्ट्रासाउंड को वरीयता दी जाती है।
Quick Facts:
- अल्ट्रासाउंड सफाई (ultrasonic cleaning) – द्रव में तरंगें कंपन पैदा करती हैं, जिससे गंदगी ढीली हो जाती है।
- इसका उपयोग दंत चिकित्सा, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स की सफाई में होता है।
एक प्रबल चुंबक को किसी स्थिर कुंडली की ओर ले जाया जाता है। जब चुंबक की गति की दिशा और कुंडली के तल के बीच का कोण ______ होगा, तब कुंडली में प्रेरित धारा न्यूनतम होगी।
- 0°
- 30°
- 90°
- 60°
Explanation:
- प्रेरित EMF = -dΦ/dt, जहाँ Φ = BA cos θ (θ = चुंबकीय क्षेत्र B और कुंडली के तल के अभिलम्ब (normal) के बीच कोण)
- यहाँ ‘गति की दिशा और कुंडली के तल के बीच कोण’ = θ (अभिलम्ब के साथ कोण = 90° – θ_तल)
- जब θ = 90° (गति तल के लंबवत, अर्थात अभिलम्ब के समानांतर, क्योंकि cos 0° =1 अधिकतम), तो dΦ/dt अधिकतम होता है।
- न्यूनतम (minimum) प्रेरण के लिए, Φ में परिवर्तन न्यूनतम होना चाहिए, अर्थात θ (अभिलम्ब और B के बीच) = 90° ⇒ गति और तल के बीच कोण = 0° (अर्थात गति तल के समानांतर)।
- इसलिए 0° पर प्रेरित धारा न्यूनतम (शून्य) होती है (क्योंकि dΦ/dt = 0, Φ स्थिर)।
Quick Facts:
- प्रेरण के लिए अभिवाह में परिवर्तन आवश्यक है – यदि गति तल के समानांतर (0°) है, तो अभिवाह नहीं बदलता (dΦ/dt = 0), अतः प्रेरित धारा = 0 (न्यूनतम)।
- जब गति तल के लंबवत (90°) हो, तो प्रेरित धारा अधिकतम होती है।
फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम का उपयोग किसकी दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है?
- बल
- प्रेरित धारा
- विद्युत क्षेत्र
- विभव
Explanation:
- फ्लेमिंग का दायाँ हाथ (right-hand) नियम प्रेरित धारा (induced current) की दिशा ज्ञात करने के लिए है (विद्युत चुम्बकीय प्रेरण में, जब चालक चुंबकीय क्षेत्र में गतिशील हो)।
- बल की दिशा के लिए बायाँ हाथ (left-hand) नियम है।
Quick Facts:
- दायाँ हाथ (Right hand rule) – जनित्र (generator) के लिए
- बायाँ हाथ (Left hand rule) – मोटर (motor) के लिए
किसी विद्युत धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र:
- दूरी बढ़ने के साथ घटता जाता है
- दूरी में किसी भी बदलाव से अप्रभावित होता है
- दूरी बढ़ने के साथ बढ़ता है
- दूरी बढ़ने के साथ स्थिर रहता है
Explanation:
- सीधे धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ I / (2π r), अतः B ∝ 1/r
- दूरी (r) बढ़ने पर B घटता (decreases) है (व्युत्क्रमानुपाती)
- यह सभी धारावाही चालकों के लिए सत्य है (वृत्ताकार, परिनालिका आदि में भी दूरी बढ़ने पर क्षेत्र घटता है)।
Quick Facts:
- B ∝ 1/r (सीधे चालक के लिए)
- B ∝ 1/r² (द्विध्रुव, वृत्ताकार लूप से दूर के बिंदुओं के लिए)
निम्नलिखित में से, चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के सही गुणों की पहचान करें।
- (a) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद पाश होती हैं।
- (b) चुंबक के उत्तरी ध्रुव से उसके दक्षिणी ध्रुव तक, चुंबक के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ होती हैं।
- (c) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं।
- (d) यदि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ अधिक हैं, तो उस क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिक होती है।
- (e) प्रति इकाई क्षेत्रफल में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की संख्या को चुंबकीय अभिवाह कहा जाता है।
- (a), (b), (c) और (d)
- (b), (c), (e)
- (a), (c), (d)
- (a), (b), (d) और (e)
Explanation:
- (a) सही: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद पाश (closed loops) होती हैं।
- (b) सही: चुंबक के बाहर, रेखाएँ N से S तक जाती हैं (अंदर S से N तक)।
- (c) गलत: रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
- (d) सही: रेखाओं का घनत्व (density) क्षेत्र की तीव्रता को दर्शाता है – अधिक रेखाएँ = अधिक तीव्रता।
- (e) सही: प्रति इकाई क्षेत्रफल में रेखाओं की संख्या = चुंबकीय अभिवाह (magnetic flux) (Φ = B·A)।
- अतः (a), (b), (d) और (e) सही हैं।
Quick Facts:
- चुंबकीय अभिवाह (Φ) = BA cos θ, SI मात्रक: वेबर (Wb)
- क्षेत्र रेखाएँ कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं (यह एक मौलिक गुण है)।
विद्युत मोटर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- (a) एक विद्युत मोटर विभाजित वलयों का उपयोग करता है।
- (b) मोटर की कुंडली पर बल की दिशा फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम का उपयोग करके पाई जा सकती है।
- उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल (b)
- (a) और (b) दोनों
- केवल (a)
- न तो (a) और न ही (b)
Explanation:
- (a) सही: एक DC मोटर में विभाजित वलय (split rings/commutator) का उपयोग होता है, जो धारा की दिशा को प्रत्येक आधे घूर्णन पर उलटता है ताकि कुंडली एक दिशा में घूमती रहे।
- (b) गलत: मोटर की कुंडली पर बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ (left-hand) नियम से ज्ञात होती है, दाएँ हाथ से नहीं (दायाँ हाथ जनित्र/प्रेरित धारा के लिए है)।
Quick Facts:
- मोटर: बायाँ हाथ (Force, Field, Current)
- जनित्र: दायाँ हाथ (Motion, Field, Induced Current)
किसी विद्युत धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र हैं:
- एक दूसरे के समानांतर
- अर्धवृत्ताकार आकार
- संकेंद्रित वृत्त
- प्रतिच्छेदी रेखाएँ
Explanation:
- एक सीधे धारावाही चालक (straight current-carrying conductor) के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त (concentric circles) होती हैं (ओर्स्टेड का प्रयोग, दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम)।
- वृत्तों का केंद्र चालक होता है, और दूरी बढ़ने पर वृत्तों का आकार बढ़ता है, क्षेत्र घटता है।
Quick Facts:
- यह ‘विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव’ (magnetic effect of electric current) है – ओर्स्टेड, 1820।
- क्षेत्र रेखाएँ प्रतिच्छेद नहीं करतीं और बंद वक्र होती हैं।
विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र द्वारा त्वरित कणों को ______ के रूप में प्रेषित किया जाता है।
- विद्युत चुम्बकीय विकिरण
- विद्युतचुंबकीय आवृत्ति
- विद्युतचुंबकीय आयाम
- इलेक्ट्रोमैनेटिक प्रेरण
Explanation:
- जब आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) विद्युत या चुंबकीय क्षेत्र द्वारा त्वरित (accelerated) होते हैं, तो वे विद्युत चुम्बकीय विकिरण (electromagnetic radiation) उत्सर्जित करते हैं (जैसे सिंक्रोट्रॉन विकिरण, ब्रेम्सस्ट्रालुंग X-रे)।
- यह मैक्सवेल के समीकरणों का परिणाम है – त्वरित आवेश विकिरण उत्सर्जित करता है।
Quick Facts:
- त्वरित आवेश → EM तरंगों का उत्सर्जन (Larmor’s formula)
- उदाहरण: X-रे ट्यूब (त्वरित इलेक्ट्रॉन → X-रे), सिंक्रोट्रॉन प्रकाश।
दो कुंडलियों A और B पर विचार कीजिए। मान लीजिए कि कुंडली A को कुंडली B से प्रतिस्थापित किया जाता है, जिसमें फेरों की संख्या कुंडली A की तुलना में 2 गुना है और चुंबकीय प्रवाह के परिवर्तन की दर स्थिर है। प्रारंभिक तथा अंतिम प्रेरित विद्युत वाहक बल EMF का अनुपात निर्धारित कीजिए।
- 1 : 2
- 3 : 2
- 2 : 1
- 2 : 3
Explanation:
- प्रेरित EMF (E) = -N (dΦ/dt), जहाँ N = फेरों की संख्या, dΦ/dt = चुंबकीय अभिवाह परिवर्तन की दर (स्थिर है)।
- E ∝ N (क्योंकि dΦ/dt स्थिर है)
- यदि N_B = 2 N_A, तो E_B = 2 E_A
- अतः E_A : E_B = 1 : 2
Quick Facts:
- प्रेरित EMF, फेरों की संख्या (N) के अनुक्रमानुपाती होता है (फैराडे का नियम)
- यदि N दोगुना हो जाता है, तो EMF भी दोगुना हो जाता है (अन्य कारक स्थिर रहने पर)।
एक परिनालिका के भीतर उत्पन्न प्रबल चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग कुंडली के भीतर रखे गए मृदु लोहे (soft iron) के टुकड़े को चुंबकित करने के लिए किया जा सकता है। परिणामी चुंबक को क्या कहा जाता है?
- टोरॉइड
- स्थायी चुंबक
- प्राकृतिक चुंबक
- विद्युत चुंबक
Explanation:
- जब एक परिनालिका (solenoid) के अंदर मृदु लोहा (soft iron) रखा जाता है और उसमें धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह विद्युत चुंबक (electromagnet) बन जाता है, जो एक अस्थायी (temporary) चुंबक होता है (धारा बंद होने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है)।
- स्थायी चुंबक (permanent magnet) कठोर लोहे (hard iron) से बनता है, जो चुंबकत्व बनाए रखता है।
Quick Facts:
- विद्युत चुंबक का उपयोग क्रेन, स्पीकर, मोटर, रिले आदि में होता है।
- मृदु लोहा (soft iron) उच्च चुंबकीय पारगम्यता (permeability) और निम्न निग्रहिता (coercivity) रखता है।
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम किसका निर्धारण करने के लिए प्रयोग किया जाता है?
- धारावाही चालक पर लगने वाले बल का परिमाण
- चालक से प्रवाहित होने वाली धारा की मात्रा
- धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा
- चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
Explanation:
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ (left-hand) नियम धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा (direction of force) ज्ञात करने के लिए है (जब चालक चुंबकीय क्षेत्र में रखा हो) – यह मोटर का सिद्धांत है।
- बल का परिमाण (magnitude) F = BIL sin θ से ज्ञात होता है।
Quick Facts:
- बायाँ हाथ (Left hand) – मोटर (Force, Field, Current)
- यह नियम विद्युत मोटर, लाउडस्पीकर आदि में लागू होता है।
एक कमरे में, एक चुंबकीय क्षेत्र को लंबवत ऊपर की ओर लगाया जाता है। इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन बीमों को क्षैतिज रूप से दक्षिण से उत्तर दिशा में इस क्षेत्र में छोड़ा जाता है। इन बीमों के विक्षेपण की दिशाएँ क्रमशः ______ और ______ होंगी।
- पूर्व, पश्चिम
- लंबवत नीचे, लंबवत ऊपर
- पश्चिम, पूर्व
- लंबवत ऊपर, लंबवत नीचे
Explanation:
- लोरेंत्ज़ बल: F = q (v × B)
- यहाँ v = उत्तर (North), B = ऊपर (Up) (लंबवत)
- v × B = उत्तर × ऊपर = पश्चिम (West) (दक्षिण-हस्त नियम)
- प्रोटॉन (q > 0) → F पश्चिम (West) की ओर (विक्षेपण पश्चिम)
- इलेक्ट्रॉन (q < 0) → F विपरीत दिशा में ⇒ पूर्व (East) की ओर
- अतः क्रम: इलेक्ट्रॉन → पश्चिम, प्रोटॉन → पूर्व
Quick Facts:
- इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन पर बल विपरीत दिशा में होता है (विपरीत आवेश)।
- यह ‘लोरेंत्ज़ बल’ (Lorentz force) का अनुप्रयोग है।
तांबे के तारों से निर्मित एक वर्गाकार कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन कर रही है। तब कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा, ______ में एक बार बदलेगी।
- कुंडली के प्रत्येक एक-चौथाई परिक्रमण
- कुंडली के प्रत्येक आधे परिक्रमण
- कुंडली के प्रत्येक 1/8 वें परिक्रमण
- कुंडली के प्रत्येक 1/6 वें परिक्रमण
Explanation:
- AC जनरेटर में, कुंडली के प्रत्येक आधे चक्र (half rotation, 180°) पर प्रेरित धारा की दिशा (polarity) बदल जाती है (विपरीत हो जाती है), क्योंकि अभिवाह (flux) का परिवर्तन चिह्न (sign) बदल जाता है (cos θ के कारण)।
- यही कारण है कि AC धारा प्रत्यावर्ती (alternating) होती है – दिशा हर आधे चक्र पर बदलती है।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF = -dΦ/dt, Φ = BA cos θ (θ = कोण)
- जब θ = 0° (तल क्षेत्र के लंबवत), EMF अधिकतम; θ = 90° (तल क्षेत्र के समानांतर), EMF शून्य; प्रत्येक 180° पर दिशा बदलती है।
धारावाही सरल चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- (a) एक बिंदु पर दिक्सूचक सुई के दक्षिणी ध्रुव की दिशा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।
- (b) यदि चालक में विद्युत धारा की दिशा विपरीत कर दी जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र में रेखाओं की दिशा विपरीत हो जाती है।
- उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल (b)
- केवल (a)
- न तो (a) न ही (b)
- (a) और (b) दोनों
Explanation:
- (a) गलत: दिक्सूचक सुई का उत्तरी (N) ध्रुव (north pole) उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को इंगित करता है, दक्षिणी (S) ध्रुव नहीं (क्षेत्र की दिशा उत्तरी ध्रुव पर कार्यरत बल की दिशा होती है)।
- (b) सही: यदि धारा की दिशा विपरीत (reverse) हो जाती है, तो दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार, चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी विपरीत हो जाती है (B की दिशा I पर निर्भर है)।
Quick Facts:
- दिक्सूचक सुई का उत्तरी सिरा (N) क्षेत्र की दिशा में संरेखित होता है।
- धारा की दिशा बदलने पर, चुंबकीय क्षेत्र की दिशा उलट जाती है (यह ओर्स्टेड के प्रयोग का परिणाम है)।
विद्युत मोटर का वह भाग जो उसमें धारा के प्रवाह की दिशा को उलट देता है, वह है:
- ब्रश
- विभक्त वलय
- नर्म लोहे का क्रोड
- कुंडली
Explanation:
- विद्युत मोटर में धारा की दिशा को उलटने वाला भाग विभक्त वलय (Split Ring / Commutator) होता है।
- यह प्रत्येक अर्ध-घूर्णन (half rotation) के बाद कुंडली में धारा की दिशा बदल देता है, जिससे आर्मेचर एक ही दिशा में घूमता रहता है।
- ब्रश (Brushes) कुंडली को बाहरी परिपथ से जोड़ते हैं, पर धारा की दिशा नहीं बदलते।
Quick Facts:
- विभक्त वलय को ‘कम्यूटेटर’ (Commutator) भी कहते हैं।
- यह DC मोटर का एक आवश्यक भाग है।
पश्चिमी छोर की ओर से देखने पर पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली क्षैतिज विद्युत रेखा के ठीक नीचे एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी?
- वामावर्त
- दक्षिणावर्त
- विद्युत के प्रवाह के समानांतर
- विद्युत के प्रवाह के लंबवत
Explanation:
- दिशा: धारा पूर्व (East) से पश्चिम (West) की ओर है (बाएँ से दाएँ)।
- दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule) लागू करें: अंगुष्ठ → पश्चिम (धारा की दिशा), तो मुड़ी हुई उंगलियाँ तार के नीचे वामावर्त (anti-clockwise) दिशा दिखाएँगी (जब पश्चिमी छोर से देखें)।
Quick Facts:
- चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त (concentric circles) होती हैं।
- दिशा: धारा की दिशा के लंबवत समतल में वृत्ताकार।
एक छड़ चुम्बक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (a) छड़ चुम्बक के अंदर क्षेत्र रेखाएँ उसके दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव तक निर्देशित होती हैं। (b) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ केवल छड़ चुम्बक के बाहर मौजूद होती हैं। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) और (b) दोनों
- केवल (b)
- केवल (a)
- न तो (a) और न ही (b)
Explanation:
- कथन (a): चुंबक के अंदर क्षेत्र रेखाएँ दक्षिण → उत्तर (S → N) दिशा में होती हैं (बाहर उत्तर → दक्षिण)। यह सही है।
- कथन (b): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के अंदर और बाहर दोनों जगह मौजूद होती हैं (वे बंद लूप बनाती हैं)। अतः यह गलत है।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद (closed) वक्र होती हैं।
- बाहर: N → S, अंदर: S → N
धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निम्नलिखित में से किसके द्वारा निर्धारित होती है?
- फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम
- लेंज के नियम
- दक्षिण हस्त अंगूष्ठ नियम
- फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम
Explanation:
- धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule) द्वारा ज्ञात की जाती है: अंगुष्ठ → धारा की दिशा, मुड़ी हुई उंगलियाँ → क्षेत्र की दिशा (लूप के केंद्र पर)।
- फ्लेमिंग के नियम बल (force) की दिशा के लिए हैं, लेंज का नियम प्रेरित धारा की दिशा के लिए।
Quick Facts:
- वृत्ताकार लूप के केंद्र पर B = μ₀ I / (2r) (दिशा: अक्ष के अनुदिश)
- दिशा: यदि धारा वामावर्त है, तो क्षेत्र बाहर की ओर (उत्तरी ध्रुव की तरह)।
विद्युत परिपथ में फ्यूज तार ______ के सिद्धांत पर काम करता है।
- धारा के चुंबकीय प्रभाव
- धारा के तापीय प्रभाव
- धारा के रासायनिक प्रभाव
- धारा के प्रेरण प्रभाव
Explanation:
- फ्यूज (Fuse) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव (heating effect) पर काम करता है।
- जब धारा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो फ्यूज तार (निम्न गलनांक वाला, जैसे टिन-लेड मिश्र धातु) गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है, जिससे उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
Quick Facts:
- फ्यूज का सिद्धांत: H = I²Rt (जूल का ऊष्मीय नियम)
- फ्यूज हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम (series) में जुड़ा होता है।
धारावाही परिनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र पर विचार करें। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
- परिनालिका एक तरह से दंड चुंबक के समान कार्य करती है।
- लंबी परिनालिका के केंद्र के पास चुंबकीय क्षेत्र लगभग स्थिर होता है।
- परिनालिका के बाहर लेकिन पास में चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण अत्यधिक बड़ा होता है।
- यदि हम घुमावों की संख्या बढ़ाते हैं तो चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य बढ़ जाती है।
Explanation:
- परिनालिका (Solenoid) के बाहर चुंबकीय क्षेत्र अत्यधिक दुर्बल (लगभग शून्य) होता है, अत्यधिक बड़ा नहीं। अतः यह कथन गलत है।
- अन्य कथन सत्य हैं: यह दंड चुंबक की तरह कार्य करती है (N-S ध्रुव बनते हैं), अंदर का क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है, और B ∝ nI (फेरों की संख्या के समानुपाती)।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर B = μ₀ n I (n = प्रति मीटर फेरे)
- बाहर का क्षेत्र लगभग शून्य होता है (आदर्श लंबी परिनालिका के लिए)।
व्यावसायिक मोटर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (a) इसमें स्थायी चुंबक के स्थान पर विद्युत चुंबक का प्रयोग किया जाता है। (b) इसमें एक नर्म लौह क्रोड का प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) और (b) दोनों नहीं
- केवल (a)
- (a) और (b) दोनों
- केवल (b)
Explanation:
- व्यावसायिक मोटरों में क्षेत्र चुंबक के रूप में विद्युत चुंबक (electromagnet) का उपयोग होता है (स्थायी चुंबक के स्थान पर), जो अधिक प्रबल क्षेत्र देता है। (a) सत्य
- इनमें नर्म लोहे का क्रोड (soft iron core) आर्मेचर पर लपेटा जाता है, जो चुंबकीय क्षेत्र को बढ़ाता है। (b) सत्य
Quick Facts:
- व्यावसायिक मोटरों में विद्युत चुंबक (इलेक्ट्रोमैग्नेट) अधिक कुशल होता है।
- नर्म लोहे का क्रोड चुंबकीय फ्लक्स (flux) को केंद्रित करता है, जिससे बल बढ़ता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के लिए कौन सा कथन सत्य नहीं है?
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र नहीं होती हैं।
- कोई भी दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
- चूंबक के अंदर, क्षेत्र रेखाओं की दिशा इसके दक्षिणी ध्रुव से इसके उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।
- चूंबकीय क्षेत्र की सापेक्ष शक्ति क्षेत्र रेखाओं की निकटता की डिग्री द्वारा दिखाई जाती है।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र (closed curves) होती हैं (बाहर N → S, अंदर S → N), अतः “बंद वक्र नहीं” कथन सत्य नहीं है।
- अन्य कथन सत्य हैं: क्षेत्र रेखाएँ प्रतिच्छेद नहीं करतीं, अंदर S → N, सघनता क्षेत्र की प्रबलता दर्शाती है।
Quick Facts:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा बंद लूप (closed loops) बनाती हैं (विद्युत क्षेत्र रेखाओं के विपरीत, जो धनात्मक आवेश से निकलकर ऋणात्मक पर समाप्त होती हैं)।
चुंबकीय क्षेत्र रेषांबद्दल खालीलपैकी कोणते विधान योग्य आहे? (चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के बारे में कौन-सा कथन सही है?)
- त्या केवळ चूंबकाच्या केंद्रातून उगम पावतात
- त्या प्रभारीत कणांचा मार्ग दाखवतात
- त्या चूंबकाच्या आत आणि बाहेर बंद लूप तयार करतात.
- त्या नेहमी (एकमेकीन) छेदतात
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के अंदर और बाहर बंद लूप (closed loops) बनाती हैं।
- ये कभी भी प्रतिच्छेद (intersect) नहीं करतीं, और ये आवेशित कणों के पथ नहीं होतीं (बल की दिशा दिखाती हैं)।
Quick Facts:
- क्षेत्र रेखाएँ सतत (continuous) होती हैं और बंद लूप बनाती हैं।
- इनकी दिशा: बाहर N → S, अंदर S → N
विद्युत मोटर का कार्यकारी सिद्धांत क्या है?
- कुंडली के साथ एक चालक असमान चुंबकीय क्षेत्र वाले एक भाग में बल का अनुभव करता है।
- विद्युत धारा को प्रवाहित करने वाली एक कुंडली गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र वाले एक भाग में बल का अनुभव करती है।
- विद्युतचुंबकीय प्रेरण
- विद्युत धारा को प्रवाहित करने वाली एक कुंडली विद्युत क्षेत्र वाले एक भाग में बल का अनुभव करती है।
Explanation:
- विद्युत मोटर (Electric Motor) चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल (F = qv × B) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिससे कुंडली (आर्मेचर) घूर्णन करती है।
- यह फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Left Hand Rule) पर आधारित है।
- विद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic induction) जनरेटर (Generator) का सिद्धांत है।
Quick Facts:
- मोटर: विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा (घूर्णन)
- बल की दिशा: धारा और चुंबकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत (F = I (L × B))
विद्युत मोटर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (a) यह एक दिव्यपरिवर्तक का उपयोग करता है जो प्रत्येक अर्द्ध-घूर्णन के बाद कुंडली में धारा की दिशा को उलट देता है। (b) फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम का उपयोग करके कुंडली की एक भुजा पर बल की दिशा ज्ञात की जा सकती है। उपरोक्त कथनों में से कौनसा/कौनसे कथन सही है/हैं?
- केवल (a)
- न तो (a) और न ही (b)
- (a) और (b) दोनों
- केवल (b)
Explanation:
- (a) सत्य: विद्युत मोटर में कम्यूटेटर (दिव्यपरिवर्तक) प्रत्येक अर्ध-घूर्णन (180°) के बाद धारा की दिशा उलटता है, ताकि आर्मेचर एक ही दिशा में घूमता रहे।
- (b) सत्य: कुंडली की भुजा पर बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Left Hand Rule) द्वारा ज्ञात की जाती है।
Quick Facts:
- बायाँ हाथ नियम: अंगूठा → बल (Force), तर्जनी → चुंबकीय क्षेत्र (Field), मध्यमा → धारा (Current)
- यह नियम मोटरों (Motor) के लिए है (बायाँ = मोटर)।
चुंबकीय क्षेत्र के अंदर रखे धारावाही चालक पर बल निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित में से किस नियम का उपयोग किया जाता है?
- मैक्सवेल का कॉर्कस्कू नियम
- फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम
- दक्षिण-हस्त अंगूष्ठ नियम
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल की दिशा फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम (Fleming’s Left Hand Rule) द्वारा निर्धारित की जाती है।
- यह मोटरों (Motors) में लागू होता है।
- फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम प्रेरित धारा (generator) के लिए है।
Quick Facts:
- वाम-हस्त (Left Hand) → मोटर (Motor) – दोनों ‘M’ से शुरू होते हैं (याद रखने की ट्रिक)
- बल का सूत्र: F = q(v × B) या F = I(L × B)
विद्युत मोटर में, मोटर के आर्मेचर की भुजाओं पर कार्य करने वाले बल जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत हैं, वे हैं:
- परिमाण में समान और समान दिशा में
- परिमाण में समान और विपरीत दिशा में
- परिमाण में असमान और समान दिशा में
- परिमाण में असमान और विपरीत दिशा में
Explanation:
- मोटर के आर्मेचर (कुंडली) की दो भुजाएँ समान चुंबकीय क्षेत्र में होती हैं और इनमें समान धारा प्रवाहित होती है (परिमाण समान)।
- फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुसार, दोनों भुजाओं पर बल विपरीत दिशा में (एक ऊपर, एक नीचे) लगते हैं, जिससे बल युग्म (couple) बनता है और आर्मेचर घूमता है।
Quick Facts:
- यह बल युग्म (torque) आर्मेचर को घूर्णन प्रदान करता है।
- यदि बल समान दिशा में होते, तो कोई घूर्णन नहीं होता।
किसी परिनालिका के भीतर समान्तर सीधी चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की उपस्थिति क्या दर्शाती है?
- परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र शून्य है
- चुंबकीय क्षेत्र असमान है और विभिन्न बिंदुओं पर बदलता रहता है
- चुंबकीय क्षेत्र अंतर है
- परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान है
Explanation:
- परिनालिका (Solenoid) के भीतर समानांतर सीधी चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (uniform magnetic field) को दर्शाती हैं, जिसका अर्थ है कि क्षेत्र का परिमाण और दिशा हर बिंदु पर समान है।
- यह आदर्श लंबी परिनालिका की विशेषता है।
Quick Facts:
- एकसमान क्षेत्र: सभी बिंदुओं पर B = μ₀ n I (स्थिर)
- क्षेत्र रेखाएँ समानांतर और समान दूरी पर होती हैं।
यदि किसी परिनालिका में घुमावों/फेरों की संख्या बढ़ जाती है, तो:
- चुंबकीय क्षेत्र बढ़ता है
- चुंबकीय क्षेत्र शून्य हो जाता है
- चुंबकीय क्षेत्र स्थिर रहता है
- चुंबकीय क्षेत्र घटता है
Explanation:
- परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀ n I (n = प्रति मीटर फेरों की संख्या)
- B ∝ n (फेरों की संख्या के समानुपाती), अतः n बढ़ने पर चुंबकीय क्षेत्र बढ़ता है।
Quick Facts:
- फेरे बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ती है (यह विद्युत चुंबक बनाने का सिद्धांत है)।
- व्यावहारिक रूप से, फेरों की संख्या बढ़ाने से प्रतिरोध भी बढ़ता है, पर B बढ़ता है।
एक छात्र अवलोकन करता है कि धारावाही तार के पास लाने पर एक दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है। चुंबकीय क्षेत्रों की अपनी समझ का उपयोग करते हुए, समझाइए कि ऐसा क्यों होता है?
- एक धारावाही तार एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है जो दिक्सूचक सुई पर बल आरोपित करता है।
- तार के कारण एक गुरुत्वीय प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे सुई हिलती है।
- तार गर्म हो जाता है, जिसके कारण वायुधारा सुई को हिलाती है।
- तार एक विद्युत बल उत्पन्न करता है जो दिक्सूचक सुई पर कार्य करता है।
Explanation:
- धारावाही चालक (तार) के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) उत्पन्न होता है (ओर्स्टेड का प्रयोग, 1820)।
- यह चुंबकीय क्षेत्र दिक्सूचक सुई (जो स्वयं एक छोटा चुंबक है) पर बल आरोपित करता है, जिससे वह विक्षेपित हो जाती है।
Quick Facts:
- ओर्स्टेड (Oersted) ने सबसे पहले विद्युत और चुंबकत्व के बीच संबंध की खोज की।
- यह विद्युत के चुंबकीय प्रभाव (magnetic effect of current) का उदाहरण है।
______ की कुंडली में धारा की दिशा बदलने के लिए कम्यूटेटर का उपयोग किया जाता है।
- केवल AC जनरेटर
- केवल DC जनरेटर
- केवल DC मोटर
- DC मोटर और DC जनरेटर दोनों
Explanation:
- कम्यूटेटर (Commutator) का उपयोग DC मोटर में कुंडली में धारा की दिशा बदलने के लिए होता है (ताकि एक दिशा में घूर्णन बना रहे)।
- DC जनरेटर में, यह कुंडली में उत्पन्न प्रत्यावर्ती (AC) धारा को एकदिशीय (DC) धारा में बदलने के लिए (दिष्टीकरण, rectification) कार्य करता है।
- अतः यह दोनों (DC मोटर और DC जनरेटर) में उपयोग होता है।
Quick Facts:
- AC जनरेटर में कम्यूटेटर नहीं होता, उसमें स्लिप रिंग (Slip rings) होते हैं।
- DC मोटर में कम्यूटेटर ‘धारा दिशा परिवर्तन’ (current reversal) के लिए, DC जनरेटर में ‘दिष्टीकरण’ (rectification) के लिए।
एक विद्युत जनरेटर के लिए, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है: (i) कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाकर प्रेरित धारा को बढ़ाया जा सकता है। (ii) कुंडली की गति बढ़ाकर प्रेरित धारा को बढ़ाया जा सकता है। (iii) आरोपित चुंबकीय क्षेत्र को कम करके प्रेरित धारा को बढ़ाया जा सकता है।
- (ii) और (iii) दोनों
- केवल (i)
- (i) और (ii) दोनों
- केवल (ii)
Explanation:
- प्रेरित EMF (ε) = – N (dΦ/dt) (फैराडे का नियम)
- (i) सत्य: फेरों (N) की संख्या बढ़ाने पर EMF/धारा बढ़ती है (ε ∝ N)।
- (ii) सत्य: गति बढ़ाने पर फ्लक्स परिवर्तन की दर (dΦ/dt) बढ़ती है, अतः EMF/धारा बढ़ती है।
- (iii) असत्य: चुंबकीय क्षेत्र कम करने पर Φ घटेगा, अतः EMF घटेगा (बढ़ाने पर EMF बढ़ेगा)।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF बढ़ाने के उपाय: (i) फेरे बढ़ाएँ, (ii) गति बढ़ाएँ, (iii) प्रबल चुंबकीय क्षेत्र लगाएँ।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- किसी परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं वृत्ताकार होती हैं।
- किसी परिनालिका में प्रति इकाई लम्बाई में फेरों की संख्या बढ़ाने पर, परिनालिका में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।
- विद्युत धारा प्रवाहित करने वाली परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र विद्युत धारा की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता है।
- तार का प्रतिरोध बढ़ाने पर परिनालिका में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।
Explanation:
- B = μ₀ n I (n = प्रति मीटर फेरे), अतः n (फेरे/लंबाई) बढ़ाने पर B बढ़ता है। यह कथन सत्य है।
- अन्य गलत हैं: अंदर रेखाएँ समानांतर (straight), B ∝ I (धारा पर निर्भर), प्रतिरोध बढ़ाने पर धारा घटती है, इसलिए B घटता है।
Quick Facts:
- परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है।
- B = μ₀ n I (आदर्श लंबी परिनालिका के लिए)
किसी धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा परिवर्तित करने के लिए इनमें से किस विधि का प्रयोग किया जा सकता है? (i) धारा के परिमाण में परिवर्तन (ii) चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता में परिवर्तन (iii) धारा की दिशा में परिवर्तन
- (i) और (iii) दोनों
- केवल (i)
- केवल (iii)
- (ii) और (iii) दोनों
Explanation:
- बल की दिशा F = I (L × B) (धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों पर निर्भर करती है)।
- धारा की दिशा बदलने पर F की दिशा उलट जाती है (क्योंकि I विपरीत हो जाता है)।
- धारा का परिमाण (i) बल का परिमाण बदलता है, दिशा नहीं। चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता (ii) भी परिमाण बदलती है, दिशा नहीं (जब तक B की दिशा न बदले)।
Quick Facts:
- बल की दिशा बदलने के लिए: (a) धारा की दिशा बदलें, (b) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बदलें।
- परिमाण बदलने के लिए: धारा, क्षेत्र की प्रबलता, या चालक की लंबाई बदलें।
चुंबकों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- एक चुंबक उत्तर और दक्षिण ध्रुवों वाला द्विध्रुव होता है।
- एक चुंबक, चुंबकीय और साथ ही विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
- एक चुंबक एक इलेक्ट्रॉन को आकर्षित कर सकता है।
- एक चुंबक में या तो उत्तर या दक्षिण ध्रुव हो सकता है।
Explanation:
- एक चुंबक (दंड चुंबक या कोई भी चुंबक) हमेशा एक द्विध्रुव (dipole) होता है, जिसमें उत्तर (N) और दक्षिण (S) दोनों ध्रुव होते हैं (एकध्रुवीय चुंबक, magnetic monopole, अब तक नहीं मिला)।
- चुंबक केवल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, विद्युत क्षेत्र नहीं (जब तक कि गतिशील न हो, पर स्थिर चुंबक में नहीं)।
Quick Facts:
- चुंबक के ध्रुव: N और S सदैव युग्म (pair) में आते हैं – ‘एकध्रुव’ (monopole) संभव नहीं है।
- इलेक्ट्रॉन पर चुंबकीय बल तभी लगता है जब वह गतिशील हो (गतिमान आवेश), स्थिर इलेक्ट्रॉन पर चुंबक बल नहीं लगाता।
विद्युत मोटर में चुंबकीय क्षेत्र में रखे चालक पर बल किस दिशा में कार्य करता है?
- धारा की दिशा में
- धारा और चुंबकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत
- चुंबकीय क्षेत्र के विपरीत
- चुंबकीय क्षेत्र के अनुदिश
Explanation:
- विद्युत मोटर में, चुंबकीय क्षेत्र (B) में धारावाही (I) चालक पर बल (F) = I (L × B) होता है।
- यह बल धारा (I) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों के लंबवत होता है (क्रॉस गुणन, cross product)।
- यह फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुरूप है।
Quick Facts:
- यदि I और B समानांतर हैं, तो F = 0 (कोई बल नहीं)।
- बल अधिकतम तब होता है जब I ⊥ B (θ = 90°)।
किसी आरेख में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को एक-दूसरे के निकट खींचे जाने का क्या तात्पर्य है?
- उस क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र प्रबल है।
- यहाँ कोई चुंबकीय क्षेत्र मौजूद नहीं है।
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बदल गई है।
- उस क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल है।
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की सघनता (density) क्षेत्र की प्रबलता (strength) को दर्शाती है।
- रेखाएँ जितनी अधिक निकट (close) होंगी, क्षेत्र उतना ही प्रबल होगा (ध्रुवों के पास सघनतम)।
Quick Facts:
- प्रबल क्षेत्र = सघन रेखाएँ, दुर्बल क्षेत्र = विरल (sparse) रेखाएँ।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं (यदि प्रतिच्छेद करें तो एक बिंदु पर दो दिशाएँ हो जाएँगी, जो असंभव है)।
निम्न में से कौन सा सही है? ध्वनि तरंगें, ______ तरंगें हैं।
- दाब
- अनुदैर्ध्य
- विद्युत-चुम्बकीय
- चुम्बकीय
Explanation:
- ध्वनि तरंगें (Sound waves) अनुदैर्ध्य (longitudinal) तरंगें हैं, जिनमें माध्यम के कण संचरण की दिशा के समानांतर दोलन (oscillate) करते हैं (संपीडन और विरलन)।
- ये विद्युत चुम्बकीय (electromagnetic) नहीं हैं, क्योंकि इन्हें संचरण के लिए माध्यम (medium) की आवश्यकता होती है (निर्वात में नहीं चल सकतीं)।
Quick Facts:
- प्रकाश → अनुप्रस्थ (transverse) विद्युत-चुम्बकीय तरंग
- ध्वनि → अनुदैर्ध्य यांत्रिक (mechanical) तरंग
चुंबकीय क्षेत्र के सापेक्ष कुंडली की गति की दिशा ______ होने पर प्रेरित धारा उच्चतम होती है।
- 0°
- 45°
- 180°
- 90°
Explanation:
- प्रेरित EMF ε = -N (dΦ/dt) = -N (d(BA cos θ)/dt) (जहाँ θ = क्षेत्र सदिश और B के बीच कोण)
- जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत (θ = 90°) गति करती है, तो फ्लक्स परिवर्तन की दर अधिकतम होती है, अतः प्रेरित धारा उच्चतम होती है।
- θ = 0° या 180° पर, फ्लक्स अधिकतम/न्यूनतम होता है, पर परिवर्तन की दर शून्य होती है।
Quick Facts:
- प्रेरित EMF अधिकतम तब होता है जब कुंडली का तल क्षेत्र के समानांतर हो (गति के कोण पर निर्भर करता है)।
- वास्तव में, ‘फ्लक्स परिवर्तन की दर’ अधिकतम होनी चाहिए (ε = -dΦ/dt)।
विद्युत मोटर में, धारा के प्रवाह की दिशा को किसके द्वारा उलटा जाता है?
- एक कार्बन ब्रश
- एक स्प्लिट रिंग
- एक मोटर ब्रश
- आर्मेचर वाइंडिंग
Explanation:
- विद्युत मोटर में धारा की दिशा स्प्लिट रिंग (विभक्त वलय/कम्यूटेटर) द्वारा उलटी जाती है।
- ब्रश (कार्बन ब्रश) केवल कुंडली को बाहरी स्रोत से जोड़ते हैं, धारा की दिशा नहीं बदलते।
Quick Facts:
- स्प्लिट रिंग (Split ring) = Commutator
- यह प्रत्येक 180° पर धारा की दिशा उलटता है, जिससे निरंतर घूर्णन बना रहता है।
यदि दो समान्तर सीधे चालक एक ही दिशा में धारा ले जा रहे हैं, तो उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्रों की दिशाएँ होंगी:
- एक दूसरे के विपरीत
- एक दूसरे के लंबवत
- एक ही दिशा में
- यादृच्छिक दिशाओं में
Explanation:
- दो समानांतर चालकों में एक ही दिशा में धारा प्रवाहित होने पर, प्रत्येक चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा विपरीत होती है (एक स्थान पर एक का क्षेत्र अंदर, दूसरे का बाहर – जब उनके बीच के स्थान पर देखा जाए)।
- यह दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से स्पष्ट होता है।
- परिणाम: समान दिशा में धारा वाले चालक एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (विपरीत दिशा वाले प्रतिकर्षित)।
Quick Facts:
- दो समानांतर चालक: समान दिशा धारा → आकर्षण, विपरीत दिशा धारा → प्रतिकर्षण
- यह एम्पीयर का बल नियम (Ampere’s force law) है।
चुंबक के उत्तरी ध्रुव पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं ______ होती हैं।
- समांतर रेखाएं
- ध्रुव पर विलीन रेखाएं
- ध्रुव से निकलती हुई रेखाएं
- प्रतिच्छेदी रेखाएं
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी (N) ध्रुव से निकलती (emerge) हैं और दक्षिणी (S) ध्रुव में प्रवेश करती हैं (बाहर की ओर)।
- अतः उत्तरी ध्रुव पर क्षेत्र रेखाएँ बाहर की ओर निकलती हुई होती हैं।
Quick Facts:
- N ध्रुव → स्रोत (source), S ध्रुव → सिंक (sink) (बाहर के लिए)
- अंदर की ओर, रेखाएँ S → N होती हैं।
धारावाही परिनालिका के लिए निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (i) इसका उपयोग नर्म लोहे के टुकड़े को चुम्बकित करने के लिए किया जा सकता है। (ii) यह एक दंड चुम्बक की तरह कार्य करता है। (iii) क्षेत्र रेखाएँ संकेन्द्रीय वृत्त हैं।
- (i) और (iii) दोनों
- केवल (i)
- (i) और (ii) दोनों
- केवल (ii)
Explanation:
- (i) सत्य: परिनालिका (Solenoid) का उपयोग नर्म लोहे (soft iron) को चुंबकित (magnetize) करने के लिए किया जाता है (विद्युत चुंबक) – धारा बंद होने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
- (ii) सत्य: धारावाही परिनालिका एक दंड चुंबक (bar magnet) की तरह कार्य करती है (एक सिरे पर N, दूसरे पर S ध्रुव बनते हैं)।
- (iii) असत्य: परिनालिका के अंदर क्षेत्र रेखाएँ समानांतर सीधी होती हैं, संकेंद्रित वृत्त (concentric circles) नहीं (संकेंद्रित वृत्त एकल सीधे चालक के लिए होते हैं)।
Quick Facts:
- परिनालिका का उपयोग विद्युत चुंबक, रिले, सोलेनॉइड वाल्व आदि में होता है।
- B = μ₀ n I (अंदर), बाहर लगभग शून्य
मोटर के आर्मेचर के घूर्णन की दिशा ______ की मदद से ज्ञात की जा सकती है।
- फ्लेमिंग का दाहिना हाथ का नियम
- फ्लेमिंग का बायाँ हाथ का नियम
- मैक्सवेल का कॉर्कस्कू नियम
- दायाँ हाथ अंगूठा नियम
Explanation:
- मोटर (Motor) के आर्मेचर के घूर्णन की दिशा (बल की दिशा) फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Left Hand Rule) द्वारा ज्ञात की जाती है।
- बायाँ हाथ → मोटर (दोनों ‘M’ से शुरू) – यह याद रखने की ट्रिक है।
- दायाँ हाथ का नियम जनरेटर (Generator) के लिए है।
Quick Facts:
- बायाँ हाथ: अंगूठा (बल/गति), तर्जनी (चुंबकीय क्षेत्र), मध्यमा (धारा) – सभी परस्पर लंबवत।
- यह नियम मोटर के घूर्णन की दिशा निर्धारित करता है।
लेंज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि-
- यह चुंबकीय फ्लक्स को बदलने में मदद करता है।
- यह चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करता है।
- यह लागू चुंबकीय क्षेत्र को मजबूत करता है।
- यह चुंबकीय क्षेत्र को पूरी तरह से निष्क्रिय कर देता है।
Explanation:
- लेंज का नियम (Lenz’s Law): प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि वह उस कारण (फ्लक्स परिवर्तन) का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न हुई है।
- यह ऊर्जा संरक्षण (conservation of energy) का परिणाम है – यदि यह फ्लक्स परिवर्तन का विरोध न करे, तो ऊर्जा का उल्लंघन होगा।
Quick Facts:
- लेंज का नियम फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिह्न (ε = -dΦ/dt) का कारण है।
- यह प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
निम्नलिखित में से किस स्थिति में कुंडली में कोई विभवांतर प्रेरित नहीं होगा? (a) स्थिर कुंडली की ओर गतिमान छड़ चुंबक (b) स्थिर छड़ चुंबक की ओर गतिमान कुंडली (c) समान चाल से एक दूसरे की ओर गतिमान कुंडली और छड़ चुंबक (d) समान चाल से एक ही दिशा में गतिमान कुंडली और छड़ चुंबक
- (c)
- (d)
- (a)
- (d)
Explanation:
- प्रेरित विभवांतर (EMF) तभी उत्पन्न होता है जब कुंडली और चुंबक के बीच सापेक्ष गति (relative motion) होती है, जिससे फ्लक्स परिवर्तन होता है।
- (a), (b), (c) में सापेक्ष गति है → EMF प्रेरित होगा।
- (d) में दोनों समान चाल से एक ही दिशा में गतिमान हैं, इसलिए सापेक्ष गति शून्य है → कोई विभवांतर प्रेरित नहीं होगा।
Quick Facts:
- फैराडे का नियम: EMF तभी उत्पन्न होता है जब फ्लक्स में परिवर्तन हो (dΦ/dt ≠ 0)।
- यदि सापेक्ष गति = 0, तो dΦ/dt = 0 → EMF = 0
विद्युत जनरेटर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (a) प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद, कुंडल की संबंधित भुजाओं में धारा अपनी दिशा उलट देती है। (b) कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम का उपयोग करके पाई जा सकती है। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) और (b) दोनों
- केवल (b)
- केवल (a)
- (a) और (b) दोनों नहीं
Explanation:
- (a) सत्य: AC जनरेटर में, प्रत्येक अर्ध-घूर्णन (180°) के बाद, कुंडली की भुजाओं में प्रेरित धारा की दिशा उलट जाती है (क्योंकि फ्लक्स परिवर्तन की दिशा बदल जाती है) – यही प्रत्यावर्ती धारा (AC) का कारण है।
- (b) सत्य: प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम (Fleming’s Right Hand Rule) द्वारा ज्ञात की जाती है (यह जनरेटर के लिए है)।
Quick Facts:
- दायाँ हाथ (Right Hand) → जनरेटर (Generator) – दोनों ‘R’ से शुरू होते हैं (याद रखने की ट्रिक)
- AC जनरेटर: कुंडली में प्रत्यावर्ती EMF उत्पन्न होता है।
फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम में; अंगूठा, तर्जनी और मध्य उंगली क्रमशः दर्शाती हैं,
- चूंबकीय क्षेत्र की दिशा, धारा और बल का अनुभव
- चूंबकीय क्षेत्र की दिशा, अनुभव किया गया बल और धारा
- अनुभव किए गए बल की दिशा, चूंबकीय क्षेत्र और धारा
- धारा की दिशा, चूंबकीय क्षेत्र और अनुभव किया गया बल
Explanation:
- फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम (Fleming’s Left Hand Rule) में:
- अंगूठा (Thumb) → बल (Force) / गति (Motion)
- तर्जनी (Forefinger) → चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field)
- मध्यमा (Middle finger) → धारा (Current)
- यह क्रम F – B – I (अंगूठा-तर्जनी-मध्यमा) है।
Quick Facts:
- यह नियम विद्युत मोटर (Motor) के लिए है।
- तीनों अंगुलियाँ परस्पर लंबवत (mutually perpendicular) होनी चाहिए।
जब चूंबकीय क्षेत्र के क्षेत्र में बलों की चूंबकीय रेखाएं एक साथ अधिक सघन होती हैं, तो यह किसकी उपस्थिति को इंगित करता है:
- अकेले चूंबकीय दक्षिणी ध्रुव
- कमजोर चूंबकीय क्षेत्र
- अकेले चूंबकीय उत्तरी ध्रुव
- प्रबल चूंबकीय क्षेत्र
Explanation:
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की सघनता (density) क्षेत्र की प्रबलता को दर्शाती है।
- अधिक सघन रेखाएँ → प्रबल चुंबकीय क्षेत्र (strong magnetic field)।
- विरल (sparse) रेखाएँ → दुर्बल क्षेत्र।
Quick Facts:
- यह चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (intensity) का दृश्य प्रतिनिधित्व है।
- ध्रुवों के पास रेखाएँ सबसे अधिक सघन होती हैं (क्षेत्र प्रबल)।
