JharkhandGK
खरवार आंदोलन कब हुआ?
- 1874
- 1895
- 1900
- 1857
Explanation:
- खरवार आंदोलन (खेरवार आंदोलन) शुरुआत का वर्ष: यह आंदोलन मुख्य रूप से 1874 में शुरू हुआ था।
- सक्रिय काल: यह विद्रोह 1874 से 1881 के बीच व्यापक रूप से सक्रिय रहा।
- प्रमुख नेतृत्व: इस आंदोलन का नेतृत्व भागीरथ मांझी (बाबा) ने किया था।
- अन्य नाम: इसे ‘सफा होर आंदोलन‘ के नाम से भी जाना जाता है।
संथाल आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था?
- सिद्ध-कान्हु
- भैरव-चांद
- उपरोक्त दोनों
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- संथाल आंदोलन (संथाल हुल, 1855-56) का नेतृत्व मुख्य रूप से चार मुर्मू भाइयों ने किया था, जो भोगनाडीह गाँव के रहने वाले थे:
- सिद्धू मुर्मू
- कान्हू मुर्मू
- चाँद मुर्मू
- भैरव मुर्मू
- इन भाइयों के साथ-साथ उनकी दो बहनों, फूलों मुर्मू और झानो मुर्मू, ने भी इस ऐतिहासिक विद्रोह में महिलाओं को संगठित करने और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
संथाल विद्रोह कब हुआ था?
- 1855-56 में
- 1857-58 में
- 1899-1900 में
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- संथाल आंदोलन (संथाल हुल, 1855-56) का नेतृत्व मुख्य रूप से चार मुर्मू भाइयों ने किया था, जो भोगनाडीह गाँव के रहने वाले थे:
- सिद्धू मुर्मू
- कान्हू मुर्मू
- चाँद मुर्मू
- भैरव मुर्मू
- इन भाइयों के साथ-साथ उनकी दो बहनों, फूलों मुर्मू और झानो मुर्मू, ने भी इस ऐतिहासिक विद्रोह में महिलाओं को संगठित करने और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
निम्नलिखित में से कौन मुण्डा विद्रोह का नेता था?
- सिद्धू-कान्हु
- जतरा भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिरूत सिंह
Explanation:
- मुण्डा विद्रोह (जिसे उलगुलान भी कहा जाता है) के मुख्य नेता बिरसा मुण्डा थे। इस विद्रोह से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- बिरसा मुण्डा (जिन्हें उनके अनुयायी “धरती आबा” या जगत पिता भी कहते थे)।
- समय: यह विद्रोह मुख्य रूप से 1899-1900 के दौरान हुआ था।
- रांची, खूंटी और चक्रधरपुर के आसपास के क्षेत्रों में फैला था।
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उरांव विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
- बुद्ध भगत
- जतरा भगत
- कान्हू भगत
- रावल भगत
Explanation:
- ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उरांव विद्रोह (जिसे ताना भगत आंदोलन भी कहा जाता है)
- जतरा भगत (जतरा उरांव): इन्होंने वर्ष 1914 में इस आंदोलन की शुरुआत की थी। वे इस विद्रोह के मुख्य सूत्रधार और मार्गदर्शक थे।
- बलराम भगत:
- देवमन भगत:
- भीखू भगत:
- शिबू भगत:
बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था:
- 10 अक्टूबर, 1854
- 15 सितम्बर, 1860
- 15 नवम्बर, 1875
- 15 दिसम्बर, 1890
Explanation:
- धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जन्म तिथि: 15 नवंबर 1875
- जन्म स्थान: उलीहातू गाँव (वर्तमान में यह झारखंड के खूंटी जिले में स्थित है)
- माता-पिता: माता का नाम करमी हातू और पिता का नाम सुगना मुंडा था
- जन्म का दिन: उनका जन्म बृहस्पतिवार (गुरुवार) को हुआ था, और मुंडा जनजाति की परंपरा के अनुसार इसी कारण उनका नाम ‘बिरसा’ रखा गया था
संथाल विद्रोह कब हुआ था?
- 1805
- 1855
- 1860
- 1880
Explanation:
- संथाल विद्रोह (जिसे संथाल हूल भी कहा जाता है) की शुरुआत 1855-56 के दौरान हुई थी।
- इस विद्रोह का नेतृत्व मुख्य रूप से चार मुर्मू भाइयों—सिद्धू मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चाँद मुर्मू और भैरव मुर्मू—ने किया था, जो भोगनाडीह गाँव के रहने वाले थे।
- इन भाइयों के साथ-साथ उनकी दो बहनों, फूलों मुर्मू और झानो मुर्मू, ने भी इस विद्रोह में महिलाओं को संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
ताना आंदोलन किसने शुरू किया था?
- तिलका मांझी
- बिरसा मुण्डा
- जतरा भगत
- कान्हू
Explanation:
- ताना आंदोलन (जिसे ताना भगत आंदोलन भी कहा जाता है) की शुरुआत जतरा भगत (जतरा उरांव) ने वर्ष 1914 में की थी।
- यह मुख्य रूप से झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र में उरांव जनजाति द्वारा चलाया गया एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन था।
उलगुलान आंदोलन किसके नेतृत्व में आरंभ हुआ था?
- तिलका मांझी
- बिरसा मुण्डा
- जतरा भगत
- कान्हू
Explanation:
- उलगुलान आंदोलन (जिसे मुंडा विद्रोह भी कहा जाता है) की शुरुआत बिरसा मुण्डा के नेतृत्व में हुई थी।
- उनके अनुयायी श्रद्धा से “धरती आबा” (जगत पिता) कहकर पुकारते थे।
- समय: यह विद्रोह मुख्य रूप से 1899-1900 के दौरान हुआ था।
- मुख्य रूप से वर्तमान झारखंड के रांची, खूंटी और चक्रधरपुर के आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ था।
वर्ष 1785 में किस क्रांतिकारी नेता को फांसी पर लटका दिया गया था?
- ताना भगत
- तिलका मांझी
- जयपाल सिंह
- बिरसा मुण्डा
Explanation:
- बाबा तिलका माझी (जिन्हें जबरा पहाड़िया के नाम से भी जाना जाता है)।
- विद्रोह का नेतृत्व: उन्होंने वर्ष 1771 से 1784 तक अंग्रेजों के शोषण और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ‘तिलका आंदोलन’ का सफल नेतृत्व किया।
- वर्ष 1784 में उन्होंने अपनी तीर-कमान से भागलपुर के तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर ऑगस्टस क्लीवलैंड को मार गिराया था।
- शहादत: इस घटना के बाद अंग्रेजों ने उन्हें धोखे से पकड़ा और 13 जनवरी 1785 को बिहार के भागलपुर में एक बरगद के पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी।
तिलका मांझी को अंग्रेजों द्वारा किस वर्ष फांसी दी गई थी?
- 1760
- 1765
- 1785
- 1771
Explanation:
- बाबा तिलका माझी (जिन्हें जबरा पहाड़िया के नाम से भी जाना जाता है)।
- विद्रोह का नेतृत्व: उन्होंने वर्ष 1771 से 1784 तक अंग्रेजों के शोषण और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ‘तिलका आंदोलन’ का सफल नेतृत्व किया।
- वर्ष 1784 में उन्होंने अपनी तीर-कमान से भागलपुर के तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर ऑगस्टस क्लीवलैंड को मार गिराया था।
- शहादत: इस घटना के बाद अंग्रेजों ने उन्हें धोखे से पकड़ा और 13 जनवरी 1785 को बिहार के भागलपुर में एक बरगद के पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी।
किस नेता की जन्म तिथि झारखण्ड राज्य के उदय वाली तिथि जो कि 15 नवंबर, 2000 को है, पड़ती है?
- सिद्धू मुर्मू
- जयपाल सिंह मुण्डा
- बिरसा मुण्डा
- ठाकुर अनुकूलचंद्र
Explanation:
- बिरसा मुण्डा (15 नवंबर 1875 – 9 जून 1900) – उन्हें आदिवासी समाज में भगवान की तरह पूजा जाता है और आदर से “धरती आबा” (जगत पिता) कहा जाता है।
- जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातू गाँव में हुआ था।
- उनके पिता का नाम सुगना मुण्डा और माता का नाम करमी हातू था। उनका जन्म गुरुवार को हुआ था, जिसके कारण मुंडा जनजाति की परंपरा के अनुसार उनका नाम ‘बिरसा‘ रखा गया था।
- उलगुलान (मुंडा विद्रोह): उन्होंने वर्ष 1899-1900 के दौरान
- उन्हें गिरफ्तार कर रांची की जेल में बंद कर दिया।
- मात्र 25 वर्ष की कम आयु में 9 जून 1900 को रहस्यमयी परिस्थितियों में जेल में ही उनका निधन हो गया।
‘खेरवार आंदोलन’ का नेतृत्व किसने किया था?
- भागीरथी मांझी
- बुद्ध वीर
- विश्वनाथ शाहदेव
- गणपत राय
Explanation:
- भागीरथी मांझी (जिन्हें ‘बाबा‘ भी कहा जाता है)
- खरवार आंदोलन (1874): भागीरथी मांझी ने वर्ष 1874 में इस आंदोलन की शुरुआत की थी, जो 1874 से 1881 के बीच व्यापक रूप से सक्रिय रहा।
- सफा होर आंदोलन: इस आंदोलन को ‘सफा होर’ (शुद्धिकरण) आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है।
बिरसा मुंडा कौन थे?
- संगीतकार
- कलाकार
- आदिवासी नेता
- लोक नर्तक
Explanation:
- बिरसा मुण्डा (15 नवंबर 1875 – 9 जून 1900) – उन्हें आदिवासी समाज में भगवान की तरह पूजा जाता है और आदर से “धरती आबा” (जगत पिता) कहा जाता है।
- जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातू गाँव में हुआ था।
- उनके पिता का नाम सुगना मुण्डा और माता का नाम करमी हातू था। उनका जन्म गुरुवार को हुआ था, जिसके कारण मुंडा जनजाति की परंपरा के अनुसार उनका नाम ‘बिरसा‘ रखा गया था।
- उलगुलान (मुंडा विद्रोह): उन्होंने वर्ष 1899-1900 के दौरान
- उन्हें गिरफ्तार कर रांची की जेल में बंद कर दिया।
- मात्र 25 वर्ष की कम आयु में 9 जून 1900 को रहस्यमयी परिस्थितियों में जेल में ही उनका निधन हो गया।
अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे लम्बा, वृहत्तम और ‘सबसे खूनी आदिवासी विद्रोह कौन-सा है?
- तमाड़ विद्रोह
- खरवार विद्रोह
- संथाल विद्रोह
- बीरभूम का बांकुड़ा में चुआड़ विद्रोह
Explanation:
- तमाड़ विद्रोह (Tamar Revolt) – कई चरणों में 1782 से 1821 ई. तक चला।
- नेतृत्व: भोलानाथ सिंह, ठाकुर विश्वनाथ सिंह, दुखन मानकी आदि शामिल थे।
- यह छोटानागपुर के उरांव और मुंडा आदिवासियों द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ किया गया सबसे लंबा, सबसे खूनी और सबसे संगठित विद्रोह माना जाता है।
- खरवार विद्रोह (Kherwar Movement)
- 1874 ई. में हुआ।
- नेतृत्व: इसका नेतृत्व भागीरथ मांझी (बाबा) ने किया था।
- कारण: यह एक “सफा होड़” (शुद्धिकरण) आंदोलन के रूप में शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य अपनी प्राचीन संस्कृति को बहाल करना और अंग्रेजों के अनुचित करों (taxes) का विरोध करना था।
- विशेषता: यह एक अहिंसक और सुधारवादी आंदोलन था, जिसमें लोगों को खुद को सुधारने और केवल अपनी चुनी हुई सरकार को टैक्स देने के लिए प्रेरित किया गया था।
- संथाल विद्रोह (Santhal Rebellion / हुल)
- समय: यह 1855-1856 ई. के दौरान हुआ।
- नेतृत्व: इसका नेतृत्व चार भाइयों — सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव ने किया था।
- यह भारत का पहला सुसंगत जनजातीय जनक्रांति आंदोलन था, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी। इसके बाद अंग्रेजों को ‘संथाल परगना’ नाम से एक नया जिला बनाना पड़ा था।
निम्न में से कौन-सा मिलान गलत है?
- 1873-74 – खरवार विद्रोह
- 1820-33 – बीरभूम का भूमिज विद्रोह
- 1832-33 – मानभूम का भूमिज विद्रोह
- 1855-60 – सिद्धू और कान्हू आंदोलन
Explanation:
- 1832-33 का भूमिज विद्रोह
- इसे मुख्य रूप से गंगा नारायण का हंगामा (Ganga Narayan’s Hungama) भी कहा जाता है। यह ब्रिटिश शासन और उनके शोषणकारी जमींदारों के खिलाफ एक बेहद शक्तिशाली और व्यापक जनजातीय आंदोलन था।
ढाल विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1767 ई.
- 1768 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- झारखंड में अंग्रेजों के प्रवेश के विरुद्ध सबसे पहला जनजातीय विद्रोह ‘ढाल विद्रोह’ वर्ष 1767 ई. में सिंहभूम क्षेत्र में शुरू हुआ था, जिसका नेतृत्व जगन्नाथ ढाल ने किया था।
चुआर विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1767 ई.
- 1769 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- अंग्रेजी हुक्मरी और शोषण के खिलाफ जंगल महल के स्थानीय आदिवासियों (जिन्हें अंग्रेज ‘चुआर’ कहते थे) द्वारा ‘चुआर विद्रोह’ की शुरुआत वर्ष 1769 ई. में हुई थी।
चेरो विद्रोह प्रथम चरण कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1767 ई.
- 1769 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- पलामू क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध ‘चेरो विद्रोह’ का प्रथम चरण वर्ष 1770 ई. में प्रारंभ हुआ था, जिसमें चित्रजित राय और जयनाथ सिंह ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
चेरो विद्रोह द्वितीय चरण कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1800 ई. [नोट: मानक इतिहास के अनुसार द्वितीय चरण 1800-1810 ई. में था, यहाँ विकल्पों के अनुरूप 1800 ई. सही है]
- 1769 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- पलामू में भू-राजस्व नीतियों और हस्तक्षेप के विरोध में चेरो विद्रोह का दूसरा चरण वर्ष 1800 ई. में शुरू हुआ था जिसका नेतृत्व भुखन सिंह ने किया था।
भोगता विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1780 ई.
- 1769 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- पलामू क्षेत्र में चेरो विद्रोह के समकालीन ही जयनाथ सिंह भोगता के नेतृत्व में ‘भोगता विद्रोह’ की शुरुआत वर्ष 1770 ई. में हुई थी।
हो विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1820 ई.
- 1769 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- कोल्हान क्षेत्र के हो जनजाति के लोगों द्वारा ब्रिटिश आधिपत्य के विरुद्ध ‘हो विद्रोह’ वर्ष 1820 ई. में प्रारंभ किया गया था।
घटवाल विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1820 ई.
- 1772 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- रामगढ़ और उसके आसपास के घटवालों (घटवाल सरदारों) द्वारा अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध ‘घटवाल विद्रोह’ वर्ष 1772 ई. में शुरू हुआ था।
पहाड़िया विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1820 ई.
- 1772 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- संथाल परगना के राजमहल पहाड़ियों में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के खिलाफ सौंरिया पहाड़िया जनजाति द्वारा ‘पहाड़िया विद्रोह’ वर्ष 1772 ई. में शुरू किया गया था।
तिलका आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1783 ई.
- 1772 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- प्रथम क्रांतिकारी आदिवासी नेता तिलका मांझी के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध ‘तिलका आंदोलन’ (जिसे संथाल परगना में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष माना जाता है) मुख्य रूप से वर्ष 1783-84 ई. में व्यापक रूप से उभरा था।
तमाड़ विद्रोह का प्रथम चरण कब शुरू हुआ था?
- 1765 ई.
- 1782 ई.
- 1772 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- छोटानागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों और जागीरदारों की नीतियों के विरुद्ध उरांव एवं अन्य आदिवासियों द्वारा ‘तमाड़ विद्रोह’ का प्रथम चरण वर्ष 1782 ई. में शुरू हुआ था, जिसका नेतृत्व भोलानाथ सिंह ने किया था।
तमाड़ विद्रोह का दूसरा चरण कब शुरू हुआ था?
- 1789 ई.
- 1782 ई.
- 1772 ई.
- 1770 ई.
Explanation:
- विष्णु मानकी और मौदरा मानकी के नेतृत्व में तमाड़ विद्रोह का दूसरा चरण वर्ष 1789 ई. में प्रारंभ हुआ था।
तमाड़ विद्रोह का तीसरा चरण कब शुरू हुआ था?
- 1789 ई.
- 1782 ई.
- 1772 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- तमाड़ क्षेत्र में असंतोष के चलते विद्रोह का तीसरा चरण वर्ष 1794 ई. में विष्णु मानकी के नेतृत्व में पुनः भड़का था।
तमाड़ विद्रोह का चौथा चरण कब शुरू हुआ था?
- 1789 ई.
- 1782 ई.
- 1807 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- दुखन मानकी के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध तमाड़ विद्रोह का चौथा चरण वर्ष 1807 ई. में शुरू किया गया था।
तमाड़ विद्रोह का पांचवा चरण कब शुरू हुआ था?
- 1789 ई.
- 1810 ई.
- 1807 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- बक्तर साय और मुण्डू सिंह के नेतृत्व में तमाड़ विद्रोह का पांचवा चरण वर्ष 1810 ई. में संचालित हुआ था।
तमाड़ विद्रोह का अंतिम व छठा चरण कब शुरू हुआ था?
- 1819 ई.
- 1810 ई.
- 1807 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- रुदन सिंह और कुंटा मुण्डा के नेतृत्व में तमाड़ विद्रोह का अंतिम एवं छठा चरण वर्ष 1819-20 ई. में शुरू हुआ था।
कोल विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1819 ई.
- 1831 ई.
- 1807 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- झारखंड के इतिहास का एक प्रमुख संगठित जनजातीय आंदोलन ‘कोल विद्रोह’ बुद्धु भगत और सिंहराय मानकी के नेतृत्व में 1831 ई. में शुरू हुआ था।
भूमिज विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 1819 ई.
- 1831 ई.
- 1832 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- वीर शहीद गंगा नारायण सिंह के नेतृत्व में धालभूम और सिंहभूम क्षेत्र में ‘भूमिज विद्रोह’ (जिसे अंग्रेजों ने ‘गंगा नारायण का हंगामा’ भी कहा) वर्ष 1832 ई. में शुरू हुआ था।
संथाल विद्रोह कब शुरू हुआ था?
- 30 जून, 1855 ई.
- 30 जून 1831 ई.
- 30 जून 1832 ई.
- 30 जून 1794 ई.
Explanation:
- सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में हूल (क्रांति) के रूप में प्रसिद्ध ‘संथाल विद्रोह’ की ऐतिहासिक शुरुआत 30 जून, 1855 ई. को भोगनाडीह गाँव से हुई थी।
सरदारी आंदोलन का प्रथम चरण कब शुरू हुआ था?
- 1858-81 ई.
- 1782 – 90 ई.
- 1890-95
- 1881-90 ई.
Explanation:
- छोटानागपुर क्षेत्र में अपनी खोई हुई जमीन और अधिकारों को वापस पाने के लिए शुरू हुए ‘सरदारी आंदोलन’ (मुलुकी लड़ाई) का प्रथम चरण 1858-81 ई. के दौरान संचालित हुआ था।
सरदारी आंदोलन का द्वितीय चरण कब शुरू हुआ था?
- 1858-81 ई.
- 1782 – 90 ई.
- 1890-95
- 1881-90 ई.
Explanation:
- भूमि सुधार और कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर सरदार आंदोलन का दूसरा चरण 1881-90 ई. के बीच अपने उग्र रूप में आगे बढ़ा था।
सरदारी आंदोलन का तीसरा चरण कब शुरू हुआ था?
- 1858-81 ई.
- 1782 – 90 ई.
- 1890-95 ई.
- 1881-90 ई.
Explanation:
- सरदारी आंदोलन का तीसरा और अंतिम चरण 1890-95 ई. के मध्य चला, जिसके बाद यह आंदोलन आगे चलकर बिरसा मुंडा के नेतृत्व में स्थापित मुंडा उग्र आंदोलन में समाहित हो गया।
सफाहोड़ आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1855 ई.
- 1831 ई.
- 1870 ई.
- 1794 ई.
Explanation:
- लाल बाबा (लाल हेम्ब्रम) के नेतृत्व में संथाल समाज में धार्मिक शुद्धता और सामाजिक सुधार लाने के उद्देश्य से ‘सफाहोड़ आंदोलन’ की शुरुआत लगभग 1870 ई. में हुई थी।
खरवार आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1855 ई.
- 1831 ई.
- 1870 ई.
- 1874 ई.
Explanation:
- भागीरथ मांझी (बाबा) के नेतृत्व में संथाल परगना क्षेत्र में एकेश्वरवाद और सामाजिक सुधार पर जोर देने वाला ‘खरवार आंदोलन’ वर्ष 1874 ई. में शुरू हुआ था।
बिरसा आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1895 ई.
- 1831 ई.
- 1870 ई.
- 1874 ई.
Explanation:
- भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में ‘उल्गुलान’ (महाविद्रोह) के रूप में प्रसिद्ध ‘बिरसा आंदोलन’ की औपचारिक शुरुआत वर्ष 1895 ई. में हुई थी।
ताना/टाना भगत आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1931 ई.
- 1831 ई.
- 1914 ई.
- 1874 ई.
Explanation:
- जत्रा भगत के नेतृत्व में उरांव आदिवासियों के बीच अहिंसक तरीके से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सुधारों के लिए ‘ताना भगत आंदोलन’ की शुरुआत अप्रैल 1914 ई. में हुई थी।
हरिबाबा आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1931 ई.
- 1831 ई.
- 1914 ई.
- 1874 ई.
Explanation:
- सिंहभूम और कोल्हान क्षेत्र में धार्मिक सुधार और स्वदेशी अपनाने से जुड़ा ‘हरिबाबा आंदोलन’ वर्ष 1931 ई. में शुरू हुआ था।
हरिबाबा आंदोलन किस व्यक्ति के नेतृत्व में शुरू एवं प्रसिद्ध हुआ था?
- जगन्नाथ ढाल
- रघुनाथ महतो
- गोपाल राय
- दुका हो
Explanation:
- हरिबाबा आंदोलन मुख्य रूप से दुका हो (जिन्हें ‘हरिबाबा’ के नाम से भी जाना जाता है) के नेतृत्व में सिम्भगूम क्षेत्र में लोकप्रिय हुआ था।
ढाल विद्रोह किस व्यक्ति के नेतृत्व में शुरू एवं प्रसिद्ध हुआ था?
- जगन्नाथ ढाल
- रघुनाथ महतो
- गोपाल राय
- दुका हो
Explanation:
- धालभूम की जनता द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किया गया ढाल विद्रोह जगन्नाथ ढाल के नेतृत्व में संचालित हुआ था।
चुआर विद्रोह किस व्यक्ति के नेतृत्व में शुरू एवं प्रसिद्ध हुआ था?
- जगन्नाथ ढाल
- रघुनाथ महतो
- गोपाल राय
- दुका हो
Explanation:
- जंगल महल क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध हुंकार भरने वाले चुआर विद्रोह के प्रमुख आरंभिक नेताओं में रघुनाथ महतो का नाम सर्वोपरि है (“लौटे अंग्रेजी, भगाओ विदेशी” उनका प्रसिद्ध नारा था)।
चेरो विद्रोह का प्रथम चरण किस व्यक्ति के नेतृत्व में शुरू एवं प्रसिद्ध हुआ था?
- जगन्नाथ ढाल
- रघुनाथ महतो
- चित्रजीत राय
- दुका हो
Explanation:
- पलामू में अंग्रेजों की दखलअंदाजी के खिलाफ हुए चेरो विद्रोह के प्रथम चरण (1770 ई.) की शुरुआत एवं इसका नेतृत्व राजा चित्रजीत राय (और उनके दीवान जयनाथ सिंह) ने किया था।
चेरो विद्रोह का द्वितीय चरण किस व्यक्ति के नेतृत्व में शुरू एवं प्रसिद्ध हुआ था?
- जगन्नाथ ढाल
- भूखन सिंह
- चित्रजीत राय
- दुका हो
Explanation:
- वर्ष 1800 ई. में शुरू हुए चेरो विद्रोह के दूसरे चरण का प्रमुख नेतृत्वकर्ता भूखन सिंह था, जिसे बाद में अंग्रेजों द्वारा फांसी दे दी गई थी।
झारखंड में भागीरथ मांझी, दुबई गोसाईं और पटेल सिंह के नेतृत्व में खरवार विद्रोह कब हुआ? [नोट: वैकल्पिक शुद्धता के अनुसार]
- 1862-63
- 1842-43
- 1852-53
- 1832-33
Explanation:
- झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले मानक प्रश्नों के अंतर्गत भागीरथ मांझी एवं सहयोगियों से जुड़े आंदोलनों के चरण को इसी समयावधि के तहत दर्शाया जाता है।
झारखंड के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्म कब हुआ था?
- 15 नवंबर, 1765
- 15 नवंबर, 1775
- 15 नवंबर, 1875
- 15 नवंबर, 1865
Explanation:
- धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलिहातू (खूंटी) गाँव में हुआ था, जिनकी जयंती पर झारखंड राज्य का गठन हुआ तथा इस तिथि को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
बंगम मांझी नेता थे:
- हरिबाबा आंदोलन
- सत्यधर्म आंदोलन
- सफाहोड़ आंदोलन
- सरदार आंदोलन
Explanation:
- बंगम मांझी और पैगला बाबा सफाहोड़ आंदोलन से जुड़े प्रमुख धार्मिक व सामाजिक सुधारक नेता थे जिन्होंने संथाल समाज को संगठित किया।
टाना भगत आंदोलन की शुरुआत किसने किया था?
- जतरा उराँव
- शिबू उराँव
- ठेबले उराँव
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- अहिंसक सत्याग्रह के रूप में विख्यात ताना भगत आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1914 में गुमला जिले के विशनपुर प्रखंड के चिंगरी गाँव के निवासी जतरा उराँव (जतरा भगत) ने की थी।
नीलांबर और पीतांबर शाह नामक दोनों भाई जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी, निम्न के नेता थे:
- संथाल जनजाति
- खरवार जनजाति
- भोगता / चेरो जनजाति
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- 1857 के महान विद्रोह के दौरान पलामू क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने वाले अमर शहीद भाई नीलांबर और पीतांबर भोगता (खरवार/चेरो राजवंश से जुड़े उपसमूह) समुदाय के महान स्वतंत्रता सेनानी थे।
सरदारी आंदोलन निम्न कारण से हुआ था:
- I. ईसाई धर्मांतरण तथा संसारी उराँव द्वारा आर्थिक असमानता
- II. बेगारी (बलात् श्रम) लागू किए जाने के विरुद्ध कृषिक असंतोष
- III. बिचौलियों द्वारा गैर-कानूनी ढंग से किराये में वृद्धि
- IV. दोनों II एवं III
Explanation:
- सरदारी आंदोलन (मुलुकी लड़ाई) मुख्य रूप से आदिवासियों पर लादी गई बेगारी प्रथा (बलात् श्रम) और जमींदारों/दिकुओं द्वारा लगान व किराये में गैर-कानूनी वृद्धि के विरोध में उपजा था।
ताना भगत आंदोलन कब शुरू हुआ था?
- 1905
- 1914
- 1767
- 1850
Explanation:
- ब्रिटिश हुकूमत, बिचौलियों और जमींदारी प्रथा के शोषण के विरुद्ध ताना भगत आंदोलन की आधिकारिक शुरुआत वर्ष 1914 में हुई थी।
पहला जनजातीय नेता, जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठाया था, थे:
- बिरसा मुण्डा
- बुद्ध भगत
- तिलका मांझी
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- ब्रिटिश सत्ता एवं उनकी दमनकारी नीतियों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले और अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाने वाले प्रथम आदिवासी जननायक तिलका मांझी (जबरा पहाड़िया) थे।
झारखंड का पहला चुआर विद्रोह कब हुआ था?
- 1798
- 1978
- 1777
- 1769
Explanation:
- जंगल महल के भू-विस्थापित और अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों से त्रस्त आदिवासियों (जिन्हें अंग्रेज ‘चुआर’ कहते थे) द्वारा पहला ‘चुआर विद्रोह’ वर्ष 1769 में शुरू हुआ था।
किस नेता को ब्रिटिश बलों द्वारा बंदी बनाया गया था और ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के अभिलेखों के अनुसार रांची जेल में हैजे के कारण 9 जून, 1900 को उसकी मृत्यु होना घोषित कर दिया गया था?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- गंगा नारायण
Explanation:
- धरती आबा बिरसा मुंडा को चक्रधरपुर के जामकोइया जंगल से गिरफ्तार कर रांची जेल में रखा गया था, जहाँ ब्रिटिश रिकॉर्ड के अनुसार 9 जून 1900 को रहस्यमयी परिस्थितियों/हैजे से उनकी मृत्यु होना बताया गया था।
किसके नेतृत्व में 1780-85 के दौरान संचालित जनजातीय विद्रोह ने भागलपुर में ब्रिटिश सेना प्रमुख को चोटिल करने और उसे फांसी देने में सफलता प्राप्त कर ली थी?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- तिलका मांझी ने 1780-85 के दौरान संताल परगना क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था और भागलपुर के कलेक्टर/सेना प्रमुख ऑगस्ट्स क्लीवलैंड को अपनी तीर-धनुष से घायल कर दिया था।
निम्नलिखित में से कौन-सा आंदोलन अपने शुरुआती चरण में कुरुख धर्म के नाम से जाना गया था (यथा शब्द कुरुख या उरांव का मूल धर्म)?
- खरवार आंदोलन
- उलगुलान
- तमाड़ विद्रोह
- ताना भगत आंदोलन
Explanation:
- जत्रा भगत के नेतृत्व में शुरू हुआ ताना भगत आंदोलन अपने शुरुआती दौर में उरांव जनजाति के पारंपरिक ‘कुरुख धर्म’ और सामाजिक शुचिता की वापसी पर आधारित था।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बिरसा मुंडा के संबंध में गलत है?
- बिरसा मुण्डा ने सोनोत संथाल समाज की स्थापना की।
- उन्होंने वन और भूमि पर आदिवासी प्राकृतिक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी।
- वे ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा पकड़े गए और जेल में उनकी मृत्यु हो गयी।
- उन्होंने जमींदारी और साहूकारों द्वारा मूल निवासियों के शोषण के खिलाफ प्रारंभिक बगावत में से सबसे महत्वपूर्ण बगावत का नेतृत्व किया।
Explanation:
- यह कथन गलत है क्योंकि ‘सोनोत संथाल समाज’ की स्थापना शिबू सोरेन ने की थी, जबकि बिरसा मुंडा का संबंध मुंडा उलगुलान (महाविद्रोह) से था।
बिरसा के नेतृत्व में शुरू ‘उलगुलान’ का क्या मतलब है?
- काश्तकारी अधिनियम
- अनुयायी
- वन
- विद्रोह
Explanation:
- मुंडारी भाषा में ‘उलगुलान’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘महान हलचल’ या ‘विद्रोह’ होता है, जो भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता और दिकुओं के खिलाफ हुए आंदोलन के लिए प्रयुक्त हुआ था।
निम्न में से कौन-सा एक तिलका मांझी के संदर्भ में गलत है?
- तिलका मांझी ने 1780-85 में आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना प्रमुख को घायल करने में कामयाब हुए।
- तिलका मांझी को भागलपुर में मृत्यु के लिए फांसी पर लटका दिया गया था।
- तिलका मांझी ने रामगढ़ की पहाड़ियों में गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया था।
- 1991 में भागलपुर विश्वविद्यालय को तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के रूप में पुनः नामकरण किया गया था।
Explanation:
- यह कथन गलत है क्योंकि तिलका मांझी ने रामगढ़ की पहाड़ियों में नहीं बल्कि भागलपुर की सुल्तानगंज की पहाड़ियों (या राजमहल की पहाड़ियों) में गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया था।
निम्न में से कौन खरवार विद्रोह के नेताओं में से एक हैं?
- विष्णु मानकी
- भागीरथ मांझी
- दुक्कन मानकी
- भूखन सिंह
Explanation:
- संथाल परगना क्षेत्र में 1874 ई. में हुए ‘खरवार आंदोलन’ के प्रमुख एवं सबसे लोकप्रिय प्रवर्तक व नेता भागीरथ मांझी थे, जिन्हें लोग ‘बाबा’ कहकर पुकारते थे।
झारखण्ड का वह एकमात्र आदिवासी नेता कौन है, जिसका चित्र संसद के सेंट्रल हॉल में लगा हुआ है?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- भगवान बिरसा मुण्डा झारखंड के एकमात्र ऐसे महान आदिवासी जननायक और स्वतंत्रता सेनानी हैं, जिनका तैल चित्र भारतीय संसद के सेंट्रल हॉल में सुशोभित है।
निम्नलिखित में से किस स्वतंत्रता सेनानी की 25 वर्ष की आयु में रांची के जेल में निधन हो गया था?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- अल्पायु में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी संघर्ष का नेतृत्व करने वाले धरती आबा बिरसा मुण्डा का निधन मात्र 25 वर्ष की उम्र में रांची जेल में हो गया था।
किस नेता को ब्रिटिश बलों द्वारा बंदी बनाया गया था और ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के अभिलेखों के अनुसार रांची जेल में हैजे के कारण 9 जून, 1900 को उसकी मृत्यु होना घोषित कर दिया गया था?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- चक्रधरपुर से गिरफ्तार किए जाने के बाद बिरसा मुण्डा को रांची जेल में रखा गया था, जहाँ ब्रिटिश रिकॉर्ड के अनुसार 9 जून 1900 को उनकी संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत्यु होना दर्शाया गया।
15 नवम्बर, 2000 को किसकी जयंती पर झारखण्ड का गठन एक पृथक राज्य के रूप में किया गया था?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- झारखंड राज्य के स्थापना दिवस (15 नवंबर 2000) को ऐतिहासिक रूप से भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर ही चुना गया था, जिन्हें उनकी शहादत और योगदान के लिए राज्य में सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है।
बिरसा मुण्डा कौन थे?
- संगीतकार
- पेंटर
- आदिवासी नेता
- लोक नर्तक
Explanation:
- बिरसा मुण्डा एक महान क्रांतिकारी आदिवासी नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद और स्थानीय महाजनों/दिकुओं के शोषण के विरुद्ध मुंडा उलगुलान (महाविद्रोह) का सफल नेतृत्व किया था।
व्यक्तित्व को पहचानें। .
– उनके अनुयायियों ने उसे भगवान माना।
– एक राजनीतिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ उन्होंने लोगों के धार्मिक विश्वासों में बड़े बदलाव किए।
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- भगवान बिरसा मुण्डा को उनके अनुयायी ‘धरती आबा’ और भगवान का अवतार मानते थे। उन्होंने अंधविश्वासों, पशुबलि और रूढ़ियों को दूर करते हुए समाज में धार्मिक व नैतिक सुधार किए तथा राजनीतिक रूप से ‘उलगुलान’ का नेतृत्व किया।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बिरसा मुंडा के संबंध में गलत है?
- बिरसा मुंडा ने सोनोत संथाल समाज की स्थापना की
- उन्होंने वन और भूमि पर आदिवासी प्राकृतिक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी।
- वे ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा पकड़े गए और जेल में उनकी मृत्यु हो गयी।
- उन्होंने जमींदारी और साहूकारों द्वारा मूल निवासियों के शोषण के खिलाफ प्रारंभिक बगावत में से सबसे महत्वपूर्ण बगावत का नेतृत्व किया।
Explanation:
- यह कथन गलत है क्योंकि ‘सोनोत संथाल समाज’ की स्थापना शिबू सोरेन ने की थी, जबकि बिरसा मुंडा का संबंध मुंडा उलगुलान से है। शेष सभी कथन उनके जीवन और संघर्ष के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं।
निम्नलिखित में से किसे भगवान का दर्जा दिया गया था, जो आदिवासी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़े थे?
- भागीरथ मांझी
- ताना भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा तथा ब्रिटिश एवं दिकुओं के शोषण के विरुद्ध ऐतिहासिक संघर्ष करने वाले बिरसा मुण्डा को आदिवासी समाज में भगवान (धरती आबा) का दर्जा प्राप्त है।
आदिवासी लोगों के बीच ‘बिरसा मुंडा’ निम्नलिखित में से किस नाम से जाने जाते थे? ,
- झारखंड जनक (झारखंड आबा)
- विद्रोह जनक (विद्रोह आबा)
- भू पिता (धरती आबा)
- राष्ट्र पिता (राष्ट्र आबा)
Explanation:
- आदिवासियों और मुंडा समाज के बीच भगवान बिरसा मुंडा को आदरपूर्वक ‘धरती आबा’ (अर्थात पृथ्वी के पिता / भू पिता) के नाम से पुकारा जाता है।
बिरसा मुण्डा की जन्म जयंती कौन-सी है?
- 15 अप्रैल
- 15 नवंबर
- 15 जुलाई
- 15 अगस्त
Explanation:
- भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर को हुआ था। उनके इसी जन्म दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष 15 नवंबर को झारखंड राज्य का स्थापना दिवस तथा राष्ट्रीय स्तर पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया जाता है।
बिरसा मुंडा का जन्म कहाँ हुआ था?
- उलिहातू
- कसमार
- बगोदर
- जरी गाँव
Explanation:
- भगवान बिरसा मुंडा का जन्म तत्कालीन रांची जिले (वर्तमान में खूंटी जिले) के अड़की प्रखण्ड के उलिहातू गाँव में हुआ था।
बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था:
- 10 अक्टूबर, 1854
- 15 सितम्बर, 1860
- 15 नवम्बर, 1875
- 15 दिसम्बर, 1890
Explanation:
- महान जननायक बिरसा मुंडा का जन्म गुरुवार, 15 नवंबर 1875 को सुगना मुंडा और कलि मुंडा के घर उलिहातू में हुआ था।
छोटानागपुर क्षेत्र के प्रथम क्रांतिकारी कौन थे, जो अंग्रेजों से संघर्ष करते वक्त वीरगति को प्राप्त हुए थे?
- भागीरथ मांझी
- बुधु भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- कोल विद्रोह (1831-32) के महान नायक बुधु भगत छोटानागपुर क्षेत्र के वे प्रमुख क्रांतिकारी थे, जो ब्रिटिश सेना के साथ मुठभेड़ करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों में प्रथम शहीद होने का गौरव किस सेनानी को प्राप्त है?
- भागीरथ मांझी
- बुधु भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का शंखनाद करने वाले और भागलपुर में अंग्रेजों द्वारा सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटकाए जाने वाले तिलका मांझी झारखंड के स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद हैं।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले विद्रोही शहीद कौन थे?
- भागीरथ मांझी
- बुधु भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- ब्रिटिश औपनिवेशिक हुकूमत के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति देने वाले और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सर्वोच्च बलिदान देने वाले पहले विद्रोही शहीद तिलका मांझी (जबरा पहाड़िया) थे।
आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था, जिसने स्वतंत्रता के पूर्व ब्रिटिश आर्मी चीफ को घायल करने में सफल हुआ था?
- भागीरथ मांझी
- बुधु भगत
- बिरसा मुण्डा
- तिलका मांझी
Explanation:
- संताल परगना क्षेत्र में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले जननायक तिलका मांझी (जबरा पहाड़िया) ने अपने तीर-धनुष से भागलपुर के ब्रिटिश कलेक्टर एवं सेना प्रमुख ऑगस्ट्स क्लीवलैंड को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक तिलका मांझी के संदर्भ में गलत है?
- तिलका मांझी ने 1780-85 में आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना प्रमुख को घायल करने में कामयाब हुए।
- तिलका मांझी को भागलपुर में मृत्यु के लिए फांसी पर लटका दिया गया था।
- तिलका मांझी ने रामगढ़ की पहाड़ियों में गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया था।
- 1991 में भागलपुर विश्वविद्यालय को तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के रूप में पुनः नामकरण किया गया था।
Explanation:
- यह कथन असत्य है क्योंकि तिलका मांझी ने रामगढ़ की पहाड़ियों में नहीं बल्कि भागलपुर की सुल्तानगंज / राजमहल की पहाड़ियों में अंग्रेजों के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया था।
जतरा भगत, छोटानागपुर के किस आंदोलन के संस्थापक थे?
- असहयोग आंदोलन
- चिपको आंदोलन
- खिलाफत आंदोलन
- ताना भगत आंदोलन
Explanation:
- गुमला जिले के जतरा उराँव (जतरा भगत) ने वर्ष 1914 में उरांव आदिवासियों के बीच सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक सुधार हेतु ताना भगत आंदोलन की स्थापना एवं शुरुआत की थी।
जतरा भगत, माया और देबिया 1913-14 के निम्न में से किस आंदोलन के नेता थे?
- मुंडा आंदोलन
- चिपको आंदोलन
- सरदार आंदोलन
- ताना भगत आंदोलन
Explanation:
- जतरा भगत के साथ-साथ माया, देबिया आदि प्रमुख अनुयायी वर्ष 1913-14 के दौरान ताना भगत आंदोलन के मुख्य प्रेरक एवं संचालक नेता थे।
1920 के दशक में आदिवासियों का कौन-सा आंदोलन गांधीजी के सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ गया था?
- मुंडा आंदोलन
- संथाल आंदोलन
- सरदार आंदोलन
- ताना भगत आंदोलन
Explanation:
- ताना भगत आंदोलन से जुड़े आदिवासी अपनी अहिंसक विचारधारा, सत्य और स्वदेशी के सिद्धांतों के कारण महात्मा गांधी के असहयोग व सत्याग्रह आंदोलन से सबसे पहले और सक्रिय रूप से जुड़ गए थे।
सन् 1914 में कौन-सा आंदोलन हुआ?
- मुंडा आंदोलन
- संथाल आंदोलन
- खेरवार आंदोलन
- ताना भगत आंदोलन
Explanation:
- ब्रिटिश लगान नीति, चौकीदारी कर और अंधविश्वासों के खिलाफ वर्ष 1914 के अप्रैल माह में ‘ताना भगत आंदोलन’ का सूत्रपात हुआ था।
झारखंड के इतिहास के किस अभियान या आंदोलन में जर्मन बाबा के गीत गाकर उनके समर्थक उनका आह्वान करते थे?
- ताना भगत आंदोलन
- संथाल आंदोलन
- खेरवार आंदोलन
- भारत छोड़ो आंदोलन
Explanation:
- ताना भगत आंदोलन के अनुयायी अपने धार्मिक व सामाजिक सुधार के दौर में ‘जर्मन बाबा’ (न्याय और सत्य के प्रतीक दैवीय शक्ति) के गीत गाकर उनका आह्वान किया करते थे।
वर्ष 1914 में जतरा उराँव द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को ……… कहा जाता है।
- A. ताना भगत आंदोलन
- B. बिरसा का धार्मिक आंदोलन
- C. A और B दोनों
- D. खरवार आंदोलन
Explanation:
- वर्ष 1914 में जतरा उराँव (जतरा भगत) द्वारा प्रारंभ किए गए ऐतिहासिक जनजातीय सुधार आंदोलन को ताना भगत आंदोलन के नाम से जाना जाता है।
रांची जिला ताना भगत पुनर्वास अध्यादेश किस साल पारित किया गया था?
- 1857
- 1948
- 1999
- 1977
Explanation:
- स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ताना भगतों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उनकी जप्त जमीनों व अधिकारों को वापस दिलाने के लिए ‘रांची जिला ताना भगत पुनर्वास अध्यादेश’ वर्ष 1948 में पारित किया गया था।
राँची जिले का ताना भगत रैयत कृषि भूमि मरम्मत अधिनियम’ बिहार राजपत्र में कब प्रकाशित हुआ था?
- 1857
- 1948
- 1908
- 1977
Explanation:
- ताना भगतों की समस्याओं के समाधान और उनकी जमीनों की वापसी के लिए यह अधिनियम वर्ष 1948 में बिहार राजपत्र में आधिकारिक तौर पर प्रकाशित किया गया था।
टाना भगत आन्दोलन की शुरुआत कब हुई थी?
- अप्रैल 1912
- अप्रैल 1913
- अप्रैल 1914
- अप्रैल 1915
Explanation:
- जतरा उरांव (जतरा भगत) के नेतृत्व में ताना भगत आंदोलन की शुरुआत औपचारिक रूप से अप्रैल 1914 में हुई थी।
ताना भगत आंदोलन कब हुआ था?
- 1913-14
- 1931-32
- 1921-22
- 1922-23
Explanation:
- इस ऐतिहासिक जनजातीय व सुधारवादी आंदोलन का मुख्य उदय और प्रसार काल 1913-14 के दौरान माना जाता है।
1914 में किसने ताना भगत आंदोलन शुरू किया, जिसमें 25,000 से अधिक आदिवासी लोगों की हिस्सेदारी हुई थी? ,
- बिरसा मुंडा
- सिदो मुर्मू
- जतरा उरांव
- तिलका मांझी
Explanation:
- इस जन-आंदोलन के संस्थापक जतरा उरांव (जतरा भगत) थे, जिनके आह्वान पर हजारों उरांव आदिवासी अंग्रेजों और बिचौलियों के विरुद्ध एकजुट हुए थे।
ताना भगत आंदोलन में इनमें से कौन-सी जनजाति की भागीदारी थी?
- मुण्डा
- खड़िया
- संथाल
- उराँव
Explanation:
- ताना भगत आंदोलन मुख्य रूप से उरांव जनजाति के लोगों द्वारा धार्मिक शुचिता, सामाजिक सुधार और ब्रिटिश लगान नीतियों के विरोध में चलाया गया था।
30 नवंबर, 1897 ई. को सजा की अवधि की समाप्ति के पूर्व बिरसा मुण्डा को जेल से क्यों रिहा किया गया था?
- उनकी सेहत खराब थी।
- साम्राज्ञी विक्टोरिया की हीरक जयंती थी।
- सरकार पर लोगों का दबाव
- ईसाई मिशनरियों द्वारा उनकी तरफ से दया याचिका दाखिल किया जाना।
Explanation:
- ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया की हीरक जयंती (Diamond Jubilee) के अवसर पर राज्याधिकार के तहत सामान्य क्षमादान के तहत बिरसा मुंडा को हजारीबाग जेल से समय से पूर्व रिहा किया गया था।
निम्नलिखित बयानों पर विचार कर सही वक्तव्य चुनें:
पहला – बिरसा मुंडा 1895 से 1900 तक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में गहराई से जुड़े थे।
दूसरा – हजारीबाग जेल में उन्हें कैद कर दिया गया था। दो साल बाद उनकी मृत्यु हो गई।
- केवल पहला
- केवल द्वितीय
- प्रथम और द्वितीय
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- पहला कथन सत्य है क्योंकि बिरसा मुंडा ने 1895 से 1900 के बीच उलगुलान का नेतृत्व किया; दूसरा कथन आंशिक रूप से भिन्न है क्योंकि उनकी मृत्यु रांची जेल में हुई थी, अतः केवल पहला विकल्प सही है।
महाश्वेता देवी की ऐतिहासिक कथा “अरण्येर अधिकार” ———- पर आधारित है।
- मुंडा विद्रोह
- झारखंड संस्कृति
- जनजातियों के अधिकार
- असुर विद्रोह
Explanation:
- प्रसिद्ध साहित्यकार महाश्वेता देवी का उपन्यास “अरण्येर अधिकार” (जंगल का अधिकार) भगवान बिरसा मुंडा और उनके द्वारा संचालित मुंडा विद्रोह (उलगुलान) के ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित है।
उलगुलान निम्नलिखित में से किसके साथ जुड़ा हुआ है?
- संथाल
- कच नागा
- काल
- बिरसा मुंडा
Explanation:
- ‘उलगुलान’ (महान विद्रोह या हलचल) ऐतिहासिक रूप से बिरसा मुंडा के नेतृत्व में चलाए गए आदिवासी महाविद्रोह से जुड़ा हुआ है।
निम्नलिखित में से कौन उलगुलान विद्रोह से जुड़ा है?
- कान्हू मुर्मू
- सिद्धू मुर्मू
- देवेन्द्र प्रसाद गुप्ता
- बिरसा मुंडा
Explanation:
- ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ (महाविद्रोह) का सीधा संबंध भगवान बिरसा मुंडा से है, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य और शोषण के खिलाफ मुंडा समाज का नेतृत्व किया था।
ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ किसके नेतृत्व में ‘उलगुलान आंदोलन’ शुरू किया गया?
- कान्हू मुर्मू
- सिद्धू मुर्मू
- तिलका माँझी
- बिरसा मुंडा
Explanation:
- ब्रिटिश उपनिवेशवाद, दिकुओं और जमींदारों की शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध बिरसा मुंडा के नेतृत्व में ‘उलगुलान आंदोलन’ की शुरुआत की गई थी।
किस स्वतंत्रता सेनानी को अंग्रेजों ने 3 मार्च सन् 1900 ई० को चक्रधरपुर के जमकोपाई (जामकोइया) जंगल में सोते हुए गिरफ्तार किया था?
- कान्हू मुर्मू
- सिद्धू मुर्मू
- तिलका माँझी
- बिरसा मुंडा
Explanation:
- क्रांतिकारी जननायक बिरसा मुंडा को ब्रिटिश सैनिकों द्वारा 3 मार्च 1900 को चक्रधरपुर के जमकोपाई जंगल में सोते समय गिरफ्तार कर लिया गया था।
इनमें से कौन-सा विद्रोह 1895 में झारखंड में फूटा था?
- संथाल विद्रोह
- बिरसा मुंडा विद्रोह
- तिलका मांझी
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- वर्ष 1895 में भगवान बिरसा मुंडा के धार्मिक सुधार और राजनीतिक आह्वान के साथ झारखंड में बिरसा मुंडा विद्रोह की नींव पड़ी थी।
झारखंड में बिरसाइत संप्रदाय किसके द्वारा शुरू किया गया था? / किस नेता ने एक नया संप्रदाय शुरू किया जो केवल एक ईश्वर पर विश्वास करता था?
- जतरा भगत
- सिद्धू मुर्मू
- तिलका माँझी
- बिरसा मुंडा
Explanation:
- समाज सुधार और एकेश्वरवाद (सिंगबोंगा की आराधना) पर बल देते हुए ‘बिरसाइत संप्रदाय’ की शुरुआत बिरसा मुंडा द्वारा की गई थी।
किसने घोषणा की “अबुआ राज एटेजना, महारानी राज टुंडू” (अर्थात् अब मुंडा राज शुरू हो गया है और रानी विक्टोरिया राज समाप्त हो गया है)?
- जतरा भगत
- सिद्धू मुर्मू
- तिलका माँझी
- बिरसा मुंडा
Explanation:
- यह प्रसिद्ध घोषणा ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देते हुए बिरसा मुंडा और उनके अनुयायियों द्वारा उलगुलान के दौरान की गई थी।
बिरसा मुंडा वर्ष ……… के दौरान सक्रिय थे।
- 1800-1820
- 1900-1915
- 1875-1900
- 1935-1945
Explanation:
- भगवान बिरसा मुंडा का जीवनकाल और उनका क्रांतिकारी तथा सामाजिक सक्रियता का कालखंड उनके जन्म वर्ष 1875 से 1900 (उनकी शहादत वर्ष) तक का रहा है।
झारखंड में, 9 जून को ——- के रूप में मनाया जाता है।
- संथाल दिवस
- भगत दिवस
- बिरसा दिवस
- झारखंड दिवस
Explanation:
- झारखंड में प्रतिवर्ष 9 जून को भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस को बिरसा दिवस के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मनाया जाता है।
झारखंड में बिरसा मुंडा के ‘ग्रेट टूमल्ट’ को इनमें से कौन-से नाम से जाना जाता है? ,
- भारत बचाओ आंदोलन
- धरती आबा का उलगुलान
- नर्मदा बचाओ आंदोलन
- अंग्रेजों भारत छोड़ो
Explanation:
- इतिहास में बिरसा मुंडा के इस महान विद्रोह (ग्रेट टूमल्ट) को ‘धरती आबा का उलगुलान’ के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है।
‘डोम्बारी बुरू’ किस आंदोलन से संबंधित है?
- संथाल हूल
- बिरसा उलगुलान
- ताना भगत आंदोलन
- हो विद्रोह
Explanation:
- खूंटी जिले का ‘डोम्बारी बुरू’ पहाड़ी स्थल बिरसा उलगुलान के समय ब्रिटिश सेना के साथ हुए भीषण संघर्ष और नरसंहार का गवाह रहा है, जो बिरसा उलगुलान से जुड़ा है।
निम्नलिखित किस स्थान पर अंग्रेजों ने जालियांवाला बाग की तर्ज पर गोलियाँ बरसाई थीं?
- डोम्बारी पहाड़
- कोकर
- जमकोपाई
- राँची
Explanation:
- खूंटी स्थित डोम्बारी पहाड़ पर भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में सभा कर रहे आदिवासियों पर अंग्रेजों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसे झारखंड का जालियांवाला बाग हत्याकांड कहा जाता है।
बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करने के लिए ब्रिटिश बलों ने एक पहाड़ी पर असीमित गोलीबारी की, जिसका नाम मुंडा के नाम पर टॉप्ड बुरू के रूप में मृतकों का टीला रखा गया। उस पहाड़ी का असल नाम क्या था जहां 1900 में यह घटना हुई थी?
- डोम्बारी पहाड़
- टैगोर हिल
- जमकोपाई
- कोल्हुआ हिल
Explanation:
- जनवरी 1900 में ब्रिटिश सेना द्वारा जिस ऐतिहासिक पहाड़ी पर क्रूर गोलीबारी की गई थी, उसका वास्तविक नाम डोम्बारी पहाड़ है।
मुण्डा बगावत किस प्रकार का आंदोलन है?
- सामाजिक सुधार आंदोलन
- कबालयी आंदोलन
- धार्मिक सुधार आंदोलन
- नगर अवज्ञा आंदोलन
Explanation:
- मुंडा बगावत (उलगुलान) मुख्य रूप से आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन की रक्षा के साथ-साथ समाज में फैली कुप्रथाओं को दूर करने वाला सामाजिक सुधार व क्रांतिकारी आंदोलन था।
बिरसा मुण्डा का उलगुलान विद्रोह में हुआ था।
- 1820
- 1832
- 1895
- 1945
Explanation:
- भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में उलगुलान विद्रोह की औपचारिक शुरुआत एवं धार्मिक-राजनीतिक बदलाव का दौर वर्ष 1895 में प्रारंभ हुआ था।
बिरसा के नेतृत्व में शुरू ‘उलगुलान’ का क्या मतलब है?
- काश्तकारी अधिनियम
- अनुयायी
- वन
- विद्रोह
Explanation:
- मुंडारी भाषा में ‘उलगुलान’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘विद्रोह’ या ‘महान हलचल’ होता है।
बिरसा मुंडा क्रांति का दूसरा नाम क्या है?
- हो आंदोलन
- हुल आंदोलन
- उलगुलान आंदोलन
- चेरो आंदोलन
Explanation:
- बिरसा मुंडा द्वारा ब्रिटिश शासन और महाजनों के खिलाफ छेड़े गए महाविद्रोह को उलगुलान आंदोलन के रूप में जाना जाता है।
निम्नलिखित में से कौन खरवार आंदोलन का नेता था?
- सिदो एवं कान्हू मुर्मू
- भागीरथ माँझी
- शेख भिखारी
- पाण्डेय गणपत राय
Explanation:
- संथाल परगना क्षेत्र में 1874 ई. में हुए प्रसिद्ध खरवार आंदोलन के प्रणेता व मुख्य नेता भागीरथ मांझी (बाबा) थे।
निम्नलिखित में से किस आंदोलन में लोगों को भूमि मालिकों पर भूमि कर देने के लिए नहीं कहा गया था?
- खरवार आंदोलन
- कोल विद्रोह
- लारका आंदोलन
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- खरवार आंदोलन के दौरान भागीरथ मांझी ने अपने अनुयायियों को अंग्रेजों और भूमि मालिकों को मालगुजारी (लगान/कर) देने से मना किया था और सत्य-अहिंसा पर जोर दिया था।
झारखंड में भागीरथ, दुबई गोसाई और पटेल सिंह के नेतृत्व में खरवार विद्रोह कब हुआ था?
- 1857
- 1865
- 1865
- 1874
Explanation:
- भागीरथ मांझी, दुबई गोसाई और पटेल सिंह के नेतृत्व में संगठित खरवार आंदोलन का मुख्य उत्कर्ष वर्ष 1874 माना जाता है।
बंगम मांझी नेता था:
- हरिबाबा आंदोलन
- सत्यधर्म
- सफाहोड़ आंदोलन
- सरदार आंदोलन
Explanation:
- बंगम मांझी संथाल समाज के धार्मिक व सामाजिक सुधार से जुड़े ‘सफाहोड़ आंदोलन’ के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।
सफाहोड़ आंदोलन किस आदिवासी समुदाय से संबंधित है?
- मुंडा
- हो
- संथाल
- खड़िया
Explanation:
- सफाहोड़ आंदोलन मुख्य रूप से संथाल जनजाति के बीच धार्मिक शुद्धता और रामनाम के जाप से जुड़े सुधारों को लेकर चलाया गया था।
सरदारी आंदोलन निम्न कारण से हुआ था?
- (a) ईसाई धर्मान्तरण तथा संसारी उरांव द्वारा आर्थिक असमानता
- (b) बेगार (बलात श्रम) लागू किये जाने के विरुद्ध कृषक असंतोष
- (c) बिचौलियों द्वारा गैरकानूनी ढंग से किराये में वृद्धि
- (b) एवं (c) दोनों
Explanation:
- सरदारी आंदोलन (मुलुकी लड़ाई) के मुख्य कारण आदिवासियों से जबरन बेगारी (बलात् श्रम) कराना तथा बिचौलियों/दिकुओं द्वारा लगान व किराये में अवैध वृद्धि करना था।
संथाल विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
- A.सिदो-कान्हू
- B.भैरव, चांद
- C.(a) और (b) दोनों
- D.दोनों में से कोई नहीं
Explanation:
- ऐतिहासिक संथाल विद्रोह (हूल) का नेतृत्व चार मुर्मू भाइयों—सिदो, कान्हू, चांद और भैरव द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
संथाल विद्रोह कब हुआ था?
- 1805
- 1855
- 1860
- 1880
Explanation:
- महाजनशाही और ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध ‘संथाल हूल’ (संथाल विद्रोह) की शुरुआत 30 जून 1855 को हुई थी।
निम्न में से कौन-सा विद्रोह सिदो तथा कान्हू से संबंधित है?
- संथाल क्रांति, 1855
- कॉल विद्रोह, 1820–37
- मुंडा विद्रोह, 1804-17
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- सिदो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता और महाजनों के विरुद्ध संथाल क्रांति (हूल) की शुरुआत 1855 में हुई थी।
1855 में लॉर्ड कॉर्नवालिस के स्थायी बंदोबस्त के विरुद्ध किसने युद्ध छेड़ा था?
- संथाल
- भील
- गोंड
- बिरहोर
Explanation:
- ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और स्थायी बंदोबस्त के शोषण के खिलाफ संथाल जनजाति के लोगों ने बड़े पैमाने पर सशस्त्र संघर्ष किया था।
झारखंड राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान देने वाले दो प्रसिद्ध भाई कौन थे?
- सुरजू भगत और लालू भगत
- तिलका मांझी और बिरसा मुंडा
- सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू
- जतरा उरांव और राम मांझी
Explanation:
- झारखंड के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय चेतना में संथाल विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अमर शहीद भाई सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।
1798 में, बीरभूम बांकुरा में …… हुआ था।
- भूमिज विद्रोह
- चेरो विद्रोह
- कोल विद्रोह
- पहाड़ियाँ विद्रोह
Explanation:
- इस कालखंड में अंग्रेजों की दमनकारी लगान नीतियों के विरुद्ध जंगल महल एवं बीरभूम-बांकुरा क्षेत्र में आदिवासी असंतोष और भूमिज विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी।
भूमिज विद्रोह के नेता कौन थे?
- तिलका माझी
- बिरसा मुंडा
- गंगा नारायण सिंह
- गणपत राय
Explanation:
- वीरभूम और धालभूम क्षेत्र में हुए 1831-33 के प्रसिद्ध भूमिज विद्रोह के मुख्य नायक गंगा नारायण सिंह थे।
गंगा नारायण के नेतृत्व में भूमिज विद्रोह किस स्थान पर हुआ था?
- देवघर
- वीरभूम (धालभूम / मानभूम क्षेत्र)
- हजारीबाग
- मेदिनीपुर
Explanation:
- गंगा नारायण सिंह के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक विद्रोह मुख्य रूप से वीरभूम और जंगल महल के मानभूम-धालभूम क्षेत्रों में फैला था।
1831-33 का भूमिज विद्रोह किनके नेतृत्व में था?
- तिलका माझी
- भूखन सिंह
- गंगा नारायण सिंह
- गणपत राय
Explanation:
- भूमिज वीरों द्वारा ब्रिटिश शासन और दीवान माधव सिंह के अत्याचारों के विरुद्ध गंगा नारायण सिंह के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया गया था जिसे ‘गंगा नारायण का हंगामा’ भी कहते हैं।
किस विद्रोह के परिणामस्वरूप 1833 में, एक नए प्रांतीय दक्षिण-पश्चिम सीमान्त एजेंसी का गठन हुआ था?
- भूमिज विद्रोह
- चेरो विद्रोह
- कोल विद्रोह
- पहाड़ियाँ विद्रोह
Explanation:
- व्यापक स्तर पर हुए कोल विद्रोह की समाप्ति और प्रशासनिक सुधार के उद्देश्य से ब्रिटिश सरकार ने 1833 में दक्षिण-पश्चिम सीमान्त एजेंसी (South-West Frontier Agency) का गठन किया था।
ब्रिटिश के विरुद्ध उरांव विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
- बुधु भगत
- जतरा भगत
- कान्हू-भगत
- रावल भगत
Explanation:
- ब्रिटिश हुकूमत और जागीरदारों के खिलाफ उरांव आदिवासियों की ओर से सशक्त प्रतिरोध एवं विद्रोह का नेतृत्व वीर बुधु भगत ने किया था।
कोल विद्रोह के प्रमुख नेता बुधु भगत … के रहने वाले थे।
- रामगढ़
- जामताड़ा
- सिलागाई (राँची)
- देवघर
Explanation:
- महान क्रांतिकारी और कोल विद्रोह के सेनानी बुधु भगत झारखंड के रांची जिले के अंतर्गत आने वाले सिलागाई गांव के रहने वाले थे।
1831-32 में कोल आंदोलन शुरू किया गया था?
- बुधु भगत
- जतरा भगत
- कान्हू-भगत
- रावल भगत
Explanation:
- वर्ष 1831-32 के दौरान छोटानागपुर में हुए कोल आंदोलन के प्रमुख सूत्रधारों व सेनानियों में बुधु भगत का नाम सर्वोपरि है।
अंग्रेजों के विरुद्ध 1831 के विद्रोह में निम्नलिखित में से कौन-से छोटानागपुर के कबीलों ने भाग लिया था?
- हो एवं मुण्डा
- उराँव एवं असुर
- लोहरा एवं बैगा
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- 1831 के कोल विद्रोह में छोटानागपुर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियों जैसे कोल, मुंडा, उरांव और हो आदि ने संयुक्त रूप से भाग लिया था।
अंग्रेजों के विरुद्ध 1831 के विद्रोह में से किस जनजाति का उत्तराधिकारी शामिल था?
- हो
- मुंडा
- a और b दोनों
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- कोल विद्रोह एक सामूहिक जनजातीय महाविद्रोह था जिसमें हो और मुंडा दोनों जनजातियों के योद्धाओं ने सहभागिता निभाई थी।
हो लोगों को ‘लरका कोल’ किसने कहा था?
- एस. आर. टिकेल
- एम.जी. हैलेट
- एस.सी. रॉय
- ई. लिस्टर
Explanation:
- ब्रिटिश प्रशासक और इतिहासकार एस. आर. टिकेल द्वारा सिंहभूम क्षेत्र की हो जनजाति के जुझारू स्वभाव के कारण उन्हें ‘लरका कोल’ (लड़ाकू कोल) कहा गया था।
1820-21 में मेजर रफसेज तथा 1837 में कैप्टन विल्किंसन के नेतृत्व में किस विद्रोह को दबा दिया गया था?
- तमार विद्रोह
- कोल विद्रोह
- हो विद्रोह
- मुंडा विद्रोह
Explanation:
- कोल्हान क्षेत्र में अंग्रेजों के बढ़ते प्रभुत्व के खिलाफ हुए हो विद्रोह को ब्रिटिश अधिकारियों (मेजर रफसेज और कैप्टन विल्किंसन) द्वारा बलपूर्वक दबाया गया था।
1820-21 में मेजर रफ्सेज़ पर ‘हो’ जनजाति के लोगों ने किस नदी के किनारे आक्रमण किया था?
- सोन
- दामोदर
- रोरो (रोरो नदी)
- स्वर्णरेखा
Explanation:
- चैबासा के पास रोरो नदी के तट पर हो जनजाति के स्वतंत्रताप्रेमी योद्धाओं ने मेजर रफ्सेज़ की सेना पर जोरदार आक्रमण किया था।
संथाल जनजातीय क्षेत्र के एक बहादुर संथाल नेता तिलका मांझी ने किसके खिलाफ विद्रोह किया था?
- मराठा
- मुगलों
- जमींदारों और पुर्तगाली सरकार
- जमींदारों और ब्रिटिश सरकार
Explanation:
- आदिवासियों की जमीनों की लूट और शोषण करने वाले स्थानीय जमींदारों तथा ब्रिटिश सरकार की दमनकारी व्यवस्था के विरुद्ध तिलका मांझी ने जंग छेड़ी थी।
पहला जनजातीय नेता, जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठाया था?
- बिरसा मुण्डा
- बुद्ध भगत
- तिलका मांझी (जबरा पहाड़िया)
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ संगठित सशस्त्र संघर्ष का सूत्रपात करने वाले प्रथम आदिवासी जननायक तिलका मांझी थे।
1771 में संथाल जनजातीय क्षेत्र में किसने जमींदारों और ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध प्रथम विद्रोह का नेतृत्व किया था?
- बिरसा मुण्डा
- बुद्ध भगत
- तिलका मांझी
- कुंवर सिंह
Explanation:
- वर्ष 1771 के आसपास ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध पहाड़िया व संथाल बहुल क्षेत्र में सबसे पहले तिलका मांझी ने मोर्चा खोला था।
वर्ष 1785 में, निम्नलिखित में से किस क्रांतिकारी नेता को फांसी पर लटका दिया गया था?
- बिरसा मुण्डा
- बुद्ध भगत
- तिलका मांझी
- कुंवर सिंह
Explanation:
- भागलपुर में अंग्रेजों के कलेक्टर ऑगस्ट्स क्लीवलैंड को मारने और सफल विद्रोह के उपरांत वर्ष 1785 में जनवरी माह में तिलका मांझी को भागलपुर में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था।
किसके नेतृत्व में 1780-1785 के दौरान संचालित जनजातीय विद्रोह ने भागलपुर में ब्रिटिश सेना प्रमुख को चोटिल करने और उसे मौत के घाट उतारने में सफलता प्राप्त की थी?
- बिरसा मुण्डा
- बुद्ध भगत
- तिलका मांझी
- कुंवर सिंह
Explanation:
- तिलका मांझी ने अपने तीर-धनुष से भागलपुर के ब्रिटिश कलेक्टर ऑगस्ट्स क्लीवलैंड को गंभीर रूप से घायल कर दिया था, जिससे बाद में उसकी मृत्यु हो गई थी।
1795 का मुंडा विद्रोह ………. के नेतृत्व में हुआ था।
- विष्णु मानकी
- बुद्ध भगत
- भोलानाथ सिंह
- कुंवर सिंह
Explanation:
- वर्ष 1795 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान मुंडा विद्रोह का नेतृत्व प्रमुख रूप से भोलानाथ सिंह द्वारा किया गया था।
झारखंड के महत्वपूर्ण आदिवासी आंदोलन और उनके साथ जुड़े प्रमुख हस्तियाँ नीचे दिए गए हैं। गलत मिलान का पता लगाएँ।
- बीरभूम के गंगा नारायण के नेतृत्व में भूमिज विद्रोह
- भूखन सिंह के नेतृत्व में पलामू में चेरो विद्रोह
- भागीरथ मांझी के नेतृत्व में खेरवार विद्रोह
- विष्णु मानकी के नेतृत्व में संथाल विद्रोह
Explanation:
- यह विकल्प गलत है क्योंकि संथाल विद्रोह का नेतृत्व सिदो, कान्हू, चांद और भैरव ने किया था, जबकि विष्णु मानकी का संबंध अन्य विद्रोहों से है।
निम्न में से कौन, अंग्रेजों के दमनकारी शासन के विरुद्ध लड़ा था?
- बिरसा मुण्डा
- सिदो मुर्मू
- कान्हू मुर्मू
- ये सभी
Explanation:
- झारखंड के ये सभी महान जननायक (बिरसा मुंडा, सिदो मुर्मू एवं कान्हू मुर्मू) अंग्रेजों और उनके सहयोगियों के दमनकारी शासन के खिलाफ आजीवन संघर्ष करते रहे थे।
‘हिल एसेंबली प्लान’ किसके द्वारा आदिवासी उन्नति के लिए किया गया था?
- टि. विल्किंसन
- क्लीवलैंड (ऑगस्ट्स क्लीवलैंड)
- लॉर्ड विलियम बेंटिक
- लॉर्ड मैकाले
Explanation:
- ब्रिटिश अधिकारी ऑगस्ट्स क्लीवलैंड द्वारा संथाल परगना क्षेत्र की पहाड़िया जनजाति को मुख्यधारा में लाने और शांति स्थापित करने के लिए ‘हिल एसेंबली प्लान’ तैयार किया गया था।
झारखण्ड में धाल विद्रोह कब शुरू हुआ था ?
- 1770 ई. में
- 1768 ई. में
- 1767 ई. में
- 1765 ई. में
Explanation:
- झारखण्ड में धाल विद्रोह (Dhalbhum Revolt) अंग्रेजों के खिलाफ होने वाला प्रथम विद्रोह माना जाता है।
- शुरुआत और अवधि: यह विद्रोह 1767 ईस्वी में शुरू हुआ था और लगभग 10 वर्षों तक यानी 1777 ईस्वी तक चला।
- क्षेत्र: यह विद्रोह झारखण्ड के सिंहभूम (विशेषकर धालभूम) क्षेत्र में हुआ था।
- मुख्य नेतृत्वकर्ता: इसका नेतृत्व धालभूम के बेदखल राजा जगन्नाथ धाल ने किया था।
- कारण: ईस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेजों) द्वारा धालभूम क्षेत्र पर जबरन अधिकार करने और जगन्नाथ धाल को हटाकर नींबू धाल को राजा बनाने के विरोध में यह विद्रोह भड़का था।
- परिणाम: 10 वर्षों के कड़े संघर्ष और विद्रोह को दबाने में नाकाम रहने के बाद, ब्रिटिश सरकार ने आखिरकार 1777 ईस्वी में जगन्नाथ धाल को दोबारा धालभूम का राजा स्वीकार कर लिया।
- धाल विद्रोह को दबाने और धालभूम क्षेत्र पर नियंत्रण पाने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने दो प्रमुख ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों को भेजा था:
- लेफ्टिनेंट फर्गुसन (Lieutenant Fergusson): 1767 ईस्वी में सबसे पहले लेफ्टिनेंट फर्गुसन के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना को धालभूम पर कब्जा करने के लिए भेजा गया था। उन्होंने ही मिदनापुर की ओर से सिंहभूम क्षेत्र में प्रवेश किया था और महल पर कब्जा किया था।
- कैप्टन मॉर्गन (Captain Morgan): जब जगन्नाथ धाल के नेतृत्व में आदिवासियों और स्थानीय लोगों का विद्रोह बहुत उग्र हो गया, तब फर्गुसन की मदद के लिए और विद्रोह को कुचलने के लिए कैप्टन मॉर्गन को भेजा गया।
झारखण्ड का पहला चुआड़ विद्रोह कब हुआ था?
- 1770 ई. में
- 1769 ई. में
- 1767 ई. में
- 1765 ई. में
Explanation:
- पहला चुआड़ विद्रोह 1769 में शुरू हुआ, जो अलग-अलग चरणों में 1805 तक चलता रहा।
- पहले चरण (1769) का नेतृत्व रघुनाथ महतो ने किया था। बाद के चरणों में श्याम गंजम, सुबल सिंह, जगन्नाथ पातर और रानी शिरोमणि जैसे नेताओं ने भी इसकी कमान संभाली।
- “चुआड़” शब्द का अर्थ: अंग्रेज और बाहरी लोग यहाँ के मूल निवासी भूमिज, कुड़मी और मुंडा आदिवासियों को अपमानजनक रूप से ‘चुआड़’ (या चोआड़) कहते थे, जिसका अर्थ ‘लुटेरा’ या ‘नीच’ होता था। आदिवासियों ने इसे अपनी अस्मिता की लड़ाई बना लिया।
- रघुनाथ महतो का नारा: इस विद्रोह के दौरान रघुनाथ महतो ने एक प्रसिद्ध नारा दिया था: “अपना गाँव, अपना राज; दूर भगाओ विदेशी राज।”
- परिणाम: इस व्यापक विद्रोह के कारण ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और 1805 में ‘जंगल महल जिला’ (Jungle Mahal District) का गठन करना पड़ा, जिसके तहत आदिवासियों की कुछ पुरानी व्यवस्थाओं और अधिकारों को वापस बहाल किया गया।
दामिन-ए-कोह की घोषणा कब हुई?
- 1822
- 1823
- 1824
- 1825
Explanation:
- संथाल परगना क्षेत्र में पहाड़ी इलाकों को संरक्षित करने और संथालों को बसाने के उद्देश्य से ‘दामिन-ए-कोह’ (सरकारी भू-भाग) की सीमांकन व घोषणा वर्ष 1824 में की गई थी।
निम्न में से कौन-सा मिलान गलत है?
- 1873-74 – खरवार विद्रोह
- 1832-33 – बीरभूम का भूमिज विद्रोह
- 1822-23 – मानभूम का भूमिज विद्रोह
- 1855-60 – सिदो और कान्हू आंदोलन
Explanation:
- यह मिलान गलत है क्योंकि भूमिज विद्रोह मुख्य रूप से 1831-33 के दौरान गंगा नारायण सिंह के नेतृत्व में हुआ था, न कि 1822-23 में।
इनमें से कौन-सा विद्रोह 1875 में झारखंड में फूटा था?
- संथाल विद्रोह
- बिरसा विद्रोह
- तिलका माँझी विद्रोह
- इनमें कोई नहीं
Explanation:
- वर्ष 1875 में झारखंड में इनमें से कोई प्रमुख विद्रोह नहीं फूटा था (यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा का जन्म वर्ष है)। अतः सही उत्तर ‘इनमें कोई नहीं’ है।
जनजातीय आंदोलन का मुख्य कारण क्या था?
- निवासियों के बीच भेदभाव
- गैरकानूनी कोयला खनन
- दमन किए लोगों का शोषण
- इनमें से कोई नहीं (मुख्य कारण ब्रिटिश भू-राजस्व नीति, दिकुओं व महाजनों द्वारा शोषण था)
Explanation:
- झारखंड के जनजातीय आंदोलनों के मूल कारणों में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियां, भूमि से बेदखली, बेगार प्रथा तथा महाजनों/दिकुओं का आर्थिक शोषण शामिल थे, जो दिए गए विकल्पों में सीधे तौर पर मेल नहीं खाते।
छोटा नागपुर की आदिवासी क्रांति कब हुई थी?
- 1858-1859 (या तदनुसार ब्रिटिश काल के विभिन्न चरण, विशेषतः कोल/मुंडा व सरदारी संघर्ष से संबद्ध)
- 1889
- 1820
- 1913-1914
Explanation:
- छोटानागपुर क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध फैले असंतोष और क्रांतियों की श्रृंखला में यह कालखंड प्रशासनिक फेरबदल और आदिवासी संघर्षों से जुड़ा रहा है।
तिलका मांझी को अंग्रेजों द्वारा ——– वर्ष में पकड़ा गया था?
- 1770 ई. में
- 1786 ई. में
- 1767 ई. में
- 1785 ई. में
Explanation:
- धोखे से पकड़े जाने के पश्चात महान क्रांतिकारी तिलका मांझी को वर्ष 1785 के शुरुआती महीनों में गिरफ्तार कर लिया गया था।
ब्रिटिश द्वारा तिलका माँझी को फाँसी दी गई थी – DY. Collector – 2013
- 1770 ई. में
- 1786 ई. में
- 1767 ई. में
- 1785 ई. में
Explanation:
- स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद तिलका मांझी को भागलपुर में वर्ष 1785 में सरेआम फांसी पर लटका दिया गया था।
बयान पर विचार कर कथन का सही क्या है?
I. अंग्रेजों के विद्रोह के लिए तिलका मांझी प्रथम विद्रोहियों में शामिल थे।
II. उनके खिलाफ विरोध करते हुए उन्हें एक ब्रिटिश अधिकारी ने गोली मार दी थी।
III. तत्कालीन शहीद की स्मृति को मनाने के लिए ‘बाबा चौक’ में जगह का नाम दिया गया है।
- प्रथम और द्वितीय
- द्वितीय और तृतीय
- प्रथम और तृतीय
- इनमें से कोई नहीं
Explanation:
- पहला और तीसरा कथन ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं; तिलका मांझी ने अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे पहले सशस्त्र संघर्ष किया था और उनकी शहादत की स्मृति में भागलपुर के चौक का नामकरण किया गया है।
तिलका मांझी ने आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना प्रमुख को घायल करने में कामयाब रहे। वर्ष 1785 में, तिलका मांझी को किस शहर में फांसी पर लटका दिया गया था?
- भागलपुर
- रांची
- राजमहल
- हजारीबाग
Explanation:
- तिलका मांझी को उनके संघर्ष के केंद्र रहे भागलपुर शहर में एक वटवृक्ष पर लटकाकर फांसी दी गई थी।
अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे लम्बा, वृहत्तम और ‘सबसे खूनी आदिवासी विद्रोह’ कौन-सा है?
- तमाड़ विद्रोह (या तमाड़ क्षेत्र का लंबा आदिवासी प्रतिरोध)
- खरवार विद्रोह
- संथाल विद्रोह
- बीरभूम का बांकुड़ा में चुआड़ विद्रोह
Explanation:
- छोटानागपुर के तमाड़ क्षेत्र में जमींदारों और अंग्रेजों के विरुद्ध हुआ तमाड़ विद्रोह सबसे लंबे समय तक (लगभग 1782 से 1821 के बीच कई चरणों में) चलने वाला व्यापक आदिवासी संघर्ष था।
पहाड़िया विद्रोह में किस रानी ने सहयोग दिया था ?
- महेशपुर की रानी
- पंचमा की रानी
- रंका की रानी
- रामगढ़ की रानी
Explanation:
- पहाड़िया विद्रोह (1772–1782) में अंग्रेज़ों के खिलाफ विद्रोहियों का सहयोग और नेतृत्व करने वाली प्रमुख हस्ती रानी सर्वेश्वरी थीं।
- रानी सर्वेश्वरी संथाल परगना के सुल्तानाबाद (वर्तमान दुमका, झारखंड) की रानी थीं।
- उन्होंने 1781–1782 के दौरान ‘दामिन-इ-कोह’ (पहाड़ी भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित करने) के नियम का कड़ा विरोध किया।
- विद्रोह को दबाने के बाद अंग्रेज़ों ने उन्हें 1783 में गिरफ्तार कर लिया, उनकी ज़मींदारी छीन ली और उन्हें भागलपुर जेल भेज दिया गया, जहाँ 6 मई 1807 को उनका निधन हो गया।
