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झारखंड की जनजातीय धार्मिक संस्कृति में ‘सरना धर्म’ (Sarnaism) का केंद्रीय पूज्य वृक्ष कौन-सा है, जिसकी पूजा मुख्य रूप से सरहुल पर्व के दौरान की जाती है?
- साल (सखुआ / Shorea robusta)
- पीपल (Ficus religiosa)
- बरगद (Ficus benghalensis)
- शीशम (Dalbergia sissoo)
Explanation:
- सरना धर्म में प्रकृति पूजा का सर्वोच्च स्थान है, और साल (सखुआ) वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है ।
- सरहुल त्योहार के दौरान पाहन (पुजारी) सखुआ के कुंजों (‘सरना स्थल’) में पूजा-अर्चना कर प्राकृतिक नववर्ष की शुरुआत का स्वागत करते हैं ।
झारखंड की जनजातीय धार्मिक परंपरा में ‘सिंगबोंगा’ (Singbonga) को किस सर्वोच्च सत्ता या देवता का प्रतीक माना जाता है?
- सूर्य (प्रकृति और सृष्टि का सर्वोच्च देवता)
- जल के देवता
- वायु के देवता
- अग्नि के देवता
Explanation:
- मुंडा, हो तथा अन्य कई जनजातियों में ‘सिंगबोंगा’ को सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है, जो सूर्यदेव के प्रतीक हैं ।
- इन्हें जीवन दाता, सृष्टि का रचयिता तथा सभी बोंगाओं (देवताओं) में श्रेष्ठ माना जाता है ।
झारखंड का प्रमुख त्योहार ‘कर्मा’ (Karma) मुख्य रूप से किस भावना और संबंध का प्रतीक माना जाता है?
- बहनों द्वारा भाइयों की सुख-समृद्धि, दीर्घायु एवं फसल की सुरक्षा हेतु की जाने वाली पूजा
- केवल वर्षा कराने के लिए किया जाने वाला अनुष्ठान
- विवाह समारोह की शुरुआत का प्रतीक
- पूर्वजों की आत्मा की शांति का वार्षिक पर्व
Explanation:
- कर्मा पर्व भाद्रपद (भादो) महीने की एकादशी को मनाया जाता है, जहाँ कर्मा डाली की पूजा की जाती है ।
- यह पर्व मुख्य रूप से भाई-बहन के पवित्र प्रेम, कृषि समृद्धि और प्राकृतिक संतुलन का प्रतीक है ।
झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक ‘बाबा बैद्यनाथ धाम’ (देवघर) किस धार्मिक संप्रदाय से संबंधित है तथा यहाँ किस मेले का आयोजन होता है?
- शैव संप्रदाय (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक) एवं प्रसिद्ध श्रावणी मेला
- वैष्णव संप्रदाय एवं कुंभ मेला
- शाक्त संप्रदाय एवं पुष्कर मेला
- जैन धर्म एवं समवसरण मेला
Explanation:
- देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम 12 शिव ज्योतिर्लिंगों (रावणेश्वर बैद्यनाथ) में से एक प्रमुख शैव तीर्थस्थल है ।
- यहाँ सावन के महीने में विश्व प्रसिद्ध एक माह लंबा ‘श्रावणी मेला’ आयोजित होता है जहाँ कांवड़िये जल चढ़ाते हैं ।
झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित ‘पारसनाथ पहाड़ी’ (सम्मेद शिखर जी) किस धर्म का विश्व प्रसिद्ध सर्वोच्च पवित्र तीर्थस्थल है?
- जैन धर्म
- बौद्ध धर्म
- सिख धर्म
- ईसाई धर्म
Explanation:
- पारसनाथ पहाड़ी (सम्मेद शिखर जी) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है ।
- जैन परंपरा के अनुसार, 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों (जिनमें 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ भी शामिल हैं) ने इसी पहाड़ी पर मोक्ष/निर्वाण प्राप्त किया था ।
झारखंड के उराँव (Oraon) समुदाय के पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था के संदर्भ में धार्मिक प्रधान/पुजारी को किस नाम से जाना जाता है?
- पाहन (Pahan)
- नाके (Naeke)
- महतो (Mahto)
- डेहरी (Dehuri)
Explanation:
- उराँव एवं मुंडा जनजातियों में गाँव के धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजा-पाठ संपन्न कराने वाले पुजारी को ‘पाहन’ कहा जाता है ।
- (संथाल समुदाय में धार्मिक प्रधान को ‘नाके’ कहा जाता है) ।
झारखंड की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान ‘टुसु पर्व’ (Tusu Parab) के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
- यह मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला सूर्य पूजा और फसल काटने से जुड़ा कुमारी कन्याओं का पर्व है
- यह केवल वर्षा ऋतु की शुरुआत में मनाया जाता है
- इस पर्व में केवल पुरुषों द्वारा ही उपवास रखा जाता है
- यह पर्व केवल रांची शहर तक सीमित है और ग्रामीण इलाकों में नहीं मनाया जाता
Explanation:
- टुसु पर्व पूस महीने की समाप्ति और मकर संक्रांति के दिन मनाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय लोक-पर्व है ।
- इसमें कुमारी कन्याएँ टुसु मणी (प्रतिमा/चौड़ल) की स्थापना कर लोकगीत गाती हैं और नदियों/पोखर में विसर्जन करती हैं ।
झारखंड के लातेहार जिले में स्थित ऐतिहासिक ‘भद्रकाली मंदिर’ (इटखोरी, चतरा) किस अनूठी धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है?
- हिंदू, बौद्ध और जैन – तीनों धर्मों के संगम स्थल (Trithak/Confluence) के रूप में
- केवल सूफी संप्रदाय का केंद्र होने के कारण
- केवल ईसाई मिशनरियों के प्रथम आगमन केंद्र के रूप में
- दक्षिण भारतीय द्रविड़ वास्तुकला का एकमात्र उदाहरण होने के कारण
Explanation:
- चतरा जिले का इटखोरी (भद्रकाली मंदिर परिसर) हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों का एक दुर्लभ और ऐतिहासिक संगम स्थल है ।
- यहाँ माँ भद्रकाली की प्रतिमा के साथ-साथ भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ और जैन तीर्थंकरों के चरण चिह्न प्राप्त हुए हैं ।
संथाल जनजाति के प्रमुख पारंपरिक देवता ‘मरांग बुरु’ (Marang Buru) का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- महान पर्वत (Great Mountain)
- पवित्र जलप्रपात
- आकाश का देवता
- धरती माता
Explanation:
- संथाल समुदाय में ‘सिंगबोंगा’ के बाद ‘मरांग बुरु’ दूसरे सबसे प्रमुख देवता माने जाते हैं, जिनका शाब्दिक अर्थ ‘महान पर्वत’ (बड़ा पहाड़) होता है ।
- वे संथालों के रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते हैं ।
झारखंड में पशु धन की पूजा और कृषकों के आभार व्यक्त करने से संबंधित कौन-सा प्रमुख लोक-त्योहार कार्तिक अमावस्या (सोहराय) के अवसर पर मनाया जाता है?
- सोहराय (Sohrai)
- सरहुल
- जितिया
- मंडा पूजा
Explanation:
- सोहराय पर्व मुख्य रूप से मवेशियों (गाय, बैल, भैंस) की सेवा, पूजा और सजावट से जुड़ा दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला त्योहार है ।
- यह कृषक समाज और उनके पशुओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व है ।
