हेराइल हाँसी खोरठा कहानी का सारांश (हिंदी में) : यह कहानी विमल बाबू नामक एक सेवानिवृत्त अधिकारी की है, जो अपने जीवन के अंतिम दिनों में अकेलेपन और उदासी से जूझ रहे हैं। विमल बाबू एक गाँव के किसान परिवार से थे, उन्होंने कठिन संघर्ष के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और राँची में नौकरी की। उनके दोनों बेटे बड़े होकर अच्छी जगहों पर बस गए – एक पटना में और दूसरा अमेरिका में।
सेवानिवृत्ति के बाद विमल बाबू ने राँची में एक बड़ा बंगला खरीदा, लेकिन बच्चों के दूर चले जाने के कारण वे और उनकी पत्नी नियोती अकेले और उदास रहने लगे। बच्चों को उनसे मिलने की फुर्सत नहीं थी, चाहे वे कितना भी बुलाते।
इस अकेलेपन में उनके नौकर रामू और उसकी पत्नी गौरी ने उनकी बहुत सेवा की। गौरी ने घर में नई जान फूंक दी। जब नियोती बीमार पड़ीं और बेटे नहीं आए, तो रामू और गौरी ने ही उनकी देखभाल की। बाद में गौरी को एक बेटा हुआ, जिसके साथ विमल बाबू बच्चे की तरह खेलने लगे।
अंत में विमल बाबू ने अपनी आधी संपत्ति धार्मिक ट्रस्ट को और आधी रामू को वसीयत में दे दी, जिससे उन्हें बहुत संतोष मिला और उनकी खोई हुई हँसी वापस लौट आई।
मुख्य पात्रों के नाम (हिंदी में):
1. विमल बाबू – कहानी के मुख्य पात्र, सेवानिवृत्त अधिकारी
2. नियोती – विमल बाबू की पत्नी
3. रामू – विमल बाबू का वफादार नौकर
4. गौरी – रामू की पत्नी
5. विमल बाबू के बड़े बेटे – पटना में रहते हैं (नाम उल्लेखित नहीं)
6. विमल बाबू के छोटे बेटे – अमेरिका में रहते हैं (नाम उल्लेखित नहीं)
7. वकील – वसीयत बनाने वाला (नाम उल्लेखित नहीं)
कहानी का मूल संदेश: अपना खून हो या पराया, असली अपनापन तो सेवा और प्रेम में है। धन-दौलत से ज्यादा सच्चा सुख अपनों के साथ बिताया गया समय है।
विमल बाबुक मन टा एखन ढेरे फरीछ। बहुत दिनेक हेराइल हाँसी जइसन उनखर फोगला मुंहे घुइर आइल ह । जिनगिक सुखल रस एक बहर फइर जरइक के उनखर गाते बोहे लागल हइ। बु ती कालें जिनगीक एगो ठेहाड़ मिल गेल हइन। थोड़के दिन आगु उ आपन जिनगी से हायनीसार भय गेल हला, एक दम उदास रहे लागल हला एते बड़ऽ बंगला, सामने ढबगर बागान, एते सर-सामान, साज-बाज, मेनेक ई गुला केकर खातिर ? कि खातिर ? ओसराक आराम कुरस बइस बइस भाभइत रह हला । एगो समय हल, जखन इनखर चलती हलइन। तनि निकास लिएक फुरसइत नॉय मिलऽ हल। आगुंड पे इ कते, लोक, मुलाकाइत करवइयाक पांता, लागल रह हल। एगो बड़ऽ आफीसर जे हला। विमल बाबुक जनम एगो गांवेक किसान घरहीं भेल हलइन। बड़ी मेहनइत से पढ़ल सुनल हला। गांव से चाइर कोस धुर बुलले इसकूल जाइ हव हल। तकर मांझे फइर जोरीया नाला झइर-बइरसांय पानीक हड़पा नाईभ गेल तो घर घुइर जाइ हव हला हाई इसकूल पास करल बाद बरदवान सहरें पइढ़ के इंजीनियर बइन गेला तो रांची में नउकरी भय गेल हलइन। बीहा-दान तो उनखर माँय पायें आपन मरजी से छोटे उमइरहीं कइर देल हला, मेनेक तखन एगो जमाना हल, जे उनखर पढ़ाई में कोन्हो बाधा नॉय परला परें सइ गिरनी टी उनखर घर कारना बेस से सम्हाइर लेल हली। अइसन तो विमल बाबु इमानदार भल पुरूसे हला मेनेक जहाँ काम कर हला, उहाँ तनी हेंठ उपर करेहे पर हल। बांधे रइह के मगर से बइर करलें कइसे बांचतला। रोज के उपरी आमदनी से जेब भरइत रह हल। सरकारी बांगला, गाड़ी, डाइभर, माली सब भरल-पुरल रह हल। सइ जामानांय उपर वालांय आरहो मेहरबानी कइर के उनखां दू गो बेटायं देल हला। साहेबेक छउवा जइसने चनफर्नीया तइसने चेठगर। रांची सहरें कते-कते नाम जइजका इसकूल। खरचा-बरचाक कोन्हों कमी नखबे करल, सुघर-सुघर इसकूले तनि ढोब से पोढ़ा सुना भेल । बड़का बाबु रांची मेसरा कॉलेज से इंजीनियरिंग पास कइर गेला तो नउकरियो मिल गेल। एखन उनखर Ο Scanned with OKEN Scanner पोसटींग पूना सहर बाटें भय गेल ह । उनखर बीहा पटना सहरेक एगो बोड़ आला आफीसरेक पढ़ल बेटी संगे कइर देल हथा दहेज में मोटरकार, रंगीन टीवी, फीरीज, सोफा पलंग, आलमारी आर कते-कते सामान मिलल हइन। सब लय के आपन पूना चइल गेल हइ। छोट नुनुओं कम नॉय, वइसने पढ़े में तेजा बारहवीं पास करइत करइत आई.आई. टी.में पास कइर गेल हल। रूड़की में इंजीनियरिंग पास करइत करइत अमेरिका के एगो कम्पनी ओकरां उठाय के आपन देस लइ गेल हय, जहां ढेरे टाकाक आमदनी। एखन से उहीं एगो बड़ लोकेक बेटी संगे परेम बीहा कइर के आपन गिरहसती उहीं बासाय लेल हया विमल बाबु दुइयों वेगइत बड़ी खुसी भेल हला। जे जा हउक हामर जिनगी संवइर गेल, हामर दुइयो छउवइन “सेटल” कइर गेल हथा एखन बिमल बाबु “रीटायर” भय गेल हथा ढेरे पइसा कउड़ी मिललइन तो एगो बेस ढबगर बंगला कीन लेल हथ। रांची सहर, “भी. आई. पी. कॉलोनी” बड़का गो बंगला, सात-आठ गो कोठरी, चाइरो बाटे ऊंचा ऊंचा पंचरी, भीतरे ढोवगर फुलेक बगइचा, कोनांय बड़ सरभेंट क्वाटर। विमल बाबुक गिरनी नियोती के पसींद हल देइख के बड़ी खुशी भेल हला, भाभल हला हामीन एहें ठावें आराम से सुखेक सेंस जिनगी बिताइवा इहां कोन्हों हड़ हड़, कच कच नखे, सांतिये सांति। मैनेक थोड़के दिनेक परहीं उनखर मनेक भरम टा भांइग गेले हल। सइ सुखेक सांतिक घर काटे दौड़े लागल हल। एते दिन से आइल गेल से भरल घरें, चूहिल आर गहगही से रहे वाला मानुस, एखन इहां केउ नॉय। उगइत सुरूज के सभे निहोर करइ डुबइत सुरूज के पुछवइया केउ नॉय। मनवो ओझराय राखे खातिर आर कोन्हो कामो तो नाज सुझ हल। ई सुनसान घरें एकाय रहइते मनवा उइब गेलइन तो बेटवइन के चिट्ठी लिखला जे एक बइर आइ के देइख जा, तनि नती अइन के देखे खातीर आँइख टाटा हय। मेनेक उनखीन के एखन फुरसइत कहां? एगोक सात समुदरेक पारें बासा’ माया मछींदूक माया में फांइस गेल ह । ढेरे टाका पाठाय देल आर कहल “आरहो, दरकार परलें कहीयें। बड़का लिखल हय “हामर कामें छुट्टी नखय फइर छउवा सब इसकूल जा हथ, पढ़ाई छोड़ाइ के कइसे जाइब। दुइयों बेगइत फिकीरें पहर गेला, सय तो इटा की भेला आपने कोइख के जनमल छउवा, जकरा एते जतन से पाइल पोइस के मानुस करलो, साहेब बनवल ताकरां एखन बुढा मांय-बापके देखेहोक फुरसइत नाय? हामनीक जिनगी में आर कि रस बांचल । जिनगीक अड़बेरीयांय ई सोनाक पीजराक भीतर जेहल खाना इ रकम कइद भइ रहल हों। खाली पसांय सुख नॉय हवे पारय, सुख पावे खातीर आरहों कुछ चाही। इटा विमल बाबु पहिल बइर बुझे पारला। एतना बोड़ घर, हाताक आराम कुरसी में बइसत-बइसत थइक जाथ, मन उदास भइ जाय, जइसें जिनगी में आर करें खातिर कोन्हों रस- सा नांय। नियोतीयों गुम-सुम उदास रहया ओकर गिरहसत में कते चूहिल आर गहगही रह हल मेनेक एखन एकदम सुनसान। मनेक भाभ मनेक भीतरहीं गुमरइत रहया मने परय खाली सइ आपन बेटा-पुतोह, नाती-नतनी दू गो छउवा ई आंगनां दोइड़ बुलतला तो कते गहदम लागतला आंखी लोर टिपके लागल आर नजइर तरें धुँधुर सुझे लागला कोन्हो काम करेक मन नॉय करयं । भाइगें घरेक नोकर रामु हल जेकर से सेवा टहल भय जा हल। रामु छट से ही ई घरेक सुसुरसा में लागल हल, ई घरेक नून खाइल हल आर नुनेक चा चांताइल हल। ई गरीबेक मने, कोन्हों छल, परपंच नॉय, खुब सेवा करया रामु, एखन सियान एकइस बछरेक जावान भय गेल हइ। एक छोट से टूअर के आपन घारेक बेगइत रकम ओकरां मानथ, दू एगो अगुवा बीहा खातिर विमल बाबु ठीन घुरला तखन देइख सुइन एगो गरीब सुसील बेटी देख रामुक बीहा दइ देला आर कहला- आबरी से तोहनी दुइयो बेगइत रहमे । सरभेंट क्वाटर में नॉय हामर हिये भीतर घरें। हामर बेटा रकमा सइये भेल हल बीहाक बाद लियान कइर के रामु आपन नउतन बहुरियाक लय के सइ बंगलाहीं आय गेल हल। एते बोड़ घर तकर चकर मकर देइख के बहुरिया गौरी भकचोकाय गेल हली। बेचारी गरीब एते बोड़ बांगला सपुनेहुं नॉय देखल हली। दू चाइर दिनही ई घरेक सुसुरसा में लाइग परल हली। नियोतिक घरें पायल के छन-छन आर चूरी के खन-खन से जइसे घरेक उदासी भागे लागल हला नियोतिक काम करवइया जहां एगो कामिन मिल गेल हल, उहीं एगो मुंहेक संग देवइया बेटीयो। विमल बाबुक एखन बिहानी गरम गरम चाह, नाहाइ खातिर गरम पानी समय सिरें मिले लागल। पहिल बइर पतो क रकम सेवा पाय के दुइयो बेगइत गदगद हला । जे सुख आर सेवा टा आपन कोइख से जनमल बेटा-बहु नॉय दिये पारल हला सइ सुख एखन कामिने दिये लागल हली। कि नोकर आर मालिक के माझेक तफात टा पाटाइत पाटाइत जइसे बाराबइर हवे लागल हल। दुइयो बाटे नाफाहीं हला। गरीब रामु आर गौरी के एते बड़ धरे जिनगीक एगो ठेहाड़ मिल गेल हल, तहीं विमल बाबुक उदास परिवार के एगो संगी। अइसने में दू बच्छर बीते लागल । एखनु विमल बाबुक साहेब बेटा-पतोहु एको बइर हुलकेहों ले नॉय अइला। चिट्ठी पतरियो कम भइ गेल हइ। जइसे उ सब मांय-बाप के भूइल गेल हथा मांयेक मने पर हइ, छाती साले लागय अंबीयां टाटाय लागय तो फफइक फफइक के कांदे लागहीं। विमल बाबु ओकरां फटइक देथ कहथ – छोड़-भूइल जो ऊ बइमान सब के। ऊ सब भूइल गेल हथ तो हामहूं ओकर बाप लागों, हामरो आन हय हामहु भुइल जाय पारों। अंखिया डबडबाय जाय रूमाल से आइख पोइछ के कहथ। आपन आपन किसमइत हवय-जिनगी में के ककरो नॉय । विमल बाबु तो मरद पुरूष इनखर करेजा बोड़- भूइलो जाय पारथ मेनेक नियोती तो मांय लागी ओकर करेजा फाटे लागला दिनेक भूख आर राइतेक नींद भाइग गेल। मन गुमान रहइत रहइत बेजार पइर गेली। कते डाकतर-पानी, खाट गइज गेल ही। विमल बाबुओ लावेजान हथा धइन हीं गोरी जे राइत दिन ओकर सुसुरसा में एक कइर देल हीं। दावाइ दारू, उठा-बइसा, पर पखाना, साफा-सुथरा एतना कोन्होंक बेटीयो नॉय करे पारतली। बेटा सब के फइर खभर करल गेल जे मांयेक मुंह देखेक हो तो एक बइर आवा मेनेक केउ नॉय आवे पारला। हां दुगो आरहो मनीआडर आय गेल हल जेकरां विमल बाबु बेरंग घुराय देला। महीना दिने नियोती तनि सुसतयली तो आवरी विमल बाबु पइर गेला एक तो नियोतिक सेवा में मेहनइत परलइन आर तनी एहो हलदीलो हइ गेल हला। एखन इनखर सेवा हल के करय? नियोती तो आपने बेजारें गजल मानुस। एखन फइर रामु आर गोरीक उपरे भरोसा । जे करता? मेनेक धइन हथ ऊ सब। एकदम जीव जहान से लाइग परल हथ। सेवा टहल में राइत दिन एक कइर देल हथ। घरेक-बाहरेक सब कमवे साम्हाइर लेल हथा नियोती कहली धइन हथ भगवान ई दुइयों हामर नउकर कामिन नॉय, हामर पुरुव जनमेक छउवा तागथ उनखीन के सेवाक जरें विमल बाबुओं खाटी से उइठ के कुरसीं बइसे लागला। अइसने में दिन महीना खरके लागल । एखन गौरिक कोराज एगो फुल फुटल। सइ बंगला में कोहां कोहां हवे लागला नियोती खुसी भेल हली-जे जा होक ई सुनसान बंगलाय एगो फूल तो फुटल सइ छउवा टा गोड़ हाथ पटकय आर खुल-खुल हांसय, नियोती बइस बइस अकर रीझ देखइ आर माजा लेइ। बछर दिने नुनवां थापाय थुपुय बुले लागलई आर घर आंगनांय गड़गड़ाय बुले लागल, ‘दा-दा-बा-बा’ करइत विमल बाबुक कुरसीया धइर के पुरे लागय विमल बाबुओ सय छउवा टा संग खेले लागल हथ। एक बइर सय गड़गड़ाइके गिर परल आर कदि लागल विमल बाबु दोइड़ के ओकरा उठाय के को य समइट लेला । उनखर नील देल झक झकिया धोती-कुरता टा धुरांय गाड़ाय गेलई। गौरी दोइड़ के अइली आर ई देख के ठठइक गेली, डेराय गेल हली, बाबु की कहता ? कहली “बाबु छोइड़ दाहाक ई बड़ी सतान भइ गेल हइ, तोहर धोती टा गाइंज देलो ।”
विमल बाबु ओकरां पियार से झिड़इक देला आर कहला “नॉय रे बोकी छउवा भगवान हव हय फूल रकम पवितर, एकरां हामर संग खेले दे। आर से ओकर संगे खेले लागल । खेले में विमल बाबु एते मसगुल भय गेल हला जो ऊ भुइल गेल हथ जे ई हामर आपन बंस नॉय, परेक छउवा लागया आपन आर पर तो आपन मनेक भीतरेक उपजल बेथा हवइ, ना तो जे आपन कामे लागय सइ टाय आपन आर जाकरा आपन कहो से जदि दुखे-सुखे कभुं कामें नॉय लागल सेटा वा कइसन आपन ?
विमल बाबु दुइयो बेगइत ओसराय बइसल हथा गौरी उनखांक नासता आर चाह आइन के दइ देलहीं रामु घरेक कामे मसगुल हइ। नुनवां उही आंगनाय खेले लागल ह । चाहेक चुसकी लइ के नियोती कहली – “बेचारा गरीब – ई सब हामिनेक कते सेवा कर हथ”।
“हां रे…… इनखाक सेवाक दाम हामिन की दिये पारब? आबरी हामिन गाछेक पाकल आम भइ गेल हों कखनु टीपइक जाय पारो। तो कि ई सब के करजा लइ के जाइब?”
“ तो कुछ काहे नॉय कइर दाहाक?” विमल बाबु उदनिसास लइ के कहला “हां कुछ तो करें हे हवत?” अइसने दइयो गंभीर भय गेल हला आर खुब विचार-सिचार कहर के तय कइर लेल हला।
एक दिन वकील डाइक के आपन संपति के वसीयत कइर देला । आधा संपति मरल बाद एगो धारमिक ट्रस्ट के हवत आर आधा राम के।
आइज विमल बाबुक मन एते हलुक भय गेल हइन जइसे जिनगीक कते बोड़ भार मुंड से नाइभ गेल हइ। आपन खुसी से भइर के सय छउवा टा संग छउवा भइ के खेले लागल हथ आर खटखटाय के हांसे लागल हथ। आइज एते दिनेक उदासी टुइट के सब दुख भुलाय गेल हथा जइसे उनखर हेराइल हांसी फइर घुइर आइल हइ।