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‘भारत-दुर्दशा’ के रचनाकार कौन हैं?
- जयशंकर प्रसाद
- बालकृष्ण भट्ट
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
- प्रतापनारायण मिश्र
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ के रचनाकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हैं।
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है।
‘भारत-दुर्दशा’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
- 1875 ई.
- 1880 ई.
- 1885 ई.
- 1890 ई.
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ का प्रकाशन 1880 ई. में हुआ।
- यह आधुनिक हिंदी नाटक के विकास में महत्वपूर्ण कृति है।
‘भारत-दुर्दशा’ किस विधा की रचना है?
- उपन्यास
- कहानी
- नाटक
- निबंध
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ एक नाटक है।
- इसे हिंदी के आरंभिक मौलिक राजनीतिक नाटकों में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में कुल कितने अंक हैं?
- चार
- पाँच
- छह
- सात
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ छह अंकों का नाटक है।
- नाटक के विभिन्न अंकों में भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ की प्रमुख विषय-वस्तु क्या है?
- प्रेम और प्रकृति
- राजदरबार का जीवन
- भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दुर्दशा
- केवल धार्मिक आख्यान
Explanation:
- नाटक में तत्कालीन भारत की दयनीय स्थिति का चित्रण किया गया है।
- अंग्रेजी शासन के आर्थिक और मानसिक शोषण के साथ-साथ देश की आंतरिक कमजोरियों को भी सामने रखा गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ में भारत की दुर्दशा के आंतरिक कारणों में क्या शामिल है?
- वैज्ञानिक प्रगति
- औद्योगिक विकास
- आलस्य, अंधविश्वास और आपसी फूट
- शिक्षा का प्रसार
Explanation:
- नाटककार ने देश की दुर्दशा के लिए बाहरी शासन के साथ आंतरिक कमजोरियों को भी जिम्मेदार बताया है।
- आलस्य, अंधविश्वास और आपसी फूट जैसी प्रवृत्तियां राष्ट्रीय पतन का कारण बनती हैं।
‘भारत-दुर्देव’ किसका प्रतीक है?
- भारत की समृद्धि का
- भारतीय संस्कृति का
- विदेशी शासन और भारत की आंतरिक बुराइयों के गठजोड़ का
- राष्ट्रीय एकता का
Explanation:
- भारत-दुर्देव नाटक का प्रमुख विरोधी/खलनायक प्रतीकात्मक पात्र है।
- वह अंग्रेजी शासन तथा भारत की आंतरिक कमजोरियों के संयुक्त प्रभाव का प्रतीक है।
‘भारत-भाग्य’ किसका प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है?
- भारत की आर्थिक व्यवस्था
- भारत की नियति और भविष्य
- अंग्रेजी शासन
- धार्मिक कट्टरता
Explanation:
- भारत-भाग्य भारत की नियति और भविष्य का प्रतीक है।
- वह भारत को जागृत करने का प्रयास करता है, लेकिन असफलता से निराश होकर अंत में आत्महत्या कर लेता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में सत्यानाश किसका सेनापति है?
- भारत का
- भारत-भाग्य का
- भारत-दुर्देव का
- भारत-सभा का
Explanation:
- सत्यानाश, भारत-दुर्देव का सेनापति है।
- वह धर्मांधता, जाति-भेद, बाल-विवाह, छुआछूत और अविद्या जैसी सामाजिक बुराइयों के माध्यम से देश के पतन का प्रतीक बनता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘आलस्य’ किसका प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है?
- ज्ञान का
- राष्ट्रीय जागरण का
- निष्क्रियता का
- औद्योगिक विकास का
Explanation:
- ‘आलस्य’ भारतवासियों को निष्क्रिय और कर्महीन बनाने वाली प्रवृत्ति का प्रतीक है।
- नाटक में ऐसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को सजीव पात्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘मदिरा’ किसका प्रतीक है?
- राष्ट्रीय चेतना का
- शिक्षा का
- समाज को चेतनाहीन करने वाली प्रवृत्ति का
- आर्थिक विकास का
Explanation:
- मदिरा यानी शराब को समाज को चेतनाहीन करने वाली नकारात्मक प्रवृत्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- यह नाटक के प्रतीकात्मक चरित्र-निर्माण की विशेषता को दिखाता है।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘अंधकार’ किसका प्रतीक है?
- प्रकाश और ज्ञान
- स्वतंत्रता
- अज्ञानता
- राष्ट्रीय एकता
Explanation:
- ‘अंधकार’ अज्ञानता का प्रतीक है।
- नाटक में अज्ञान और सामाजिक कुरीतियों को देश की दुर्दशा के कारणों के रूप में दिखाया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ की विशेषता के रूप में कौन-सा तत्व प्रमुख है?
- पौराणिक युद्ध का वर्णन
- प्रकृति-चित्रण
- प्रतीकात्मक पात्रों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों का चित्रण
- केवल प्रेम-कथा
Explanation:
- यह एक प्रतीकात्मक या Allegorical नाटक है।
- इसमें आलस्य, मदिरा, अंधकार आदि अमूर्त प्रवृत्तियों को पात्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ के पाँचवें अंक में किस सभा का उल्लेख मिलता है?
- राजसभा
- ग्रामसभा
- भारत-सभा
- धर्मसभा
Explanation:
- पाँचवें अंक में ‘भारत-सभा’ के बुद्धिजीवी पात्र दिखाई देते हैं।
- वे देश की स्थिति पर विचार करते हैं और भारत को बचाने के उपाय सोचते हैं।
‘भारत-सभा’ में कौन-से पात्र बुद्धिजीवी और जागरूक नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं?
- भारत, भारत-भाग्य और सत्यानाश
- आलस्य, मदिरा और अंधकार
- बंगाली, महाराष्ट्री, अख़बारवाला और कवि
- वैद्यजी, रंगनाथ और खन्ना मास्टर
Explanation:
- भारत-सभा में बंगाली, महाराष्ट्री, अख़बारवाला और कवि जैसे जागरूक पात्र उपस्थित होते हैं।
- वे देश की स्थिति पर विचार करते हैं और उसके सुधार के उपायों पर चर्चा करते हैं।
‘भारत-दुर्दशा’ में ‘सत्यानाश’ किन सामाजिक बुराइयों से जुड़ा है?
- विज्ञान और शिक्षा
- राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता
- जाति-भेद, बाल-विवाह, छुआछूत और अविद्या
- कृषि और उद्योग
Explanation:
- सत्यानाश सामाजिक कुरीतियों और अज्ञानता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है।
- जाति-भेद, बाल-विवाह, छुआछूत और अविद्या जैसी बुराइयों को देश के पतन से जोड़ा गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ में अंग्रेजी शासन का किस प्रकार का प्रभाव दिखाया गया है?
- केवल सांस्कृतिक विकास
- केवल शिक्षा का विस्तार
- आर्थिक और मानसिक शोषण
- केवल कृषि विकास
Explanation:
- नाटक में अंग्रेजी शासन के आर्थिक और मानसिक शोषण पर व्यंग्य किया गया है।
- इसके साथ भारत की अपनी आंतरिक कमजोरियों को भी देश की दुर्दशा का कारण बताया गया है।
‘भारत-दुर्दशा’ का प्रमुख उद्देश्य क्या माना जा सकता है?
- मनोरंजन मात्र
- राजाओं की प्रशंसा
- देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना और जागरूकता उत्पन्न करना
- विदेशी संस्कृति का प्रचार
Explanation:
- नाटक में भारत की दयनीय स्थिति को सामने लाकर देशवासियों को जागृत करने का प्रयास किया गया है।
- राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और देश की स्थिति पर विचार इसके महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।
‘भारत-दुर्दशा’ को आधुनिक हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण बनाने वाली प्रमुख विशेषता क्या है?
- केवल प्रेम-कथा
- केवल पौराणिक कथा
- केवल राष्ट्रीय चेतना
- केवल प्रकृति-वर्णन
Explanation:
- ‘भारत-दुर्दशा’ में तत्कालीन भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का व्यंग्यात्मक चित्रण है।
- भारत, भारत-दुर्देव, भारत-भाग्य, सत्यानाश, आलस्य और अंधकार जैसे प्रतीकात्मक पात्र नाटक को विशिष्ट बनाते हैं।
- यह रचना राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक जागरण की भावना को भी सामने लाती है।
