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झारखंड राज्य कार्ययोजना (SAPCC) के तहत झारखंड में किस वर्ष जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्ययोजना तैयार की गई थी?
- 2014
- 2011
- 2015
- 2018
Explanation:
- झारखंड सरकार ने UNDP के सहयोग से 2014 में झारखंड राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (State Action Plan on Climate Change – SAPCC) जारी की थी ।
- इसके तहत कृषि, वन, जल संसाधन, खनन और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए जलवायु अनुकूलन नीति तय की गई ।
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) का गठन किस अधिनियम के तहत किया गया था?
- जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980
Explanation:
- झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की स्थापना जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 4 के तहत 2001 में की गई थी ।
- यह संस्था राज्य में वायु, जल और पर्यावरण गुणवत्ता के नियंत्रण और विनियमन का कार्य करती है ।
झारखंड एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (SAPCC) के अनुसार राज्य का कौन-सा जिला जलवायु परिवर्तन के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील (Vulnerable) माना गया है?
- सराइकेला-खरसवां
- रांची
- धनबाद
- गिरिडीह
Explanation:
- झारखंड SAPCC रिपोर्ट के अनुसार सराइकेला-खरसवां जिला जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील जिलों में से एक माना गया है ।
- संवेदनशीलता सूचकांक में वनों की कमी, जल संकट और कृषि पर निर्भरता जैसे कारकों को शामिल किया गया है ।
झारखंड में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (Adaptation) हेतु ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- फलदार पौधों के रोपण द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन
- सिर्फ औद्योगिक क्षेत्रों में वृक्षारोपण
- प्लास्टिक कचरा प्रबंधन
- सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई प्रणाली
Explanation:
- बिरसा हरित ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेकार पड़ी भूमि पर फलदार पौधे लगाकर हरित आवरण बढ़ाना तथा ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका प्रदान करना है ।
- यह योजना जलवायु अनुकूलन (Adaptation) और कार्बन सिंक निर्माण (Mitigation) दोनों का कार्य करती है ।
झारखंड सरकार की ‘मुख्यमंत्री जन वन योजना’ के तहत निजी भूमि पर वृक्षारोपण करने पर सरकार द्वारा कितने प्रतिशत प्रोत्साहन/अनुदान राशि दी जाती है?
- 75%
- 50%
- 60%
- 80%
Explanation:
- मुख्यमंत्री जन वन योजना के तहत अपनी निजी भूमि पर पौधे लगाने वाले किसानों को 75% तक अनुदान (Subsidy) प्रदान किया जाता है (पूर्व में यह 50% था) ।
- इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के निजी क्षेत्रों में हरित आवरण (Forest Cover) को बढ़ाना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है ।
झारखंड में ‘जलवायु परिवर्तन प्रभाव अपशमन’ (Mitigation) के लिए झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
- 2001
- 2003
- 2005
- 2008
Explanation:
- JREDA (Jharkhand Renewable Energy Development Agency) की स्थापना वर्ष 2001 में राज्य में गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, बायोमास) को बढ़ावा देने के लिए की गई थी ।
- यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन में कमी (Mitigation) लाने की दिशा में नोडल एजेंसी है ।
भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2021) के अनुसार, झारखंड के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत भाग वनों से आच्छादित है?
- 29.76%
- 33.00%
- 24.11%
- 31.12%
Explanation:
- ISFR 2021 के अनुसार, झारखंड का कुल वनावरण 23,721.14 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.76% है ।
- वन आवरण में वृद्धि जलवायु परिवर्तन के अपशमन (Carbon Sink) में प्रत्यक्ष भूमिका निभाती है ।
जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन (Adaptation) हेतु झारखंड में चलाए जा रहे ‘डोभा निर्माण’ (Farm Ponds) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण
- मत्स्य पालन व्यावसायिक स्तर पर करना
- औद्योगिक जल आपूर्ति
- बाढ़ नियंत्रण
Explanation:
- डोभा निर्माण (छोटे तालाब) का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को रोककर वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर को रिचार्ज करना है ।
- यह सूखे के प्रभावों को कम करने तथा अनियमित वर्षा के दौरान फसलों को सिंचाई सहायता (Adaptation) प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी है ।
झारखंड राज्य जल नीति (State Water Policy) किस वर्ष लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का सतत प्रबंधन एवं जलवायु जोखिम कम करना है?
- 2011
- 2008
- 2014
- 2016
Explanation:
- झारखंड सरकार ने जल संसाधनों के एकीकृत प्रबंधन और संरक्षण के लिए वर्ष 2011 में ‘राज्य जल नीति’ (State Water Policy) की घोषणा की थी ।
- यह नीति जल संकट, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और जल वितरण के अनुकूलन पर केंद्रित है ।
झारखंड के दामोदर घाटी क्षेत्र में वायु एवं जल प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है, जिसके अपशमन हेतु ‘सतत खनन नीति’ लागू की जा रही है?
- कोयला खनन एवं कोयला आधारित तापीय विद्युत गृह
- सड़क परिवहन एवं वाहन उत्सर्जन
- कृषि रसायनों का अत्यधिक प्रयोग
- प्लास्टिक अपशिष्ट का संचयन
Explanation:
- दामोदर घाटी क्षेत्र में स्थित व्यापक कोयला खनन उद्योग और थर्मल पावर प्लांट वायु, जल तथा मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण हैं ।
- इसके अपशमन (Mitigation) के लिए फ्लाई एश (Fly Ash) का उपयोग, खदानों का पुनरुद्धार (Mine Reclamation) तथा पर्यावरण अनुकूल खनन तकनीक को अपनाना अनिवार्य किया जा रहा है ।
