Updated on 11/06/23 by Mananjay MahatoShare on WhatsApp

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झारखंड के पर्व-त्योहार  

मण्डा 

  •  इसमें महादेव (शिव) की पूजा होती है। 

  • यह पर्व बैशाख माह के अक्षय तृतीया को आरंभ होता है।

  • यह पर्व आदिवासी और सदान दोनों में प्रचलित है। 

  • इस पर्व में उपवास रखने वाले पुरूष-व्रती को भगता और महिला-व्रती को सोखताइन कहते हैं।

  •  झारखण्ड में महादेव (शिव) की यह सबसे कठोर पूजा है।

  •  इस पर्व के दौरान भोगताओं को रात में धूप-धवन की अग्नि-शिखाओं के ऊपर उल्टा लटकाकर झुलाया जाता है, जिसे धुवांसी कहा जाता है। 

  • इस पर्व में भोगताओं को दहकते हुए आग के अंगारों पर चलना होता है, जिसे फूल-बूंदी कहा जाता है।

  •  इस पर्व के दौरान कहीं-कहीं लोहे से निर्मित अंकुश को रस्सी से बांधकर झुलाया जाता है तथा उससे भगता लोगों की पीठ पर छेद किया जाता है। इस दौरान भगता लोगों की माँ अथवा बहन भगवान शिव की अराधना करते रहती हैं। 

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