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एक समावेशी कक्षा में अनुकूलन किसमें किया जाना चाहिए ?
(a) अधिगम के लक्ष्य में
(b) शिक्षण-अधिगम की रणनीतियों में
(c) सहायता के प्रावधान में
(d) मूल्यांकन में

  • (a), (c), (d)
  •  (b), (c), (d)
  • (a), (b), (c), (d)
  • (a), (b), (d)

Explanation:

  • समावेशी कक्षा में सभी छात्रों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिगम के लक्ष्यों, शिक्षण-अधिगम की रणनीतियों, सहायता प्रावधानों और मूल्यांकन सभी में अनुकूलन किया जाना चाहिए।
  • यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक छात्र को अपनी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर मिले।

निम्नलिखित में से कौन-सी अक्षमता संवेदी बाधित के अंतर्गत नहीं आती है ?

  • लेखन वैकल्प
  • श्रवण में कठिनाई
  • दृष्टि की आंशिक हानि
  • रंग दृष्टिहीनता

Explanation:

  • लेखन वैकल्प (डिस्ग्राफिया) एक सीखने की अक्षमता है, न कि संवेदी बाधित।
  • संवेदी बाधित में श्रवण और दृष्टि से संबंधित अक्षमताएँ आती हैं, जैसे श्रवण में कठिनाई, दृष्टि की आंशिक हानि और रंग दृष्टिहीनता।

जीन पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास :

  • भाषा क्षमताओं के विकास पर निर्भर है।
  • सांस्कृतिक उपकरणों का उपयोग करने की योग्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया है।
  • किसी के स्कीमा को बदलकर पर्यावरण के अनुकूलन की प्रक्रिया है।
  • जानकारी के मौजूदा भंडार में नए तथ्यों और विचारों का सरल जोड़ है।

Explanation:

  • पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास अनुकूलन की प्रक्रिया है, जिसमें बच्चे नई जानकारी को अपने मौजूदा स्कीमा में आत्मसात करते हैं या नई जानकारी के अनुसार अपने स्कीमा को समायोजित करते हैं।
  • यह प्रक्रिया पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया के माध्यम से होती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 आकलन में क्या बदलाव करने की सिफारिश करती है?

  • आकलन के योगात्मक रूप को क्रियान्वित करने की
  • स्व-मूल्यांकन और सहकर्मी-मूल्यांकन को शामिल करने की
  • बुद्धि को एकात्मक धारणा को लागू करने की
  • छात्रों के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ का अवमूल्यन करने की

Explanation:

  • NEP 2020 आकलन में स्व-मूल्यांकन और सहकर्मी-मूल्यांकन जैसी सुविधाओं को शामिल करने की सिफारिश करती है ताकि यह अधिक व्यापक, निरंतर और छात्र-केंद्रित हो।
  • यह सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और रटने पर कम जोर देने के लिए है।

नई जानकारी सीखते समय, बच्चों के लिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे विषय-वस्तु को समझते हैं, निम्नलिखित में से कौन सी एक सहायक रणनीति है ?
(a) जानकारी को एक बार फिर से पढ़ना
(b) प्रश्न पूछना और स्पष्टीकरण माँगना
(c) समझने का नाटक करना
(d) अपरिचित शब्दों के लिए अपना अर्थ बनाना

  • (a), (c)
  • (c), (d)
  • (a), (b), (c)
  • (a), (b)

Explanation:

  • जानकारी को फिर से पढ़ना और प्रश्न पूछना समझ को गहरा करने की प्रभावी रणनीतियाँ हैं।
  • समझने का नाटक करना और अपरिचित शब्दों के मनमाने अर्थ बनाना सीखने में बाधक हो सकता है और गलतफहमी पैदा कर सकता है।

अभिकथन (A) : यदि बच्चों के शारीरिक विकास में देरी होती है तो उनका सामाजिक और भावनात्मक विकास प्रभावित होता है।
कारण (R) : बच्चों के विकास में विकासात्मक निरंतरता है।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं लेकिन (A) की (R) सही व्याख्या नहीं करता है।
  • (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (A) की (R) सही व्याख्या करता है।

Explanation:

  • अभिकथन सही है क्योंकि शारीरिक विकास में देरी सामाजिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित कर सकती है (जैसे, खेलने में असमर्थता के कारण सामाजिक अलगाव या हीन भावना)।
  • कारण ‘विकासात्मक निरंतरता’ (Developmental Continuity) गलत अवधारणा है; विकास चरणों में होता है (Discontinuity) और यह अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

अभिकथन (A) : कहानियों और किताबों में पुरुष पात्रों को अक्सर ताकतवर और साहसी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जबकि महिला पात्रों को स्नेही और संवेदनशील के रूप में दिखाया जाता है।
कारण (R) : स्कूल और पाठ्यचर्या जेंडर-भूमिका पहचान को प्रभावित करते हैं क्योंकि वे द्वितीयक सामाजीकरण के शक्तिशाली माध्यम हैं।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं लेकिन (A) की (R) सही व्याख्या नहीं करता है।
  • (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (A) की (R) सही व्याख्या करता है।

Explanation:

  • अभिकथन सही है क्योंकि किताबों में लिंग आधारित रूढ़ियाँ (Gender stereotypes) दिखाई जाती हैं।
  • कारण भी सही है क्योंकि स्कूल और पाठ्यचर्या द्वितीयक सामाजीकरण के साधन हैं जो बच्चों में लैंगिक भूमिकाओं की धारणाओं को प्रभावित करते हैं, जो अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

एक शिक्षक को ऐसी कक्षा वातावरण का निर्माण करना चाहिए जहाँ छात्रों को सीखने की अभिप्रेरणा मुख्य रूप से किस पर केंद्रित हो ?

  • एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने पर
  • सीखने की प्रक्रिया को समझने व उसकी सराहना करने पर
  • दूसरों के सामने अपनी क्षमता साबित करने पर
  • अज्ञानी दिखने की शर्म से बचने पर

Explanation:

  • अधिगम को प्रभावी बनाने के लिए छात्रों की प्रेरणा सीखने की प्रक्रिया को समझने और उसका आनंद लेने पर केंद्रित होनी चाहिए, न कि केवल प्रतिस्पर्धा या दूसरों को प्रभावित करने पर।
  • यह आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) है जो दीर्घकालिक और गहन सीखने में सहायक होती है।

अभिकथन (A) : डिस्लेक्सिया से जूझ रहे बच्चों को ध्वन्यात्मक प्रक्रिया में कठिनाई होती है, जो शब्दों को डिकोड करना मुश्किल बनाता है।
कारण (R) : सभी बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के क्षेत्रों में प्रोत्साहित किए जाने से लाभ होता है।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।

Explanation:

  • अभिकथन सही है क्योंकि डिस्लेक्सिया में ध्वन्यात्मक प्रसंस्करण (Phonological Processing) में कठिनाई मुख्य लक्षण है, जिससे डिकोडिंग में समस्या होती है।
  • कारण भी सही है कि सभी बच्चों को उनकी रुचि के क्षेत्रों में प्रोत्साहन मिलना चाहिए, लेकिन यह सीधे तौर पर डिस्लेक्सिया के कारण (ध्वन्यात्मक कठिनाई) की व्याख्या नहीं करता।

निम्नलिखित में से कौन-सी समस्या-समाधान में एक प्रभावी रणनीति नहीं है ?

  • समस्याओं को हल करने के लिए तार्किक तर्क का उपयोग करना
  • प्रासंगिक जानकारी को अनदेखा करना
  • जटिल समस्याओं को सरल भागों में विभाजित करना
  • पैटर्न और संबंधों को पहचानना

Explanation:

  • समस्या-समाधान में प्रासंगिक जानकारी को अनदेखा करना एक बाधा है, क्योंकि इससे समस्या का सही विश्लेषण और समाधान संभव नहीं हो पाता।
  • अन्य विकल्प जैसे तार्किक तर्क, विभाजन, और पैटर्न पहचान प्रभावी समस्या-समाधान रणनीतियाँ हैं।

अभिकथन (A) : जब हम अंतरों (विविधताओं) के बारे में बात करते हैं, तो ऐसे वाक्यांशों का उपयोग करना चाहिए जो व्यक्ति को अंतर से पहले रखते हैं, जैसे ‘विकलांग छात्र’ के बजाय ‘विकलांगता वाले छात्र’ का उपयोग करना।
कारण (R) : जब हम भिन्न आवश्यकताओं वाले शिक्षार्थियों के बारे में बात करते हैं तो हम जिस भाषा का उपयोग करते हैं, वह दृष्टिकोण और दृष्टिकोण को आकार देती है।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।

Explanation:

  • अभिकथन में प्रयुक्त ‘पहचान-पहली भाषा’ (Person-first language) सही है, जो व्यक्ति को उसकी अक्षमता से अलग पहचान देता है और सम्मानजनक है।
  • कारण बताता है कि भाषा हमारी मानसिकता को प्रभावित करती है, इसलिए सही भाषा का चुनाव सहानुभूति और सम्मान को बढ़ावा देता है, जो अभिकथन का सही स्पष्टीकरण है।

अभिकथन (A) : मध्य विद्यालयों में बच्चों को दैनिक/साप्ताहिक आधार पर अपनी भावनाओं के बारे में लिखने और उन पर चिंतन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कारण (R) : अपनी भावनाओं को समझना एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है जो कार्रवाई की ओर ले जा सकती है।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।

Explanation:

  • अभिकथन सही है क्योंकि भावनाओं के बारे में लिखना भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) विकसित करता है, जो किशोरावस्था (मध्य विद्यालय) में महत्वपूर्ण है।
  • कारण भी सही है और अभिकथन को समझाता है कि भावनाओं को समझना (प्रतिचिंतन) एक संज्ञानात्मक कौशल है, जो बेहतर निर्णय और कार्यों को जन्म देता है, इसलिए भावनाओं पर चिंतन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

संरचनावादी सिद्धांतकारों के अनुसार:

  • बच्चे केवल तभी सीखते हैं जब वे बाह्य रूप से प्रेरित होते हैं।
  • बच्चे तब सबसे अच्छा सीखते हैं जब जानकारी उन्हें अंतिम रूप में प्रस्तुत की जाती है।
  • बच्चों में अव्यवस्थित व्यवहार करने की प्रवृत्ति होती है जिसे सुधारने की आवश्यकता होती है।
  • बच्चों में दुनिया को ‘समझने’ की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।

Explanation:

  • संरचनावाद (Constructivism) के अनुसार, बच्चे निष्क्रिय श्रोता नहीं हैं; वे सक्रिय रूप से अपने अनुभवों से ज्ञान का निर्माण करते हैं और दुनिया को समझने का प्रयास करते हैं।
  • यह बाह्य प्रेरणा, अंतिम रूप में प्रस्तुत जानकारी या अनुशासन सुधार पर जोर नहीं देता बल्कि बच्चे की स्वाभाविक जिज्ञासा और अर्थ-निर्माण की क्षमता पर बल देता है।

प्रभावी समस्या-समाधान के लिए आमतौर पर उपयोग की जाने वाली दो रणनीतियाँ हैं:

  • ह्यूरिस्टिक्स और कार्यात्मक स्थिरता
  • एल्गोरिथम और प्रतिक्रिया समुच्चय
  • ह्यूरिस्टिक्स और प्रतिक्रिया समुच्चय
  • ह्यूरिस्टिक्स और एल्गोरिथम

Explanation:

  • समस्या-समाधान में दो सामान्य रणनीतियाँ हैं: एल्गोरिथम (Algorithm) – एक चरण-दर-चरण प्रक्रिया जो सही समाधान की गारंटी देती है, और ह्यूरिस्टिक्स (Heuristics) – मानसिक शॉर्टकट या अनुमान जो त्वरित समाधान प्रदान करते हैं।
  • कार्यात्मक स्थिरता (Functional Fixedness) और प्रतिक्रिया समुच्चय (Response Set) समस्या-समाधान में बाधाएं हैं, रणनीतियां नहीं।

एक शिक्षिका एक पाठ की समझ के अलग-अलग स्तर पर विद्यार्थियों के एक समूह के लिए एक पाठ योजना तैयार कर रही है। लेव वायगोत्स्की के सिद्धांत के अनुसार, इस पाठ योजना को बनाते समय शिक्षिका को निम्नलिखित में से किस बात पर विचार करना चाहिए?

  • शिक्षिका को सभी विद्यार्थियों को समान स्तर की चुनौती देनी चाहिए।
  • शिक्षिका को प्रत्येक विद्यार्थी के समझ के वर्तमान स्तर को ध्यान में रखते हुए उन्हें अगले स्तर तक पहुँचने में मदद करने के लिए उचित सहायता प्रदान करनी चाहिए।
  • शिक्षिका को केवल उन विद्यार्थियों पर ध्यान देना चाहिए जो पहले से ही समझ के एक उन्नत स्तर पर हैं, और उन्हें और अधिक चुनौतीपूर्ण कार्य देना चाहिए।
  • शिक्षिका को प्रत्येक विद्यार्थी से निर्दिष्ट समस्या पर व्यक्तिगत रूप से कार्य करने के लिए कहना चाहिए।

Explanation:

  • वायगोत्स्की का ‘समीपस्थ विकास का क्षेत्र’ (Zone of Proximal Development – ZPD) का सिद्धांत कहता है कि शिक्षण बच्चे के वर्तमान स्तर से थोड़ा ऊपर होना चाहिए और उचित सहायता (Scaffolding) प्रदान की जानी चाहिए।
  • अतः शिक्षिका को प्रत्येक छात्र की वर्तमान समझ को ध्यान में रखते हुए भिन्न-भिन्न सहायता प्रदान करनी चाहिए, न कि सभी को समान चुनौती देनी चाहिए या केवल उन्नत छात्रों पर ध्यान देना चाहिए।

कक्षा में शिक्षार्थियों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी प्रभावी शिक्षण रणनीतियाँ हैं?
(a) विभेदित निर्देश
(b) मानकीकृत पाठ्यचर्या
(c) व्यक्तिगत शिक्षा योजनाएँ

  • (b), (c)
  • (a), (c)
  • (a), (b), (c)
  • (a), (b)

Explanation:

  • विभेदित निर्देश (Differentiated Instruction) और व्यक्तिगत शिक्षा योजनाएँ (Individualized Education Plans – IEPs) विविध आवश्यकताओं वाले शिक्षार्थियों के लिए प्रभावी रणनीतियाँ हैं क्योंकि वे लचीलापन और अनुकूलन प्रदान करती हैं।
  • मानकीकृत पाठ्यचर्या (Standardized Curriculum) विविधता को ध्यान में नहीं रखती, यह एक समान दृष्टिकोण है, इसलिए यह प्रभावी नहीं है।

‘पढ़ने में प्रवाह की कमी’, ‘शब्दों का प्रत्यावर्तन’, ‘अन्यमनस्कता की प्रवृत्ति’ जैसे विशिष्ट लक्षण किसकी पहचान के लक्षण हैं?

  • ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार
  • मनोभ्रंश
  • ध्यान न्यूनता अतिक्रियाशीलता विकार
  • पठन वैकल्पता

Explanation:

  • ध्यान न्यूनता अतिक्रियाशीलता विकार (ADHD) के मुख्य लक्षणों में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई (अन्यमनस्कता), आवेगशीलता और अतिक्रियाशीलता शामिल है।
  • शब्दों का प्रत्यावर्तन और पढ़ने में प्रवाह की कमी ADHD में भी देखी जा सकती है, हालांकि ये डिस्लेक्सिया में भी हो सकते हैं, लेकिन ‘अन्यमनस्कता’ (Tendency towards distraction) ADHD का प्रमुख लक्षण है, जबकि डिस्लेक्सिया में मुख्य रूप से ध्वन्यात्मक और डिकोडिंग संबंधी समस्याएँ होती हैं।

अभिकथन (A) : शिक्षकों को छात्रों के बीच सहयोग, समूह कार्य और बातचीत से बचना चाहिए।
कारण (R) : सीखना एक निष्क्रिय प्रक्रिया है और स्मरण और अनुकरण के माध्यम से सबसे प्रभावी ढंग से होता है।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।

Explanation:

  • अभिकथन गलत है क्योंकि आधुनिक शिक्षाशास्त्र सहयोग, समूह कार्य और अंतःक्रिया को प्रोत्साहित करता है, जो सामाजिक निर्माणवाद (Social Constructivism) के अनुसार सीखने को बढ़ावा देता है।
  • कारण भी गलत है क्योंकि सीखना एक सक्रिय, सामाजिक और रचनात्मक प्रक्रिया है, न कि निष्क्रिय स्मरण और अनुकरण मात्र।

छात्र कुशलतापूर्वक और सार्थक तरीके से कब सीखते हैं ?

  • जब महारत हासिल करने के बजाय असफलता से बचने पर ध्यान दिया जाता है।
  • जब नई अवधारणा पहले सीखी गई सामग्री से पूरी तरह से भिन्न होती है।
  • जब उनकी प्रतिक्रियाओं और व्यक्तिपरक अनुभवों पर ध्यान दिया जाता है और उन्हें महत्व दिया जाता है।
  • जब सामग्री उन्हें असंगत सूचनाओं के रूप में प्रस्तुत की जाती है।

Explanation:

  • सार्थक सीखना तब होता है जब छात्रों के पूर्व ज्ञान, अनुभवों और प्रतिक्रियाओं को महत्व दिया जाता है और नई सामग्री को उनसे जोड़ा जाता है।
  • यह सीखने को प्रासंगिक और सार्थक बनाता है, जबकि अन्य विकल्प (असफलता पर ध्यान, पूरी तरह भिन्न सामग्री, असंगत सूचनाएँ) सीखने में बाधा डालते हैं।

अभिकथन (A) : यद्यपि ऊँचाई और शरीर का ढाँचा मुख्य रूप से वंशानुगत लक्षण हैं, अच्छा पोषण और व्यायाम भी अंतर लाते हैं।
कारण (R) : विकास पर उनके प्रभावों में आनुवंशिकता और पर्यावरण परस्पर क्रिया करते हैं।

  • (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  • (A) और (R) दोनों गलत हैं।
  • (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।

Explanation:

  • अभिकथन सही है क्योंकि आनुवंशिकता (Heredity) के साथ-साथ पोषण और व्यायाम जैसे पर्यावरणीय कारक भी शारीरिक विकास को प्रभावित करते हैं।
  • कारण भी सही है क्योंकि आनुवंशिकता और पर्यावरण का प्रभाव एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करता है (Interaction), और यह अभिकथन को सही ढंग से समझाता है।

रूढ़िवादी शिक्षा से प्रगतिशील शिक्षा की ओर बढ़ने के लिए ________ में बदलाव की आवश्यकता होती है।

  • एकीकृत पाठ्यचर्या से मानकीकृत पाठ्यचर्या की ओर
  • प्रदर्शन-उन्मुख लक्ष्यों से महारत-उन्मुख लक्ष्यों की ओर
  • शिक्षक-केंद्रित शिक्षाशास्त्र से परीक्षा-केंद्रित शिक्षाशास्त्र की ओर
  • रचनात्मक मूल्यांकन से नैदानिक मूल्यांकन की ओर

Explanation:

  • प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) सीखने की प्रक्रिया, समझ और महारत (Mastery) पर केंद्रित होती है, न कि केवल परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन (Performance) पर।
  • यह छात्र-केंद्रित, अनुभवात्मक और समग्र विकास पर बल देती है, जबकि रूढ़िवादी शिक्षा में प्रदर्शन-उन्मुख लक्ष्यों (जैसे रटना, परीक्षा में अंक) पर जोर दिया जाता है।

सामाजीकरण प्रक्रिया में साथियों (Peers) की क्या भूमिका है?

  • विकास के सभी चरणों में माता-पिता और अन्य वयस्कों की तुलना में साथियों का सामाजीकरण पर न्यूनतम प्रभाव होता है।
  • बच्चों के लिए साथी सामाजीकरण के प्राथमिक एजेंट हैं।
  • प्रारंभिक बचपन की तुलना में किशोरावस्था के दौरान साथियों का सामाजीकरण पर अधिक प्रभाव होता है।
  • साथियों का सामाजीकरण पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं होता है।

Explanation:

  • किशोरावस्था (Adolescence) में साथी समूह (Peer Group) का प्रभाव बहुत बढ़ जाता है क्योंकि इस समय बच्चे अपनी पहचान, स्वतंत्रता और सामाजिक स्वीकृति खोजते हैं, और माता-पिता से अलग होकर साथियों के साथ अधिक समय बिताते हैं।
  • प्रारंभिक बचपन में माता-पिता का प्रभाव अधिक होता है, लेकिन किशोरावस्था में साथियों का प्रभाव प्रमुख हो जाता है, हालांकि वे प्राथमिक एजेंट नहीं होते (परिवार प्राथमिक एजेंट है)।

सीखने के संरचनावादी उपागम के अनुसार, सीखना तब सुगम होता है जब :

  • विषय-वस्तु पृथक और उत्केन्द्री होता है।
  • शिक्षाशास्त्र शिक्षक-केंद्रित और सांस्कृतिक रूप से पृथक होता है।
  • कार्य असंगत और अव्यवस्थित होते हैं।
  • गतिविधियाँ परस्पर संवादात्मक और सहयोगी होती हैं।

Explanation:

  • संरचनावाद (Constructivism) सामाजिक अंतःक्रिया और सहयोग को सीखने के लिए आवश्यक मानता है।
  • परस्पर संवादात्मक (Interactive) और सहयोगी (Collaborative) गतिविधियाँ छात्रों को अपने विचारों को साझा करने, चर्चा करने और सामूहिक रूप से ज्ञान का निर्माण करने का अवसर देती हैं, जिससे सीखना अधिक गहन और सार्थक हो जाता है।

लेव वायगोत्स्की के विचारों का पालन करते हुए एक शिक्षक ने उन छात्रों को सुझाव और संकेत देने का फैसला किया जो किसी समस्या पर अटके हुए थे, और उन्हें उस समस्या को फिर से हल करने का प्रयास करने का मौका दिया। ऐसा करके, शिक्षक ________ की अवधारणा का अभ्यास कर रहा है।

  • सामूहिक एकलाप
  • कार्यात्मक स्थिरता
  • आलंबन
  • आत्मसातीकरण

Explanation:

  • वायगोत्स्की के अनुसार, ‘आलंबन’ (Scaffolding) वह प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक या अधिक जानकार व्यक्ति बच्चे को उसके समीपस्थ विकास के क्षेत्र (ZPD) में पहुँचने में मदद करने के लिए अस्थायी सहायता (संकेत, सुझाव) प्रदान करता है।
  • यहाँ शिक्षक संकेत देकर और छात्रों को पुनः प्रयास करने का अवसर देकर आलंबन का अभ्यास कर रहा है।

पियाजे के अनुसार जब बच्चे सामान्यीकरण करने और अपने दिमाग में परिकल्पनाएँ बनाकर तथा उनका परीक्षण करके मानसिक परीक्षण-और-त्रुटि विधि में संलग्न होने में सक्षम होने के बिंदु तक पहुँच जाते हैं, तो वे किस अवस्था में होते हैं?

  • पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
  • मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
  • औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था
  • संवेदी-चालक अवस्था

Explanation:

  • पियाजे के सिद्धांत के अनुसार, औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) (लगभग 11-12 वर्ष से वयस्कता तक) में बच्चे अमूर्त चिंतन, काल्पनिक सोच (Hypothetical Thinking), और निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) में सक्षम हो जाते हैं।
  • वे मानसिक रूप से परिकल्पनाओं का परीक्षण कर सकते हैं (Mental trial and error) और सामान्यीकरण (Generalization) कर सकते हैं, जो इस अवस्था की विशेषता है।
SET 1 – CTET CDP 6 TO 8 FEB 2026